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  • भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश

    भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से प्रभावित अमेरिका, मार्को रुबियो बोले- पीएम मोदी के नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर देश


    नई दिल्ली /वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से उभरती वैश्विक शक्तियों में शामिल हो चुका है और इस बदलाव के पीछे पीएम मोदी का नेतृत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन भारत को अमेरिका के सबसे करीबी और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में गिनता है तथा दोनों देशों के संबंध लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आर्थिक विकास की नई गति हासिल की है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। उनके अनुसार आज वैश्विक स्तर पर होने वाले बड़े फैसलों में भारत की राय को गंभीरता से सुना और महत्व दिया जाता है। यह बदलाव केवल आर्थिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि कूटनीति सुरक्षा तकनीक और वैश्विक रणनीति के स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत को केवल एक सहयोगी देश नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच विश्वास और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती दी है। उनके मुताबिक दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल भविष्य में भी साझेदारी को नई दिशा देगा।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और यही समानता दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जबकि अमेरिका सबसे पुराना लोकतंत्र है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं और कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम किया जा रहा है।

    रुबियो ने बताया कि दोनों देश अर्थव्यवस्था आपूर्ति श्रृंखला महत्वपूर्ण खनिज ऊर्जा सुरक्षा रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा जैसे विषयों पर लगातार साझेदारी मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में साझा हित मौजूद हैं और दोनों सरकारें मिलकर भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाश रही हैं।

    उन्होंने भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय की भी सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उनके अनुसार भारतीय अमेरिकी समाज ने अमेरिका के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक तथा आर्थिक संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है।

    रुबियो ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि रक्षा व्यापार अत्याधुनिक तकनीक ऊर्जा सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा रणनीति जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है। यही वजह है कि वाशिंगटन भारत को 21वीं सदी का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंध भविष्य में वैश्विक स्थिरता तथा आर्थिक विकास के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप अच्छे मित्र, दोनों की सोच और कार्यशैली में समानता: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप अच्छे मित्र, दोनों की सोच और कार्यशैली में समानता: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक संबंधों के बीच भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मित्रता को दोनों देशों की साझेदारी की सबसे मजबूत आधारशिला बताया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच वर्षों पुराना भरोसा और व्यक्तिगत तालमेल ही द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चल रही किसी भी तरह की नकारात्मक अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध बेहद मजबूत स्थिति में हैं और इस मजबूती का सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच गहरी मित्रता है। उनके अनुसार दोनों नेता लंबे समय से एक-दूसरे के अच्छे मित्र हैं और यह रिश्ता आने वाले समय में भी इसी तरह मजबूत बना रहेगा।

    गोर ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद और सीधे संपर्क ने व्यापार, रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति सुनिश्चित की है। उन्होंने बताया कि भारत आने के बाद से उनका उद्देश्य भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बनाए रखना और ऐसे अवसर तलाशना रहा है जो दोनों पक्षों के लिए समान रूप से लाभदायक हों।

    उन्होंने हाल ही में फ्रांस में हुई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात का भी उल्लेख किया। गोर स्वयं उस बैठक में मौजूद थे। उनके अनुसार यह बैठक एक घंटे से अधिक समय तक चली और बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा कई अन्य द्विपक्षीय विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने इसे अत्यंत सार्थक और सकारात्मक बैठक बताया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की सराहना करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि वे अत्यंत ऊर्जावान, सक्रिय और परिणाम देने वाले नेता हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की कार्यशैली काफी मिलती-जुलती है। दोनों स्वयं हर महत्वपूर्ण विषय पर सक्रिय रहते हैं, तेज निर्णय लेने में विश्वास रखते हैं और काम को परिणाम तक पहुंचाने पर विशेष जोर देते हैं।

    गोर के अनुसार यदि प्रधानमंत्री मोदी किसी कार्य को पूरा करना चाहते हैं तो वे तुरंत उस दिशा में आगे बढ़ते हैं और राष्ट्रपति ट्रंप भी इसी तरह काम करना पसंद करते हैं। उनका मानना है कि यही समान सोच दोनों नेताओं के बीच मजबूत विश्वास और मित्रता का आधार बनी हुई है।

    राष्ट्रपति ट्रंप के भारत के प्रति दृष्टिकोण पर बोलते हुए गोर ने कहा कि ट्रंप आज भी भारत और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति बेहद सकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर अपनी पहली भारत यात्रा को याद करते हैं और भारत की ऊर्जा, संस्कृति तथा यहां के लोगों की गर्मजोशी की चर्चा करते हैं। उनके अनुसार भारत यात्रा का अनुभव ट्रंप के लिए बेहद खास रहा है।

    सर्जियो गोर ने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में ओवल ऑफिस में हुई मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने उनसे स्वयं पूछा कि वे भारत कब जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से निमंत्रण मिलने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने को लेकर बेहद उत्साहित हैं और भविष्य में इस यात्रा को लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

    भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, रक्षा, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद और आपसी विश्वास को ही इस रणनीतिक रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू

    भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार, अगले साल ट्रंप के भारत दौरे की तैयारी शुरू


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लगातार मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप प्रशासन इस संभावित यात्रा की तैयारियों पर काम कर रहा है और इसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में मार्को रुबियो ने कहा कि वह स्वयं भी इस वर्ष के अंत से पहले भारत आने की योजना बना रहे हैं। उनका उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित दौरे की तैयारियों की समीक्षा करना और दोनों देशों के बीच जारी रणनीतिक एवं आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सभी तैयारियां तय समय पर पूरी होती हैं तो अगले वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत की यात्रा कर सकते हैं।

    रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद लगातार जारी है। उनके अनुसार भारत और अमेरिका के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में हैं तथा हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    उन्होंने हाल ही में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। रुबियो के अनुसार दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही और इससे द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच व्यक्तिगत स्तर पर भी मजबूत संबंध हैं जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। बातचीत अंतिम चरण में है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उनका मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा तथा निवेश और व्यापार के नए अवसर खोलेगा।

    रुबियो ने क्वाड देशों के सहयोग को भी भविष्य की वैश्विक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति स्थिरता और सुरक्षित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा उभरती प्रौद्योगिकी मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी चारों देश मिलकर काम कर रहे हैं।

    राष्ट्रपति ट्रंप का पिछला भारत दौरा फरवरी 2020 में हुआ था जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहमदाबाद में आयोजित नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम में भाग लिया था। इसके बाद नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं हुई थीं। उस यात्रा के बाद भी दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद जारी रहा और रक्षा तकनीक ऊर्जा व्यापार तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत होता गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राष्ट्रपति ट्रंप का प्रस्तावित भारत दौरा तय समय पर होता है तो यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं होगी बल्कि भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है। व्यापार समझौते से लेकर रक्षा सहयोग और वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों तक कई महत्वपूर्ण विषय इस यात्रा के केंद्र में रहने की संभावना है।

  • भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी

    भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई उड़ान, ट्रेड एग्रीमेंट पर अंतिम चरण की बातचीत जारी


    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ बिंदुओं को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। उनका कहना है कि कानूनी मसौदे की भाषा तय होते ही यह समझौता अगले कुछ सप्ताह या महीनों में औपचारिक रूप से पूरा हो सकता है।

    व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में सर्जियो गोर ने कहा कि हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ हुई बैठकों में उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने इन वार्ताओं को बेहद सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि अब बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों पक्ष समझौते की भाषा तथा शेष तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।

    गोर ने इस प्रक्रिया की तुलना अन्य वैश्विक व्यापार समझौतों से करते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह वार्ता अपेक्षाकृत बहुत तेजी से आगे बढ़ी है। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर करीब डेढ़ वर्ष से काम चल रहा है जबकि दुनिया के कई बड़े व्यापार समझौतों को पूरा होने में दो दशक तक का समय लग चुका है। उनके अनुसार दोनों देशों ने कम समय में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है और यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

    हालांकि उन्होंने समझौते के संभावित प्रावधानों या संवेदनशील विषयों पर विस्तार से टिप्पणी करने से परहेज किया लेकिन इतना जरूर कहा कि दोनों सरकारें ऐसे समाधान की दिशा में काम कर रही हैं जिससे भारत और अमेरिका दोनों को समान रूप से लाभ मिले। उन्होंने कहा कि जब साझा हितों पर सहमति बन जाती है तभी एक सफल व्यापार समझौता संभव हो पाता है।

    सर्जियो गोर ने दोनों देशों के राजनीतिक संबंधों पर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों से मजबूत व्यक्तिगत संबंध रहे हैं और यही रिश्ते भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत आने के लिए उत्सुक हैं और प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार करने की इच्छा भी जता चुके हैं। हालांकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के व्यस्त कार्यक्रम के कारण यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन भारत उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर बना हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं बल्कि रक्षा, उन्नत प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, शिक्षा, निवेश और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। दोनों देश आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के अवसरों को भी विस्तार देने की दिशा में मिलकर काम कर रहे हैं।

    भारत और अमेरिका फिलहाल व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच आसान बनाना, शुल्क संबंधी बाधाओं को कम करना, निवेश को प्रोत्साहित करना और द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देना है। माना जा रहा है कि इस शुरुआती समझौते के बाद दोनों देश भविष्य में एक व्यापक व्यापार ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे, जिससे दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक साझेदारी और मजबूत होगी।

  • भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    भविष्य की तकनीकों पर भारत-अमेरिका का बड़ा दांव, AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ेगी साझेदारी

    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका ने भविष्य की तकनीकों और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। वाशिंगटन में आयोजित उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान दोनों देशों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे अहम क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने पर व्यापक चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया तकनीकी प्रतिस्पर्धा के नए दौर में प्रवेश कर रही है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरती तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    भारतीय दूतावास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने अमेरिकी विदेश विभाग के अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब एस. हेलबर्ग से मुलाकात कर द्विपक्षीय तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना था जहां दोनों देश मिलकर दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी विकसित कर सकते हैं।

    वार्ता के दौरान सेमीकंडक्टर निर्माण को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने के लिए सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता बढ़ाना आवश्यक है। हाल के वर्षों में चिप्स की वैश्विक कमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तकनीकी उद्योगों की स्थिरता के लिए मजबूत और विश्वसनीय उत्पादन नेटवर्क बेहद जरूरी हैं।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी दोनों देशों के बीच व्यापक चर्चा हुई। भारत और अमेरिका ने एआई तकनीक के विकास, उसके सुरक्षित उपयोग और विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रभावी अनुप्रयोग को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए। माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, रक्षा और वित्तीय सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकता है।

    बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर भी महत्वपूर्ण बातचीत हुई। ये खनिज उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी उत्पादन और रक्षा उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और दीर्घकालिक आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा की।

    भारत और अमेरिका के बीच यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। तकनीकी सहयोग को लेकर दोनों देशों की बढ़ती नजदीकियां वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    इस बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और इसमें कुशल पेशेवरों की भारी मांग पैदा हो रही है। उनके अनुसार वर्तमान में लगभग 800 अरब डॉलर मूल्य की यह इंडस्ट्री जल्द ही 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर सकती है।

    वैष्णव ने यह भी बताया कि वर्ष 2032 तक दुनिया भर में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। वहीं उद्योग को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की कमी का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक तकनीकी प्रतिभा केंद्र के रूप में उभरने और दुनिया को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने का सुनहरा अवसर है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता यह तकनीकी सहयोग न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भी नई दिशा तय कर सकता है।

  • ट्रंप के दबाव का भारत ने दिया रणनीतिक जवाब: दुनिया भर में बनाए नए साझेदार, घटाई निर्भरता

    ट्रंप के दबाव का भारत ने दिया रणनीतिक जवाब: दुनिया भर में बनाए नए साझेदार, घटाई निर्भरता


    नई दिल्ली । वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के तेजी से बदलते परिदृश्य में भारत ने अपनी विदेश और आर्थिक नीति को नई दिशा देते हुए एक ऐसी रणनीति अपनाई है जिसने उसे अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बीच भी मजबूत स्थिति में बनाए रखा है। अमेरिका की बदलती नीतियों, व्यापारिक दबावों और वैश्विक संघर्षों के दौर में भारत ने किसी एक देश या क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन को अपनी रणनीति का प्रमुख आधार बनाया है।

    अमेरिका लंबे समय से भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में कई ऐसे फैसले सामने आए जिन्होंने भारतीय हितों को प्रभावित किया। एच-1बी वीजा नियमों को सख्त करने की घोषणा, प्रवासन नीतियों में बदलाव और व्यापारिक मोर्चे पर टैरिफ जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के संबंधों में नई चुनौतियां पैदा कीं। हालांकि भारत ने इन चुनौतियों का जवाब किसी टकराव या प्रतिक्रिया की राजनीति से नहीं बल्कि दूरदर्शी रणनीतिक योजना के जरिए दिया।

    भारत ने सबसे पहले ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी निर्भरता को व्यापक रूप से फैलाया। पहले जहां भारत की तेल जरूरतें मुख्य रूप से पश्चिम एशिया पर निर्भर थीं, वहीं अब रूस, अमेरिका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से ऊर्जा आयात का नेटवर्क विकसित किया गया है। वेनेजुएला के साथ भी सहयोग की संभावनाओं पर काम चल रहा है। इस रणनीति का लाभ हाल के अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सफल रहा।

    स्वास्थ्य और फार्मा क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मेडिकल उपकरणों और तकनीकी स्वास्थ्य संसाधनों के लिए चीन पर निर्भरता कम करते हुए अमेरिका, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया और इजरायल जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ाया गया। साथ ही मेक इन इंडिया अभियान के तहत देश में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किए गए हैं। फार्मास्युटिकल उद्योग में एपीआई यानी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट के लिए लंबे समय तक चीन पर निर्भर रहने वाला भारत अब घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों के साथ साझेदारी को मजबूत कर रहा है।

    तकनीक और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। ताइवान, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के साथ सहयोग के जरिए भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक्स और चिप निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में जुटा है। गुजरात और असम में स्थापित की जा रही सेमीकंडक्टर परियोजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य भारत को वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र बनाना है।

    रक्षा क्षेत्र में भारत ने संतुलित कूटनीति का परिचय देते हुए अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ फ्रांस, रूस, इजरायल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ भी रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाए रखा है। इससे भारत को रक्षा उपकरणों और तकनीक के लिए किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर होने से बचने में मदद मिली है।

    व्यापार और निवेश के क्षेत्र में भी भारत ने बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है। संयुक्त अरब अमीरात के साथ सीईपीए, ऑस्ट्रेलिया के साथ ईसीटीए, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में प्रगति तथा खाड़ी देशों के साथ निवेश साझेदारी इस रणनीति के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। इसके अलावा भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा जैसी पहलें भारत की वैश्विक आर्थिक पहुंच को और मजबूत कर रही हैं।

    स्पष्ट है कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता, संतुलित कूटनीति और विविधीकरण को अपनी नीति का आधार बनाया है। यही वजह है कि वैश्विक संकटों और महाशक्तियों के दबाव के बावजूद भारत न केवल अपनी आर्थिक और सामरिक स्थिति को मजबूत बनाए हुए है बल्कि विश्व मंच पर एक विश्वसनीय और आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में भी उभर रहा है।

  • ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ

    ट्रंप ने पीएम मोदी को बताया ‘महान और सख्त नेता’, भारत की आर्थिक तरक्की की भी की तारीफ


    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। उन्होंने पीएम मोदी को महान नेता और बहुत सख्त इंसान बताते हुए उनकी नेतृत्व शैली और राजनीतिक क्षमता की प्रशंसा की। यह बयान उन्होंने अमेरिकी मीडिया प्लेटफॉर्म एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें वैश्विक नेतृत्व, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने कहा कि दुनिया के चुनिंदा नेताओं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे नेता हैं जिनकी वे सबसे अधिक इज्जत करते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी का लंबे समय से सत्ता में बने रहना और भारत जैसे विशाल लोकतंत्र का नेतृत्व करना उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत जैसे देश में स्थिर नेतृत्व बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन पीएम मोदी ने यह काम सफलतापूर्वक किया है।

    ट्रंप ने आगे कहा कि पीएम मोदी बाहर से शांत स्वभाव के दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वह बेहद दृढ़ और सख्त निर्णय लेने वाले नेता हैं। उनके अनुसार, यही संयोजन उन्हें एक प्रभावशाली वैश्विक नेता बनाता है। उन्होंने यह भी कहा कि नेतृत्व के उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए बुद्धिमत्ता और कठोर निर्णय क्षमता दोनों जरूरी हैं, और मोदी में यह दोनों गुण मौजूद हैं।

    पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत की आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने पीएम मोदी की नीतियों को इस विकास का एक महत्वपूर्ण कारण बताया। ट्रंप ने यह भी कहा कि मोदी अक्सर शांति और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं, जो उनके नेतृत्व को और अधिक प्रभावी बनाता है।

    इंटरव्यू में ट्रंप ने वैश्विक नेताओं की भूमिका पर चर्चा करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी तारीफ की और दोनों नेताओं को मजबूत नेतृत्व का उदाहरण बताया। हालांकि, उन्होंने विशेष रूप से पीएम मोदी को ऐसे नेताओं में शामिल किया जिनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर सबसे अधिक पहचान और सम्मान है।

    गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं और लंबे समय से देश की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका लगातार बढ़ी है।

    भारत और अमेरिका के संबंधों में भी पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखी गई है। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप जैसे बड़े कार्यक्रमों ने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंधों को भी विशेष पहचान दी थी। ट्रंप की यह ताजा टिप्पणी एक बार फिर भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक राजनीति में पीएम मोदी की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ले आई है।

  • QUAD Summit: मार्को रुबियो का बड़ा बयान,अब सिर्फ चर्चा नहीं, एक्शन होगा, चीन की चिंता बढ़ी

    QUAD Summit: मार्को रुबियो का बड़ा बयान,अब सिर्फ चर्चा नहीं, एक्शन होगा, चीन की चिंता बढ़ी



    नई दिल्ली। नई दिल्ली में हुई QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि QUAD अब केवल बातचीत का मंच नहीं रहा, बल्कि यह एक “एक्शन-ओरिएंटेड” (कार्रवाई करने वाला) गठबंधन बनता जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि चारों देश अब वैश्विक मुद्दों पर सिर्फ चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि ठोस कदम भी उठाएंगे।

    बैठक की शुरुआत में रुबियो ने भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित सभी सदस्य देशों का धन्यवाद किया और कहा कि QUAD की पहली बैठक में ही शामिल होना अमेरिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह मंच अब तेजी से परिणाम देने वाली दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    रुबियो ने कहा कि QUAD का उद्देश्य अब सिर्फ समस्याओं पर विचार करना नहीं, बल्कि उन्हें मिलकर हल करना है। उन्होंने बताया कि यह समूह मानवीय सहायता, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि चारों देश अपनी-अपनी ताकतों को जोड़कर वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं और अब इस सहयोग को और ज्यादा व्यावहारिक बनाया जाएगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ एक रणनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    QUAD में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसका फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना है।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हो रही नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव की घटनाओं पर निराशा जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने साफ कहा कि कुछ लोगों की आपत्तिजनक टिप्पणियों को पूरे अमेरिका की सोच नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि “हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, जो ऑनलाइन या सार्वजनिक तौर पर गलत बातें करते हैं, लेकिन वे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते।”

    रूबियो ने अमेरिका को दुनिया के सबसे स्वागत करने वाले देशों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका की तरक्की में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय समुदाय की जमकर सराहना करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, बिजनेस और पब्लिक सर्विस जैसे कई अहम क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनके मुताबिक भारतीय समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है और अमेरिका चाहता है कि यह साझेदारी आगे और मजबूत हो।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रूबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तब विदेश मंत्री एस जयशंकर हल्की मुस्कान के साथ नजर आए। हालांकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से इस मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया गया।

    रूबियो ने भारत-अमेरिका रिश्तों को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देश सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, रणनीतिक तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और भविष्य में यह संबंध और मजबूत होंगे।

    मार्को रूबियो इस समय भारत के बहु-दिवसीय दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, चीन की गतिविधियों और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।