Tag: India Economy

  • रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर

    रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर


    नई दिल्ली। भारत में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। CBRE South Asia Pvt. Ltd. की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी यानी घर खरीदने की क्षमता स्थिर रहने की संभावना है। बढ़ती आय और सरकार की सहायक नीतियों के चलते प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों का असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    आय बढ़ेगी, EMI का बोझ होगा कम

    रिपोर्ट ‘इंडिया रेसिडेंशियल मार्केट आउटलुक 2026’ में कहा गया है कि 2021 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब लोगों की आय प्रॉपर्टी की कीमतों से तेज गति से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा होम बायर्स को मिलेगा क्योंकि उनकी EMI का बोझ कम होगा और वे आसानी से घर खरीदने का फैसला ले सकेंगे।

    बड़े शहरों में दिखेगा असर

    इस रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया है। 2021 से 2024 के बीच इन शहरों में प्रॉपर्टी कीमतों और ब्याज दरों में तेजी के कारण अफोर्डेबिलिटी पर दबाव बढ़ा था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई गई है।

    बदल रहा है रियल एस्टेट का ट्रेंड

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कम होती ब्याज दरें, धीमी कीमत वृद्धि और बढ़ती आय—ये तीनों मिलकर हाउसिंग डिमांड को मजबूत बनाएंगे। 2026 से 2028 के बीच EMI और आय का अनुपात स्थिर रहने से बाजार में संतुलन बनेगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।

    प्रीमियम और लग्जरी घरों की बढ़ी मांग

    रिपोर्ट में एक और दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है-लोग अब प्रीमियम और लग्जरी घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी करीब 27% रही, जबकि इस सेगमेंट में बिक्री सालाना आधार पर 30% से ज्यादा बढ़ी है। यह संकेत देता है कि खरीदार अब बेहतर सुविधाओं और लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    2030 तक और मजबूत होगा सेक्टर

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को और मजबूती मिलेगी। बढ़ती आय, शहरीकरण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हाउसिंग सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ बनी रहने की संभावना है।

    निवेश और खरीदारों के लिए सुनहरा मौका

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां घर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों के लिए अनुकूल होती दिख रही हैं। अगर ब्याज दरें नियंत्रित रहती हैं और आय में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में घर खरीदना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो सकता है।

  • UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN Secretary-General

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस (UN Secretary-General Antonio Guterres) ने कहा है कि भारत (India0 वैश्विक मामलों में प्रभाव रखने वाली एक ‘बेहद सफल’ उभरती अर्थव्यवस्था है और यह एआई शिखर सम्मेलन (AI Summit) के लिए उपयुक्त स्थान है। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (‘India-AI Impact Summit 2026’) से गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम मेधा (AI) से पूरी दुनिया को लाभ होना चाहिए, न कि यह केवल विकसित देशों या दो महाशक्तियों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार हो।

    उन्होंने कहा, ‘मैं इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत को हार्दिक बधाई देता हूं। यह अत्यंत आवश्यक है कि एआई का विकास हर किसी के लाभ के लिए हो और ‘ग्लोबल साउथ’ के देश भी एआई के लाभ का हिस्सा बनें।’ ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

    यह उच्च स्तरीय कार्यक्रम 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला है जो ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में आयोजित होने वाला पहला एआई शिखर सम्मेलन होगा और यह ‘लोग, धरती और प्रगति’ के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है। गुतारेस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि ”यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि एआई केवल सर्वाधिक विकसित देशों का विशेषाधिकार हो’।

    गुतारेस की इस टिप्पणी को स्पष्ट रूप से अमेरिका और चीन पर केन्द्रित माना जा रहा है। गुतारेस ने कहा, ”यह बेहद आवश्यक है कि कृत्रिम मेधा मानव जाति के लाभ के लिए एक सार्वभौमिक साधन बने।’ उन्होंने कहा, ‘भारत की भूमिका आज एक बेहद सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में है और यह न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में बल्कि वैश्विक मामलों में भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत बिल्कुल उपयुक्त जगह है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि एआई की अपार संभावनाओं एवं इसके सभी जोखिमों के साथ इस पर गहराई से चर्चा हो क्योंकि एआई पूरी दुनिया से संबंधित है, न कि केवल कुछ लोगों से।’


    सम्मेलन में कौन से नेता लेंगे हिस्सा

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिन नेताओं ने शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज पेरेज-कास्टेजोन, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक शामिल हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, यूनान के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस, कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओलझास बेक्टेनोव और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भी ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में शामिल होने की पुष्टि की है।

  • भारत की आबादी ही उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है: अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो

    भारत की आबादी ही उसकी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत है: अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो


    नई दिल्ली ।अमेरिका में अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो अगस्टिन कॉसिनो ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर बड़ा बयान दिया है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ खास बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसकी विशाल आबादी है। उनके अनुसार भारत न केवल दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है बल्कि यहां के लोगों में टैलेंट और क्रिएटिव सोच की भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    राजदूत कॉसिनो ने कहा कि जब भारत सरकार ने पाबंदियां, सीमाएं और अनावश्यक रेगुलेशन हटाए तो भारतीय लोगों की क्षमताएं खुलकर सामने आईं। यही वजह है कि पिछले दस से पंद्रह वर्षों में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत की असली ताकत उसके लोग हैं और यही उसे आगे बढ़ा रही है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर बात करते हुए अर्जेंटीना के राजदूत ने कहा कि पीएम मोदी को बड़ी सफलता मिली है क्योंकि भारत की अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में छह से आठ प्रतिशत की दर से बढ़ी है। उन्होंने इसे आर्थिक नीति और विनियमन में ढील का सफल उदाहरण बताया।

    कॉसिनो ने यह भी साझा किया कि जब प्रधानमंत्री मोदी अर्जेंटीना गए थे तब उन्हें राष्ट्रपति जेवियर माइली के साथ हुई बैठक में शामिल होने का अवसर मिला था। इस दौरान विनियमन में ढील अनावश्यक नियमों को हटाने और लोगों को कम से कम सरकारी हस्तक्षेप के साथ आगे बढ़ने का मौका देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।भारत में विदेशी निवेश को लेकर पूछे गए सवाल पर राजदूत ने कहा कि वह भारत को यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि उसे क्या करना चाहिए क्योंकि यह एक घरेलू नीति का विषय है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जब देश अपनी अर्थव्यवस्था खोलते हैं और ज्यादा उत्पादों को आने की अनुमति देते हैं तो इसका फायदा उपभोक्ताओं और घरेलू खपत दोनों को मिलता है।

    उन्होंने आगे कहा कि भारत इस दिशा में अच्छा काम कर रहा है और अर्जेंटीना भारत की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा में और अधिक योगदान देने के लिए तैयार है। उनके अनुसार भारत और अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के लिए पूरक हैं और यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सकती है।

  • भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल..

    भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में ऐतिहासिक उछाल..


    नई दिल्ली।भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जबरदस्त मजबूती देखने को मिली है। 16 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.167 बिलियन डॉलर की तेज बढ़त के साथ 701.360 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह उछाल न केवल हाल के महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि में से एक माना जा रहा है, बल्कि यह भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भरोसे को भी दर्शाता है।इससे पहले 9 जनवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में केवल 392 मिलियन डॉलर की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। ऐसे में एक ही सप्ताह में 14 अरब डॉलर से अधिक की छलांग को अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ बेहद सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक फॉरेन करेंसी एसेट्स यानी एफसीए इस वृद्धि में प्रमुख कारण रहा। 16 जनवरी को समाप्त सप्ताह में एफसीए में 9.652 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जिससे इसकी कुल वैल्यू बढ़कर 560.518 बिलियन डॉलर हो गई। एफसीए में अमेरिकी डॉलर के साथ-साथ यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनका मूल्यांकन डॉलर के संदर्भ में किया जाता है।सोने के भंडार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 4.623 बिलियन डॉलर बढ़कर 117.454 बिलियन डॉलर हो गई। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है और इसमें बढ़ोतरी भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को मजबूत बनाती है।

    हालांकि, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर और आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजिशन में हल्की गिरावट दर्ज की गई। एसडीआर की वैल्यू 35 मिलियन डॉलर घटकर 18.704 बिलियन डॉलर रह गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में रिजर्व पोजिशन 73 मिलियन डॉलर घटकर 4.684 बिलियन डॉलर पर आ गई।आंकड़ों पर नजर डालें तो इससे पहले 17 अक्टूबर 2025 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 702.25 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंचा था। वहीं, देश का अब तक का ऑल-टाइम हाई विदेशी मुद्रा भंडार 704.89 बिलियन डॉलर रहा है, जो सितंबर 2024 में दर्ज किया गया था। मौजूदा आंकड़े उस रिकॉर्ड स्तर के बेहद करीब हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश के लिए मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का अहम संकेतक होता है। यह न केवल आयात भुगतान और बाहरी झटकों से निपटने में मदद करता है, बल्कि मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को सहारा देता है।

    बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार इस बात का संकेत भी है कि देश में विदेशी निवेश और डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलती है। कुल मिलाकर, विदेशी मुद्रा भंडार में यह उछाल भारत की आर्थिक स्थिति के लिए बेहद सकारात्मक और भरोसेमंद संकेत के रूप में देखा जा रहा है।