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  • थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।

    TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।

    यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।

    TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।

    हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।

    विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।

    फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।

    दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।

  • अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका

    अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका


    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके इन दिनों मुंबई में हैं, जहां वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह चेहरे पर रुमाल से नकाब बांधकर सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उन्होंने इस दौरान बताया कि कई महीनों बाद उन्हें इस तरह अकेले सड़क पर चलने का मौका मिला है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने के बाद अभिजीत दीपके काफी चर्चित हो चुके हैं। उनके समर्थकों और आलोचकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में आम लोगों की तरह सार्वजनिक जगहों पर अकेले घूमना उनके लिए आसान नहीं रहता। मुंबई में जब ट्रैफिक जाम के कारण उनकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी, तब उन्होंने कार से उतरकर पैदल चलने का फैसला किया।

    दीपके ने इस दौरान अपने चेहरे को रुमाल से ढक लिया था। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने इस पल को कैमरे में रिकॉर्ड किया और उनसे सड़क पर अकेले चलने के अनुभव के बारे में पूछा। इस पर दीपके ने खुशी जताते हुए कहा कि कई महीनों बाद वह इस तरह सड़क पर अकेले चल रहे हैं। उन्होंने ट्रैफिक रुकने की स्थिति को ही उनके लिए पैदल चलने का मौका बनने वाला कारण बताया।

    दीपके ने कहा कि सड़क पर कोई उनके साथ नहीं है और इस तरह अकेले चलना उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने इसे अच्छा अनुभव बताया। चेहरे पर नकाब लगाने की वजह से वह कुछ समय के लिए आम लोगों की तरह सड़क पर पैदल चल सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके और उनके संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर से मुंबई में करने की घोषणा की गई है। संगठन की ओर से मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की योजना बताई गई थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।

    दीपके ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से रोका गया तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर उठाई गई है।

    चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    अभिजीत दीपके इससे पहले भी आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनका मुंबई की सड़क पर नकाब लगाकर अकेले पैदल चलना भी चर्चा का विषय बन गया है। उनके मुताबिक, ट्रैफिक जाम की वजह से मिला यह मौका उन्हें कई महीनों बाद सामान्य तरीके से सड़क पर चलने का अनुभव दे गया।

  • भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव

    भोपाल के बाद पूरे MP में कांग्रेस का आंदोलन, जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव


    भोपाल । मध्यप्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का आंदोलन बुधवार को जिला स्तर तक पहुंचने जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर सभी जिला मुख्यालयों में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे और कलेक्टर कार्यालयों का घेराव करने की तैयारी है। पार्टी की ओर से यह आंदोलन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के बीच किया जा रहा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। देश के दूसरे हिस्सों में भी कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रही है और उनके इस्तीफे की मांग सामने रख रही है।

    मध्यप्रदेश में इस आंदोलन की शुरुआत भोपाल से हो चुकी है। 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस ने भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का घेराव किया था। प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने किया था। इसमें प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अलावा विधायक पूर्व विधायक पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए थे। उस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी थी और कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए थे। अब कांग्रेस ने इसी आंदोलन को प्रदेश के अलग अलग जिलों तक ले जाने की रणनीति बनाई है। भोपाल के प्रदर्शन की रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियों और CEC के इस्तीफे की मांग का उल्लेख है।

    कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है। बुधवार को जिला मुख्यालयों पर होने वाले प्रदर्शनों में यही मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जाने हैं। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने अपने जिलों में एकत्र होकर कलेक्टर कार्यालयों की ओर मार्च करेंगे और वहां प्रदर्शन करेंगे।

    इस बीच चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR 2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं। आयोग की वेबसाइट पर अंतिम SIR मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा दी गई है। आयोग के अनुसार मतदाता अपने EPIC नंबर या मतदाता संबंधी विवरण के माध्यम से जानकारी देख सकते हैं।

    CEC ज्ञानेश कुमार फिलहाल भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।

    SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से विरोध प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। दूसरी ओर इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच अलग अलग दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में मध्यप्रदेश में बुधवार को होने वाले जिला स्तरीय प्रदर्शनों पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नजर रहेगी। कांग्रेस का आंदोलन कितना व्यापक रहता है और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के दौरान क्या स्थिति बनती है यह दिनभर की प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेगा।

  • INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल

    INDIA ब्लॉक की बैठक कल, SIR और चुनाव आयोग पर विपक्ष बनाएगा संयुक्त रणनीति, अखिलेश यादव नहीं होंगे शामिल


    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ब्लॉक की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में होगी। बैठक में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR, चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेद और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल संसद में प्रस्ताव लाने और इन मुद्दों पर संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तैयार करने पर भी विचार कर सकते हैं। करीब साढ़े तीन महीने बाद होने वाली इस बैठक में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव बैठक में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह पार्टी का एक अन्य नेता प्रतिनिधित्व करेगा। वहीं, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के मुताबिक, पार्टी 2 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन की तैयारियों में व्यस्त है। पार्टी ने संबंधित प्रदर्शन को समर्थन देने की बात भी कही है। ऐसे में बैठक में उद्धव ठाकरे की भागीदारी ऑनलाइन होगी, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव के स्थान पर दूसरा नेता मौजूद रहेगा।

    बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के शामिल होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, सांसद अभिषेक बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और CPI(M) महासचिव एमए बेबी के भी पहुंचने की उम्मीद है। एमए बेबी ने अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद बताया था कि कांग्रेस बैठक के लिए विपक्षी दलों के बीच समन्वय कर रही है। उनके मुताबिक, केजरीवाल ने चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान की जरूरत पर जोर दिया और इस मुद्दे पर अपनी पार्टी में चर्चा करने की बात कही।

    I.N.D.I.A. ब्लॉक की पिछली बैठक 8 जून को हुई थी, जिसमें 23 विपक्षी दल शामिल हुए थे। उस बैठक में SIR और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, आम आदमी पार्टी और DMK उस बैठक में शामिल नहीं हुई थीं। इसके बावजूद 28 जून को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भेजे गए विपक्षी दलों के संयुक्त पत्र पर AAP और DMK ने भी हस्ताक्षर किए थे। पत्र में चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे। पिछली बैठक के बाद अब विपक्षी दल एक बार फिर इन विषयों पर साथ बैठने जा रहे हैं।

    30 सितंबर की बैठक में विपक्षी दलों के बीच समन्वय, SIR के खिलाफ संभावित संयुक्त कार्रवाई और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की दिशा तय करने पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और संसद में प्रस्ताव लाने से जुड़े विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। बैठक में अलग-अलग विपक्षी दलों के रुख और आगे की संयुक्त रणनीति को लेकर चर्चा होने की उम्मीद है।

  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- लोकतंत्र को कमजोर कर रही चुनाव प्रक्रिया

    नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दिल्ली के इंदिरा भवन में हुई बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग को लेकर चर्चा की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं और मतदाता सूची से नाम हटाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की जरूरत पर जोर दिया।

    खड़गे ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश के पूर्वजों द्वारा बनाई गई मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि पूरा देश अब जानता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का उद्देश्य भाजपा को लाभ पहुंचाना है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिनके दबाव में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कथित तौर पर ऐसा किया, प्रधानमंत्री मोदी को भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर पार्टी की चिंताओं को बैठक में रखा।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर भी अपनी मांग सामने रखी। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने और अपील करने का अवसर भी मिलना चाहिए। खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में पारदर्शिता की मांग की। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव से जुड़े निर्णयों के संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता बनी रहे।

    खड़गे ने कहा कि देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर कांग्रेस के कंधों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले 12 वर्षों के दौरान देश की मजबूत लोकतांत्रिक नींव को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया है। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चर्चा की गई।

    मंगलवार की बैठक में खड़गे के बयानों के केंद्र में चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया और चुनावी फैसलों में पारदर्शिता के मुद्दे रहे। खड़गे ने अपने आरोपों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई और प्रधानमंत्री मोदी से भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते करेगा सुनवाई, आयोग के फैसलों की प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। मामले को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने उठाया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मामले में जल्द सुनवाई की मांग रखी, जिसके बाद अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या चुनाव आयोग जैसे बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्थान से जुड़े फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए जा सकते हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के नाम पर कुछ फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी के बिना लिए गए। इसमें कहा गया है कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 के तहत सामूहिक रूप से फैसले लेने की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। याचिका में चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप, निर्णय लेने की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने समेत कई मांगें भी की गई हैं।

    मामले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सवाल उठाया गया है कि SIR से जुड़े फैसले पूरे आयोग की सहमति या बहुमत से लिए गए थे या नहीं। याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मामलों में आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों को चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है और इसी आधार पर याचिका में आयोग के सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार तथा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

    याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी मांगों के साथ यह भी कहा गया है कि आयोग में निहित सामूहिक शक्तियों का इस्तेमाल निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि आयोग के नाम पर लिए गए फैसलों में सभी सदस्यों की भूमिका और सहमति किस तरह रही। इस मामले का एक प्रमुख हिस्सा SIR से जुड़े निर्णय हैं, जिनको लेकर याचिका में यह जानने की मांग की गई है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर लिए गए थे या नहीं।

    वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रशासनिक मुद्दों से जुड़े थे और उनका SIR या आयोग के नीतिगत फैसलों से संबंध नहीं था। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की निर्णय लेने की प्रक्रिया, मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियों और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर उठाए गए सवालों पर सुनवाई होगी। अदालत अगले सप्ताह इस मामले में याचिका में की गई मांगों और उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगी।

  • ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच उन्हें पद से हटाने की मांग भी चर्चा में है। मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।

    CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग और काफी कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 2023 के संबंधित कानून में भी यही प्रावधान दोहराया गया है।

    सबसे पहले संसद में देना होता है नोटिस

    CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद में प्रस्ताव के नोटिस से शुरू होती है। लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास यह अधिकार होता है कि वे उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद प्रस्ताव को स्वीकार करें या खारिज कर दें।

    अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है तो दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ही जांच समिति गठित की जाती है। यदि नोटिस अलग-अलग दिनों में आता है तो संबंधित प्रक्रिया पहले उस सदन में आगे बढ़ती है जहां प्रस्ताव पहले स्वीकार किया गया हो।

    तीन सदस्यीय समिति करती है आरोपों की जांच

    प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत समिति में—

    • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या किसी अन्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ

    शामिल होते हैं। दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिए जाने की स्थिति में समिति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति संयुक्त रूप से गठित करते हैं।

    रिपोर्ट के बाद संसद में होता है मतदान

    समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है। यदि समिति आरोपों को साबित मानती है, तो मामला संसद के सामने आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है।

    CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है। संविधान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। CEC के लिए भी अनुच्छेद 324(5) के तहत यही संवैधानिक मानक लागू होता है।

    अंत में राष्ट्रपति लेते हैं अंतिम फैसला

    दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद संसद राष्ट्रपति को हटाने के लिए अपना अभिभाषण प्रस्तुत करती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं। यानी केवल संसद में नोटिस देने या बहस शुरू होने से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता; पूरी संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

    CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों में बड़ा अंतर

    मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की हटाने की प्रक्रिया अलग है। संविधान के अनुसार CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर हटा सकते हैं।

    इसलिए CEC के खिलाफ महज राजनीतिक मांग या संसद में नोटिस दिए जाने से तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई नहीं होती। प्रस्ताव, उसकी स्वीकार्यता, जांच समिति, दोनों सदनों में विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति के आदेश—इन सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।

  • SIR विवाद के बीच EC की तस्वीर ने खींचा सबका ध्यान बैठक से ज्यादा पानी की बोतल के दाम की चर्चा

    SIR विवाद के बीच EC की तस्वीर ने खींचा सबका ध्यान बैठक से ज्यादा पानी की बोतल के दाम की चर्चा


    नई दिल्ली । वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग लगातार चर्चा में है। इसी बीच तीनों चुनाव आयुक्तों की एक बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चर्चा का एक अलग विषय सामने आ गया। तस्वीर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी नजर आ रहे हैं। बैठक की तस्वीर में टेबल पर रखी पानी की बोतलों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इन बोतलों को लेकर सोशल मीडिया पर कीमत की चर्चा शुरू हो गई।

    तस्वीर में दिखाई दे रही बोतलें सामान्य प्लास्टिक की बोतलों से अलग नजर आती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये 250 मिलीलीटर की कांच की बोतलें हैं और इन पर आवा ब्रांड का नाम दिखाई देता है। उपलब्ध ऑनलाइन कीमत के अनुसार 8 बोतलों के पैक की कीमत 999 रुपये बताई गई है। इस हिसाब से एक बोतल की कीमत करीब 125 रुपये बैठती है। 250 मिलीलीटर की एक बोतल के आधार पर गणना करें तो एक लीटर पानी की कीमत लगभग 500 रुपये निकलती है। इसी गणित को लेकर सोशल मीडिया पर तस्वीर की खूब चर्चा होने लगी।

    हालांकि केवल किसी बैठक की तस्वीर में कोई उत्पाद दिखाई देने से यह साबित नहीं होता कि चुनाव आयोग ने वह उत्पाद इसी कीमत पर खरीदा था। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तस्वीर में नजर आ रही बोतलें किस माध्यम से बैठक में उपलब्ध कराई गई थीं। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही कीमत की चर्चा को उपलब्ध ऑनलाइन लिस्टिंग के आधार पर देखा जाना चाहिए न कि आयोग की वास्तविक खरीद कीमत के रूप में।

    इससे पहले भी चुनाव आयोग के कार्यालय से जुड़ी तस्वीरों में आवा ब्रांड की पानी की बोतलों को लेकर ऑनलाइन चर्चा सामने आ चुकी है। अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट में भी 250 मिलीलीटर की इन बोतलों और उनकी कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का उल्लेख किया गया था। उस रिपोर्ट में कंपनी की वेबसाइट पर 8 बोतलों की नियमित कीमत 1600 रुपये और छूट के बाद 999 रुपये होने की जानकारी दी गई थी।

    आवा एक भारतीय मिनरल वॉटर ब्रांड है। कंपनी अपने पानी को प्राकृतिक स्रोत से प्राप्त मिनरल वॉटर के रूप में पेश करती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ब्रांड का पानी अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्रोत से जुड़े होने का दावा किया जाता है। कंपनी अपने उत्पाद में कैल्शियम मैग्नीशियम सोडियम और पोटेशियम जैसे खनिजों की मौजूदगी का भी उल्लेख करती है।

    वायरल तस्वीर में पानी की बोतलों की चर्चा ऐसे समय हुई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग पहले से ही सार्वजनिक बहस के केंद्र में है। बैठक के बाद आयोग की ओर से आधिकारिक जानकारी भी साझा की गई थी। लेकिन सोशल मीडिया पर तस्वीर के सामने आने के बाद बैठक के फैसलों के साथ टेबल पर रखी बोतलों की कीमत भी चर्चा का विषय बन गई।

    इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 500 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा 250 मिलीलीटर की बोतल और 8 बोतलों के 999 रुपये वाले उपलब्ध पैक की गणना से निकलता है। इसे चुनाव आयोग द्वारा भुगतान की गई वास्तविक कीमत मानना उचित नहीं होगा। तस्वीर ने फिलहाल पानी की कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम


    नई दिल्ली। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना अल्टिमेटम दोहरा दिया है। पार्टी ने कहा है कि अगर शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    कॉकरोच जनता पार्टी लंबे समय से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक अगर शनिवार तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा।

    पार्टी ने सोशल मीडिया पर जंतर मंतर पर जुट रहे युवाओं का वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने को कहा है। इससे पहले संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया था लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर 2 अक्टूबर कर दी गई। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने इलेक्शन कमीशन ठीक करो अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।

    पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम बाहर हो गए हैं। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। साथ ही पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाएं ताकि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो सके। इसके अलावा पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त कर अधिक पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था बनाने की मांग कर रही है।

    इसी बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर चिराग पासवान ने भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन किया है। ऐसे में शनिवार की समयसीमा और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के कारण SIR विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद


    नई दिल्ली।
    कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची (Voter List) के SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर एकतरफा फैसला लेने के आरोपों के बाद राज्यसभा में उनके खिलाफ लंबित महाभियोग का मुद्दा फिर गरमा गया है। विपक्षी दलों ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। विपक्ष के 73 सदस्यों ने गत 24 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंपा था।

    कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष की कई अन्य पार्टियों की तरफ से दिए गए महाभियोग के नोटिस में सीईसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप शामिल हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना, चुनाव आचार संहिता के क्रियान्वयन में अनियमिता, दस्तावेजी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करना सहित नौ आरोप लगाए गए हैं।


    नोटिस लंबित, पर खारिज नहीं

    एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू (Sukhbir Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) के पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरों के बाद विपक्ष ने फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के पास 24 अप्रैल से यह नोटिस लंबित है, इसे खारिज नहीं किया गया है।

    माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे।


    SIR पर बड़ा विवाद

    SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के मीडिया दावे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका इस्तीफा मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और एसआईआर तुरंत रोकने की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा, आरएसएस, निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने इसे किया है, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है।

    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही अधिकारियों की तरफ से आपत्ति दर्ज की जा रही है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि आयोग किसके हित में काम कर रहा है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले चुनाव आयोग को चला रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को तत्काल रद्द किए जाने की मांग की।


    चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी

    चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों से जुड़े विवाद पर स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का हर अधिकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को अधिकृत है। आयोग ने एक बयान में कहा कि दस महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों, अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाता है।

    आयोग के मुताबिक ईसीआई नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डाटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे अधिकारी निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं।


    सीईसी-ईसी नियुक्ति का मुद्दा संविधान पीठ सुनेगी

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया। दो जजों की पीठ का बंटा फैसला आने पर यह कदम उठाया गया।