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  • गुजरात में कुपोषण के खिलाफ बड़ा कदम, राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक पहुंची दूध संजीवनी योजना..

    गुजरात में कुपोषण के खिलाफ बड़ा कदम, राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक पहुंची दूध संजीवनी योजना..


    नई दिल्ली ।
    गुजरात सरकार ने आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में कुपोषण को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ‘दूध संजीवनी योजना’ का विस्तार राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक कर दिया है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के उन सभी क्षेत्रों में भी योजना का लाभ मिलेगा, जहां अब तक इसका संचालन नहीं हो रहा था। सरकार का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं तक अधिक पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण पोषण पहुंचाकर कुपोषण की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।

    महिला एवं बाल विकास विभाग की मंजूरी के बाद शेष 53 आईसीडीएस ब्लॉकों को योजना में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही पहली बार चयनित जिलों में अधिक फैट वाले फोर्टिफाइड दूध के पायलट प्रोजेक्ट को भी स्वीकृति दी गई है। इस पहल के माध्यम से लाभार्थियों को पहले की तुलना में अधिक पोषणयुक्त दूध उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बच्चों के शारीरिक विकास और माताओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    दूध संजीवनी योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में सीमित स्तर पर छह आदिजाति जिलों में की गई थी। योजना के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 200 मिलीलीटर फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध उपलब्ध कराया जाता है। योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया और कुछ वर्षों के भीतर इसे राज्य के कई अन्य आदिवासी बहुल जिलों तक विस्तारित किया गया।

    योजना के विस्तार के दौरान सहकारी डेयरी संस्थाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न डेयरियों ने फोर्टिफाइड दूध के उत्पादन और आपूर्ति की जिम्मेदारी संभालकर इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया। इससे लाभार्थियों तक नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण दूध पहुंचाने में सुविधा मिली और योजना का संचालन अधिक मजबूत हुआ।

    सरकार ने अब योजना की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए दूध में फैट की मात्रा बढ़ाने का भी निर्णय लिया है। अब तक लाभार्थियों को कम फैट वाला फोर्टिफाइड दूध दिया जाता था, लेकिन पायलट परियोजना के तहत चयनित जिलों में तीन प्रतिशत और साढ़े चार प्रतिशत फैट वाला दूध उपलब्ध कराया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार अधिक फैट वाला दूध बच्चों की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति, शारीरिक विकास तथा पोषण स्तर को बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकता है।

    योजना के विस्तार और हाई-फैट पायलट प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने अलग-अलग वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। पूरा खर्च राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे योजना के प्रभावी संचालन में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा न आए। इसके साथ ही सभी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था, सरकारी खरीद प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, सोशल ऑडिट और थर्ड पार्टी सत्यापन जैसी व्यवस्थाओं को भी लागू किया जाएगा।

    सरकार का मानना है कि यह पहल केवल दूध वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा में दीर्घकालिक निवेश है। योजना का राज्य के सभी आदिजाति आईसीडीएस ब्लॉकों तक विस्तार होने से हजारों नए बच्चे और माताएं इसके दायरे में आएंगे। इससे आदिवासी क्षेत्रों में पोषण संबंधी असमानताओं को कम करने, कुपोषण के खिलाफ अभियान को गति देने और महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य को मजबूत आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलने की उम्मीद है।

  • "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी

    "आओ, अब घर लौट चलें": गुजरात में 25 लोगों ने की शारदापीठ शंकराचार्य की प्रेरणा से घर वापिसी


    गुजरात । गुजरात के आदिवासी बहुल छोटा उदेपुर जिले में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘स्वधर्मानयन’ अभियान को एक नई ऊर्जा मिली है। द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम के उद्घाटन अवसर पर 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती के सान्निध्य में गंगाजल ग्रहण कर भगवान श्रीराम का मंत्र लिया और स्वेच्छा से सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प व्यक्त किया। शारदापीठ की ओर से बताया गया कि हमारे लिए यह धार्मिक अनुष्ठान अपनी सांस्कृतिक जड़ों से पुनः जुड़ने का अभियान है।

    उल्‍लेखनीय है कि 11 जुलाई 2026 को गुजरात के छोटा उदेपुर जिले के ग्राम वासणा (कोषिन्द्रा) में द्वारका शारदापीठ द्वारा संचालित श्री आनंद वर्धन आश्रम का उद्घाटन द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज के करकमलों से संपन्न हुआ। आदिवासी एवं वनवासी समाज के बीच स्थापित यह आश्रम धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक जागरण का भी केंद्र बनेगा।


    शारदापीठ का कहना है कि इस आश्रम के माध्यम से क्षेत्र के लोगों तक सनातन धर्म की शिक्षाएं, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराएं तथा नैतिक जीवन मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही स्थानीय समाज में संस्कार, शिक्षा, सेवा और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। आश्रम के उद्घाटन समारोह का सबसे महत्वपूर्ण क्षण वह रहा, जब 25 आदिवासी एवं वनवासी भाई-बहनों ने सार्वजनिक रूप से गंगाजल ग्रहण किया तथा शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती से भगवान श्रीराम का मंत्र ग्रहण कर सनातन हिंदू धर्म अपनाने का संकल्प लिया।

    इस अवसर पर उन्होंने यह घोषणा भी की कि वे अपने जीवन में सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करेंगे तथा अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे। आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वेच्छा से संपन्न हुई और इसमें शामिल सभी लोगों ने स्वयं अपनी इच्छा से यह निर्णय लिया।


    ‘स्वधर्मानयन’ को स्थायी आधार देगा नया आश्रम

    अपने उद्बोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से गुजरात के जनजाति एवं वनवासी क्षेत्रों में ‘स्वधर्मानयन यात्रा’ के माध्यम से लगातार जनजागरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वासणा ग्राम में आनंद वर्धन आश्रम की स्थापना इस अभियान को नई दिशा और स्थायी आधार प्रदान करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब यह आश्रम धार्मिक अनुष्ठानों के अतिरिक्‍त गांव-गांव तक पहुंचने वाले जागरण अभियान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में वे अधिक व्यापक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और लोगों को अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं के महत्व से परिचित कराएंगे।


    शंकराचार्य सदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा, “किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से होती है। यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाता है तो उसकी सांस्कृतिक पहचान भी धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है, इसलिए अपनी परंपराओं का संरक्षण और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।”

    गांव-गांव तक पहुंच रहा है ‘स्वधर्मानयन’ का संदेश

    द्वारका शारदापीठ के अनुसार ‘स्वधर्मानयन’ अभियान का उद्देश्य किसी प्रकार भी प्रकार के विवाद में न पड़ते हुए उन लोगों को उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत से पुनः जोड़ना है, जोकि विभिन्न कारणों से अपनी मूल परंपराओं से दूर हो गए हैं। इसी उद्देश्य से पिछले कई वर्षों से गुजरात के आदिवासी अंचलों में नियमित रूप से ग्राम सभाएं, धार्मिक प्रवचन, सत्संग, संस्कार शिविर, यज्ञ तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा, परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सनातन जीवन पद्धति के विषय में जानकारी दी जाती है।


    शारदापीठ का मानना है कि समाज में स्थायी परिवर्तन लाने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आवश्‍यक यह भी है कि निरंतर संवाद, शिक्षा और सेवा कार्यों को भी माध्यम बनाया जाए। इसी कारण “स्वधर्मानयन अभियान” को सेवा, संस्कार और सांस्कृतिक जागरण के साथ जोड़ा गया है।

    पहले भी अनेक स्थानों पर हुए हैं घर वापसी के कार्यक्रम

    द्वारका शारदापीठ और उसके शंकराचार्यों द्वारा घर वापसी अथवा ‘स्वधर्मानयन’ का अभियान पिछले कई वर्षों से निरंतर चलाया जा रहा है। विशेष रूप से गुजरात, झारखण्‍ड, छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश समेत कई राज्‍यों के आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनमें अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से पुनः सनातन परंपरा अपनाने की घोषणा की।

    यहां गुजरात के संदर्भ में ज्ञात हो कि शारदापीठ से जुड़े संतों ने वर्षों से दक्षिण गुजरात, छोटा उदेपुर, पंचमहल, दाहोद तथा अन्य आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक संपर्क अभियान चलाया है। इन अभियानों के दौरान गांव-गांव जाकर धार्मिक सभाएं आयोजित की गईं, लोगों से संवाद स्थापित किया गया तथा भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के विषय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।


    इसके अतिरिक्त धार्मिक संस्कार शिविरों, रामकथा, गीता प्रवचन, गौ-सेवा, शिक्षा सहायता, चिकित्सा शिविर और सामाजिक सेवा गतिविधियों के माध्यम से भी स्थानीय समाज के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखा गया। शारदापीठ का दावा है कि इन प्रयासों के परिणामस्वरूप अनेक परिवार अपनी पारंपरिक धार्मिक पहचान के साथ पुनः जुड़े हैं।

    नवस्थापित आनंद वर्धन आश्रम में भी भविष्य में संस्कृत शिक्षा, धार्मिक अध्ययन, बच्चों के संस्कार वर्ग, महिलाओं के सशक्तिकरण कार्यक्रम, योग, आध्यात्मिक प्रशिक्षण तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों के संचालन की योजना बताई गई है। आश्रम के माध्यम से स्थानीय युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर भी प्रेरित किया जाएगा।

    शंकराचार्य का आह्वान- ‘अपने धर्म और संस्कृति को जानिए’

    अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी सदानन्द सरस्वती ने कहा, “समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म, संस्कृति और इतिहास का ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को समझेगी, तभी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रख सकेगी।”

    उन्होंने कहा है- “आने वाले समय में स्वधर्मानयन यात्रा को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा। इसके अंतर्गत गुजरात के दूरस्थ आदिवासी और वनवासी क्षेत्रों में लगातार प्रवास, धार्मिक संवाद और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आनंद वर्धन आश्रम इस पूरे अभियान का प्रमुख केंद्र बनेगा और यहां से सेवा, संस्कार तथा सांस्कृतिक जागरण की गतिविधियों को नई गति मिलेगी।”

    उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य लोगों के भीतर अपनी परंपराओं के प्रति आत्मविश्वास जगाना, सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के साथ शारदापीठ आने वाले वर्षों में अपने स्वधर्मानयन अभियान को और व्यापक स्वरूप देने की तैयारी कर रहा है।

  • ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    ऑस्ट्रेलिया का गुजरात पर बड़ा भरोसा, निवेश और शिक्षा साझेदारी के नए अध्याय के साथ पीएम मोदी ने CEO फोरम से दिए आर्थिक सहयोग के संकेत

    नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक तथा रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित CEO फोरम को संबोधित किया। इस दौरान दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश, व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलिया की ओर से गुजरात में बड़े निवेश और वहां दो प्रमुख विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की घोषणा भी की गई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों ने आपसी विश्वास और साझा हितों के आधार पर सहयोग का मजबूत ढांचा तैयार किया है, जिसका लाभ अब व्यापार और निवेश के रूप में दिखाई देने लगा है।

    प्रधानमंत्री ने आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। भारतीय उत्पादों को ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि दोनों देशों के उद्योगों के लिए नए अवसर भी तैयार हुए हैं। सरकार का लक्ष्य इस आर्थिक सहयोग को और व्यापक बनाकर निवेश तथा औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

    सम्मेलन के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नेतृत्व ने गुजरात में निवेश बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया का एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल वर्ष के अंत में भारत का दौरा करेगा, जहां निवेश की नई संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि राज्यों के स्तर पर भी प्रत्यक्ष सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि क्षेत्रीय विकास और उद्योगों को नई गति मिल सके।

    प्रधानमंत्री ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र को भविष्य की साझेदारी का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि भारत हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में तेजी से निवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया की तकनीक, पूंजी और प्राकृतिक संसाधन इस परिवर्तन को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

    शिक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिली है। ऑस्ट्रेलिया की दो प्रमुख विश्वविद्यालयों ने गुजरात में अपने परिसर स्थापित करने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री ने इसे केवल शैक्षणिक सहयोग नहीं बल्कि प्रतिभा विकास और कौशल निर्माण की दिशा में दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को छात्र आदान-प्रदान से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर की प्रतिभा तैयार करने पर मिलकर काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि राज्यों, विश्वविद्यालयों, उद्योगों और स्थानीय संस्थानों के बीच भी सहयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच बढ़ता संवाद निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा तथा आने वाले वर्षों में भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध आर्थिक सहयोग के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

  • भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    भारी बारिश से महाराष्ट्र-गुजरात में बढ़ी चुनौती, अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से की बात, केंद्र ने हरसंभव सहायता का दिया भरोसा

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र और गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पर पड़े व्यापक असर के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर मौजूदा हालात की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इस पहल को दोनों राज्यों में मौसम से उत्पन्न चुनौतियों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने से सड़क यातायात धीमा पड़ गया, जबकि उपनगरीय लोकल ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। कार्यालय जाने वाले लोगों को लंबी देरी और असुविधा का सामना करना पड़ा। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के कई निचले क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या बनी हुई है।

    मुंबई को पेयजल उपलब्ध कराने वाले प्रमुख जलाशयों में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। भारी वर्षा के चलते तुलसी झील अपने अधिकतम स्तर तक पहुंचकर ओवरफ्लो होने लगी है। मौसम विभाग ने आने वाले समय में भी मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना जताई है, जिससे प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है।

    दूसरी ओर गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में भी भारी बारिश ने व्यापक प्रभाव डाला है। विशेष रूप से सूरत जिला सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा, जहां कई स्थानों पर अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान चलाया गया। प्रशासन ने हजारों लोगों को सुरक्षित आश्रयों में पहुंचाकर राहत कार्य तेज किए हैं।

    भारी वर्षा के कारण दक्षिण गुजरात के कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ। एहतियात के तौर पर कई स्थानों पर स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया। लगातार बारिश के चलते स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन दल और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में आवश्यक सेवाएं बनाए रखने और लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयास भी जारी हैं।

    मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर रेल और सड़क परिवहन पर भी दिखाई दिया। जलभराव और अन्य बाधाओं के कारण गुजरात जाने वाली कई लंबी दूरी की रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। वहीं मुंबई-पुणे मार्ग पर पहले हुए भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका। प्रशासन लगातार मार्गों की निगरानी कर रहा है ताकि परिवहन व्यवस्था को जल्द से जल्द सुचारु बनाया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों राज्यों में राहत और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दोनों मुख्यमंत्रियों से की गई बातचीत में प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, राहत अभियानों की प्रगति और भविष्य की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। लगातार बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील कर रहा है।Aksharam Media and

  • गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके

    गुजरात में पीएम मोदी का अनोखा अंदाज, भाषण में बोले- “सुन रहे हो न, विनोद”, सभागार में गूंजे ठहाके


    अहमदाबाद। गुजरात के साणंद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अलग अंदाज देखने को मिला। सेमीकंडक्टर उद्योग पर अपने संबोधन के बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो चुके संवाद “सुन रहे हो न, विनोद” का जिक्र किया, जिसे सुनते ही कार्यक्रम स्थल ठहाकों और तालियों से गूंज उठा।

    प्रधानमंत्री साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट सुविधा के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति और बड़े लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

    गुजराती कहावतों से शुरू हुई चर्चा
    कार्यक्रम में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के चेयरमैन सुबैया ने अपने संबोधन में गुजराती की दो प्रसिद्ध कहावतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने विकास के लिए स्पष्ट दिशा तय की है और अब उद्योग जगत की जिम्मेदारी है कि वह उसी सोच के साथ आगे बढ़े।

    उन्होंने गुजराती कहावत “निशान चूक माफ, पण नहीं माफ नीचू निशान” का जिक्र करते हुए कहा कि ऊंचा लक्ष्य रखना जरूरी है। यदि लक्ष्य तक पूरी तरह नहीं पहुंचा जाए तो उसे स्वीकार किया जा सकता है, लेकिन छोटा लक्ष्य तय करना उचित नहीं है।

    सुबैया ने यह भी बताया कि उनकी कंपनी की पहली सेमीकंडक्टर चिप्स की खेप जापान स्थित साझेदारों को भेजी जा रही है। उनके मुताबिक, यह भारत के वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में मजबूत भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दूसरी गुजराती कहावत “काम बोले छे” का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कंपनी का काम ही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनेगा।

    पीएम मोदी ने ऐसे जोड़ा वायरल डायलॉग
    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों कहावतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे कभी छोटे लक्ष्य या छोटी सोच में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा, “अगर मुझे कोई प्रतिमा बनानी हो, तो मैं उसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाऊंगा।” इसे सरदार वल्लभभाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ओर संकेत माना गया।

    इसके बाद प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा, “और सुबैया जी ने ‘काम बोले छे’ भी कहा… सुन रहे हो न, विनोद… काम बोले छे।” यह सुनते ही सभागार में मौजूद लोगों और मंच पर बैठे अतिथियों के बीच हंसी और तालियों का दौर शुरू हो गया।

    सोशल मीडिया पर लोकप्रिय है यह संवाद
    “सुन रहे हो न, विनोद” और “देख रहे हो न, विनोद” जैसे संवाद एक वेब शो के बाद सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए। बाद में कंटेंट क्रिएटर्स और मीम पेजों ने इनका व्यापक इस्तेमाल किया, जिससे यह इंटरनेट पर चर्चित संवाद बन गया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सार्वजनिक मंच से इसका उल्लेख किए जाने के बाद यह प्रसंग भी चर्चा का विषय बन गया।

  • क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    क्राइम सीन पर अब तुरंत फॉरेंसिक जांच, गुजरात की 47 हाईटेक मोबाइल वैन से मजबूत होगी जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया

    गांधीनगर । गुजरात में अपराध जांच को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर में 47 मोबाइल फॉरेंसिक वैन सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन अत्याधुनिक वाहनों की मदद से पुलिस को घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक परीक्षण, साक्ष्यों के संरक्षण और शुरुआती फॉरेंसिक विश्लेषण की सुविधा मिल रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण साक्ष्य समय रहते सुरक्षित किए जा सकें और उनके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ या दूषित होने की संभावना न्यूनतम रहे।

    राज्य में फॉरेंसिक विज्ञान के विस्तार के लिए पिछले वर्षों में विशेष प्रयास किए गए हैं। इसी दिशा में फॉरेंसिक शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थापित संस्थान को अब केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल चुका है। इसके साथ ही अपराध जांच में वैज्ञानिक तरीकों के अधिकतम उपयोग पर लगातार जोर दिया गया है, जिससे पुलिस जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

    नई आपराधिक व्यवस्था लागू होने के बाद वैज्ञानिक जांच की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाए जाने के बाद घटनास्थल पर तत्काल विशेषज्ञ सहायता की आवश्यकता बढ़ी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल फॉरेंसिक वैन की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

    पिछले दो वर्षों के दौरान ये मोबाइल फॉरेंसिक वैन राज्यभर में हजारों अपराध स्थलों पर पहुंचकर जांच एजेंसियों की सहायता कर चुकी हैं। हत्या, यौन अपराध, पॉक्सो, लूट, चोरी, आगजनी, मादक पदार्थों से जुड़े मामलों और अन्य गंभीर अपराधों में घटनास्थल पर वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने का कार्य किया गया। इसके अलावा संदिग्ध मौत, हिरासत में मृत्यु, दुर्घटनाओं और अन्य संवेदनशील मामलों में भी इन वैनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    इन विशेष वाहनों में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और परीक्षण किटों की व्यापक व्यवस्था की गई है। इनमें डीएनए और जैविक नमूनों की जांच, यौन अपराधों से जुड़े साक्ष्यों का संग्रह, मादक पदार्थों और विस्फोटक पदार्थों की प्रारंभिक पहचान, आगजनी से संबंधित विश्लेषण तथा गन शॉट अवशेषों की जांच के लिए आवश्यक किट उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पैरों और टायर के निशानों के संरक्षण तथा अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों के संग्रह की भी सुविधा मौजूद है।

    मोबाइल फॉरेंसिक वैन में उच्च क्षमता वाले कैमरे, स्टीरियो माइक्रोस्कोप, जीपीएस आधारित बॉडी कैमरा, लैपटॉप, प्रिंटर, मिनी रेफ्रिजरेटर, एलईडी डिस्प्ले, उच्च तीव्रता वाली फॉरेंसिक लाइट और अन्य आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इनकी सहायता से घटनास्थल पर रक्त के धब्बों, फिंगरप्रिंट, बाल, फाइबर, मिट्टी, कांच के टुकड़ों, जैविक नमूनों और अन्य सूक्ष्म साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच और सुरक्षित संग्रहण किया जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल फॉरेंसिक वैन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अपराध स्थल पर तुरंत वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध हो जाती है, जिससे महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने या दूषित होने की आशंका काफी कम हो जाती है। विशेषकर यौन अपराध और पॉक्सो जैसे मामलों में समय पर जैविक साक्ष्य एकत्र करना जांच की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के व्यापक उपयोग से गुजरात में अपराध जांच की कार्यप्रणाली अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बन रही है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-खाड़ी डीपवॉटर एनर्जी पाइपलाइन पर अटकलों का अंत, केंद्र ने गुजरात-ओमान कनेक्टिविटी परियोजना की खबरों को बताया निराधार

    भारत-खाड़ी डीपवॉटर एनर्जी पाइपलाइन पर अटकलों का अंत, केंद्र ने गुजरात-ओमान कनेक्टिविटी परियोजना की खबरों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । भारत और खाड़ी देशों के बीच समुद्र के भीतर ऊर्जा पाइपलाइन बिछाने संबंधी चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट और आधिकारिक स्थिति सामने रख दी है। हाल के दिनों में विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत सरकार गुजरात को ओमान और अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली एक महत्वाकांक्षी डीपवॉटर एनर्जी पाइपलाइन परियोजना पर तेजी से काम कर रही है। इन रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद ऊर्जा क्षेत्र में इस संभावित परियोजना को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि अब सरकार ने इन अटकलों को पूरी तरह निराधार बताते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने जारी बयान में कहा कि ‘मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन’ नामक किसी प्रस्ताव पर वर्तमान समय में मंत्रालय के स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं चल रहा है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि गुजरात को ओमान अथवा खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों से जोड़ने वाली ऐसी किसी ऊर्जा पाइपलाइन परियोजना के संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

    सरकार के अनुसार, इस विषय को लेकर ओमान सहित किसी भी खाड़ी देश के साथ मंत्रालय के किसी स्तर पर कोई सक्रिय चर्चा, वार्ता या परियोजना-आधारित बातचीत नहीं की जा रही है। मंत्रालय ने कहा कि विभिन्न मंचों पर फैल रही अटकलों और भ्रम को समाप्त करने के उद्देश्य से यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है, ताकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हितधारकों और आम जनता के बीच सही जानकारी पहुंच सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और खाड़ी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है और इसी कारण ऐसी परियोजनाओं को लेकर समय-समय पर संभावनाएं व्यक्त की जाती रही हैं। हालांकि किसी भी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा अवसंरचना परियोजना के लिए विस्तृत तकनीकी अध्ययन, आर्थिक व्यवहार्यता, कूटनीतिक सहमति और बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता होती है। सरकार के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल ऐसी किसी प्रक्रिया की शुरुआत भी नहीं हुई है।

    इस बीच सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद देश के लिए ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी क्रम में माल्टा के ध्वज वाला एलएनजी कैरियर ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आगे बढ़ा है। यह जहाज गुजरात के दहेज बंदरगाह के लिए बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस लेकर रवाना हुआ है और निर्धारित समय पर भारत पहुंचने की संभावना है।

    सरकार ने बताया कि जहाज का संचालन भारतीय प्रबंधन समूह द्वारा किया जा रहा है तथा समुद्री मार्गों पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विदेश मंत्रालय, भारतीय मिशन, शिपिंग कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखते हुए भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर संचालन सामान्य रूप से जारी है और किसी प्रकार की बाधा की सूचना नहीं है।

    वहीं मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए समुद्री क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। हाल ही में क्षेत्र में हुई घटनाओं के बाद संबंधित समुद्री प्राधिकरणों ने शिपिंग कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को सलाह जारी की है कि अगले निर्देश तक संघर्ष प्रभावित इलाकों में भारतीय नाविकों की तैनाती से बचा जाए। सरकार का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा दोनों मोर्चों पर स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि राष्ट्रीय हितों और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर अहमदाबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त सर्च ऑपरेशन में 131 अवैध बांग्लादेशी गिरफ्तार

    राष्ट्रीय सुरक्षा पर अहमदाबाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त सर्च ऑपरेशन में 131 अवैध बांग्लादेशी गिरफ्तार

    नई दिल्ली। गुजरात के अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया है। अहमदाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीमों ने शहर के विभिन्न इलाकों में देर रात छापेमारी कर बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच के बाद 131 लोगों की पहचान अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में की गई है। इसके अलावा करीब 160 अन्य संदिग्धों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच जारी है। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में शहर में चलाए गए सबसे बड़े अभियानों में से एक माना जा रहा है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह विशेष अभियान खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाया गया। इसके लिए अहमदाबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की कई टीमों को एक साथ विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया था। ऑपरेशन के दौरान शहर के संवेदनशील और घनी आबादी वाले इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से कुछ क्षेत्रों में अवैध रूप से विदेशी नागरिकों के रहने की सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

    क्राइम ब्रांच के अनुसार चंडोला, गुलाबनगर और खोडियारनगर समेत कई इलाकों में एक साथ छापेमारी की गई। इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के पहचान दस्तावेजों की जांच की गई और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई। जांच के दौरान 131 लोगों के पास भारत में रहने के वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक सत्यापन में इन लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई है। हालांकि सभी मामलों में विस्तृत जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि की संभावना न रहे।

    अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए अन्य 160 लोगों के दस्तावेजों और नागरिकता संबंधी विवरणों की भी जांच की जा रही है। पुलिस विभिन्न सरकारी अभिलेखों और पहचान दस्तावेजों का मिलान कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही उनके संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि सभी कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार की जा रही है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पहचान साबित करने का अवसर दिया जा रहा है।

    इस अभियान के साथ-साथ प्रशासन ने चंडोला झील क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज कर दी है। नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों ने क्षेत्र में बने कई अवैध ढांचों को हटाने का अभियान चलाया है। अधिकारियों का कहना है कि संरक्षित जलाशय क्षेत्र के आसपास अनधिकृत निर्माण पर्यावरण और शहरी नियोजन दोनों के लिए चुनौती बने हुए थे। इसलिए दस्तावेजों के सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया के बाद अवैध निर्माणों को हटाने का निर्णय लिया गया।

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शहर में पहचान और दस्तावेज सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन सभी विदेशी नागरिकों से वैध दस्तावेज रखने और संबंधित नियमों का पालन करने की अपील कर रहा है। वहीं जिन लोगों के पास आवश्यक कानूनी दस्तावेज नहीं पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विदेशी नागरिकों से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    अधिकारियों के अनुसार अवैध प्रवास और फर्जी दस्तावेजों के मामलों की रोकथाम के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। सीमा क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों पर भी निगरानी मजबूत की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पात्र मामलों में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अहमदाबाद में चलाया गया यह अभियान सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है।

  • CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक

    CM बनने से पहले तीखे तेवर… डीके शिवकुमार बोले- गुजरात नहीं ले जाने दूंगा कर्नाटक का हक


    बेंगलुरु।
    डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) कर्नाटक (Karnataka) के अगले मुख्यमंत्री (Chief Minister) बनने वाले हैं। हालांकि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उन्होंने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। डीके शिवकुमार ने सोमवार को कहाकि सरकार में आते ही वह तय करेंगे कि कर्नाटक का हक गुजरात नहीं चला जाए। शिवकुमार ने आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bangalore) की खिताबी जीत के बाद यह बयान दिया है। गौरतलब है आरसीबी ने आईपीएल के खिताबी मुकाबले में गुजरात टाइटंस को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है।


    गुजरात पर प्रभाव के इस्तेमाल का आरोप

    डीके शिवकुमार ने मीडिया से बातचीत में कहाकि कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) को आईपीएल फाइनल की मेजबानी करनी थी। राज्य सरकार ने भी इसकी अनुमति दी थी। लेकिन गुजरात ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और फाइनल की मेजबानी कर्नाटक से छीन ली। बुधवार को कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे डीके ने कहाकि यह हमारे क्रिकेट प्रशंसकों को निराश कर सकता है। हम जरूरी कदम उठा रहे हैं ताकि यह फिर कभी न हो। हालांकि, इसमें कुछ समय लगेगा।


    अहमदाबाद में हुआ था फाइनल

    आरसीबी और जीटी के बीच यह फाइनल मुकाबला गुजरात के अहमदाबाद शहर स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की जीत पर राजधानी बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य शहरों में जश्न का माहौल है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले महीने अहमदाबाद को आईपीएल फाइनल की मेजबानी के लिए नए वेन्यू के तौर पर चुना था। इससे पहले बेंगलुरु को इस फाइनल की मेजबानी करनी थी। लेकिन सांसदों और विधायकों के लिए टिकटों की मांग को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लिया गया।


    दिल्ली पहुंच गए डीके

    गौरतलब है कि कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया राज्य के अगले मंत्रिमंडल को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी आलाकमान से चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि दोनों नेता मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर सकते हैं। शिवकुमार और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया सोमवार दोपहर दिल्ली पहुंचे। शिवकुमार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। कांग्रेस नेतृत्व के कहने पर सिद्धरमैया के इस्तीफा देने के बाद वह इस जिम्मेदारी को संभालने जा रहे हैं।


    कब है शपथ ग्रहण

    कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार तीन जून को शाम चार बजकर पांच मिनट पर लोक भवन परिसर में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस दौरान कुछ विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेंगे। शिवकुमार को शनिवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद में अधिकतम 34 मंत्रियों को शामिल किए जाने का प्रावधान है।

  • गुजरात के सूरत में मुस्लिम युवक ने की महिला से छेड़छाड़, गुस्साई भीड़ ने आरोपी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

    गुजरात के सूरत में मुस्लिम युवक ने की महिला से छेड़छाड़, गुस्साई भीड़ ने आरोपी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा

    सूरत। गुजरात की डायमंड सिटी नाम से मशहूर सूरत में कुछ देर पहले छेड़छाड़ की एक घटना को लेकर जमकर हंगामा हुआ. शहर के व्यस्त इलाके में एक मुस्लिम युवक ने महिला से छेड़छाड़ की. पीड़िता की चीख-पुकार सुन मौके पर मौजूद भीड़ ने आरोपी युवक को जमकर पीटा. शिकायत के बाद पुलिस ने एक्शन लेते हुए फौरन आरोपी को गिरफ्तार किया है. इस घटना से आक्रोशित भीड़ ने छेड़छाड़ के आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के लिए अल्थान इलाके में थाने के बाहर खूब हंगामा और प्रदर्शन किया.
    स्थानीय लोगों ने थाने के बाहर नारेबाजी की. इस दौरान, उनकी पुलिस के साथ झड़प हुई. इसके बाद, पुलिस ने लोगों को मौके से खदेड़ा. थाने का घेराव करने आए लोगों में महिला और पुरुष दोनों शामिल थे. लोग अपने हाथों में लाठी और डंडे लिए नजर आए.
    आरोपी को पीटा
    जब ये घटना सामने आई तो लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया. इसके बाद 112 नंबर पर कॉल करके पुलिस को बुलाया गया. जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक ये खबर दावानल की तरह पूरे इलाके में फैल चुकी थी. इस वजह से बहुत सारे लोग वहां आ गए थे. इसके बाद, भीड़ ने पुलिस वैन से उतारकर आरोपी को पीटा. हालात बिगड़े तो और फोर्स बुलानी पड़ी और तब जाकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया.
    हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में
    भारी संख्या में पुलिस फोर्स इलाके में तैनात की गई है. ACP, सूरत ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है. हम लोगों से अपील करते हैं कि कृपया कानून-व्यवस्था अपने हाथ न लें. पुलिस अपना काम कर रही है. हम दोषी को कड़ी सजा देंगे.
    विधायक ने की शांति की अपील

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधायक मनु पटेल भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने भी लोगों से शांति बहाल करने की अपील की. उन्होंने कानून-व्यवस्था का पालन करने की अपील की. इस घटना के मद्देनजर, मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया है.

    क्राइम ब्रांच की टीम ने भी पूरे इलाके को राउंड अप किया. दूसरे थानों से भी पुलिस के जवान यहां पहुचे हैं.
    सूरत में ऐसा ही एक और घिनौना मामला

    सूरत की सरौली पुलिस ने इस घटना से पहले 21 वर्षीय मोजबीर को तीन साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में दबोचा था. बिहार निवासी आरोपी सरौली इलाके की एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करता था. बीते गुरुवार दोपहर जब पीड़िता की मां कुछ काम से बाहर गई थी, तब शेख ने उसे अगवा कर लिया और छत पर बने बाथरूम में ले गया. वहां उसने पीड़िता के साथ यौन उत्पीड़न शुरू कर दिया. इससे पहले कि वह कोई और जघन्य अपराध कर पाता, पीड़िता की मां उसे ढूंढते हुए छत पर पहुंच गई. स्थानीय लोग तुरंत इकट्ठा हो गए और शेख की पिटाई कर दी. सरौली पुलिस को सूचना दी गई और शेख के खिलाफ बलात्कार के मामले में बीएनएस (बाल यौन उत्पीड़न अधिनियम) और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.