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  • रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब

    रूस से तेल आयात पर क्या बदलेगा भारत का रुख? ट्रंप के दावे के बाद विदेश मंत्रालय ने दिया जवाब


    नई दिल्ली । यूएस-इंडिया ट्रेड डील के ऐलान के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया था कि भारत अब रूस से तेल की खरीद रोक देगा। इस बयान के बाद अब भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) की प्रतिक्रिया सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को रूसी तेल आयात को लेकर अपने पहले से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए साफ कहा है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

    विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, ‘भारत के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना हमारी नीति का अहम हिस्सा है। ऊर्जा आपूर्ति को लेकर सरकार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह स्पष्ट कर चुकी है कि 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।’

    MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘वैश्विक बाजार की स्थिति और बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात के अनुसार ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का केंद्र है। भारत के फैसले इसी सोच के आधार पर लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी दिशा में आगे बढ़ेंगे।’

    रूसी तेल को लेकर भारत ने दोहराया अपना रुख

    अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करे। इस पर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा आवश्यकताएं किसी भी अन्य दबाव से ऊपर हैं। रूस से तेल आयात को लेकर यह भारत का लगातार रुख रहा है। अमेरिका का कहना है कि रूस तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में करता है, जबकि रूस इन आरोपों को लगातार खारिज करता आया है।

    व्हाइट हाउस के बयान के बाद सामने आया MEA का पक्ष

    विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया व्हाइट हाउस के उस दावे के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत ने रूस से सीधे या किसी तीसरे देश के माध्यम से तेल खरीद रोकने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह बयान उस समय सामने आया था, जब अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को हटाने का ऐलान किया था।

    रूसी तेल पर भारत की स्वतंत्रता पर क्रेमलिन की टिप्पणी

    इस बीच, जब इस मुद्दे पर क्रेमलिन से सवाल किया गया तो उसने कहा कि भारत को जहां से चाहे वहां से तेल खरीदने का पूरा अधिकार है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि वह भारत का अकेला तेल और पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्तिकर्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत पहले भी अन्य देशों से इन उत्पादों की खरीद करता रहा है, इसलिए इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।

  • भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम

    भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम


    नई दिल्ली । GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है जिसमें सऊदी अरब UAE कतर कुवैत ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रहते हैं और उनकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह FTA वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाने निवेश को बढ़ावा देने और नीतिगत स्थिरता लाने का लक्ष्य रखता है।

    पाक-सऊदी रक्षा समझौते का प्रभाव
    भारत और GCC के बीच बातचीत उस समय शुरू हो रही है जब क्षेत्रीय भू-राजनीति जटिल है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता’SMDA पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोधऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीनों बाद हुआ। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

    UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव
    जहां पाकिस्तान-सऊदी नजदीकियां बढ़ रही हैं वहीं UAE और पाकिस्तान के संबंधों में खटास देखी जा रही है। UAE ने पाकिस्तान के साथ एक विमानतल प्रबंधन सौदा रद्द कर दिया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार यह सौदा स्थगित किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने स्थानीय साझेदार का नाम नहीं भेजा।

    विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के बाद UAE-पाकिस्तान दूरी बढ़ी है।

    भारत-UAE के बढ़ते संबंध
    UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की दिल्ली यात्रा ने भारत-UAE संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यात्रा के कुछ घंटों बाद दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार $200 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और UAE के साथ भारत के बढ़ते संबंध खाड़ी देशों की प्राथमिकताओं में बदलाव को दिखाते हैं।

  • रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं

    रूस का ट्रंप को जवाब…. भारत को तेल खरीदने की पूरी स्वतंत्रता, कोई नई बात नहीं


    मास्को।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच नए व्यापार समझौते (New trade Agreements.) के बाद एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या नहीं? हालांकि, इस मुद्दे पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस (Russia) ने अब इस पर स्पष्ट जवाब दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने हाल ही में दावा किया था कि भारत अब रूसी तेल की खरीद रोक देगा, लेकिन रूस ने इस पर प्रतिकार करते हुए कहा है कि भारत पूरी तरह से स्वतंत्र है कि वह किस देश से तेल खरीदे।

    रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि भारत कोई एकमात्र देश नहीं है जो रूस से तेल खरीदता है। भारत हमेशा से विभिन्न देशों से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता रहा है, और इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ जानते हैं कि भारत रूस का एकमात्र तेल आपूर्तिकर्ता नहीं है। यह बयान ट्रंप के उस दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने रूस से तेल खरीद बंद करने और अमेरिका से तेल खरीदने पर सहमति जताई है। पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रूस को इस मामले में नई दिल्ली से कोई जानकारी नहीं मिली है, और रूस अपने भारत के साथ संबंधों को बहुत महत्व देता है।

    ट्रंप का दावा और भारत का रुख
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते में भारत के लिए टैरिफ में कमी शामिल है, और इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है, और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ट्वीट में रूस से तेल खरीदने पर कोई उल्लेख किया गया है। रूसी तेल आयात को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान में कोई प्रतिबद्धता या समझौता नहीं था, जबकि ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद यह तय हुआ कि भारत अमेरिकी तेल का आयात बढ़ाएगा और रूस से तेल खरीदने की मात्रा घटाएगा।

    भारत और रूस के ऊर्जा संबंध
    रूस के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रूस से प्रतिदिन 15 लाख से 20 लाख बैरल तेल आयात करता है, जो अमेरिका से प्राप्त शेल तेल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। शेल तेल हल्के ग्रेड का होता है, जबकि रूस का यूराल तेल भारी और सल्फर युक्त होता है। इस वजह से भारत को अमेरिकी कच्चे तेल को अन्य ग्रेड के तेल के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। इसलिए, रूस का कहना है कि ट्रंप का दावा एक तरह से दिखावा हो सकता है, क्योंकि अमेरिकी तेल रूस के तेल का सीधे विकल्प नहीं बन सकता। यह स्थिति दिखाती है कि भारत और रूस के बीच तेल संबंधों में कोई तत्काल बदलाव होने की संभावना नहीं है, और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विभिन्न स्रोतों से आपूर्ति पर निर्भर रहेगा।

  • भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात करेंगे कृषि उत्पाद… ट्रंप की मंत्री बोली- नई ट्रेड डील US के किसानों को मिलेगा लाभ

    भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात करेंगे कृषि उत्पाद… ट्रंप की मंत्री बोली- नई ट्रेड डील US के किसानों को मिलेगा लाभ


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी कृषि सचिव, ब्रुक रोलिंस (American Agriculture Secretary Brooke Rollins) ने हाल ही में भारत और अमेरिका (India and America) के बीच हुए नए व्यापार समझौते (New Trade Agreements) के बारे में बात करते हुए कहा कि अब अमेरिका अपने कृषि उत्पादों को भारत में बड़े पैमाने पर निर्यात कर सकेगा। उनका मानना है कि इससे अमेरिकी किसानों को अच्छे दाम मिलेंगे और ग्रामीण अमेरिका में आर्थिक लाभ होगा। हालांकि, यह समझौता भारत में बड़े पैमाने पर बहस का कारण बन सकता है, क्योंकि भारत का कृषि सेक्टर संवेदनशील है। आइए, जानते हैं इस समझौते के संभावित लाभ और विरोध के बारे में।


    **रोलिंस का दावा: अमेरिकी किसानों के लिए खुशखबरी**

    ब्रुक रोलिंस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का धन्यवाद, जिनकी वजह से अमेरिकी किसानों को फिर से सफलता मिल रही है। भारत के विशाल बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा, जिससे कीमतें बढ़ेंगी और हमारे ग्रामीण इलाकों में पैसा आएगा।”


    **व्यापार घाटे में कमी की उम्मीद**

    रोलिंस ने बताया कि 2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 बिलियन डॉलर था। उन्होंने भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए एक प्रमुख अवसर बताया, जो इस घाटे को कम करने में मदद करेगा। USDA के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत को अमेरिकी कृषि निर्यात 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका था, जिसमें मुख्य रूप से बादाम, पिस्ता, कपास और सोयाबीन तेल शामिल थे।


    **समझौता: ट्रंप प्रशासन की शर्तें**

    यह समझौता ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद हुआ है। अगस्त 2025 में, ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया था। इस नए समझौते के तहत, भारत को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने की बात की गई है, साथ ही भारत को रूस से तेल खरीदने पर रोक लगाने की शर्त भी रखी गई है।


    **भारत में राजनीतिक हलचल: कांग्रेस के सवाल**

    भारत में, कांग्रेस ने इस समझौते पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह सौदा भारत सरकार की बजाय अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषित किया, जो कि राजनीति का हिस्सा हो सकता है। इसके अलावा, पार्टी ने यह भी सवाल किया कि भारतीय किसानों की सुरक्षा पर इसका क्या असर पड़ेगा, और क्या इस सौदे से भारतीय उद्योगों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा? कांग्रेस ने सरकार से अनुरोध किया है कि सौदे की सभी शर्तें सार्वजनिक की जाएं।


    **क्या भारत में बवाल मचने वाला है?**

    भारत में इस समझौते और अमेरिकी कृषि उत्पादों के बड़े पैमाने पर आयात के बाद बवाल मचने की संभावना है, क्योंकि भारतीय किसान संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि सस्ते अमेरिकी आयातों से भारतीय उत्पादों की कीमतें गिर सकती हैं। इससे छोटे किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। कृषि मंत्री या सरकार की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारतीय कृषि बाजार कितना खुलेगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस संवेदनशील क्षेत्र में पूरी तरह से झुकेगा नहीं, लेकिन कुछ रियायतें जरूर दे सकता है।

  • भारत से मैच बॉयकाट पर अड़ा पाकिस्तान, आईसीसी को औपचारिक पत्र भेजने से भी परहेज

    भारत से मैच बॉयकाट पर अड़ा पाकिस्तान, आईसीसी को औपचारिक पत्र भेजने से भी परहेज


    नई दिल्ली)।
    टी20 विश्व कप (T20 World Cup 2026) में भारत (India) के खिलाफ मैच नहीं खेलने के फैसले को लेकर पाकिस्तान (Pakistan) अपने सख्त रुख पर कायम दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) (Pakistan Cricket Board -PCB) फिलहाल इस निर्णय की औपचारिक जानकारी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) (International Cricket Council -ICC) को लिखित रूप में देने के पक्ष में नहीं है।

    रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि चूंकि यह फैसला पाकिस्तान सरकार स्तर पर लिया गया और आधिकारिक मंच के जरिए सार्वजनिक किया गया है, इसलिए अलग से आईसीसी को पत्र लिखने की जरूरत नहीं समझी जा रही। पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में टीम को टूर्नामेंट में भाग लेने की मंजूरी दी थी, लेकिन भारत के खिलाफ मैच से दूर रहने की बात कही थी।

    बताया जा रहा है कि पीसीबी इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने में जल्दबाजी नहीं करना चाहता और आगे की रणनीति के लिए विकल्प खुले रखे हुए हैं। दूसरी ओर, आईसीसी पहले ही संकेत दे चुका है कि चयनात्मक भागीदारी टूर्नामेंट के नियमों और खेल भावना के खिलाफ है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत-पाकिस्तान मुकाबला नहीं होता है तो प्रसारण और प्रायोजन से जुड़े पक्षों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। यह मैच आम तौर पर आईसीसी टूर्नामेंट्स का सबसे ज्यादा दर्शक जुटाने वाला मुकाबला माना जाता है।

    इसी बीच पाकिस्तानी टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है, जहां वह अपने अन्य मुकाबले खेलेगी। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने संभावित कानूनी पहलुओं पर भी सलाह ली है और किसी भी आईसीसी कार्रवाई की स्थिति में अपने पक्ष का बचाव करने की तैयारी कर रहा।

  • भारत से मैच के बहिष्कार पर आईसीसी की सख्त चेतावनी, पाकिस्तान की चयनात्मक भागीदारी पर उठे सवाल

    भारत से मैच के बहिष्कार पर आईसीसी की सख्त चेतावनी, पाकिस्तान की चयनात्मक भागीदारी पर उठे सवाल


    नई दिल्ली।
    पुरुष । टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में भारत (India) के खिलाफ मुकाबले से अलग रहने के पाकिस्तान (Pakistan) के फैसले पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) (International Cricket Council – ICC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आईसीसी ने स्पष्ट कहा है कि किसी वैश्विक टूर्नामेंट में चयनात्मक भागीदारी खेल की निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धी भावना के खिलाफ है तथा इसके दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

    यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई, जिसमें पाकिस्तान सरकार ने टीम को टूर्नामेंट खेलने की अनुमति तो दी, लेकिन 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच में न उतरने की बात कही। हालांकि इस फैसले का आधिकारिक कारण नहीं बताया गया। आईसीसी ने कहा कि उसे अभी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) से औपचारिक सूचना का इंतजार है।

    परिषद ने अपने बयान में दोहराया कि उसके टूर्नामेंट समान शर्तों पर सभी टीमों की भागीदारी, निरंतरता और खेल भावना पर आधारित होते हैं। किसी एक मैच का बहिष्कार प्रतियोगिता की पवित्रता को प्रभावित करता है और इससे वैश्विक क्रिकेट ढांचे पर असर पड़ सकता है। आईसीसी ने उम्मीद जताई कि पीसीबी ऐसा समाधान तलाशेगा जो सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे।

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला आईसीसी आयोजनों का सबसे अधिक दर्शक जुटाने वाला और व्यावसायिक रूप से अहम मैच माना जाता है। इसी कारण दोनों टीमों को अक्सर एक ही समूह में रखा जाता रहा है।

    नियमों के मुताबिक यदि पाकिस्तान यह मैच नहीं खेलता है तो उसे दो अंक गंवाने पड़ सकते हैं। साथ ही उसकी नेट रन रेट पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि फॉरफिट की स्थिति में पूरे 20 ओवर उसकी पारी में जोड़े जाते हैं।

    टी20 विश्व कप 2026 की सह-मेजबानी भारत और श्रीलंका कर रहे हैं। पाकिस्तान को अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलने हैं। वह 07 फरवरी को नीदरलैंड्स के खिलाफ अभियान शुरू करेगा, जबकि अमेरिका और नामीबिया से उसके मुकाबले क्रमशः 10 और 18 फरवरी को निर्धारित हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि पीसीबी आगे क्या रुख अपनाता है।

  • टी20 वर्ल्ड कप 2026 : पाकिस्तान करेगा भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार, न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेगा बाकी मुकाबले

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 : पाकिस्तान करेगा भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार, न्यूट्रल वेन्यू पर खेलेगा बाकी मुकाबले


    नई दिल्ली।
    टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) से पहले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट संबंधों (India-Pakistan cricket Relations) में एक नया मोड़ आ गया है। पाकिस्तान सरकार ने अपनी पुरुष क्रिकेट टीम को टूर्नामेंट में भाग लेने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले लीग मैच का बहिष्कार (Boycott of League Match) करने का फैसला किया है। यह मुकाबला श्रीलंका के कोलंबो में खेला जाना था।

    राजनीतिक तनाव के चलते पाकिस्तान ने भारत में अपने मैच खेलने से पहले ही इनकार कर दिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने पाकिस्तान के मैच न्यूट्रल वेन्यू श्रीलंका शिफ्ट कर दिए। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से हुए समझौते के अनुसार, जब भी दोनों देशों में से कोई आईसीसी इवेंट की मेजबानी करेगा, तो द्विपक्षीय मुकाबले न्यूट्रल स्थल पर खेले जाएंगे।

    इस पूरे घटनाक्रम में बांग्लादेश का मुद्दा भी जुड़ा है। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग की थी, जिसे आईसीसी ने स्वीकार नहीं किया। इसके बाद बांग्लादेश ने टूर्नामेंट से नाम वापस ले लिया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया। पाकिस्तान ने इस मामले में बांग्लादेश का समर्थन किया था और एकजुटता दिखाने के संकेत दिए थे।

    गौरतलब है कि भारत ने 2008 के बाद से पाकिस्तान का दौरा नहीं किया है। हाल के वर्षों में दोनों टीमें आईसीसी आयोजनों में ही आमने-सामने होती रही हैं। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में भी भारत ने अपने सभी मैच दुबई में खेले थे।

    भारत-पाकिस्तान मुकाबला किसी भी आईसीसी टूर्नामेंट का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के इस फैसले से टूर्नामेंट के कार्यक्रम और व्यावसायिक समीकरणों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। अब निगाहें आईसीसी के अगले कदम और संभावित समाधान पर टिकी हैं।

  • भारत ने पाकिस्तान को हराकर अंडर-19 विश्व कप सेमीफाइनल में बनाई जगह

    भारत ने पाकिस्तान को हराकर अंडर-19 विश्व कप सेमीफाइनल में बनाई जगह


    बुलावायो।
    अंडर-19 वर्ल्ड कप (Under-19 World Cup) के एक बेहद रोमांचक लेकिन रणनीतिक रूप से हैरान करने वाले मुकाबले में भारत (India) ने सेमीफाइनल का टिकट पक्का कर लिया है। पाकिस्तान (Pakistan) के सामने सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए 253 रनों के लक्ष्य के साथ-साथ एक कठिन डेडलाइन भी थी, लेकिन पाकिस्तानी टीम ने सेमीफाइनल के गणित को सुलझाने के बजाय केवल मैच जीतने पर ध्यान दिया, जिसके चलते वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं। और आखिर में मैच भी नहीं जीत सके।

    सेमीफाइनल के समीकरण के अनुसार, पाकिस्तान को न केवल भारत को हराना था, बल्कि अपने नेट रन-रेट को बेहतर करने के लिए इस लक्ष्य को 33.3 ओवरों के भीतर हासिल करना था। यदि पाकिस्तान ऐसा कर लेता, तो वह भारत को पीछे छोड़कर अंतिम चार में पहुंच जाता। हालांकि, मैदान पर नजारा इसके बिल्कुल विपरीत रहा। पाकिस्तान के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही बेहद धीमी बल्लेबाजी की, जिससे ऐसा लगा कि उनका मिशन सेमीफाइनल में पहुंचना नहीं, बल्कि किसी भी तरह केवल भारत को हराना है।

    भारतीय टीम को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए या तो यह मैच जीतना था, या फिर पाकिस्तान को 33.3 ओवरों तक लक्ष्य हासिल करने से रोकना था। पाकिस्तान की धीमी शुरुआत ने भारत का काम आसान कर दिया। जैसे ही मैच 34वें ओवर में प्रवेश कर गया, भारत की सेमीफाइनल में जगह तकनीकी रूप से पक्की हो गई। पाकिस्तानी टीम की इस रणनीति पर क्रिकेट विशेषज्ञों ने हैरानी जताई है, क्योंकि उन्होंने टूर्नामेंट में बने रहने के मौके को खुद ही हाथ से जाने दिया।

    भारत ने पाकिस्तान को 58 रनों से हरा दिया। इसी के साथ टीम इंडिया ने अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में प्रवेश पा लिया है। इस मुकाबले में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेदबाजी चुनी थी। पहले बल्लेबाजी करने आई भारतीय टीम पूरे 50 ओवर भी नहीं खेल पाई और 252 रनों पर ऑलआउट हो गई थी। जवाब में पाकिस्तान टीम 194 रन ही बना पाई।

    इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान, पहले ही वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में प्रवेश पा चुके थे। ऐसे में भारत बनाम पाकिस्तान मैच पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं, क्योंकि इसी मुकाबले का परिणाम तय करता कि सेमीफाइनल में जाने वाली चौथी टीम कौन सी होगी।

    भारतीय टीम ने पाकिस्तान को 252 रनों का लक्ष्य दिया था। चूंकि नेट रन-रेट में पाकिस्तान बहुत पीछे था, इसलिए उसे 33.3 ओवरों में यह लक्ष्य हासिल करना था। उस्मान खान, कप्तान फरहान यूसुफ और सलामी बल्लेबाज हमजा जहूर ने एक समय टीम इंडिया की धड़कनें बढ़ा दी थीं, लेकिन पाकिस्तान का लोवर मिडिल ऑर्डर और पुछल्ले बल्लेबाज बुरी तरह फ्लॉप हो गए।

    पाकिस्तान टीम एक समय 30वें ओवर में केवल 2 विकेट के नुकसान पर 151 रन बना चुकी थी। पाकिस्तान का स्कोरबोर्ड 5 से ज्यादा रन रेट से आगे बढ़ रहा था। पाक टीम आसान जीत की ओर अग्रसर थी, लेकिन तभी आरएस अंबरिस ने कप्तान फरहान यूसुफ को 38 के स्कोर पर आउट कर दिया. मैच का रुख यहीं से पलट चुका था।

    इसी बीच कप्तान आयुष म्हात्रे का भी खतरनाक स्पेल शुरू हुआ, जिन्होंने थोड़ी देर बाद ही अहमद हुसैन को आउट करके पाकिस्तान टीम को संभलने का मौका नहीं दिया. इसके बाद भी उस्मान खान बचे हुए थे, लेकिन म्हात्रे ने उन्हें 66 के स्कोर पर आउट करके पवेलियन भेज दिया. म्हात्रे द्वारा लगातार 2 सेट बल्लेबाजों को आउट करना, मतलब मैच भारत की झोली में आता दिख रहा था. पाकिस्तान के अंतिम 6 विकेट महज 43 रनों के भीतर गिर गए।

  • भारत ने न्यूजीलैंड को 46 रनों से हराकर 4-1 से सीरीज जीती, ईशान किशन का तूफानी शतक और अर्शदीप का पंजा

    भारत ने न्यूजीलैंड को 46 रनों से हराकर 4-1 से सीरीज जीती, ईशान किशन का तूफानी शतक और अर्शदीप का पंजा


    तिरुवनंतपुरम।
    भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) ने ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए पांचवें और अंतिम टी20 मुकाबले में न्यूजीलैंड (New Zealand) को 46 रनों से हराकर पांच मैचों की सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। इस मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 271 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट (International T20 cricket) में भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्कोर है। जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 19.4 ओवर में 225 रन पर ऑलआउट हो गई।

    भारत की जीत के नायक विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन और बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह रहे। ईशान किशन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 42 गेंदों में अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक पूरा किया। उन्होंने 43 गेंदों पर 103 रन बनाए, जिसमें 10 छक्के और 6 चौके शामिल थे। यह भारत के लिए टी20I में पांचवां सबसे तेज और न्यूजीलैंड के खिलाफ सबसे तेज शतक रहा। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 63 रनों की सधी हुई पारी खेली, जबकि हार्दिक पांड्या ने अंत में 17 गेंदों पर 42 रन बनाकर स्कोर को और मजबूत किया।

    न्यूजीलैंड की ओर से फिन एलेन ने वापसी करते हुए आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया और 38 गेंदों पर 80 रन ठोके। हालांकि, उनके आउट होते ही मेहमान टीम की पारी लड़खड़ा गई। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने लगातार अंतराल पर विकेट चटकाकर मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया।

    अर्शदीप सिंह ने इस मुकाबले में शानदार वापसी करते हुए 4 ओवर में 51 रन देकर 5 विकेट झटके। यह उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का दूसरा पांच विकेट हॉल रहा और इसी के साथ वह इस सीरीज में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज भी बने। अक्षर पटेल ने 3 विकेट लिए, जबकि वरुण चक्रवर्ती ने 1 सफलता हासिल की।

    इस जीत के साथ भारत ने सीरीज में अपना दबदबा कायम रखा। नागपुर में पहला मैच जीतने के बाद भारत ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया, जबकि न्यूजीलैंड की एकमात्र जीत विशाखापट्टनम में चौथे टी20 में आई थी। अंतिम मुकाबले में दमदार वापसी के साथ भारत ने सीरीज को शानदार अंदाज में समाप्त किया और आगामी टी20 विश्व कप से पहले आत्मविश्वास बढ़ाया।

  • एयरबस को भारत के पहले एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए मिला ऑर्डर

    एयरबस को भारत के पहले एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए मिला ऑर्डर


    नई दिल्‍ली।
    फ्रांस की कंपनी एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स (French company Airbus Corporate Helicopters) को एक निजी भारतीय ग्राहक (Private Indian Customers) से तीन हेलीकॉप्टर के ऑडर्र मिले हैं। इसमें एक एच175 हेलीकॉप्‍टर और दो एसीएच160 हेलीकॉप्टर शामिल है। हालांकि, इसकी कीमत की जानकारी कंपनी ने साझा नहीं किया है।

    एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स ने शनिवार को एक बयान में कहा कि उसने एक निजी भारतीय ग्राहक के साथ दो एसीएच 160 हेलीकॉप्टर और एक एच175 हेलीकॉप्‍टर के लिए ऑर्डर साइन किया है। यह ऑपरेटर पहले से ही एसीएच 160 का ग्राहक है, जो भारत का पहला एच175 हेलीकॉप्‍टर ग्राहक बनेगा।

    कंपनी ने बताया कि भारतीय सिविल मार्केट में सुपर-मीडियम ट्विन-इंजन हेलीकॉप्टर की एंट्री के साथ एच175 हेलीकॉप्टर 16-सीट कॉन्फ़िगरेशन में आएगा। इसकी डिलीवरी 2026 में होने वाली है। वहीं, दो एसीएच160 हेलीकॉप्टर ग्राहक की जरूरतों के हिसाब से खास तौर पर कॉन्फ़िगर किए जाएंगे, जो 2027 में डिलीवर किए जाएंगे।

    भारत और दक्षिण एशिया में एयरबस हेलीकॉप्टर्स कंपनी के हेड सनी गुगलानी ने कहा, “दो एसीएच160 के लिए यह रिपीट ऑर्डर और एक भारतीय ग्राहक द्वारा पहला एच175 ऑर्डर देश में सिविल हेलीकॉप्टर मार्केट की बढ़ती मेच्योरिटी को दिखाता है। दोनों हेलीकॉप्टर पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए एकदम सही हैं और बेहतर परफॉर्मेंस और शानदार आराम देते हैं। गुगलानी ने कहा क‍ि हम ग्राहक को उनकी पसंद के लिए बधाई देते हैं और हमारे प्रोडक्ट्स पर भरोसा दिखाने के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।

    एयरबस कॉर्पोरेट हेलीकॉप्टर्स का विश्वसनीयता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया, एसीएच160 पावर और एलिगेंस का एक शानदार कॉम्बिनेशन है। अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस, एसीएच160 बिज़नेस लीडर्स को समय और दूरी की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है, जिससे वे सही समय पर, सही जगह पर महत्वपूर्ण फैसले ले पाते हैं। वहीं, सुपर मीडियम एच175 अपनी वर्सेटिलिटी, रेंज और पेलोड क्षमताओं के साथ एयरबस हेलीकॉप्टर्स के सिविल पोर्टफोलियो को पूरा करता है। अपनी क्लास में सबसे कम वाइब्रेशन और साउंड सिग्नेचर, और एडवांस्ड हेलियोनिक्स सेफ्टी सिस्टम के साथ, एच175 पैसेंजर ट्रांसपोर्ट के लिए असाधारण आराम और सुरक्षा देता है।