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  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    नई दिल्ली । देश के पहले गृहमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर (केवड़िया) में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास को गति देने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विकास योजनाओं में स्मार्ट परिवहन संपर्क व्यवस्था, हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल, पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नए वॉकवे और सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण शामिल है। इसके अलावा स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाएं भी इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास और उसकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थान अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और सुविधाओं को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने एकता नगर में तैयार किए गए रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और विभिन्न पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें इन हरित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में बताया।

    नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्मारक है। इसकी मुख्य प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 240 मीटर बताई जाती है। यह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस प्रतिमा को डिजाइन किया था, जबकि इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया। निर्माण कार्य 33 महीने में पूरा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।

    राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान भव्य परेड का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली। इसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और गुजरात पुलिस के जवानों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा बलों के दस्तों ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों और डेयरडेविल्स जवानों के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को विशेष बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 562 से अधिक देसी रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों से संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दोहराने की अपील की।

  • खरगे की टिप्पणी पर पीएम मोदी का जवाब, बोले- जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करता रहूंगा

    खरगे की टिप्पणी पर पीएम मोदी का जवाब, बोले- जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करता रहूंगा

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने जीवन की अंतिम सांस तक देश और जनता की सेवा करते रहेंगे। गुजरात के बनासकांठा जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खरगे की टिप्पणी का जवाब दिया और विपक्ष पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य देश के लोगों की सेवा करना है और वह जीवन के आखिरी क्षण तक इस काम में लगे रहेंगे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनासकांठा जिले के भिलडी में भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने करीब 14 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दे रही है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनीतिक दल देश के कठिन दौर से गुजरने पर भी राजनीतिक लाभ तलाशते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को लेकर विपक्ष ने लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की। मोदी ने कहा कि ईरान युद्ध के समय यह अफवाह फैलाई गई कि देश में किसानों को खाद नहीं मिलेगी और आम लोगों को LPG सिलेंडर की उपलब्धता में परेशानी होगी।

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस तरह के दावों का उद्देश्य सरकार को बदनाम करना था। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद केंद्र सरकार ने इसका आर्थिक बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया। सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए और कृषि क्षेत्र को समर्थन देने का प्रयास किया।

    मोदी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से छोटे किसानों को अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। प्रधानमंत्री ने इसे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा किसानों के कल्याण को प्राथमिकता दी है।

    दरअसल, प्रधानमंत्री की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की 25 अक्टूबर को पटना में की गई टिप्पणी के बाद सामने आई है। खरगे बिहार के पहले मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने नारा लगाते हुए कहा था कि मोदी कहीं नहीं जाएंगे।

    इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने कहा था कि मोदी का बाप भी जाएगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद शुरू हो गया था। अब गुजरात में प्रधानमंत्री मोदी ने जवाब देते हुए कहा कि वह अपनी अंतिम सांस तक भारत के लोगों की सेवा करते रहेंगे।

    प्रधानमंत्री के इस बयान को खरगे की टिप्पणी के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने केवल व्यक्तिगत टिप्पणी तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि विपक्ष की राजनीति, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। गुजरात की सभा में विकास परियोजनाओं के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख भी उनके भाषण का प्रमुख हिस्सा रहा।

  • नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी

    नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी


    मुंबई/गांधीनगर।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) को नर्मदा जल विवाद (Narmada Water Dispute) के तहत गुजरात के उकाई बांध से 5 TMC पानी मिलेगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की बैठक में महाराष्ट्र के हिस्से का पानी उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित बताए गए हैं।

    जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने महाराष्ट्र के लिए कुल 10 TMC पानी आवंटित किया है. इसमें से 5 TMC पानी डायवर्जन नहर के जरिए दिया जाएगा, जबकि बाकी 5 TMC पानी गुजरात के उकाई बांध से उपलब्ध कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक में उकाई बांध से 5 TMC पानी छोड़े जाने की मंजूरी मांगी. उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक में महाराष्ट्र को उसके हिस्से का पानी देने का निर्णय लिया गया था।


    सीआर पाटिल ने दिए जरूरी निर्देश

    विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक में आवश्यक निर्देश दिए. बैठक में नर्मदा जल बंटवारे और महाराष्ट्र को उसके निर्धारित हिस्से का पानी उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी शामिल हुए।


    सूखे के बीच पानी की मांग

    महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच पानी की उपलब्धता का मुद्दा अहम हो गया है. जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित हैं. ऐसे में नर्मदा जल बंटवारे के तहत निर्धारित पानी उपलब्ध होने से राज्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, पानी की आपूर्ति कब शुरू होगी और इसका वितरण किन क्षेत्रों में किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।


    नर्मदा परियोजना की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा

    बैठक के दौरान फडणवीस ने नर्मदा परियोजना के तहत महाराष्ट्र की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी. अब उकाई बांध से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया, आपूर्ति का समय और संबंधित व्यवस्थाओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    अहमदाबाद में नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष साड़ी पहनकर करते हैं गरबा, 200 साल पुरानी परंपरा के पीछे है साडू माता के बलिदान की कहानी

    नई दिल्ली । गुजरात में नवरात्रि के दौरान गरबा और देवी की आराधना का विशेष महत्व है। इस उत्सव के बीच अहमदाबाद के शाहपुर इलाके में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो अपनी अनूठी पहचान के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। यहां नवरात्रि की आठवीं रात बारोट समुदाय के पुरुष साड़ी पहनकर गरबा करते हैं। माथे पर सिंदूर की बिंदी लगाकर होने वाला यह आयोजन करीब 200 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस रस्म का संबंध साडू माता के बलिदान और उनकी रक्षा नहीं कर पाने के बाद समुदाय द्वारा किए गए प्रायश्चित से है।

    शाहपुर की साडू माता नी पोल में हर साल नवरात्रि की आठवीं रात पुरुष एकत्र होते हैं और पारंपरिक तरीके से गरबा करते हैं। इस आयोजन में बारोट समुदाय के लोगों के साथ दूसरे समुदायों के लोग भी भाग लेते हैं। इस वर्ष भी कम से कम 40 पुरुष इस परंपरा में शामिल हुए। इनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी मौजूद थे। यह आयोजन अलग-अलग समुदायों की भागीदारी के साथ परंपरा के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है।

    60 वर्षीय सतीश बारोट ने बताया कि वह 40 साल से अधिक समय से इस रस्म का हिस्सा बनते आ रहे हैं। वहीं, सुरेंद्रनगर से पिंटू बारोट अपने परिवार के साथ इस आयोजन में शामिल होने पहुंचे। उनके 10 वर्षीय बेटे, भाई और भतीजे ने पहली बार इस परंपरा में भाग लिया। इस तरह परिवार की नई पीढ़ी भी इस पुरानी रस्म से जुड़ रही है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस परंपरा की शुरुआत लगभग 200 साल पहले हुई एक घटना से जुड़ी है। मान्यता है कि बारोट समुदाय की साडू माता अपनी असाधारण सुंदरता के लिए जानी जाती थीं। उस समय के शासक ने उन्हें दरबार में पेश करने का आदेश दिया था। इस आदेश को पूरा कराने के लिए सैनिकों की एक टुकड़ी भेजी गई थी।

    स्थानीय मान्यता के अनुसार, समुदाय के लोगों ने साडू माता को उनकी इच्छा के विरुद्ध दरबार ले जाने का विरोध किया। इस दौरान सैनिकों और समुदाय के लोगों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। बताया जाता है कि खतरा बढ़ने पर साडू माता ने पहले अपनी बेटी अजूबा की जान ले ली। इसके बाद उन्होंने अपने पति हाथीसिंह बारोट से कहा कि उन्हें शाही दरबार में ले जाने देने के बजाय तलवार के एक वार से उनकी जान ले लें। मान्यता के अनुसार, इसके बाद साडू माता की मृत्यु हो गई।

    इस घटना के बाद समुदाय के लोगों को गहरा पछतावा हुआ कि वे साडू माता की रक्षा नहीं कर सके। स्थानीय विश्वास के मुताबिक, उनकी मृत्यु के बाद समुदाय के परिवारों पर श्राप लगने की आशंका जताई जाने लगी। लोगों का दावा था कि परिवारों में पुरुषों की मौतें होने लगीं और वंश को आगे बढ़ाने में कठिनाइयां आने लगीं।

    इसके बाद समुदाय के लोग साडू माता के स्मारक पर एकत्र हुए। उन्होंने अपनी गलती के लिए प्रायश्चित किया और परिवारों की खुशहाली तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रार्थना की। इसी दौरान पुरुषों ने साडू माता से जुड़े वस्त्र पहनने का संकल्प लिया। समुदाय का विश्वास है कि प्रार्थनाओं के बाद परिवारों की वंश-परंपरा फिर आगे बढ़ने लगी। समय के साथ साड़ी पहनकर गरबा करने की यह रस्म नवरात्रि की आठवीं रात की स्थायी परंपरा बन गई।

    आज इस आयोजन में शामिल होने वाले पुरुष इसे केवल नृत्य या धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति, कृतज्ञता और सामूहिक प्रायश्चित के प्रतीक के रूप में देखते हैं। अहमदाबाद के शाहपुर में निभाई जाने वाली यह परंपरा गुजरात के नवरात्रि उत्सव की विविधता और स्थानीय लोकविश्वासों से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को सामने लाती है।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसेवा के 25 साल पूरे होने पर अपने राजनीतिक सफर और सुशासन की सोच साझा की।

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 7 अक्टूबर को सरकार के प्रमुख के रूप में लोकसेवा के 25 साल पूरे होने के मौके पर जनता से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस मुकाम तक पहुंचेंगे। उन्होंने इस पूरे सफर के लिए देश के लोकतंत्र और संविधान के प्रति आभार व्यक्त किया।

    दिल्ली में आयोजित ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 25 वर्षों तक सरकार का हिस्सा बने रहना उनके लिए केवल एक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह जनता की सेवा से जुड़ी एक लंबी यात्रा है। उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों से लेकर सरकार के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारियां संभालने तक के सफर का उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी बड़े पद को लक्ष्य बनाकर राजनीति में कदम नहीं रखा था।

    प्रधानमंत्री ने अच्छे शासन की अपनी सोच पर बात करते हुए ‘सबका साथ, सबका विकास’ को इसका आधार बताया। उन्होंने कहा कि समाज को राजनीति के लिए वोट-बैंक के आधार पर बांटने से कई समस्याएं पैदा हुईं। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी खेत तक पानी नहीं पहुंचता है तो उसका नुकसान केवल किसी एक जाति के किसान को नहीं होता। इसी तरह बिजली की कमी से पैदा होने वाला अंधेरा किसी एक समुदाय के घर तक सीमित नहीं रहता।

    उन्होंने कहा कि जब किसी समस्या का असर समाज के सभी वर्गों पर पड़ता है तो उसके समाधान का लाभ भी सभी को मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने अच्छे शासन को ‘सैचुरेशन’ से जोड़ने की बात कही। उनके अनुसार सैचुरेशन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की योजनाओं और सुविधाओं के लिए पात्र प्रत्येक लाभार्थी तक उनका लाभ पहुंचे। कोई पात्र व्यक्ति छूटे नहीं और किसी हकदार को उसके अधिकार से वंचित न होना पड़े, यही इस व्यवस्था का लक्ष्य है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीति में आने से पहले के अनुभवों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने आदिवासी इलाकों में काम किया और पहाड़ों में भी समय बिताया। इन अनुभवों के बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने खुद चुनाव लड़ने या किसी बड़े पद पर पहुंचने की योजना नहीं बनाई थी।

    उन्होंने कहा कि जीवन को निजी लाभ के लिए नहीं, बल्कि किसी उद्देश्य के लिए जीना चाहिए। इसी विचार को उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की दिशा से जोड़ा। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद शुरू हुआ उनका सरकार से जुड़ा सफर अब 25 वर्ष पूरे कर चुका है। इस अवसर पर उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता तथा जनता के प्रति जिम्मेदारी को भी रेखांकित किया।

    ‘सेवा ज्योति’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के संबोधन का प्रमुख केंद्र सुशासन, समान रूप से विकास का लाभ पहुंचाने और सार्वजनिक जीवन में सेवा की भावना रहा। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर के विभिन्न पड़ावों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस मुकाम तक पहुंचने की कल्पना नहीं की थी। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ से ऊपर होना चाहिए और शासन का लक्ष्य सभी तक सुविधाओं और योजनाओं का लाभ पहुंचाना होना चाहिए।

  • गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में राजमार्ग अवसंरचना के विकास और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

    मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। इसके साथ विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा। यह आयोजन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर सामने आए अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के सड़क परिवहन और लोक निर्माण विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक, कार्यक्रम में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान के साथ नए और दोहराए जा सकने वाले समाधानों पर विचार किया जाएगा। नीति और संस्थागत सुधारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग राज्यों और संबंधित एजेंसियों के अनुभवों को एक मंच पर लाने से सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने में मदद मिलेगी और परियोजनाओं की गति बढ़ाई जा सकेगी।

    दो दिवसीय चिंतन शिविर में पांच प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना, भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि प्लेटफॉर्म, मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स, हाईवे सुरक्षा तथा गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी शामिल हैं। पीएम गतिशक्ति से जुड़े सत्र में विभिन्न अवसंरचना क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत योजना निर्माण पर चर्चा होगी। भूमि अधिग्रहण से संबंधित सत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और उन्हें दूर करने के संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा।

    मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स से जुड़े सत्र में अनुबंध संबंधी मुद्दों तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हाईवे सुरक्षा के सत्र में सुरक्षित सड़क डिजाइन और सुरक्षा उपायों को परियोजना की योजना तथा निर्माण प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर चर्चा होगी। वहीं गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी सत्र में निर्माण की गुणवत्ता सुधारने, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर से सड़क और राजमार्ग अवसंरचना विकास को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल

    राजस्थान के लोगों की आनुवंशिक जड़ें कितनी पुरानी? BHU की रिसर्च ने खोले राज, पाकिस्तान से ज्यादा उत्तर-मध्य भारत से मेल


    भोपाल । राजस्थान की आबादी के आनुवंशिक इतिहास को लेकर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जीन विज्ञानी प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। शोध के अनुसार राजस्थान की अध्ययनित आबादी के डीएनए पैटर्न पाकिस्तान की आबादी की तुलना में मध्य प्रदेश गुजरात और उत्तर-मध्य भारत की आबादियों से अधिक समान पाए गए। यह निष्कर्ष अलग-अलग आबादी समूहों में मौजूद आनुवंशिक संकेतों की तुलना पर आधारित है। अध्ययन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आनुवंशिक समानता का मतलब यह नहीं है कि किसी आबादी ने हाल के समय में किसी दूसरे राज्य से आकर वहां बसावट की है।

    शोधकर्ताओं ने करीब दो हजार असंबंधित और स्वस्थ लोगों के रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इनमें मीणा गुर्जर और राजस्थान की मिश्रित आबादी के लोग शामिल थे। वैज्ञानिकों ने डीएनए के 20 बहुरूपी ऑटोसोमल एसटीआर स्थानों का अध्ययन किया। इसके बाद इन आनुवंशिक आंकड़ों की तुलना पाकिस्तान के साथ ही भारत के अलग-अलग आबादी समूहों के उपलब्ध आंकड़ों से की गई। विभिन्न सांख्यिकीय तरीकों से किए गए विश्लेषण में राजस्थान के इन समूहों की आनुवंशिक समानता उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ अधिक दिखाई दी।

    इस अध्ययन की खास बात यह है कि इससे पहले हुए कुछ शोधों में राजस्थान और वर्तमान पाकिस्तान क्षेत्र की आबादियों के बीच आनुवंशिक संबंधों के संकेत मिले थे। वर्ष 2005 में हुए एक अध्ययन में 669 लोगों के नमूनों के आधार पर मातृवंशीय डीएनए और वाई क्रोमोसोम जैसे आनुवंशिक संकेतकों का विश्लेषण किया गया था। उस अध्ययन में सिंधु घाटी और आसपास की आबादियों के बीच लंबे समय तक हुए जीन प्रवाह के संकेत बताए गए थे। नए अध्ययन में राजस्थान की आनुवंशिक तस्वीर को केवल पश्चिमी दिशा से जोड़कर देखने के बजाय उत्तर और मध्य भारत की आबादियों के साथ संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया गया है।

    वैज्ञानिक दृष्टि से एमपी और गुजरात से आनुवंशिक समानता का अर्थ सीधा यह नहीं है कि राजस्थान के लोग इन राज्यों से आकर बसे हैं। डीएनए में मौजूद कुछ आनुवंशिक संकेत जब अलग-अलग आबादी समूहों में समान दिखाई देते हैं तो वैज्ञानिक उन आबादियों के बीच आनुवंशिक निकटता का अध्ययन करते हैं। इसके पीछे हजारों वर्षों में हुए आबादी के आवागमन मिश्रण और साझा पूर्वजों जैसी प्रक्रियाएं हो सकती हैं।

    अध्ययन में राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात और महाराष्ट्र में रहने वाली भील आबादी के आनुवंशिक आंकड़ों पर भी चर्चा की गई है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले भील समूहों के बीच साझा पुरानी आनुवंशिक विरासत के संकेत मिलने की बात कही गई है। शोध के अनुसार गुजरात के भीलों में आसपास की आबादियों के साथ मिश्रण अपेक्षाकृत कम जबकि राजस्थान के भीलों में आसपास के जातीय और जनजातीय समूहों के साथ अधिक आनुवंशिक विविधता दिखाई देती है।

    प्रोफेसर चौबे के अनुसार राजस्थान की विभिन्न जातियों और जनजातियों के आनुवंशिक इतिहास में भी कई पीढ़ियों पीछे जाने पर साझा विरासत के संकेत दिखाई देते हैं। अध्ययन में करीब 52 हजार वर्ष पुराने मातृवंशीय डीएनए संकेतों का भी उल्लेख किया गया है। एम आर5 और यू2आई जैसे मातृवंशीय समूहों को दक्षिण एशिया में आधुनिक मानव के शुरुआती इतिहास से जोड़ा जाता है। इस तरह अध्ययन राजस्थान की आबादी को लंबे समय से चली आ रही स्थानीय आनुवंशिक निरंतरता और अलग-अलग दिशाओं से हुए आबादी के मिश्रण के व्यापक संदर्भ में देखने की बात करता है।

  • गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडेशन अवधि 120 से घटाकर 90 दिन की, मंजूरी प्रक्रिया के लिए 51 और 66 दिन की समय-सीमा तय

    गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडेशन अवधि 120 से घटाकर 90 दिन की, मंजूरी प्रक्रिया के लिए 51 और 66 दिन की समय-सीमा तय

    नई दिल्ली । गुजरात सरकार ने विकास और निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडर की मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए वैलिडेशन की अवधि 120 दिन से घटाकर 90 दिन कर दी है। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी को कम करना और सड़क, पुल तथा सरकारी भवनों जैसी विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय के भीतर शुरू करना है।

    नई व्यवस्था के तहत केवल फाइनेंशियल बिड वाले टेंडर की पूरी मंजूरी प्रक्रिया अधिकतम 51 दिनों में पूरी करनी होगी। वहीं जिन टेंडर में तकनीकी और वित्तीय दोनों स्तरों पर जांच की जरूरत होगी, उनके लिए अधिकतम 66 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है।

    जिन मामलों में ठेकेदारों की प्री-क्वालिफिकेशन की आवश्यकता नहीं है और केवल फाइनेंशियल बिड शामिल है, उनमें फील्ड या क्षेत्रीय कार्यालय से लेकर सचिवालय और वित्त विभाग तक की पूरी प्रक्रिया 51 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर फाइलों के लंबित रहने की स्थिति को कम करना है।

    प्री-क्वालिफिकेशन वाले टेंडर में प्रक्रिया अपेक्षाकृत विस्तृत होगी। ऐसे मामलों में तकनीकी और वित्तीय दोनों बिड की जांच की जाती है। इसके लिए संबंधित कार्यालयों और प्रशासनिक स्तरों पर होने वाली पूरी प्रक्रिया को अधिकतम 66 दिनों में पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है।

    सरकार ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान होने वाली बातचीत यानी नेगोशिएशन को भी सीमित करने का निर्णय लिया है। निर्धारित नियमों के अनुसार व्यापक प्रचार के बाद यदि एक से अधिक टेंडर प्राप्त होते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में बातचीत से बचा जाएगा। केवल आवश्यकता महसूस होने पर ही नेगोशिएशन किया जा सकेगा।

    यदि बातचीत आवश्यक होती है तो इसे केवल एक स्तर पर सक्षम अधिकारी के स्तर पर किए जाने की व्यवस्था होगी। कई प्रशासनिक स्तरों पर बातचीत की अनुमति नहीं होगी। इससे टेंडर प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम करने का प्रयास किया गया है।

    नई व्यवस्था में तय समय-सीमा का पालन नहीं होने की स्थिति में जवाबदेही निर्धारित करने का भी प्रावधान किया गया है। यदि किसी प्रस्ताव पर निर्धारित अवधि के भीतर कार्रवाई नहीं होती है तो देरी के कारणों को संबंधित स्तर पर दर्ज करना होगा। साथ ही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।

    यदि किसी प्रस्ताव के अधूरे होने के कारण प्रक्रिया में देरी होती है तो इसकी जिम्मेदारी उस स्तर की होगी जहां से प्रस्ताव आगे भेजा गया था। इस प्रावधान का उद्देश्य टेंडर से जुड़ी फाइलों और प्रस्तावों को पूरा करके समय पर आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है।

    ये बदलाव विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडरों पर लागू होंगे। इनमें सड़क, पुल और सरकारी भवनों सहित अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के कारण टेंडर मंजूरी की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकेगी।

    नई व्यवस्था के तहत टेंडर की वैलिडिटी अवधि घटाकर 90 दिन किए जाने के साथ मंजूरी के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है। इससे परियोजनाओं की प्रशासनिक प्रक्रिया को लंबा खिंचने से रोकने और निर्माण कार्यों को तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू करने पर जोर दिया गया है।

    सरकार का कहना है कि समयबद्ध टेंडर मंजूरी से प्रशासनिक देरी कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही सड़क, पुल और अन्य सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नागरिकों को संबंधित सुविधाओं और सेवाओं का लाभ जल्द उपलब्ध कराने में भी सहायता मिलेगी।

  • ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट में छिपा रोहित शेट्टी का बड़ा प्लान, 8 जनवरी को फिल्म रिलीज करने के पीछे गुजरात कनेक्शन

    ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट में छिपा रोहित शेट्टी का बड़ा प्लान, 8 जनवरी को फिल्म रिलीज करने के पीछे गुजरात कनेक्शन

    नई दिल्ली । रोहित शेट्टी ने अपनी फिल्म ‘गोलमाल 5’ की रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। 8 जनवरी 2027 को रिलीज हो रही फिल्म में अजय देवगन, अरशद वारसी, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कुणाल खेमू और शरमन जोशी जैसे एक्टर्स नजर आने वाले हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोहित शेट्टी अपनी इस कल्ट क्लासिक गोलमाल सीरीज की 5वीं फिल्म 8 जनवरी, नॉन फेस्टिवल के मौके पर क्यों रिलीज कर रहे हैं? डायरेक्टर ने इस रिलीज डेट के पीछे खास रणनीति बनाई है।

    गोलमाल 5 का गुजरात से कनेक्शन

    आमतौर पर कोई भी फिल्ममेकर अपनी फिल्म को किसी फेस्टिवल या हॉलिडे के मौके पर रिलीज करना पसंद करता है। इसकी बड़ी वजह इन फेस्टिवल और हॉलिडे के सेलिब्रेशन से फिल्म को होने वाला आर्थिक फायदा है। लेकिन रोहित शेट्टी ने 8 जनवरी 2027 के दिन अपनी फिल्म रिलीज करने की तैयारी कर ली है। पहली वजह 24 दिसंबर को रिलीज हो रही शाहरुख खान की ‘किंग’ को दो हफ्ते का समय देना है। दूसरी वजह गुजरात है।

    इसलिए 8 जनवरी को रिलीज हो रही फिल्म

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, 8 जनवरी 2027 तक ऑडियंस शाहरुख खान की ‘किंग’ और ‘एवेंजर्स डूम्सडे’ से उभर चुकी होगी। दूसरी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि रोहित शेट्टी की फिल्में गुजरात में शानदार प्रदर्शन करती हैं। 8 जनवरी 2027 के अगले हफ्ते यानी 14 जनवरी को गुजरात में मकर संक्रांति का जश्न मनाया जाएगा। इसके साथ ही एक लॉन्ग वीकेंड आने वाला है। ऐसे में रोहित शेट्टी की फिल्म नॉन-फेस्टिवल तारीख पर रिलीज होकर भी फेस्टिवल का फायदा लेने की तैयारी में है।

    फिल्म के गुजरात में चलने की एक बड़ी वजह यह भी है कि गोलमाल का पहला पार्ट, जो साल 2006 में आया था, एक गुजराती नाटक पर आधारित था, जिसे नीरज वोरा ने लिखा था।

    गोलमाल 5 को मिलेंगे दो हफ्ते

    रोहित शेट्टी ने अपनी फिल्म ‘गोलमाल 5’ को 14 जनवरी को रिलीज नहीं किया। इसके पीछे की वजह अगले हफ्ते 21 जनवरी को संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘लव एंड वॉर’ की रिलीज बताई जा रही है। ऐसे में डायरेक्टर अपनी फिल्म के लिए साफ दो हफ्ते चाहते थे। 8 जनवरी से 21 जनवरी तक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चलने का पर्याप्त समय पा सकती है।

    गोलमाल फ्रेंचाइजी की फिल्में

    रोहित शेट्टी को इंडस्ट्री में पहचान फिल्म ‘गोलमाल’ ने दिलाई थी। यह कल्ट कॉमेडी फिल्म साल 2006 में रिलीज हुई थी। खुद डायरेक्टर ने बताया था कि उन्हें यह कहानी नीरज वोरा ने दी थी, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल होने के साथ ऑडियंस के लिए भी खास बन गई। इसके बाद साल 2008 में ‘गोलमाल रिटर्न्स’ रिलीज हुई। साल 2010 में ‘गोलमाल 3’ और साल 2017 में ‘गोलमाल अगेन’ आई।

    गोलमाल 5 की कहानी साउथ इंडिया पर बेस्ड होगी?

    अब ‘गोलमाल 5’ आ रही है। फिल्म की पुरानी कास्ट में अब अक्षय कुमार की भी एंट्री हो गई है। हालांकि, मेकर्स ने जो मोशन पोस्टर शेयर किया है, उसमें अक्षय नजर नहीं आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह फिल्म में विलेन बने होंगे। फिल्म के पोस्टर से एक और संकेत मिला है कि इस बार की कहानी साउथ इंडिया पर आधारित हो सकती है। शेयर किए गए पोस्टर पर एक बाइक नजर आ रही है और उस पर तमिलनाडु का नंबर है। फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों में अब उत्सुकता बनी हुई है।

  • गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार पर विवाद, परेश रावल बोले- गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है, हर राज्य में हों आयोजन

    नई दिल्ली । गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर एक्टर परेश रावल ने रिएक्टर किया है। 72 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है, जब ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। इस साल 72वां ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली की जगह गुजरात के एकता नगर (केवडिया) में आयोजित होगा। यह अवॉर्ड शो 22 सितंबर, 2026 को आयोजित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि पहली बार ऐसा होगा जब यह अवॉर्ड शो दिल्ली से बाहर आयोजित किया जाएगा। ऐसे में गुजरात में हो रहे 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

    गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को लेकर चल रहे विवाद पर परेश रावल ने अपना रिएक्शन दिया। उनसे पूछा गया कि पहली बार ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ दिल्ली से बाहर गुजरात में हो रहा है, इस पर आप क्या कहेंगे। इस सवाल पर परेश रावल ने कहा, ‘गुजरात क्या बांग्लादेश या पाकिस्तान में है? ये भी हमारे ही देश का हिस्सा है। गुजरात में ये आयोजन क्यों नहीं होने चाहिए? गुजरात में भी आयोजन होने चाहिए…मैं तो ये कहता हूं कि ऐसे आयोजन हर राज्य में होने चाहिए। इसमें कोई बुरी बात नहीं है।’

    उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने की आलोचना

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने 72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ के गुजरात में आयोजन करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली और राष्ट्रीय पुरस्कारों के महत्व को कम कर रही है। संजय राउत ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए कलाकारों से इस समारोह का बहिष्कार करने तक की अपील की है।

    पहली बार कब और कहां शुरू हुआ था ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’

    पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की शुरुआत 1954 में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई थी। उस समय इन्हें ‘राज्य फिल्म पुरस्कार’ (State Awards) कहा जाता था। पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में वर्ष 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मानित किया गया था। पहली बार सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मराठी फिल्म ‘श्यामची आई’ (Shyamchi Aai) को मिला था।

    इस बार किसे मिलेगा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार?

    72वें ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ की लिस्ट सामने आ चुकी है। इस बार रणदीप हुड्डा की फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ को ‘बेस्ट डेब्यू फिल्म ऑफ ए डायरेक्टर’ का अवॉर्ड दिया जाएगा। इस फिल्म में रणदीप हुड्डा की एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई है। इसके अलावा यामी गौतम स्टारर मूवी ‘आर्टिकल 370’ को साल 2024 की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार मिलेगा। वहीं, राजकुमार राव की ‘श्रीकांत’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिलेगा।

    साथ ही साउथ एक्टर ममूटी की ‘ब्रह्मयुगम’ और कार्तिक आर्यन की मूवी ‘चंदू चैंपियन’ फिल्म के लिए ‘बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल’ का पुरस्कार साझा करेंगे। ममूटी को चौथी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।