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  • ‘फ्री में सभ्यता का क्रैश कोर्स मिलेगा’ -भारत यात्रा पर ईरान ने साधा अमेरिका पर निशाना

    ‘फ्री में सभ्यता का क्रैश कोर्स मिलेगा’ -भारत यात्रा पर ईरान ने साधा अमेरिका पर निशाना

    नई दिल्ली ।  अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार को चार दिवसीय भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे। यह दौरा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इस समय मध्य पूर्व में तनाव और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच कई बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है।

    रूबियो ने भारत पहुंचने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा कि वह भारत में एक “शानदार दौरे” की उम्मीद कर रहे हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने अपनी एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वे विमान से उतरते नजर आए।

    इसी पोस्ट को लेकर ईरान के मुंबई स्थित दूतावास कार्यालय ने सोशल मीडिया पर अप्रत्याशित टिप्पणी कर दी, जिसने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। ईरान की तरफ से पोस्ट पर तंज कसते हुए लिखा गया कि “थोड़ा सीख लो यार, सभ्यता का क्रैश कोर्स फ्री में मिल जाएगा।”

    इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और इसे भारत-अमेरिका कूटनीतिक संबंधों के बीच एक असामान्य डिजिटल टकराव के रूप में देखा जा रहा है।

    इधर, अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्वाड देशों की बैठक से भी जुड़ी है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।

    इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, व्यापार और तकनीकी साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रूबियो की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा दे सकती है, जबकि ईरान की टिप्पणी ने इस पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया और कूटनीतिक दोनों स्तर पर और दिलचस्प बना दिया है।

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    Marco Rubio India, Iran Embassy, India US relations, Quad meeting, international news, diplomatic tension, world news

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को नई मजबूती: पीएम मोदी और मार्को रुबियो की 60 मिनट की अहम बैठक, व्हाइट हाउस आने का मिला विशेष न्योता

    भारत-अमेरिका रिश्तों को नई मजबूती: पीएम मोदी और मार्को रुबियो की 60 मिनट की अहम बैठक, व्हाइट हाउस आने का मिला विशेष न्योता

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती उस समय मिली जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राजधानी दिल्ली में मुलाकात की। करीब 60 मिनट तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, आधुनिक तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे कई बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक बदलावों और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मार्को रुबियो अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर पहले कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बाद वह दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक शांति, आर्थिक सहयोग और नई तकनीकों में संयुक्त भागीदारी जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और अमेरिका आने वाले समय में वैश्विक भलाई और स्थिरता के लिए मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता विश्वास दुनिया में नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे इस मुलाकात का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। इस न्योते को दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों और बढ़ते राजनीतिक विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

    बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, निवेश बढ़ाने और अत्याधुनिक तकनीकों में साझेदारी जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।

    मार्को रुबियो की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आने वाले दिनों में नई दिल्ली में क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है। माना जा रहा है कि इस बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण रणनीति तैयार की जा सकती है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के पक्षधर माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी और मार्को रुबियो की यह मुलाकात केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंधों की नई रूपरेखा तय करने वाला बड़ा कूटनीतिक संकेत है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन में भी अहम भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि इस मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका

    भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका


    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सहयोग के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है। क्वाड देशों की आगामी बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को लेकर सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है और जितनी मात्रा में भारत तेल या ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता महसूस करेगा, उसे उपलब्ध कराने की दिशा में अमेरिका तैयार है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    रूबियो ने यह टिप्पणी अपनी आगामी विदेश यात्रा से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है और दोनों देश वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत को एक ऐसा साझेदार बताया जिसके साथ अमेरिका लंबे समय से विश्वास और सहयोग के आधार पर संबंध बनाए हुए है।

    ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिका अपनी उत्पादन और निर्यात क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अमेरिका इस दिशा में सहयोगी देशों, खासकर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

    नई दिल्ली। आगामी क्वाड बैठक को लेकर भी उन्होंने उत्साह व्यक्त किया। यह बैठक 26 मई को आयोजित होने जा रही है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे। भारत इस बैठक की अध्यक्षता करेगा और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महत्वपूर्ण मंच का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

    रूबियो ने यह भी बताया कि उनका भारत दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें चार प्रमुख देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और करीब से समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्वाड सहयोग वैश्विक स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इसमें भारत की भूमिका अत्यंत अहम है।

    नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा 23 मई से 26 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें वे नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर जैसे शहरों का भी दौरा करेंगे। कोलकाता यात्रा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई वर्षों बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री वहां पहुंचने वाला है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर मार्को रूबियो का यह बयान और आगामी भारत यात्रा ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।

  • 10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

    10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

     नई दिल्ली । Adani Group के अमेरिका में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख नेताओं और व्यापारिक विशेषज्ञों ने इसे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया है। उनका मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत और कॉर्पोरेट प्रभाव का बड़ा संकेत है।

    भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व सलाहकार Ajay Bhutoria ने इस निवेश को अमेरिका के इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर बताया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिका में रोजगार बढ़ाने, ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीकों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    हाल के घटनाक्रमों में अदाणी समूह को कानूनी मोर्चे पर भी राहत मिलने की खबरों ने निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। इसे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी विश्वसनीयता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों के लिए कानूनी स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस घटनाक्रम से निवेश माहौल को मजबूती मिल सकती है।

    अमेरिका में यह प्रस्तावित निवेश कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में इस निवेश को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण अमेरिका में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में अदाणी समूह की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पहले से ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर चुकी है।

    यह निवेश भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विदेशी निवेश और रोजगार को लेकर चल रही बहस के बीच इस पहल को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल बाजार नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाली ताकत के रूप में भी उभर रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना पूरी तरह लागू होती है तो आने वाले वर्षों में यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन सकती है। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को भी नया विस्तार मिलेगा। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश जगत में भारत की बढ़ती भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

  • ईरान तनाव के बीच अमेरिका की कूटनीति तेज भारत, कनाडा केन्या से अहम बातचीत

    ईरान तनाव के बीच अमेरिका की कूटनीति तेज भारत, कनाडा केन्या से अहम बातचीत


    नई दिल्ली:मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मार्को रुबियो के नेतृत्व में अमेरिका ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता तेज कर दी है। इस क्रम में उन्होंने भारत कनाडा और केन्या के शीर्ष नेताओं से बातचीत कर ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार साझा किए।

    भारत के साथ हुई बातचीत में एस जयशंकर के साथ मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और बदलते हालात पर चर्चा की गई। दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और वैश्विक स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

    कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उस पर अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमेरिका ने इस दौरान वैश्विक सुरक्षा और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने पर जोर दिया। साथ ही हैती में शांति बहाली के प्रयासों और वहां की स्थिति पर भी विचार साझा किए गए।

    केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के साथ हुई बातचीत में अमेरिका ने ईरान के मुद्दे पर केन्या के रुख की सराहना की। दोनों नेताओं ने खाड़ी देशों के खिलाफ ईरान की गतिविधियों की निंदा पर चर्चा की और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दौरान अमेरिका ने हैती में शांति स्थापित करने के लिए केन्या के योगदान की भी सराहना की।

    अमेरिका की यह पहल इस बात का संकेत है कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान ढूंढने की दिशा में काम कर रहा है। एशिया अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संवाद बढ़ाकर अमेरिका अपनी कूटनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।

    यह कूटनीतिक सक्रियता दर्शाती है कि अमेरिका ईरान और मध्य पूर्व के मुद्दों को लेकर बेहद गंभीर है और वह अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक संयुक्त रणनीति के तहत आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर

    भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच आर्थिक व रणनीतिक सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) से हुई हालिया फोन वार्ता को उपयोगी और सौहार्दपूर्ण बताया है। सोशल मीडिया पर साझा संदेश में उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि “मेक इन इंडिया” उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किए जाने की घोषणा भारतीय निर्यात के लिए फायदेमंद होगी। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम बताया और इसके लिए अमेरिकी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

    संदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्रमुख लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं तो इससे जनता को लाभ और आपसी सहयोग के नए अवसर पैदा होते हैं। भारत ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रयासों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को “अभूतपूर्व ऊंचाइयों” तक ले जाने की उम्मीद जताई। विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में संभावित राहत और बढ़ता आर्थिक सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और निवेश के क्षेत्रों में नए अवसर खोल सकता है।

  • अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत

    अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाने का संकेत, वित्त मंत्री बेसेंट ने कहा-रूसी तेल खरीद घटने से बड़ी जीत


    नई दिल्ली। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रम्प सरकार भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में से आधा हटाने पर विचार कर सकती है, क्योंकि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी कम कर दी है। बेसेंट ने यह दावा किया कि 25% टैरिफ ने भारत की रूसी तेल खरीद घटाने में असर दिखाया है और अब राहत देने का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी जीत बताया और कहा कि टैरिफ अभी भी लागू हैं,
    लेकिन धीरे-धीरे इन्हें हटाने की संभावना है।

    अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत पर दो बार 25-25% टैरिफ लगाए थेपहला व्यापार घाटे के आधार पर और दूसरा रूस से तेल खरीदने के कारण। बेसेंट ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय देश भारत पर टैरिफ इसलिए नहीं लगा रहे क्योंकि वे भारत के साथ बड़े व्यापार समझौते के लिए इच्छुक हैं, जबकि यूरोप खुद रिफाइंड तेल खरीदकर रूस की मदद कर रहा है।

    बेसेंट 500% टैरिफ के प्रस्ताव पर भी बोले
    बेसेंट ने कहा कि रूसी तेल खरीदने पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेटर ग्राहम ने रखा है, लेकिन ट्रम्प को इसकी जरूरत नहीं है।

    राष्ट्रपति के पास पहले से ही IEEPA कानून के तहत राष्ट्रीय आपात स्थिति का हवाला देकर अन्य देशों पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है।

    भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई, पर पूरी तरह नहीं रोकी
    अमेरिकी दावों के बावजूद भारत सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीद अभी भी जारी है और भारत अपनी ऊर्जा नीति अपने हितों के आधार पर तय करता है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में भारत की रूस से तेल खरीद में गिरावट आई और वह तीसरे नंबर पर खिसक गया। वहीं तुर्की दूसरे सबसे बड़े खरीदार बन गया।

    चीन अभी भी रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार है।

    भारत की खरीद में गिरावट का कारण
    रूस ने अब तेल की छूट घटा दी है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत भी कम हो गई है, जिससे भारत के लिए रूस से तेल खरीदना पहले जैसा लाभकारी नहीं रहा। इसके अलावा शिपिंग, बीमा और भुगतान में दिक्कतें भी बढ़ीं। इसी वजह से भारत सऊदी, UAE और अमेरिका जैसे स्थिर सप्लायर्स से भी तेल खरीद बढ़ा रहा है।

    अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता और टैरिफ में नरमी
    अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते की बातचीत चल रही है, ऐसे में टैरिफ घटाने के संकेत दोनों देशों के रिश्तों में नरमी की तरफ माना जा रहा है।
    अमेरिका के टैरिफ में राहत के संकेत से भारत-यूएस संबंधों में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन रूस से तेल खरीद पर भारत की नीति अभी भी अपने हितों पर आधारित है।

  • भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती

    भारत की बड़ी रणनीतिक पहल: अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल होने के संकेत, सप्लाई चेन को मिलेगी वैश्विक मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत एक अहम रणनीतिक कदम उठाने की तैयारी में नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल पैक्स सिलिका में शामिल हो सकता है। यह फैसला ऐसे समय पर सामने आ रहा है जब चीन और पश्चिमी देशों के बीच सेमीकंडक्टर और हाई-टेक सप्लाई चेन को लेकर खींचतान लगातार बढ़ रही है।पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी से देश को विकसित देशों के साथ तकनीकी साझेदारी आगे बढ़ाने बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि भारत इस प्रक्रिया में यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसकी रणनीतिक स्वायत्तता पर कोई असर न पड़े और वह अपनी स्वतंत्र नीतिगत निर्णय क्षमता बनाए रखे।

    क्या है पैक्स सिलिका और इसका उद्देश्य
    पैक्स सिलिका उन देशों का समूह है जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और एडवांस टेक्नोलॉजी की आपूर्ति श्रृंखलाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। इस समूह में सिंगापुर इजराइल जापान दक्षिण कोरिया ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ऑटोमोबाइल और अत्याधुनिक एआई सिस्टम जैसी तकनीकों की रीढ़ मानी जाने वाली अत्यधिक केंद्रीकृत सप्लाई चेन की कमजोरियों को दूर करना है।बीते वर्षों में वैश्विक चिप संकट ने यह दिखा दिया है कि कुछ सीमित क्षेत्रों पर निर्भरता पूरी दुनिया के उद्योगों को प्रभावित कर सकती है। पैक्स सिलिका इसी निर्भरता को कम कर भरोसेमंद और विविध आपूर्ति नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।

    भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम

    भारत जैसे विकासशील बाजार के लिए यह पहल कई मायनों में फायदेमंद साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नई दिल्ली सब्सिडी खरीद व्यवस्था में प्राथमिकता और संतुलित आयात नियमों के लिए नीतिगत गुंजाइश तलाश सकती है। हालांकि यह रुख कुछ पैक्स सिलिका सदस्य देशों के दृष्टिकोण से पूरी तरह मेल न भी खा सकता है।इसके बावजूद भारत पहले से ही जापान और सिंगापुर जैसे देशों के साथ लचीली सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर काम कर रहा है। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में अपनी भूमिका को लेकर गंभीर और दीर्घकालिक सोच रखता है।

    अमेरिका का स्पष्ट संकेत

    नई दिल्ली में अपने पहले दिन भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने उन्नत प्रौद्योगिकी में अमेरिकी नेतृत्व वाली आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी का जिक्र करते हुए पैक्स सिलिका में भारत को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने की घोषणा की थी। इसे भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से एक अहम संकेत माना जा रहा है।

    भारत का सेमीकंडक्टर विजन

    इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत संपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र-डिजाइन विनिर्माण ऑपरेटिंग सिस्टम एप्लिकेशन सामग्री और उपकरण-में एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में चार सेमीकंडक्टर प्लांट इस वर्ष वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करेंगे।कुल मिलाकर पैक्स सिलिका में भारत की संभावित भागीदारी न सिर्फ आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगी बल्कि भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर मैप पर एक अहम केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मदद कर सकती है।