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  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    बीमारी पर टिप्पणी से भड़कीं हिना खान, शिल्पा शिंदे के बयानों का दिया करारा जवाब, रॉकी जायसवाल ने भी पुराने विवाद उठाकर लगाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।टेलीविजन जगत की दो चर्चित अभिनेत्रियों हिना खान और शिल्पा शिंदे के बीच शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। हाल ही में शिल्पा शिंदे द्वारा हिना खान की कैंसर से जुड़ी यात्रा पर की गई टिप्पणी के बाद दोनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे मामले में हिना खान ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की गंभीर बीमारी पर सवाल उठाना या उसका मजाक बनाना संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है। उनके साथ पति रॉकी जायसवाल ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए।

    विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब शिल्पा शिंदे ने हिना खान की कैंसर से जुड़ी सार्वजनिक जानकारी पर सवाल उठाए। उन्होंने यह टिप्पणी की कि बीमारी को लेकर जिस तरह से बातें सामने आईं, उस पर उन्हें संदेह है और उन्होंने यह भी पूछा कि इलाज इतनी जल्दी कैसे पूरा हो गया। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई, जिसके बाद हिना खान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट किया कि किसी की स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों पर बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करना उचित नहीं है।

    हिना खान ने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से गुजरने वाले लोगों की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान केवल संबंधित व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों को भी प्रभावित कर सकते हैं जो इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सार्वजनिक मंचों पर किसी की बीमारी को लेकर गैर-जिम्मेदार टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

    इस विवाद के दौरान हिना खान और रॉकी जायसवाल ने शिल्पा शिंदे के पुराने यौन उत्पीड़न मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने उस प्रकरण को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लगाए गए आरोपों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। हिना ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाए जाएं और बाद में वे गलत साबित हों, तो इससे वास्तविक पीड़ितों के लिए न्याय की प्रक्रिया और अधिक कठिन हो सकती है।

    हिना ने यह भी कहा कि यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में अत्यधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा या मानसिक स्थिति ऐसे आरोपों से प्रभावित हो जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उनके अनुसार ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदार व्यवहार बेहद आवश्यक है।

    रॉकी जायसवाल ने भी इस पूरे विवाद में अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति को दूसरे की व्यक्तिगत परिस्थितियों पर टिप्पणी करने से पहले तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रभाव रखने वाले लोगों के बयान लाखों लोगों तक पहुंचते हैं, इसलिए शब्दों का चयन सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

    हिना खान ने यह भी हैरानी जताई कि पुराने विवादों के बावजूद संबंधित पक्षों के बीच बाद में दोबारा पेशेवर सहयोग कैसे हुआ। उनका कहना था कि यदि किसी मामले में इतने गंभीर आरोप लगाए गए थे, तो बाद की परिस्थितियां स्वाभाविक रूप से कई प्रश्न खड़े करती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रियलिटी शो के दौरान इस विषय का उल्लेख नहीं किया गया था, जबकि बाद में इसे सार्वजनिक रूप से सामने लाया गया।

    फिलहाल दोनों अभिनेत्रियों के बयानों के बाद यह विवाद मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि अब तक इस विवाद को लेकर किसी पक्ष की ओर से कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों के सार्वजनिक बयानों ने इस मुद्दे को नई बहस का विषय बना दिया है।

  • इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज

    इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज


    इंदौर । इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर देवास पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने, मारपीट करने और कार में बंधक बनाने के आरोप में बाणगंगा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था और मना करने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर मानसिक रूप से परेशान करता रहा।

    पुलिस के अनुसार महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब एक वर्ष पहले देवास में पदस्थापना के दौरान उसकी पहचान राहुल शर्मा से हुई थी। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी ने लगातार फोन करना शुरू कर दिया। महिला के बार बार मना करने के बावजूद वह बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा और निजी संबंध बनाने की कोशिश करता रहा।

    पीड़िता का कहना है कि राहुल की हरकतों से परेशान होकर उसने अपना तबादला देवास से इंदौर करा लिया ताकि उससे दूरी बनाई जा सके। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। महिला ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया, लेकिन वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता रहा और लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। आरोप है कि कई बार उसने महिला का पीछा भी किया और उसे मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देकर महिला पर बात करने और शादी के लिए सहमत होने का दबाव बनाता था। एक बार वह उस समय भी सरकारी अस्पताल पहुंच गया जब महिला एक मामले में पीड़ित का मेडिकल कराने गई थी। वहां भी उसने बातचीत करने की कोशिश की और विवाद खड़ा कर दिया।

    महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन राहुल शर्मा ने जबरन उसे अपनी कार में बैठा लिया। बाणगंगा क्षेत्र में उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और शादी के लिए दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसे बाहर निकलने नहीं दिया।

    इसी दौरान महिला की मां का फोन आया। महिला ने किसी तरह उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे कार में बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही महिला के पिता और भाई मौके पर पहुंच गए। उन्हें आता देख आरोपी कार लेकर वहां से फरार हो गया।

    घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल ने थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत की जांच के बाद बाणगंगा पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

  • भगवान के दरबार में पहुंचा घरेलू विवाद का दर्द, दान पेटी से निकले नोट पर लिखी प्रार्थना बनी चर्चा का विषय

    भगवान के दरबार में पहुंचा घरेलू विवाद का दर्द, दान पेटी से निकले नोट पर लिखी प्रार्थना बनी चर्चा का विषय

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के एक प्रसिद्ध मंदिर से सामने आई एक अनोखी घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। आमतौर पर मंदिरों की दान पेटियों में श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करते हुए सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं, लेकिन इस बार दान पेटी से निकला एक छोटा सा नोट लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। इस नोट पर लिखे संदेश ने न केवल मंदिर प्रशासन को हैरान किया, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी।

    घटना उस समय सामने आई जब मंदिर प्रशासन नियमित प्रक्रिया के तहत दान पेटी में जमा चढ़ावे की गणना कर रहा था। नकदी और अन्य दान सामग्री के बीच कर्मचारियों को 20 रुपये का एक नोट मिला, जिस पर हाथ से एक संदेश लिखा हुआ था। शुरुआत में यह एक सामान्य नोट की तरह दिखाई दिया, लेकिन जैसे ही उस पर लिखे शब्द पढ़े गए, वहां मौजूद लोग कुछ क्षणों के लिए आश्चर्य में पड़ गए।

    नोट पर लिखे संदेश में एक महिला ने अपने पारिवारिक जीवन में चल रही परेशानियों और मानसिक तनाव का उल्लेख किया था। संदेश के शब्दों से यह स्पष्ट हो रहा था कि वह लंबे समय से घरेलू कलह और प्रताड़ना से परेशान थी। अपनी व्यथा व्यक्त करने के लिए उसने किसी व्यक्ति, संस्था या प्रशासनिक माध्यम के बजाय सीधे ईश्वर के समक्ष अपनी बात रखी थी। यही कारण है कि यह घटना लोगों के बीच तेजी से चर्चा का विषय बन गई।

    मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि दान पेटियों में समय-समय पर अलग-अलग प्रकार की प्रार्थनाएं, इच्छाएं और व्यक्तिगत संदेश देखने को मिलते हैं। कई श्रद्धालु अपनी समस्याएं कागज पर लिखकर भी दान पेटी में डालते हैं। हालांकि इस बार मिला संदेश सामान्य प्रार्थनाओं से अलग था और उसमें झलक रही व्यक्तिगत पीड़ा ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

    घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे घरेलू तनाव की चरम स्थिति का संकेत माना, जबकि कुछ का मानना है कि यह पारिवारिक संवाद की कमी और बढ़ते मानसिक दबाव को दर्शाता है। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि परिवारों के भीतर उत्पन्न होने वाले विवाद यदि समय रहते संवाद और समझदारी से हल न किए जाएं तो वे गंभीर मानसिक तनाव का कारण बन सकते हैं।

    सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। कई लोगों ने इस घटना को घरेलू रिश्तों में बढ़ती दूरियों और भावनात्मक संघर्ष का प्रतीक बताया। वहीं कुछ लोगों ने इसे एक परेशान व्यक्ति की भावनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा, जो अपनी बात किसी से साझा न कर पाने की स्थिति में धार्मिक आस्था का सहारा लेने के लिए मजबूर हुआ।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार समाज की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और उसके भीतर स्वस्थ संवाद, सम्मान और सहयोग का माहौल होना आवश्यक है। जब परिवार के सदस्यों के बीच आपसी समझ कमजोर पड़ती है, तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। ऐसे मामलों में समय रहते बातचीत, परामर्श और सकारात्मक हस्तक्षेप महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    यह घटना भले ही एक मंदिर की दान पेटी से जुड़े एक नोट के कारण चर्चा में आई हो, लेकिन इसने समाज के सामने एक व्यापक प्रश्न भी खड़ा किया है। पारिवारिक संबंधों में बढ़ते तनाव, मानसिक दबाव और संवाद की कमी को लेकर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। यही कारण है कि यह मामला केवल एक असामान्य संदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक विमर्श का विषय बन गया है।

  • लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार

    लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार


    नई दिल्ली। लखनऊ में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह आत्महत्या मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है। इस मामले में लगातार नए खुलासे और पुलिस कार्रवाई सामने आ रही है। गोरखपुर की रहने वाली 32 वर्षीय रत्ना सिंह लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित मानसून सैलून में मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी।

    आत्महत्या से पहले रत्ना सिंह ने 26 सेकंड का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने सैलून मालिक शरद सिंह, उनकी पत्नी पल्लवी जोशी समेत कुछ अन्य लोगों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि रत्ना सिंह को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गईं और उन्होंने यह कदम उठाया। घटना के बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर न्याय की मांग की, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया।

    मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी शरद सिंह सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उनकी पत्नी पल्लवी जोशी को मुंबई से हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है और जांच जारी है।

    कार्रवाई के तहत संबंधित सैलून और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने सीलिंग की कार्रवाई की है। साथ ही आरोपियों की संपत्तियों पर भी बुलडोजर एक्शन लिया गया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल मच गई है।

    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रत्ना सिंह पर लंबे समय से दबाव बनाया जा रहा था। वहीं अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस मामले में एक होटल मैनेजर को पहले ही देवरिया से गिरफ्तार किया जा चुका था।

    रत्ना सिंह के पिता रेलवे कर्मचारी हैं और परिवार का राजनीतिक व सामाजिक जुड़ाव भी बताया जा रहा है। परिजनों ने सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है और सभी डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। यह मामला न केवल लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई

    इंदौर में कॉल सेंटर कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन का दबाव, युवती ने बीच सड़क जूतों से की पिटाई


    इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कॉल सेंटर में कार्यरत युवती पर लगातार धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी युवक का नाम अब्दुल कलाम है, जो कॉल सेंटर में एमओ मैनेजमेंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। युवती ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपी काम के दौरान उसे बार-बार धर्म परिवर्तन करने के लिए मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था। इस दबाव से परेशान होकर युवती ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी, लेकिन आरोपी का पीछा तब भी नहीं रुका।

    युवती ने बताया कि कंपनी के दो माह के नोटिस पीरियड के दौरान, जब वह रोजाना काम पर जा रही थी, तब भी आरोपी उसे रास्ते में रोककर परेशान करता रहा। लगातार उत्पीड़न से तंग आकर एक दिन युवती का गुस्सा फूट पड़ा। रास्ते में ही उसने आरोपी की जूतों से पिटाई कर दी। इसके बाद, पीड़िता ने पूरे मामले की शिकायत लसूड़िया थाना पुलिस में दर्ज कराई।

    पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले की जांच जारी है। यह घटना एक बार फिर कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी गंभीर सवालों को उजागर करती है। क्या हमारे कार्यस्थलों पर महिलाओं को सुरक्षित महसूस होता है क्या हम उनके धार्मिक विश्वासों और स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं? इन सवालों का जवाब अब समाज और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा ।