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  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    नई दिल्ली । ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ईरानी सांसदों ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियमों से जुड़े एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस प्रस्ताव में कुछ जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है।

    यह बिल फिलहाल ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की समीक्षा में है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करना और ईरान के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।

    प्रस्तावित ड्राफ्ट में इजरायल से जुड़े जहाजों और कुछ अन्य देशों या कंपनियों से जुड़े सैन्य तथा नागरिक कार्गो पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे जहाजों को मुआवजा मिलने तक ट्रांजिट की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर उनके कार्गो मूल्य का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

    ईरान की योजना के अनुसार, जिन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी, उनसे नौवहन सेवाओं के खर्च को पूरा करने के लिए शुल्क लिया जा सकता है। यह शुल्क ईरानी मुद्रा में जमा करना होगा। ईरान का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। किसी भी तरह की बाधा या नियंत्रण व्यवस्था का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इसी कारण ईरान के इस कदम पर कई देशों की नजर बनी हुई है।

    इससे पहले भी ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कानून बनाने की कोशिश की गई थी। शुरुआती प्रस्तावों में केवल उन देशों के जहाजों को निशाना बनाने की बात कही गई थी, जिन्हें ईरान अपना विरोधी मानता है। नए ड्राफ्ट में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए अधिक जहाजों और कार्गो को शामिल किया गया है।

    इसी बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े समुद्री मार्गों को लेकर बातचीत भी जारी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच नौवहन मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर सहमति बन चुकी है और संयुक्त बयान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, इस समझौते को लेकर ओमान की ओर से अभी सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान अपने नियंत्रण वाले समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेगा। ईरान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा और नौवहन व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखेगा। इस व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

    होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के नए कदम ऐसे समय सामने आए हैं जब मध्य पूर्व में पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है। समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त नियंत्रण या प्रतिबंध वैश्विक व्यापार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में इस बिल की समीक्षा और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी।

  • मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। इसके अलावा भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।

    केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इन 62 जहाजों में 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल थे। बदलते समुद्री हालात को देखते हुए सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय की ओर से समय-समय पर सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने बताया कि व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली यात्राओं में भारतीय नाविकों की तैनाती को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही काला सागर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों वाले जहाजों के लिए भी सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। जहाज संचालकों और चालक दल को यात्रा से पहले सुरक्षा आकलन करने, जारी सलाह का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की तुरंत जानकारी देने के लिए कहा गया है।

    सरकार ने बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट, दक्षिणी लाल सागर और यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के लिए भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जहाज मालिकों और कप्तानों को सुरक्षा घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने और जोखिम कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा गया है।

    होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत चौबीसों घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसके अलावा जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस तैयार रखा जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सरकार ने समुद्री घटनाओं की निगरानी के लिए हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी की है। इसमें जहाजों की आवाजाही, भारतीय नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित नुकसान से जुड़ी जानकारी शामिल की जाती है।

    त्वरित सूचना और प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया गया है। इसमें समुद्री दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविकों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित नाविकों के परिवारों के साथ सरकार लगातार संपर्क बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसी नाविक की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा और तत्काल आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों, समुद्री संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी सक्रिय कर रखी है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन शिपिंग मंत्रालय, स्थानीय समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित संपर्क में हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों पर किसी भी चुनौती की स्थिति में भारतीय नागरिकों और जहाजों को समय पर सहायता मिल सके।

    सरकार की ओर से शुरू की गई 24 घंटे हेल्पलाइन व्यवस्था केवल नाविकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भारतीय नागरिक भी जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इससे संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों को सीधे सहायता प्राप्त करने का माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। सरकार का कहना है कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने समुद्री निगरानी और आपात प्रबंधन को मजबूत किया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 3 अगस्त तक भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

    समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय लगातार अपनी सलाह और दिशानिर्देशों को अपडेट कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय नाविकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपायों की जानकारी देना और किसी भी संभावित खतरे से बचाव करना है।

    सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। इनमें 24 घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष, जहाजों और चालक दल की जानकारी वाला लाइव डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके माध्यम से जहाजों की आवाजाही, नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    भारत का कहना है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी कारण सरकार ने नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।

  • पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ

    पश्चिम एशिया तनाव का असर, सेंसेक्स 456 अंक टूटा और निफ्टी 24,600 से नीचे बंद हुआ


    नई दिल्ली ।वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके चलते प्रमुख घरेलू सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

    बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,499.17 के स्तर पर रहा। इसी तरह एनएसई निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570.65 पर बंद हुआ। इस गिरावट के साथ निफ्टी 24,600 के स्तर से नीचे चला गया।

    व्यापक बाजार की बात करें तो तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं रही। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि दबाव मुख्य रूप से बड़े और प्रमुख शेयरों में ज्यादा दिखाई दिया।

    सेक्टरवार कारोबार में वित्तीय सेवाओं, निजी बैंकों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। इसके विपरीत ऑटो और आईटी क्षेत्र में मजबूती देखने को मिली। मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों ने भी बाजार की गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

    निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, टीसीएस, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक और एसबीआई प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और श्रीराम फाइनेंस पर बिकवाली का दबाव रहा।

    बाजार में शुक्रवार की कमजोरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में दोबारा बढ़ता तनाव रहा। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी नई अनिश्चितता ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई, कंपनियों की लागत और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर भी जारी है और अलग-अलग कंपनियों के परिणामों के आधार पर शेयरों में प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू कारोबार पर दबाव बनाया।

    हालांकि बाजार के मौजूदा रुख को पूरी तरह नकारात्मक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और संभावित शांति समझौते की दिशा में प्रगति होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे भारतीय बाजार को राहत मिल सकती है।

    कच्चे तेल की कीमतों का स्तर भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत बन सकती है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी हुई है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन्हीं संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय होने की संभावना रहेगी।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की नई व्यवस्था से बढ़ी हलचल, अमेरिका ने मुक्त नौवहन को लेकर जताई आपत्ति

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की नई व्यवस्था से बढ़ी हलचल, अमेरिका ने मुक्त नौवहन को लेकर जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच एक अहम समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों देश इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा, मार्गदर्शन और यातायात प्रबंधन की संयुक्त जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके बदले जहाजों से सर्विस फीस लेने का प्रावधान किया गया है, जिसे दोनों देशों के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा। इस प्रस्तावित व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है क्योंकि अमेरिका ने इसका खुलकर विरोध दर्ज कराया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच नए शिपिंग रूट और उसके संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर व्यापक सहमति बन चुकी है। अब समझौते को अंतिम रूप देने के लिए संयुक्त बयान की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नए समुद्री मार्ग के भौगोलिक निर्देशांक तय किए जा चुके हैं और तकनीकी स्तर पर अधिकांश प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि समझौते की औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन करना होगा। सुरक्षा, निगरानी और नौवहन सहायता की जिम्मेदारी ईरान और ओमान संयुक्त रूप से निभाएंगे। इसके बदले जहाजों से सर्विस फीस वसूली जाएगी, जिसे दोनों देशों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री यातायात को अधिक संगठित और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।

    अमेरिका ने इस प्रस्तावित समझौते पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर ऐसी कोई व्यवस्था स्वीकार्य नहीं हो सकती, जिससे मुक्त और निर्बाध नौवहन के सिद्धांत पर प्रभाव पड़े। अमेरिका का मानना है कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सभी देशों को समान और स्वतंत्र पहुंच मिलनी चाहिए तथा किसी भी नई व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के मूल सिद्धांत प्रभावित नहीं होने चाहिए।

    ईरान का कहना है कि प्रस्तावित मॉडल का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था इस प्रकार तैयार की गई है कि वाणिज्यिक जहाज अपनी यात्रा के दोनों चरणों में निर्धारित समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेंगे, जिससे यातायात प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सके। ईरान का यह भी दावा है कि यह व्यवस्था क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और समुद्री गतिविधियों में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और ऊर्जा संसाधन इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में लागू होने वाली किसी भी नई व्यवस्था का प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान और ओमान इस समझौते को कब अंतिम रूप देते हैं और इसके बाद वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • होर्मुज पर ईरान की दोटूक चेतावनी, दूसरा समुद्री रास्ता बना तो अमेरिकी युद्धपोत होंगे निशाने पर

    होर्मुज पर ईरान की दोटूक चेतावनी, दूसरा समुद्री रास्ता बना तो अमेरिकी युद्धपोत होंगे निशाने पर


    नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में वैकल्पिक समुद्री मार्ग बनाने के लिए अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो उन्हें मिसाइलों से निशाना बनाया जाएगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत जारी होने का दावा किया है, लेकिन तेहरान ने किसी भी तरह की वार्ता से इनकार कर दिया है।

    ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सलाहकार और एक्सपीडियेंसी काउंसिल के सदस्य जनरल मोहसिन रेजाई ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में दूसरा समुद्री मार्ग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका इस उद्देश्य से युद्धपोत भेजता है तो ईरान सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

    अमेरिका को व्यवहार बदलने की नसीहत
    रेजाई ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता की प्राथमिकता यह है कि अमेरिका अपने रवैये में वास्तविक बदलाव दिखाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका कुछ अहम शर्तों पर आगे बढ़ता है तो इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका समुद्री नाकेबंदी जारी रखता है तो उसके जहाजों और सैन्य ठिकानों को गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है।

    ओमान से सुरक्षा पर चर्चा, अमेरिका से नहीं
    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ किसी प्रकार की बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि फिलहाल केवल ओमान के साथ होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है। बघाई ने कहा कि निकट भविष्य में न तो कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल ईरान आएगा और न ही ईरानी वार्ताकार विदेश जाएंगे।

    ट्रंप बोले- बातचीत जारी है
    दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान के साथ वार्ता जारी है और जल्द ही औपचारिक बातचीत शुरू हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और अन्य देशों के अनुरोध पर यह संवाद आगे बढ़ रहा है। ट्रंप ने कहा कि उनकी कोशिश होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समाधान निकालने की है।

    ट्रंप का नया दावा
    बाद में ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को “दोहरे रवैये वाला” बताते हुए कहा कि ईरान ने ही बैठक की इच्छा जताई है और निकट भविष्य में वार्ता तय है। उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण है और अमेरिका की अनुमति के बिना वहां कोई गतिविधि संभव नहीं है।

    तेल बाजार पर पड़ा असर
    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता की अटकलों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। माना जा रहा है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य होने से ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

    होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों पर संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता


    नई दिल्ली ।
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हालिया हमलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नौवहन को बिना किसी बाधा के बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी अस्थिरता न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि लाखों लोगों की सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और मानवीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में एक करोड़ से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए वहां की सुरक्षा स्थिति भारत के लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया।

    भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के दिनों में कई वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की। भारतीय प्रतिनिधि ने विशेष रूप से उन जहाजों का उल्लेख किया जिन पर भारतीय नाविक सवार थे और जो हमलों से प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में कई भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं। इसके अलावा एक भारतीय नागरिक की मृत्यु और एक अन्य के लापता होने की जानकारी भी सामने आई है, जिसे भारत ने अत्यंत गंभीर विषय बताया।

    राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इन मार्गों पर किसी भी प्रकार का हमला पूरी दुनिया की आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रह सकें।

    भारत ने यह भी कहा कि हाल के समय में संघर्ष में अस्थायी विराम के संकेत मिले थे, लेकिन उसके बाद दोबारा हिंसक घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए भारत ने कूटनीतिक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया। भारतीय पक्ष का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी देशों को जिम्मेदारी के साथ सहयोग करना होगा।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों, सुरक्षित समुद्री परिवहन और वैश्विक शांति के पक्ष में है। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों और समुद्री कर्मियों पर होने वाले हमले किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किए जा सकते। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि समुद्री सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है और इसके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

    भारत ने अपने वक्तव्य में यह संदेश भी दिया कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में है। भारत ने उम्मीद जताई कि संबंधित पक्ष संयम और संवाद का रास्ता अपनाएंगे, जिससे तनाव कम होगा, समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित बनेंगे और क्षेत्र में सामान्य स्थिति जल्द बहाल हो सकेगी। भारत ने स्पष्ट किया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वह हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • होर्मुज और लाल सागर में बढ़ते तनाव से भारतीय कारोबार पर खतरा, निर्यात-आयात कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका

    होर्मुज और लाल सागर में बढ़ते तनाव से भारतीय कारोबार पर खतरा, निर्यात-आयात कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो भारतीय निर्यातकों और आयातकों की लागत बढ़ सकती है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उन छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ने की संभावना है, जिनके लिए बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाना आसान नहीं होता।

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत के कच्चे तेल के आयात का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा आपूर्ति भी काफी हद तक इसी मार्ग पर निर्भर करती है। ऐसे में इस समुद्री रास्ते पर किसी भी तरह का व्यवधान देश की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है।

    विश्लेषण में कहा गया है कि यदि होर्मुज और लाल सागर दोनों समुद्री मार्ग एक साथ प्रभावित होते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेज़ी से बढ़ सकती हैं। इससे ईंधन महंगा होने के साथ-साथ परिवहन, विनिर्माण और ऊर्जा आधारित उद्योगों की लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर महंगाई और औद्योगिक उत्पादन पर भी देखने को मिल सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री परिवहन पहले से ही दबाव में है। यदि जहाजों को वैकल्पिक मार्गों से होकर लंबी दूरी तय करनी पड़ी, तो सामान की डिलीवरी में दो से तीन सप्ताह तक अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे मालभाड़ा, समुद्री बीमा प्रीमियम और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अन्य लागतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र के अलावा ऑटोमोबाइल, रसायन, उर्वरक, धातु और विनिर्माण जैसे उद्योग भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं। कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत कंपनियों के परिचालन खर्च को बढ़ाएगी, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव आएगा। साथ ही सप्लाई चेन में देरी होने से उत्पादन और वितरण की गति भी प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट के अनुसार बड़ी कंपनियां अपने विविध आपूर्ति स्रोतों, बेहतर वित्तीय क्षमता और मजबूत वैश्विक नेटवर्क के कारण ऐसे झटकों का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर सकती हैं। वहीं छोटे और मझोले उद्यमों के सामने कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ने, नकदी प्रवाह पर दबाव और लाभप्रदता में कमी जैसी चुनौतियां अधिक गंभीर रूप से सामने आ सकती हैं।

    विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यदि समुद्री मार्गों में व्यवधान लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति शृंखला, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर भी दिखाई देगा। ऐसे हालात में कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत, बेहतर जोखिम प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स रणनीति अपनाने की आवश्यकता होगी, ताकि संभावित आर्थिक झटकों के प्रभाव को कम किया जा सके।

  • ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    ईरानी जहाज पर कथित यूक्रेनी हमले से बढ़ा तनाव, अराघची और लावरोव ने फोन पर साझा की रणनीतिक चिंता

    नई दिल्ली । कैस्पियन सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए कथित हमले के बाद पश्चिम एशिया और यूरोपीय क्षेत्र में कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने फोन पर बातचीत कर सुरक्षा स्थिति, क्षेत्रीय तनाव और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया। दोनों नेताओं ने हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

    ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, अराघची ने बातचीत के दौरान कहा कि किसी भी संप्रभु देश के वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस घटना को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। उनका कहना था कि ऐसे हमलों को अनदेखा नहीं किया जा सकता और जिम्मेदार पक्षों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

    रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी कथित हमले की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं रूस और ईरान के बीच विकसित हो रहे व्यापारिक और समुद्री संपर्क मार्गों के लिए भी जोखिम पैदा करती हैं। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

    बातचीत के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी सुरक्षा स्थिति और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का भी उल्लेख किया गया। दोनों पक्षों ने माना कि मौजूदा परिस्थितियों में कूटनीतिक प्रयासों को मजबूत करना और तनाव को नियंत्रित करने के लिए संवाद बनाए रखना आवश्यक है।

    ईरानी विदेश मंत्री ने इससे पहले यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ भी टेलीफोन पर बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने कथित हमले की निंदा करते हुए यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा की।

    ईरान ने इस मामले को लेकर तेहरान में यूक्रेन के प्रभारी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संबंधित अधिकारी को विरोध पत्र सौंपते हुए घटना पर ईरान की कड़ी आपत्ति से अवगत कराया गया। मंत्रालय का कहना है कि कथित हमला स्थानीय समयानुसार शनिवार तड़के हुआ, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा और एक नाविक की मृत्यु हो गई।

    ईरानी विदेश मंत्री ने सार्वजनिक रूप से भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मामलों पर दृढ़ रुख अपनाएगा। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें संभावित कूटनीतिक कदमों और आगे की जांच पर टिकी हुई हैं। यह घटनाक्रम पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे

    अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव में फिलहाल नरमी आने के संकेतों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख तेल बेंचमार्क लगभग पांच प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने तनाव कम होने की संभावना के बीच मुनाफावसूली की, जिससे पिछले कुछ सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बाजार में दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी करीब 5.09 प्रतिशत टूटकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में आई यह गिरावट हाल के समय की बड़ी गिरावटों में शामिल रही।

    बाजार में नरमी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में विराम की संभावना रही। ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए कि यदि अमेरिका सैन्य अभियान आगे नहीं बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कुछ कम हुई है।

    हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। बाजार को आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने बाजार की चिंता को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान आई तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी महीने की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इसलिए निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर ही कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय होने की संभावना है।