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  • भूपेंद्र पटेल ने न्यू जर्सी अक्षरधाम को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सेवा का वैश्विक प्रकाशस्तंभ बताया, स्वयंसेवकों की सराहना की

    भूपेंद्र पटेल ने न्यू जर्सी अक्षरधाम को भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सेवा का वैश्विक प्रकाशस्तंभ बताया, स्वयंसेवकों की सराहना की

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान न्यू जर्सी के रॉबिन्सविल स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण अक्षरधाम का दौरा किया। उन्होंने अक्षरधाम को भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक सेवा तथा स्वयंसेवकों के समर्पण का प्रभावशाली वैश्विक प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा।

    अक्षरधाम पहुंचने पर बीएपीएस के संतों ने भूपेंद्र पटेल का स्वागत किया। इस दौरान वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के सचिव विक्रांत पांडे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर की वास्तुकला और वहां संचालित गतिविधियों के बारे में जानकारी ली।

    भूपेंद्र पटेल ने निर्माणाधीन अक्षरधाम संग्रहालय का विशेष भ्रमण भी किया। उन्हें बताया गया कि भारतीय विरासत को समर्पित यह संग्रहालय अमेरिका में अपनी तरह के शुरुआती हिंदू सांस्कृतिक संग्रहालयों में शामिल होगा। संग्रहालय में भारत की गौरवशाली विरासत को आधुनिक और दृश्य माध्यमों के जरिए प्रस्तुत करने की योजना है।

    संग्रहालय में 12 वास्तुशिल्प प्रतिकृतियां, 40 मल्टीमीडिया प्रस्तुतियां, 85 डायोरामा और 200 सजीव प्रतिमाओं के माध्यम से भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी प्रस्तुति विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि के लोगों को भारतीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    उन्होंने आस्था, सद्भाव, करुणा, पारिवारिक मूल्यों और निःस्वार्थ सेवा जैसे विषयों को सार्वभौमिक महत्व वाला बताया। अक्षरधाम मंदिर की सूक्ष्म नक्काशी, विशाल स्वरूप और शांत वातावरण से भी मुख्यमंत्री प्रभावित हुए। संग्रहालय के भ्रमण के दौरान उन्होंने कहा कि यहां भारत की प्राचीन संस्कृति को प्रभावशाली तरीके से पुनर्जीवित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने अक्षरधाम में सेवा कर रहे स्वयंसेवकों से भी मुलाकात की। उन्होंने स्वयंसेवकों के अनुशासन, विनम्रता, आतिथ्य और सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि अक्षरधाम के निर्माण में योगदान देने वाले बीएपीएस स्वयंसेवकों की मेहनत और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दे सकता है।

    भूपेंद्र पटेल ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से से यहां आने वाला व्यक्ति शांति का अनुभव कर सकता है। उनके अनुसार अक्षरधाम केवल एक धार्मिक परिसर नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति, अध्यात्म और मानवीय मूल्यों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है।

    मुख्यमंत्री की अमेरिका यात्रा वाइब्रेंट गुजरात पहल से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा है। करीब तीन दशकों में गुजरात के किसी मुख्यमंत्री की यह पहली अमेरिका यात्रा बताई गई है। अक्षरधाम के अनुभव का उल्लेख करते हुए पटेल ने कहा कि उनकी यात्रा का केंद्र वाइब्रेंट गुजरात है, लेकिन अक्षरधाम में भारत की संस्कृति स्वयं जीवंत रूप में दिखाई देती है।

    इस अवसर पर अमेरिका के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों और सामुदायिक नेताओं ने भी मुख्यमंत्री का स्वागत किया। यात्रा के दौरान बीएपीएस के सांस्कृतिक संरक्षण के साथ शिक्षा, मानवीय राहत, स्वास्थ्य सेवा, पर्यावरण जागरूकता, युवा विकास और सामाजिक सेवा से जुड़े वैश्विक योगदान को भी रेखांकित किया गया।

    भूपेंद्र पटेल ने अपने अनुभव को प्रेरणादायक और आध्यात्मिक रूप से सुखद बताया। उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि विदेशों में रहने वाले भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवित रखने में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सभी की शांति, भलाई और प्रगति की कामना की।

  • भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    भूपेंद्र पटेल सैन फ्रांसिस्को पहुंचे, वाइब्रेंट गुजरात 2027 से पहले निवेशकों और टेक्नोलॉजी लीडर्स से करेंगे अहम मुलाकातें

    नई दिल्ली । गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सोमवार को सैन फ्रांसिस्को पहुंच गए। उनके साथ राज्य का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी अमेरिका पहुंचा है। यह दौरा गुजरात में विदेशी निवेश आकर्षित करने और जनवरी 2027 में प्रस्तावित वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    सैन फ्रांसिस्को पहुंचने पर गुजराती समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद पटेल अपने अमेरिकी कार्यक्रमों की शुरुआत सैन फ्रांसिस्को में गुजराती समुदाय के सदस्यों के साथ बैठक से करेंगे। इस दौरान गुजरात के आर्थिक विकास, निवेश की संभावनाओं और राज्य के साथ वैश्विक कारोबारी समुदाय के संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत होने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री का यह विदेश दौरा 17 से 24 अगस्त तक अमेरिका और कनाडा में चलेगा। अमेरिकी चरण के दौरान सैन फ्रांसिस्को के अलावा वाशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क में भी निवेशकों, उद्योग संगठनों, तकनीकी क्षेत्र के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल कनाडा के टोरंटो जाएगा।

    दौरे के दौरान राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस और आमने-सामने की कारोबारी बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य में विदेशी कंपनियों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी जाएगी। विशेष रूप से विनिर्माण, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर जोर रहने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री के साथ गुजरात सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी दौरे पर हैं। प्रतिनिधिमंडल में मुख्य सचिव एम.के. दास, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी. नटराजन, उद्योग एवं खान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव ममता वर्मा, प्रधान सचिव संजीव कुमार और मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. विक्रांत पांडे शामिल हैं।

    इस यात्रा में गुजरात के व्यापार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है। उद्योग प्रतिनिधिमंडल में 22 कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें विनिर्माण, केमिकल, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हैं। इससे सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ उद्योग जगत की सीधी भागीदारी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट 2027 को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा राज्य की निवेश रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जनवरी 2027 में होने वाले अगले संस्करण से पहले गुजरात सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योग समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रही है।

    बताया जा रहा है कि 25 से अधिक वर्षों के बाद गुजरात के किसी मौजूदा मुख्यमंत्री का यह पहला आधिकारिक अमेरिका दौरा है। ऐसे में इस यात्रा को राज्य सरकार की वैश्विक निवेश पहुंच बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

    गुजरात सरकार का लक्ष्य विदेशी निवेश के साथ-साथ राज्य के उद्योगों को वैश्विक कारोबारी नेटवर्क से जोड़ना भी है। अमेरिका और कनाडा में होने वाली बैठकों के दौरान संभावित निवेश, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी सहयोग और गुजरात में नई परियोजनाओं की संभावनाओं पर बातचीत होगी।

    मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राज्य सरकार वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण की तैयारियों को गति दे रही है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के साथ शुरुआती बातचीत से संभावित भागीदारी और निवेश प्रस्तावों को समिट से पहले आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। इससे गुजरात की औद्योगिक और निवेश संबंधी प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में भी मदद मिलने की संभावना है।

  • गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा

    गुजरात में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों के लिए बनेगा विशेष प्रतिबंधित बाड़ा, प्राकृतिक माहौल में होगी निगरानी और सुरक्षा


    नई दिल्ली ।
    गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दिशा में वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विभाग ने अमरेली जिले के धारी के पास स्थित आंबरडी सफारी पार्क में इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को रखने के लिए लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में एक विशेष प्रतिबंधित बाड़ा विकसित करने का काम शुरू किया है। इस क्षेत्र को इस तरह तैयार किया जाएगा कि शेरों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा वातावरण उपलब्ध हो सके और उनकी गतिविधियों पर सुरक्षित तरीके से निगरानी भी रखी जा सके। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य ऐसे शेरों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखते हुए उनके संरक्षण और प्रबंधन के बीच संतुलन कायम करना है।

    गुजरात सरकार के वन विभाग की ओर से यह कदम शेरों की बढ़ती आबादी के साथ मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ती संभावित टकराव की स्थिति को देखते हुए उठाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार शेरों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। हर वर्ष 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व शेर दिवस भी शेरों की सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

    वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आंबरडी सफारी पार्क में विशेष बाड़े के लिए तारबंदी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं का काम शुरू कर दिया गया है। इस क्षेत्र में ऐसे शेरों को रखा जाएगा जिनका व्यवहार इंसानों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर चुका है। उन्हें सामान्य वन क्षेत्र या आबादी के नजदीक छोड़ने के बजाय नियंत्रित क्षेत्र में रखा जाएगा, ताकि शेरों की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके। प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध होने से इन जानवरों को लंबे समय तक अपेक्षाकृत बेहतर परिस्थितियों में रखने में मदद मिल सकती है।

    वन्यजीव प्रबंधन में स्थानांतरण एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया मानी जाती है। जब कोई जंगली जानवर भोजन, पानी या अन्य कारणों से आबादी वाले क्षेत्र में पहुंच जाता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़कर उपयुक्त वन क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाता है। घायल या बीमार वन्यजीवों के उपचार, उनके लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराने और कुछ परिस्थितियों में आबादी प्रबंधन के लिए भी स्थानांतरण किया जाता है। गुजरात में शेरों और तेंदुओं के अलावा मगरमच्छ जैसे वन्यजीवों को भी परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाता रहा है।

    आंबरडी सफारी पार्क इस पूरी योजना के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गिर के प्राकृतिक पर्यावरण से जुड़ा प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्र है। लगभग 365 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस पार्क में एशियाई शेरों के साथ तेंदुए, चीतल, नीलगाय, चिंकारा, मोर और कई अन्य पक्षियों को देखा जा सकता है। वर्ष 2017 में शुरू किए गए इस पार्क का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ लोगों को प्राकृतिक पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति जागरूक करना भी रहा है। यहां विकसित सफारी सुविधाओं के कारण पर्यटकों को गिर क्षेत्र के वन्यजीवन को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

    नए प्रतिबंधित बाड़े के निर्माण से शेर संरक्षण की व्यवस्था को एक अतिरिक्त आधार मिलने की उम्मीद है। मानव बस्तियों में बार-बार पहुंचने या इंसानों पर हमला करने वाले शेरों को अलग और नियंत्रित वातावरण में रखने से संभावित संघर्ष को कम किया जा सकता है। साथ ही, वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से ऐसे शेरों के व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखना भी संभव होगा। गुजरात की यह पहल शेरों के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज

    दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में आठ वर्षों से फरार चल रहे पिता-पुत्र को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। लगातार की जा रही तलाश के बावजूद पुलिस उनके करीब नहीं पहुंच पा रही थी लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड ऐसा सुराग बना जिसने उनकी फरारी का अंत कर दिया।

    महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।

    मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

    अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।

  • गुजरात से असम तक… भारी बारिश से कई राज्यों में तबाही…केन्द्र ने जारी किए 2,117 करोड़ रुपये

    गुजरात से असम तक… भारी बारिश से कई राज्यों में तबाही…केन्द्र ने जारी किए 2,117 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    मूसलाधार मानसूनी बारिश (Monsoon rains), बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन की घटनाओं से देशभर में तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य आपका राहत कोष से बाढ़ प्रभावित सात राज्यों के लिए 2,117 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh), ओडिशा (Odisha), नगालैंड (Nagaland), अरुणाचल प्रदेश, असम, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।

    जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में शुक्रवार की देर रात बादल फटने के बाद पहाड़ी से आए मलबे और पत्थरों से आबादी वाले क्षेत्र में कई दुकानों, घरों को नुकसान पहुंचा और वाहन दब गए।मलबा आने से किश्तवाड़-अनंतनाग राष्ट्रीय राजमार्ग भी कुछ देर के लिए बंद रहा। अमरनाथ यात्रा भी बंद है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के बंद होने से फंसे 2,200 लोगों को तीन विशेष ट्रेनें चलाकर निकाला गया।

    केरल में भारी बारिश के बाद कई जगह हुए भूस्खलन में छह लोगों की मौत हो गई है और छह लोग लापता हैं। राज्य भर में 65 राहत शिविर खोले गए हैं, जिनमें 1,465 लोगों ने शरण ली है। 12 जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जिसको देखते हुए 2 अगस्त को होने वाली राज्य पात्रता परीक्षा को स्थगित कर दिया गया है।


    पूरब से पश्चिम तक तबाही का मंजर

    हिमाचल प्रदेश: कुमारसैन में भारी बारिश के बाद हुए भूस्खलन से एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया। धर्मशाला के समीप भूस्खलन की चपेट में आने से दो युवक घायल हो गए, जिनमें एक की हालत गंभीर है।
    – मणिपुर-असम: चुराचांदपुर जिले में भारी बारिश के बाद लानवा नदी आई बाढ़ में एक व्यक्ति बह गया। असम में बाढ़ से अब तक 82 लोगों की मौत हुई है और 1.93 लाख लोग प्रभावित।
    – गुजरात: दक्षिण और मध्य गुजरात में मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति के बाद 27 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
    – ओडिशा: महानदी का जल स्तर बढ़ने के बाद हीराकुंड बांध के 22 गेट खोल दिए गए हैं और 10 जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। बाढ़ से 8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

  • गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू

    गुजरात के जूनागढ़ में लोहे के गेट में फंसा शेर, उल्टा लटका, वन विभाग ने ऐसे किया रेस्क्यू


    जूनागढ़। गुजरात के जूनागढ़ शहर में एक एशियाई शेर लोहे के गेट को पार करने के प्रयास में फंस गया। पिछला पैर सलाखों के बीच अटकने से वह खुद को छुड़ा नहीं सका और कुछ समय तक गेट पर उल्टा लटका रहा। सूचना मिलने पर वन विभाग और सक्करबाग जू की रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

    वन विभाग के अनुसार, ग्रोफेड क्षेत्र में स्थित एक पुरानी मिल के परिसर के पास तड़के करीब 1 से 2 वर्ष का नर शेर घूम रहा था। गेट लांघने की कोशिश के दौरान उसका पिछला पैर लोहे की सलाखों के बीच फंस गया। बाहर निकलने के लिए उसने काफी प्रयास किए, लेकिन हर कोशिश के साथ उसकी स्थिति और कठिन होती गई।

    वन विभाग ने संभाला मोर्चा
    घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और सक्करबाग जू की विशेषज्ञ रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। सबसे पहले आसपास का क्षेत्र खाली कराया गया, ताकि बचाव अभियान के दौरान किसी प्रकार का खतरा न रहे। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शेर को सावधानीपूर्वक सलाखों से मुक्त कराया गया।

    घायल शेर का कराया गया उपचार
    रेस्क्यू के बाद शेर को सक्करबाग जू ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। वन विभाग के मुताबिक, शेर के पिछले पैर में चोट आई है, लेकिन उसकी स्थिति फिलहाल स्थिर है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और लगातार उपचार किया जा रहा है।

    वन अधिकारियों का कहना है कि यदि सूचना समय पर नहीं मिलती और रेस्क्यू में देरी होती, तो शेर की चोट गंभीर हो सकती थी। समय रहते बचाव अभियान शुरू होने से बड़ा हादसा टल गया।

    आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं शेर
    गिर और जूनागढ़ क्षेत्र एशियाई शेरों का प्राकृतिक आवास है। भोजन की तलाश या अपने क्षेत्र से भटकने के कारण कई बार शेर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में पुराने ढांचे, लोहे के गेट, तार और गड्ढे जैसे अवरोध वन्यजीवों के लिए खतरा बन जाते हैं। फिलहाल घायल शेर का इलाज जारी है और वन विभाग उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

  • 16,086 मेगावाट क्षमता और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे, केंद्र ने जारी किए आंकड़े

    16,086 मेगावाट क्षमता और रिकॉर्ड बिजली उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात सबसे आगे, केंद्र ने जारी किए आंकड़े

    नई दिल्ली। देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में गुजरात ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के अनुसार राज्य ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में स्थापित क्षमता और बिजली उत्पादन, दोनों मामलों में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 30 जून 2026 तक गुजरात में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 16,086 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है। इस उपलब्धि ने गुजरात को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में और अधिक मजबूत पहचान दिलाई है।

    सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गुजरात ने पवन ऊर्जा से 33,706 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया। यह देश के कुल पवन ऊर्जा उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। भारत की कुल पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता इसी अवधि में 57,443 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि पूरे देश में पवन ऊर्जा से 106 अरब यूनिट बिजली का उत्पादन दर्ज किया गया। इसमें गुजरात का योगदान सबसे अधिक रहा, जिससे राज्य की ऊर्जा क्षमता और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति स्पष्ट होती है।

    केंद्र सरकार का कहना है कि वर्ष 2030 तक देश की कुल बिजली आवश्यकता का 50 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी दिशा में गुजरात ने पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और रूफटॉप सोलर परियोजनाओं के विस्तार के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रगति की है। राज्य में विकसित बुनियादी ढांचा, निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और प्रभावी नीतियों के कारण स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।

    सरकार ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई ट्रांसमिशन लाइनें और सबस्टेशन विकसित किए गए हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बिजली ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम शुल्क में दी गई राहत से निजी निवेश को बढ़ावा मिला है और नई परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद मिली है।

    पवन ऊर्जा क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए ‘नेशनल रिपावरिंग एंड लाइफ एक्सटेंशन पॉलिसी फॉर विंड पावर प्रोजेक्ट्स-2023’ लागू की गई है। इसके साथ ही ऑफशोर विंड एनर्जी लीज रूल्स-2023 और ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसी योजनाओं ने समुद्री क्षेत्रों में पवन ऊर्जा विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इन पहलों का लाभ गुजरात सहित कई राज्यों को मिल रहा है, हालांकि इस क्षेत्र में सबसे तेज प्रगति गुजरात ने दर्ज की है।

    केंद्र सरकार के अनुसार गुजरात ने देश में सबसे पहले पवन ऊर्जा नीति लागू करने वाले राज्यों में शामिल होकर इस क्षेत्र के विकास की मजबूत नींव रखी थी। समय के साथ राज्य ने आधुनिक तकनीक, बेहतर ग्रिड प्रबंधन और निवेश समर्थक नीतियों के माध्यम से अपनी क्षमता में लगातार विस्तार किया। परिणामस्वरूप राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन लगातार बढ़ा है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिली है।

    सरकार का मानना है कि गुजरात का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और टिकाऊ विकास को गति देने की दिशा में राज्य की यह उपलब्धि देश के ऊर्जा परिवर्तन अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगी। आने वाले वर्षों में पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद जताई गई है।

  • गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता

    गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता


    अहमदाबाद।
    गुजरात (Gujarat) में इस बार मॉनसून (Monsoon) ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश (Record-Breaking Rainfall) की है. 22 जुलाई सुबह 6 बजे से 23 जुलाई सुबह 6 बजे के बीच वलसाड जिले (Valsad district) के उंबरगांव में 906 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह दिल्ली में पूरे साल होने वाली औसत 700 से 800 मिमी बारिश से भी ज्यादा है. यानी उंबरगांव में सिर्फ 24 घंटे में उतनी बारिश हो गई, जितनी दिल्ली में पूरे साल होती है।

    इतनी ज्यादा बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. सड़कें, घर, दुकानें और रेलवे ट्रैक पानी में डूब गए. कई जगहों पर लोगों के घरों में पानी घुस गया और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह रुक गई. प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान चलाकर करीब 1,200 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया।

    मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अरब सागर से लगातार आ रही नमी वाली हवाएं और मजबूत दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वजह से इतनी ज्यादा बारिश हुई. बारिश का असर सिर्फ उंबरगांव तक सीमित नहीं रहा. वलसाड और आसपास के कई इलाकों में लगातार कई घंटों तक तेज बारिश होती रही। इससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया. कई जगहों पर पानी सड़कों पर आ गया, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया. कुछ इलाकों में वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए. रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    प्रशासन, NDRF और दूसरी बचाव टीमों ने लगातार राहत का काम किया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक, उंबरगांव में सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कपराडा में 731 मिमी, नानापोंधा में 643 मिमी, धरमपुर में 499 मिमी, पारडी में 448 मिमी, वांसदा में 435 मिमी, वापी में 413 मिमी और वलसाड शहर में 403 मिमी बारिश हुई. तापी जिले के डोलवन में 378 मिमी और डांग जिले के वघई में 369 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    इन आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में एक ही दिन में बहुत ज्यादा बारिश हुई. IMD के मुताबिक, इस समय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात के ऊपर काफी मजबूत बना हुआ है. अरब सागर से लगातार नमी से भरी हवाएं गुजरात की तरफ आ रही हैं। इसके साथ पश्चिम भारत के ऊपर बना मौसम का सिस्टम भी लंबे समय तक एक ही इलाके में बना रहा. इसी वजह से बादल लगातार उसी इलाके में बरसते रहे और कुछ ही घंटों में बहुत ज्यादा बारिश हो गई।

    जब कम समय में इतनी ज्यादा बारिश होती है, तो नदियां और नाले जल्दी भर जाते हैं. शहरों में पानी निकालने की व्यवस्था भी इतना पानी एक साथ नहीं संभाल पाती. इसी कारण सड़कों पर तेजी से पानी भर जाता है. अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. दक्षिण गुजरात में भी यही हुआ।

    मौसम विभाग के मुताबिक, अगर 24 घंटे में 204.5 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो, तो उसे “अत्यधिक भारी बारिश” माना जाता है. लेकिन गुजरात के कई इलाकों में इससे दो, तीन और कुछ जगहों पर चार गुना तक ज्यादा बारिश हुई. सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश उंबरगांव में दर्ज की गई, जो सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा है।

    IMD ने अगले कुछ दिनों तक गुजरात के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. हालांकि सबसे तेज बारिश का दौर धीरे-धीरे कम हो सकता है. लेकिन जिन इलाकों में पहले से पानी भरा हुआ है, वहां थोड़ी और बारिश भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए लोगों से कहा गया है कि पानी भरे रास्तों से बचें, नदियों और नालों के पास न जाएं और मौसम विभाग व स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

    इस बार गुजरात में मॉनसून ने दिखा दिया कि कुछ घंटों की बारिश भी कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है. एक दिन में हुई रिकॉर्ड बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि पहले से पानी से भरे इलाकों में थोड़ी और बारिश भी हालात बिगाड़ सकती है।

  • गुजरातः नाले में गिरी कार, अहमदाबाद के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 को बचाया गया

    गुजरातः नाले में गिरी कार, अहमदाबाद के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 को बचाया गया


    खेड़ा।
    गुजरात के खेड़ा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मातर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। खेड़ा–मातर हाईवे पर मोतीपुरा गांव के निकट अहमदाबाद के एक ही परिवार की कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे नाले (गरनाला) में जा गिरी। कार में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार मोतीपुरा गांव के पास से गुजर रही थी। इसी दौरान भारी बारिश के कारण पानी से भरे नाले में कार अनियंत्रित होकर गिर गई। तेज बहाव के कारण कार पलट गई और पानी में बहने लगी, जिससे उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। खेड़ा के नायब कलेक्टर सूरज बारोट, मातर मामलतदार और खेड़ा फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने कार से दो लोगों को जीवित बाहर निकाला। घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से खेड़ा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    रेस्क्यू अभियान के दौरान कार में फंसे अन्य लोगों की तलाश की गई। काफी प्रयास के बाद चार शव बरामद किए गए। इस हादसे में अहमदाबाद के एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    प्रारंभिक जांच में भारी बारिश, सड़क पर जलभराव और कम दृश्यता को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। पुलिस ने बताया की उनके द्वारा मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन मृतकों के परिजनों को सूचना देने के साथ दुर्घटना के सटीक कारणों की भी जांच कर रहा है।

  • नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नेट जीरो लक्ष्य की ओर गुजरात की बड़ी छलांग, एक साल में 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में रिकॉर्ड कमी दर्ज

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2070 तक भारत को ‘नेट जीरो’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में गुजरात ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य ने 49.79 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने का रिकॉर्ड बनाया है। यह किसी एक वर्ष में राज्य द्वारा दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी कार्बन कटौती मानी जा रही है। इस उपलब्धि के पीछे सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के तेजी से विस्तार को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    राज्य सरकार के अनुसार इसी अवधि में गुजरात ने 67,655 मिलियन यूनिट ग्रीन बिजली का उत्पादन भी दर्ज किया, जो स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। ऊर्जा क्षेत्र में लगातार किए गए निवेश, नई नीतियों और नवीकरणीय परियोजनाओं के विस्तार से पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हुई है। इसका सीधा प्रभाव कार्बन उत्सर्जन में कमी के रूप में सामने आया है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात कुल 179 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को वातावरण में जाने से रोकने में सफल रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 442 मिलियन टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है। ऐसे में पांच वर्षों के दौरान कुल वार्षिक उत्सर्जन के लगभग 40 प्रतिशत के बराबर कार्बन कटौती दर्ज होना राज्य की हरित विकास रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास लगातार मजबूत हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का व्यापक उपयोग कोयला तथा अन्य जीवाश्म ईंधनों की खपत को कम करता है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन घटता है, बल्कि वायु प्रदूषण में भी कमी आती है। स्वच्छ ऊर्जा का बढ़ता उपयोग जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव केवल जलवायु तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य, कृषि, मौसम और प्राकृतिक संसाधनों से भी होता है। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वार्मिंग, असामान्य तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। वहीं स्वच्छ ऊर्जा के अधिक उपयोग से वायु गुणवत्ता में सुधार आता है और पर्यावरणीय जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।

    राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत पहल भी लागू की हैं। ‘इंटीग्रेटेड आरई पॉलिसी 2026’, ‘ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी’ और ‘गुजरात पंप स्टोरेज पॉलिसी’ जैसी योजनाओं ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति दी है। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग की निगरानी में विभिन्न सरकारी संस्थानों के समन्वित प्रयासों से राज्य के बिजली उत्पादन में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

    गुजरात ने वर्ष 2030 तक 100 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि यह रोडमैप न केवल राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ स्रोतों से पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। राज्य की यह उपलब्धि देश में हरित विकास के एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।