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  • Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि

    Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Tensions), होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद और इससे क्रूड की कीमतों (Crude Prices) में लगी आग के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. दुनिया के तमाम देशों में इससे उपजे तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) से हाहाकार मचा है और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ रही है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, शुक्रवार को ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. हालांकि, ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है और करीब चार साल बाद इसमें इजाफा हुआ है।

    लेकिन बड़े ग्लोबल संकटों के बावजूद भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक ताजा उदाहरण देश के निर्यात के आंकड़े हैं. तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल महीने में बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा है, जबकि आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है. कुल निर्यात की बात करें, तो ये 80.80 अरब डॉलर रहा है।

    इन चीजों का खूब हुआ निर्यात
    कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ रहा है. अप्रैल में ये 13.78 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा अप्रैल में भारतीय आयात भी सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया।

    इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. अनाजों के निर्यात में सबसे अधिक 210.19% का उछाल आया, इसके बाद मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 48.03% और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में 40.31% की तेजी आई. पेट्रोलियम प्रोडक्ट, हस्तशिल्प, मरीन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं और कॉफी में भी ग्रोथ देखने को मिली है.


    होर्मुज संकट का यहां पड़ा असर

    अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा. होर्मुज संकट के असर की बात करें, तो राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 28% घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 5.78 अरब डॉलर था. इस क्षेत्र से आयात अप्रैल में 31.64% घटा और 10.47 अरब डॉलर रह गया।


    दुनिया में हाय-तौबा, भारत ने ऐसा संभाला

    आयात-निर्यात के इन ताजा आंकड़ों को देखकर साफ हो जाता है कि ट्रंप का टैरिफ अटैक हो या फिर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पैदा हुआ तेल-गैस संकट. मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) काम कर रहा है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

    अमेरिका-ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक में हायतौबा मची नजर आई. लेकिन देश के आयात-निर्यात को सुचारू रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाए, इनमें आयात डेस्टिनेशंस की संख्या बढ़ाने के साथ ही ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय निर्यात के लिए नए बाजारों तक पहुंच शामिल है. बीते कुछ समय में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से बड़े FTA साइन किए हैं।

  • बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच टाइटन पर निवेशकों का भरोसा कायम, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच टाइटन पर निवेशकों का भरोसा कायम, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट

    नई दिल्ली । सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय ज्वैलरी बाजार की बड़ी कंपनियों की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। खासकर Titan Company ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    हालिया तिमाही परिणामों के बाद कंपनी को लेकर निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई है। कंपनी ने न केवल मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है, बल्कि राजस्व में भी प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है। यही कारण है कि इसके शेयर को लेकर बाजार में नई उम्मीदें पैदा हुई हैं।

    कंपनी का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष इसका ज्वैलरी बिजनेस माना जा रहा है, जो लगातार नए ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा कंपनी अब केवल पारंपरिक सोने और हीरे के आभूषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्टडेड ज्वैलरी, प्रीमियम कलेक्शन, डिजिटल ज्वैलरी और लैब-ग्रोथ डायमंड जैसे आधुनिक सेगमेंट में भी तेजी से विस्तार कर रही है। इस विविधता ने कंपनी की पकड़ को और मजबूत बना दिया है।

    साथ ही वॉच और अन्य उभरते कारोबार भी कंपनी की कुल ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बदलते उपभोक्ता रुझानों के बीच ब्रांडेड ज्वैलरी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा फायदा टाइटन को मिल रहा है।

    हालांकि शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और हाल ही में शेयर में गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत ब्रांड वैल्यू और स्थिर बिजनेस मॉडल कंपनी को आने वाले वर्षों में और ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय ज्वैलरी सेक्टर में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और टाइटन इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है। शहरीकरण, बढ़ती आय और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स के प्रति झुकाव ने इस सेक्टर को नई गति दी है।

  • भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर सुधार, अप्रैल में PMI ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

    भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर सुधार, अप्रैल में PMI ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्ली।भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार मजबूती की ओर बढ़ रहा है और ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि औद्योगिक गतिविधियों में स्थिर सुधार देखा जा रहा है। अप्रैल महीने में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के 53.9 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से नए ऑर्डर में बढ़ोतरी, उत्पादन में तेजी और रोजगार के अवसरों में सुधार के कारण सामने आई है।
    अप्रैल के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। खासकर निर्यात के क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है, जहां पिछले कई महीनों की तुलना में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसका संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे उद्योग जगत को नई ऊर्जा मिल रही है।
    हालांकि, इस सकारात्मक रुझान के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और अनिश्चितताओं, विशेषकर मध्य पूर्व में चल रहे हालात, का असर लागत पर दिखाई दे रहा है। इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन खर्च में भी इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आउटपुट कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जो पिछले कई महीनों में सबसे अधिक मानी जा रही है।
    इसके बावजूद उत्पादन गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं। कंपनियों ने बताया है कि घरेलू मांग और विज्ञापन गतिविधियों ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया है। हालांकि, प्रतिस्पर्धा का दबाव और कुछ ग्राहकों द्वारा ऑर्डर को अंतिम रूप देने में देरी के कारण विकास की गति थोड़ी प्रभावित हुई है।
    उद्योग जगत के प्रतिभागियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद भविष्य को लेकर भरोसा बना हुआ है। कंपनियां आने वाले महीनों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही हैं और नए निवेश तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि, इस विश्वास में पिछले महीने की तुलना में हल्की कमी जरूर देखी गई है, लेकिन यह अभी भी एक सकारात्मक स्तर पर बना हुआ है।
    कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एक स्थिर और मजबूत विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। घरेलू मांग, निर्यात में सुधार और उत्पादन गतिविधियों की निरंतरता इस वृद्धि के प्रमुख आधार हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र में और भी मजबूती देखने को मिल सकती है।