Tag: impact

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर….कच्चे तेल ने बिगाड़ा खेल, गेहूं-प्याज की कीमतों में भारी उछाल


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East tensions) के बाद तेल कंपनियों ने मई में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे. जून के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में जब कमी आई तो फ्यूल प्राइस कम होने का भरोसा बढ़ गया था. लेकिन खाड़ी में तनाव फिर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद टूटने लगी है. दरअसल, इस वक्त दुनियाभर में चल रहे तनाव का असर भारत के ईंधन और खाने-पीने के सामानों पर सबसे ज्यादा नजर आ रहा है.


    कच्चा तेल में फिर तेजी
    अमेरिका-ईरान के बीच नए समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ने से कच्चे तेल में तेजी आ रही है. इससे ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब और WTI क्रूड करीब 85 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. आशंका है कि क्रूड जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच सकता है. तेल की कीमतों में ये तेजी ऐसे समय आई है, जब भारत में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद लगाई जा रही थी. लेकिन हालात फिलहाल राहत वाले नहीं दिख रहे क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी दूरी ने एनर्जी मार्केट की बेचैनी बढ़ा दी है।


    भारत पर ज्यादा असर

    भारत के लिए हालात ज्यादा गंभीर हैं, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है. लंबे समय तक ऊंचे दाम रहने पर ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    तेल के साथ-साथ खाने की थाली से जुड़ी एक और चिंता भी सिर उठाने लगी है. गेहूं की कीमतों में तेजी ने आटा और ब्रेड जैसे जरूरी सामान को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव ने काला सागर क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मंडियों तक दिखाई देने लगा है. वैश्विक बाजार में गेहूं करीब 6.7 डॉलर प्रति बुशेल के स्तर पर पहुंच गया है. देश की प्रमुख मंडियों में एक महीने में गेहूं के भाव करीब 4 फीसदी तक बढ़ गए हैं. जाहिर है कि गेहूं की बढ़ती कीमतें आटा, ब्रेड और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ा सकती हैं।


    प्याज भी महंगा
    रसोई की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, प्याज भी लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगा है. प्याज का औसत खुदरा भाव 37 रुपये 20 पैसे प्रति किलो पर पहुंच गया है जबकि एक महीने पहले कीमत 34 रुपये 53 पैसे प्रति किलो थी. एक साल पहले प्याज का भाव 26 रुपये 86 पैसे प्रति किलो था. इस तेजी की वजह खरीफ प्याज की आवक में देरी है जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

    तेल से लेकर गेहूं और प्याज तक, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पैदा हुआ तनाव भारतीय ग्राहकों की जेब तक पहुंच रहा है. ऐसे में सबकी नजर दो मोर्चों पर टिकी हैं. पहला है कि मिडिल ईस्ट में तेल की दिशा क्या रहती है और दूसरा ये कि काला सागर क्षेत्र में सप्लाई का संकट कितना गहराता है क्योंकि इन दोनों का असर सीधे आपकी गाड़ी के खर्च और रसोई के बजट पर पड़ सकता है।

  • जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव

    जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती परिचालन लागत के बीच देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने अपने वाइड-बॉडी विमान संचालन को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 25 अक्टूबर 2026 से वाइड-बॉडी ऑपरेशन समाप्त कर दिए जाएंगे। इसी के साथ नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ किया गया डैम्प लीज समझौता भी उसी महीने खत्म हो जाएगा।

    इंडिगो ने बताया कि फिलहाल मुंबई-एम्स्टर्डम मार्ग पर डैम्प लीज पर लिए गए बोइंग 787-9 विमान की जगह एयरबस A321XLR विमान से उड़ानें संचालित की जाएंगी। वहीं, लंदन हीथ्रो के लिए एयरलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। कंपनी का कहना है कि यह सेवा तब दोबारा शुरू होगी, जब उसके ऑर्डर किए गए एयरबस A350-900 विमान बेड़े में शामिल हो जाएंगे।

    2025 में हुआ था समझौता
    इंडिगो ने वर्ष 2025 की शुरुआत में नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ छह बोइंग 787-9 विमानों के लिए डैम्प लीज एग्रीमेंट किया था, ताकि लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार किया जा सके।

    क्यों लिया गया फैसला?
    एयरलाइन के अनुसार, समझौते के बाद वैश्विक हालात तेजी से बदले हैं। एयरस्पेस पर प्रतिबंध, ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के दबाव ने परिचालन लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। इन परिस्थितियों का असर उड़ानों की क्षमता, समयबद्धता, कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ा है। इसी वजह से कंपनी ने पूरे कार्यक्रम की समीक्षा कर रणनीति में बदलाव का निर्णय लिया है।

    ‘संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी’
    इंडिगो के प्लानिंग एवं रेवेन्यू मैनेजमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिजीत दासगुप्ता ने कहा कि वैश्विक विमानन उद्योग लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना और दीर्घकालिक रणनीति को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन भविष्य में भी मिड और लॉन्ग-हॉल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    यात्रियों को दिए जाएंगे विकल्प
    इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से प्रभावित यात्रियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जाएगा। उन्हें वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था या लागू नियमों के तहत रिफंड का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

  • ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा

    ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, बढ़ा आयात खर्च, जून में व्यापार घाटा 30.4 अरब डॉलर पर पहुंचा


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर करीब 30.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो भारत पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

    महंगे तेल ने बढ़ाया आयात खर्च
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। जून महीने में कच्चे तेल का आयात 40 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 19.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसके पीछे मध्य-पूर्व में बढ़ा तनाव और सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    इसके अलावा खाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान और मशीनरी के आयात में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके चलते जून में भारत का कुल आयात बढ़कर 70.8 अरब डॉलर हो गया।

    निर्यात बढ़ा, लेकिन घाटे पर नहीं लगी लगाम
    भारत के लिए राहत की बात यह रही कि जून में निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई। देश का कुल निर्यात करीब 40.4 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर प्रदर्शन है।

    इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयां और रसायनों की विदेशी मांग मजबूत रही। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगातार सुधार देखा गया, वहीं हीरे और आभूषणों के निर्यात में भी बढ़ोतरी हुई। हालांकि, आयात में हुई तेज वृद्धि के मुकाबले निर्यात की रफ्तार कम रही, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ गया।

    आम लोगों पर क्या हो सकता है असर?
    व्यापार घाटे में बढ़ोतरी का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहता। यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने से कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। इसी वजह से सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    आगे की चुनौती और सरकार की रणनीति
    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत का आयात बिल ऊंचा बना रह सकता है। इससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। सरकार फिलहाल निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों में जुटी है। इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता निर्यात सकारात्मक संकेत दे रहा है।

    हालांकि, भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैश्विक बाजार की स्थिति अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात देश की आर्थिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • 20 अगस्त से बदलेगी शनि की चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, जानें असर और उपाय

    20 अगस्त से बदलेगी शनि की चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, जानें असर और उपाय


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मों का न्यायाधीश माना जाता है। उनकी चाल या राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। 20 अगस्त 2026 को शनि एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति में प्रवेश करेंगे। इस बदलाव का असर सभी राशियों पर दिखाई देगा, लेकिन मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है।

    इन तीन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभाव

    मेष राशि
    शनि की बदलती चाल का असर कार्यक्षेत्र में महसूस हो सकता है। नौकरी या व्यवसाय में दबाव बढ़ने के साथ सहकर्मियों से मतभेद और कार्यों में रुकावट आने की संभावना है। इस दौरान विवादों से दूरी बनाए रखना और धैर्य के साथ निर्णय लेना लाभदायक रहेगा।

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। मानसिक तनाव, पारिवारिक मतभेद और आर्थिक लेनदेन में लापरवाही परेशानी का कारण बन सकती है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले सोच-समझकर कदम उठाएं।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय कार्यों में देरी और आर्थिक चुनौतियां ला सकता है। बड़े निवेश करने से फिलहाल बचना बेहतर रहेगा। साथ ही, वाणी पर संयम रखें और हर निर्णय धैर्य के साथ लें।

    शनि के अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि देव की कृपा पाने और संभावित कठिनाइयों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं—
    – प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    – प्रतिदिन ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
    – शनिवार के दिन सरसों का तेल, काले तिल और उड़द की दाल का दान करना शुभ माना जाता है।
    – जरूरतमंद, निर्धन और असहाय लोगों की सेवा एवं सहायता करें।

    धैर्य और अनुशासन से मिलेगा लाभ
    ज्योतिष के अनुसार, शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यदि कार्य ईमानदारी और निष्ठा से किए जाएं तो कठिन समय भी सकारात्मक परिणाम दे सकता है। ऐसे में घबराने के बजाय संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना अधिक लाभकारी माना जाता है।

    शनि का यह परिवर्तन एक सामान्य ज्योतिषीय प्रक्रिया है। सावधानी, धैर्य और उचित उपायों के साथ इस अवधि की चुनौतियों का सामना अपेक्षाकृत सहज तरीके से किया जा सकता है।

  • बुध का राशि परिवर्तन आज: इन 4 राशियों को रहना होगा सावधान, वाणी से लेकर धन तक पड़ सकता है असर

    बुध का राशि परिवर्तन आज: इन 4 राशियों को रहना होगा सावधान, वाणी से लेकर धन तक पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है। आज बुध देव मिथुन राशि में गोचर करने जा रहे हैं। इस राशि परिवर्तन का कई राशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार चार राशियों के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन राशियों के लोगों को धन, स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंध और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत होगी।

    वृषभ राशि
    बुध का गोचर वृषभ राशि के द्वितीय भाव, यानी धन और वाणी के स्थान में होगा। इस दौरान बोलचाल में कठोरता या स्पष्टवादिता बढ़ सकती है, जिससे परिवार या कार्यस्थल पर गलतफहमियां पैदा होने की आशंका रहेगी। आर्थिक मामलों में बिना विचार किए निवेश करने से बचें। साथ ही किसी को उधार देने से भी परहेज करें, क्योंकि धन फंसने की संभावना बन सकती है।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के लिए बुध अष्टम भाव में गोचर करेंगे, जिसे गुप्त रोग, आयु और अचानक आने वाली परिस्थितियों का भाव माना जाता है। नौकरी और व्यवसाय में अप्रत्याशित रुकावटें आ सकती हैं। कार्यस्थल पर विरोधियों से सतर्क रहें और अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य के मामले में लापरवाही न करें, खासकर पेट और त्वचा संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने से बचें। आर्थिक जोखिम लेने से भी बचना बेहतर रहेगा।

    धनु राशि
    धनु राशि के जातकों के लिए बुध का गोचर सप्तम भाव में होगा, जो वैवाहिक जीवन और साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। इस दौरान जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं, इसलिए बातचीत में संयम रखना जरूरी होगा। यदि साझेदारी में कारोबार करते हैं तो पारदर्शिता बनाए रखें। किसी भी नए समझौते या अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच अवश्य करें।

    मीन राशि
    मीन राशि के लिए बुध चतुर्थ भाव में प्रवेश करेंगे, जो सुख-सुविधा, माता और संपत्ति से जुड़ा माना जाता है। इस दौरान घरेलू जीवन में कुछ परेशानियां महसूस हो सकती हैं। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ सकती है, इसलिए उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान दें। कार्यस्थल का बढ़ता दबाव मानसिक तनाव का कारण बन सकता है। भूमि, भवन या वाहन से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचें और कोई भी फैसला सोच-समझकर लें।

  • एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा तेल संकट का असर…. हो सकता है 1970 जैसा बदलाव!

    एशिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा तेल संकट का असर…. हो सकता है 1970 जैसा बदलाव!


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) और तेल की कीमतों (Oil prices) में उछाल का असर अब धीरे-धीरे एशिया की अर्थव्यवस्थाओं (Economies of Asia.) और आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बदलाव वैसा ही हो सकता है जैसा 1970 के दशक के तेल संकट के बाद यूरोप में देखने को मिला था, जब पूरी ऊर्जा व्यवस्था ही बदल गई थी।

    1970 का सबक: कैसे यूरोप ने तेल पर निर्भरता घटाई
    1973 और 1979 के तेल संकट के बाद शुरुआत में अनुमान था कि यूरोप पहले की तरह ही तेल पर निर्भर रहेगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। महंगे कच्चे तेल ने यूरोप को गैस और परमाणु ऊर्जा की ओर धकेल दिया। नतीजा यह हुआ कि 1980 के दशक तक तेल की खपत गिर गई और गैस का इस्तेमाल दोगुना हो गया।


    अब एशिया में दिख रहे वही संकेत

    आज एशिया भी उसी मोड़ पर खड़ा नजर आ रहा है। दुनिया का 80% से ज्यादा तेल-गैस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर एशिया जाता है, लेकिन इस रूट पर तनाव और सप्लाई बाधित होने से कीमतें बढ़ रही हैं और देशों की निर्भरता संकट बनती जा रही है।

    जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देश पहले से ही आयात पर निर्भर हैं, जबकि वियतनाम, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देश भी अब नेट इंपोर्टर बन चुके हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश और थाईलैंड में घरेलू गैस उत्पादन घट रहा है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता बढ़ रही है।


    आम लोगों पर सीधा असर

    ऊर्जा महंगी होने का असर सीधे आम आदमी पर दिख रहा है। जापान और दक्षिण कोरिया में खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं। कई देशों में हवाई यात्रा महंगी हो गई है, एयरलाइंस ने उड़ानें कम कर दी हैं।

    इस्लामाबाद में एक गैसोलीन स्टेशन पर ग्राहकों की कतार। पाकिस्तान सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतें बढ़ा दीं। पाकिस्तान, श्रीलंका और फिलीपींस में फ्यूल बचाने के लिए चार दिन का वर्क वीक लागू किया गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी किसानों पर असर दिख रहा है, जहां फर्टिलाइजर महंगे हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है।


    क्लीन एनर्जी की ओर तेज रुख

    इस संकट का सबसे बड़ा असर यह है कि अब क्लीन एनर्जी की ओर तेजी से रुख बढ़ रहा है। भारत में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हों की ओर जा रहे हैं। एशिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की मांग तेजी से बढ़ी है। थाईलैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में EV की हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है। सोलर एनर्जी में भी बूम देखने को मिल रहा है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान में सोलर इंस्टॉलेशन तेजी से बढ़ रहे हैं।

    OPEC से UAE का बाहर होना बना नया ट्रिगर: ओपेक से यूएई के बाहर होने का फैसला तेल बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा सकता है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ेगा और आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ेगा। क्या तेल की मांग घटने की शुरुआत हो चुकी है: एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर यह संकट लंबा चलता है, तो एशिया में तेल की मांग पर बड़ा असर पड़ सकता है। जैसे यूरोप में 1970 के बाद तेल की मांग कभी पहले जैसी नहीं रही, वैसे ही एशिया में भी बड़ा बदलाव संभव है।

  • ईरान-अमेरिका युद्ध का असर…. सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी

    ईरान-अमेरिका युद्ध का असर…. सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Price) में आज लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान (America and Iran War) के बीच फिर से बातचीत की संभावनाओं की वजह से आज इंटरनेशनल मार्केट (International Market) गोल्ड और सिल्वर का रेट (Gold Silver Price) फिर से बढ़ा हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों की वजह से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहरा गया है। बता दें, पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच एक दौर की बातचीत हो गई है। लेकिन यह पूरी वार्ता विफल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता तब नहीं हो पाया था।


    क्या है गोल्ड का ताजा रेट (Gold Latest Price)

    COMEX gold की कीमतों में आज शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। जिसके बाद यह 4855 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में सोने का भाव 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ा था। COMEX Silver के रेट भी आज बुधवार को बढ़ोतरी देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में उछाल के बाद यह 79 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई थी।


    क्यों बढ़ रहा सोने और चांदी का रेट (Why Gold Silver prices rising)

    ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आने वाले दिनों में हो सकती है। न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दो दिनों में बातचीत शुरू होने के संकेत दिए हैं। इन खबरों की वजह से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.3 प्रतिशत लुढ़क चुका है। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से मेटल की कीमतों में 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है।


    कहां तक जाएगा सोने और चांदी का रेट (Gold Silver Price Outlook)

    Augmon से जुड़ी रेनिशा कहती हैं कि सोने और चांदी इस समय भी बुल रन पर सवार हैं। हालांकि, आगे का रास्ता काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। रेनिशा का कहना है टेक्निकल स्तर पर, “गोल्ड 4800 से 4850 डॉलर (154000 रुपये से 155000 रुपये तक) के आस-पास रेसिस्टेंस दिखा रहा है। अगर कीमतें इसके ऊपर गई तो यह फिर 5000 डॉलर (160000 रुपये) के स्तर तक जा सकती हैं।”

    चांदी के विषय में एक्सपर्ट की राय है कि यह 77 डॉलर (246000 रुपये) के स्तर पर रेसिस्टेंस दिखा रहा है। इसके ऊपर जाने की स्थिति में चांदी का दाम 82 डॉलर से 87 डॉलर (255000 रुपये से 265000 रुपये) के स्तर तक पहुंच सकता है।”

  • मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी

    मिडिल ईस्ट तनाव का गोल्ड मार्केट पर असर… कीमत में गिरावट का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    ग्लोबल मार्केट (Global Market) में सोने की कीमतों (Gold Prices) में हल्की गिरावट देखने को मिल रही है और इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ता तनाव बन रही है। हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को ब्लॉक करने की योजना ने दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर तेल की कीमतों को प्रभावित करता है और यही असर अब सोने के बाजार पर भी दिखने लगा है।

    दरअसल, जब तेल महंगा होता है, तो महंगाई बढ़ने लगती है। इस समय कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में आमतौर पर सोना सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग दिख रही है। बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक अब ब्याज दरों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और यही वजह है कि सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    सोना एक ऐसा निवेश है, ज्यादातर मामलों में ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना होती है, तो निवेशक इससे दूरी बनाने लगते हैं। फिलहाल, अमेरिका में महंगाई बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे यह उम्मीद कम हो गई है कि जल्द ही ब्याज दरों में कटौती होगी। यही कारण है कि सोने की कीमतों में हाल ही में लगभग 2% तक की गिरावट देखने को मिली।

    हालांकि, पूरी तरह से तस्वीर नकारात्मक भी नहीं है। डॉलर में कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट जैसे फैक्टर सोने को कुछ हद तक सपोर्ट दे रहे हैं। इसके अलावा ग्लोबल स्तर पर आर्थिक सुस्ती और अनिश्चितता भी निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती है। यही वजह है कि शुरुआती गिरावट के बाद सोने ने कुछ रिकवरी भी दिखाई।

    एक और दिलचस्प बात यह है कि फरवरी से शुरू हुए इस जियो-पॉलिटिकल तनाव के दौरान सोना करीब 10% तक गिर चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे यह संभलने की कोशिश कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में अगर तनाव बढ़ता है या आर्थिक ग्रोथ धीमी होती है, तो सोना फिर से मजबूत हो सकता है।

    अभी सोने का बाजार कई फैक्टर्स के बीच फंसा हुआ है। इसमें एक तरफ बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों का दबाव है, तो दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितता का सपोर्ट है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें, बल्कि बाजार के रुझान को समझकर ही निवेश करें।

  • भारतीय अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा ईरान युद्ध का असर… महंगे तेल ने बिगाड़ी हालत


    नई दिल्ली।
    ग्लोबल स्तर (Global Level) पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में तेज उछाल अब भारत की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) पर भी असर दिखाने लगा है। हाल ही में आई मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) की रिपोर्ट में भी इसका संकेत साफ दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे तेल की वजह से भारत की आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि FY2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान घटाकर 6.2% कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का सीधा असर भारत पर कैसा पड़ेगा?

    आपको बता दें कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। इससे ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि लोगों की जेब पर दबाव बढ़ता है और खर्च कम हो जाता है, जिससे डिमांड भी कमजोर पड़ने लगती है।


    95 डॉलर प्रति बैरल होंगी तेल की कीमतें

    रिपोर्ट के अनुसार, अगर तेल की कीमतें औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती हैं, तो उद्योगों की लागत बढ़ेगी, कंपनियों का मुनाफा घटेगा और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा, जो बढ़कर करीब 5.1% तक पहुंचने का अनुमान है।

    85% कच्चा तेल आयात
    भारत की एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वह अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे तेल महंगा होने पर देश का आयात बिल बढ़ जाता है और चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) भी बढ़कर 2.5% तक जा सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बन सकता है।

    किस-किस पर होगा असर?
    इसका असर आम लोगों से लेकर कंपनियों और सरकार तक सभी पर पड़ता है, जहां आम आदमी की खरीदारी घटती है, वहीं कंपनियों के खर्च बढ़ जाते हैं और सरकार को सब्सिडी बढ़ानी पड़ सकती है। हालांकि, RBI (Reserve Bank of India) फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखते हुए स्थिति संभालने की कोशिश कर सकता है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो ग्रोथ 5.7% तक गिर सकती है और महंगाई 6% के पार जा सकती है। फिर भी मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में सक्षम मानी जा रही है।

  • मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी वर्ग विशेष को बाहर रखना समाज को विभाजित कर सकता है और इसका नकारात्मक प्रभाव हिंदू धर्म पर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए।

    यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने शबरिमला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और उसके विस्तार पर भी विचार कर रही है।

    पीठ में शामिल न्यायाधीश

    संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

    अदालत ने क्या कहा

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए।

    इससे सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि इस तरह का निष्कासन समाज को बांट देगा।

    संगठनों की दलील

    सुनवाई के दौरान नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि कुछ मंदिर विशेष वर्ग तक सीमित हो सकते हैं।

    ‘वेंकटरमण देवरू’ मामले का जिक्र

    अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामला का हवाला देते हुए कहा कि प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक असर धर्म पर पड़ सकता है।

    शबरिमला विवाद की पृष्ठभूमि

    2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया।

    अदालत फिलहाल धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।