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  • लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….

    लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) लोकसभा सीटों (Lok Sabha seats) की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरह के फार्मूलों पर काम कर रही है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही, सरकार महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Law) को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) के नए मसौदे को प्रभावी बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

    दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया जा रहा है कि आबादी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि सरकार इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।


    क्या है नया फॉर्मूला

    पहले वाले विधेयक को आधार बनाते हुए नए मसौदे में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यह उन प्रस्तावों में से एक है जिन पर सरकार काम कर रही है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि अभी की जा रही जनगणना के आंकड़े आने बाकी हैं।


    दो तिहाई बहुमत का इंतजार

    सूत्रों ने बताया कि सरकार को जब संख्याबल का भरोसा हो जाएगा उसके बाद ही विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। अभी सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 360 के आंकड़े की जरूरत है।


    2034 से पहले अड़चन

    मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने से जुड़ी हुई है। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून में बदलाव की जरूरत थी।

    सरकार की योजना के अनुसार, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 कर दी जाएगी।


    पिछला संविधान संशोधन विधेयक

    अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें ‘किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।’

  • भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी, SIPRI रिपोर्ट से मिली अहम जानकारी

    भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी, SIPRI रिपोर्ट से मिली अहम जानकारी

    नई दिल्ली। भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत के परमाणु वारहेड्स की संख्या 180 से बढ़कर लगभग 190 हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश अपनी रणनीतिक और सुरक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

    SIPRI ईयरबुक 2026 में बताया गया है कि दुनिया की नौ परमाणु शक्तियों में आधुनिकरण और विस्तार की प्रक्रिया जारी है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों में कमी की गति धीमी पड़ गई है, और कई देशों द्वारा नए हथियारों की तैनाती से वैश्विक भंडार फिर बढ़ सकता है।

    भारत की परमाणु क्षमता में बढ़ोतरी
    रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 10 नए वारहेड्स की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों, समुद्री आधारित क्षमता और MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) जैसी तकनीकों के विकास के साथ जुड़ी हुई है।

    भारत की परमाणु रणनीति अब मुख्य रूप से चीन पर केंद्रित मानी जा रही है, क्योंकि चीन तेजी से अपने परमाणु भंडार का विस्तार कर रहा है। SIPRI के अनुसार चीन के पास लगभग 620 वारहेड्स हैं। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर पाकिस्तान के पास करीब 170 वारहेड्स बताए जाते हैं।

    ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर कायम भारत
    भारत अपनी परमाणु नीति के तहत ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले उपयोग न करने) और न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध की रणनीति पर कायम है। हालांकि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए देश अपनी दूसरी प्रहार क्षमता, गतिशीलता और जीवित रहने की क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।

    आधुनिक तकनीकों पर फोकस
    भारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया में MIRV तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस तकनीक के जरिए एक मिसाइल से कई लक्ष्यों पर अलग-अलग वारहेड दागे जा सकते हैं। इसके अलावा कैनिस्टराइज्ड मिसाइल सिस्टम लॉन्च प्रक्रिया को तेज और अधिक सुरक्षित बनाते हैं। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें, विशेषकर अग्नि-V और अग्नि-P, लंबी दूरी और अधिक सटीक हमले की क्षमता प्रदान करती हैं।

    समुद्री ताकत से मजबूत हो रही त्रिमूर्ति
    भारत की परमाणु त्रिमूर्ति भूमि, वायु और समुद्र आधारित क्षमता को मजबूत करने में समुद्री शक्ति अहम भूमिका निभा रही है। INS अरिहंत जैसी परमाणु पनडुब्बियां K-15, K-4 और भविष्य में K-5 मिसाइलों से लैस हैं, जो देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को सुनिश्चित करती हैं। SIPRI के अनुसार भारत शांतिकाल में भी कुछ परमाणु हथियारों को पनडुब्बियों पर तैनात करने की क्षमता विकसित कर रहा है।

    वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती चिंता
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु पारदर्शिता घट रही है और अप्रसार संधि (NPT) से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। हाल के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों ने परमाणु निरोध की जटिलताओं को और स्पष्ट किया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता बदलते भू-राजनीतिक माहौल, चीन की बढ़ती ताकत और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का सीधा जवाब है।

  • अपना रक्षा बजट बजट बढ़ाएगा पाकिस्तान…. 100 अरब की कर सकता है बढ़ोतरी

    अपना रक्षा बजट बजट बढ़ाएगा पाकिस्तान…. 100 अरब की कर सकता है बढ़ोतरी


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) अगले वित्त वर्ष में रक्षा बजट (Defense Budget) में करीब 100 अरब पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है। सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) (International Monetary Fund – IMF) समर्थित सुधार कार्यक्रम के तहत अपना बजट तैयार कर रही है, जिसमें राजस्व में भारी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

    मालूम हो कि पाकिस्तान ने पिछले साल भारत के खिलाफ बड़ा युद्ध हारा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तानी सेना को बुरी तरह से पराजित करते हुए कई ठिकानों पर मिसाइलों से हमले किए थे। संघर्ष के दौरान पाकिस्तान भारत से बुरी तरह से ‘पिटा’ था। ऐसे में अब अगले साल से रक्षा बजट के इतना बढ़ाए जाने से आशंका जताई जा रही है कि क्या पाकिस्तानी सेना कोई बड़ी तैयारी तो नहीं कर रही है और भारत के लिए बड़ा खतरा तो नहीं पैदा होने जा रहा? माना जा रहा है कि इसके जरिए वह अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाएगा और हथियारों की खरीद भी बढ़ा सकता है, जिससे मुनीर की सेना की ताकत में इजाफा होगा।

    अखबार ‘डॉन’ ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 2026-27 के लिए रक्षा खर्च 2.66 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये रहने का अनुमान है, जो चालू वित्त वर्ष में 2.56 लाख करोड़ रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ ने 2026-27 में पाकिस्तान की कुल संघीय आय 17.14 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये रहने का अनुमान लगाया है। यह मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक और करीब 13.5 प्रतिशत ज्यादा है।

    रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने केंद्र और प्रांतीय सरकारों के कुल खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.2 प्रतिशत तक बढ़ाकर 4.23 लाख करोड़ रुपये करने का वादा किया है। साथ ही जून 2027 तक केंद्र और प्रांतीय सरकारों के सभी भुगतानों को डिजिटल माध्यम से करने की योजना है। आईएमएफ कार्यक्रम से जुड़े व्यापक सुधारों के तहत सरकार इस वर्ष के अंत तक सबसे अधिक भ्रष्टाचार प्रभावित 10 संस्थानों की पहचान कर उनका विस्तृत अध्ययन और लेखा जांच करेगी। प्रांतीय भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों को भी मजबूत किया जाएगा।


    40 फीसदी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जो लोग घोर गरीबी में जी रहे हैं और जिन्हें सामाजिक सहायता मिल रही है, उनके अलावा भी लगभग 40 फीसदी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर बनी हुई है। IMF का एक मिशन इस समय पाकिस्तान में है, जो 2026-27 के बजट से पहले बजट पर होने वाली चर्चाओं को अंतिम रूप देने के लिए आया है। उम्मीद है कि यह बजट अगले महीने की शुरुआत में कैबिनेट और संसद के सामने पेश किया जाएगा।

  • बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी

    बड़ा फैसला…. छह साल बाद सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या…. कैबिनेट ने दी मंजूरी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जजों की संख्या को लेकर मंगलवार को अहम फैसला लिया। कैबिनेट ने SC में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला छह साल बाद लिया गया है, जब 2019 में इसे 31 से बढ़ाकर 33 किया गया था। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद सुप्रीम कोर्ट को और मजबूत करना व न्याय प्रक्रिया को तेज (Justice Process Speeding up) करना है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) ने बताया कि फिलहाल अदालत में 33 न्यायाधीश और एक मुख्य न्यायाधीश हैं। संसद के आगामी सत्र में इस संबंध में एक विधेयक पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी। यह फैसला न्यायालय में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है।


    SC में कुछ इस तरह बढ़ती गई जजों की संख्या

    सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 में मूल रूप से मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर 10 न्यायाधीशों का प्रावधान था। 1960 में इसे 13 और बाद में 17 किया गया। 1986 के संशोधन से संख्या 25 हो गई और 2009 में इसे 30 कर दिया गया। फिलहाल ताजा प्रस्ताव के बाद न्यायपालिका को मजबूत करने की दिशा में एक अहम उठाया गया है, जो देश के न्यायिक ढांचे को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा।

    भारत के संविधान में सुप्रीम कोर्ट की कुल संख्या तय नहीं है। अनुच्छेद 124(1) के तहत चीफ जस्टिस के अलावा अन्य जजों की संख्या संसद तय करती है। समय-समय पर बढ़ती मुकदमों की संख्या को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है। इस बढ़ोतरी का मकसद लंबित मामलों के बोझ को कम करना है। हालांकि, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ जजों की संख्या बढ़ाने से ही न्याय में देरी पूरी तरह दूर नहीं हो सकती।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं…. 5 रुपये तक की बढ़ोतरी के आसार

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं…. 5 रुपये तक की बढ़ोतरी के आसार


    नई दिल्ली।
    आज एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 2022 से ही सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में इजाफा हो सकता है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार पेट्रोल और डीजल के रेट (Petrol Diesel Price) को 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर आने वाले कुछ दिनों में फैसला हो जाएगा।


    1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने बढ़ाया था प्रीमियम पेट्रोल का रेट

    इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को प्रीमियम पेट्रोल का रेट 11 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिया था। जिसके बाद प्रीमियम पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, प्रीमियम डीजल का रेट 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।

    आपके शहर में पेट्रोल का क्या है रेट? (Petrol Price in Your City)

    नई दिल्ली – 94.72 रुपये
    मुंबई – 104.21 रुपये
    कोलकाता – 103.94 रुपये
    चेन्नई – 100.75 रुपये
    अहमदाबाद – 94.49 रुपये
    बेंगलुरू – 102.92 रुपये
    हैदराबाद – 107.46 रुपये
    जयपुर – 104.72 रुपये
    लखनऊ – 94.69 रुपये
    पुणे – 104.04 रुपये
    चंडीगढ़ – 94.30 रुपये
    इंदौर – 106.48 रुपये
    पटना – 105.58 रुपये
    सूरत – 95 रुपये
    नासिक – 95.50 रुपये


    डीजल का रेट (Diesel Price in Your city)

    नई दिल्ली – 87.62 रुपये
    मुंबई – 92.15 रुपये
    कोलकाता – 90.76 रुपये
    चेन्नई – 92.34 रुपये
    अहमदाबाद – 90.17 रुपये
    बेंगलुरू – 95.70 रुपये
    जयपुर – 90.21 रुपये
    पुणे – 90.57 रुपये
    चंडीगढ़ – 82.45 रुपये
    इंदौर – 91.88 रुपये
    पटना – 93.80 रुपये
    सूरत – 89 रुपये
    नासिक – 89.50 रुपये


    प्राइवेट कंपनियों ने किया है पेट्रोल और डीजल के रेट में इजाफा

    1 अप्रैल को ही शेल इंडिया ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था। तब कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल और 25.01 रुपये प्रति लीटर डीजल का इजाफा किया था। इससे पहले मार्च के महीने में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल का रेट 5 रुपये और डीजल का रेट 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। इन कंपनियों ने भी इसके बाद कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी।

    मौजूदा परिस्थितियों में कच्चे तेल का रेट सातवें आसमान पर है। यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। जिसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

  • अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?

    अक्षय तृतीया पर चमके-सोना चांदी….., जानिए पिछले 10 सालों में कितनी बढ़ी कीमतें ?


    नई दिल्ली।
    अक्षय तृतीया 2026 (Akshaya Tritiya 2026) का त्योहार कल यानी 19 अप्रैल को है। 10 साल पहले यानी 2016 में अक्षय तृतीया के समय पर 10 ग्राम गोल्ड की कीमत (Gold Price) 30,100 रुपये थी। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार कल यानी शुक्रवार को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बना हुआ है। यानी अगर किसी निवेशक ने 2026 में अक्षय तृतीया के समय पर 10,000 रुपये का निवेश किया होगा उसका इनवेस्टमेंट बढ़कर 45000 रुपये हो गया होगा। निवेशकों का तगड़ा फायदा हुआ है। बता दें, 10 साल में सोने का रेट 400 प्रतिशत बढ़ा है।


    चांदी के रेट में पिछले 10 साल में तेज इजाफा (Silver price histroy)

    2016 में अक्षय तृतीया के त्योहार के समय पर 1 किलोग्राम चांदी का रेट 41200 रुपये था। जोकि शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 247930 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। यानी 10 साल में चांदी की कीमतों में 2,06,730 रुपये बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    पिछले एक साल में 50% बढ़ा सोने का रेट (Gold price surged 50 percent in one year)
    2025 में अक्षय तृतीया के समय पर गोल्ड का रेट 95500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था। जोकि अब 151000 रुपये के लेवल पर पहुंच गया है। यानी बीते साल अक्षय तृतीया की तुलना में इस बार सोने का रेट 50% से अधिक बढ़ चुका है।


    आज क्या है 24 से 14 कैरेट गोल्ड का रेट (Gold Price Today)

    इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 24 कैरेट गोल्ड का रेट शुक्रवार यानी 17 अप्रैल की शाम को 151358 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, 23 कैरेट गोल्ड का रेट 150752 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट गोल्ड का रेट 138644 रुपये, 18 कैरेट गोल्ड का रेट 113519 रुपये और 14 कैरेट गोल्ड का रेट 88544 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर है।

    इससे पहले 16 अप्रैल को गोल्ड का रेट 153305 रुपये प्रति 10 ग्राम था। यानी महज दो दिन में गोल्ड की कीमतों में करीब 2000 रुपये की गिरावट देखने को मिली है। बता दें, अप्रैल के महीने में गोल्ड का रेट लगभग स्थिर ही बना हुआ है।


    रिकॉर्ड हाई से क्यों गिरा गोल्ड का रेट? (Why Gold get cheaper)

    इसी साल एक समय पर गोल्ड का रेट 175000 रुपये को पार कर गया था। लेकिन वहां से गोल्ड की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना माना जा रहा है। वहीं, निवेशकों की तरफ से मुनाफावसूली भी जमकर देखने को मिली है।

  • राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान… बोले- देश में खुलेंगे 100 नए सैनिक स्कूल… NCC कैडेटों की संख्या में होगी भारी वृद्धि

    राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान… बोले- देश में खुलेंगे 100 नए सैनिक स्कूल… NCC कैडेटों की संख्या में होगी भारी वृद्धि


    नई दिल्ली।
    देश की रक्षा तैयारियों (Country Defense Preparedness) और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी को नया आयाम देते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने बड़ी घोषणाएं की हैं। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल (Sainik School Ghorakhal) के डायमंड जुबली समारोह (Diamond Jubilee Celebration) को संबोधित करते हुए उन्होंने देश भर में 100 नए सैनिक स्कूल खोलने और एनसीसी (NCC) कैडेटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। रक्षा मंत्री ने युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और देशभक्ति के मूल्यों को समाहित करने के उद्देश्य से नेशनल कैडेट कोर (NCC) के विस्तार की घोषणा की।

    उन्होंने कहा, “हमने एनसीसी में रिक्तियों की संख्या बढ़ा दी है। पहले जहां भर्ती का लक्ष्य 17 लाख (1.7 मिलियन) था, अब इसे बढ़ाकर 20 लाख (2 मिलियन) करने का निर्णय लिया गया है। इससे अधिक से अधिक बच्चों को राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक संस्कार सीखने का अवसर मिलेगा।”

    सैन्य उन्मुख शिक्षा के दायरे को बढ़ाते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत देश में 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये संस्थान न केवल रक्षा सेवाओं के लिए युवाओं को तैयार करते हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए भी उन्हें सक्षम बनाते हैं।

    रक्षा मंत्री ने सैनिक स्कूलों में लड़कियों के प्रवेश की अनुमति देने के सरकार के फैसले को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि महिला कैडेटों के प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि हमारी बेटियां हर क्षेत्र में बेटों के बराबर हैं।

    घोड़ाखाल सैनिक स्कूल की गौरवशाली विरासत
    समारोह के दौरान उन्होंने सैनिक स्कूल घोड़ाखाल की विरासत की सराहना की। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इस अकेले स्कूल ने अब तक 800 से अधिक छात्र नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) को दिए हैं। इसके अलावा, सीडीएस (CDS) और एएफसीएटी (AFCAT) जैसे विभिन्न माध्यमों से 2,000 से अधिक कैडेट यहां से निकलकर देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने छात्रों की शैक्षणिक, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्टता की जमकर तारीफ की।

    कैडेटों में जोश भरते हुए राजनाथ सिंह ने अनुशासन और तत्परता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने युवाओं को सफलता का मंत्र देते हुए कहा, “मैं सभी बच्चों से कहना चाहता हूं- ‘तैयार रहें, हमेशा तैयार रहें।’ हर परिस्थिति के लिए खुद को तैयार रखें। चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक मजबूती और शारीरिक फिटनेस अनिवार्य है।”

    उन्होंने अंत में कहा कि एक सशक्त राष्ट्र तभी बनता है जब उसके नागरिक किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार हों।

  • ईरान युद्ध खत्म करने की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप? व्हाइट हाउस में मतभेद, फैसले पर बढ़ा दबाव

    ईरान युद्ध खत्म करने की घोषणा क्यों नहीं कर पा रहे ट्रंप? व्हाइट हाउस में मतभेद, फैसले पर बढ़ा दबाव

    वॉशिंगटन। ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के सामने बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। व्हाइट हाउस के भीतर ही इस बात को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है कि युद्ध को कब और किस तरह खत्म घोषित किया जाए।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशासन के भीतर कुछ अधिकारी मानते हैं कि संघर्ष लंबा खिंचने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल आ सकता है, जिसका असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर कुछ सख्त रुख वाले नेता ईरान पर सैन्य दबाव जारी रखने के पक्ष में हैं।

    तेल की कीमतों को लेकर चिंता

    अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो अमेरिका में इस अभियान के लिए जनसमर्थन कम हो सकता है।
    हालांकि कुछ रिपब्लिकन नेता और रणनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से हर हाल में रोकना होगा और अमेरिकी सैनिकों या जहाजों पर हमले का कड़ा जवाब देना चाहिए।

    लंबी जंग से बचना चाहते हैं कई रणनीतिकार

    ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार और समर्थक यह भी चाहते हैं कि अमेरिका मध्यपूर्व में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध में न फंसे। वे चाहते हैं कि मौजूदा संघर्ष को सीमित रखा जाए और जल्द कोई रास्ता निकाला जाए।

    ईरान की सरकार गिरने की संभावना कम

    अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि फिलहाल ईरान की मौजूदा सरकार के जल्द गिरने की संभावना कम है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन ने हाल के दिनों में तेहरान की सरकार को हटाने की बात भी कम कर दी है।

    युद्ध से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे ट्रंप

    सूत्रों के अनुसार ट्रंप प्रशासन अब इस संघर्ष से निकलने का रास्ता खोज रहा है। युद्ध शुरू होने के समय इसके कई लक्ष्य बताए गए थे—जैसे ईरान के हमलों को रोकना, उसके परमाणु कार्यक्रम को कमजोर करना और उसकी सैन्य क्षमता को सीमित करना।

    युद्ध रोकना भी आसान नहीं

    विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध शुरू करने के बाद उसे खत्म करना भी उतना ही मुश्किल होता है। अगर अमेरिका अचानक जीत का ऐलान कर सैन्य कार्रवाई रोक देता है और सैनिकों की वापसी शुरू कर देता है, तो अल्पकाल में वैश्विक बाजार शांत हो सकते हैं।
    लेकिन यदि ईरान की धार्मिक सरकार सत्ता में बनी रहती है और उसके पास परमाणु सामग्री, मिसाइल और ड्रोन मौजूद रहते हैं, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए खतरे पैदा हो सकते हैं।

    ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर

    ईरान के पास अभी भी कई कम दूरी की मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री बारूदी सुरंगें हैं। इनके जरिए वह तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है, खासकर Strait of Hormuz के रास्ते। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।

    होर्मुज को खोलना भी चुनौती

    सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करना हो तो ईरान के तटीय इलाकों में जमीनी सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है। ऐसा कदम युद्ध को और व्यापक बना सकता है और अमेरिकी सैनिकों के लिए बड़ा जोखिम पैदा कर सकता है।

    इसी वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप के लिए युद्ध शुरू करना जितना आसान था, उसे खत्म करना उतना ही कठिन साबित हो रहा है।

  • पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हुआ भारत..अमेरिका से नजदीकी बढ़ा सकती है चीन की टेंशन

    पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हुआ भारत..अमेरिका से नजदीकी बढ़ा सकती है चीन की टेंशन


    नई दिल्ली।
    नई दिल्ली (New Delhi) में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट (AI Impact Summit) में शुक्रवार को भारत (India) ने ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही अमेरिका (America) के इस महत्वपूर्ण रणनीतिक गठबंधन में सदस्य देशों की संख्या अब 10 हो गई है। जानकारों का कहना है कि ‘क्वाड’ के बाद यह नया गठबंधन चीन (China) की चिंताएं बढ़ा सकता है, क्योंकि अब तक उसका इस क्षेत्र में प्रभुत्व रहा है।


    पैक्स सिलिका गठबंधन क्या है?

    पैक्स सिलिका सहयोगी देशों के बीच एआई और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए प्रमुख गठजोड़ है। इसकी शुरुआत पिछले साल 12 दिसंबर को वॉशिंगटन में एक सम्मेलन के दौरान हुई थी। यह समझौता सहयोगी देशों के बीच आर्थिक सुरक्षा सहमति को आगे बढ़ाता है। यहां पैक्स शब्द का अर्थ है- शांति, स्थिरता और समृद्धि। अमेरिका में आर्थिक मामलों के अवर सचिव जैकब हेल्बर्ग ने कहा कि 20वीं सदी में दुनिया तेल और स्टील से चलती थी। लेकिन 21वीं सदी में दुनिया कंप्यूटर से चलती है, और उस कंप्यूटर को बनाने के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे खनिज जरूरी हैं। पैक्स सिलिका का मकसद भरोसेमंद देशों के साथ एक साझा योजना बनाना है, ताकि वे भविष्य की एआई और तकनीक तैयार कर सकें। इसमें ऊर्जा, जरूरी खनिज, हाईटेक फैक्ट्री और एआई मॉडल, सब शामिल हैं।


    क्या है साझा घोषणा?

    पैक्स सिलिका की घोषणा में कहा गया है कि हम साझा समृद्धि, तकनीकी प्रगति और आर्थिक सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। हम मानते हैं कि भरोसेमंद सप्लाई चेन और सुरक्षित एआई सिस्टम भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी हैं। एआई की तेज प्रगति वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को बदल रही है और इससे ऊर्जा, जरूरी खनिज, मैन्युफैक्चरिंग, हार्डवेयर, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बाजारों में बड़े अवसर बनेंगे।


    पैक्स सिलिका में शामिल देश

    इस समझौते पर भारत से पहले हस्ताक्षर करने वाले देश में ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और यूके शामिल हैं। हस्ताक्षर किए बना जुड़े देशों में कनाडा, यूरोपीयन संघ, नीदरलैंड, आर्थिक सहयोगिता और विकास के लिए संगठन (ओईसीडी) और ताइवान शामिल हैं।


    पैक्स सिलिका का मकसद

    पैक्स सिलिका का सबसे बड़ा मकसद किसी एक देश पर पूरी तरह से निर्भरता को कम करना है। इसका मतलब है कि देश किसी एक देश पर सामग्री, तकनीक या उत्पादों के लिए जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहें, ताकि वैश्विक व्यापार में उन पर दबाव या उनका शोषण न किया जा सके। बिना नाम लिए यह गठजोड़ चीन की चुनौती को काउंटर करने की कोशिश है और खास तौर से रेयर अर्थ मेटल्स के सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की बड़ी दीर्घकालिक योजना है।


    60-70 फीसदी चीन का प्रभुत्व

    दुर्लभ खनिज धरती के अंदर पाए जाने वाले 17 दुर्लभ धातु हैं। आज के तकनीक के जमाने में दुर्लभ खनिज ऐसा फैक्टर है जिससे नियंत्रण अपने हाथों में बनाए रखा जा सकता है। हथियारों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, गाड़ी बनाने से लेकर एयरोस्पेस बनाने तक, सेमीकंडक्टर और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्माण में हर जगह रेयर अर्थ के कंपोनेंट अहम हैं। अभी चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की वैश्विक आपूर्ति पर हावी है। दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स के खनन का 60-70 प्रतिशत हिस्सा चीन का है।

  • MP में दिन होने लगे गर्म, लेकिन रातें अभी भी ठंडी, 15 शहरों में बढ़ने लगा पारा

    MP में दिन होने लगे गर्म, लेकिन रातें अभी भी ठंडी, 15 शहरों में बढ़ने लगा पारा


    भोपाल।  मध्य प्रदेश में अब दिन धीरे-धीरे गर्म होने लगे हैं। मंगलवार को भोपाल, इंदौर और अन्य 13 शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया। लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

    दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी

    मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:
    कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्री
    अनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्री
    खजुराहो – 8.2 डिग्री
    पचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्री
    रीवा – 8.5 डिग्री
    शिवपुरी – 9 डिग्री
    मंडला – 9.1 डिग्री
    दतिया – 9.5 डिग्री
    नौगांव – 9.8 डिग्री

    पहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा।

    आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:

    12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप
    13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी
    लेकिन रातें अभी भी ठंडी बनी हुई हैं। मंगलवार की रात प्रदेश के 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तापमान में थोड़ी गिरावट हो सकती है। फिलहाल देश में दो मौसमीय सिस्टम सक्रिय हैं, लेकिन कमजोर होने की वजह से प्रदेश में बारिश की संभावना कम है। वहीं, 13 और 16 फरवरी को पश्चिमी हिमालय में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हो सकता है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी दिख सकता है। इससे दिन और रात के तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

    दिन में नर्मदापुरम सबसे गर्म, रात में कल्याणपुर सबसे ठंडी

    मंगलवार को प्रदेश के भोपाल, इंदौर, दमोह, खजुराहो, मंडला, सागर, टीकमगढ़, बैतूल, गुना, धार, खंडवा, खरगोन, रायसेन, रतलाम और नर्मदापुरम में पारा 30 डिग्री से ऊपर गया। नर्मदापुरम सबसे ज्यादा गर्म, 33 डिग्री के साथ, रहा। रात में सबसे ठंडा रहा शहडोल का कल्याणपुर, जहां न्यूनतम तापमान 4.5 डिग्री दर्ज किया गया।

    अन्य शहरों में न्यूनतम तापमान इस प्रकार रहा:
    कटनी (करौंदी) – 5.9 डिग्री
    अनूपपुर (अमरकंटक) – 7.8 डिग्री
    खजुराहो – 8.2 डिग्री
    पचमढ़ी-उमरिया – 8.4 डिग्री
    रीवा – 8.5 डिग्री
    शिवपुरी – 9 डिग्री
    मंडला – 9.1 डिग्री
    दतिया – 9.5 डिग्री
    नौगांव – 9.8 डिग्री

    पहाड़ों में बर्फ पिघलने के बाद मौसम में आएगा बदलाव

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में साइक्लोनिक सर्कुलेशन और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हैं। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इससे अगले दो दिन प्रदेश में तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। भोपाल, इंदौर और उज्जैन समेत अधिकांश शहरों में मंगलवार को तेज धूप खिली रही, जिससे दिन का तापमान बढ़ा। लेकिन रात और सुबह ठंड का असर बरकरार रहेगा।

    आने वाले दिनों का पूर्वानुमान:

    12 फरवरी: दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी, दिन में तेज धूप
    13 फरवरी: तापमान में 3-4 डिग्री तक गिरावट, रात और सुबह ठंड बनी रहेगी