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  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग आज, 21 विपक्षी दलों के नेता होंगे शामिल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन शनिवार को मॉक महाभियोग आयोजित करने जा रहा है। इस कार्यक्रम में विपक्ष के करीब 21 राजनीतिक दलों के नेता शामिल होंगे। आयोजन दोपहर 3:30 बजे राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर किया जाएगा। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर गठबंधन लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस कार्यक्रम को चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    दरअसल, INDIA गठबंधन का मॉक महाभियोग कार्यक्रम पहले शुक्रवार को आयोजित किया जाना था, लेकिन दिल्ली में भारी बारिश के कारण इसे टालना पड़ा। अब इसे शनिवार दोपहर 3:30 बजे आयोजित करने का फैसला लिया गया है। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और विभिन्न वामपंथी दलों के नेता हिस्सा लेंगे। राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और SIR प्रक्रिया से प्रभावित लोगों के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाना चाहता है।

    कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष मीरा कुमार करेंगी। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इसके बाद अलग-अलग विपक्षी दलों के प्रतिनिधि निर्धारित समय के भीतर अपनी बात रखेंगे। आयोजन में करीब 30 नेताओं के संबोधन की संभावना जताई गई है। कार्यक्रम को संसद की कार्यवाही की तर्ज पर संचालित करने की तैयारी है। इसमें प्रस्ताव पेश करने, नेताओं के भाषण और चर्चा के लिए एक निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि, यह पूरी कवायद प्रतीकात्मक होगी। इसे वास्तविक संवैधानिक महाभियोग की प्रक्रिया नहीं माना जाएगा।

    इस आयोजन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को वोट चोरी के आरोपों पर संसद में बहस करने की चुनौती दी है। लखनऊ में भाजपा की राज्य कार्यसमिति की बैठक के दौरान शाह ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने को तैयार है। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद अंपायर को दोष देने के बजाय मेहनत करनी चाहिए। शाह की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब विपक्ष चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और SIR को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

    मॉक महाभियोग के बाद INDIA गठबंधन अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली भी आयोजित करेगा। इस रैली में मुख्य रूप से वोट चोरी के आरोपों और विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का मुद्दा उठाया जाएगा। विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में हैं। मॉक महाभियोग और प्रस्तावित रैली को गठबंधन के साझा अभियान के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखने और इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे।

  • इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना

    इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना


    इंदौर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाले कांग्रेस के आंदोलन को लेकर इंदौर में पार्टी नेताओं ने विरोध का एक अलग तरीका अपनाया है। यहां कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला रेलवे पार्सल के जरिए दिल्ली भेजने के लिए बुक कराया है। इसके लिए मालवा एक्सप्रेस का इस्तेमाल किया गया है। नेताओं ने पोस्टर-पुतले को बाकायदा रेलवे के पार्सल गोदाम में जमा कराया और इसकी बुकिंग की रसीद भी प्राप्त की। इस तरह दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी चर्चा में आ गई है।

    जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता विवेक खंडेलवाल गिरीश जोशी और देवेंद्र सिंह यादव रेलवे के कॉमर्शियल विभाग के पार्सल गोदाम पहुंचे थे। यहां पोस्टर-पुतले को एक बॉक्स में पैक कराया गया। इसके बाद रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पार्सल की बुकिंग कराई गई। नेताओं ने इसकी रसीद भी ली। पार्सल पर पोस्टर चिपकाने और जावक क्रमांक दर्ज कराने जैसी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया को रेलवे के माध्यम से दस्तावेजी रूप देते हुए पोस्टर-पुतले को दिल्ली भेजने की व्यवस्था की।

    पोस्टर पर चलो दिल्ली और वोट चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे लिखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर भी लगाई गई है। कांग्रेस नेताओं का उद्देश्य इस पोस्टर-पुतले को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले आंदोलन तक पहुंचाना है। पार्टी की ओर से 1 नवंबर को आयोजित किए जा रहे इस प्रदर्शन में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया जाना है।

    इस विरोध प्रदर्शन के लिए रेलवे पार्सल का इस्तेमाल करना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पोस्टर बैनर और अन्य प्रचार सामग्री सड़क मार्ग या निजी वाहनों से भेजी जाती है। लेकिन इंदौर के कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर-पुतले को रेलवे पार्सल के जरिए भेजने का विकल्प चुना। इसके लिए उन्होंने केवल सामग्री भेजने की व्यवस्था ही नहीं की बल्कि बुकिंग की रसीद लेकर पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप भी दिया।

    दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाला आंदोलन कांग्रेस की ओर से चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। इंदौर से भेजे जा रहे पोस्टर-पुतले के जरिए स्थानीय कांग्रेस नेता भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज कराना चाहते हैं। पोस्टर पर लिखे नारे पार्टी के विरोध का संदेश दे रहे हैं। हालांकि पोस्टर-पुतले के दिल्ली पहुंचने और प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल को लेकर आगे की स्थिति संबंधित आयोजन पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस के जरिए रेलवे पार्सल से भेजने के लिए बुक कराया गया है। 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इस कदम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

  • वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष

    वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज होने जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया ने जन महाभियोग चलाने का ऐलान किया है। इसके तहत 30 अक्टूबर को दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट आयोजित की जाएगी जिसमें विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली और जनसभा आयोजित करने की तैयारी है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन के नेता 30 अक्टूबर को एक साथ आकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता का फैसला सामने रखेंगे। विपक्ष ने इस आयोजन को पब्लिक इम्पीचमेंट यानी जन महाभियोग का नाम दिया है। हालांकि यह संसदीय प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं बल्कि राजनीतिक विरोध का एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम होगा। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाना है।

    विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसी मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को घेरने की रणनीति बनाई है। हालांकि निर्वाचन आयोग विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करता रहा है। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।

    30 अक्टूबर को होने वाली मॉक पार्लियामेंट के आयोजन स्थल को लेकर दिल्ली के अशोक होटल का नाम सामने आया है। हालांकि आयोजन की तैयारियों और स्थान के संबंध में अंतिम जानकारी की पुष्टि होना बाकी है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा और वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से विपक्षी दल एकजुट होकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा प्रमुखता से उठाना चाहता है।

    मॉक पार्लियामेंट के बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की बड़ी रैली प्रस्तावित है। कांग्रेस ने इसे दिल्ली चलो मार्च और वोट चोरी के खिलाफ जनआंदोलन से जोड़कर पेश किया है। केसी वेणुगोपाल के मुताबिक इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख जागरूक नागरिकों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से संपर्क कर नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में दिल्ली में मौजूदगी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

    विपक्ष की इस रणनीति को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली को कितना जनसमर्थन मिलता है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में नए टकराव का केंद्र बनता नजर आ रहा है।

  • इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली

    इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली


    इंदौर । मध्यप्रदेश में भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। इंदौर में 27 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से जनसंघर्ष महारैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी सरकार की नीतियों आम जनता से जुड़े मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महारैली के माध्यम से जनता की समस्याओं को उठाने के साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

    इंदौर शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित इस महारैली की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से होगी। यहां से कार्यकर्ता और पार्टी नेता रैली के रूप में रवाना होंगे। प्रस्तावित मार्ग में पढ़ीनाथ चौराहा हरसिद्धि मंदिर और मोती तबेला शामिल हैं। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। वहां कांग्रेस नेता राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध के साथ निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाने वाली है। पार्टी उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महारैली को महत्वपूर्ण कार्यक्रम मान रही है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और आधिकारिक तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

    कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से जुड़ी समस्याओं को जनता के बीच उठाने और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

    महारैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के विभिन्न स्तरों पर संपर्क शुरू किया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर शहर और जिला कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों से भी कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों को कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    युवा कांग्रेस सेवादल एनएसयूआई महिला कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के पदाधिकारियों को भी महारैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। वर्तमान और पूर्व पार्षदों पार्षद प्रत्याशियों तथा पंचायतों के पंच सरपंच और अन्य पदाधिकारियों से भी समर्थकों के साथ पहुंचने की अपील की गई है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में संगठन के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जा सके।

    अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली इस महारैली पर रहेगी। कांग्रेस इसे केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का माध्यम बता रही है। रैली के बाद सौंपे जाने वाले ज्ञापन में उठाई गई मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय हो सकती है।

  • MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे

    MP में दशहरे पर कांग्रेस का अनोखा विरोध, ज्ञानेश कुमार के पुतले जलाने की तैयारी, गांव-गांव बांटे जाएंगे वोट चोरी के पर्चे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने अपने आंदोलन को तेज करने की तैयारी कर ली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी AICC के दो महीने के वोट बचाओ देश बचाओ अभियान के तहत प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी ने दशहरे से लेकर नवंबर के आखिरी सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन जनसंपर्क पदयात्रा और चौपालों का कार्यक्रम तय किया है। इसके जरिए कांग्रेस मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाने की कोशिश करेगी।

    कांग्रेस की योजना के मुताबिक दशहरे के अवसर पर मध्य प्रदेश के सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। पार्टी कार्यकर्ता सार्वजनिक सभाओं और जनसंपर्क कार्यक्रमों के दौरान वोट चोरी के आरोपों से संबंधित जानकारी वाले पर्चे बांटेंगे। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर पदयात्रा साइकिल रैली और बाइक रैलियां निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी स्थानीय प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाएगी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार AICC के परिपत्र में दशहरे पर रावण की जगह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाने का स्पष्ट निर्देश नहीं है। पुतला दहन को ब्लॉक स्तर पर आयोजित मार्च के समापन कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

    आंदोलन के अगले चरण में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियां महात्मा गांधी या डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा से एसडीएम कार्यालय अथवा स्थानीय प्रशासनिक मुख्यालय तक मार्च निकालेंगी। कार्यक्रम के समापन पर संविधान के अनुच्छेद 326 का पाठ किया जाएगा और राष्ट्रगान गाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। कांग्रेस इन गतिविधियों के माध्यम से मताधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहती है।

    पार्टी 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक वोट बचाओ देश बचाओ चौपाल अभियान भी चलाएगी। इसकी शुरुआत प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तथा जिला अध्यक्षों की प्रेस कॉन्फ्रेंस से होगी। इसके बाद जिला स्तर पर समन्वय बैठकें और ब्लॉक स्तर पर बूथ लेवल एजेंट यानी BLA के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन पर जोर रहेगा।

    अभियान के तहत बूथ लेवल एजेंट उन मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाए गए हैं या जिनकी प्रविष्टियों में गड़बड़ी की आशंका है। सत्यापन के बाद संबंधित रिकॉर्ड और मतदाता डोजियर ब्लॉक कांग्रेस कार्यालयों में जमा किए जाएंगे। इसके बाद गांव-गांव में चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की जाएगी। इन चौपालों में प्रभावित बताए जा रहे मतदाताओं बुजुर्गों पंचायत प्रतिनिधियों और अन्य नागरिकों को शामिल करने की योजना है। कांग्रेस कार्यकर्ता पर्चे बांटकर मतदाता सूची से जुड़े मामलों की जानकारी भी साझा करेंगे।

    इस आंदोलन का एक बड़ा चरण 1 नवंबर को प्रस्तावित है। कांग्रेस के कार्यक्रम के मुताबिक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के समन्वय से राष्ट्रीय रैली आयोजित की जाएगी। इसमें सांसदों विधायकों प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों फ्रंटल संगठनों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी का आह्वान किया गया है। इस रैली के जरिए पार्टी मतदाता सूची और कथित वोट चोरी के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है।

    नवंबर के अंतिम सप्ताह में कांग्रेस दिल्ली कूच की तैयारी भी कर रही है। 25 और 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर दिल्ली चलो कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। तय रोडमैप के अनुसार मध्य प्रदेश के कार्यकर्ता 25 नवंबर को ग्वालियर में एकत्र होंगे और अगले दिन वाहनों से दिल्ली रवाना होंगे। अन्य राज्यों से भी अलग-अलग मार्गों के जरिए यात्राओं को दिल्ली पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

    आंदोलन के सभी चरणों के लिए प्रदेश जिला और ब्लॉक इकाइयों को वाहनों यात्रियों तथा रूट कैप्टन की जानकारी केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। AICC कनेक्ट सेंटर और केंद्रीय नियंत्रण कक्ष अभियान की निगरानी तथा समीक्षा करेंगे। अब देखना होगा कि कांग्रेस का यह अभियान प्रदेश में कितना व्यापक होता है और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों पर आगे क्या राजनीतिक तथा प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

  • भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग

    भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग


    नई दिल्ली। लंदन में यूट्यूबर ध्रुव राठी के प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में ध्रुव राठी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे तो दूसरी ओर उनके विरोध में भी लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ने लगा। हालात को संभालने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को अलग रखा ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
    ध्रुव राठी ने संसद चौक पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने कभी भारत पर शासन किया था और आज भारतीय नागरिक उसी देश की संसद के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं। राठी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि अपने देश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती लेकिन लंदन में लोग खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें उनके घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि ये आरोप राठी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
    राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति हो। उनके मुताबिक यह मांग इसलिए उठाई जा रही है ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें और प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने परिवार और परिचितों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा करने की अपील की।
    इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा ने किया था। इसे ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारतीय छात्र संगठनों और प्रवासी भारतीय समूहों का समर्थन भी मिला। प्रदर्शन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए। इसके साथ ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देने की कोशिश की गई। आयोजकों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना जरूरी है।
    दूसरी ओर ध्रुव राठी के विरोध में भी एक जवाबी प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंडिया डायस्पोरा यूके ने भारत समर्थक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। संगठन के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय मजबूत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में खड़ा है। इस तरह एक ही स्थान पर अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समूह आमने-सामने आ गए।
    दोनों पक्षों की ओर से लगातार नारेबाजी के कारण माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर समूह दूसरे की आवाज को दबाने के लिए तेज नारे लगाने लगा। इसके बाद पुलिस ने दोनों समूहों के बीच दूरी बनाए रखी। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि भारत की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल-प्रियंका का मोर्चा, CJP के अभिजीत दीपके की मुहिम पर पड़ा असर?


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध लगातार तेज हो रहा है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा पिछले दो दिनों से चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन में सक्रिय नजर आए हैं। दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिरासत में भी लिए गए। 7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पुलिस की बैरिकेडिंग पार कर आकाशवाणी भवन परिसर तक पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध जारी रखा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस मुहिम को भी चर्चा में ला दिया है, जिसमें वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दीपके ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

    चुनाव आयोग पर रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद

    राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग तथा भारतीय जनता पार्टी पर मतदाता सूची और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। हाल में एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कथित मतभेद का दावा किया गया था। चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।

    CJP ने भी इस विवाद को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। संगठन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कई मांगें उठा रहा है।

    CJP और कांग्रेस के मुद्दे एक, रास्ते अलग

    कांग्रेस और CJP दोनों ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन दोनों की आंदोलन की रणनीति अलग रही है। इससे पहले जब अभिजीत दीपके ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर लंबा आंदोलन किया था, तब राहुल गांधी उनके प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    अब ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर कांग्रेस ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की लगातार सक्रियता ने इस आंदोलन को विपक्ष की मुख्यधारा की राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

    आकाशवाणी भवन में राहुल-प्रियंका का धरना

    7 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए और कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा बैरिकेड पार कर आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहीं बैठकर विरोध जारी रखा।

    रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान कांग्रेस के दोनों नेताओं के साथ दूसरे विपक्षी दलों के नेता नजर नहीं आए। इसी वजह से INDIA ब्लॉक के भीतर समन्वय को लेकर भी चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दूसरे दलों की गैरमौजूदगी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दावे सामने आए हैं और सभी विपक्षी दलों की ओर से इस पर कोई एकसमान आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

    CJP की फिर दिल्ली कूच की तैयारी

    इस बीच अभिजीत दीपके भी अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP का कहना है कि यह प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर होगा।

    CJP के अनुसार, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में कई छात्र संगठनों और अन्य समूहों के शामिल होने की योजना है। संगठन ने संकेत दिया है कि अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में भी वह आंदोलन जारी रखने की कोशिश करेगा।

    कौन सा मुद्दा किसके हाथ में?

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की गतिविधियों में बंटा दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में सीधे सड़क पर उतरकर मुद्दा उठाया है, जबकि CJP अपने अलग संगठनात्मक नेटवर्क के जरिए प्रदर्शन की तैयारी कर रही है।

    ऐसे में 10 अक्टूबर का प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि CJP अपने आंदोलन को कितना विस्तार दे पाती है और कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद उसके अभियान की सार्वजनिक गूंज किस तरह आगे बढ़ती है। फिलहाल चुनाव आयोग ने अपने खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है, जबकि विपक्षी दल इन मुद्दों पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

  • बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल

    बेंगलुरु में आज CJP का प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, ध्रुव राठी-प्रकाश राज भी होंगे शामिल


    बेंगलुरु। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर बेंगलुरु में गुरुवार, 8 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन करेगी। फ्रीडम पार्क में होने वाले इस कार्यक्रम में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज के भी शामिल होने की पुष्टि हुई है।

    10:30 बजे शुरू होगा प्रदर्शन

    CJP की ओर से फ्रीडम पार्क में सुबह 10:30 बजे से प्रदर्शन और ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में कर्नाटक के अलग-अलग जिलों से ऐसे लोगों के पहुंचने की बात कही गई है, जिनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए हैं। आयोजकों के मुताबिक, इन लोगों की बात सुनी जाएगी और उनकी शिकायतों को सामने रखा जाएगा।

    इसके बाद CJP की ओर से ‘चप्पल प्रदर्शन’ भी किया जाएगा। पार्टी के मुताबिक, यह प्रदर्शन SIR को लेकर उसके विरोध का हिस्सा है।

    ध्रुव राठी ने वीडियो जारी कर की अपील

    ध्रुव राठी के बेंगलुरु पहुंचने की जानकारी CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और प्रकाश राज की ओर से साझा किए गए वीडियो के जरिए सामने आई। राठी ने भी वीडियो संदेश में 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की बात कही और लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने की अपील की। उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की भी अपील की है।

    प्रकाश राज ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर राठी को बेंगलुरु कार्यक्रम का ‘स्पेशल गेस्ट’ बताया। उन्होंने लोगों से बड़ी संख्या में फ्रीडम पार्क पहुंचने की अपील की है।

    SIR पर क्या है प्रदर्शनकारियों की आपत्ति?

    CJP और प्रदर्शन से जुड़े आयोजकों का आरोप है कि SIR के दौरान कई पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इसी मुद्दे पर ‘पीपल्स ट्रिब्यूनल’ में कथित तौर पर प्रभावित लोगों की शिकायतें दर्ज की जाएंगी।

    आयोजकों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची में नामों को लेकर जवाबदेही की मांग की है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी।

    दिपके करेंगे लोगों से बातचीत

    CJP संस्थापक अभिजीत दिपके बेंगलुरु में उन स्थानीय लोगों से बातचीत करेंगे, जिनका दावा है कि SIR के दौरान उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इसके बाद फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन किया जाएगा।

    CJP पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग और SIR को लेकर प्रदर्शन कर रही है। इससे पहले पार्टी के नेतृत्व में मुंबई समेत अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन हो चुके हैं।

    10 अक्टूबर को दिल्ली में भी प्रदर्शन

    बेंगलुरु के बाद CJP की ओर से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन की घोषणा की गई है। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी। ध्रुव राठी ने भी अपने वीडियो संदेश में लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

    इस बीच, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल भी दिल्ली में प्रदर्शन कर चुके हैं। विपक्ष SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि चुनाव आयोग ने प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों पर अपना पक्ष अलग-अलग मौकों पर रखा है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 2006 के आत्महत्या मामले में विजिलेंस जांच के आदेश, बाहरी दबाव के आरोपों की होगी पड़ताल

    CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 2006 के आत्महत्या मामले में विजिलेंस जांच के आदेश, बाहरी दबाव के आरोपों की होगी पड़ताल


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े वर्ष 2006 के एक मामले में केरलम सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला उनके राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के रूप में कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस निदेशक को मामले में बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों की गहन जांच करने और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़ा मामला

    यह मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या से संबंधित है। वह केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत एमसी रोड के उन्नयन कार्य में शामिल PATI-BEL कंसोर्टियम से जुड़े थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीन के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम दर्ज था।

    अब जांच के केंद्र में वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया है कि मामले में बाहरी दबाव डाला गया और शुरुआती जांच को प्रभावित किया गया था। गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, चेन्निथला ने विजिलेंस निदेशक को निर्देश दिया है कि पूरे मामले और कथित बाहरी प्रभाव की जांच की जाए तथा सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

    विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो करेगा जांच

    समाचार एजेंसी के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) इन आरोपों की पड़ताल करेगा। जांच का उद्देश्य कथित अनियमितताओं और शुरुआती जांच में हस्तक्षेप के आरोपों की सच्चाई का पता लगाना है।

    फिलहाल, जांच के आदेश दिए जाने का अर्थ आरोपों की पुष्टि होना नहीं है। मामले में आरोपों की वास्तविकता जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।

    SIR को लेकर भी बढ़ा है विवाद

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। शुक्रवार को दिल्ली और मुंबई में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और युवा समूहों ने प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप लगाए।

    विवाद उस समय और बढ़ गया, जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फैसलों तथा प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।

    इस तरह, ज्ञानेश कुमार से जुड़े पुराने मामले में विजिलेंस जांच के आदेश और SIR को लेकर जारी राजनीतिक विरोध ने चुनाव आयोग के कामकाज तथा उससे जुड़े विवादों को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • 30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब

    30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले उनसे पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल किया गया। जवाब में दीपके ने कहा कि उनकी फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों का आपस में क्या संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ फंडिंग का स्रोत बताने से चुनाव व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ जाएगा। उनके बयान में उन्होंने अपने महंगे जूतों और विदेश यात्रा का भी जिक्र किया।

    दीपके की पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से इसे जेल भरो आंदोलन बताया गया है। हालांकि मुंबई पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क में आयोजन को लेकर 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश और क्षेत्र के साइलेंस जोन होने की स्थिति लागू होती है। इसके बावजूद दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस तरह वह चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं उसी तरह क्या वह अपनी पार्टी की फंडिंग का स्रोत भी सार्वजनिक कर सकते हैं तो दीपके ने सवाल को ही गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी सार्वजनिक रूप से आने वाली फंडिंग की जानकारी बता भी दें तो इससे चुनाव कैसे ठीक हो जाएंगे। उन्होंने फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों के बीच संबंध पर सवाल उठाया।

    इसी बातचीत में उनसे यह भी पूछा गया कि इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संसाधन कहां से आ रहे हैं। इस पर दीपके ने अपने जूतों की कीमत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 30000 रुपये के जूते पहनते हैं और उन्हें यह बताने में कोई शर्म नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका भी जा चुके हैं और वहां से भारत लौटकर अलग-अलग राज्यों में यात्रा करने की क्षमता रखते हैं। उनका कहना था कि अगर वह अमेरिका जाने वाली फ्लाइट ले सकते हैं तो मुंबई से दिल्ली तक भी यात्रा कर सकते हैं।

    फंडिंग के सवाल पर उनका यह जवाब ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर बदलाव शामिल हैं।

    इससे पहले 1 अक्टूबर को दीपके को मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में समर्थकों के साथ तख्तियां लेकर मौजूद रहने के बाद पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मरीन ड्राइव थाने ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। 2 अक्टूबर को भी मुंबई और दिल्ली में चुनाव आयोग से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबर है।

    दीपके ने कहा है कि मुंबई के बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। रिपोर्टों में गोवा बेंगलुरु और कोलकाता समेत अन्य शहरों में प्रदर्शन की योजना का भी उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा है कि अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    इस तरह फंडिंग और आंदोलन के खर्च को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके का जवाब अब चर्चा में है। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता का हवाला देते हुए कहा कि महंगे जूते पहनना या विदेश यात्रा करना अपने आप में पार्टी की फंडिंग के स्रोत का जवाब नहीं है। वहीं पार्टी के आंदोलन और उसकी वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवाल आगे भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।