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  • दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप

    दुर्लभ महीना जो देता है महापुण्य लाभ-लेकिन छोटी सी भूल बढ़ा सकती है पाप


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार हर कुछ वर्षों में एक विशेष महीना आता है, जिसे Adhik Maas या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। यह महीना सामान्य 12 महीनों से अलग होता है और इसे अतिरिक्त (13वां) महीना माना जाता है। वर्ष 2026 में यह पवित्र महीना 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जब इस अतिरिक्त महीने को कोई नाम नहीं मिल पाया, तब स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर ‘पुरुषोत्तम मास’ बनाया। इसी कारण यह महीना विष्णु भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

    शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस अवधि में किए गए जप, तप, पूजा-पाठ और दान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसे “अक्षय पुण्य” प्राप्त करने वाला समय भी कहा जाता है। इसलिए भक्तजन इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध करने का प्रयास करते हैं।

    हालांकि, जितना यह महीना पुण्यदायी माना गया है, उतना ही इसमें कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए, अन्यथा उसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

    इस महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश या किसी नए कार्य की शुरुआत को शुभ नहीं माना जाता। इसी तरह, नए निर्माण कार्य या बड़े निवेश से भी बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा, इस अवधि में शारीरिक और मानसिक पवित्रता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। ब्रह्मचर्य का पालन और संयमित जीवनशैली अपनाना इस माह का मुख्य नियम माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन इस महीने में वर्जित माना गया है। ऐसा करने से आध्यात्मिक पुण्य कम होने की बात कही जाती है।

    इसी तरह झूठ बोलना, धोखा देना, किसी का धन हड़पना या बुरे कर्म करना इस महीने में कई गुना पाप का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय को आत्ममंथन और सुधार का अवसर माना जाता है।

    दान-पुण्य को इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन यह भी कहा गया है कि दान का दिखावा नहीं करना चाहिए और न ही अशुद्ध या खराब वस्तुओं का दान करना चाहिए।

    कांसे के बर्तन में भोजन करने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे भी शास्त्रीय नियमों के विरुद्ध माना गया है।

    कुल मिलाकर Adhik Maas को आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का महीना माना गया है, जिसमें सही आचरण व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।

  • 17 मई से शुरू अधिक मास: 27 साल बाद खास संयोग, जानें क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

    17 मई से शुरू अधिक मास: 27 साल बाद खास संयोग, जानें क्या करें और क्या बिल्कुल न करें

    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई से अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) की शुरुआत हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा। इस बार खास बात यह है कि यह ज्येष्ठ मास में लग रहा है, जिससे पूरा महीना 60 दिनों का हो गया है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु को समर्पित इस मास को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, लेकिन इसमें शुभ मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।

    क्या करें
    अधिक मास को भक्ति और साधना का महीना कहा गया है। इस दौरान

    भगवान विष्णु की रोज पूजा-अर्चना करें

    “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें

    विष्णु सहस्त्रनाम, गीता या श्रीमद्भागवत का पाठ करें

    जरूरतमंदों को वस्त्र, फल, जल और अन्न का दान करें

    पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही शुद्ध जल से स्नान कर पुण्य अर्जित करें

    माना जाता है कि इस महीने किए गए जप-तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।

    क्या न करें 
    इस पूरे मास में कुछ कामों से बचना जरूरी माना गया है

    शादी-विवाह, गृह प्रवेश, सगाई जैसे शुभ कार्य न करें

    नया बिजनेस या बड़ा काम शुरू करने से बचें

    तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज) से दूरी रखें

    झूठ बोलने और किसी का अपमान करने से बचें

    अधिक मास क्यों लगता है?
    हिंदू पंचांग चंद्र गणना पर आधारित है, जो सौर वर्ष से करीब 11 दिन छोटा होता है। यह अंतर हर साल बढ़ता जाता है और करीब 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है इसी को अधिक मास कहा जाता है। कुल मिलाकर, अधिक मास को आत्मशुद्धि, भक्ति और दान-पुण्य का विशेष समय माना जाता है, जहां सांसारिक कार्यों की बजाय आध्यात्मिक साधना को महत्व दिया जाता है।

  • आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    आज का पंचांग: ज्येष्ठ कृष्ण प्रतिपदा और नारद जयंती, जानें शुभ-अशुभ समय का पूरा विवरण

    नई दिल्ली। 2 मई 2026, शनिवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लिए हुए है। आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का प्रभाव है, जो रात 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा, इसके बाद द्वितीया तिथि प्रारंभ हो जाएगी। इस दिन का सबसे बड़ा धार्मिक महत्व नारद जयंती से जुड़ा है, जिसे ज्ञान और भक्ति के प्रतीक देवर्षि नारद को समर्पित माना जाता है।

    दिन की शुरुआत सूर्य उदय के साथ सुबह 5:40 बजे हुई, जबकि सूर्यास्त शाम 6:57 बजे होगा। चंद्रमा का उदय शाम 7:50 बजे के बाद होगा और इस दिन चंद्रास्त नहीं रहेगा। ग्रहों की यह स्थिति सामान्य रूप से संतुलित मानी जाती है, लेकिन कुछ समय विशेष सावधानी की आवश्यकता दर्शाते हैं।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार आज व्यातीपात योग का प्रभाव सुबह से लेकर रात 9:44 बजे तक रहेगा। इस योग को सामान्यतः चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जहां बड़े निर्णयों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। इसके बाद वरीयान योग प्रारंभ होगा, जो मानसिक स्थिरता और सकारात्मकता का संकेत देता है।

    दिन की शुरुआत बालव करण से हुई, जो सुबह 11:49 बजे तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद कौलव करण शुरू होगा, जो रात तक बना रहेगा। यह समय दैनिक कार्यों के लिए सामान्य रूप से ठीक माना जाता है, लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में शुभ मुहूर्त देखना उचित रहता है।

    यह दिन विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948 और गुजराती संवत 2082 के अंतर्गत आता है, जो परिवर्तन और नए आरंभ का संकेत देता है। ज्योतिष के अनुसार यह काल जीवन में नई दिशा और अवसरों का समय माना जाता है।

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन विशेष है क्योंकि नारद जयंती पर भक्ति और ज्ञान की साधना का महत्व बढ़ जाता है। इस दिन पूजा और ध्यान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। साथ ही यह दिन ज्येष्ठ मास के आरंभ का भी प्रतीक है, जिसे धार्मिक कार्यों, दान और तप के लिए शुभ माना जाता है।

  • 22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय

    22 अप्रैल का पंचांग स्कंद षष्ठी पर रवि योग और विजय मुहूर्त का विशेष संयोग जानिए शुभ और अशुभ समय


    नई दिल्ली:
    धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 22 अप्रैल का दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन स्कंद षष्ठी का पावन पर्व मनाया जा रहा है यह पर्व भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है जिन्हें भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र के रूप में पूजा जाता है इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखकर विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं और सुख समृद्धि की कामना करते हैं

    पंचांग के अनुसार यह दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को पड़ रहा है जो रात 10 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगी इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी सूर्योदय सुबह 5 बजकर 49 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 51 मिनट पर निर्धारित है वहीं आर्द्रा नक्षत्र रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र का आरंभ होगा

    इस दिन का सबसे खास पहलू रवि योग का निर्माण है जो सुबह 5 बजकर 49 मिनट से रात 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा ज्योतिष के अनुसार यह योग शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है हालांकि इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं बन रहा है लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए उपयुक्त माना जाता है इसके अलावा अमृत काल दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से 2 बजकर 26 मिनट तक रहेगा जो अत्यंत शुभ समय माना जाता है

    दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त से होगी जो सुबह 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 5 मिनट तक रहेगा यह समय पूजा और ध्यान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है वहीं शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 12 मिनट तक रहेगा जो धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना जाता है

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है इसके अलावा यमगंड काल सुबह 7 बजकर 27 मिनट से 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल सुबह 10 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक प्रभावी रहेगा दुर्मुहूर्त का समय दोपहर 11 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जिसे अशुभ माना जाता है

    इसके साथ ही वर्ज्य काल सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा इस दौरान भी शुभ कार्यों से परहेज करना उचित माना जाता है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही मुहूर्त का चयन जीवन में सकारात्मक परिणाम लाने में सहायक होता है

     22 अप्रैल का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है जहां एक ओर स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा का विशेष महत्व है वहीं दूसरी ओर शुभ योगों का संयोग इसे और भी खास बनाता है ऐसे में श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे दिन के शुभ और अशुभ समय का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों की योजना बनाएं ताकि उन्हें बेहतर फल प्राप्त हो सके

  • आज का पंचांग 13 मार्च 2026 चैत्र कृष्ण दशमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त राहुकाल और ग्रहों की स्थिति

    आज का पंचांग 13 मार्च 2026 चैत्र कृष्ण दशमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त राहुकाल और ग्रहों की स्थिति

    नई दिल्ली। आज शुक्रवार 13 मार्च 2026 चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस दिन दशा माता व्रत भी रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेगा जिससे आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी और नेतृत्व क्षमता प्रबल होगी।

    आज की तिथि कृष्ण दशमी है जो पूर्ण रात्रि तक रहेगी। प्रातः 10:32 बजे तक व्यक्तिपात योग रहेगा। करण वणिज सायं 07:23 बजे तक प्रभावी रहेगा और इसके बाद विश्टि करण पूरी रात रहेगा। सूर्योदय प्रातः 06:33 बजे और सूर्यास्त सायं 06:28 बजे होगा। चंद्रमा 14 मार्च को रात्रि 03:30 बजे उदय होगा और दोपहर 12:54 बजे अस्त होगा।

    ग्रहों की स्थिति देखें तो सूर्य कुंभ राशि में और चंद्रमा धनु राशि में स्थित है। आज का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है जो 14 मार्च रात्रि 03:03 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह नक्षत्र धनु राशि के 13°20’ से 26°40’ तक फैला है और इसके स्वामी शुक्र हैं जबकि राशि स्वामी बृहस्पति हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र व्यक्ति में साहस आत्मविश्वास उदारता और सामाजिक लोकप्रियता बढ़ाता है। हालांकि अहंकार और खर्चीले स्वभाव से बचने की सलाह भी दी जाती है।

    आज के शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:55 बजे तक रहेगा। यह समय पूजा, नया कार्य शुरू करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल रात्रि 09:47 से 11:32 बजे तक प्रभावी रहेगा। वहीं आज के अशुभ समय में राहुकाल प्रातः 11:01 से 12:31 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिकाल प्रातः 08:03 से 09:32 बजे तक और यमगंड दोपहर 03:29 से सायं 04:59 बजे तक रहेगा। राहुकाल में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।

    धार्मिक दृष्टि से आज दशा माता व्रत रखने वाले श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए व्रत रखते हैं। अभिजीत मुहूर्त में किए जाने वाले कार्य शुभ और फलदायी माने जाते हैं। इस दिन चंद्रमा की स्थिति आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि के साथ-साथ समाज में प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ाती है।

    इस प्रकार 13 मार्च 2026 का पंचांग सभी धार्मिक कर्मों और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मार्गदर्शक साबित होता है। सुबह के शुभ समय से लेकर दोपहर के अभिजीत मुहूर्त और शाम के राहुकाल तक की जानकारी का पालन करने से दिन की सफलता और शुभता सुनिश्चित होती है। आज का दिन अपने आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाने के लिए भी अनुकूल है।

  • होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त

    होली पर चंद्र ग्रहण का साया, सूतक काल ने बदला होलिका दहन का समय, जानें पूजा का सही मुहूर्त


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में होलिका दहन का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन इस साल 3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का एक साथ होना चिंता का विषय बना हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय किसी भी मांगलिक या शुभ कार्य के लिए वर्जित माने जाते हैं।

    ऐसे में भक्तों के मन में यह सवाल है कि दोष से बचने के लिए होलिका कब जलाई जाए। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को शाम 05:07 बजे समाप्त हो जाएगी, लेकिन शास्त्रों के नियम और ग्रहण की शुद्धि के अनुसार ही दहन का समय तय करना उचित रहेगा।

    सूतक काल और चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    भारतीय के समय के अनुसार, 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव शाम 06:26 बजे चंद्रोदय के साथ ही दिखने लगेगा और यह शाम 06:46 बजे समाप्त होगा। हालांकि, ग्रहण की विभिन्न अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से ही शुरू हो जाएंगी, लेकिन सूतक काल का विशेष महत्व होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से ही प्रारंभ हो जाएगा, जो शाम 06:46 बजे ग्रहण की समाप्ति तक रहेगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान की मनाही होती है, इसलिए होलिका दहन की रस्में शाम 06:46 बजे के बाद ही की जानी चाहिए।

    भद्रा का समय और दहन का मुहूर्त

    होलिका दहन के लिए भद्रा का विचार करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि भद्रा मुख में किया गया दहन अशुभ फल दे सकता है। इस वर्ष 3 मार्च को भद्रा देर रात यानी 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से शुरू होगी। इसलिए शाम के समय भद्रा का कोई दोष नहीं रहेगा।

    होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त शाम 06:47 बजे (ग्रहण समाप्ति) के बाद से लेकर रात 08:50 बजे तक रहेगा। यह वह समय है जब आप बिना किसी भय या दोष के होलिका दहन कर सकते हैं। ग्रहण के तुरंत बाद किया गया यह दहन नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने की प्रबल संभावना रखता है।

    दोष से मुक्ति के सरल नियम

    भद्रा और सूतक के दोष से बचने के लिए सहजता के साथ कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण काल के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर मानसिक जाप करते रहें, जिससे वातावरण की नकारात्मकता का आप पर प्रभाव न पड़े। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें और फिर शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें।

    होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना घर में सुख-शांति लाता है। माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से किसी भी प्रकार के ग्रहों की उग्रता शांत होती है और घर के संचालन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

  • चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

    चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट


    नई दिल्ली । Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ।

    2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन

    वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है।

    भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।

    शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा

    शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट

    इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

    सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।

    4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

    होली 2026: पूरा कैलेंडर

    2 मार्च सोमवार होलिका दहन रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू

    4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन

    ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय

    तुलसी का प्रयोग सूतक लगने से पहले 3 मार्च सुबह दूध दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ सुई कैंची का इस्तेमाल करें। स्नान और दान ग्रहण खत्म होने के बाद 3 मार्च शाम 7 बजे के बाद स्नान करें और सफेद वस्त्र चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है। मंत्र जाप ग्रहण के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

  • 23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश

    23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर सोमवार 23 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लेकर आया है। वैदिक पंचांग के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्म योग का प्रभाव रहा, जिसे शुभ कर्म, जप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। प्रातः लगभग 9 बजे तक षष्ठी तिथि रही और इसके पश्चात सप्तमी तिथि का आरंभ हुआ। धर्माचार्यों के अनुसार यह समय आत्मसंयम, दृढ़ संकल्प और धर्मपालन के लिए अनुकूल माना गया है।

    पंचांग गणना के अनुसार चंद्रमा मेष राशि में भरणी नक्षत्र पर स्थित हैं। यमराज को भरणी नक्षत्र का अधिष्ठाता माना जाता है। इस कारण यह दिन जीवन में अनुशासन, कर्तव्य पालन और आचरण की शुद्धता का संदेश देता है। धार्मिक परंपराओं में भरणी नक्षत्र को कर्मफल की स्मृति और आत्मनियंत्रण से जोड़ा गया है। विद्वानों का मत है कि आज लिया गया सकारात्मक संकल्प दीर्घकालिक फल प्रदान कर सकता है और व्यक्ति को नैतिक दृढ़ता की दिशा में अग्रसर करता है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से आज ग्रहों की स्थिति भी विशेष मानी जा रही है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का संयोग विचार शक्ति और निर्णय क्षमता को प्रभावित करने वाला योग बना रहा है। इसे सामाजिक समन्वय, नई योजनाओं और बौद्धिक सक्रियता के लिए प्रेरक माना गया है। वहीं मकर राशि में स्थित मंगल को कर्मबल और साहस का कारक बताया गया है। यह स्थिति कठिन कार्यों को पूरा करने की ऊर्जा प्रदान करती है और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज मांगलिक कार्य, पूजन, जप और दान शुभ मुहूर्त में करना हितकारी रहेगा। राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों से परहेज करने की परंपरा का पालन करने की सलाह दी गई है। श्रद्धालु मंदिरों में विशेष आराधना, दीपदान और प्रार्थना कर रहे हैं। कई स्थानों पर फाल्गुन मास के उपलक्ष्य में सामूहिक पाठ, भजन और अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।

    धर्मशास्त्रों के जानकारों का कहना है कि फाल्गुन मास आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस अवधि में संयमित जीवन, सेवा भावना और सत्कर्म को विशेष पुण्यदायी बताया गया है। आज का दिन व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

    आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्रह्म योग और भरणी नक्षत्र का यह संयोग साधना, आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्पों के लिए उपयुक्त समय माना गया है। पंचांग की यह जानकारी न केवल धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि दैनिक जीवन में शुभ-अशुभ समय के चयन के लिए भी मार्गदर्शक मानी जाती है।

  • आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

    आज का पंचांग 11 फरवरी 2026 फाल्गुन माह की कृष्ण नवमी पर करें गणपति पूजन मिलेगा बुद्धि समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। 11 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है और साथ ही बुधवार का पावन संयोग भी बन रहा है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित होता है। गणपति बप्पा को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन सच्चे मन से भगवान गणेश की पूजा अर्चना करता है उसके जीवन के समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं और उसे बुद्धि विवेक सफलता तथा समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बुध दोष होता है उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    आज के दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके साथ ही मोदक और शमी के पत्ते चढ़ाने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के समय ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और कार्यों में सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यदि कोई नया कार्य आरंभ करना चाहते हैं तो आज का दिन उपयुक्त साबित हो सकता है बशर्ते शुभ मुहूर्त का ध्यान रखा जाए।

    आज का अमृत काल प्रातः 03:50 से 05:38 तक रहेगा। यह समय अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इसके अतिरिक्त ब्रह्म मुहूर्त 05:28 से 06:16 तक है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर ध्यान जप और पूजा करने से आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और मन में सकारात्मकता का संचार होता है।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 12:41 से 2:04 तक रहेगा। इस अवधि में किसी भी नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए। यम गण्ड प्रातः 8:29 से 9:53 तक रहेगा जबकि कुलिक काल 11:17 से 12:41 तक है। दुर्मुहूर्त 12:18 से 01:03 तक रहेगा और वर्ज्यम् सायं 05:07 से 06:54 तक है। इन समयों में शुभ कार्यों से परहेज करना ही उचित माना जाता है।

    सूर्योदय प्रातः 7:05 पर होगा और सूर्यास्त सायं 6:16 पर। चंद्रोदय 11 फरवरी को प्रातः 2:07 पर हुआ है जबकि चंद्रास्त दोपहर 12:48 पर होगा। ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति साधना और आराधना के लिए अनुकूल मानी जा रही है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज के दिन सादगी और श्रद्धा के साथ गणेश पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थी वर्ग के लिए यह दिन विशेष लाभकारी हो सकता है। व्यापार और करियर से जुड़े लोगों को भी आज भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    इस प्रकार 11 फरवरी 2026 का यह दिन आस्था विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। यदि शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए भगवान गणेश की आराधना की जाए तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

  • आज फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी, स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग

    आज फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी, स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संयोग

    नई दिल्ली। 08 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष सप्तमी तिथि है। आज रविवार का दिन है और सप्तमी तिथि पर स्वाति नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र का संयोग बन रहा है।

    शुभ मुहूर्त:

    अभिजीत मुहूर्त: 12:18 PM – 01:03 PM

    अमृत काल: 07:17 PM – 09:03 PM

    ब्रह्म मुहूर्त: 05:30 AM – 06:18 AM

    अशुभ मुहूर्त:

    राहू काल: 04:51 PM – 06:14 PM

    यम गण्ड: 12:41 PM – 02:04 PM

    कुलिक: 03:27 PM – 04:51 PM

    दुर्मुहूर्त: 04:45 PM – 05:30 PM

    वर्ज्यम्: 08:40 AM – 10:26 AM

    सूर्य और चंद्रमा का समय:

    सूर्योदय: 07:07 AM

    सूर्यास्त: 06:14 PM

    चन्द्रोदय: Feb 09, 12:18 AM

    चन्द्रास्त: Feb 09, 11:23 AM

    विशेष जानकारी:
    आज स्वाति और विशाखा नक्षत्र के संयोग के कारण नये कार्य, निवेश या महत्वपूर्ण निर्णय के लिए शुभ समय माना जाता है। अभिजीत और अमृत मुहूर्त में किए गए कार्य लाभकारी रहेंगे। वहीं, राहू काल और दुर्मुहूर्त में किए गए कार्य से बचना चाहिए क्योंकि ये अशुभ परिणाम दे सकते हैं।

    सूर्य और चंद्रमा के समय के अनुसार पूजा, उपासना और ध्यान के लिए भी सही समय का चुनाव किया जा सकता है। रविवार होने के कारण सूर्य देव की आराधना करने से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।