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  • काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    काशी में हाई अलर्ट: पीएम मोदी के आगमन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद

    नई दिल्ली। वाराणसी में प्रधानमंत्री के आगामी दौरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। पूरे शहर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण से लेकर वीआईपी मूवमेंट तक के लिए विशेष योजना तैयार की है, ताकि कार्यक्रम बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।

    शहर के प्रमुख आयोजन स्थलों और मार्गों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मियों की भी बड़ी संख्या शामिल है, जिन्हें विशेष रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। जिस स्थान पर बड़ा जनसमूह जुटने की संभावना है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

    पूरे कार्यक्रम क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा घेरे में रखा गया है। निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक नेटवर्क सक्रिय किया गया है, जिससे हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जा सके। इसके साथ ही ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम भी लगाया गया है।

    भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है और यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों की योजना बनाई गई है। इससे आम लोगों को कम से कम असुविधा हो और शहर में आवाजाही सामान्य बनी रहे।

    कार्यक्रम के दौरान एक बड़े महिला सम्मेलन का आयोजन भी प्रस्तावित है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    इसके अलावा प्रधानमंत्री के धार्मिक कार्यक्रमों को देखते हुए भी विशेष तैयारी की गई है। शहर में उत्साह का माहौल है और लोग उनके स्वागत के लिए तैयार हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि दौरा पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल रहे।

  • स्वीमिंग के दौरान अचानक गिरे बिजनेसमैन, साइलेंट हार्ट अटैक से मौत की आशंका

    स्वीमिंग के दौरान अचानक गिरे बिजनेसमैन, साइलेंट हार्ट अटैक से मौत की आशंका


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक वरिष्ठ कारोबारी की स्वीमिंग करते समय संदिग्ध हालात में मौत हो गई। शुरुआती जांच में इसे ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अंतिम पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही होगी।

     स्वीमिंग के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

    यह घटना टीटी नगर क्षेत्र स्थित तरुण पुष्कर की है। जानकारी के मुताबिक, शाहपुरा की अमतलाश कॉलोनी निवासी 63 वर्षीय संजय त्यागी रोज की तरह बुधवार शाम भी स्वीमिंग के लिए पहुंचे थे।

    शाम करीब 6 बजे जब वह पूल में तैर रहे थे, तभी अचानक बेसुध होकर पानी में गिर पड़े। पूल में पानी की गहराई महज 4 फीट थी, जिससे डूबने की संभावना कम मानी जा रही है।

     CPR देने के बावजूद नहीं बच पाई जान

    घटना के तुरंत बाद वहां मौजूद ट्रेनर और अन्य लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और CPR देकर सांसें वापस लाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

     साइलेंट हार्ट अटैक की आशंका

    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर मामला साइलेंट हार्ट अटैक का लग रहा है। इस तरह के अटैक में अक्सर व्यक्ति को पहले कोई गंभीर लक्षण महसूस नहीं होते और अचानक स्थिति बिगड़ जाती है।

    फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और शॉर्ट पीएम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि हार्ट अटैक की पुष्टि होती है, तो यह एक और उदाहरण होगा कि फिटनेस एक्टिविटी के दौरान भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

  • डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा

    डॉ. अंबेडकर जयंती पर बड़ा फैसला: उम्रकैद काट रहे 9 बंदी हुए रिहा


    नई दिल्ली। ग्वालियर की सेंट्रल जेल में अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक अहम मानवीय निर्णय लिया गया। इस मौके पर आजीवन कारावास की सजा काट रहे 9 बंदियों को रिहा किया गया, जिनमें एक महिला बंदी भी शामिल है। शासन द्वारा यह निर्णय उनके अच्छे आचरण और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए लिया गया।

    14 साल से अधिक सजा काट चुके थे सभी बंदी
    रिहा किए गए सभी बंदी हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए थे और 14 साल से अधिक समय तक जेल में सजा काट चुके थे। वे एक ही प्रकरण से जुड़े थे और लंबे समय से उनके व्यवहार और सुधार को लगातार परखा जा रहा था।

    शासन की मंजूरी के बाद पूरी हुई प्रक्रिया
    जेल प्रशासन ने इन बंदियों के नाम और आचरण से संबंधित रिपोर्ट शासन को भेजी थी। प्रस्ताव पर स्वीकृति मिलने के बाद उनकी रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की गईं। जेल अधीक्षक विदित सरवईया के अनुसार, सभी बंदियों का आचरण संतोषजनक रहा, जिसके आधार पर उनकी शेष सजा माफ की गई।

    परिजनों से मिलकर भावुक हुए बंदी
    जेल से बाहर आते ही बंदियों ने अपने परिवारजनों से मुलाकात की। लंबे समय बाद मिलन के इस भावुक क्षण में कई बंदी और उनके परिजन भावुक नजर आए और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी जताई।

    सम्मान के साथ दी गई विदाई
    रिहाई से पहले जेल प्रशासन द्वारा सभी बंदियों को शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जेल अधिकारी और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस पहल को पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

    अब अन्य अवसरों पर भी मिल रही राहत
    पहले केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही इस तरह की सजा माफी दी जाती थी, लेकिन पिछले दो वर्षों से अंबेडकर जयंती और गांधी जयंती जैसे अवसरों पर भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे सुधार की दिशा में बंदियों को प्रोत्साहन मिल रहा है।

    रिहा हुए बंदियों के नाम
    रिहा किए गए बंदियों में सुरेश उर्फ सज्जन, पंचम जाटव, आशीष शर्मा, जमुना अहिरवार, छोटे और छोटया माली, अजय तोमर, मोहर सिंह, महेंद्र सिंह और लीलाबाई शामिल हैं।

  • राहुल गांधी का खुलासा: मां के कमरे में पूरी रात जागकर बिताया समय

    राहुल गांधी का खुलासा: मां के कमरे में पूरी रात जागकर बिताया समय


    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी की तबीयत को लेकर भावुक बयान दिया है। सोनिया गांधी को अस्वस्थ होने के कारण सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां राहुल गांधी पूरी रात उनके साथ अस्पताल के कमरे में मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां के कमरे में एक छोटे से सोफे पर सोए और एक बेटे की तरह उनकी सेहत को लेकर बेहद चिंतित थे।

    केरल रैली छोड़ मां के पास रहे

    राहुल गांधी ने केरल में आयोजित एक रैली को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए कहा कि वह वहां आना चाहते थे, लेकिन मां की तबीयत को देखते हुए उन्हें दिल्ली में ही रुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि एक बेटे के तौर पर उनका फर्ज था कि वह अपनी मां के साथ रहें। उन्होंने भरोसा जताया कि केरल के लोग उनकी स्थिति को समझेंगे।

    नर्स की सेवा से मिली तसल्ली

    राहुल गांधी ने अस्पताल में बिताई रात का जिक्र करते हुए एक खास अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि केरल की एक नर्स हर घंटे आकर सोनिया गांधी की जांच करती थी, उनका हाथ थामती थी और मुस्कुराकर उनका हौसला बढ़ाती थी। राहुल ने कहा कि पूरी रात उन्हें उसी नर्स की सेवा भावना से तसल्ली मिलती रही। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि ऐसी नर्सें न सिर्फ मरीजों की देखभाल करती हैं, बल्कि उनके परिवार को भी मानसिक सहारा देती हैं।

    नर्सों की सेवा भावना की सराहना

    राहुल गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया सो रही होती है, तब केरल की नर्सें और स्वास्थ्यकर्मी पूरी रात जागकर लोगों की सेवा करते हैं। उन्होंने सुबह नर्स से पूछा कि क्या वह सोती है, तो उसने जवाब दिया कि वह पूरी रात काम करती है। राहुल ने इसे समर्पण और सेवा का बेहतरीन उदाहरण बताया और कहा कि ऐसे लोग समाज की असली ताकत हैं।

    भाजपा-एलडीएफ पर भी साधा निशाना

    अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने राजनीतिक मुद्दों पर भी बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि केरल में भाजपा और एलडीएफ के बीच मिलीभगत है। उनका कहना था कि राज्य में असल मुकाबला यूडीएफ और भाजपा-एलडीएफ गठजोड़ के बीच है। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों दलों की नीतियों में ज्यादा अंतर नहीं है और वे जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं।

  • नरेंद्र मोदी ने बनाया नया इतिहास भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार प्रमुख रहने का रिकॉर्ड

    नरेंद्र मोदी ने बनाया नया इतिहास भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार प्रमुख रहने का रिकॉर्ड

    नई दिल्ली: भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सबसे लंबे समय तक निर्वाचित सरकार के प्रमुख रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है इस उपलब्धि के साथ उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है

    पवन कुमार चामलिंग ने मुख्यमंत्री के रूप में 8930 दिनों तक कार्य किया था जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को मिलाकर 8931 दिनों का आंकड़ा पार कर लिया है यह उपलब्धि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव निरंतर जनसमर्थन और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में की थी उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की वर्ष 1985 में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला इसके बाद वे लगातार चार बार 2001 2002 2007 और 2012 में मुख्यमंत्री बने और लगभग 12 साल 7 महीने तक राज्य का नेतृत्व किया उनके कार्यकाल को विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए जाना जाता है

    वर्ष 2014 में वे पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं उन्होंने 2014 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की और इस तरह वे लगातार तीन बार चुनाव जीतने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने

    प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले और योजनाएं लागू की गईं जिनका उद्देश्य देश के विकास और सामाजिक सुधार को गति देना रहा उनके नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी स्थिति को मजबूत किया

    यह उपलब्धि केवल आंकड़ों का रिकॉर्ड नहीं है बल्कि यह उनके लंबे राजनीतिक जीवन निरंतरता और देश के प्रति समर्पण का प्रतीक है यह दर्शाता है कि भारतीय लोकतंत्र में स्थिर नेतृत्व और जनता का विश्वास कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

  • रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी

    रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली
    ।न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है। बुधवार, 17 दिसंबर 2025, को एक अहम सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने रिटायरमेंट से ठीक पहले कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित किए जा रहे विवादित आदेशों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना क्रिकेट के आखिरी ओवर में लगाए जाने वाले छक्कों से करते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक करार दिया।

    यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है – CJ
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    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के एक जिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिन्हें रिटायरमेंट से महज 10 दिन पहले दो विवादित आदेश पारित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ कर रही थी।

    CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा

    कुछ न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्ति से पहले ऐसे आदेश पारित करने लगते हैं मानो वे क्रिकेट मैच के आखिरी ओवर में छक्के मार रहे हों। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है।

    गलत आदेश बनाम बेईमानी – फर्क जरूरी

    हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर गलत न्यायिक आदेश कदाचार नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी जज को केवल इसलिए निलंबित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका आदेश गलत पाया गया हो, क्योंकि ऐसे आदेशों को अपील या उच्च अदालत के जरिए सुधारा जा सकता है।

    लेकिन CJI ने एक अहम सवाल उठाया-

    अगर कोई आदेश स्पष्ट रूप से बेईमानी, पक्षपात या बाहरी हितों से प्रेरित हो, तो क्या उसे सिर्फ एक  गलती माना जा सकता है? यही सवाल इस पूरे मामले का केंद्र रहा।

    जज का पक्ष: बेदाग रिकॉर्ड का दावा

    मध्य प्रदेश के संबंधित जिला जज 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन 19 नवंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के चलते राज्य में जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, जिससे उनका कार्यकाल एक साल और बढ़ गया। जज की ओर से सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने दलील दी कि उनका पूरा सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है और उन्हें हमेशा सकारात्मक वार्षिक मूल्यांकन मिले हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ न्यायिक आदेशों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट का संतुलित रुख

    सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से आंशिक सहमति जताई कि न्यायिक त्रुटि और कदाचार के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने सीधे तौर पर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और जज को पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निलंबन से जुड़ी जानकारियां RTI के जरिए मांगना उचित तरीका नहीं है, खासकर जब मामला वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से जुड़ा हो। ऐसे मामलों में संस्थागत प्रक्रियाओं और अभ्यावेदन का सहारा लिया जाना चाहिए।

    न्यायपालिका की साख पर बड़ा संदेश

    CJI सूर्यकांत की यह टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि न्यायिक स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन उसके साथ ईमानदारी और जवाबदेही भी उतनी ही अहम है।यह फैसला और टिप्पणी न्यायपालिका के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित करती है। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने पद की गरिमा और निष्पक्षता को आखिरी दिन तक बनाए रखें, क्योंकि न्यायपालिका की साख किसी एक आदेश से भी प्रभावित हो सकती है।