Tag: illegal occupation

  • बैतूल प्रशासन का बड़ा एक्शन, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हटेगा अवैध अतिक्रमण

    बैतूल प्रशासन का बड़ा एक्शन, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हटेगा अवैध अतिक्रमण

    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बढ़ते अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है। यह अभियान केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गांव-गांव तक अवैध कब्जों के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम आमजन को हो रही परेशानियों को देखते हुए उठाया गया है।

    इस संबंध में एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए राजस्व विभाग, नगर पालिका, जनपद पंचायत और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों का गठन किया है। इन टीमों को अपने-अपने क्षेत्रों में अतिक्रमण की पहचान कर उसे हटाने की जिम्मेदारी दी गई है।

    अधिकारियों के अनुसार जिले में बाजारों, बस्तियों और ग्रामीण सड़कों पर तेजी से अतिक्रमण बढ़ा है, जिससे आवागमन बाधित हो रहा है। कई जगहों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि एंबुलेंस, पुलिस वाहन और दमकल जैसी आपात सेवाओं को भी पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

    प्रशासन का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में यह और गंभीर रूप ले सकती है। इसी को देखते हुए अब नियमित अभियान चलाकर अवैध कब्जों को हटाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

    एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने कहा कि अतिक्रमण केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है बल्कि यह आम नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मामला है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई करें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।

    इस अभियान के तहत पहले चरण में प्रमुख बाजार क्षेत्रों और मुख्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों में भी अभियान को विस्तार दिया जाएगा। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे स्वयं आगे आकर अवैध कब्जे हटाएं और सरकारी जमीन या सार्वजनिक मार्गों पर अतिक्रमण न करें।

    इस सख्त कार्रवाई से जहां एक ओर आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से अतिक्रमण कर बैठे लोगों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि जिले में व्यवस्था और आवागमन को सुचारु बनाया जा सके।

  • भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे

    भोजशाला मामले में HC ने की सुनवाई… हिन्दु पक्ष का दावा- 1935 के बाद हुए अवैध कब्जे


    इंदौर।
    धार (Dhar) स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala Complex) परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष (Hindu side) के वकील विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) ने इसे 10वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए दावा किया कि 1935 के बाद यहां अवैध गतिविधियां शुरू हुईं। उन्होंने एएसआई सर्वे और स्तंभों की मूर्तिकला को साक्ष्य के रूप में पेश किया। अदालत ने कहा है कि वह मामले की नियमित सुनवाई करेगी। सभी पक्षों को विस्तार से सुना जाएगा। मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    हिंदू पक्ष ने 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक धरोहर बताया

    हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अपना पक्ष रखते हुए भोजशाला को 10वीं से 11वीं शताब्दी की ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर बताया। इसके पक्ष में उनकी ओर से कई तर्क पेश किए गए। विष्णु शंकर जैन ने 1935 में लगाए गए एक अहम बोर्ड का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय परिसर के ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया था।


    1935 के बाद से हुई विवादित गतिविधियों की शुरुआत

    विष्णु शंकर जैन ने दावा किया कि सन 1935 के बाद से इस परिसर पर अवैध कब्जों और विवादित गतिविधियों की शुरुआत हुई। इन विवादित गतिविधियों ने विवाद को जन्म दिया। समूचा विवाद 1935 के बाद के बाद का है। विष्णु शंकर जैन ने एएसआई की सर्वे रिपोर्टों को भी अदालत के सामने रखा। इसके साथ ही उन्होंने स्तंभों पर उकेरी गई मूर्तिकला और ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए।


    अदालत की दो-टूक, सभी पक्षों को देंगे पूरा मौका

    हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। अत: इसमें सभी पक्षों को सुना जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होगा और हर पक्ष को अपनी दलीलें रखने का पूरा मौका दिया जाएगा। मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।


    1935 से पहले भी होती थी पूजा

    महाराजा भोज सेवा संस्थान की ओर से हाईकोर्ट वकील श्रीष दुबे ने बताया कि सोमवार से इंदौर बेंच में फाइनल सुनवाई की शुरुआत हुई है। विष्णु शंकर जैन की ओर से दोपहर ढाई बजे से साढ़े जार बजे तक बहस चली है। यह बहस कल फिर ढाई बजे से शुरू होगी। विष्णु शंकर जैन की बहस अभी बाकी है यह कल भी चलेगी। विष्णु शंकर जैन की ओर से पिटिशन के पक्ष में दलीलें रखी गईं। हिंदू पक्ष की ओर से बताया गया है कि यहां 1935 से पहले भी पूजा होती थी।

  • भोपाल में निगम की सख्ती: कल्पना नगर कम्यूनिटी हॉल से हटाया अवैध कब्जा, मदरसा संचालिका के खिलाफ कार्रवाई

    भोपाल में निगम की सख्ती: कल्पना नगर कम्यूनिटी हॉल से हटाया अवैध कब्जा, मदरसा संचालिका के खिलाफ कार्रवाई



    नई दिल्ली। भोपाल नगर निगम ने कल्पना नगर स्थित कम्यूनिटी हॉल को लंबे समय से चल रहे अवैध कब्जे से मुक्त कराया है। निगम को कॉलोनीवासियों द्वारा सूचना मिली थी कि इस भवन में अवैध रूप से मदरसा संचालित किया जा रहा है। शिकायत के बाद नगर निगम के जोन 15 के अमले और अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए वार्ड 64 में स्थित कम्यूनिटी हॉल को खाली कराया।

    निगम अधिकारियों के अनुसार, कम्यूनिटी हॉल में मदरसा संचालित होने की जानकारी मिलने पर जोनल अधिकारी ठाकुर सिंह ने संचालिका रूशदा सुल्तान को पहले नोटिस जारी किया था। नोटिस के बावजूद मदरसा संचालिका ने भवन खाली नहीं किया, जिसके बाद बुधवार को निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाया और कम्यूनिटी हॉल को कब्जे से मुक्त करवा दिया।

    नगर निगम की इस कार्रवाई से कॉलोनीवासियों ने राहत की सांस ली है। अधिकारियों का कहना है कि निगम ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं देगा और शहर में किसी भी सरकारी या सार्वजनिक भवन पर अवैध कब्जे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    निगम की यह कार्रवाई न केवल अवैध कब्जों को समाप्त करने के लिए बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और कानूनी नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भविष्य में भी निगम ऐसे मामलों पर सतर्कता बनाए रखेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।

    इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि भोपाल नगर निगम शहर में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।

  • भोपाल में निगम की सख्त कार्रवाई: कल्पना नगर कम्यूनिटी हॉल से हटाया अवैध कब्जा, मदरसा संचालन की शिकायत पर भवन कराया खाली

    भोपाल में निगम की सख्त कार्रवाई: कल्पना नगर कम्यूनिटी हॉल से हटाया अवैध कब्जा, मदरसा संचालन की शिकायत पर भवन कराया खाली


    भोपाल। भोपाल नगर निगम ने शहर में अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए कल्पना नगर स्थित एक कम्यूनिटी हॉल को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है। यह कार्रवाई कॉलोनीवासियों की शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सामुदायिक उपयोग के लिए बने इस भवन पर कब्जा कर वहां मदरसे का संचालन किया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार यह मामला वार्ड क्रमांक 64 के कल्पना नगर इलाके का है, जहां लंबे समय से कम्यूनिटी हॉल में निजी गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय निवासियों ने नगर निगम को लिखित शिकायत देकर बताया था कि जिस भवन का उपयोग क्षेत्र के सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों के लिए होना चाहिए, वहां अवैध रूप से मदरसा चलाया जा रहा है, जिससे कॉलोनीवासियों को असुविधा हो रही है।

    शिकायत मिलने के बाद नगर निगम के जोन क्रमांक 15 के अधिकारियों ने मामले की जांच कराई। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संबंधित संचालिका को भवन खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया था। जोनल अधिकारी ठाकुर सिंह की ओर से संचालिका रूशदा सुल्तान को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कम्यूनिटी हॉल से तत्काल सामान हटाकर भवन खाली कर दिया जाए।

    हालांकि तय समय सीमा बीतने के बाद भी जब भवन खाली नहीं किया गया तो निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। बुधवार को अतिक्रमण निरोधक दस्ते और जोन क्रमांक 15 के अमले ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। टीम ने कम्यूनिटी हॉल में रखा सामान हटवाया और भवन को पूरी तरह खाली कराकर नगर निगम के कब्जे में ले लिया।

    कार्रवाई के दौरान निगम अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी भी सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामुदायिक भवनों का उपयोग केवल सार्वजनिक और सामाजिक कार्यों के लिए ही किया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन भवनों का निजी उपयोग करती पाई जाती है तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जों की लगातार निगरानी की जा रही है और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। निगम ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे अन्य मामलों की भी जांच कर सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि सामुदायिक भवनों का उपयोग उनके वास्तविक उद्देश्य के अनुसार ही हो सके।

  • ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री और AAP नेता आमने-सामने: भू-माफिया संरक्षण के आरोप पर बंगले के बाहर गरमाया माहौल

    ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री और AAP नेता आमने-सामने: भू-माफिया संरक्षण के आरोप पर बंगले के बाहर गरमाया माहौल


    ग्वालियर। ग्वालियर में गुरुवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता रोहित गुप्ता के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला मंत्री के रेस कोर्स रोड स्थित बंगले के बाहर उस समय गरमा गया जब AAP नेता ने मंत्री पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप लगाया। दोनों के बीच हुई बहस का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार AAP नेता रोहित गुप्ता एडवोकेट गुरुवार दोपहर ओबीसी महासभा के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार के साथ ऊर्जा मंत्री के बंगले पर पहुंचे थे। उनका आरोप था कि गांधीनगर क्षेत्र में मंत्री के करीबी गुड्डू उर्फ गौरव बाजपेयी ने पानी की टंकी के पास स्थित विजय कुमार के फ्लैट पर अवैध कब्जा कर रखा है। पीड़ित का कहना है कि इस मामले में कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

    बताया गया कि जब रोहित गुप्ता ने मंत्री से इस मुद्दे पर सवाल उठाए तो दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। इस दौरान मंत्री कथित तौर पर नाराज हो गए और कहा, “तुम्हारी औकात क्या है, बकवास मत करो। मुझे शिकायत करने क्यों आए हो, मैं कोई कार्रवाई नहीं करवाऊंगा।” घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी बातचीत का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

    पीड़ित विजय कुमार का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर पुलिस थाना, कलेक्टर, आईजी और डीआईजी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी। इसके अलावा उन्होंने ऊर्जा मंत्री को भी कई बार आवेदन देकर मदद की मांग की, लेकिन अब तक फ्लैट खाली नहीं कराया गया। उनका आरोप है कि आरोपी मंत्री के नाम का डर दिखाकर उन्हें लगातार धमका रहा है।

    घटना के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर पीड़ित से माफी नहीं मांगते और फ्लैट को कब्जे से मुक्त नहीं कराया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

    इस पूरे घटनाक्रम ने ग्वालियर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद मामले को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो सकती है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • MP में लंबे समय से रह रहे लोगों की लीज का नवीनीकरण संभव, नियमों में होगा संशोधन

    MP में लंबे समय से रह रहे लोगों की लीज का नवीनीकरण संभव, नियमों में होगा संशोधन


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि वर्षों से किसी भूमि पर रह रहे या व्यापार कर रहे लोगों के लिए भूमि लीज के नवीनीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नियमों में संशोधन किया जाएगा। भोपाल में विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि समय-समय पर व्यापारिक और आवासीय परियोजनाओं के लिए दी गई लीज में परिवार बढ़ने और भूमि विभाजन के कारण नवीनीकरण में समस्या आती है।

    मंत्री ने कहा कि लंबे समय से लोग किसी भूमि पर रह रहे हैं या कारोबार कर रहे हैं, ऐसे में भूमि हटाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए नियम में संशोधन करके ऐसा रास्ता निकाला जाएगा कि संबंधित निकाय की आय बढ़े और लीज का नवीनीकरण भी संभव हो। यह घोषणा उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस के डॉ. हिरालाल अलावा और भाजपा के अभिलाष पांडेय के प्रश्नों के जवाब में की।

    डॉ. हिरालाल अलावा ने मनावर नगर पालिका परिषद की भूमि के अवैध हस्तांतरण का मामला उठाया। जांच में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ और अन्य कर्मचारी दोषी पाए गए थे, लेकिन चार वर्ष में भी अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
    इस बदलाव से न केवल भूमि संबंधी विवादों का समाधान होगा, बल्कि लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया भी सरल और पारदर्शी बनेगी।

  • मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस

    मप्र में अब सरकारी बंगलों में नहीं चलेगा कब्जा: कई को बंगला खाली करने का नोटिस


    भोपाल। मध्यप्रदेश में कई पूर्व मंत्री और अधिकारी सरकारी आवास खाली करने को तैयार नहीं हैं। इसे देखते हुए संपदा संचालनालय ने अब सख्ती शुरू कर दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वे अपनी ही पार्टी के बड़े नेता क्यों न हों। बिना पात्रता के सरकारी बंगलों का आनंद ले रहे पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अधिकारियों को अब ‘बेदखली’ का डर सताने लगा है।
    अब सरकार ने पात्रता खत्म होने के बावजूद सरकारी बंगलों में जमे पूर्व मंत्रियों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक बंगला खाली करने का आखिरी अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 4 आईएएस और कई पूर्व मंत्रियों को भी नोटिस जारी कर भारी जुर्माने की चेतावनी दी गई है।

    सरकारी बंगलों से कब्जा हटाने के लिए एक्शन
    राजधानी भोपाल के पॉश इलाकों में स्थित सरकारी बंगलों पर अवैध रूप से काबिज रसूखदारों के खिलाफ मोहन सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में हारने वाले पूर्व मंत्रियों और कार्यकाल पूरा कर चुके पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी आवास नहीं छोड़े हैं। अब सरकार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर बंगले खाली नहीं हुए, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सामान बाहर कर दिया जाएगा।

    प्रभात झा के परिवार को 13 जनवरी तक का अल्टीमेटम
    बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 74 बंगले स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का समय दिया गया है।

    नोटिस में साफ कहा गया है कि इस तारीख के बाद प्रशासन ‘बल प्रयोग’ करेगा। हालांकि, उनके बेटे तुशमुल झा का कहना है कि वे खुद ही बंगला खाली करने की प्रक्रिया में हैं और यह एक सहज प्रक्रिया है।

    पूर्व मंत्री रामपाल सिंह को नोटिस
    इधर, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह 2023 में चुनाव हार गए थे, लेकिन 2 साल बाद भी उन्होंने लिंक रोड-1 स्थित अपना सरकारी बंगला (C-15) खाली नहीं किया है। इस मामले में उनका कहना है कि उन्होंने सरकार से थोड़ा समय और मांगा है।

    पद नहीं फिर भी सरकारी आवास पर डेरा
    मध्यप्रदेश में नेताओं की कुर्सी तो चली गई, लेकिन नेता सरकारी बंगलों का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया जैसे दिग्गज नेता 2023 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं, लेकिन करीब दो साल बीत जाने के बाद भी इन्होंने सरकारी बंगलों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है। यही हाल पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया का है, जो वर्तमान में विधायक भी नहीं हैं, फिर भी मंत्री रहते आवंटित हुए आवास में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की स्थिति भी अलग नहीं है; संसद की सदस्यता खत्म होने के बाद भी उन्होंने सरकारी बंगला खाली नहीं किया है।

    सरकार सख्त, कब्जेदारों को नोटिस
    संपदा संचालनालय के मुताबिक, कार्रवाई की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को ही नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं रामपाल सिंह को भी पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है।

    मोहन सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि पात्रता खत्म होने के बाद सरकारी आवास पर किसी भी तरह का ‘अवैध कब्जा’ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम स्पष्ट हैं—पद गया, तो बंगला भी छोड़ना होगा।

    30 गुना तक किराया वसूलने को मंजूरी
    विधि विभाग ने सख्त नियम लागू करते हुए भारी-भरकम किराए की वसूली को मंजूरी दे दी है। नियमों के मुताबिक, पात्रता खत्म होने के शुरुआती तीन महीनों तक तो सामान्य किराया लगेगा, लेकिन इसके बाद भी बंगला खाली नहीं हुआ तो अगले तीन महीनों के लिए 10 गुना किराया वसूला जाएगा। जब छह महीने बाद भी कब्जा बरकरार रहा, ऐसी स्थिति में रसूखदारों को 30 गुना ज्यादा हर्जाना भरना होगा। सरकार के मकसद साफ है—या तो समय से बंगला खाली कर दें, वरना लाखों के जुर्माने के लिए तैयार रहें।

    IAS अफसरों पर भी गिरी गाज
    प्रशासन ने सुधीर कोचर, अदिति गर्ग, रत्नाकर झा और निधि सिंह समेत 4 आईएएस और 3 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बेदखली का नोटिस थमाया है।

    विधायक रह रहे मंत्रियों वाले बंगलों में
    सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव और मीना सिंह जैसे विधायक पात्रता से ऊपर की श्रेणी (B और C टाइप) के बंगलों में रह रहे हैं।

  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भू-माफिया के बढ़ते प्रभाव और जमीन सुरक्षा पर अहम टिप्पणी

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भू-माफिया के बढ़ते प्रभाव और जमीन सुरक्षा पर अहम टिप्पणी

    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भू-माफिया और जमीन की सुरक्षा के मामले में अहम टिप्पणी की हैजिससे यह स्पष्ट होता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में भू-माफिया का प्रभाव बढ़ रहा है और अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखना अब एक गंभीर चुनौती बन गया है। जबलपुर में न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और ऐसे में किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखना बहुत कठिन हो गया है।

    आजकल देश के विभिन्न हिस्सों में भू-माफिया सक्रिय हैंजो अवैध तरीके से जमीनों पर कब्ज़ा करनेबिक्री करने या फिर उन पर धोखाधड़ी करने का काम करते हैं। यह स्थिति उन लोगों के लिए और भी जटिल हो जाती है जो अपनी संपत्ति से दूर रहते हैंया जिनके पास नियमित रूप से अपनी जमीन की देखरेख करने का समय या साधन नहीं होता। यह मुद्दा केवल व्यक्तिगत अधिकारों से जुड़ा नहीं हैबल्कि देश की भूमि व्यवस्था और कानूनी सुरक्षा के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक विशेष मामले में यह कहा कि अपीलकर्ता एक मां जो अपनी नाबालिग बेटी के नाम पर जमीन बेचना चाहती थीवह अपनी संपत्ति से दूर रहने के कारण उस जमीन की देखभाल नहीं कर सकती थी। कोर्ट ने अपीलकर्ता को जमीन बेचने की अनुमति देते हुए यह शर्त रखी कि बिक्री से प्राप्त राशि का 50 प्रतिशत नाबालिग बेटी के नाम एक राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडी फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा किया जाएगा। यह राशि तब तक नहीं निकाली जा सकेगी जब तक नाबालिग का वयस्क होने की उम्र नहीं हो जाती। कोर्ट ने यह कदम इसलिए उठाया ताकि नाबालिग की संपत्ति सुरक्षित रहे और उसका भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

    इस फैसले से एक महत्वपूर्ण संदेश मिलता है कि कोर्ट सिर्फ कानूनी अधिकारों की रक्षा नहीं करताबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति के प्रति भी संवेदनशील है। यह फैसला इस दिशा में एक सकारात्मक कदम हैजो यह सुनिश्चित करता है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा की जाएसाथ ही उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा भी बनी रहे।

    इसके अलावाकोर्ट ने यह भी माना कि अपीलकर्ता अपनी जमीन से सैकड़ों मील दूर रहती है और उसके लिए जमीन की देखभाल करना नियमित रूप से संभव नहीं है। यह स्थिति उन लोगों के लिए सामान्य है जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने मूल स्थान से दूर रहते हैंलेकिन ऐसे मामलों में उनके लिए अपनी संपत्ति की सुरक्षा और देखरेख करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। ऐसे में कोर्ट ने जमीन बेचने की अनुमति दीलेकिन साथ ही नाबालिग की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कदम उठाए।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह निर्णय भू-माफिया की बढ़ती सक्रियता और जमीनों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण है। यह बताता है कि कैसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से न केवल व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा की जा सकती हैबल्कि बच्चों और नाबालिगों की संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।

    अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसे फैसले पूरे देश में भू-माफिया के खिलाफ एक प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं? क्या इस तरह के फैसलों से भू-माफिया की गतिविधियों पर रोक लगाना संभव होगाया फिर इसे और जटिल बनाने के बजाय इसे और अधिक बढ़ावा मिलेगा? फिलहालकोर्ट के फैसले से यह साफ है कि भू-माफिया के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और जागरूकता आवश्यक है ताकि नागरिकों की संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।

    इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जमीनों की बढ़ती कीमतें और अवैध कब्ज़े की बढ़ती घटनाओं के कारण आम आदमी के लिए अपनी संपत्ति की रक्षा करना और भी मुश्किल हो गया है। सरकार और न्यायपालिका को इस दिशा में और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को उनके अधिकारों की रक्षा मिल सके और भू-माफिया पर नियंत्रण पाया जा सके।