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  • पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा

    पीएम मोदी का ब्लॉग 1000 साल बाद भी अडिग खड़ा है सोमनाथ विध्वंस नहीं पुनरुत्थान की गाथा


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर के इतिहास को याद करते हुए इसे भारत की आस्था संस्कृति और संघर्ष का प्रतीक बताया। 1026 में गजनी के महमूद द्वारा सोमनाथ पर किया गया आक्रमण जिसने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था आज से एक हजार साल पहले हुआ था। इस आक्रमण का उद्देश्य केवल मंदिर को नष्ट करना नहीं था बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति को भी नष्ट करना था। हालांकि इस आक्रमण के बावजूद आज भी सोमनाथ मंदिर पूरे गर्व और गौरव के साथ खड़ा है और यह भारत की अडिग आस्था और संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा सोमनाथ शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। यह मंदिर भारत के आत्मगौरव का शाश्वत प्रतीक है जो न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अमिट छाप भी छोड़ता है।

    सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व

    गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार सोमनाथ के दर्शन से व्यक्ति अपने पापों से मुक्त हो जाता है और उसे आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व ने इसे कई बार विदेशी आक्रमणों का निशाना बना दिया। विशेष रूप से 1026 में महमूद गजनवी द्वारा किया गया आक्रमण इस मंदिर के इतिहास का एक काला अध्याय था जिसने सोमनाथ को ध्वस्त कर दिया था।

    आक्रमण के बावजूद पुनर्निर्माण

    प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण लगातार होता रहा। 1951 में सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और इस मंदिर का वर्तमान स्वरूप 11 मई 1951 को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। यह घटना भारतीय आस्था और संस्कृति की विजयी गाथा बन गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में हुए इस पुनर्निर्माण समारोह का उल्लेख किया और बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीय स्वाभिमान और आस्था की एक शक्तिशाली मिसाल है।

    सरदार पटेल का योगदान

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को भी याद किया। 1947 में दीवाली के समय सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लिया था। यह उनका सपना था कि इस पवित्र मंदिर को फिर से खड़ा किया जाए और श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर सकें। उनका यह प्रयास भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुका है।

    सोमनाथ की प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण हमें यह सिखाता है कि भारत कभी नहीं हारता। उन्होंने यह भी बताया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल एक शारीरिक संरचना का पुनर्निर्माण नहीं था बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान का प्रतीक था। उन्होंने कहा सोमनाथ हमें यह संदेश देता है कि आस्था में शक्ति होती है जबकि घृणा और कट्टरता में विनाश की ताकत।

    भविष्य के लिए संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि अगर एक खंडित मंदिर को पुनर्निर्मित किया जा सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त कर सकता है। उन्होंने इस प्रेरणा के साथ नए संकल्प के साथ एक विकसित भारत के निर्माण की बात की। मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ आज भी हमारे विश्वास और आस्था का सबसे मजबूत आधार है जो हमें आगे बढ़ने और सफलता की ओर प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की गाथा को याद करते हुए यह स्पष्ट किया कि यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं है बल्कि यह भारतीय संस्कृतिस्वाभिमान और संघर्ष का प्रतीक है। 1026 के आक्रमण के बाद आज तक सोमनाथ ने हमें यह सिखाया है कि हमारी आस्था को न तो नष्ट किया जा सकता है और न ही इसे झुका जा सकता है। यही संदेश भारत को दुनिया भर में हर कठिनाई से निपटने की प्रेरणा देता है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर की गाथा को याद करते हुए कहा- यह भारतीय सभ्यता और साहस का प्रतीक है


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सोमनाथ मंदिर के विध्वंस और पुनर्निर्माण की गाथा को याद किया और इसे भारतीय सभ्यता की अमर चेतना का प्रतीक बताया। यह वही मंदिर है जिस पर आज से ठीक एक हजार वर्ष पहले यानी 1026 में गजनी के महमूद ने पहला भीषण आक्रमण किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से बात करते हुए इसे भारत की आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।

    सोमनाथ मंदिर का महत्व

    सोमनाथ मंदिर गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित एक अत्यधिक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है और यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। शास्त्रों के अनुसार इस मंदिर के दर्शन से पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इसी आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व के कारण यह मंदिर कई बार विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य बन चुका है लेकिन इसके बावजूद यह सदैव अपने स्थान पर अडिग खड़ा रहा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि “जय सोमनाथ! 2026 में हम उस पवित्र स्थल के पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने का स्मरण कर रहे हैं। बार-बार हुए हमलों के बावजूद हमारा सोमनाथ मंदिर आज भी अडिग खड़ा है। यह मंदिर भारत माता की उन करोड़ों वीर संतानों के स्वाभिमान और अदम्य साहस की गाथा है जिनके लिए अपनी संस्कृति और सभ्यता सर्वोपरि रही।”

    गजनी के महमूद द्वारा आक्रमण

    जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था जिसका उद्देश्य केवल मंदिर को तोड़ना नहीं था बल्कि भारतीय आस्था और संस्कृति को नष्ट करना था। यह आक्रमण भारतीय इतिहास का एक अत्यधिक कष्टकारी क्षण था लेकिन इसके बावजूद सोमनाथ के प्रति भारतीयों की आस्था और विश्वास कभी कम नहीं हुआ।

    सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद से यह भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण क्षण को याद करते हुए कहा कि यह गाथा केवल मंदिर के विध्वंस की नहीं बल्कि संघर्ष बलिदान और पुनर्निर्माण की कहानी है। यह मंदिर आज भी दुनिया को यह संदेश देता है कि आस्था को न तो समाप्त किया जा सकता है और न ही उसे झुकाया जा सकता है।

    सोमनाथ का पुनर्निर्माण और वर्तमान स्थिति

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारतीयों की न केवल आस्था बल्कि उनकी संकल्पशक्ति को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि एक खंडित मंदिर फिर से खड़ा हो सकता है तो भारत भी अपने प्राचीन गौरव के साथ पुनः दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

    आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश

    प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सोमनाथ की यह कहानी केवल भारत के इतिहास से जुड़ी नहीं है बल्कि यह भारत के पुनर्निर्माण और सामर्थ्य की भी गाथा है। वह मानते हैं कि आज के समय में जब भारत पुनः अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर गर्व महसूस करता है सोमनाथ मंदिर से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी आस्था और संस्कृति के साथ आगे बढ़ना कितना महत्वपूर्ण है।

    सोमनाथ के द्वारा दिया गया संदेश
    आज भी सोमनाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय समाज के अदम्य साहस संघर्ष और पुनर्निर्माण की जीवंत मिसाल भी प्रस्तुत करता है। पीएम मोदी ने अपनी ब्लॉग पोस्ट में इस तथ्य का उल्लेख किया कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के अदम्य साहस आत्मविश्वास और संस्कृति के प्रति आस्थाओं की महत्ता को दर्शाता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से पेश किया जो केवल आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह भारत की ताकत सामर्थ्य और संघर्ष की भी गाथा है। मोदी ने यह संदेश दिया कि जैसे सोमनाथ का पुनर्निर्माण हुआ वैसे ही भारत अपनी गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता के साथ पुनः उठ सकता है और दुनिया को मार्ग दिखा सकता है।

  • गुजरात के गांधीनगर में 100 लोग अस्पताल में भर्ती; पानी के सेंपल लिए

    गुजरात के गांधीनगर में 100 लोग अस्पताल में भर्ती; पानी के सेंपल लिए


    गांधीनगर।
    इंदौर (Indore) के बाद अब गुजरात (Gujarat) के गांधीनगर (Gandhinagar) के कई इलाकों में प्रशासन ने लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई बरतने की सलाह दी है। बताया जाता है कि टाइफाइड (Typhoid) के चलते 104 संदिग्ध मरीजों (104 Suspected patients) को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्वास्थ्य जांच में पता चला है कि प्रभावित क्षेत्रों का पीने का पानी असुरक्षित है जिसके बाद नगर निगम ने घर-घर सर्वेक्षण और क्लोरीन की गोलियां बांटना शुरू कर दिया है। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। मरीजों के इलाज के लिए 22 डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है। प्रशासन ने लोगों को पानी उबालकर पीने और साफ-सफाई बरतने की सलाह दी है।


    बच्चों समेत 104 मरीज भर्ती

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, गांधीनगर में बड़े पैमाने पर टाइफाइड के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बच्चों समेत 104 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बीते 3 दिनों में सिविल अस्पताल में टाइफाइड के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बाल चिकित्सा वार्ड में 104 मरीजों को भर्ती कराया गया है। खुद उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने शनिवार को गांधीनगर सिविल अस्पताल में हालात की समीक्षा की।


    22 डॉक्टरों की टीम गठित

    हर्ष संघवी ने बताया कि अस्पताल में स्थिति का जायजा लेने के लिए उप जिलाधिकारी समेत वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। भर्ती मरीजों के परिवारों के लिए भोजन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गई है। मरीजों के इलाज के लिए 22 डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई है।


    अमित शाह ने ली हालात की जानकारी

    उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जिलाधिकारी से फोन पर 3 बार हालात की जानकारी ली। 104 संदिग्ध मामले सामने आए हैं। प्रशासन इलाज के साथ ही निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है। मरीजों और उनके परिवारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिशें हो रही हैं।


    इलाकों से लिए पानी के नमूने

    वहीं सिविल अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मीता पारिख ने बताया कि गांधीनगर के सेक्टर 24, 25, 26 और 28 के साथ-साथ आदिवाड़ा क्षेत्र से बच्चों सहित कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लोगों की हालत स्थिर है। इन क्षेत्रों से पानी के सेंपल जमा किए गए हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पीने का पानी सुरक्षित नहीं है।


    पानी उबाल कर पीने की सलाह

    यही कारण है कि गांधीनगर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। प्रभावित इलाकों में लोगों को पानी उबाल कर पीने और घर का बना खाना खाने की सलाह दी गई है। नगर निगम पानी की टंकियों की सफाई पर जोर दे रहा है। साथ ही क्लोरीन की गोलियां भी बांट रहा है।

    इंदौर में गर्म है माहौल
    यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई है। इसे लेकर माहौल गर्म है। इंदौर प्रशासन ने भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक छह लोगों के मारे जाने की बात कही है तो स्थानीय नागरिक 6 महीने के बच्चे समेत 16 लोगों के मारे जाने की बात कह रहे हैं। वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव का कहना है कि उनको 10 मरीजों की मौत की जानकारी मिली है। बता दें कि इंदौर नगर निगम पड़ोसी खरगोन जिले के जलूद में नर्मदा नदी से पानी को 80 किलोमीटर दूर लाकर घर-घर पहुंचाता है।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।

  • सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक

    सूरत कोर्ट ने 7 साल की बच्ची की जैन साध्वी दीक्षा पर लगाई रोक


    सूरत । गुजरात जिले की फैमिली कोर्ट ने 7 साल की एक बच्ची को जैन साध्वी बनने की दीक्षा लेने से रोक दिया है। यह फैसला बच्ची के पिता की याचिका पर लिया गया जिसमें उन्होंने दावा किया कि उनकी अलग रह रही पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को दीक्षा दिलाना चाहती थी। अदालत ने मां से हलफनामा देने को कहा है कि वह बच्ची को साध्वी बनने की दीक्षा में शामिल न होने दे।

    सूरत फैमिली कोर्ट की जज एसवी मंसूरी ने आदेश दिया कि 8 फरवरी 2026 को मुंबई में होने वाले दीक्षा समारोह पर फिलहाल रोक रहेगी। याचिकाकर्ता पिता के वकील समाप्ति मेहता ने बताया कि अदालत ने अंतरिम रोक लगाने की मांग मान ली है। अदालत ने मां से लिखित में जवाब मांगा है जिसमें उन्हें स्पष्ट करना होगा कि वह बच्ची को दीक्षा समारोह में शामिल नहीं होने देंगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।

    सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मां ने यह विवाद लगभग एक साल पहले उत्पन्न होने के बाद पति का घर छोड़ दिया था। महिला अपने माता-पिता के साथ रहने लगी साथ ही उसने अपनी बेटी और बेटे को भी साथ रखा। पिता ने 10 दिसंबर को कोर्ट में याचिका दायर की जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी उनकी मर्जी के खिलाफ बच्ची को साध्वी बनाने का निर्णय ले रही है।

    पिता ने अदालत को बताया कि उन्होंने 2012 में शादी की थी और उनके दो बच्चे हैं। 2024 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। पिता ने याचिका में कहा कि बच्ची के साध्वी बनने के मुद्दे पर दोनों ने पहले सहमति बनाई थी कि जब बच्ची बालिग हो जाएगी तभी वह साध्वी बनने का निर्णय लेगी। इसके बावजूद पत्नी चाहती थी कि बच्ची फरवरी 2026 में मुंबई में बड़े समारोह में साध्वी बने।

    पिता ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी पत्नी केवल तभी घर वापस आएगी जब वह बच्ची की दीक्षा के लिए रजामंद होगी। पिता ने अदालत से यह भी कहा कि वह गार्जियंस एंड वार्ड्स एक्ट 1890 के तहत बच्ची के हितों की रक्षा के लिए उसका कानूनी अभिभावक बनाना चाहते हैं।

    अदालत ने पिता की याचिका पर मां को नोटिस जारी किया और 22 दिसंबर तक जवाब मांगा। जज मंसूरी ने स्पष्ट किया कि बच्ची की उम्र देखते हुए और उसके भविष्य के हित को ध्यान में रखते हुए दीक्षा पर रोक आवश्यक है। अदालत का यह निर्णय बच्चों के अधिकारों और उनकी इच्छाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    जैन समुदाय में दीक्षा एक धार्मिक प्रक्रिया है लेकिन इस मामले ने दिखाया कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे बड़े निर्णय लेने के लिए मजबूर करना कानूनी और सामाजिक दृष्टि से विवादास्पद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में बच्चों की भागीदारी तभी होनी चाहिए जब वे पूरी तरह से अपनी मर्जी से निर्णय ले सकें।

    अदालत का यह निर्णय न केवल इस परिवार के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक संदेश है कि बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। फिलहाल बच्ची को साध्वी बनने की प्रक्रिया से रोक दिया गया है और मां से हलफनामा लेने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। अगली सुनवाई 2 जनवरी 2026 को होगी जिसमें अदालत पूरी स्थिति की समीक्षा करेगी।

  • सूरत में अजीब मामला, श्मशान में अंतिम संस्कार से रोका, शव लेकर अस्पताल लौटे परिजन

    सूरत में अजीब मामला, श्मशान में अंतिम संस्कार से रोका, शव लेकर अस्पताल लौटे परिजन


    नई दिल्‍ली । गुजरात(Gujarat) के सूरत में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न सिर्फ आम लोगों को बल्कि अस्पताल प्रशासन (Administration)और श्मशान घाट कर्मचारियों को भी हैरानी में डाल दिया. दरअसल एक महिला की मौत के बाद उसका शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान(crematorium) घाट ले जाया गया, लेकिन वहां से बिना दाह-संस्कार के ही शव को दोबारा अस्पताल वापस लाना पड़ा.

    अर्थी पर शव लेकर फिर अस्पताल पहुंचे परिजन
    मामला सूरत के पांडेसरा इलाके के शिव नगर में रहने वाली 57 साल की सुनीता देवी बृजनंदन तांती से जुड़ा है. परिजनों के अनुसार, सुनीता देवी लंबे समय से बीमार थीं और उन्हें पैरालिसिस की समस्या थी. 13 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे उन्होंने अपने घर में अंतिम सांस ली. मौत के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे.

    श्मशान घाट पहुंचने पर वहां के संचालकों ने मृतक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे. परिजनों के पास ये कागजात मौजूद नहीं थे, जिसके कारण श्मशान घाट प्रशासन और परिजनों के बीच विवाद हो गया. नियमों के अनुसार कागजात के अभाव में अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया गया.

    मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अस्पताल पहुंचे थे परिजन
    मामला बढ़ने पर पुलिस को भी सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अंतिम संस्कार संभव नहीं है. इसके बाद प्रशासन की सलाह पर परिजन शव को सूरत के न्यू सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला की मौत हुई थी.

    न्यू सिविल अस्पताल में अर्थी के रूप में सजे शव को स्ट्रेचर पर लाया गया. शव पर अंतिम संस्कार के वस्त्र और फूल माला देख अस्पताल का स्टाफ, डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी भी चौंक गए. अस्पताल के इतिहास में यह शायद पहला मामला था जब शव श्मशान घाट से वापस जांच के लिए अस्पताल लाया गया.

    शव की दोबारा जांच
    अस्पताल में महिला डॉक्टर ने शव की दोबारा जांच की और औपचारिक रूप से मृत घोषित किया. इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात तैयार किए गए. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 8 से 10 घंटे का समय लग गया.

    दस्तावेज मिलने के बाद परिजन शव को फिर से उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे, जहां विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.. मृतका के पड़ोसी आनंद कुमार जायसवाल ने बताया कि नियमों और कागजी प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण यह स्थिति बनी.

  • पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?

    पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?


    नई दिल्‍ली । कभी-कभी ऐसे मामले सामने आते हैं जो लोगों के होश उड़ा देते हैं. गुजरात (Gujarat)के बनासकांठा (Banaskantha)जिले के पडालिया गांव(Padalia village) से भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां पर दोपहर करीब 500 लोगों की भीड़ ने पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट(Revenue Department) के कम से कम 47 अधिकारियों पर हमला कर दिया. इसमें करीब 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. जानिए आखिर भीड़ कैसे उग्र हो गई?

    क्या है मामला
    मामले को लेकर बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू अधिकारियों की एक जॉइंट टीम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सर्वे नंबर 9 एरिया में नर्सरी और प्लांटेशन का काम कर रही थी. उन्होंने बताया कि अचानक करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, पत्थर फेंके और तीर-कमान का इस्तेमाल किया. इस हमले की वजह से कई अधिकारी घायल हो गए हैं हालांकि उनकी हालत स्थिर है.

    घायल हुए 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि 11 को आगे के इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हमला किस वजह से हुआ. यह जगह दांता तालुका में है, जो अंबाजी तीर्थस्थल से 14 km दूर है. इस वारदात के बाद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है.