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  • होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?

    होर्मुज में बारूद, जहाजों पर खतरा, अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर क्यों गिराए बम?


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के लारक आईलैंड पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी जवाबी हमला किया और जॉर्डन व कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए मिसाइलें दागने का दावा किया। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

    अमेरिकी सेना ने बताया है कि लारक आईलैंड पर हमला किसी बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक संभावित तत्काल खतरे को खत्म करने के लिए सीमित और सटीक कार्रवाई की गई।

    अमेरिका के मुताबिक क्या था खतरा?

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की माइन बिछाने वाली यूनिट समुद्र में माइंस तैनात करने की तैयारी कर रही थी। इसके लिए दो रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी।

    अमेरिका का दावा है कि अगर ये समुद्री माइंस होर्मुज स्ट्रेट के शिपिंग रूट में बिछा दी जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे व्यावसायिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। इसी वजह से अमेरिकी सेना ने इसे ‘इमिनेंट थ्रेट’ यानी तत्काल खतरा माना और दोनों लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    लारक आईलैंड ही क्यों बना निशाना?

    लारक आईलैंड ईरान के दक्षिणी तट के पास फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज स्ट्रेट के बेहद करीब है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है।

    होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट्स में से एक है। यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    इसी रणनीतिक स्थिति के कारण अमेरिका का दावा है कि लारक आईलैंड पर मौजूद सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना और किसी संभावित खतरे को रोकना जरूरी था।

    पहले माइंस हटाईं, फिर हमला क्यों किया?

    अमेरिकी सेना के मुताबिक, उसने हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से पहले बिछाई गई समुद्री माइंस को हटाने का अभियान पूरा किया था।

    इसके बाद अमेरिकी निगरानी में IRGC की गतिविधियां सामने आईं। अमेरिका का दावा है कि ईरान दो लॉन्चरों के जरिए नई समुद्री माइंस तैनात करने की तैयारी कर रहा था।

    वॉशिंगटन के मुताबिक, माइंस शिपिंग लेन में पहुंच जातीं तो तेल टैंकरों और दूसरे कमर्शियल जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती थी। इसलिए अमेरिका ने संभावित खतरे के बढ़ने का इंतजार करने के बजाय लॉन्चरों को निशाना बनाया।

    ईरान ने कैसे दिया जवाब?

    ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को आक्रामक हमला बताया है। IRGC ने दावा किया कि लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमले में उसके कई जवान और अन्य लोग मारे गए या घायल हुए।

    इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले दो ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। जॉर्डन ने अपने एयरस्पेस में आठ मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।

    होर्मुज में अब क्या स्थिति?

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने स्ट्रेट में एक शिप-टू-शिप ऑयल ट्रांसफर भी रुकवाया है। वहीं, अमेरिकी एयर स्ट्राइक की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखी गई।

    ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर आपसी सहमति बनी हुई है, लेकिन इसके बावजूद स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पहले ही कम हुई है।

    क्या बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है?

    फिलहाल अमेरिका का कहना है कि लारक आईलैंड पर कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के सैन्य ढांचे को बड़े पैमाने पर तबाह करना नहीं, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए पैदा हो रहे तत्काल खतरे को खत्म करना था।

    दूसरी ओर, ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और जवाबी कार्रवाई भी कर चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लारक आईलैंड पर अमेरिकी हमला और ईरान का पलटवार दोनों देशों को एक बड़े सैन्य टकराव की ओर ले जाएगा?

  • ट्रंप के अचानक बदलते रवैये से सतर्क था भारतीय प्रतिनिधिमंडल, मीडिया सवालों को लेकर अमेरिका के दावे पर भारत ने दी सफाई

    ट्रंप के अचानक बदलते रवैये से सतर्क था भारतीय प्रतिनिधिमंडल, मीडिया सवालों को लेकर अमेरिका के दावे पर भारत ने दी सफाई

    नई दिल्ली । जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद मीडिया बातचीत को लेकर नया विवाद सामने आया है। अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया कि बैठक के बाद पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकने का अनुरोध भारत की तरफ से किया गया था। इस दावे के बाद भारत की ओर से भी अपना पक्ष सामने रखा गया है।

    सर्जियो गोर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत की ओर से मीडिया को लेकर विशेष अनुरोध किया गया था। उनका दावा है कि विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि पत्रकारों को बैठक के बाद बुलाया जा सकता है, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होनी चाहिए। साथ ही पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति नहीं देने की बात भी कही गई थी।

    गोर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद ट्रंप ने कैमरे की ओर देखकर पत्रकारों से सवाल करने की बात कह दी। इसके बाद मीडिया बातचीत का स्वरूप पहले तय किए गए तरीके से अलग हो गया।

    भारत की ओर से सामने आए सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने किसी असामान्य स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी की थी। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप के साथ बैठकों के दौरान सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है, क्योंकि वह बातचीत के दौरान अचानक कोई नया मुद्दा उठा सकते हैं या चर्चा का रुख बदल सकता है।

    भारतीय पक्ष के अनुसार, ट्रंप के साथ पहले हुई कुछ बैठकों में भी बातचीत के दौरान अप्रत्याशित मुद्दे सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के नेताओं के साथ उनकी बातचीत के दौरान भी ऐसी स्थिति देखने को मिलने का हवाला दिया गया है। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया बातचीत को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पहले से तैयारी की थी।

    जी-7 बैठक के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वहां मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े विषय प्रमुख रहे। होर्मुज क्षेत्र में जारी परिस्थितियों को देखते हुए वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही।

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और उनकी सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। बातचीत के दौरान ट्रंप की ओर से भी भारत के साथ खड़े रहने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल रहा। दोनों देशों के संबंधों में व्यापार और आर्थिक सहयोग लगातार महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। ऐसे में जी-7 बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात को कई स्तरों पर अहम माना गया।

    सर्जियो गोर के बयान के बाद अब प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और अमेरिका के पक्षों में अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राजदूत ने मीडिया सवालों को लेकर भारत के अनुरोध का जिक्र किया, जबकि भारतीय पक्ष ने इसे प्रतिनिधिमंडल की पूर्व तैयारी और ट्रंप के अप्रत्याशित रवैये को ध्यान में रखकर बरती गई सावधानी से जोड़ा है। इस घटनाक्रम ने मोदी-ट्रंप मुलाकात से जुड़े राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • ईरान का बड़ा फैसला, बोला- Hormuz से गुजरने वाले अधिकृत देशों के जहाजों से देना पड़ेगा सेवा शुल्क

    ईरान का बड़ा फैसला, बोला- Hormuz से गुजरने वाले अधिकृत देशों के जहाजों से देना पड़ेगा सेवा शुल्क


    तेहरान।
    ईरान (Iran) ने रविवार को कहा कि अधिकृत देशों के जो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरेंगे, उन्हें अब तेहरान को सेवा शुल्क (Service Fees ) देना होगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह शुल्क समुद्री, पर्यावरण और लॉजिस्टिक से जुड़ी कई तरह की सेवाओं के लिए लिया जाएगा।

    सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के मुताबिक, यह फैसला ‘होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और प्रगति सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक कार्रवाई’ योजना के अनुच्छेद 3 को मंजूरी मिलने के बाद लिया गया है।

    रेजाई ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग ने इस योजना के अनुच्छेद 3 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति पाने वाले देशों के जहाजों को ईरान की ओर से दी जाने वाली सेवाओं का भुगतान करना होगा।


    जहाजों से किस वजहों से शुल्क लिया जाएगा?

    उन्होंने कहा कि इन सेवाओं में जहाजों की आवाजाही के लिए मदद, पर्यावरण से जुड़ी सेवाएं, कुछ परिस्थितियों में ईंधन, बीमा, सुरक्षा और दूसरी सेवाएं शामिल हैं। प्रवक्ता ने बताया कि भुगतान के लिए लचीली वित्तीय व्यवस्था तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि शुल्क ईरानी रियाल या इस्लामी गणराज्य ईरान की ओर से पसंद की जाने वाली किसी दूसरी मुद्रा में लिया जा सकता है।


    होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी बंद है: रेजाई

    इससे पहले शनिवार को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी बंद है। उन्होंने कहा था कि जब तक अमेरिका अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता और अपना रवैया नहीं बदलता, तब तक यह जलमार्ग दोबारा नहीं खोला जाएगा।

    आईआरआईबी को दिए इंटरव्यू में रेजाई ने कहा कि अमेरिकी दावों के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और अमेरिका का रवैया ठीक होने तक यह नहीं खुलेगा। उन्होंने कहा कि इस बार अमेरिका को पहले अपनी जिम्मेदारियां पूरी करनी होंगी।

    रेजाई ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका सैन्य विकल्पों से निराश हो चुका है और अब आर्थिक नाकाबंदी के जरिये ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भरोसा दिलाया है कि आर्थिक नाकाबंदी ईरान को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर कर देगी।

    दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने फिर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका के नियंत्रण का दावा किया है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ बताया गया है। ट्रंप ने इससे पहले 18 अगस्त को एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने यही तस्वीर साझा की थी।

  • US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट

    US-Iran War: होर्मुज पर कम हो रहा ईरान का नियंत्रण…. 80 फीसदी जहाजों ने बदला रूट


    वाशिंगटन।
    अमेरिका-ईरान युद्ध (America-Iran War) का सबसे विवादास्पद मोर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) है. तेहरान और वाशिंगटन दोनों इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना दबदबा जता रहे हैं, लेकिन शिपिंग डेटा फर्म (Shipping data firm) ने दावा किया है कि होर्मुज पर ईरान (Iran) का नियंत्रण कमजोर पड़ रहा है. ट्रैकिंग फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में 80 फीसदी से ज्यादा जहाजों ने ईरानी मार्ग को छोड़कर अमेरिका द्वारा अधिकृत ओमान रूट का रुख किया है।

    ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के शिपिंग डेटा के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले 80 फीसदी से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने पिछले दो हफ्तों में ईरान के मार्ग को छोड़कर ओमान की ओर वाले रूट का इस्तेमाल किया है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत इस समुद्री रास्ते का ईरान कड़ा विरोध करता रहा है. अमेरिकी नौसेना बलों की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे जहाज ईरानी हमलों के जोखिम के बावजूद ओमान के तटवर्ती रास्ते से आवाजाही कर रहे हैं. इस बड़े बदलाव से इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का दबदबा आंशिक रूप से कमजोर होता दिख रहा है।


    ओमान रूट पर शिफ्ट हुए जहाज

    केपलर के क्रूड ऑयल एनालिसिस प्रमुख हुमायूं फलकशाही के अनुसार, आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि ईरान ने जलडमरूमध्य पर से कम से कम आंशिक नियंत्रण खो दिया है. एक महीने पहले तक ओमान वाले रूट पर न के बराबर शिपिंग गतिविधि देखी जा रही थी. ईरान इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क यानी टोल वसूलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जहाजों द्वारा ईरानी रूट से बचने के कारण तेहरान के लिए टोल लागू करना बेहद मुश्किल हो गया है।


    ज्यादातर देश नहीं देना चाहते टैक्स

    पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी डैन पिकरिंग के मुताबिक मिडिल ईस्ट के अधिकांश लोग या पक्ष ईरान को टोल टैक्स नहीं देना चाहते हैं और न ही वे ऐसा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान अभी-भी जहाजों को धमकाने और शिपिंग को बाधित करने की क्षमता रखता है. इसके बावजूद अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ने कमर्शियल ट्रैफिक को एक सुरक्षित और वैकल्पिक रास्ता दे दिया है।

    VLCC से ट्रांसफर हो रहा है कच्चा तेल
    तनाव के बीच खाड़ी देशों के तेल उत्पादकों ने भी कच्चे तेल के परिवहन का तरीका बदल दिया है. कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने फारस की खाड़ी से होर्मुज के रास्ते तेल निकालने के लिए वेरी लार्ज क्रूड कैरियर्स (VLCCs) किराए पर लिए हैं. इसके बाद कच्चे तेल को ओमान की खाड़ी में खतरे के क्षेत्र से बाहर अन्य टैंकरों में ट्रांसफर किया जा रहा है।


    ट्रांसपोंडर बंद करने का जोखिम

    ईरानी हमलों के खतरे से बचने के लिए कई तेल टैंकरों ने अतिरिक्त कदम उठाए हैं. इन टैंकरों ने कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपोंडर (पहचान सिग्नल) बंद रखे हैं. इससे ‘डार्क ट्रैफिक’ पैदा हो रहा है, जिससे पारंपरिक शिपिंग ट्रैकर्स के लिए तेल की वास्तविक आवाजाही का सटीक आकलन लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है. हालांकि, सैटेलाइट इमेजरी के जरिए कुछ जहाजों का पता लगाया जा सकता है.


    क्या है ट्रंप का दावा

    उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना के संचालन के चलते इस जलडमरूमध्य पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण है. ट्रंप ने होर्मुज का नक्शा साझा करते हुए इसे ‘नया अमेरिकी क्षेत्र’ तक घोषित करने की इच्छा जताई।

    वहीं, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि एक हफ्ते में होर्मुज और परिवर्तित मार्गों से तेल की ढुलाई करीब 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रही जो युद्ध पूर्व के 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन के करीब है. हालांकि, जमीनी हालात दोनों देशों के दावों से अलग हैं. ईरान के लगातार हमले और युद्ध पूर्व स्तर से कम तेल प्रवाह ये साबित करता है कि अमेरिका का भी इस जलमार्ग पर पूरी तरह अनियंत्रित कब्जा नहीं है. वहीं, दूसरी ओर जहाजों का ओमान रूट चुनना ये दर्शाता है कि ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में संघर्ष कर रहा है।


    ईरान-ओमान की सीधी बातचीत से US नाखुश

    बता दें कि तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बहाल करने को लेकर सीधी बातचीत चल रही है. दोनों देश होर्मुज के साथ बॉर्डर साझा करते हैं. ये वार्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी के हो रही है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप खुश नहीं हैं. मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि न तो ईरान और न ही अमेरिका इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण का दावा कर सकते हैं।

  • ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम घोषित किया, महिला के लिए राशि दोगुनी होगी

    ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को पकड़ने या मारने पर 30 हजार डॉलर इनाम घोषित किया, महिला के लिए राशि दोगुनी होगी

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच ईरानी सेना की ओर से अमेरिकी सैनिकों को लेकर बड़ा ऐलान किया गया है। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने घोषणा की है कि किसी अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़ने वाले व्यक्ति को 30 हजार डॉलर का इनाम दिया जाएगा। इस घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण स्थिति और गंभीर हो गई है।

    अमीर हातमी के मुताबिक, यदि किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई किसी महिला द्वारा की जाती है तो इनाम की राशि दोगुनी होकर 60 हजार डॉलर हो जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के तहत इनाम हासिल करने की प्रक्रिया, पात्रता और भुगतान से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    ईरानी सेना का यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने की दिशा में बातचीत को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और तीखी बयानबाजी का दौर जारी है। ऐसे माहौल में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए आर्थिक इनाम की घोषणा को ईरान के कड़े रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लंबे समय तक समुद्री यातायात बाधित रहने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    ईरान की ओर से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव का प्रमुख कारण बताया जाता रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ईरान की सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय प्रभाव को सुरक्षा चुनौती के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच मतभेद केवल सैन्य मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव से जुड़े व्यापक विवाद भी इसमें शामिल हैं।

    अमीर हातमी का बयान उस समय सामने आया है जब ईरान के भीतर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ समर्थन और प्रतिक्रिया का माहौल बना हुआ है। बताया गया है कि अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वित्तीय सहायता से संबंधित बड़ी संख्या में अनुरोध प्राप्त हुए थे। इसी पृष्ठभूमि में इनाम की घोषणा किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि घोषित इनाम के तहत किसी अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कोई कार्रवाई हुई है या नहीं। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ऐसी किसी कार्रवाई के बाद संबंधित व्यक्ति तक इनाम की राशि किस प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचाई जाएगी।

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों के बढ़ने से क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

    ईरानी सेना की इस घोषणा ने दोनों देशों के बीच संघर्ष को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। एक तरफ बातचीत के जरिए तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयानों से सैन्य टकराव और तीखा होने की आशंका बढ़ती है। फिलहाल संघर्ष को समाप्त करने और समुद्री मार्गों पर सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में किसी ठोस समाधान का इंतजार बना हुआ है।

  • ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर हुई डील….अब अमेरिका पर सबकी नजर!

    ईरान-ओमान के बीच होर्मुज को लेकर हुई डील….अब अमेरिका पर सबकी नजर!


    तेजरान।
    अमेरिका (America) और इजरायल (Israel) द्वारा मिलकर ईरान (Iran) पर हमला किए जाने के बाद पश्चिम एशिया (West Asia) की राजनीति तेजी के साथ बदली है। कभी सभी के लिए खुला रहने वाला होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) आज केवल कुछ ही देशों के लिए चालू है। अब इस मामले पर एक अहम परिवर्तन हुआ है। होर्मुज के दोनों किनारों पर स्थित ईरान और ओमान ने इस समुद्री रास्ते को लेकर एक नया समझौता किया है। हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन ईरानी मीडिया के मुताबिक इस समझौते के तहत कुछ हद तक जानकारियां सामने आई हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों खाड़ी देशों के बीच हुए इस समझौते होर्मुज से निकलने वाले जहाजों की स्थिति के बारे में तय किया गया है। इसमें होर्मुज में बाहर से आने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान संभालेगा। वही, इनको नियंत्रित करेगा। दूसरी तरफ, ओमान होर्मुज से बाहर की तरफ जाने वाले जहाजों की देख रेख करेगा और उनकी नेविगेशन को संभालेगा।


    होर्मुज पर फीस लेंगे ओमान और ईरान?

    क्या अब यहां पर यह दोनों देश किसी तरह की फीस भी लेंगे? इसको लेकर खुले तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। हालांकि, ईरान, अमेरिका के साथ जारी युद्ध के बाद लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि वह होर्मुज पर फीस लगाने वाला है। वह इसे फीस नहीं बल्कि सुरक्षा के लिए दिया जाने वाला ‘सर्विस टैक्स’ करार देता है।


    शिपिंग लाइन बनाएंगे ओमान और ईरान

    आने-जाने वाले जहाजों को और अधिक सुविधा देने और टक्कर से बचाने के लिए ईरान और ओमान इस रास्ते पर शिपिंग लाइन का निर्माण करेंगे। इसका उद्देश्य जहाजों के बीच की टक्कर को रोकना होगा। दोनों देशों की तरफ से बताया गया कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य महीनों से उलझे होर्मुज स्ट्रेट के विवाद को शांत करना और ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई चैन को दोबारा से शुरू करना है। इस मामले पर अभी दोनों देश काम कर रहे हैं। तकनीकी चीजें साफ होने के बाद इस पर एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया जाएगा।


    अमेरिका पर निगाहें

    ओमान और ईरान किसी भी समझौते पर पहुंच जाएं। लेकिन फिलहाल होर्मुज स्ट्रेट काम करेगा या नहीं यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका क्या ऐक्शन लेता है। वर्तमान में अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के बाहर नाकेबंदी करके बैठा हुआ है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति का एक बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि वह जल्दी ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अमेरिकी संपत्ति घोषित करने वाले हैं। इससे क्षेत्र में और भी ज्यादा तनाव बढ़ गया है।

    दरअसल, अमेरिका चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर युद्ध पूर्व की स्थिति बरकरार रहे और किसी भी देश के ऊपर कोई टैक्स न लगाया जाए। लेकिन अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका ईरान अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। क्योंकि तेहरान को इस समय लग रहा है कि वह जो भी शर्तें मनवाना चाहें, मनवा सकता है। दोनों तरफ से युद्ध में जीत के दावे की वजह से होर्मुज की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है।


    दुनिया के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज स्ट्रेट

    पश्चिम एशिया संकट के बीच होर्मुज स्ट्रेट शुरुआत से ही चर्चा का विषय रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि यह समुद्री रास्ता वैश्विक अनवीकरणीय ऊर्जा का करीब 20 फीसदी हिस्से की सप्लाई के लिए जिम्मेदार माना जाता है। खाड़ी देश इसी रास्ते से दुनिया भर को तेल और गैस की सप्लाई करते हैं। अब चूंकि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला हो रहा है। ऐसी स्थिति में मामला बिगड़ गया है।

    जहाजों का बीमा महंगा हो गया है और अब कंपनियां हमलों के डर से इस रास्ते पर जाने से भी कतरा रही हैं। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा के दाम बढ़ रहे हैं।

  • ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा

    ट्रंप के बयान पर ईरान का पलटवार… कहा- ट्वीट कर देने से नहीं हो जाएगा होर्मुज पर कब्जा


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump)) के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने युद्ध में ईरान को हराने के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को अपना क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने एक्स पर कहा कि होर्मुज को न तो किसी ट्वीट के जरिए कब्जे में लिया जा सकता है और न ही विमानवाहक पोत, सैन्य आदेश या चुनावी भाषण के जरिए। उन्होंने कहा कि ईरान धमकियों से डरने वाला नहीं है और शक्ति प्रदर्शन के आगे झुकता नहीं है। गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि होर्मुज ईरान का था, ईरान का है और ईरान का ही रहेगा।

    उप विदेश मंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब तक ईरान के खिलाफ अमेरिका को रणनीतिक और भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज को बंद या खोलने का फैसला केवल ईरान के नियंत्रण में होगा। जब तक अमेरिका ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं करता और अपनी हार की वास्तविकता को नहीं मानता, तब तक ईरान स्ट्रेट पर लगाए गए अवरोध को जारी रखेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज को फिर से खोलने को लेकर बातचीत में गतिरोध बना हुआ है।


    डोनाल्ड ट्रंप ने क्या किया था दावा

    इससे पहले न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में रैली को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान को हराने के बाद वह जल्द ही होर्मुज को अमेरिका का क्षेत्र घोषित करेंगे। ट्रंप ने इससे पहले यह भी दावा किया था कि अमेरिका का इस जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण है और वह इसे अपने नियंत्रण में बनाए रखेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को स्टील की दीवार बताते हुए कहा कि ईरान इसका कुछ नहीं कर सकता। ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर किए जाने का दावा भी किया और तेहरान पर महंगाई व केवल बयानबाजी करने का आरोप लगाया।

    राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के तुरंत बाद ईरान ने उन्हें खारिज करते हुए कहा कि होर्मुज अभी भी बंद है और ईरान की शर्तें स्वीकार होने तक इसे नहीं खोला जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार किए जा रहे दावे वास्तविक स्थिति को नहीं बदल सकते। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। मौजूदा तनाव के बीच नौसैनिक गश्त बढ़ाई गई है, कई वाणिज्यिक जहाजों ने अपने मार्गों में बदलाव किया है।

  • डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल

    डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, बोले- ईरान को हराकर होर्मुज को करेंगे अमेरिका में शामिल


    वाशिंगटन।
    ईरान (Iran) के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने बड़ा ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा घोषित कर देंगे। उन्होंने कहा, ईरान को हराने के बाद होर्मुज (Hormuz) को अमेरिका में शामिल कर लिया जाएगा। वह न्यूयॉर्क में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतरगत यह कैसे संभव होगा।


    ईरान ने दिया जवाब

    एक दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि होर्मुज पर उनका पूरा नियंत्रण स्थापित हो गया है। उन्होंने अमेरिकी नाकेबंदी को स्टील की दीवार बताया था। वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घारिबाबादी ने कहा था कि होर्मुज ईरान के ही नियंत्रण में था और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि ईरान ही फैसला लेगा कि होर्मुज को कब खोला जाएगा। इसके अलावा जब तक अमेरिका अपनी हार नहीं मान लेता है, होर्मुज में नाकेबंदी जारी रहेगी।

    उन्होंने कहा, सबको वास्तविकता स्वीकार कर लेनी चाहिए। अमेरिका को करारी हार मिली है। होर्मुज हमेशा से ईरानियों का ही था और ईरान का ही रहेगा। ईरान के आदेश पर ही होर्मुज खुलेगा या बंद होगा। अगर इस वास्तविकता को आप नहीं स्वीकार करते तो फिर आप भ्रम में जी रहे हैं। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस तनाव को लेकर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की परेशानी बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि नाकेबंदी का मतलब है कि बिना उनकी इजाजत के एक भी जहाज नहीं गुजर सकता।


    विमान वाहक पोतों में पुरानी तकनीक पर क्यों जोर दे रहे ट्रंप

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नौसेना को अपने भावी विमान वाहक जंगी पोतों से अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली को हटाकर पुरानी स्टीम (भाप) आधारित कैटापुल्ट तकनीक पर लौटने का निर्देश दिया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से जहाजों की निर्माण लागत घटने के बजाय काफी बढ़ सकती है।

    यह आदेश वर्तमान में निर्माणाधीन ‘डोरिस मिलर’ सहित भविष्य के फोर्ड-क्लास विमान वाहकों पर लागू होगा। ट्रंप चाहते हैं कि इन जहाजों में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम और एडवांस वेपन्स एलिवेटर्स की जगह स्टीम-संचालित कैटापुल्ट और हाइड्रोलिक सिस्टम लगाये जायें। फैसले की व्याख्या करते हुए एक ज्ञापन में ट्रंप ने कहा कि युद्ध मंत्रालय को नौसैनिक बल संरचना के विस्तार के साथ समुद्री औद्योगिक आधार में क्षमता और प्रतिस्पर्धा दोनों को बहाल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण स्थापित और भरोसेमंद तकनीक पर निर्भर करता है और घरेलू पोत निर्माण उद्योग में निवेश को बढ़ावा देता है।

    गौरतलब है कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के खिलाफ ट्रंप का रुख नया नहीं है। अपने पहले कार्यकाल से ही वे अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े विमान वाहक ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ में इस्तेमाल हो रहे इस सिस्टम की आलोचना करते रहे हैं और इसे अत्यधिक जटिल व अत्यधिक महंगा बताते आए हैं। हालांकि, रक्षा उद्योग इस फैसले से असहमत नजर आ रहा है। ‘डोरिस मिलर’ के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक प्रणाली के निर्माण का 1.2 अरब डॉलर का ठेका रखने वाली कैलिफोर्निया की कंपनी ‘जनरल एटॉमिक्स’ ने इसका कड़ा विरोध किया है। कंपनी ने कहा कि निर्माण कार्य लगभग आधा पूरा हो चुका है और इस मोड़ पर दिशा बदलने से लागत, समय-सारणी और एकीकरण में गंभीर समस्याएं पैदा होंगी, जिससे अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता पर भी असर पड़ सकता है।

  • ट्रंप का समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का दावा…. बोले- होर्मुज में अमेरिका ने खड़ी की स्टील की दीवार

    ट्रंप का समुद्री मार्ग पर नियंत्रण का दावा…. बोले- होर्मुज में अमेरिका ने खड़ी की स्टील की दीवार


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा है कि अल्लाह का शुक्र है कि अमेरिका (America) ने होर्मुज समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz Maritime Route) में स्टील की दीवार खड़ी कर दी है और आगे भी उसे बरकरार रखेगा। उन्होंने इस अहम समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया है। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी नौसेना की इस कार्रवाई की सफलता की तारीफ की और दावा किया कि इसे “स्टील की दीवार” बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता।

    ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि अमेरिका इस अहम जल मार्ग को कंट्रोल करता है, जो मिडिल ईस्ट से तेल-गैस और दूसरी चीज़ों के निर्यात के के लिए ज़रूरी है। दूसरी तरफ ईरान ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। दरअसल, ईरान होर्मुज जलमार्ग में एक टोल सिस्टम लागू करना चाहता है। इसीलिए उसने कई बार उन जहाज़ों पर हमला किया है। ईरान का कहना है कि वह 28 फरवरी को ट्रंप द्वारा शुरू किए गए युद्ध के जवाब में उसके पसंदीदा रास्ते को रोक रहा है।


    ईरान को कीमत चुकानी होगी

    इस बीच, ट्रंप ने होर्मुज पर नियंत्रण का दावा करते हुए कहा कि अगर ईरान स्थिति बदलने की कोशिश करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज जलडमरूमध्य पर हमारा पूरा नियंत्रण है। उनका इसपर कोई नियंत्रण नहीं। हम उसे चला रहे हैं। अगर ईरान कभी कुछ करने की कोशिश करता है तो उसे ‘उड़ा दिया’ जायेगा।” उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समय मजबूत स्थिति में है और दावा किया कि ईरान ने क्षेत्र में अपना पिछला प्रभाव खो दिया है। ट्रंप ने कहा, “अभी हमारी स्थिति बहुत अच्छी है। हमारे सामने एक ऐसा देश है जो 50 वर्षों से मध्य पूर्व में दबंग बना हुआ था… अब वह पश्चिम एशिया का दबंग नहीं रहा।”


    अमेरिका और ईरान में अंतिम समझौता नहीं

    गौरतलब है कि फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद क्षेत्र में जारी तनाव के बीच उनकी इस तरह की टिप्पणियां आई हैं। अमेरिका और ईरान अब तक टकराव खत्म करने के लिए किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जारी व्यवधानों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के एक बड़े हिस्से की कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है।


    ईरानी मीडिया क्या कह रहा

    ईरान के सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के हवाले से कहा है कि 28 फरवरी, 2026 तक यह जलमार्ग खुला रहा था। उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों की भी आलोचना की। बघाई ने कहा, “यह नहीं भूलना चाहिए कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और उसके साथ जो कुछ हुआ, वह अमेरिका और इजरायली शासन की सैन्य आक्रामकता के कारण हुआ है, जो अब भी जारी है। जहां तक ईरान द्वारा शर्तें रखे जाने के दावों का सवाल है, उन्हें यह मामला अपनी ही सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।” रणनीतिक जलमार्ग को लेकर तनाव अब भी संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस बीच, तेहरान और ओमान के बीच इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही के लिए व्यवस्थाओं को लेकर बातचीत जारी है।

  • होर्मुज पर ‘वॉल ऑफ स्टील’ का दावा, ईरान को ट्रंप की खुली चुनौती; सीजफायर पर भी नहीं बनी बात

    होर्मुज पर ‘वॉल ऑफ स्टील’ का दावा, ईरान को ट्रंप की खुली चुनौती; सीजफायर पर भी नहीं बनी बात


    वॉशिंगटन।
    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बजाय बयानबाजी के स्तर पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है। उन्होंने अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को ‘वॉल ऑफ स्टील’ यानी ‘फौलादी दीवार’ बताया है।

    ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि अमेरिका ने होर्मुज के आसपास अपनी नौसैनिक शक्ति को इस तरह तैनात किया है कि ईरान के लिए इसे भेदना आसान नहीं होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका का नियंत्रण आगे भी कायम रह सकता है।

    क्या है ‘वॉल ऑफ स्टील’?

    ‘वॉल ऑफ स्टील’ से ट्रंप का आशय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अमेरिकी नौसैनिक शक्ति की तैनाती से है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के तेल कारोबार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।

    अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और समुद्री निगरानी को लेकर ट्रंप का दावा ऐसे समय में आया है जब होर्मुज में तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

    ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का दावा

    ट्रंप ने अपने बयान में ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई और प्रतिबंधों के कारण ईरान की आर्थिक और सैन्य स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना की क्षमता पर सवाल उठाते हुए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को भी निशाने पर लिया।

    हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की ओर से भी अमेरिका के आरोपों और दावों पर लगातार तीखी प्रतिक्रिया सामने आती रही है।

    सीजफायर बढ़ाने पर ईरान का इनकार

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावनाओं को भी झटका लगा है। मीडिया रिपोर्टों में पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच अस्थायी सीजफायर बढ़ाने को लेकर बातचीत की बात कही गई थी।

    ईरान ने हालांकि इन दावों को खारिज कर दिया। ईरानी सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के साथ सीजफायर बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है। तेहरान का आरोप है कि पहले हुए अंतरिम समझौते का अमेरिका ने उल्लंघन किया था।

    होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक अहमियत के कारण अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पर पूरी दुनिया की नजर है। इस मार्ग में किसी भी तरह का सैन्य टकराव या लंबे समय तक व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

    फिलहाल ट्रंप के ‘वॉल ऑफ स्टील’ वाले दावे और ईरान के सीजफायर से इनकार के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं।