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  • 1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    1.78 लाख करोड़ के रक्षा उत्पादन और रिकॉर्ड निर्यात का दावा, राजनाथ सिंह बोले- आत्मनिर्भर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा देश

    नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। उनके अनुसार यह उपलब्धि देश की बढ़ती विनिर्माण क्षमता, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान पर वैश्विक विश्वास का मजबूत संकेत है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में देश का वार्षिक रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा वर्ष 2014-15 की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है। वहीं रक्षा निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और यह बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उनके अनुसार यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पादों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की नीतियों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों को रक्षा विनिर्माण में निवेश और नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश में आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित हुई है और निर्यात के नए अवसर भी खुले हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसकी सफलता को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त की गई थीं। हालांकि समय के साथ यह पहल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम देने में सफल रही। रक्षा उत्पादन के साथ-साथ मोबाइल निर्माण, ऑटोमोबाइल निर्यात, डिजिटल अवसंरचना और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी देश ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है।

    रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार अपने तीसरे कार्यकाल में सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन की नीति के आधार पर विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण, तकनीक और रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।

    उन्होंने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने स्वदेशी चिप निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। सरकार आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने के साथ उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विनिर्माण क्षमता तैयार हो सके।

    राजनाथ सिंह ने डिजिटल क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के माध्यम से होने वाले डिजिटल लेनदेन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं और इसकी पहुंच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही है। इसके साथ ही देश में स्वदेशी 5जी नेटवर्क के विस्तार और 6जी तकनीक के विकास पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

    उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद जीएसटी अब केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का प्रभावी माध्यम बन चुका है। रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए इन सुधारों ने भारत की आर्थिक और औद्योगिक क्षमता को नई दिशा दी है तथा देश को आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाने की प्रक्रिया को गति प्रदान की है।

  • खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    खिलौना उद्योग को पीयूष गोयल का बड़ा लक्ष्य, चार साल में 10 गुना निर्यात बढ़ाने का आह्वान, QCO जारी रखने का दिया भरोसा

    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय खिलौना उद्योग से वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाने का आह्वान करते हुए अगले चार वर्षों में खिलौनों के निर्यात को मौजूदा स्तर से दस गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित करने की अपील की। उन्होंने उद्योग को भरोसा दिलाया कि सरकार गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं करेगी और खिलौनों पर लागू क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) को वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही घरेलू उद्योग को सस्ते विदेशी आयात से भी संरक्षण मिलता रहेगा।

    नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाजार का आकार लगभग 120 अरब डॉलर है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी भी बेहद सीमित है। उनका कहना था कि भारतीय उद्योग के सामने निर्यात बढ़ाने और दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

    उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में भारतीय खिलौनों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। उद्योग को नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि भारत विश्व के प्रमुख खिलौना निर्यातक देशों में अपनी जगह बना सके।

    पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए कई विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। उद्योग को विभिन्न देशों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजकर स्थानीय कंपनियों, सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ नए व्यावसायिक संबंध विकसित करने चाहिए।

    उन्होंने आधुनिक उत्पादन तकनीकों और अत्याधुनिक मशीनरी को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे बड़ी ताकत होती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां उत्पाद परीक्षण, डिजाइन विकास, अनुसंधान और नवाचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

    केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लेकर उद्योग में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाए रखने के लिए लागू की गई है। सरकार इसे जारी रखेगी और गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। साथ ही अनुचित डंपिंग के खिलाफ भी आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत और कई देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। इन समझौतों के लागू होने से भारतीय खिलौना उद्योग को नए निर्यात बाजार उपलब्ध होंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का दायरा और विस्तृत होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक विपणन पर समान रूप से ध्यान दे तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व के खिलौना बाजार में कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।

  • बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़

    बर्गर किंग इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, अजन्ता फार्मा प्रमोटर्स की कंपनी जुटाएगी 1,800 करोड़ रुपये, QSR सेक्टर में बढ़ेगी पकड़


    नई दिल्ली। देश के क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर में एक बड़ा कॉर्पोरेट सौदा आकार ले सकता है। अजन्ता फार्मा के प्रमोटर्स की कंपनी इंस्पिरा ग्लोबल बर्गर किंग इंडिया के कारोबार में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी कर रही है। इस संभावित अधिग्रहण के लिए कंपनी लगभग 1,800 करोड़ रुपये की प्राइवेट क्रेडिट फंडिंग जुटा रही है। यदि यह सौदा पूरा होता है तो भारतीय फूड सर्विस उद्योग में प्रतिस्पर्धा का नया दौर देखने को मिल सकता है।

    जानकारी के अनुसार, इस प्रस्तावित अधिग्रहण को इंस्पिरा ग्लोबल अपनी फूड एंड बेवरेज इकाई लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। लेनेक्सिस पहले से ही क्विक सर्विस रेस्टोरेंट कारोबार में सक्रिय है और कई लोकप्रिय खाद्य ब्रांडों का संचालन करती है। कंपनी का उद्देश्य इस अधिग्रहण के जरिए अपने पोर्टफोलियो का विस्तार करना और संगठित फूड सर्विस बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है।

    सूत्रों के मुताबिक, अधिग्रहण के लिए आवश्यक फंडिंग का बड़ा हिस्सा नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के माध्यम से जुटाया जा रहा है। अब तक लगभग 1,050 करोड़ रुपये की राशि एकत्र की जा चुकी है, जबकि शेष लगभग 800 करोड़ रुपये भी जल्द जुटाने की तैयारी चल रही है। पूरी फंडिंग उपलब्ध होने के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    भारत में बर्गर किंग ब्रांड का संचालन रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के माध्यम से किया जाता है। प्रस्तावित सौदे के तहत इसी कंपनी में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी हासिल करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि, इस संभावित अधिग्रहण को अंतिम रूप देने के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं और अन्य व्यावसायिक औपचारिकताओं को पूरा किया जाना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफल रहता है तो भारतीय क्विक सर्विस रेस्टोरेंट बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में संगठित फूड चेन, ऑनलाइन फूड डिलीवरी और उपभोक्ताओं की बदलती खानपान की आदतों के कारण इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ा है। ऐसे माहौल में बड़े ब्रांडों में हिस्सेदारी हासिल करना कंपनियों के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है।

    इंस्पिरा ग्लोबल का स्वामित्व अजन्ता फार्मा के प्रमोटर परिवार से जुड़े आयुष मधुसूदन अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल के पास है। समूह पिछले कुछ वर्षों से फूड एवं बेवरेज कारोबार में विस्तार की रणनीति पर काम कर रहा है। लेनेक्सिस फूडवर्क्स के माध्यम से कंपनी पहले ही कई लोकप्रिय फूड ब्रांड संचालित कर रही है और अब वैश्विक फास्ट फूड ब्रांड के भारतीय कारोबार में हिस्सेदारी हासिल कर अपने विस्तार को नई गति देना चाहती है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह अधिग्रहण पूरा होता है तो इससे केवल संबंधित कंपनियों की कारोबारी रणनीति ही नहीं बदलेगी, बल्कि भारतीय QSR उद्योग में निवेश, विस्तार और प्रतिस्पर्धा का नया परिदृश्य भी सामने आ सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर इस संभावित सौदे की प्रगति, फंडिंग प्रक्रिया और अंतिम समझौते पर बनी हुई है।

  • भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत होगी कई गुना मजबूत, रक्षा अधिग्रहण परिषद ने आधुनिक हथियारों और निगरानी प्रणालियों की खरीद को दी हरी झंडी

    नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों की आधुनिक युद्ध क्षमता को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये की रक्षा खरीद परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इन परियोजनाओं के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अत्याधुनिक हथियार प्रणालियां, ड्रोन, मिसाइलें और निगरानी उपकरण शामिल किए जाएंगे। इस निर्णय का उद्देश्य बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को और अधिक प्रभावी बनाना है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में भारतीय सेना के लिए कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों को स्वीकृति दी गई। इनमें ‘आकाश तरंग’ एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल, वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम, टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम तथा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन प्रणाली प्रमुख हैं। इन सभी प्रणालियों का उद्देश्य आधुनिक युद्ध में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार ‘आकाश तरंग’ प्रणाली विशेष रूप से दुश्मन के ड्रोन हमलों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल पैदल सेना को दुश्मन के आधुनिक टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के विरुद्ध अधिक प्रभावी बनाएगी। मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल मध्यम दूरी तक विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगी, जबकि वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम कम दूरी के हवाई लक्ष्यों को तेजी से निष्क्रिय करने में सक्षम होगा।

    टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम उनकी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा। यह प्रणाली युद्धक्षेत्र में आने वाले मिसाइल और रॉकेट जैसे खतरों का समय रहते पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सहायक होगी। इसके साथ ही जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और सटीक लक्ष्यभेदन अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन प्रणालियों से सेना की मारक क्षमता और परिचालन दक्षता दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

    भारतीय नौसेना के लिए भी कई उन्नत परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन, नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम तथा इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी की स्थापना शामिल है। इन परियोजनाओं से समुद्री निगरानी, नौसैनिक अभियानों और आधुनिक युद्धपोतों की तकनीकी क्षमता को मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक सेंसर से लैस अनमैन्ड एरियल सिस्टम समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थितिजन्य जागरूकता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

    वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग आधारित हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों और रणनीतिक इलाकों में वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के लागू होने के बाद भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त युद्ध क्षमता, निगरानी तंत्र, वायु एवं समुद्री सुरक्षा तथा आधुनिक तकनीकी तैयारी में उल्लेखनीय सुधार होगा। बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और नई सैन्य चुनौतियों को देखते हुए यह निर्णय भारत की रक्षा तैयारियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख

    पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख


    नई दिल्ली ।
    देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं भविष्य में कीमतों में संभावित राहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

    केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कच्चे तेल की खरीद, परिवहन, भंडारण और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसकी खरीद लगभग दो महीने पहले हुई थी।

    सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं या उनमें और गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक होने पर खुदरा कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जा सकता है।

    हाल के दिनों में देश की एक निजी ईंधन विपणन कंपनी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में राहत दे सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का निर्णय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के रुख को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी रही। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैट के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और कर संरचना जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में गिरावट आने के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल कमी होना हमेशा संभव नहीं होता।

    सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो उपभोक्ताओं को भविष्य में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

  • आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

    आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
    संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

    दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

    प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
    संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

    आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
    भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
    यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।

  • 117 हस्तियों ने भारत-पाक वार्ता की उठाई मांग, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा, वैश्विक कार्रवाई पर दिया जोर

    117 हस्तियों ने भारत-पाक वार्ता की उठाई मांग, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को घेरा, वैश्विक कार्रवाई पर दिया जोर

    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के संबंधों में संवाद बहाल करने की मांग को लेकर दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों द्वारा खुला पत्र जारी किए जाने के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना स्पष्ट और सख्त रुख दोहराया है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी लड़ाई तभी संभव है, जब सभी देश बिना किसी भेदभाव और दोहरे मानदंड के आतंकवाद तथा उसके समर्थकों के विरुद्ध समान रूप से कार्रवाई करें।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत ने कहा कि आतंकवाद को किसी भी आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की सोच वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई धर्म, सीमा या वैचारिक औचित्य नहीं होता और इससे निपटने के लिए एक समान वैश्विक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। केवल निंदा या औपचारिक बयान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाने वालों, आर्थिक सहायता देने वालों और उन्हें संरक्षण प्रदान करने वालों तक कानून की पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।

    भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में सीमा पार आतंकवादी नेटवर्क और नई तकनीकों के दुरुपयोग को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। भारत ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने आतंकवादी संगठनों की कार्यप्रणाली को पहले की तुलना में अधिक जटिल और संगठित बना दिया है। इसलिए वैश्विक सुरक्षा तंत्र को भी बदलती चुनौतियों के अनुरूप मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है।

    भारत ने विशेष रूप से ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक, एन्क्रिप्टेड संचार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैपिंग एप्लिकेशन और डार्क वेब के बढ़ते दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। भारत का कहना है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल कट्टरपंथ फैलाने, भर्ती अभियान चलाने, वित्तीय लेन-देन छिपाने और आतंकी गतिविधियों के समन्वय के लिए किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।

    भारत ने यह भी दोहराया कि आतंकवाद के वित्तपोषण पर प्रभावी रोक लगाए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसके लिए देशों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, वित्तीय निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरी तरह पालन करने की आवश्यकता बताई गई। भारत ने कहा कि किसी भी देश की भूमि का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने के रूप में नहीं होने दिया जाना चाहिए।

    इसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार तथा संवाद बहाल करने की मांग को लेकर दोनों देशों की 117 हस्तियों द्वारा जारी खुले पत्र ने भी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा को गति दी है। हालांकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के माध्यम से यह स्पष्ट संकेत दिया कि आतंकवाद के मुद्दे पर उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं है और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस तथा निष्पक्ष वैश्विक कार्रवाई उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी। भारत का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, तकनीकी सतर्कता और आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति ही वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी मार्ग है।

  • इंग्लैंड के खिलाफ जीत की नई उम्मीद के साथ उतरेगा भारत, आयरलैंड दौरे की हार भुलाकर लय हासिल करने की चुनौती

    इंग्लैंड के खिलाफ जीत की नई उम्मीद के साथ उतरेगा भारत, आयरलैंड दौरे की हार भुलाकर लय हासिल करने की चुनौती

    नई दिल्ली । आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में मिली निराशाजनक हार के बाद भारतीय टीम अब इंग्लैंड के खिलाफ नई शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला बुधवार को डरहम के रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। इस सीरीज को भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास हासिल करने और पिछली गलतियों से सीख लेकर मजबूत वापसी करने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    आयरलैंड दौरे पर भारत की बल्लेबाजी उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। आक्रामक बल्लेबाजों से सजी टीम बड़े स्कोर बनाने और अहम मौकों पर लंबी साझेदारियां निभाने में असफल रही। परिणामस्वरूप टीम को सीरीज गंवानी पड़ी। अब इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों के सामने अपनी क्षमता साबित करने की चुनौती होगी। टीम प्रबंधन चाहेगा कि बल्लेबाजी क्रम अधिक जिम्मेदारी के साथ खेलते हुए शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बनाए।

    नए कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी यह सीरीज महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में सफल नेतृत्व का अनुभव रखने वाले अय्यर अब विदेशी परिस्थितियों में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। इंग्लैंड जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उनकी रणनीति, कप्तानी और खिलाड़ियों का उपयोग टीम के प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाएगा। युवा खिलाड़ियों के साथ संतुलन बनाना भी उनके सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।

    टीम चयन को लेकर भी काफी चर्चा बनी हुई है। युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर सभी की निगाहें रहेंगी, जिन्हें आयरलैंड दौरे पर अंतिम एकादश में मौका नहीं मिला था। यदि उन्हें इस मुकाबले में पदार्पण का अवसर मिलता है तो वह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे युवा क्रिकेटरों में शामिल हो जाएंगे। हालांकि टीम प्रबंधन युवा खिलाड़ियों को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय उनके दीर्घकालिक विकास पर भी बराबर ध्यान दे रहा है।

    भारतीय गेंदबाजी आक्रमण में अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का अच्छा मिश्रण मौजूद है। तेज गेंदबाज शुरुआती ओवरों में इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे, जबकि स्पिन विभाग में विविधता टीम की ताकत मानी जा रही है। मध्य ओवरों में विकेट निकालने की जिम्मेदारी स्पिन गेंदबाजों पर रहेगी, जिससे इंग्लैंड की मजबूत बल्लेबाजी को नियंत्रित किया जा सके।

    दूसरी ओर इंग्लैंड की टीम घरेलू परिस्थितियों का पूरा फायदा उठाने के इरादे से मैदान में उतरेगी। उसके बल्लेबाज तेज शुरुआत करने और बड़े स्कोर खड़े करने की क्षमता रखते हैं। वहीं तेज गेंदबाजी आक्रमण नई गेंद से मिलने वाली सीम मूवमेंट का लाभ उठाकर भारतीय शीर्ष क्रम को शुरुआती झटके देने की कोशिश करेगा। घरेलू मैदान पर इंग्लैंड का रिकॉर्ड भी उसे मनोवैज्ञानिक बढ़त प्रदान करता है।

    यह सीरीज दोनों टीमों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत जहां पिछली हार की निराशा को पीछे छोड़ जीत की राह पर लौटना चाहेगा, वहीं इंग्लैंड घरेलू मैदान पर अपने दबदबे को कायम रखने की कोशिश करेगा। ऐसे में पहले मुकाबले का परिणाम पूरी सीरीज की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस बात पर भी रहेंगी कि भारतीय टीम दबाव से उबरकर किस तरह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करती है और मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ नई शुरुआत को सफल बनाती है।

  • भारत के लिए राहतभरा कदम, अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों को प्रतिबंध सूची से हटाया, व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगी नई गति

    भारत के लिए राहतभरा कदम, अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों को प्रतिबंध सूची से हटाया, व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगी नई गति

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने चार भारतीय कंपनियों को अपनी प्रतिबंध सूची से हटा दिया है। इन कंपनियों पर पहले रूस से जुड़े सैन्य-औद्योगिक नेटवर्क को उन्नत तकनीक और उपकरणों की आपूर्ति करने के आरोप लगाए गए थे। अब प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कारोबारी गतिविधियों को सामान्य रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

    प्रतिबंध सूची से हटाई गई कंपनियों में हैदराबाद की आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और लोकेश मशीन्स लिमिटेड, अहमदाबाद की गैलेक्सी बियरिंग्स तथा नई दिल्ली की शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन सभी कंपनियों के नाम अब अमेरिकी प्रतिबंधित संस्थाओं की सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेनदेन पर लगी बाधाएं समाप्त हो गई हैं।

    इन कंपनियों पर पहले विभिन्न प्रकार के औद्योगिक उपकरण, मशीन टूल्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, रोलर बियरिंग्स तथा अन्य दोहरे उपयोग वाली तकनीकों के निर्यात से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी अधिकारियों का मानना था कि इन उत्पादों का उपयोग रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे में किया जा सकता है। इन्हीं आरोपों के आधार पर वर्ष 2024 में इनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी।

    प्रतिबंध लगने के बाद संबंधित कंपनियों के लिए कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कारोबारी लेनदेन प्रभावित हुए थे। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में काम करने वाली कंपनियों के लिए ऐसी कार्रवाई का सीधा असर निर्यात, बैंकिंग सेवाओं और विदेशी साझेदारियों पर पड़ता है। अब प्रतिबंध हटने से इन कंपनियों को वैश्विक बाजार में फिर से सामान्य कारोबारी अवसर मिलने की संभावना बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और विश्वास का संकेत भी माना जा सकता है। दोनों देश रक्षा, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और व्यापार सहित कई क्षेत्रों में लगातार सहयोग बढ़ा रहे हैं। ऐसे में प्रतिबंध हटने से उद्योग जगत को सकारात्मक संदेश मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस फैसले के साथ यह स्पष्ट किया है कि निर्यात नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े नियमों का पालन सभी कंपनियों के लिए अनिवार्य रहेगा। वैश्विक व्यापार में संवेदनशील तकनीकों और दोहरे उपयोग वाले उपकरणों के निर्यात पर विभिन्न देशों की निगरानी पहले की तरह जारी रहेगी।

    उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारतीय कंपनियों के लिए राहत लेकर आया है और भविष्य में दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग, निवेश और उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्र में साझेदारी को भी नई गति मिल सकती है। साथ ही यह निर्णय उन भारतीय निर्यातकों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, जो वैश्विक बाजार में अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

  • अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक पर भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, इस्लामाबाद ने कार्रवाई को बताया जायज़, नई दिल्ली ने कहा- संप्रभुता पर हमला

    अफगानिस्तान एयरस्ट्राइक पर भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, इस्लामाबाद ने कार्रवाई को बताया जायज़, नई दिल्ली ने कहा- संप्रभुता पर हमला

    नई दिल्ली । अफगानिस्तान में हाल ही में हुई एयरस्ट्राइक को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ गया है। भारत द्वारा इस कार्रवाई की आलोचना किए जाने के बाद पाकिस्तान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अपनी सैन्य कार्रवाई को उचित और आवश्यक बताया है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर ऐसे समय सामने आया है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पहले से ही संवेदनशील बने हुए हैं।

    पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक रुख में कहा कि सीमा पार मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ की गई कार्रवाई उसके राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप थी। इस्लामाबाद का दावा है कि उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहते हुए अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। साथ ही पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि वह अफगानिस्तान की भूमि का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी गतिविधियों के लिए किए जाने का समर्थन करता है तथा आतंकवादी संगठनों को सहायता उपलब्ध कराता रहा है।

    भारत ने इन आरोपों को पहले भी निराधार बताया है और अफगानिस्तान में हुई एयरस्ट्राइक पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारतीय पक्ष का कहना है कि किसी भी संप्रभु देश की सीमा के भीतर इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने इसे अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताते हुए नागरिकों की मौत पर भी गहरी संवेदना व्यक्त की थी।

    भारत का यह भी कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि संवाद और सहयोग के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। नई दिल्ली ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन के अपने रुख पर कायम है।

    दूसरी ओर अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। अफगान प्रशासन का दावा है कि हवाई हमलों में आतंकवादी नहीं बल्कि बड़ी संख्या में आम नागरिक प्रभावित हुए हैं। उसके अनुसार महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों की मौत हुई तथा अनेक नागरिक घायल हुए। अफगानिस्तान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मानवीय सिद्धांतों और अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

    हालांकि पाकिस्तान का दावा इससे अलग है। उसका कहना है कि सीमा क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और कार्रवाई पूरी तरह लक्षित थी। इस्लामाबाद का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल सुरक्षा खतरों को समाप्त करना था और नागरिकों को नुकसान पहुंचाना उसकी नीति नहीं है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अलग-अलग दावों के बीच घटनाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती बयानबाज़ी और सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में कूटनीतिक संवाद, संयम और पारदर्शिता ही तनाव कम करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।