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  • नवरात्र शुरू होने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, पूजा में बाधा से बचने के लिए अभी कर लें तैयारी

    नवरात्र शुरू होने से पहले निपटा लें ये 5 जरूरी काम, पूजा में बाधा से बचने के लिए अभी कर लें तैयारी

    नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू होगी और इसके बाद लगातार नौ दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। नवरात्र के दौरान पूजा में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए कुछ जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी करने की सलाह दी जाती है। इनमें घर की साफ-सफाई से लेकर पूजा सामग्री जुटाने और ऐसे काम पूरे करने तक की बातें शामिल हैं, जिन्हें नवरात्र के दौरान करना वर्जित माना जाता है।

    नवरात्र से पहले सबसे पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करने की बात कही गई है। घर के कोने-कोने की सफाई के साथ टूटी-फूटी और कबाड़ की चीजों को भी बाहर कर देना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की भी अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। भगवान के वस्त्र और पूजा के बर्तनों को धोकर साफ करने के साथ पूजा सामग्री रखने की जगह को भी व्यवस्थित करना जरूरी बताया गया है। पूजा स्थल पर मौजूद निर्माल्य को हटा देना चाहिए और जो पूजा सामग्री खत्म हो गई है, उसकी सूची बनाकर उसे पहले ही खरीद लेना चाहिए।

    यदि नवरात्र में अखंड ज्योति जलानी है या घटस्थापना करनी है, तो उससे जुड़ी सभी जरूरी सामग्री एक दिन पहले ही लाकर रख लेने की सलाह दी गई है। पूजा के लिए साफ चौकी की व्यवस्था भी पहले कर लेनी चाहिए, ताकि नवरात्र के पहले दिन पूजा की तैयारियों में जल्दबाजी न करनी पड़े। घर की सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था पहले से पूरी होने पर नौ दिनों तक पूजा-पाठ के दौरान जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध रह सकती हैं।

    नवरात्र से पहले घर में रखी तामसिक चीजों को हटाने की भी बात कही गई है। इनमें लहसुन-प्याज, नॉनवेज और शराब जैसी चीजें शामिल हैं। यदि किसी कारण से इन्हें घर से पूरी तरह हटाना संभव न हो, तो इन्हें अलग स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। इन्हें पूजा स्थल या उस जगह के पास नहीं रखना चाहिए, जहां भोग तैयार किया जाता है। जिन घरों में नॉनवेज भोजन बनाया जाता है, वहां भोग, प्रसाद और व्रत का भोजन तैयार करने के लिए अलग बर्तनों की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। नॉनवेज बनाने वाले बर्तनों में भोग या व्रत का भोजन नहीं बनाना चाहिए।

    नवरात्र के दौरान बाल और नाखून कटवाना वर्जित माना जाता है। खासतौर पर नवरात्र का व्रत रखने वाले लोगों को इन नौ दिनों में बाल और नाखून नहीं कटवाने की सलाह दी जाती है। इसलिए यह काम नवरात्र शुरू होने से पहले ही पूरा कर लेना बेहतर बताया गया है। इन तैयारियों के अलावा घटस्थापना के मुहूर्त की जानकारी भी पहले से रखना जरूरी है। 11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ मुहूर्त 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। नवरात्र की पूजा के लिए घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई तथा आवश्यक सामग्री की व्यवस्था पहले से करने से तैयारियों को समय पर पूरा किया जा सकता है।

  • शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    शनिवार को पीपल के पेड़ के पास करें ये 4 धार्मिक उपाय, पितृ दोष से राहत की ज्योतिषीय मान्यता

    नई दिल्ली: पितृ दोष को लेकर ज्योतिष में कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। माना जाता है कि पितृ दोष के कारण जीवन में काम रुकने, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव जैसी स्थितियां बनी रह सकती हैं। शनिवार का दिन पितरों और शनिदेव से जुड़े उपायों के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीपल के पेड़ के पास कुछ उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से कम से कम सात शनिवार तक इन उपायों को करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की परेशानियां कम हो सकती हैं। इन उपायों को आस्था और श्रद्धा के अनुसार करने की बात कही गई है।

    शनिवार की शाम सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक जलाने के बाद पितरों का स्मरण कर सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद ‘ॐ सर्व पितृ प्रशनो भवः ओम’ मंत्र का 108 बार जाप करने की मान्यता बताई गई है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के रास्ते खुल सकते हैं। दीपक जलाते समय मन में श्रद्धा और शांत भाव रखने को भी महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार की शाम पीपल के पेड़ की जड़ में सरसों के तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की भी परंपरा है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से हनुमान जी और शनिदेव की कृपा मिलने के साथ पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है। नियमित रूप से यह उपाय करने से मन को शांति मिलने और नकारात्मक विचारों से राहत मिलने की बात कही जाती है। इसी तरह शनिवार को पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करने का भी धार्मिक महत्व बताया गया है। परिक्रमा के दौरान पीपल के तने पर सूत या सफेद धागा लपेटने की परंपरा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार पीपल की पूजा से शनि के साथ राहु और केतु से जुड़े दोषों को शांत करने में मदद मिल सकती है। इन्हीं ग्रहों को पितृ दोष से जोड़कर भी देखा जाता है।

    शनिवार की सुबह स्नान और पूजा के बाद एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें थोड़े काले तिल मिलाने और इसे पीपल के पेड़ की जड़ में अर्पित करने की भी मान्यता है। जल चढ़ाते समय पितरों का ध्यान कर उनकी शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता में काले तिल का पितृ कर्म में विशेष महत्व बताया गया है। पीपल को जल अर्पित करने और पितरों का स्मरण करने से उनकी कृपा मिलने की मान्यता है। इसे आर्थिक परेशानी और जीवन की रुकावट दूर करने वाला उपाय भी माना जाता है। इन उपायों में नियमितता को विशेष महत्व दिया गया है और अपनी सुविधा व श्रद्धा के अनुसार किसी एक उपाय को लगातार सात शनिवार तक करने की बात कही गई है।

    पूजा के दौरान पीपल के पेड़ की स्वच्छता और आसपास के वातावरण का ध्यान रखने की सलाह दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उपाय करते समय मन में श्रद्धा बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इन सभी उपायों का आधार ज्योतिष और धार्मिक मान्यताएं हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार ही अपनाने की बात कही गई है। पितृ दोष से जुड़े इन उपायों को धार्मिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके परिणामों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण का दावा नहीं किया गया है।

  • Pitru Paksha 2026: अचानक सपने में दिखे पितर और मांगने लगे पानी या भोजन तो क्या है इसका मतलब जानिए धार्मिक मान्यता

    Pitru Paksha 2026: अचानक सपने में दिखे पितर और मांगने लगे पानी या भोजन तो क्या है इसका मतलब जानिए धार्मिक मान्यता


    नई दिल्ली। पितृ पक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसी वजह से इस अवधि में आने वाले सपनों को लेकर भी लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। स्वप्न शास्त्र में पूर्वजों से जुड़े सपनों के अलग अलग अर्थ बताए गए हैं। हालांकि इन अर्थों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    अगर पितृ पक्ष के दौरान सपने में कोई पूर्वज मुस्कुराते हुए दिखाई दें तो धार्मिक मान्यता में इसे शुभ संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि पूर्वजों का प्रसन्न अवस्था में दिखाई देना उनके आशीर्वाद और संतुष्टि का प्रतीक हो सकता है। ऐसी मान्यता है कि इससे व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद का भाव मिलता है।

    इसके विपरीत यदि सपने में पूर्वज रोते हुए या दुखी दिखाई दें तो इसे धार्मिक मान्यताओं में चिंता का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति को पितरों की ओर से ध्यान आकर्षित करने वाला संकेत बताया जाता है। मान्यता के अनुसार परिवार को अपने पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए और उनकी शांति के लिए श्राद्ध तर्पण तथा दान जैसे धार्मिक कर्म करने चाहिए।

    कई लोगों को सपने में अपने पूर्वज भोजन या पानी मांगते हुए भी दिखाई देते हैं। स्वप्न शास्त्र से जुड़ी मान्यताओं में इसे महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के नाम से तर्पण करने और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या दान देने की परंपरा बताई जाती है। ब्राह्मण भोजन कराने की परंपरा का भी उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में मिलता है।

    कभी कभी सपने में व्यक्ति अपने किसी दिवंगत परिजन के साथ बातचीत करता हुआ दिखाई देता है। स्वप्न शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार ऐसे सपने किसी आने वाली उलझन या जीवन में चल रही चिंता से जोड़कर देखे जाते हैं। हालांकि ऐसे सपने आने पर डरने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक दृष्टि से इस समय पितरों का स्मरण करना और उनके निमित्त दान तर्पण जैसे कर्म करना शुभ माना जाता है।

    पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों से जुड़े सपनों को लेकर लोगों की आस्था काफी गहरी होती है। किसी को अपने दिवंगत माता पिता दिखाई देते हैं तो किसी को दादा दादी या परिवार के दूसरे बुजुर्ग सपने में नजर आते हैं। इन सपनों का वास्तविक कारण व्यक्ति की यादें भावनाएं और मानसिक स्थिति भी हो सकती है। इसलिए इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं लेना चाहिए।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ पक्ष का मूल उद्देश्य अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है। ऐसे में सपने में पूर्वज दिखाई दें तो घबराने के बजाय अपनी परंपरा और आस्था के अनुसार उनका स्मरण करना तर्पण करना तथा जरूरतमंदों की सहायता करना एक सकारात्मक भाव माना जाता है।

  • Pitru Paksha 2026: पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें इन 7 चीजों का दान जानें सही समय और धार्मिक महत्व

    Pitru Paksha 2026: पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें इन 7 चीजों का दान जानें सही समय और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। साथ ही जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा भी रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की तृप्ति होती है और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

    पितृ पक्ष में अन्न दान को विशेष महत्व दिया गया है। गेहूं चावल जौ काले चने और अन्य जरूरत की खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न का दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं रहती और परिवार में बरकत बनी रहती है। इसलिए श्राद्ध कर्म के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या राशन सामग्री देना शुभ माना जाता है।

    दूसरे महत्वपूर्ण दानों में काले तिल का नाम लिया जाता है। श्राद्ध और तर्पण की परंपराओं में काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले तिल का दान पितरों की प्रसन्नता के लिए शुभ माना जाता है। तर्पण के दौरान भी इसका विशेष उपयोग किया जाता है।

    गौ सेवा को भी पितृ पक्ष से जोड़कर देखा जाता है। सामर्थ्य के अनुसार गौशाला में हरा चारा गुड़ या भूसा दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि गौ सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। जो लोग गौदान करने में सक्षम नहीं हैं वे गौशाला में जाकर सेवा या चारे का दान कर सकते हैं।

    वस्त्र दान भी पितृ पक्ष में किया जाने वाला प्रमुख दान माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को धोती कुर्ता गमछा चादर या अन्य उपयोगी कपड़े दिए जा सकते हैं। मान्यता के अनुसार वस्त्र दान से जीवन में सुख और सम्मान की प्राप्ति होती है। हालांकि दान करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वस्त्र साफ और उपयोग के योग्य हों।

    घी और गुड़ का दान भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृ पक्ष में जरूरतमंद लोगों को शुद्ध घी या गुड़ देना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे घर में सुख शांति और पारिवारिक सौहार्द से जोड़कर देखा गया है।

    सामर्थ्य के अनुसार चांदी या सोने का दान भी किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति महंगी धातु का दान ही करे। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान और जरूरतमंद की सहायता अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा नमक का दान भी कुछ धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है।

    पितृ पक्ष में दान करने के समय को लेकर भी विशेष मान्यता है। श्राद्ध कर्म और दान के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। कुतप काल को भी श्राद्ध से जुड़े कर्मों के लिए उपयुक्त बताया गया है। हालांकि अलग अलग परंपराओं और स्थानों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है इसलिए श्राद्ध या तर्पण की विधि करते समय स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लेना उचित रहता है।

    कुल मिलाकर पितृ पक्ष केवल दान करने का अवसर नहीं बल्कि पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और जरूरतमंदों की मदद करने का समय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में श्रद्धा से किया गया अन्न दान काले तिल का दान गौ सेवा वस्त्र दान घी और गुड़ का दान चांदी या सोने का दान तथा नमक का दान विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

  • सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है जानिए पूजा विधि मंत्र और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

    सूर्य देव को अर्घ्य देने का सही तरीका क्या है जानिए पूजा विधि मंत्र और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि सूर्य देव की नियमित पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है। सूर्य को ऊर्जा और प्रकाश का प्रतीक माना गया है। यही वजह है कि सनातन परंपरा में सुबह के समय सूर्य देव को जल अर्पित करने की विशेष महत्ता बताई गई है। मान्यता के अनुसार नियमित रूप से सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति को अपने जीवन में अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

    सूर्य देव की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत की जा सकती है। इसके बाद तांबे के लोटे में स्वच्छ जल भरें। धार्मिक परंपरा के अनुसार इसमें लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देते समय सूर्य की ओर सीधे देखने के बजाय जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करने की परंपरा भी बताई जाती है।

    अर्घ्य देते समय श्रद्धालु सूर्य देव का स्मरण कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। सूर्य देव का सरल मंत्र ॐ सूर्याय नमः का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी सूर्य उपासना में महत्वपूर्ण माना गया है। जिन लोगों के पास अधिक समय नहीं है वे कुछ मिनट शांत मन से सूर्य देव का ध्यान करके भी पूजा कर सकते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव को पिता और आत्मबल का कारक भी माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य का संबंध आत्मविश्वास नेतृत्व सम्मान पिता और सरकारी क्षेत्र से जोड़ा जाता है। इसी कारण कई लोग सूर्य की उपासना को अपने जीवन में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच बढ़ाने से जोड़कर देखते हैं। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    सूर्य देव को अर्घ्य देते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। पूजा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए और किसी तरह का दिखावा करने से बचना चाहिए। जल अर्पित करने के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल करने की परंपरा है। सूर्य को जल चढ़ाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। पूजा के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना गया है।

    रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दिया जा सकता है। कुछ श्रद्धालु रविवार को व्रत भी रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं। लाल रंग के फूल अर्पित करना और गुड़ का दान करना भी सूर्य पूजा की परंपराओं में शामिल है।

    सूर्य देव की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश नियमितता और अनुशासन से जुड़ा है। सुबह सूर्योदय के समय कुछ देर प्रकृति के साथ समय बिताना और दिन की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करना मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। धार्मिक आस्था के साथ यदि सूर्य उपासना को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो इससे व्यक्ति को मानसिक रूप से अनुशासित रहने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा मिल सकती है।

  • गुरुवार का व्रत खोलने से पहले जरूर करें ये काम: जानें पूजा की पूरी विधि मंत्र कथा प्रसाद और व्रत के जरूरी नियम

    गुरुवार का व्रत खोलने से पहले जरूर करें ये काम: जानें पूजा की पूरी विधि मंत्र कथा प्रसाद और व्रत के जरूरी नियम


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि ज्ञान और सकारात्मकता की कामना की जाती है। गुरुवार के व्रत को लेकर अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में कुछ नियम अलग हो सकते हैं इसलिए अपनी कुल परंपरा के अनुसार विधि अपनाना उचित माना जाता है। सामान्य रूप से गुरुवार का व्रत सुबह स्नान और संकल्प के साथ शुरू किया जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु या देवगुरु बृहस्पति की पूजा की जाती है और दिनभर संयम रखते हुए व्रत किया जाता है।

    गुरुवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। धार्मिक परंपरा में पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाया जा सकता है। भगवान को पीले फूल हल्दी अक्षत तुलसी के पत्ते केला और पीले रंग की मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। कुछ परंपराओं में केले के पेड़ की पूजा करके उसकी जड़ में जल अर्पित करने का भी विधान बताया गया है।

    पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंत्र का जाप कर सकते हैं। बृहस्पति देव की आराधना करने वाले ॐ बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप भी अपनी श्रद्धा के अनुसार कर सकते हैं। इसके बाद गुरुवार व्रत की कथा पढ़ना या सुनना महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा पूरी होने पर भगवान की आरती करें और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटें। धार्मिक मान्यताओं में व्रत के दौरान गुरु और बुजुर्गों का सम्मान करने तथा उनका आशीर्वाद लेने को भी विशेष महत्व दिया गया है।

    गुरुवार के व्रत में भोजन को लेकर भी अलग अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। कई परंपराओं में गुरुवार को नमक का सेवन न करने की मान्यता भी बताई गई है। ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाला व्यक्ति अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपना सकता है। पीले फल केला चने की दाल गुड़ और अन्य सात्विक चीजों का सेवन या प्रसाद के रूप में इस्तेमाल कई जगहों पर किया जाता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का संयम ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि व्यवहार में भी संयम रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार झूठ बोलना किसी का अपमान करना क्रोध करना या कटु वचन बोलना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए गुरुवार के दिन भगवान की पूजा के साथ अच्छे व्यवहार और सकारात्मक सोच को भी महत्व दिया जाता है। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल पीले वस्त्र केला गुड़ या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।

    गुरुवार के व्रत की संख्या को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग 11 21 या 51 गुरुवार का संकल्प लेते हैं जबकि कुछ परंपराओं में 16 गुरुवार के व्रत का विधान मिलता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार संकल्प लेना बेहतर माना जाता है। संकल्प की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद उद्यापन की परंपरा भी बताई जाती है जिसमें भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की पूजा के साथ दान दक्षिणा और प्रसाद वितरण किया जाता है।
    गुरुवार के व्रत की संख्या को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग 11 21 या 51 गुरुवार का संकल्प लेते हैं जबकि कुछ परंपराओं में 16 गुरुवार के व्रत का विधान मिलता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या किसी योग्य आचार्य की सलाह के अनुसार संकल्प लेना बेहतर माना जाता है। संकल्प की निर्धारित संख्या पूरी होने के बाद उद्यापन की परंपरा भी बताई जाती है जिसमें भगवान विष्णु या बृहस्पति देव की पूजा के साथ दान दक्षिणा और प्रसाद वितरण किया जाता है।

    इस तरह गुरुवार का व्रत केवल उपवास रखने तक सीमित नहीं माना जाता। इसमें सुबह का स्नान संकल्प पूजा मंत्र जाप कथा श्रवण आरती प्रसाद और दान जैसी परंपराएं शामिल हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और नियम के साथ किया गया यह व्रत भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति के प्रति आस्था प्रकट करने का माध्यम है। हालांकि व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखना चाहिए। आस्था के साथ संयम सेवा और अच्छे आचरण को जीवन में अपनाना ही इस धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान

    गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों का अपना अलग धार्मिक महत्व बताया गया है। इनमें गुरुवार यानी बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा पाठ करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। गुरुवार को गुरु ग्रह से भी जोड़ा जाता है इसलिए इस दिन किए जाने वाले पूजा पाठ व्रत और दान का विशेष महत्व माना गया है। यही वजह है कि कई लोग गुरुवार को अपने जीवन में अच्छे बदलाव और मनोकामना पूर्ति की भावना से विशेष पूजा करते हैं।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में स्नान के पानी में हल्दी मिलाने और पीले रंग के वस्त्र धारण करने की मान्यता भी है। इसके बाद पूजा स्थान की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जा सकता है। पूजा में पीले फूल हल्दी चने की दाल गुड़ और केला अर्पित करने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति से जुड़े मंत्रों का जाप भी करते हैं। ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करने की परंपरा भी बताई जाती है।

    गुरुवार की पूजा में केले के पेड़ का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के वृक्ष को भगवान विष्णु और बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है। यदि घर के आसपास केले का पौधा उपलब्ध हो तो उसकी जड़ में जल अर्पित करके हल्दी और पीले फूल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के पास केले का पेड़ उपलब्ध हो। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने श्रद्धा से पूजा करना भी सरल विकल्प हो सकता है।

    गुरुवार को दान करने की परंपरा भी काफी पुरानी मानी जाती है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल हल्दी गुड़ केला या पीले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक लाभ प्राप्त करना नहीं बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना भी होना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया छोटा दान भी सेवा की भावना को मजबूत करता है। धार्मिक मान्यताओं में पीले रंग को गुरु तत्व से जोड़ा गया है इसलिए गुरुवार की पूजा में पीली वस्तुओं का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है।

    गुरुवार के व्रत को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही नियम अपनाने चाहिए। धार्मिक परंपराओं में गुरुवार को नमक से परहेज करने की मान्यता भी कुछ स्थानों पर मिलती है। इसी तरह बाल कटवाने नाखून काटने और कुछ घरेलू कामों से बचने की परंपराएं भी अलग अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इन नियमों को धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में देखना चाहिए।

    गुरुवार के दिन सबसे महत्वपूर्ण बात केवल पूजा की सामग्री नहीं बल्कि मन की श्रद्धा और व्यवहार को माना जाता है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना क्रोध करना या किसी जरूरतमंद की अनदेखी करना पूजा की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने के साथ अपने व्यवहार में संयम और सकारात्मकता लाने की कोशिश करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का दिन ज्ञान गुरु सम्मान सेवा और सात्विकता से जुड़ा है। ऐसे में पूजा पाठ के साथ अच्छे कर्म और जरूरतमंदों की सहायता को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    इस तरह गुरुवार के नियम केवल पूजा तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह दिन श्रद्धा संयम सेवा और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है। पीले वस्त्र पहनना भगवान विष्णु की पूजा करना केले के पौधे की आराधना करना मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। आस्था रखने वाले लोग अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार इनमें से नियम अपना सकते हैं।

  • रविवार की सुबह सूर्य पूजा से चमक सकती है किस्मत! जानें अर्घ्य देने की विधि और जरूरी धार्मिक नियम

    रविवार की सुबह सूर्य पूजा से चमक सकती है किस्मत! जानें अर्घ्य देने की विधि और जरूरी धार्मिक नियम


    नई दिल्ली । आज 6 सितंबर 2026 का दिन सभी 12 राशियों के लिए नए अवसरों और चुनौतियों के संकेत लेकर आया है। किसी राशि के जातकों को करियर और कारोबार में बड़ी सफलता मिल सकती है तो कुछ लोगों को धन संबंधी मामलों में सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में मधुरता बढ़ाने के लिए संवाद और धैर्य जरूरी रहेगा। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक आज का विस्तृत राशिफल।
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और कोई नई जिम्मेदारी भी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला करें। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन को प्रसन्न कर सकती है।

    वृषभ राशि वालों को आज धैर्य के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। कामकाज में छोटी बाधाएं आ सकती हैं लेकिन समझदारी से परिस्थितियों पर नियंत्रण पा लेंगे। धन खर्च करते समय बजट का ध्यान रखें। पारिवारिक मामलों में किसी की सलाह आपके काम आ सकती है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन नई संभावनाएं लेकर आ सकता है। नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। रुका हुआ काम पूरा होने से राहत मिलेगी। बातचीत में संयम रखें और जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला न लें।

    कर्क राशि वालों को आज परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी लेकिन अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें और पर्याप्त आराम करें।

    सिंह राशि के जातकों के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। आत्मविश्वास के दम पर आप मुश्किल काम को भी आसानी से पूरा कर सकते हैं। नौकरी में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और कारोबार में लाभ की संभावना है। परिवार में खुशियों का माहौल बना रहेगा।

    कन्या राशि वालों को आज मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। लंबे समय से अटका कोई काम आगे बढ़ सकता है। धन संबंधी मामलों में स्थिति बेहतर रहेगी। हालांकि किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे अच्छी तरह पढ़ लें।

    तुला राशि के जातकों के लिए आज रिश्तों और साझेदारी के मामलों में अच्छा दिन है। परिवार और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। कारोबार में नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। खर्च बढ़ने की संभावना है इसलिए आर्थिक संतुलन बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि वालों को आज भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना चाहिए। कार्यक्षेत्र में मेहनत बढ़ सकती है लेकिन परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें।

    धनु राशि के जातकों के लिए आज यात्रा या नए लोगों से मुलाकात के योग बन सकते हैं। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे और कारोबार में नई डील फायदेमंद साबित हो सकती है। परिवार में किसी शुभ समाचार से खुशी का माहौल रहेगा।

    मकर राशि वालों को आज जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। कामकाज में अनुशासन और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में सोच समझकर निवेश करें। परिवार के किसी सदस्य की सलाह भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती है।

  • शनिवार व्रत की संपूर्ण विधि: सुबह से शाम तक करें ये खास काम शनिदेव की कृपा पाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां

    शनिवार व्रत की संपूर्ण विधि: सुबह से शाम तक करें ये खास काम शनिदेव की कृपा पाने के लिए भूलकर भी न करें ये गलतियां


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं और उनकी कृपा से जीवन में आने वाली कई परेशानियों से राहत मिलने की मान्यता है। शनिवार को श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति अपने कर्मों के प्रति अधिक सजग होता है। शनिवार व्रत को लेकर मान्यता है कि इसे पूरी श्रद्धा के साथ करने से शनिदेव प्रसन्न हो सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव का मार्ग खुल सकता है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान शनिदेव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक में काले तिल डालना भी शुभ माना जाता है। इसके बाद शनिदेव को काले तिल काली उड़द और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। श्रद्धालु शनिदेव के मंत्रों का जाप करते हुए उनकी आराधना कर सकते हैं।

    शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। मंदिर में सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा है। इसके साथ ही काले तिल और काली उड़द का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं में जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना भी पुण्यकारी माना गया है। शनिवार के दिन सेवा और दान का विशेष महत्व बताया जाता है।

    व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर सात्विक भोजन करना चाहिए। अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार किया जा सकता है। भोजन में अनावश्यक तामसिक चीजों से बचना बेहतर माना जाता है। पूजा पाठ के साथ व्यक्ति को अपने व्यवहार और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करने से बचना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता करनी चाहिए।

    शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति से शनिदेव से जुड़े भय और परेशानियों से राहत मिल सकती है। इसलिए शनिदेव की पूजा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। शाम के समय शनिदेव के नाम से दीपक जलाकर प्रार्थना करने की परंपरा भी है।

    हालांकि व्रत और पूजा की विधि अलग अलग परंपराओं में कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा करना उचित है। व्रत के दौरान केवल बाहरी नियमों का पालन ही नहीं बल्कि मन में अच्छे विचार रखना और ईमानदारी से अपने कर्म करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धा के साथ किया गया शनिवार व्रत व्यक्ति को आत्मअनुशासन और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित कर सकता है।

  • मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो शुक्रवार को रखें इन बातों का ध्यान छोटी सी गलती भी पड़ सकती है भारी

    मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना है तो शुक्रवार को रखें इन बातों का ध्यान छोटी सी गलती भी पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। कई लोग शुक्रवार के दिन व्रत रखते हैं और विधि विधान से मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा पाठ के साथ कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण मां लक्ष्मी को प्रिय होता है इसलिए शुक्रवार के दिन घर को साफ सुथरा रखना शुभ माना जाता है।

    शुक्रवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर की साफ सफाई करनी चाहिए। खासतौर पर पूजा स्थल और मुख्य द्वार के आसपास गंदगी नहीं रहने देनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी का संबंध स्वच्छता और समृद्धि से माना जाता है इसलिए घर में बिखरा हुआ सामान और अनावश्यक गंदगी रखने से बचने की सलाह दी जाती है। पूजा के स्थान पर दीपक जलाकर मां लक्ष्मी का ध्यान करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल फूल तथा मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

    शुक्रवार के दिन किसी के साथ विवाद करने या कठोर शब्द बोलने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करना बेहतर माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा की भावना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता लाने में सहायक हो सकती है।

    इस दिन घर में नकारात्मक वातावरण बनाने वाली गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। अनावश्यक क्रोध करना किसी का अपमान करना या बिना वजह किसी से झगड़ा करना उचित नहीं माना जाता। इसी तरह घर की महिलाओं और बुजुर्गों का सम्मान करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि जहां परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सम्मान का वातावरण रहता है वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

    शुक्रवार को खानपान को लेकर भी कई परिवारों में विशेष परंपराएं होती हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। कुछ लोग इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। अगर कोई व्यक्ति व्रत रख रहा है तो उसे अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार के दिन किसी भी तरह के नशे और तामसिक गतिविधियों से दूर रहना शुभ माना जाता है। साथ ही पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता लक्ष्मी का स्मरण करना चाहिए। घर में दीपक जलाने और पूजा के बाद आरती करने की परंपरा भी कई परिवारों में निभाई जाती है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार के नियम केवल पूजा पाठ तक सीमित नहीं हैं बल्कि स्वच्छता संयम अच्छे व्यवहार और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़े हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अगर शुक्रवार के दिन श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाए और अच्छे आचरण को अपनाया जाए तो जीवन में सकारात्मकता और सुख शांति बनी रह सकती है। इन नियमों को आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार अपनाया जा सकता है।