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  • सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य

    सऊदी अरब में हूती के हमलों के बाद US में बड़ा अलर्ट… यात्रा के लिए अनुमति लेना अनिवार्य


    वाशिंगटन।
    यमन (Yemen) के हूती समूह (Houthi Group) के मिसाइल और ड्रोन हमलों (Missile- Drone Attacks) के बाद सऊदी अरब (Saudi Arabia) में सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी मिशन ने सऊदी अरब में काम कर रहे अपने सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू शहरों की यात्रा के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी काम के साथ-साथ निजी यात्रा पर भी लागू होगा। अमेरिकी मिशन ने कहा कि यह फैसला मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। साथ ही सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    हूतियों ने सऊदी अरब को कैसे निशाना बनाया?

    यह अमेरिकी अलर्ट ऐसे समय आया है जब हूती समूह ने सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इनमें राजधानी रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि मिसाइल को रास्ते में ही रोक दिया गया। गठबंधन ने बिश, ताइफ, फरासन और यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की भी जानकारी दी है। रियाद में एयरपोर्ट के पास विस्फोट और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने की खबर भी सामने आई, हालांकि सऊदी अधिकारियों के मुताबिक इस घटना में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है।


    अमेरिका ने सऊदी अरब में रहने वाले नागरिकों को क्या कहा?

    अमेरिकी मिशन ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने, स्थानीय मीडिया और सरकारी घोषणाओं पर नजर रखने तथा फोन चार्ज रखने को कहा है। हवाई हमले की स्थिति में लोगों को खिड़कियों और कांच के दरवाजों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अमेरिका ने लोगों से प्रदर्शन और बड़ी भीड़ से बचने तथा ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने को भी कहा है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से अमेरिका से जुड़ा माना जाता है। अमेरिकी विदेश विभाग सऊदी अरब के लिए फिलहाल लेवल-3 ‘यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की सलाह दे रहा है। इसमें ड्रोन और मिसाइल हमलों, सशस्त्र संघर्ष और आतंकवाद का खतरा बताया गया है।


    ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को क्या चेतावनी दी?

    सऊदी अरब पर हमलों के बीच ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य केंद्रीय कमान ने रविवार को सरकारी मीडिया पर कहा कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी कोई नया बड़ा हमला करते हैं तो ईरान अमेरिका के खिलाफ लगातार जवाबी कार्रवाई करेगा। ईरान ने यह भी कहा कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के सहयोगियों को संघर्ष का पक्ष माना जाएगा। हालांकि, ईरान ने उस कथित हमले की कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, जिसकी तैयारी होने की बात उसने कही है।


    कतर ने हूती हमलों पर क्या कहा?

    कतर ने रियाद को निशाना बनाकर किए गए बैलिस्टिक मिसाइल हमले और बिश, ताइफ, फरासन तथा यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की कड़ी निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को सऊदी अरब की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है। इस बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया की यात्रा करने या वहां से गुजरने वाले अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने को कहा है। अमेरिकी चेतावनी में उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी संभावित परेशानियों का भी जिक्र किया गया है।

  • ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को अपना वीकेंड प्रवास बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौट आए। वह मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड से रविवार को वापस आने वाले थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गए। ट्रंप की अचानक वापसी के पीछे प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

    ट्रंप की वापसी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन शर्तों को मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा चुका है।

    ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और चेतावनी के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अमेरिका ने भी सतर्कता बढ़ाई है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    सऊदी अरब और हूती समूह के बीच जारी सैन्य गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है। हूती समूह ईरान समर्थित है और सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है। इनमें नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाली घटनाएं भी शामिल रही हैं।

    अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक समूह मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी हितों या अमेरिका और उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी चेतावनी में यात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से संबंधित जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षा स्थिति में बदलाव होने पर उड़ानों और यात्रा कार्यक्रमों में भी असर पड़ सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का कैंप डेविड से निर्धारित समय से एक दिन पहले व्हाइट हाउस लौटना महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उनकी वापसी का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत के लिए शर्तें सामने रखी गई हैं, जबकि दूसरी तरफ मांगें पूरी नहीं होने पर निर्णायक युद्ध की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और ईरान के रुख पर क्षेत्रीय हालात की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

    फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां, अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा और यात्रा संबंधी सावधानियां बढ़ा दी गई हैं।

  • मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता

    मरीब की ओर बढ़े बनी हशीश के हथियारबंद लड़ाके, हूतियों की ताकत बढ़ने से सऊदी की बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। यमन में कबीलाई ताकत और आधुनिक हथियारों का गठजोड़ एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला है। राजधानी सना के पूर्वी पहाड़ी इलाकों से बनी हशीश कबीले के हथियारबंद लड़ाकों की बड़ी लामबंदी मरीब की दिशा में हुई है। लड़ाकों के हाथों में AK-47, रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड और अन्य आधुनिक हथियार दिखाई दे रहे हैं। इस काफिले में युवा और अधेड़ लड़ाकों के साथ 8-10 साल के बच्चे भी नजर आ रहे हैं। हूतियों के समर्थन में हुई यह लामबंदी सऊदी अरब के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि मरीब लंबे समय से हूती विरोधी ताकतों का प्रमुख गढ़ रहा है।

    सदियों पुरानी कबीलाई ताकत का नया चेहरा

    यमन के पहाड़ी इलाकों से निकल रहे इस काफिले में परंपरागत पोशाक और जाम्बिया पहने लड़ाके भी दिखाई दे रहे हैं। फर्क इतना है कि पुराने दौर के घोड़ों और तलवारों की जगह अब पिकअप ट्रक, मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर हैं।

    बनी हशीश कबीले का क्षेत्र सना के पूर्व में पहाड़ों में फैला है। राजधानी के बेहद करीब होने के कारण इसका रणनीतिक महत्व काफी बड़ा है। यहां प्रभाव रखने वाली ताकतें सना के पूर्वी रास्तों और आसपास के इलाकों पर असर डाल सकती हैं।

    यमन में जनजातियां केवल सामाजिक इकाइयां नहीं रही हैं। दशकों से उनका राजनीतिक और सैन्य प्रभाव भी रहा है। बनी हशीश इसी कबीलाई शक्ति का उदाहरण है।

    कभी हूतियों से हुई थी खूनी लड़ाई

    हूतियों और बनी हशीश के रिश्ते हमेशा से एक जैसे नहीं रहे। 2000 के दशक में हुसैन बद्र अल-दीन अल-हूती के नेतृत्व में आंदोलन उभरने और 2004 के बाद हूती विद्रोह शुरू होने के दौरान उत्तरी यमन की कई जनजातियां बदलते सत्ता समीकरणों में उलझी थीं।

    2008-09 के आसपास बनी हशीश के कुछ हिस्सों और हूती लड़ाकों के बीच गंभीर संघर्ष हुआ था। उस समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के विरोध में खड़े थे।

    हालात 2014 में बदले, जब हूतियों ने सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में उनका सैन्य प्रभाव तेजी से बढ़ा। कई स्थानीय जनजातियां या तो हूतियों के साथ आ गईं या उनके नियंत्रण में चली गईं। बनी हशीश भी इसी बदलाव का हिस्सा बना।

    आज कबीले के कई प्रभावशाली लोग और लड़ाके हूती नेटवर्क से जुड़े बताए जाते हैं। इसलिए बनी हशीश की लामबंदी हूती नेतृत्व के लिए स्थानीय समर्थन के साथ-साथ सैन्य क्षमता बढ़ाने का जरिया भी मानी जाती है।

    मरीब ही क्यों बना निशाना?

    मरीब सना से करीब 175 किलोमीटर पूर्व में उत्तर-मध्य यमन में स्थित है। इसके पश्चिम में सना, उत्तर में अल-जौफ, दक्षिण में अल-बैदा और शबवा तथा पूर्व में हद्रमौत है। भौगोलिक स्थिति के कारण यह राजधानी और यमन के पूर्वी रेगिस्तानी इलाकों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क क्षेत्र है।

    मरीब की अहमियत केवल उसके स्थान तक सीमित नहीं है। यह यमन के प्रमुख तेल और गैस क्षेत्रों में शामिल है। 1980 के दशक में यहां बड़े व्यावसायिक तेल भंडार मिले थे। तेल और गैस के अलावा यहां देश का एक महत्वपूर्ण बिजली संयंत्र भी है। मरीब, शबवा और हद्रमौत को मिलाकर यमन का प्रमुख तेल-गैस बेल्ट बनता है।

    यही वजह है कि मरीब पर नियंत्रण की लड़ाई में सत्ता के साथ ऊर्जा संसाधनों का सवाल भी जुड़ा हुआ है।

    हूतियों के लिए मरीब पर कब्जा क्यों अहम

    मरीब लंबे समय से हूती विरोधी यमनी सरकार और स्थानीय कबीलों का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में यहां अपनी पकड़ बनाना हूतियों के लिए कई मोर्चों पर फायदा दे सकता है।

    मरीब पर दबाव बढ़ने से सना के पूर्व में हूतियों की स्थिति मजबूत होगी। साथ ही उन्हें यमन के ऊर्जा संसाधनों के करीब पहुंच और पूर्वी इलाकों की ओर रणनीतिक रास्तों पर प्रभाव हासिल करने का मौका मिल सकता है।

    2021 में भी हूती सेना ने मरीब पर कब्जे के लिए बड़ा अभियान चलाया था। हालांकि स्थानीय कबीलों और सरकार समर्थक बलों ने उनका मुकाबला किया और हूतियों को सफलता नहीं मिली।

    अब 2026 में फिर बदलते क्षेत्रीय समीकरणों के बीच मरीब महत्वपूर्ण हो गया है। पश्चिमी यमन में हूतियों ने बड़े इलाकों और रणनीतिक बंदरगाहों पर बढ़त बनाई है, जबकि दूसरी ओर सऊदी समर्थित यमनी बल उनके खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता सिर्फ मरीब तक सीमित नहीं

    बनी हशीश की यह लामबंदी सीधे सऊदी अरब की सुरक्षा चिंता से भी जुड़ती है। मरीब फिलहाल सऊदी समर्थित यमनी सरकारी सेना के नियंत्रण में है और यह इलाका सना से सऊदी सीमा की ओर जाने वाले रणनीतिक क्षेत्र का हिस्सा है।

    यदि हूती मरीब पर कब्जा करने में सफल होते हैं तो सना के पूर्व में उनकी पकड़ मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही तेल-गैस संसाधनों और रणनीतिक मार्गों तक उनकी पहुंच बढ़ने की आशंका है।

    सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होगी कि मरीब में हूतियों की स्थिति मजबूत होने पर उन्हें सऊदी सीमा की दिशा में रणनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए बेहतर भौगोलिक स्थिति मिल सकती है। इससे मिसाइल और ड्रोन हमलों के लिए उनका ऑपरेशनल स्पेस और संसाधन भी बढ़ सकता है।

    यानी बनी हशीश की पहाड़ों से हुई यह लामबंदी सिर्फ एक कबीले के लड़ाकों की आवाजाही नहीं है। इसके पीछे मरीब की सत्ता, यमन के तेल-गैस संसाधन और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों के समीकरण जुड़े हुए हैं।

  • हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    हूतियों की बढ़ती ताकत से सऊदी अरब चिंतित, अमेरिकी मदद की मांग के बीच ट्रंप ने सैन्य हमले से किया इनकार

    नई दिल्ली ।यमन में हूती लड़ाकों की बढ़ती ताकत और रणनीतिक इलाकों की ओर उनके बढ़ते प्रभाव ने सऊदी अरब की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से दो बार फोन पर बातचीत की और हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की मांग की। हालांकि, ट्रंप ने यमन में सीधे अमेरिकी हमले से इनकार कर दिया।

    हूतियों के मोचा शहर पर कब्जे और दक्षिण की ओर उनकी बढ़ती गतिविधियों के बीच सऊदी समर्थित यमनी बलों के पीछे हटने की खबर सामने आई है। इसी स्थिति के बीच सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका से मदद की अपील की। बातचीत के दौरान सऊदी क्राउन प्रिंस ने क्षेत्र में बिगड़ते हालात की जानकारी ट्रंप को दी और इसके बाद दोबारा संपर्क कर हूतियों के खिलाफ अमेरिकी स्ट्राइक की मांग रखी।

    ट्रंप ने यमन में संघर्ष बढ़ने को लेकर चिंता जताई, लेकिन हूती समूह के खिलाफ सीधे हमले के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। अमेरिका ने हालांकि सऊदी अरब को हूतियों से संबंधित खुफिया जानकारी और टारगेटिंग डेटा उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। बताया गया है कि करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी पहले से सऊदी अरब में गैर-गतिशील सहायता प्रदान कर रहे हैं।

    सऊदी अरब की चिंता का एक बड़ा कारण हूतियों का रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों की ओर बढ़ना है। उनकी गतिविधियां बढ़ने से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास स्थिति और महत्वपूर्ण हो गई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अहम माना जाता है और सऊदी अरब के तेल निर्यात से भी इसका सीधा संबंध है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया है।

    मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि ईरान पहले से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री आवाजाही पर दबाव बना रहा है। ऐसे में बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूतियों का प्रभाव बढ़ने से अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों पर दबाव बढ़ने की आशंका सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

    मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर गुरुवार को सऊदी अरब पहुंचे। बताया गया कि उन्होंने क्षेत्र की स्थिति को लेकर तत्काल चर्चा के लिए अहम बैठकें कीं। हालांकि, वाशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास और व्हाइट हाउस की ओर से इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।

    अमेरिका फिलहाल हूतियों के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरने से बचने की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन की प्राथमिकता लाल सागर में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित और खुला रखना है। यमन के व्यापक संघर्ष से निपटने की जिम्मेदारी क्षेत्रीय सहयोगियों पर छोड़ने की नीति पर जोर दिया जा रहा है।

    इसी वजह से सऊदी अरब की सैन्य हस्तक्षेप की मांग के बावजूद अमेरिका फिलहाल सीधे हमले के बजाय खुफिया जानकारी और सैन्य सहयोग तक अपनी भूमिका सीमित रखने की कोशिश कर रहा है।

    यमन में हूतियों ने रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर दूर बताया गया है। मोखा पर पहले सऊदी समर्थित यमनी नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स का नियंत्रण था। दोनों पक्षों के बीच नौ दिनों से लड़ाई चल रही थी। मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की स्थिति और मजबूत हुई है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर सऊदी अरब की चिंता बढ़ गई है।

  • सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    सऊदी पर हूती हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को दी चेतावनी, तेहरान ने कहा- हूतियों पर हमारा नियंत्रण नहीं

    नई दिल्ली । सऊदी अरब पर हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान ने ईरान को बड़ी चेतावनी दी है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने पिछले 24 घंटे के दौरान तेहरान तक यह संदेश पहुंचाया है कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके हूतियों को सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए कहे। ईरान को यह मैसेज तब दिया गया है जब हूतियों ने बीते दिनों सऊदी के तेल ठिकानों पर हमले किए थे।

    पाकिस्तान की इस दखल को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से सऊदी अरब और ईरान, दोनों के साथ अपने रिश्तों को संभालता रहा है। अब इस्लामाबाद को डर है कि हूती हमले अगर और बढ़े तो प्रॉक्सी जंग एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा संकट में बदल सकती है।

    ईरान बोला- हूतियों पर हमारा कंट्रोल नहीं

    एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान ने मंगलवार को तेहरान तक अपना संदेश पहुंचाया था। ईरान की तरफ से जवाब दिया गया कि ईरान हूतियों को कंट्रोल नहीं करता। हालांकि, दो ईरानी सूत्रों ने अलग दावा किया है। उनके मुताबिक, तेहरान ने पिछले हफ्ते हूतियों से सऊदी अरब पर हमले करने को कहा था।

    दावा है कि ईरान ने इसके लिए अतिरिक्त पैसा और हथियार देने का वादा भी किया था। साथ ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कई कमांडर हमलों के तालमेल में मदद के लिए यमन पहुंचे थे।

    सऊदी की रक्षा में पाकिस्तान-तुर्की की तैयारी

    पाकिस्तान की चेतावनी का एक बड़ा कारण सऊदी अरब के साथ उसका डिफेंस पैक्ट भी है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पहले ही कहा है कि अगर हमले सऊदी की जमीन तक फैलते हैं तो रियाद, अंकारा और इस्लामाबाद के बीच ज्वाइंट सिक्योरिटी अरेंजमेंट सामने आ सकता है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि सऊदी अधिकारियों ने रियाद में पाकिस्तान और तुर्की के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है। तीनों देशों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि उनकी सेनाएं यमन में दाखिल नहीं होंगी और किसी भी जवाबी कार्रवाई को सऊदी की जमीन से अंजाम दिया जाएगा।

  • यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार

    यमन में जेल पर एयरस्ट्राइक का दावा, 7 की मौत, हूतियों ने सऊदी अरब को ठहराया जिम्मेदार


    नई दिल्ली। यमन में सोमवार को एक जेल पर कथित हवाई हमले के बाद तनाव बढ़ गया। हूती विद्रोहियों ने इस हमले के लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया है। हूतियों के मुताबिक, उत्तरी यमन के जौफ प्रांत में हुए हमले में कम से कम 7 लोगों की मौत हुई है, इनमें एक बच्चा भी शामिल है। वहीं, 7 अन्य लोग घायल बताए गए हैं, जिनमें एक महिला शामिल है।

    हमला जौफ प्रांत के हज्म शहर स्थित सेंट्रल करेक्टिव फैसिलिटी पर होने का दावा किया गया है। हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इमारत के मलबे में 35 कैदियों और अपने पति से मिलने पहुंची एक महिला के दबे होने की आशंका है।

    हूती मीडिया ने हमले के बाद के दृश्य भी प्रसारित किए हैं। फुटेज में क्षतिग्रस्त इमारत, चारों ओर बिखरा मलबा और राहत एवं बचाव दल के सदस्य तलाशी अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं।

    हूती प्रवक्ता ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

    हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने जौफ में एयरस्ट्राइक कर ‘नरसंहार’ किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा और सऊदी अरब को इसकी कीमत चुकानी होगी।

    सरी ने बाद में यह भी दावा किया कि पिछले 24 घंटे में हूती बलों ने सऊदी अरब के चार टोही ड्रोन मार गिराए हैं। हालांकि, इन आरोपों और दावों पर सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

    कई इलाकों में आगे बढ़ रही सरकारी सेना

    जेल पर हमले के ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के प्रति वफादार बल कई मोर्चों पर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं। इनमें जौफ के अलावा बैदा, दहले और मारिब के इलाके शामिल हैं।

    यमन का गृहयुद्ध 2014 में उस समय शुरू हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को देश छोड़ना पड़ा। वर्ष 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया था।

    जेलों को पहले भी बनाया जा चुका है निशाना

    यमन के संघर्ष में जेल और हिरासत केंद्र पहले भी हवाई हमलों का शिकार हो चुके हैं। 2022 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक हमले में सादा की एक डिटेंशन फैसिलिटी में कम से कम 87 कैदियों की मौत हुई थी।

    इससे पहले 2019 में धमार में हूतियों द्वारा संचालित डिटेंशन फैसिलिटी पर हमले में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

    डेढ़ लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान

    संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक यमन के लंबे समय से जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 1.5 लाख लोगों की जान जा चुकी है। युद्ध की वजह से देश गंभीर मानवीय और खाद्य संकट की ओर भी धकेला गया है।

    वर्ष 2022 से बड़े स्तर पर कायम युद्धविराम अब कमजोर पड़ चुका है और अलग-अलग मोर्चों पर जारी सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा

    Houthi Attack: मारिब पर मिसाइल हमले के बाद यमनी सेना का पलटवार, सात प्रांतों में सैन्य उपकरण नष्ट करने का दावा


    नई दिल्ली । 
    यमन में सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। यमनी सरकारी सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटे के दौरान हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों में 181 सैन्य ऑपरेशन किए। इन कार्रवाइयों में ड्रोन, तोप और रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों के बीच यमन में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    यमनी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल माजिद अल-नुजैली के अनुसार, सैन्य अभियान के दौरान हूती ठिकानों, हथियारों के भंडार, सैन्य वाहनों और उन सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिनका इस्तेमाल हमलों के लिए किया जा रहा था। सेना ने दावा किया कि इन कार्रवाइयों में हूती समूह के कई सदस्य मारे गए या घायल हुए हैं।

    सरकारी सेना के मुताबिक सात प्रांतों में हूती विद्रोहियों के सैन्य उपकरणों को भी नष्ट किया गया। हालांकि, सेना ने कार्रवाई में मारे गए या घायल हुए लोगों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है। ऐसे में अभियान के मानवीय प्रभाव को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    यमनी सेना ने अपनी कार्रवाई को हाल के हूती हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। सेना के अनुसार सरकारी सैनिकों के साथ-साथ नागरिक ढांचे, आर्थिक प्रतिष्ठानों और बंदरगाहों को भी हाल के दिनों में निशाना बनाया गया है। इन हमलों के कारण सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।

    इस बीच हूती विद्रोहियों ने शनिवार शाम तेल संपदा वाले मारिब प्रांत की राजधानी मारिब शहर को निशाना बनाने का दावा किया। सरकार समर्थक मीडिया के अनुसार शहर के रिहायशी इलाकों की दिशा में तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। शुरुआती जानकारी में किसी व्यक्ति के हताहत होने या बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक मिसाइल हमलों के दौरान शहर के अलग-अलग हिस्सों में तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। मारिब लंबे समय से यमन के संघर्ष में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। यहां ऊर्जा संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के कारण सरकारी सेना और हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष का असर विशेष रूप से देखा जाता रहा है।

    यमन के अलावा हूती गतिविधियों का असर पड़ोसी सऊदी अरब तक भी पहुंचा है। हाल के हफ्तों में हूती समूह ने यमन के सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के साथ-साथ सऊदी अरब में मौजूद ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले बढ़ाने का दावा किया है। सऊदी अरब यमनी सरकार का प्रमुख समर्थक है और लंबे समय से इस संघर्ष में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    हूती समूह ने 20 जुलाई को सऊदी जहाजों के लिए समुद्री प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद संगठन की ओर से लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों और सऊदी अरब के भीतर ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के दावे भी सामने आए। इन घटनाओं से क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

    यमन में मौजूदा संघर्ष की जड़ें 2014 में हुए हूती कब्जे से जुड़ी हैं। विद्रोहियों ने उस दौरान उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था, जिसमें राजधानी सना भी शामिल थी। इसके बाद 2015 में यमनी सरकार के समर्थन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सैन्य हस्तक्षेप किया।

    करीब एक दशक से जारी संघर्ष ने यमन को गंभीर मानवीय और आर्थिक संकट में धकेला है। हालिया सैन्य कार्रवाइयों और मिसाइल हमलों के बीच तनाव फिर बढ़ने से नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य की शांति प्रक्रिया को लेकर नई चुनौतियां पैदा होने की आशंका है।

  • यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    यमन और सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा तनाव, 58 सैनिकों की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया

    नई दिल्ली । यमन और सऊदी अरब में हुए ताजा हमलों के बाद मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। गुरुवार को यमन में सेना के ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई। इस हमले में 58 सैनिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल बताए गए हैं। इन हमलों के लिए ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। घटना के बाद यमन में सुरक्षा स्थिति और गंभीर हो गई है।

    यमन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हमले में बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए। अधिकारियों ने कहा है कि इस कार्रवाई का जवाब उचित समय पर दिया जाएगा। सैन्य ठिकानों पर हुए हमले ने यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

    इसी बीच सऊदी अरब के नजरान शहर में भी हमला हुआ। यहां 11 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों में सऊदी अरब के नागरिकों के साथ यमन, मिस्र और पाकिस्तान के नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। घायलों में चार साल का एक बच्चा भी बताया गया है। हमले के बाद कुछ स्थानों पर आग लग गई, जिसके बाद बचाव दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान चलाया।

    यमन और सऊदी अरब में लगभग एक ही समय पर सामने आई इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल से यह आशंका पैदा हुई है कि संघर्ष का दायरा आगे और बढ़ सकता है। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहने की संभावना है।

    मध्य पूर्व में तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है जब महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे प्रमुख समुद्री रास्तों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति जुड़ी हुई है। इन मार्गों पर जहाजों की आवाजाही कम होने की खबरों ने वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की चर्चाओं के बीच क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी नजर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने के संकेत दिए जाने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। समुद्री मार्गों पर किसी नए शुल्क या सुरक्षा संकट की स्थिति में परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

    इसी दौरान लेबनान में हुए एक धमाके में दो इजराइली सैनिकों की मौत की जानकारी भी सामने आई है। अलग-अलग इलाकों में सामने आ रही ऐसी घटनाएं मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना रही हैं। एक मोर्चे पर तनाव कम होने की उम्मीद के बीच दूसरे क्षेत्र में हिंसा बढ़ने से स्थायी शांति की कोशिशों को चुनौती मिल रही है।

    हूती संगठन यमन का एक सशस्त्र विद्रोही संगठन है, जो लंबे समय से यमन की सरकार और सऊदी समर्थित गठबंधन के खिलाफ संघर्ष करता रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार और सैन्य सहायता उपलब्ध कराता है। इसी वजह से हूती गतिविधियों को ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच व्यापक तनाव से जोड़कर देखा जाता है।

    माना जाता है कि क्षेत्र में किसी एक पक्ष पर सैन्य या राजनीतिक दबाव बढ़ने पर दूसरे मोर्चों पर गतिविधियां तेज हो सकती हैं। ताजा हमलों ने इसी आशंका को फिर मजबूत किया है। यमन और सऊदी अरब में हुए हमलों के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती तनाव को और फैलने से रोकना है। आने वाले दिनों में सैन्य जवाब, समुद्री मार्गों की स्थिति और अमेरिका-ईरान बातचीत का असर पूरे मध्य पूर्व के घटनाक्रम पर पड़ सकता है।

  • यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    नई दिल्ली । यमन में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। राजधानी सना में ईरान के एक नागरिक विमान के उतरने के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से जारी चेतावनियों ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

    जानकारी के अनुसार, हूती नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ईरानी विमान के उतरने के दौरान तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। हूती पक्ष का दावा है कि विमान को रोकने की कोशिश के जवाब में उन्होंने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय किया। वहीं दूसरी ओर सऊदी समर्थित गठबंधन इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन की स्थिति के लिए गंभीर मान रहा है।

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता या यमन की संप्रभुता को चुनौती देने की कोई भी कोशिश की गई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। गठबंधन का कहना है कि हाल के घटनाक्रम केवल सैन्य चुनौती नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं।

    उधर हूती विद्रोहियों ने भी अपने हालिया बयानों में सऊदी अरब के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हस्तक्षेप जारी रहा तो वे जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने भी पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। सरकार की ओर से आयोजित आपात बैठक में ईरानी विमान की लैंडिंग पर आपत्ति जताते हुए इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में तनाव कम करने तथा हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव हो सकते हैं। सऊदी अरब और ईरान लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में यमन में बढ़ता तनाव दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील समीकरणों को और जटिल बना सकता है।

    यमन वर्ष 2015 से लगातार संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और देश गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन समय-समय पर संघर्ष विराम और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है।

    ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि यदि सभी पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यमन में सैन्य टकराव का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन, हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आगामी रणनीति पर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी बड़े कदम का असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।

  • दुनिया का आखिरी तेल रूट बंद होने वाला है? हूतियों की चाल से बढ़ी ग्लोबल टेंशन

    दुनिया का आखिरी तेल रूट बंद होने वाला है? हूतियों की चाल से बढ़ी ग्लोबल टेंशन

    वाशिंगटन। हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह स्ट्रेट 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है।
    अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध के महज एक महीने के बाद ही यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैलता जा रहा है और अब एक नया खतरनाक रूप ले चुका है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर तीसरी बार मिसाइल हमला किया है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ मिलकर कतर एनर्जी के एक तेल टैंकर पर हमला बोल दिया। इस कार्रवाई के जरिए हूती समूह ने साफ संदेश दिया है कि यह युद्ध अब सीमित नहीं रहने वाला है, और आने वाले समय में इसका असर व्यापक होने वाला है।

    बता दें कि हूती को औपचारिक रूप से अंसार अल्लाह (ईश्वर के समर्थक) कहा जाता है, शिया इस्लाम की जैदी शाखा से जुड़े हैं। अरब स्प्रिंग के बाद से उन्होंने यमन की राजधानी सना और लाल सागर के अधिकांश तटीय इलाकों पर नियंत्रण बनाए रखा है। वे पहले भी दो बड़े अमेरिकी बमबारी अभियानों से बच निकले थे। पहला 2024 में बाइडेन प्रशासन के दौरान और दूसरा मार्च से मई 2025 के बीच डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में। ट्रंप ने अंत में उनके साथ समझौता किया था और अपनी खास स्पष्ट भाषा में कहा था कि आप कह सकते हैं कि उनमें बहुत साहस है।
    युद्धकला में निपुण माने जाते हैं हूती

    कहा जाता है कि ये लड़ाके युद्धकला में निपुण माने जाते हैं। उनके पास ड्रोन, जहाज-रोधी मिसाइलें हैं और उन्होंने पहले भी वैश्विक जहाजरानी को बाधित करने का रिकॉर्ड बनाया है। 2023 के अंत से 2025 की शुरुआत तक हूतियों ने गाजा में फिलिस्तीनियों के समर्थन में लाल सागर में 100 से अधिक व्यापारिक जहाजों पर हमले किए थे। वे ईरान के ‘प्रतिरोध अक्ष’ (Axis of Resistance) का हिस्सा हैं। एक ऐसा नेटवर्क जिसमें तेहरान हथियार, धन और समन्वय उपलब्ध कराता है। जब ईरान युद्ध में कूदता है, तो यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। पिछले शनिवार को ठीक कुछ ऐसा ही हुआ। हूतियों ने अपने मिसाइल हमले को ईरान और हिज्बुल्लाह के साथ संयुक्त सैन्य अभियान बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लेबनान, ईरान, इराक, वेस्ट बैंक और गाजा पर हमले जारी रहे तो और भी ज्यादा हिंसा होगी।

    बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रखते हैं मजबूत पकड़

    भौगोलिक रूप से हूती यमन के पश्चिमी तट और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के आसपास के पहाड़ी इलाकों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यह जलडमरूमध्य 26 से 32 किलोमीटर चौड़ा है, जो लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है। यहां से एशिया और यूरोप के बीच तेल, गैस, खाद्य पदार्थ, मशीनरी और कंटेनर माल समेत वैश्विक समुद्री व्यापार का 10 से 12 प्रतिशत गुजरता है। ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की स्थिति में सऊदी अरब ने पहले ही अपने कच्चे तेल को भूमिगत पाइपलाइनों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाना शुरू कर दिया था। मार्च में बाब अल-मंडेब रूट पर यातायात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई थी। अब हूती इस रास्ते को भी खतरे में डाल रहे हैं।

    रायस्टैड एनर्जी के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि युद्ध शुरू होने के बाद से ही 50 प्रतिशत बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका ब्रेंट क्रूड, अगर बाब अल-मंडेब बंद हुआ तो 150 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर जा सकता है। वहीं एक हूती उपमंत्री ने सीएनएन से कहा कि जलडमरूमध्य को बंद करना ‘एक व्यवहार्य विकल्प’ है। एक ईरानी अधिकारी ने भी अल जजीरा को यही संकेत दिया। पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने कहा कि हूतियों को सिर्फ कुछ जहाजों पर गोली चलानी होगी और लाल सागर का पूरा वाणिज्यिक यातायात ठप हो जाएगा।
    60 फीसदी तेल मिडिल ईस्ट से आता है

    अगर ऐसा होता है तो एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला क्षेत्र है, क्योंकि यहां अपना 60 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व से आता है। फिलीपींस ने पहले ही ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। दक्षिण कोरिया ने नागरिकों से पानी का कम इस्तेमाल करने की अपील की है। भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों पर संघीय उत्पाद शुल्क में भारी कटौती कर दी है। इसके बावजूद आर्थिक संकट तेजी से फैल रहा है।

    इस बीच अमेरिका ईरान के 90 प्रतिशत तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर जमीनी हमले की योजना बना रहा है।

    अब तक उसने 850 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें दाग दी हैं, सऊदी अरब में अपना एक महत्वपूर्ण रडार विमान खो चुका है और उसके सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है। उसके कई सहयोगी देश खुले तौर पर इस युद्ध से दूरी बना रहे हैं। फ्रांस ने इसे अवैध करार देते हुए निंदा की है। ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन देने से इनकार कर दिया। स्पेन ने अमेरिकी हमलों के लिए अपने बंदरगाह और सैन्य अड्डे बंद कर दिए हैं। जर्मनी ने कहा कि इस बारे में उससे कभी परामर्श नहीं किया गया।

    ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बढ़ते जा रहा है। शायद यही कारण है कि ट्रंप जल्द से जल्द से इस जंग को खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि हम बहुत जल्द निकल जाएंगे… दो हफ्तों में, शायद तीन हफ्तों में।”जब उनसे पूछा गया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त करने के लिए क्या कोई कूटनीतिक समझौता जरूरी है, तो उन्होंने साफ कहा कि नहीं, ईरान को मेरे साथ कोई समझौता करने की जरूरत नहीं है।