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  • बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    बारिश में जूतों से आने वाली बदबू से हैं परेशान? घर की 4 आसान चीजें मिनटों में दूर करें नमी, बैक्टीरिया और दुर्गंध की समस्या

    नई दिल्ली । मानसून का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई छोटी-बड़ी परेशानियां भी लेकर आता है। इनमें जूतों से आने वाली बदबू एक आम समस्या है, जिससे कई लोग रोजमर्रा की जिंदगी में असहज महसूस करते हैं। ऑफिस, स्कूल, कॉलेज या किसी सामाजिक कार्यक्रम में जूते उतारते समय अगर उनमें से तेज दुर्गंध आने लगे तो यह शर्मिंदगी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मुख्य वजह बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और बैक्टीरिया का तेजी से पनपना है।

    बारिश के दिनों में पैर अक्सर पसीने या पानी के संपर्क में रहते हैं। जब नमी लंबे समय तक जूतों के अंदर बनी रहती है तो बैक्टीरिया और फंगस विकसित होने लगते हैं। यही सूक्ष्म जीव दुर्गंध पैदा करते हैं। यदि समय रहते जूतों की सफाई और देखभाल न की जाए तो समस्या और बढ़ सकती है।

    इस परेशानी से राहत पाने के लिए महंगे उत्पादों की जरूरत नहीं होती। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से उपयोग कर जूतों की बदबू को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे प्रभावी उपायों में बेकिंग सोडा शामिल है। रात में सोने से पहले जूतों के अंदर थोड़ा-सा बेकिंग सोडा छिड़कने से यह अतिरिक्त नमी और दुर्गंध को सोख लेता है। सुबह जूतों को अच्छी तरह झाड़कर साफ कर दें। इससे जूते अधिक ताजगी भरे महसूस होते हैं।

    सूखी चाय की पत्ती या इस्तेमाल किए गए और अच्छी तरह सुखाए गए टी-बैग भी इस समस्या में उपयोगी साबित हो सकते हैं। इन्हें कुछ घंटों के लिए जूतों के अंदर रखने से नमी कम होती है और दुर्गंध पैदा करने वाले बैक्टीरिया की सक्रियता घटती है। यह तरीका विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो रोजाना लंबे समय तक जूते पहनते हैं।

    अगर बारिश में जूते भीग गए हों तो उन्हें तुरंत सुखाना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुराने अखबार का इस्तेमाल किया जा सकता है। अखबार को मोड़कर जूतों के अंदर भर देने से वह तेजी से नमी सोख लेता है। यदि अखबार पूरी तरह गीला हो जाए तो उसे बदलकर दूसरा सूखा अखबार रख दें। इससे जूतों के अंदर नमी जमा नहीं होती और बैक्टीरिया के पनपने की संभावना कम हो जाती है।

    इसके अलावा, जब भी मौसम साफ हो और धूप निकले, जूतों को कुछ समय के लिए खुली हवा और धूप में जरूर रखें। सूर्य की किरणें प्राकृतिक रूप से नमी कम करने के साथ बैक्टीरिया और फंगस की वृद्धि को भी रोकने में मदद करती हैं। नियमित रूप से जूतों को हवा लगने देने से उनमें ताजगी बनी रहती है और दुर्गंध की समस्या दोबारा होने की संभावना कम होती है।

    मानसून के दौरान जूतों की साफ-सफाई और सही देखभाल पर थोड़ा-सा ध्यान देकर बदबू की समस्या से आसानी से बचा जा सकता है। घरेलू उपाय न केवल किफायती हैं, बल्कि नियमित उपयोग से जूतों की स्वच्छता बनाए रखने और पैरों को संक्रमण से सुरक्षित रखने में भी मददगार साबित होते हैं।

  • बच्चों में दस्त बन सकता है गंभीर खतरा, समय पर इलाज और देखभाल से बचाई जा सकती है जान

    बच्चों में दस्त बन सकता है गंभीर खतरा, समय पर इलाज और देखभाल से बचाई जा सकती है जान


    नई दिल्ली। बच्चों में होने वाली सबसे आम लेकिन बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है दस्त, जिसे चिकित्सा भाषा में Diarrhea कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या जितनी सामान्य लगती है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है, यदि समय पर ध्यान न दिया जाए। विशेषकर छोटे बच्चों में दस्त के कारण शरीर में पानी और आवश्यक पोषक तत्वों की तेजी से कमी हो जाती है, जिससे निर्जलीकरण (Dehydration), कमजोरी और कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नेशनल हेल्थ मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार National Health Mission लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि बच्चों में दस्त को हल्के में लेना गंभीर भूल साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत उपचार ही बच्चे की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि दस्त से बचाव के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है शिशु को शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध देना। स्तनपान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और कई संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह प्राकृतिक रूप से बच्चे के शरीर को मजबूत आधार देता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है स्वच्छता का पालन। गंदगी और अस्वच्छ वातावरण दस्त फैलाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए बच्चों के आसपास साफ-सफाई रखना, हाथों को नियमित धोना और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करना बेहद जरूरी माना गया है। इसके साथ ही रोटावायरस और खसरा जैसी बीमारियों के खिलाफ समय पर टीकाकरण भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

    तीसरा और सबसे जरूरी कदम है—यदि बच्चे को दस्त हो जाए तो तुरंत उपचार शुरू करना। डॉक्टरों के अनुसार हर बार दस्त होने पर बच्चे को Oral Rehydration Solution (ओआरएस) देना चाहिए ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी पूरी हो सके। इसके साथ ही चिकित्सक की सलाह पर जिंक की गोली 14 दिनों तक देना भी लाभकारी माना जाता है, जो दस्त की अवधि और गंभीरता को कम करने में मदद करता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि माता-पिता समय पर इन उपायों को अपनाएं तो बच्चों को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है। दस्त के दौरान सबसे बड़ी चुनौती शरीर में तेजी से होने वाला पानी का नुकसान होता है, जिसे समय रहते रोका जाए तो स्थिति सामान्य की जा सकती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बच्चों को हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक आहार दिया जाए तथा किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। दस्त के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

    कुल मिलाकर, जागरूकता, स्वच्छता और सही उपचार ही बच्चों को इस खतरनाक लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी से सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी है।

  • नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नोएडा में पिज्जा शॉप पर बड़ा बवाल: थूककर खाना बनाने का आरोप, मालिक गिरफ्तार; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। नोएडा के सेक्टर-22 स्थित चौड़ा गांव में एक पिज्जा शॉप को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दुकान पर काम करने वाले शख्स मुजम्मिल पर पिज्जा तैयार करने के दौरान कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में गुस्सा भड़क गया और लोगों ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया।

    जानकारी के मुताबिक, वायरल वीडियो में मुजम्मिल नाम का व्यक्ति पिज्जा तैयार करते समय संदिग्ध हरकत करता दिखाई दे रहा है। हालांकि आरोपी का दावा है कि वह आटे से धूल हटाने के लिए फूंक मार रहा था, लेकिन वीडियो के आधार पर स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की।

    मामला बढ़ने पर पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है और वे खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता नियमों के सख्त पालन की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और अगर कोई दोषी पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।