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  • मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल

    मध्य प्रदेश में स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव! 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में भी बरसेंगे बादल


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम बनने से शुक्रवार को जबलपुर रीवा शहडोल और सागर संभाग में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 24 घंटे में प्रदेश के 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं भोपाल इंदौर समेत कई अन्य जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। लगातार कुछ दिनों तक बारिश से दूरी बनी रहने के बाद गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में पानी गिरा जिससे उमस से परेशान लोगों को राहत मिली।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर नर्मदापुरम नरसिंहपुर बालाघाट मंडला डिंडौरी अनूपपुर शहडोल कटनी मऊगंज सीधी और सिंगरौली में अगले 24 घंटे के दौरान भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर 4 इंच से अधिक पानी गिरने का अनुमान है। इसके अलावा भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार अलीराजपुर बड़वानी खंडवा खरगोन उज्जैन देवास रतलाम ग्वालियर रीवा सतना छिंदवाड़ा सिवनी पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ समेत कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार बंगाल की खाड़ी में 12 अगस्त की सुबह निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय हुआ था जो 13 अगस्त की सुबह डिप्रेशन में बदल गया। यह सिस्टम उत्तर पश्चिम दिशा में पश्चिम बंगाल और झारखंड की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से मानसून ट्रफ के सक्रिय रहने की संभावना है। यही वजह है कि मध्य प्रदेश में आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है।

    गुरुवार को करीब सात दिन बाद प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई। इससे लंबे समय से उमस और गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश अभी भी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम केंद्र के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक करीब 524.8 मिलीमीटर यानी 20.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक करीब 597 मिलीमीटर यानी 23.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में बारिश करीब 12 प्रतिशत कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से करीब 19 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। बालाघाट छतरपुर छिंदवाड़ा दमोह डिंडौरी जबलपुर कटनी मैहर मंडला नरसिंहपुर पन्ना रीवा सागर सतना सिवनी शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा है। पश्चिमी हिस्से में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। हालांकि भोपाल गुना सीहोर राजगढ़ ग्वालियर अनूपपुर भिंड बुरहानपुर देवास बड़वानी खंडवा और खरगोन में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    इस मानसून सीजन में जून के दौरान प्रदेश में बारिश करीब 14 प्रतिशत कम रही थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति कुछ सुधरी लेकिन इसके बाद मानसून ने दो बार ब्रेक लिया। कई दिनों तक बारिश नहीं होने से आंकड़ा फिर सामान्य से नीचे चला गया। जुलाई में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अब अगस्त में सक्रिय हुए सिस्टम से उम्मीद है कि प्रदेश में बारिश की कमी कुछ हद तक दूर होगी।

    राजधानी भोपाल में अगस्त महीने में भारी बारिश का इतिहास रहा है। अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज हुई थी। 14 अगस्त 2006 को 24 घंटे में करीब 12 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड भी रहा है। इंदौर में अगस्त महीने में सर्वाधिक करीब 28 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1944 में दर्ज हुआ था। ग्वालियर में 24 घंटे में करीब साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड 1927 का है। जबलपुर में अगस्त 1923 में करीब 44 इंच बारिश दर्ज होने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। उज्जैन में भी अगस्त 2006 में करीब 35 इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    फिलहाल मौसम का रुख देखते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी नालों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर रखना और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचना बेहतर रहेगा।

  • मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट

    मैदानों से लेकर पहाड़ों तक झमाझम बारिश…. कई क्षेत्रों में बाढ़ के हालात, आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून (Monsoon) अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. मैदानों से लेकर पहाड़ों तक में बरसात जमकर (Heavy rainfall) हो रही है. पहाड़ों में भूस्खलन (Landslide) से कई जगहें रास्ते ठप पड़े हैं. मैदानी इलाकों में कई जगह बाढ़ के हालात भी बन रहे हैं. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में आज भी हल्की से मध्यम और कुछ राज्यों में भारी बारिश का अनुमान है. जहां दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने से मौसम सुहावना रहेगा. वहीं पहाड़ी राज्यों और तटीय इलाकों में मानसूनी हवाओं की वजह से अलर्ट जारी किया गया है।

    दिल्ली-एनसीआर में आज कैसा रहेगा मौसम?
    सबसे पहले बात दिल्ली-एनसीआर की कर लेते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, इस क्षेत्र में बादलों का डेरा बना रहेगा और हल्की बारिश की संभावना है. दिन भर में एक या दो बार हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं. इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. आज बारिश के साथ-साथ 20 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल सकती हैं. हालांकि, बारिश के बीच के उमस ज्यादा रहने की वजह से लोगों को हल्की चिपचिपाहट का सामना करना पड़ सकता है।


    पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा

    उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों खासकर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मानसून की रफ्तार तेज बनी हुई है. मौसम विभाग ने इन राज्यों के कई संवेदनशील इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी है. साथ ही, पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन होने और नदियां उफान पर रहने का खतरा जताया गया है. ऐसे में यात्रियों और स्थानीय निवासियों को पहाड़ों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मुंबई में रुक-रुक होती रहेगी तेज बारिश
    देश के मध्य, पश्चिम और पूर्वी भारत की बात की जाए तो यहां पर मानसून पूरी तरह मेहरबान है. कोंकण, गोवा और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में मानसूनी बारिश पूरी तरह जारी है. अनुमान है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में आज भी रुक-रुक कर तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है. गुजरात क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के आसार जताए गए हैं. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार और झारखंड में भी तेज बारिश की उम्मीद है. बिहार और ओडिशा में बारिश के साथ गर्जन के साथ तेज हवाएं चलने की भी उम्मीद है।


    पूर्वोत्तर भारत झमाझम बरसेंगे बादल

    दक्षिण भारत के तटीय कर्नाटक और केरल में मध्यम से व्यापक बारिश की संभावना है. वहीं तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पूर्वोत्तर भारत में आने वाले असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में भी मानसूनी बादल छाए रहेंगे और कई स्थानों पर झमाझम बारिश होगी. तेज बरसात की वजह से कई जगहों पर बिजली गिरने और भूस्खलन होने का खतरा बना रहेगा।

  • मानसून की सक्रियता से देशभर में हो रही झमाझम बारिश, 29 जुलाई तक कई राज्यों में अलर्ट

    मानसून की सक्रियता से देशभर में हो रही झमाझम बारिश, 29 जुलाई तक कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देश में मानसून (Monsoon) की सक्रियता बढ़ने से बारिश की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 16 से 22 जुलाई के दौरान देश में लगभग सामान्य बारिश (Normal Rainfall) दर्ज की गई, जिससे 1 जून से शुरू हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) सीजन में वर्षा की कुल कमी घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) के लगातार मजबूत होने से मानसून के शेष सीजन को लेकर चिंता बरकरार है।


    देश के किन हिस्सों में कितनी बारिश हुई?

    आईएमडी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम, मध्य तथा पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा सामान्य के आसपास रही, जबकि दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। 1 जून से 23 जुलाई तक देश में सामान्य 370.9 मिलीमीटर के मुकाबले 306.9 मिलीमीटर वर्षा हुई है। इस तरह मानसून सीजन में अब भी 17 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार देखें तो पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां अब तक सामान्य से 32 प्रतिशत कम बारिश हुई है। दक्षिण भारत में यह कमी 26 प्रतिशत है। इसके मुकाबले उत्तर-पश्चिम भारत में 10 प्रतिशत और मध्य भारत में केवल 6 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।


    किन राज्यों में सामान्य से ज्यादा और किनमें कम बारिश हुई?

    लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं पंजाब, हरियाणा, गुजरात, गोवा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में सामान्य से 20 से 58 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।


    अल नीनो को लेकर मौसम विभाग की चिंता क्यों बढ़ी हुई है?

    आईएमडी के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है और अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है। मौसम संबंधी विभिन्न मॉडल इसके आगे और प्रभावी होने के संकेत दे रहे हैं। अल नीनो का असर आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करने और बारिश के क्षेत्रीय वितरण में असंतुलन पैदा करने के रूप में देखा जाता है। इसलिए मानसून के बाकी सीजन में इसकी स्थिति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


    24 से 29 जुलाई के बीच मौसम का मिजाज कैसा रहेगा?

    24 से 29 जुलाई के दौरान देशभर में एक साथ कई मौसम प्रणालियां सक्रिय रहने का अनुमान है। इसके कारण पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तर कोंकण और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी तथा कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के साथ-साथ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भी व्यापक वर्षा होने का अनुमान है।


    गुजरात में बारिश ने कितनी तबाही मचाई?

    गुजरात में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण 38 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके अलावा 352 से अधिक लोगों का सुरक्षित बचाव किया गया है। राज्य में बारिश से जुड़ी घटनाओं में अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों गांवों का संपर्क बाकी क्षेत्रों से टूट गया है।


    असम में बाढ़ की स्थिति कितनी गंभीर है?

    असम में लगातार बारिश और बाढ़ के कारण मृतकों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। राज्य में सात लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    जम्मू-कश्मीर में यात्रा व्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?

    जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा बालटाल मार्ग से फिर शुरू कर दी गई है। हालांकि, भूस्खलन के कारण श्री मचैल माता यात्रा फिलहाल बंद है। वहीं वैष्णो देवी यात्रा भी शनिवार से दोबारा बहाल किए जाने की तैयारी की जा रही है।

  • INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत

    INSAT ने दिखाया मानसून का दम भारत के दो तिहाई हिस्से पर बादलों का कब्जा तेज बारिश और तूफान के संकेत


    नई दिल्ली। देशभर में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। इसरो के मौसम उपग्रह INSAT 3DR से मिली ताजा तस्वीरों ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत का लगभग दो तिहाई हिस्सा घने मानसूनी बादलों से ढक चुका है। जम्मू कश्मीर से लेकर गंगा के मैदानी इलाकों बिहार पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों तक बादलों का घना फैलाव दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज बारिश आंधी और कहीं कहीं अत्यधिक वर्षा का कारण बन सकती है।

    19 जुलाई को जारी सैटेलाइट इमेज के विश्लेषण के अनुसार देश के करीब 60 से 70 प्रतिशत भूभाग पर बादलों का प्रभाव देखा गया। सबसे घने बादल पंजाब उत्तर प्रदेश बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर मौजूद हैं जबकि पूर्वोत्तर के लगभग सभी राज्य बादलों की मोटी परत से ढके हुए हैं। दक्षिण भारत में भी अरब सागर से आने वाली नम हवाओं के कारण लंबी बादल पट्टियां सक्रिय दिखाई दे रही हैं। हालांकि पश्चिमी राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत साफ मौसम बना हुआ है।

    INSAT 3DR भारत का अत्याधुनिक मौसम निगरानी उपग्रह है जो पृथ्वी से लगभग 36 हजार किलोमीटर ऊपर भू स्थिर कक्षा में रहकर लगातार मौसम पर नजर रखता है। यह हर आधे घंटे में नई तस्वीरें भेजता है जिनका उपयोग भारतीय मौसम विभाग मौसम का पूर्वानुमान तैयार करने के लिए करता है। उपग्रह के विजिबल और थर्मल इंफ्रारेड सेंसर बादलों की मोटाई ऊंचाई और तापमान का विश्लेषण करते हैं जिससे यह पता लगाया जाता है कि किस क्षेत्र में सामान्य बादल हैं और कहां खतरनाक तूफानी बादल विकसित हो रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार क्लाउड टॉप ब्राइटनेस टेम्परेचर यानी बादलों की ऊपरी सतह का तापमान मौसम का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक होता है। जितना अधिक ठंडा बादल का ऊपरी हिस्सा होगा उतना ही ऊंचा और शक्तिशाली वह बादल माना जाता है। माइनस 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान वाले बादल तेज बारिश और गरज चमक वाले तूफान का संकेत देते हैं जबकि माइनस 70 डिग्री सेल्सियस या उससे कम तापमान वाले बादल बेहद खतरनाक मौसम प्रणाली का हिस्सा माने जाते हैं। ताजा तस्वीरों में जम्मू कश्मीर के ऊपर माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तक ठंडे बादल दर्ज किए गए हैं जबकि उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और पूर्वोत्तर में भी अत्यधिक सक्रिय बादल मौजूद हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर जगह बादल होने का मतलब भारी बारिश नहीं होता। हल्के मानसूनी बादल केवल सामान्य वर्षा या बूंदाबांदी करा सकते हैं जबकि अत्यधिक बारिश केवल उन क्षेत्रों में होती है जहां गहरे और ऊंचे तूफानी बादल विकसित होते हैं। फिलहाल उत्तरी भारत में सक्रिय मानसून ट्रफ और अरब सागर से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण जम्मू कश्मीर हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड पंजाब हरियाणा दिल्ली उत्तर प्रदेश बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव तथा नदियों के जलस्तर बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कभी बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। ऐसे समय में INSAT 3DR जैसे आधुनिक मौसम उपग्रह मौसम की सटीक निगरानी और समय रहते चेतावनी जारी करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के ताजा मौसम बुलेटिन पर नजर रखें और भारी बारिश वाले इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • आज उत्तर से दक्षिण तक बारिश का दौर जारी, कई राज्यों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट

    आज उत्तर से दक्षिण तक बारिश का दौर जारी, कई राज्यों में भारी वर्षा, आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    देशभर में मानसून सक्रिय बना हुआ है और इसके प्रभाव से 17 जुलाई को कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने उत्तर, मध्य, पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों के लिए वर्षा, तेज हवाओं, आंधी और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ की आशंका भी जताई गई है।

    उत्तर भारत में भारी बारिश की संभावना

    आईएमडी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

    मध्य भारत में भी अलर्ट

    पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, विदर्भ तथा छत्तीसगढ़ में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, साथ ही गरज-चमक और बिजली गिरने की भी चेतावनी जारी की गई है।

    बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर में तेज मानसून

    बिहार, ओडिशा, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी अच्छी बारिश की संभावना है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। इन राज्यों में गरज-चमक और बिजली गिरने का भी खतरा बना रहेगा।

    पश्चिमी भारत में भी बारिश का असर

    कोंकण, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र और कच्छ में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है।

    दक्षिण भारत में बारिश के साथ हीटवेव का असर

    आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप में भी वर्षा की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, रायलसीमा और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

    हालांकि, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के कुछ इलाकों में बारिश के बावजूद हीटवेव जैसी परिस्थितियां भी बनी रह सकती हैं। वहीं दिल्ली, हरियाणा, पंजाब तथा पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना जताई गई है।

    अगले सात दिन रहेगा मानसून का असर

    मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण अगले सात दिनों तक पूर्वी, पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में मानसून सक्रिय रहेगा। इसके अलावा 19 जुलाई से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) भी प्रभावी होने की संभावना है, जिससे कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है।

    बाढ़ का भी खतरा

    आईएमडी ने ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक वर्षा की संभावना जताते हुए चेतावनी दी है कि 23 जिलों तथा छत्तीसगढ़ के 13 जिलों के निचले इलाकों में 17 जुलाई की सुबह तक अचानक बाढ़ की स्थिति बन सकती है। लोगों को मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश बनी आफत! नदियां उफान पर, पुल डूबे, सड़कें बंद, आष्टा में दो बच्चों की दर्दनाक मौत


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून ने अब पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है और लगातार हो रही बारिश ने कई जिलों में हालात चिंताजनक बना दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में तेज से अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। लगातार बरसात के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, कई पुल जलमग्न हो गए हैं, सड़क संपर्क टूट गया है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। सबसे दर्दनाक घटना सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र से सामने आई, जहां पानी में डूबने से दो मासूम बच्चों की जान चली गई। इस हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में सबसे अधिक ढाई इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मंडला में लगभग 2.2 इंच, खंडवा में करीब पौने दो इंच, भोपाल में डेढ़ इंच, जबकि दतिया, नौगांव और बालाघाट में सवा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। रतलाम, बैतूल और धार में लगभग एक इंच वर्षा हुई। इसके अलावा खरगोन, पचमढ़ी, दमोह, नर्मदापुरम, जबलपुर और उमरिया सहित कई जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा से प्रदेश के अधिकांश नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।

    सीहोर जिले के आष्टा क्षेत्र में पार्वती और तप नदी के उफान पर आने से कई गांवों में पानी घरों तक पहुंच गया। बापचा दोनिया गांव में दो मासूम बच्चों के डूबने की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। परिजन बच्चों को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रशासन ने लोगों से नदी और तालाबों के आसपास जाने से बचने की अपील की है।

    हरदा जिले में भी हालात गंभीर बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण कालीमाचक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया और ग्राम मांदला के पास पुल के ऊपर लगभग तीन फीट पानी बहने लगा। इसके चलते नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे पर आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है और ग्रामीणों को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। किल्लौद ब्लॉक के ग्राम गरबड़ी स्थित नाले में आई बाढ़ के कारण खिरकिया मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बहाव वाले नालों और पुलों को पार करने की कोशिश न करें तथा सुरक्षित स्थानों पर ही रुकें।

    प्रदेश के कई हिस्सों में खेतों में पानी भर गया है जिससे खरीफ फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बनी हुई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं तथा जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नागरिकों से सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई है।

  • पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

    पूरे मध्य प्रदेश में छाया मानसून अब चार दिन भारी बारिश का दौर 13 जिलों में अलर्ट कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को मानसून ने प्रदेश के सभी जिलों को कवर कर लिया जिसके साथ ही पूरे राज्य में बारिश का दौर तेज होने की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कुछ जिलों के लिए ऑरेंज और यलो अलर्ट घोषित किया गया है जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव तेज बहाव और बिजली गिरने जैसी स्थितियों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

    इस वर्ष प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी और नौ दिनों के भीतर पूरे मध्य प्रदेश में फैल गया। हालांकि सामान्य स्थिति में मानसून 15 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है इसलिए इस बार इसकी एंट्री करीब नौ दिन देर से हुई। इसके बावजूद अब मानसून तेजी से सक्रिय हो चुका है और अधिकांश जिलों में लगातार बारिश दर्ज की जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार हरदा नर्मदापुरम रायसेन छिंदवाड़ा पांढुर्णा और बालाघाट जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में अगले चौबीस घंटों के दौरान चार से आठ इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं अशोकनगर देवास खंडवा बैतूल सागर मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट घोषित किया गया है। इसके अलावा भोपाल इंदौर उज्जैन ग्वालियर जबलपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में गरज चमक के साथ तेज बारिश और आंधी की संभावना बनी हुई है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून का असर साफ दिखाई दिया। इंदौर में तेज बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं और निचले इलाकों में पानी भर गया। एक थार वाहन तेज बहाव में नाले में गिर गया जिसमें पूरा परिवार सवार था। स्थानीय लोगों की सतर्कता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वहीं इंदौर के अहीरखेड़ी काकड़ क्षेत्र में रपटा पार करते समय दो युवक तेज बहाव में बह गए। एक युवक को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश पुलिस और बचाव दल लगातार कर रहे हैं। महू में भी एक कार पानी के तेज बहाव में फंस गई जिसे ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया।

    मौसम विभाग का अनुमान है कि पांच जुलाई तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। तीन जुलाई को धार और बड़वानी में रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि चार जुलाई को खरगोन में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में नदी नालों के किनारे रहने वाले लोगों और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

    हालांकि प्रदेश में अब तक सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। एक जुलाई तक मध्य प्रदेश में लगभग चार इंच वर्षा हुई है जबकि सामान्य औसत इससे काफी अधिक रहता है। इसके बावजूद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जुलाई का महीना प्रदेश के लिए सबसे अधिक वर्षा वाला समय होता है और पूरे मानसून की लगभग चालीस प्रतिशत बारिश इसी महीने में होती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है और इससे खेती के साथ जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है।

  • गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

    नई दिल्ली । देशभर में लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। मानसून की यह प्रगति देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के स्वरूप को तेजी से बदलने वाली है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र तक व्यापक स्तर पर वर्षा गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज हवाएं, गरज-चमक और आंधी का दौर भी देखने को मिल सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून को आगे बढ़ने में सहायता मिल रही है। इसी वजह से केरल तट पर मानसून की दस्तक अब बेहद करीब मानी जा रही है। मानसून के सक्रिय होने के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है। कृषि गतिविधियों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून की प्रगति पर निर्भर करती है। किसानों की नजरें भी मानसून की आधिकारिक शुरुआत पर टिकी हुई हैं।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर आंधी की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी वर्षा गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आगामी दिनों में व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लगातार भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर और भूस्खलन जैसी संभावित परिस्थितियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से अधिक सक्रिय रह सकती हैं।

    हालांकि शुरुआती संकेतों के अनुसार इस वर्ष मानसून की कुल वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रहने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की आगामी प्रगति कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसलिए आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखना आवश्यक होगा।

    मानसून की संभावित एंट्री ने देशभर में राहत की उम्मीद बढ़ा दी है। यदि वर्षा का क्रम अपेक्षित रूप से आगे बढ़ता है तो किसानों, जलाशयों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है, जबकि मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी भी अहम रहेगी।

  • MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    MP में 20-22 जून के बीच दस्‍तक दे सकता है मानसून, अगले 4 दिन रहेगा आंधी-बारिश का दौर

    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन को लेकर मौसम विभाग ने नया अनुमान जारी किया है। इस बार प्रदेश में मानसून सामान्य समय से 5 से 7 दिन की देरी से पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक 20 से 22 जून के बीच होने की संभावना है। वहीं, मानसून आने से पहले प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहेगा।

    धार-खरगोन में रेड अलर्ट

    मौसम विभाग ने सोमवार को धार और खरगोन जिलों के लिए ओलावृष्टि और तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में आंधी, गरज-चमक, बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का यही मिजाज बना रहेगा।

    नौतपा की तपिश पर बारिश भारी
    नौतपा के सातवें दिन भी प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। लगातार बदलते मौसम के कारण तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को प्रदेश का सर्वाधिक तापमान शाजापुर में 41.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    बड़े शहरों में तापमान में गिरावट
    प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी गर्मी का असर कम हुआ है-
    इंदौर – 36.3 डिग्री सेल्सियस
    जबलपुर – 36.4 डिग्री सेल्सियस
    ग्वालियर – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    उज्जैन – 37.5 डिग्री सेल्सियस
    भोपाल – 38 डिग्री सेल्सियस

    शाजापुर, राजगढ़ और नरसिंहपुर को छोड़ अधिकांश जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा।

    मई में गर्मी भी रिकॉर्ड, बारिश भी ज्यादा
    मई माह में प्रदेश ने दो तरह के मौसम का अनुभव किया। महीने की शुरुआत आंधी और बारिश से हुई, जबकि 18 मई के बाद भीषण गर्मी का दौर शुरू हो गया। इस दौरान खजुराहो में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। 25 मई से शुरू हुए नौतपा के दौरान भी प्रदेश का कोई न कोई जिला आंधी और बारिश से प्रभावित रहा। महीने के अंतिम दिनों में कई जिलों में ओलावृष्टि भी हुई।

    औसत से अधिक हुई मई की बारिश
    मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार मई महीने में प्रदेश में करीब सवा इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में लगभग पौन इंच वर्षा होती है। यानी इस बार औसत से करीब 56 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। हालांकि जून में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना जताई गई है। अनुमान है कि इस बार प्रदेश में मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत का करीब 90 प्रतिशत रह सकती है।

    अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 1 से 4 जून तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां जारी रहेंगी। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण दिन और रात के तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

  • तेज हवाएं, बारिश और आंधी का खतरा बढ़ा, 55 किमी की रफ्तार से चल सकती है हवा, कई राज्यों में अलर्ट

    तेज हवाएं, बारिश और आंधी का खतरा बढ़ा, 55 किमी की रफ्तार से चल सकती है हवा, कई राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली। 
    देशभर में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और तूफानी हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 8 मई को उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक कई हिस्सों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। कुछ राज्यों में तेज हवाएं 55 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने की संभावना जताई गई है, जबकि पहाड़ी इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी भी हो सकती है। बदलते मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से जारी बारिश और ठंडी हवाओं का असर अब कम होने लगेगा। इसके बाद राजधानी में गर्मी एक बार फिर तेजी से बढ़ सकती है। आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने का अनुमान है। 8 मई को अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री रहने की संभावना है। इसके बाद अगले दो से तीन दिनों में गर्मी और ज्यादा बढ़ सकती है।

    उत्तर प्रदेश में 8 और 9 मई के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। खासतौर पर पूर्वी जिलों और तराई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। कई इलाकों में बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है।

    बिहार में भी मौसम को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के कई जिलों में आंधी और बारिश का खतरा बना हुआ है। किशनगंज, सुपौल, अररिया और खगड़िया समेत कई इलाकों में अगले 48 घंटों तक बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। बेमौसम बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

    मध्य प्रदेश में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है। कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां जारी हैं। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा समेत कई जिलों में आंधी और बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। वहीं राजस्थान में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश के आसार बने हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान में बढ़ोतरी भी दर्ज की जा सकती है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में मौसम ज्यादा खराब हो सकता है। उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हिमाचल प्रदेश में भी 11 और 12 मई के दौरान गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और सिक्किम में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु में भी कई जिलों में तेज बारिश के आसार हैं। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण कई राज्यों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ रूप देखने को मिल सकता है।