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  • वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि

    वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि


    नई दिल्ली । वैशाख मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस शुभ महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है और यह 1 मई तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप और दान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दौरान किया गया साधना और सेवा का कार्य हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। यही कारण है कि इस माह को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास में कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर में सुख समृद्धि बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रतिदिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ शहद अर्पित करना चाहिए और उनके माधव अनंत और अच्युत स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर का वातावरण शांत और समृद्ध बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

    अगर जीवन में शत्रुओं या विरोधियों की समस्या अधिक है तो इस मास में भगवान विष्णु के माधव के साथ केशव और दामोदर स्वरूप का ध्यान करना लाभकारी माना गया है। तुलसी दल से विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शत्रु स्वतः ही दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही जीवन में सच्चे मित्रों का साथ भी मिलने लगता है।

    जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें वैशाख मास में भगवान विष्णु के माधव पद्मनाभ और हृषिकेष स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को गंध और तुलसी पत्र अर्पित करने से मन एकाग्र होता है और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।

    दाम्पत्य जीवन को सुखद और मधुर बनाने के लिए इस पवित्र महीने में माधव श्रीधर और पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। तुलसी पत्र के साथ मिठाई या मिश्री अर्पित करने से पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ मजबूत होती है और संबंधों में मधुरता आती है।

    आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वैशाख मास में माधव गोविंद और नारायण स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान को आटे की पंजीरी में तुलसी दल मिलाकर भोग लगाने से धीरे धीरे धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक स्थिरता आती है।

    इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे छोटे उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

  • दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा और हिंदू रिवाज रोकने की गुहार …SC ने किया सुनवाई से इनकार

    दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पूजा और हिंदू रिवाज रोकने की गुहार …SC ने किया सुनवाई से इनकार


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार (12 फरवरी) को कर्नाटक (Karnataka) स्थित अलंद लाडले मशाइक दरगाह (Aland Ladle Mashaikh Dargah) प्रबंधन की उस अर्जी पर सुनवाई करने से मना कर दिया जिसमें जिसमें दरगाह परिसर में हिंदू महाशिवरात्रि पूजा (Mahashivratri Puja) और दूसरे हिंदू रीति-रिवाजों पर रोक लगाने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।

    दरगाह मैनेजमेंट ने भारत के संविधान के आर्टिकल 32 के तहत अर्जी दी थी, जो उन पार्टियों को राहत के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाज़त देता है जिनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। दरगाह प्रबंधन याचिका में दावा किया था कि दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने के लिए हर साल रणनीतिक तरीके से पूजा की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है। प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप कर दरगाह के मूल धार्मिक चरित्र को बनाए रखने की भी मांग की थी।

    हालांकि, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए। इससे पहले मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने भी टिप्पणी की थी कि हर मामला सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट लाना उचित नहीं है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट प्रभावी नहीं हैं। जब कल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची के सामने यह मामला आया, तो इस बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि पहले हाई कोर्ट जाने के बजाय आर्टिकल 32 की पिटीशन क्यों फाइल की गई।


    क्या है विवाद?

    यह विवाद उस दरगाह से जुड़ा है जो 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी (लाडले मशाइक) और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित मानी जाती है। दरगाह परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नाम से पहचानी जाने वाली एक संरचना भी मौजूद बताई जाती है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थल पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय पूजा-अर्चना करते रहे हैं, हालांकि 2022 में यहां पूजा अधिकार को लेकर तनाव की स्थिति बनी थी।


    पिछले साल हाई कोर्ट ने दी थी पूजा की इजाजत

    गौरतलब है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2025 में 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि पर पूजा की अनुमति दी थी, जो भारी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुई थी। इससे पहले भी कोर्ट के आदेश पर सीमित संख्या में पूजा कराई गई थी। दरगाह प्रबंधन का कहना था कि बार-बार अंतरिम आदेश लेकर धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने की कोशिश की जा रही है, जो Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991 के खिलाफ हो सकता है। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 को किसी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखना जरूरी माना गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई हाई कोर्ट में होने की संभावना जताई जा रही है। यह मामला धार्मिक अधिकार, ऐतिहासिक दावों और कानून के संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • प्रयागराज संगम में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन, बेटे जय पवार ने दी भावुक विदाई

    प्रयागराज संगम में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन, बेटे जय पवार ने दी भावुक विदाई


    मुंबई/प्रयागराज। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का रविवार को प्रयागराज के पवित्र संगम तट पर विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान उनके बेटे जय पवार ने पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ अस्थि कलश को मां गंगा में प्रवाहित किया। अंतिम विदाई के इस भावुक क्षण में परिवार के सदस्य, पार्टी कार्यकर्ता और मौजूद लोग गमगीन नजर आए और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    अस्थि विसर्जन के लिए अजित पवार का परिवार चार्टर्ड फ्लाइट से बारामती से प्रयागराज पहुंचा। रविवार सुबह करीब 11 बजे उनका परिवार प्रयागराज एयरपोर्ट पर उतरा, जहां से वे सीधे संगम की ओर रवाना हुए। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब उनके बेटे जय पवार नंगे पैर अस्थि कलश लेकर बाहर आए। वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल शोक में डूबा नजर आया।

    परिवार एयरपोर्ट से संगम तक लंबे काफिले के साथ पहुंचा। संगम के वीआईपी घाट पर पुरोहितों की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान से पूजा-अनुष्ठान कराया गया। इस दौरान शोक संतप्त लोगों ने अजित पवार को श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की और मां गंगा से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अस्थि विसर्जन के समय परिवार के सदस्य और समर्थक भावुक नजर आए।

    अजित पवार की याद में एनसीपी की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा के नेतृत्व में कश्मीर से कन्याकुमारी तक अस्थि कलश यात्रा भी निकाली गई थी। यह यात्रा 12 राज्यों से होकर गुजरी और रविवार, 8 फरवरी 2026 को प्रयागराज संगम में आकर इसका समापन हुआ। इस दौरान भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे और अंतिम संस्कार की परंपराओं का पालन किया गया। बेटे जय पवार और परिवार के अन्य सदस्य इस मौके पर मौजूद रहे।

    गौरतलब है कि अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था। इस हादसे में उनके साथ चार अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। अगले दिन 29 जनवरी को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में किया गया था, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं, समर्थकों और आम लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी थी।

    संगम में अस्थि विसर्जन के साथ ही उनकी अंतिम धार्मिक रस्म पूरी हुई। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा को सर्वोपरि रखा और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रयागराज के पवित्र संगम पर की गई यह अंतिम विदाई उनके जीवन की यात्रा का एक भावुक और श्रद्धापूर्ण समापन बन गई।

  • गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..

    गुरुवार के उपाय: विष्णु और गुरु बृहस्पति की पूजा से बढ़ाएं सुख-समृद्धि..


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार को भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन ज्ञान, करियर, विवाह, धन और सामाजिक सम्मान से जुड़ा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, जिन जातकों की कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उनके लिए गुरुवार के उपाय विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं गुरु बृहस्पति को धर्म, नीति, शिक्षा और सदाचार का कारक ग्रह माना गया है। यही कारण है कि गुरुवार को किए गए दान, पूजा और मंत्र जाप से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

    गुरुवार के प्रमुख उपाय
    धार्मिक परंपरा के अनुसार गुरुवार की शुरुआत स्नान से करनी चाहिए। स्नान के जल में हल्दी मिलाकर स्नान करना शुभ माना गया है। इसके बाद पीले वस्त्र पहनने की परंपरा है। पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, हल्दी और पीले फल अर्पित किए जाते हैं।केले के वृक्ष की पूजा भी विशेष फलदायी मानी जाती है। श्रद्धालु केले के पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित कर दीपक जलाते हैं। ऐसा करने से गुरु दोष शांत होता है और आर्थिक अड़चनें दूर होती हैं।

    मंत्र जाप और दान
    गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप अत्यंत प्रभावकारी है। 108 बार
    ॐ बृं बृहस्पतये नमः या ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नमः का जाप करना शुभ माना जाता है। दान की दृष्टि से गुरुवार को हल्दी, पीले वस्त्र, चने की दाल, गुड़ या केसर जरूरतमंदों को देना लाभकारी होता है। गाय को चने की दाल और गुड़ खिलाने से भी गुरु ग्रह मजबूत होता है।

    विशेष सावधानियां
    कुछ परंपराओं के अनुसार, गुरुवार की सुबह हल्दी और गंगाजल मिलाकर घर के मुख्य द्वार पर छिड़काव करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। वहीं इस दिन बाल कटवाने, दाढ़ी बनवाने, कपड़े धोने या हल्दी और पैसे उधार देने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से गुरु की स्थिति कमजोर हो सकती है।धार्मिक विशेषज्ञ मानते हैं कि नियमित श्रद्धा और संयम के साथ किए गए ये उपाय मानसिक शांति और जीवन में संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।

  • ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची

    ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार ये काम करने से घर से चली जाती हैं मां लक्ष्मी, जानें पूरी सूची


    नई दिल्ली /मां लक्ष्मी, धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। हर कोई अपने घर में उनकी कृपा पाने के लिए पूजा-पाठ और साधनाओं का सहारा लेता है। लेकिन ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि कुछ ऐसी आदतें और व्यवहार हैं, जो घर में लक्ष्मी के वास को रोकते हैं। यदि कोई इनका पालन करता है, तो घर में धन और सुख की कमी हो सकती है।

    लक्ष्मी को नापसंद करने वाले कार्य
    पुराण के अनुसार, निम्नलिखित परिस्थितियों में लक्ष्मी का वास नहीं रहता:शंख ध्वनि न होना और तुलसी का न होना- जहां शंख की ध्वनि नहीं होती और तुलसी का पौधा नहीं होता, वहां लक्ष्मी नहीं रहती।शिव और ब्राह्मणों की अनदेखी- जहां शिवलिंग की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन नहीं कराया जाता, वहां लक्ष्मी का मन नहीं लगता।भक्तों की निंदा- जिस घर में भक्तों की निंदा होती है, वहां लक्ष्मी का क्रोध उत्पन्न होता है और वे घर छोड़ देती हैं। एकादशी और जन्माष्टमी की अनदेखी- एकादशीऔर जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीहरि और कृष्ण का पूजन न करना भी लक्ष्मी को नाराज करता है अशुद्ध हृदय और क्रूरता- क्रूर, हिंसक, निराशावादी या निंदक व्यक्ति के घर लक्ष्मी नहीं टिकती। अतिथि अन्न का त्याग- यदि घर में अतिथियों को भोजन नहीं दिया जाता, तो लक्ष्मी का वास समाप्त हो जाता है। अनैतिक या अस्वच्छ आदतें- भिगे पैर या नंगे होकर सोना, बेसिर-पैर की बातें करना, निराशावादी होना, दिन में सोना और सूर्योदय के समय भोजन करना जैसी आदतें लक्ष्मी को दूर भगाती हैं। अनुचित व्यवहार और अपवित्रता- अपने सिर का तेल किसी पर लगाना, अपवित्रता और विष्णुभक्ति में कमी होना, ब्राह्मणों की निंदा करना, जीवों के साथ हिंसा करना, दयारहित होना आदि भी लक्ष्मी को नाराज कर देता है।

    लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले उपाय

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार घर में लक्ष्मी निवास करती हैं: भगवान श्रीहरि और श्रीकृष्ण का गुणगान- जहां इनके गुणों का गान और चर्चा होती है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। शंख ध्वनि और पूजा- शंख की ध्वनि, शिवलिंग की पूजा, शालिग्राम और तुलसी के पौधे की स्थापना, कीर्तन और वंदना से लक्ष्मी हमेशा घर में रहती हैं। सकारात्मक और धार्मिक वातावरण- पवित्र कीर्तन, दुर्गा पूजा, भक्तों की सेवा और ध्यान से घर में लक्ष्मी की स्थायी उपस्थिति रहती है।

    ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह स्पष्ट किया गया है कि लक्ष्मी का वास केवल पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों पर नहीं बल्कि घर के वातावरण और रहन-सहन पर भी निर्भर करता है। सदाचार, अतिथियों का आदर, भक्तों की सेवा और घर में शुद्धता बनाए रखने से ही मां लक्ष्मी हमेशा प्रसन्न रहती हैं।हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि इस आलेख में दी गई जानकारियाँ धार्मिक ग्रंथों परआधारित हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ या धार्मिक गुरु से परामर्श लेना चाहिए।घर में सुख-समृद्धि बनाए रखना केवल पूजा का विषय नहीं है, बल्कि शुद्धता, दया और सही आचार-विचार से भी जुड़ा हुआ है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताए गए नियमों का पालन कर लोग घर में धन, सुख और संतोष का अनुभव कर सकते हैं।

  • गुरुवार व्रत पूजा विधि: भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति को खुश करने के आसान उपाय

    गुरुवार व्रत पूजा विधि: भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति को खुश करने के आसान उपाय

    नई दिल्ली। गुरुवार का व्रत करने से न केवल कुंडली में गुरु दोष से मुक्ति मिलती है, बल्कि विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में धन-समृद्धि की वृद्धि होती है। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति से किया गया यह व्रत सभी प्रकार के दोषों को शांत करता है और जीवन में सुख-शांति लाता है। पहली बार गुरुवार व्रत करने वाले भक्तों के लिए कुछ विशेष नियम और पूजा विधि बताई गई है, जिन्हें अपनाने से व्रत का फल अधिक मिलता है।

    व्रत शुरू करने का सही समय और संख्या
    यदि आप पहली बार गुरुवार व्रत कर रहे हैं, तो इसे किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू करना शुभ माना जाता है। खासकर पुष्य नक्षत्र में आने वाले गुरुवार को व्रत आरंभ करना अधिक फलदायी होता है। हालांकि पौष माह में गुरुवार का व्रत नहीं रखना चाहिए। व्रत की अवधि भक्त की आस्था पर निर्भर करती है। इसे 16 गुरुवार तक रखा जा सकता है, इसके अलावा 5, 11, 21, 51 या 101 दिनों तक भी उपवास किया जा सकता है। कुछ भक्त इसे लगातार तीन साल तक भी निभाते हैं।

    पूजन के लिए आवश्यक सामग्री
    गुरुवार व्रत की पूजा के लिए भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति, पीले रंग के वस्त्र, हल्दी, गुड़, भीगी हुई चने की दाल, केला, पीले चावल और घी का दीपक आवश्यक हैं। पीले रंग का कपड़ा पूजा चौकी पर बिछाने के साथ स्वयं पहनने के लिए भी शुभ माना जाता है।

    गुरुवार व्रत की विधि
    सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर चौकी पर पीले कपड़े को बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मूर्ति पर जल और हल्दी से शुद्धिकरण करें और पीले चावल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएँ और भगवान विष्णु के मंत्रों और श्लोकों का जाप करें। इस दिन गुरुवार व्रत कथा का पाठ करना या सुनना शुभ माना जाता है।

    इसके अतिरिक्त, यदि घर के पास केला का पेड़ है तो उसकी भी पूजा करें। पेड़ के सामने घी का दीपक जलाएँ और केले के पेड़ पर हल्दी, चावल और चने की दाल अर्पित करें। भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। व्रत का समापन कथा पढ़ने या सुनने के बाद करें। इस दिन केवल एक बार भोजन करें और वह भी बिना नमक वाला होना चाहिए।

    विशेष नियम और वर्जित चीजें
    पहली बार व्रत करने वाले इस दिन बालों में शैम्पू न करें। नमक वाला भोजन और उड़द की दाल तथा चावल का सेवन वर्जित है। पूजा के बाद गुड़, पीला कपड़ा, चने की दाल और केला गरीबों को दान करें। धार्मिक मान्यता अनुसार इस दिन गाय को रोटी और गुड़ खिलाने से सभी कष्ट दूर होते हैं। व्रत के दौरान मन को शांत रखें, क्रोध न करें और पूरी भक्ति के साथ भगवान विष्णु को समर्पित रहें।

    इस प्रकार श्रद्धा और नियम के साथ किया गया गुरुवार व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है। यह व्रत न केवल व्यक्तिगत दोषों को कम करता है बल्कि परिवार और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

    यदि आप पहली बार गुरुवार व्रत कर रहे हैं तो इस विधि को अपनाकर भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में मंगलकारी बदलाव ला सकते हैं।