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  • कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं

    कॉकरोच पार्टी ने NEET आंदोलन किया खत्म, कहा-प्रदर्शनकारी अब अपने घर लौट जाएं


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कई दिनों से चल रहे आंदोलन को लेकर शनिवार को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया जब कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ हुई वार्ता के बाद अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। संगठन ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक सहमति बनी है। इसी भरोसे के आधार पर जंतर मंतर पर चल रहा प्रदर्शन समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

    पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ तीन चरणों में विस्तृत बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि संगठन की तीन प्रमुख मांगें थीं जिनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज मामलों और एफआईआर को वापस लेना तथा भविष्य में आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नई कानूनी कार्रवाई नहीं किए जाने की गारंटी शामिल थी। उनके अनुसार सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाया है।

    संगठन ने यह भी दावा किया कि उसकी एक अन्य प्रमुख मांग उन परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी थी जिन्होंने कथित रूप से नीट विवाद के दौरान अपने परिजनों को खोया। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर भी सरकार के साथ चर्चा हुई और संबंधित मुद्दों पर विचार का आश्वासन मिला। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

    कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी साझा करने का भरोसा दिया है। उनके अनुसार दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर की प्रतियां अगले कुछ दिनों में संगठन को उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि तय प्रक्रिया के तहत इन मामलों को वापस लेने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

    सौरव दास ने कहा कि संगठन सरकार की नीयत पर विश्वास जताते हुए आंदोलन समाप्त कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय इस समझ के साथ लिया गया है कि सरकार निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आश्वासनों को पूरा करेगी। यदि तय समय में आवश्यक कार्रवाई होती है तो यह संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता मानी जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था और अब जब सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान का रास्ता अपनाया है तो संगठन भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए धरना समाप्त कर रहा है। पार्टी के नेताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में सभी लंबित मुद्दों पर औपचारिक कार्रवाई पूरी हो जाएगी और आंदोलन से जुड़े लोगों को राहत मिलेगी।

    इस पूरे घटनाक्रम के बाद जंतर मंतर पर कई दिनों से चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया। संगठन के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत के जरिए समाधान निकलना सबसे बेहतर रास्ता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों पर तय समय के भीतर क्या कार्रवाई करती है।

  • देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर

    देशव्यापी छात्र प्रदर्शन से पहले हाई अलर्ट, गृह मंत्रालय सतर्क, सोशल मीडिया और एआई आधारित प्रचार सामग्री पर नजर


    नई दिल्ली । देशव्यापी छात्र प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों को भी किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही सामग्री पर नजर बनाए हुए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों के पास ऐसे इनपुट हैं कि बड़े प्रदर्शनों के दौरान कुछ असामाजिक या बाहरी तत्व माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। विशेष रूप से सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

    सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री की निगरानी कर रही हैं। इसमें एआई आधारित प्रचार सामग्री भी शामिल है, जिसकी प्रामाणिकता और संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी ऑनलाइन सामग्री को लेकर कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

    खुफिया एजेंसियों ने राज्यों को भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रमुख चौराहों और बड़े शहरों के महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी नेटवर्क का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की भी तैयारी रखी गई है।

    केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की इकाइयों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी राज्य से अतिरिक्त सुरक्षा बल की मांग आती है तो आवश्यक कार्रवाई तुरंत की जा सके। इसका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

    हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में छात्र संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शनों में कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी भाग लिया था। कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव तथा झड़प की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत रखने की तैयारी की गई है।

    प्रशासन ने प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। साथ ही अफवाहों या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं पर ही विश्वास करने की सलाह दी गई है।

    Tags: Student Protest, Home Ministry, Security Alert, Intelligence Agencies, India News

  • त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप सुसाइड की आशंका जांच में जुटीं एजेंसियां

    त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप सुसाइड की आशंका जांच में जुटीं एजेंसियां


    उत्तर प्रदेश । यूपी के बागपत जिले के मूल निवासी और त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक अनुराग धनखड़ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर दिया है। सोमवार सुबह उनका शव अगरतला स्थित पुलिस मुख्यालय में मिला। अधिकारियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है हालांकि पुलिस और फॉरेंसिक टीम हर पहलू की गहन जांच कर रही है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक मौत के वास्तविक कारणों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

    अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी थे। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी पहचान एक सख्त और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में रही। वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की जांच में भी उनकी अहम भूमिका रही थी जिसके कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे।

    उनकी अचानक मौत की खबर सामने आते ही पुलिस विभाग और प्रशासनिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। घटनास्थल को सुरक्षित कर पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार घटनास्थल से मिले सभी तथ्यों और परिस्थितियों का वैज्ञानिक तरीके से विश्लेषण किया जा रहा है ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके।

    अनुराग धनखड़ उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे। ग्रामीणों के अनुसार वे करीब पच्चीस वर्ष पहले आखिरी बार अपने पैतृक गांव आए थे। गांव में उनका पुश्तैनी मकान आज भी मौजूद है लेकिन लंबे समय से बंद पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार के सदस्य अब गांव में नहीं रहते।

    उनका शुरुआती जीवन बेहद सामान्य माहौल में बीता। उन्होंने गांव के प्राथमिक विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और बाद में उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चले गए। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। मेहनत और ईमानदारी के दम पर उन्होंने पुलिस सेवा में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अंततः त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक बने।

    परिवार में उनकी पत्नी कल्पना और बेटा अभिषेक हैं। अभिषेक वर्तमान में कनाडा में रहते हैं। उनके दो भाई भी हैं जिनमें एक बड़ौत में व्यवसाय करते हैं जबकि दूसरे वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद निजी क्षेत्र में कार्यरत रहे हैं।

    उनके बचपन के मित्रों ने उन्हें अनुशासित मेहनती और खेलों में रुचि रखने वाला व्यक्ति बताया। उनके साथ पढ़ने वाले साथियों के अनुसार वे वॉलीबॉल के अच्छे खिलाड़ी थे और हमेशा नेतृत्व की क्षमता दिखाते थे। यही गुण आगे चलकर उनके प्रशासनिक जीवन में भी दिखाई दिए।

    फिलहाल पुलिस मुख्यालय में हुई इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जांच एजेंसियां हर पहलू की निष्पक्ष जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट फॉरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस बीच पुलिस विभाग ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और पूरे मामले की पारदर्शी जांच का भरोसा दिलाया है। देश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में गिने जाने वाले अनुराग धनखड़ का अचानक इस तरह दुनिया से चले जाना प्रशासनिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

  • संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा

    संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट जेलों के भीतर मोबाइल और प्रतिबंधित सामान का खेल नहीं थम रहा


    नई दिल्ली । देश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि मोबाइल फोन समेत कई प्रतिबंधित सामान बड़ी आसानी से जेलों के भीतर पहुंच रहे हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि आधुनिक सुरक्षा उपकरण जैमर और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के बावजूद यह सिलसिला थम नहीं रहा है। रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में जेल स्टाफ के साथ अस्पताल से जुड़े कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है जिससे जेल सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।

    समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जेलों में लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने वाले कर्मचारियों और कैदियों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि कई मामलों में सांठगांठ विकसित हो जाती है और प्रतिबंधित सामान अंदर पहुंचाने का रास्ता आसान बन जाता है। समिति ने सुझाव दिया है कि जेल कर्मचारियों का नियमित अंतराल पर तबादला किया जाए ताकि इस तरह की मिलीभगत की संभावना कम हो सके।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश की अधिकांश जेलों में आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की कमी है। कई स्थानों पर लगे जैमर प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहे हैं जबकि सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। इसलिए गृह मंत्रालय से सिफारिश की गई है कि राज्यों को पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर हैंड हेल्ड स्कैनर बैगेज स्कैनर बॉडी वॉर्न कैमरे आधुनिक सीसीटीवी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरण खरीदे जा सकें। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की पेशी को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है जिससे जेल से बाहर ले जाने की जरूरत कम हो सके।

    हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने जेल सुरक्षा पर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जेल के भीतर से मोबाइल फोन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी भी पहले कई बार यह संकेत दे चुकी है कि कुछ संगठित अपराधी जेल के भीतर से ही उगाही ड्रग तस्करी हवाला और टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों का संचालन करते रहे हैं।

    पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारियों का भी मानना है कि जेल मैनुअल में समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है। उनका कहना है कि केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं होगा क्योंकि कई मामलों में प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी और भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तब तक सुधार की प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं बल्कि सुधार गृह भी हैं। यदि जेलों के भीतर ही आपराधिक गतिविधियां संचालित होती रहेंगी तो कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए खतरा बढ़ेगा। ऐसे में संसदीय समिति की सिफारिशों को गंभीरता से लागू करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है ताकि जेलों की सुरक्षा मजबूत हो सके और अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

  • ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत

    ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत


    मध्यप्रदेश । कर्नाटक के बेंगलुरु के निकट स्थित मदापट्टना की एक ग्रेनाइट खदान में गुरुवार को हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। करीब 40 फीट ऊंचाई से विशाल चट्टान गिरने से मध्य प्रदेश के पांच मजदूरों समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि चट्टान की चपेट में आने से ट्रैक्टर और लोडिंग वाहन पूरी तरह टूटकर कई हिस्सों में बिखर गए। खदान में काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा तफरी मच गई और हर तरफ चीख पुकार सुनाई देने लगी।

    हादसे के समय खदान में करीब 16 मजदूर पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का कार्य चल रहा था तभी अचानक विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे आ गिरी। नीचे काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई लोग भारी मलबे के नीचे दब गए। राहत एवं बचाव दल ने कई घंटे तक अभियान चलाकर घायलों और मृतकों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान भुवनेश्वर सिंह गौंड राजपाल सिंह रामअवतार सिंह और राजेश प्रसाद चौधरी के रूप में हुई है जबकि एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं गुलाब सिंह राजपाल सिंह और छोटू लाल सहित कई मजदूर घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश मजदूर बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कर्नाटक में काम करने गए थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चट्टान का वजन इतना अधिक था कि उसकी चपेट में आते ही ट्रैक्टर और अन्य मशीनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई मजदूरों के सिर हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। अस्पताल और खदान परिसर में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। एक मृतक के परिवार ने बताया कि वह बेटियों की शादी के बाद हुए कर्ज को चुकाने के लिए मजदूरी करने गया था लेकिन अब परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य भी नहीं रहा।

    हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में ब्लास्टिंग की बजाय चट्टान खिसकने या मिट्टी धंसने की आशंका सामने आई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक कारण स्पष्ट होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने खदान की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि राज्य सरकार लगातार कर्नाटक प्रशासन के संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। खदान मालिक ने मृतकों के परिजनों को दस दस लाख रुपए तथा घायलों को पांच पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र

    भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र


    नई दिल्ली। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के धाम से जुड़ा कोई भी मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होता बल्कि यह पूरे सनातन समाज की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि किसी ने भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य किया है तो उसे कानून के साथ साथ ईश्वर का भी महादंड मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले से विशेष जांच एजेंसियां और एसआईटी कर रही हैं इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों और कुछ नामों पर एफआईआर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने देना चाहिए।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के मन में इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनसे इस विषय पर चर्चा हुई थी और उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया था। उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है इसलिए इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    मंदिरों के प्रबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जिससे मंदिरों और संत समाज पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सेवा और प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो पूरी निष्ठा के साथ सनातन परंपरा भगवान और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित हों। इससे मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे।

    अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वहां धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समरसता देखने को मिलती है। उनके अनुसार वहां पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाले लोग दीपावली जैसे त्योहार भी मनाते हैं और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने की जरूरत है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भोपाल में हबीबगंज स्थित कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर जांच और बेहतर इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सेंटर भोपाल सहित आसपास के जिलों के मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।

  • TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित

    TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित



    नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शिक्षकों को केवल अपनी नौकरी बचाने की चिंता में नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।

    यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में 2025 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और इसके लिए योग्य शिक्षकों का होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक उनके समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

    तमिलनाडु सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि इस फैसले से राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं और कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी। इस पर अदालत ने कहा कि केवल नौकरी बचाने के तर्क से बच्चों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    जस्टिस दत्ता ने सुनवाई के दौरान कड़ा शब्दों में कहा कि यह सोच सही नहीं है कि कोई सिर्फ अदालत से आदेश लेकर अपनी नौकरी सुरक्षित करना चाहता है, जबकि बच्चों की शिक्षा के बारे में गंभीरता से विचार न किया जाए।

    वहीं कुछ याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर TET लागू करना अनुचित है और इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी प्रभावित होगी। इस पर अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोपरि है और कानून के अनुसार न्यूनतम योग्यता का पालन जरूरी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब देशभर के लगभग 25 लाख से अधिक शिक्षकों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी नौकरी और सेवा शर्तों पर पड़ सकता है।

  • शपथ समारोह को लेकर बंगाल में जोश, 9 मई को नई सरकार ले सकती है शपथ, असम में भी तैयारियां शुरू

    शपथ समारोह को लेकर बंगाल में जोश, 9 मई को नई सरकार ले सकती है शपथ, असम में भी तैयारियां शुरू

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और असम में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलते समीकरणों की ओर संकेत कर रहे हैं। दोनों राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। एक ओर पश्चिम बंगाल में शपथ समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर असम में भी नई राजनीतिक व्यवस्था के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण को लेकर तैयारियों ने अंतिम रूप ले लिया है। राजधानी कोलकाता के प्रमुख मैदान में होने वाले इस समारोह को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में नेताओं और आमंत्रित अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

    राज्य की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से एक ही दल का शासन रहा है। हालिया चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दी है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इधर असम में भी राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर नई सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे नई व्यवस्था के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक व्यवस्था जारी रखने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद अब राजनीतिक दलों में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    सूत्रों के अनुसार, असम में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर भी तैयारी चल रही है और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस समारोह में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है, जिससे कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दोनों राज्यों में हो रहे इन राजनीतिक परिवर्तनों को आने वाले समय की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। जहां एक ओर नई सरकारें अपनी प्राथमिकताओं और योजनाओं के साथ सत्ता में कदम रखने जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि नीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण में भी एक नई शुरुआत का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकारें जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाती हैं और अपने वादों को किस तरह से अमल में लाती हैं।

  • कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में संदिग्ध पोस्टर सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुल डोडा क्षेत्र की एक दीवार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के समर्थन में पोस्टर चिपकाए जाने का मामला सामने आया है।

    इससे जुड़ी एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी। वीडियो में दावा किया गया है कि ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट’ नाम के एक आजादी समर्थक संगठन ने यह पोस्टर लगाया है। पोस्टर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की गई है और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन के लिए आभार जताया गया है।

    मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, डोडा पुलिस ने BNS की धारा 353(1) के तहत केस (FIR नंबर 95/2026) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डोडा के डीएसपी कृष्ण रतन ने बताया कि वीडियो में आपत्तिजनक सामग्री है, जिससे क्षेत्र में तनाव या अफरा-तफरी फैल सकती है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है।

    अब तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया है, क्योंकि मौके से ऐसा कोई पोस्टर बरामद नहीं हुआ है। पुलिस वीडियो की जियो-टैग लोकेशन की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना वास्तव में वहीं हुई या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है।