Tag: India News

  • ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत

    ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत


    मध्यप्रदेश । कर्नाटक के बेंगलुरु के निकट स्थित मदापट्टना की एक ग्रेनाइट खदान में गुरुवार को हुए भीषण हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। करीब 40 फीट ऊंचाई से विशाल चट्टान गिरने से मध्य प्रदेश के पांच मजदूरों समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि पांच अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि चट्टान की चपेट में आने से ट्रैक्टर और लोडिंग वाहन पूरी तरह टूटकर कई हिस्सों में बिखर गए। खदान में काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरा तफरी मच गई और हर तरफ चीख पुकार सुनाई देने लगी।

    हादसे के समय खदान में करीब 16 मजदूर पत्थर निकालने का काम कर रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का कार्य चल रहा था तभी अचानक विशाल ग्रेनाइट चट्टान खिसककर नीचे आ गिरी। नीचे काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई लोग भारी मलबे के नीचे दब गए। राहत एवं बचाव दल ने कई घंटे तक अभियान चलाकर घायलों और मृतकों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।

    इस हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूर मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी क्षेत्र के रहने वाले थे। मृतकों की पहचान भुवनेश्वर सिंह गौंड राजपाल सिंह रामअवतार सिंह और राजेश प्रसाद चौधरी के रूप में हुई है जबकि एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं गुलाब सिंह राजपाल सिंह और छोटू लाल सहित कई मजदूर घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि अधिकांश मजदूर बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कर्नाटक में काम करने गए थे।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चट्टान का वजन इतना अधिक था कि उसकी चपेट में आते ही ट्रैक्टर और अन्य मशीनें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। कई मजदूरों के सिर हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं। अस्पताल और खदान परिसर में मौजूद परिजनों का रो रोकर बुरा हाल था। एक मृतक के परिवार ने बताया कि वह बेटियों की शादी के बाद हुए कर्ज को चुकाने के लिए मजदूरी करने गया था लेकिन अब परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य भी नहीं रहा।

    हादसे के बाद कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में ब्लास्टिंग की बजाय चट्टान खिसकने या मिट्टी धंसने की आशंका सामने आई है। विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक कारण स्पष्ट होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नए सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने खदान की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

    मध्य प्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि राज्य सरकार लगातार कर्नाटक प्रशासन के संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों से जुड़ी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। खदान मालिक ने मृतकों के परिजनों को दस दस लाख रुपए तथा घायलों को पांच पांच लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र

    भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र


    नई दिल्ली। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के धाम से जुड़ा कोई भी मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होता बल्कि यह पूरे सनातन समाज की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि किसी ने भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य किया है तो उसे कानून के साथ साथ ईश्वर का भी महादंड मिलेगा।

    उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले से विशेष जांच एजेंसियां और एसआईटी कर रही हैं इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों और कुछ नामों पर एफआईआर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने देना चाहिए।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के मन में इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनसे इस विषय पर चर्चा हुई थी और उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया था। उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है इसलिए इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    मंदिरों के प्रबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जिससे मंदिरों और संत समाज पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सेवा और प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो पूरी निष्ठा के साथ सनातन परंपरा भगवान और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित हों। इससे मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे।

    अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वहां धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समरसता देखने को मिलती है। उनके अनुसार वहां पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाले लोग दीपावली जैसे त्योहार भी मनाते हैं और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने की जरूरत है।

    धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भोपाल में हबीबगंज स्थित कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर जांच और बेहतर इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सेंटर भोपाल सहित आसपास के जिलों के मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान

    ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की एंट्री से सियासत गरम, 2029 चुनाव और केजरीवाल संग गठजोड़ पर अभिजीत ने दिया बयान


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया पर अचानक उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ इन दिनों राजनीतिक और डिजिटल दोनों मंचों पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस आंदोलन के पीछे 30 वर्षीय अभिजीत दीपके हैं, जिन्होंने हाल ही में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स किया है। उनका दावा है कि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि देश के युवाओं की नाराजगी और हताशा की आवाज है।

    अभिजीत ने बताया कि कुछ दिन पहले तक वह अमेरिका में नौकरी के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी ने उन्हें झकझोर दिया जिसमें सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से की गई थी। इसी के बाद उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि अगर यही बयान किसी राजनीतिक नेता ने दिया होता तो शायद इतना असर नहीं होता, लेकिन जब संविधान की रक्षा करने वाले पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करे तो युवाओं को चोट पहुंचना स्वाभाविक है।

    अभिजीत के मुताबिक, पार्टी को शुरू हुए महज कुछ ही दिनों में लाखों लोग इससे जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर पार्टी के 33 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि वेबसाइट पर लाखों युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि यह किसी प्रायोजित अभियान का नतीजा नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर जमा गुस्से का विस्फोट है।

    अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी से रिश्तों को लेकर भी अभिजीत ने खुलकर बात की। उन्होंने माना कि वह 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के कम्युनिकेशन विभाग से जुड़े थे और शिक्षा-स्वास्थ्य मॉडल से प्रभावित होकर काम किया था। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल उनकी नई मुहिम किसी भी पारंपरिक राजनीतिक दल से दूरी बनाए रखना चाहती है।

    केजरीवाल के समर्थन को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी समर्थन दे सकता है, लेकिन ‘जेन-जी’ के युवा नहीं चाहते कि इस आंदोलन पर किसी स्थापित पार्टी की छाया पड़े। 2029 के चुनाव लड़ने के सवाल पर अभिजीत ने कहा कि अभी इस पर फैसला लेना जल्दबाजी होगी। पहले युवाओं की राय ली जाएगी और उसी आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनका कहना है कि मौजूदा राजनीति युवाओं की असली समस्याओं से दूर हो चुकी है और अब राजनीतिक विमर्श बदलने की जरूरत है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी किया है। इसमें न्यायपालिका और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, महिलाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व, मीडिया स्वामित्व पर सवाल और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हैं। अभिजीत का कहना है कि यह एक आदर्श लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा में सोच है।

    उन्होंने मौजूदा राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में वर्षों से हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर राजनीति हो रही है, जबकि युवाओं के सामने रोजगार, शिक्षा, तकनीक और भविष्य जैसे बड़े सवाल खड़े हैं। उन्होंने ‘नीट पेपर लीक’ मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सिस्टम की विफलता ने कई युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है।

    अभिजीत ने दावा किया कि यह आंदोलन केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उनका कहना है कि देश के युवा अब अपनी आवाज लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए तैयार हैं। फंडिंग और संगठनात्मक ढांचे को लेकर उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम रणनीति तैयार कर रही है और जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और लंबे समय तक चलने वाला युवा आंदोलन खड़ा करना है।

  • TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित

    TET अनिवार्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “नौकरी नहीं, पहले बच्चों की शिक्षा सोचें”, फैसला सुरक्षित



    नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि शिक्षकों को केवल अपनी नौकरी बचाने की चिंता में नहीं रहना चाहिए, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।

    यह मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जो मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में 2025 के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 1 से 8 तक के सभी सेवारत शिक्षकों को दो साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है और इसके लिए योग्य शिक्षकों का होना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक उनके समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

    तमिलनाडु सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि इस फैसले से राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं और कई स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी। इस पर अदालत ने कहा कि केवल नौकरी बचाने के तर्क से बच्चों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    जस्टिस दत्ता ने सुनवाई के दौरान कड़ा शब्दों में कहा कि यह सोच सही नहीं है कि कोई सिर्फ अदालत से आदेश लेकर अपनी नौकरी सुरक्षित करना चाहता है, जबकि बच्चों की शिक्षा के बारे में गंभीरता से विचार न किया जाए।

    वहीं कुछ याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि लंबे समय से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर TET लागू करना अनुचित है और इससे लाखों शिक्षकों की नौकरी प्रभावित होगी। इस पर अदालत ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सर्वोपरि है और कानून के अनुसार न्यूनतम योग्यता का पालन जरूरी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले पर विस्तार से सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब देशभर के लगभग 25 लाख से अधिक शिक्षकों की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका सीधा असर उनकी नौकरी और सेवा शर्तों पर पड़ सकता है।

  • शपथ समारोह को लेकर बंगाल में जोश, 9 मई को नई सरकार ले सकती है शपथ, असम में भी तैयारियां शुरू

    शपथ समारोह को लेकर बंगाल में जोश, 9 मई को नई सरकार ले सकती है शपथ, असम में भी तैयारियां शुरू

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल और असम में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलते समीकरणों की ओर संकेत कर रहे हैं। दोनों राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकारों के गठन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। एक ओर पश्चिम बंगाल में शपथ समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर असम में भी नई राजनीतिक व्यवस्था के गठन को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    पश्चिम बंगाल में नई सरकार के शपथ ग्रहण को लेकर तैयारियों ने अंतिम रूप ले लिया है। राजधानी कोलकाता के प्रमुख मैदान में होने वाले इस समारोह को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह सुबह आयोजित किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में नेताओं और आमंत्रित अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

    राज्य की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से एक ही दल का शासन रहा है। हालिया चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति को एक नई दिशा दी है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।

    इधर असम में भी राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर नई सरकार के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है, जिससे नई व्यवस्था के गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और नई सरकार के गठन तक कार्यवाहक व्यवस्था जारी रखने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद अब राजनीतिक दलों में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    सूत्रों के अनुसार, असम में नई सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख को लेकर भी तैयारी चल रही है और इसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस समारोह में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है, जिससे कार्यक्रम को और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दोनों राज्यों में हो रहे इन राजनीतिक परिवर्तनों को आने वाले समय की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। जहां एक ओर नई सरकारें अपनी प्राथमिकताओं और योजनाओं के साथ सत्ता में कदम रखने जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है, बल्कि नीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण में भी एक नई शुरुआत का संकेत है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकारें जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतर पाती हैं और अपने वादों को किस तरह से अमल में लाती हैं।

  • कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में संदिग्ध पोस्टर सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुल डोडा क्षेत्र की एक दीवार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के समर्थन में पोस्टर चिपकाए जाने का मामला सामने आया है।

    इससे जुड़ी एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी। वीडियो में दावा किया गया है कि ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट’ नाम के एक आजादी समर्थक संगठन ने यह पोस्टर लगाया है। पोस्टर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की गई है और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन के लिए आभार जताया गया है।

    मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, डोडा पुलिस ने BNS की धारा 353(1) के तहत केस (FIR नंबर 95/2026) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डोडा के डीएसपी कृष्ण रतन ने बताया कि वीडियो में आपत्तिजनक सामग्री है, जिससे क्षेत्र में तनाव या अफरा-तफरी फैल सकती है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है।

    अब तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया है, क्योंकि मौके से ऐसा कोई पोस्टर बरामद नहीं हुआ है। पुलिस वीडियो की जियो-टैग लोकेशन की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना वास्तव में वहीं हुई या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

  • काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    नई दिल्ली। वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगामी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट तक के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

    शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों और मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़ी संख्या शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिस स्थान पर बड़ा जनसमूह जुटने की संभावना है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

    पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा घेरे में रखा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क सक्रिय किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सके। इसके साथ ही ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया गया है।

    भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई गई है। इससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो और शहर में आवाजाही सामान्य बनी रहे।

    कार्यक्रम के दौरान एक बड़े महिला सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    इसके अलावा प्रधानमंत्री के धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए भी विशेष तैयारी की गई है। शहर में उत्साह का माहौल है और लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दौरा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल रहे।

  • स्वीमिंग के दौरान अचानक गिरे बिजनेसमैन, साइलेंट हार्ट अटैक से मौत की आशंका

    स्वीमिंग के दौरान अचानक गिरे बिजनेसमैन, साइलेंट हार्ट अटैक से मौत की आशंका


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक वरिष्ठ कारोबारी की स्वीमिंग करते समय संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शुरुआती जांच में इसे ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।

     स्वीमिंग के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

    यह घटना टीटी नगर क्षेत्र स्थित तरुण पुष्कर की है। जानकारी के मुताबिक, शाहपुरा की अमतलाश कॉलोनी निवासी 63 वर्षीय संजय त्यागी रोज की तरह बुधवार शाम भी स्वीमिंग के लिए पहुंचे थे।

    शाम करीब 6 बजे जब वह पूल में तैर रहे थे, तभी अचानक बेसुध होकर पानी में गिर पड़े। पूल में पानी की गहराई महज 4 फीट थी, जिससे डूबने की संभावना कम मानी जा रही है।

     CPR देने के बावजूद नहीं बच पाई जान

    घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद ट्रेनर और अन्य लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और CPR देकर सांसें वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

     साइलेंट हार्ट अटैक की आशंका

    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर मामला साइलेंट हार्ट अटैक का लग रहा है। इस तरह के अटैक में अक्सर व्यक्ति को पहले कोई गंभीर लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति बिगड़ जाती है।

    फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और शॉर्ट पीएम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि हार्ट अटैक की पुष्टि होती है, तो यह एक और उदाहरण होगा कि फिटनेस एक्टिविटी के दौरान भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।

  • राहुल गांधी का खुलासा: मां के कमरे में पूरी रात जागकर बिताया समय

    राहुल गांधी का खुलासा: मां के कमरे में पूरी रात जागकर बिताया समय


    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की तबीयत को लेकर भावुक बयान दिया है। सोनिया गांधी को अस्वस्थ होने के कारण सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां राहुल गांधी पूरी रात उनके साथ अस्पताल के कमरे में मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां के कमरे में एक छोटे से सोफे पर सोए और एक बेटे की तरह उनकी सेहत को लेकर बेहद चिंतित थे।

    केरल रैली छोड़ मां के पास रहे

    राहुल गांधी ने केरल में आयोजित एक रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि वह वहां आना चाहते थे, लेकिन मां की तबीयत को देखते हुए उन्हें दिल्ली में ही रुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनका फर्ज था कि वह अपनी मां के साथ रहें। उन्होंने भरोसा जताया कि केरल के लोग उनकी स्थिति को समझेंगे।

    नर्स की सेवा से मिली तसल्ली

    राहुल गांधी ने अस्पताल में बिताई रात का जिक्र करते हुए एक खास अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि केरल की एक नर्स हर घंटे आकर सोनिया गांधी की जांच करती थी, उनका हाथ थामती थी और मुस्कुराकर उनका हौसला बढ़ाती थी। राहुल ने कहा कि पूरी रात उन्हें उसी नर्स की सेवा भावना से तसल्ली मिलती रही। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ऐसी नर्सें न सिर्फ मरीजों की देखभाल करती हैं, बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक सहारा देती हैं।

    नर्सों की सेवा भावना की सराहना

    राहुल गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब केरल की नर्सें और स्वास्थ्यकर्मी पूरी रात जागकर लोगों की सेवा करते हैं। उन्होंने सुबह नर्स से पूछा कि क्या वह सोती है, तो उसने जवाब दिया कि वह पूरी रात काम करती है। राहुल ने इसे समर्पण और सेवा का बेहतरीन उदाहरण बताया और कहा कि ऐसे लोग समाज की असली ताकत हैं।

    भाजपा-एलडीएफ पर भी साधा निशाना

    अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने राजनीतिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा और एलडीएफ के बीच मिलीभगत है। उनका कहना था कि राज्य में असल मुकाबला यूडीएफ और भाजपा-एलडीएफ गठजोड़ के बीच है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों दलों की नीतियों में ज्यादा अंतर नहीं है और वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।