Tag: Hindu calendar

  • आज का दिन कैसा रहेगा: पंचांग में जानिए शुभ मुहूर्त ग्रहों की चाल और दिनभर का प्रभाव

    आज का दिन कैसा रहेगा: पंचांग में जानिए शुभ मुहूर्त ग्रहों की चाल और दिनभर का प्रभाव


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार आज सोमवार 2 फरवरी 2026 को माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। यह तिथि पूर्णिमा के बाद प्रारंभ होती है और इसे आत्मविश्लेषण संयम और मानसिक स्थिरता के लिए उपयुक्त माना जाता है। सोमवार का दिन होने के कारण आज भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहों की स्थिति भी आज सकारात्मक संकेत दे रही है।

    आज कृष्ण प्रतिपदा तिथि रात्रि 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। दिन के प्रारंभ में आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा जो स्वास्थ्य और दीर्घायु से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग बनेगा जो सफलता सौभाग्य और सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है। करण के रूप में दिन के पहले भाग में बालव और बाद में कौलव करण प्रभाव में रहेगा।

    ग्रहों की स्थिति की बात करें तो आज सूर्य मकर राशि में स्थित हैं। इससे कार्यक्षेत्र में अनुशासन जिम्मेदारी और स्थायित्व का प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं चंद्रमा पूरे दिन कर्क राशि में संचरण करेंगे और रात्रि 10 बजकर 47 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। चंद्रमा की यह स्थिति भावनात्मक संतुलन पारिवारिक विषयों और घरेलू मामलों को प्राथमिकता देती है।

    आज सूर्य का उदय प्रातः 7 बजकर 9 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 1 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सायं 6 बजकर 33 मिनट पर और चंद्रास्त प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा।नक्षत्र की बात करें तो आज चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह नक्षत्र तीव्र बुद्धि रणनीतिक सोच और गूढ़ विषयों से जुड़ा माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सावधानी और विवेक की आवश्यकता होती है। आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं जबकि इसके अधिष्ठाता देवता नाग माने गए हैं।

    आज के शुभ मुहूर्तों की बात करें तो धार्मिक कार्य पूजा पाठ ध्यान और जप के लिए दोपहर और रात्रि का समय अनुकूल माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल रात्रि 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इन समयों में किए गए कार्यों से सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।

    अशुभ काल में राहुकाल प्रातः 8 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड प्रातः 11 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक और गुलिकाल दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना उचित माना गया है।दिन के लिए विशेष सुझाव यह है कि सोमवार के कारण शिवलिंग पर जल अर्पित करना लाभकारी रहेगा। मन की शांति के लिए ध्यान जप और मौन साधना उपयुक्त रहेगी। हल्का सात्विक भोजन और सकारात्मक सोच अपनाने से दिन और भी शुभ बन सकता है।

  • आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..

    आज का पंचांग: बसंत पंचमी पर सरस्वती वंदना का शुभ संयोग..


    नई दिल्ली :आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

    आज शुक्रवार 23 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान विद्या संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी से ऋतुओं के परिवर्तन की शुरुआत होती है और जीवन में नई ऊर्जा सृजनशीलता और सकारात्मकता का प्रवेश होता है। सूर्य उत्तरायण में स्थित है और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है जिससे आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

    तिथि वार और संवत
    आज माघ शुक्ल पंचमी तिथि रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा।
    वार शुक्रवार है।
    विक्रम संवत 2082
    शक संवत 1947
    राष्ट्रीय मिति माघ 03
    हिजरी तारीख शब्बन 03 1447
    सौर मास माघ मास प्रविष्टे 10

    नक्षत्र योग और करण
    दिन की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में होगी जो दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आरंभ होगा।
    योग की बात करें तो परिधि योग अपराह्न 3 बजकर 59 मिनट तक रहेगा इसके पश्चात शिव योग का शुभ संयोग बनेगा।
    करण बव करण दोपहर 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा इसके बाद कौलव करण प्रभावी होगा।

    चंद्रमा की स्थिति
    चंद्रमा सुबह 8 बजकर 34 मिनट तक कुंभ राशि में रहेगा इसके बाद गुरु की राशि मीन में प्रवेश करेगा। इससे भावनात्मक संतुलन आध्यात्मिक झुकाव और रचनात्मक सोच में वृद्धि देखी जा सकती है। बसंत पंचमी पर चंद्रमा का मीन राशि में गोचर सरस्वती आराधना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

    सूर्य समय
    सूर्योदय सुबह 7 बजकर 13 मिनट
    सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट

    आज के पर्व
    बसंत पंचमी
    श्री पंचमी
    सरस्वती पूजा
    लक्ष्मी पूजन
    आज विद्यारंभ पुस्तक पूजन और पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा विशेष रूप से मानी जाती है।

    शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04
    विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:52
    गोधूलि बेला शाम 5:42 से 6:08
    निशीथ काल रात्रि 11:54 से 12:47

    अशुभ समय
    राहुकाल सुबह 10:30 से 12:00
    गुलिक काल सुबह 7:30 से 9:00
    यमगंड दोपहर 3:30 से 4:30
    दुर्मुहूर्त सुबह 9:06 से 9:50
    पंचक पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

    अमृत काल
    सुबह 9:53 से 11:13 तक

    धार्मिक दृष्टि से आज का दिन पूजा साधना और शुभ संकल्प के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना से बुद्धि विवेक स्मरण शक्ति और विद्या में वृद्धि होने का विश्वास किया जाता है।

  • आज का पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का महायोग, जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल

    आज का पंचांग: विनायक चतुर्थी पर गणेश पूजा का महायोग, जानें शुभ मुहूर्त, नक्षत्र और राहुकाल


    नई दिल्ली। आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार को माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि विनायक चतुर्थी और तिल चतुर्थी के रूप में मनाई जा रही है। पंचांग के अनुसार आज का दिन भगवान गणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सही मुहूर्त में गणपति पूजन करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं, रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और नई शुरुआत में सफलता मिलती है।
    आज की चतुर्थी तिथि रात्रि 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। विक्रम संवत 2082 और शक संवत 1947 चल रहा है। सूर्य उत्तरायण में हैं और शिशिर ऋतु का प्रभाव बना हुआ है। चंद्रमा पूरे दिन कुंभ राशि में संचार करेगा, जिससे बौद्धिक कार्य, योजना निर्माण और रचनात्मक गतिविधियों के लिए दिन अनुकूल माना जा रहा है।नक्षत्र की बात करें तो आज शतभिषा नक्षत्र दोपहर 2 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग के रूप में सुबह 5 बजकर 48 मिनट तक वरीयान योग रहेगा, जो शुभ और सिद्धिदायक माना गया है। इसके बाद परिधि योग प्रभावी होगा। करण में वणिज करण दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, फिर बव करण लगेगा।

    आज के शुभ मुहूर्त
    आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:11 से 6:04 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:08 से 2:51 बजे तक है। इसके अलावा शाम की गोधूलि बेला 5:41 से 6:07 बजे तक रहेगी, जिसे पूजा-पाठ और संकल्प के लिए विशेष शुभ माना गया है। गणेश पूजा के लिए यह समय अत्यंत फलदायी है।

    अशुभ समय और सावधानी
    आज राहुकाल दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक रहेगा। सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक गुलिक काल और 6:00 से 7:30 बजे तक यमगंड का समय रहेगा। आज पूरे दिन पंचक का प्रभाव भी बताया गया है इसलिए नए और जोखिम भरे कार्यों में सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

    सूर्योदय और सूर्यास्त
    आज सूर्योदय सुबह 7:13 बजे और सूर्यास्त शाम 5:51 बजे होगा।

    धार्मिक महत्व और उपाय
    विनायक चतुर्थी के दिन गणेश जी को मोदक, तिल और गुड़ अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को तिल, मिठाई या भोजन का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषीय दृष्टि से आज का दिन बाधा निवारण, मानसिक शांति और नई शुरुआत के लिए उत्तम है।आज का पंचांग पूजा-पाठ, व्रत और धार्मिक कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकता है। सही तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त में किया गया कर्म अधिक फलदायी माना गया है।

  • हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत

    हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत


    नई दिल्ली।साल 2026 की शुरुआत के साथ ही लोगों में व्रत और त्योहारों की तारीखों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हिंदू धर्म में व्रत और पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा हैं, बल्कि ये सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक भी माने जाते हैं। मकर संक्रांति, होली, दिवाली जैसी प्रमुख खुशियों से जुड़ी तिथियों का जानना इसलिए जरूरी होता है, ताकि पारिवारिक आयोजनों और धार्मिक अनुष्ठानों की योजना पहले से बनाई जा सके।हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकांश त्योहार सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होते हैं। इसी वजह से हर साल इनकी तिथियों में बदलाव होता है।

    मकर संक्रांति 2026

    साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति को विशेष रूप से दान-पुण्य और उत्सव के रूप में माना जाता है। इसी दिन पोंगल, उत्तरायण और षटतिला एकादशी भी पड़ रही हैं। यह पर्व किसानों और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है।

    होली 2026

    फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली होली इस साल 4 मार्च, बुधवार को है। होली से एक दिन पहले, 3 मार्च को होलिका दहन होगा। यह पर्व रंगों का उत्सव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पूरे देश में इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और मिठाई बांटकर भाईचारे और प्रेम का संदेश देते हैं।

    दिवाली 2026

    दीपों का त्योहार दिवाली इस साल 8 नवंबर को है। इसके अगले दिन 9 नवंबर को दिवाली अमावस्या पड़ रही है। दिवाली से जुड़ी अन्य प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं: 6 नवंबर – धनत्रयोदशी, 10 नवंबर – बलिपद्यमी। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत और घर में खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है।

    नवरात्रि और राम नवमी

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। इसी दिन घटस्थापना, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा भी मनाए जाएंगे। 26 मार्च को राम नवमी और 27 मार्च को नवरात्रि पारणा होगी। वहीं शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दशहरा के साथ समाप्त होगी।

    महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख व्रत

    साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके अलावा पूरे साल नियमित रूप से एकादशी, प्रदोष व्रत, संकष्टी चतुर्थी और पूर्णिमा-अमावस्या पड़ेंगे। ये व्रत न केवल धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि परिवार और समाज में पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मददगार हैं।धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार व्रत और त्योहार हमारे जीवन में आस्था, अनुशासन और सामाजिक संबंधों को बनाए रखने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए साल 2026 की व्रत-त्योहार सूची हर परिवार के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
  • राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी


    अयोध्या । अयोध्या स्थित राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह इस बार 22 जनवरी 2026 को नहीं मनाई जाएगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसारराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी वर्षगांठ इस बार 31 दिसंबर 2025 को होगीक्योंकि प्रतिष्ठा द्वादशी इसी दिन पड़ेगी।

    राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसारप्राण प्रतिष्ठा की इस वर्षगांठ को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और विभिन्न सांस्कृतिक तथा सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाया जाएगाताकि इस अवसर की महिमा और महत्व को और अधिक बढ़ाया जा सके।

    राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की पहली सालगिरह 2024 में आयोजित की गई थीजब मंदिर के गर्भगृह में राम लला की भव्य मूर्ति स्थापित की गई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत सहित कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने शिरकत की थी। यह आयोजन भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण थाक्योंकि वर्षों बाद राम लला की पूजा अर्चना अयोध्या में उनके जन्म स्थान पर शुरू हो सकी थी।

    राम मंदिर का निर्माण श्रीराम के प्रति भारतीय जनता की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैबल्कि भारतीय संस्कृतिसभ्यता और एकता का भी प्रतीक बन चुका है। राम मंदिर का उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह एक ऐतिहासिक घटना थीजिससे न केवल हिंदू समाज बल्कि समग्र भारत के लोग जुड़े हुए हैं।

    31 दिसंबर को होने वाले इस विशेष आयोजन में न केवल धार्मिक अनुष्ठान होंगेबल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई हैजिनमें रामकथाभजन कीर्तननृत्य एवं संगीत के कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्तविभिन्न सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगीजो राम मंदिर की महिमा को और अधिक बढ़ावा देंगी। इस दिन अयोध्या में विशेष रौनक देखने को मिलेगी और यह आयोजन वहां के नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

    राम मंदिर के इस आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्र को सजाया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि आयोजन निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके।
    अयोध्या में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगाबल्कि यह भारतीयतासंस्कृति और सभ्यता के प्रति एक गहरी श्रद्धा का प्रतीक भी रहेगा।