Tag: Indian air force

  • गंगा के ऊपर चिनूक का कमाल, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान, 25 अक्टूबर को आएंगे पीएम मोदी

    गंगा के ऊपर चिनूक का कमाल, राफेल-सुखोई की गर्जना से गूंजा काशी का आसमान, 25 अक्टूबर को आएंगे पीएम मोदी


    वाराणसी । वाराणसी में गुरुवार को भारतीय वायुसेना के एयर शो विंग्स ओवर गंगा का भव्य आगाज हुआ। गंगा के किनारे नमो घाट पर आयोजित इस शानदार आयोजन में लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों के हैरतअंगेज करतब देखकर लोग रोमांचित हो उठे। आसमान में कभी तिरंगे की आकृति बनी तो कभी हेलिकॉप्टरों ने दिल बनाकर लोगों का ध्यान खींचा। गंगा के ऊपर फूलों की बारिश और राफेल तथा सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों की तेज रफ्तार ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित इस एयर शो में कुल 100 विमान शामिल हुए जिनमें 52 लड़ाकू विमान भी थे।

    गुरुवार सुबह करीब 11 बजकर 50 मिनट पर नमो घाट के ऊपर वायुसेना के सारंग हेलिकॉप्टरों ने शानदार हवाई प्रदर्शन किया। हेलिकॉप्टरों ने गंगा के ऊपर आसमान में दिल की आकृति बनाई तो घाट पर मौजूद लोग तालियां बजाने लगे। कई लोगों ने इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल फोन में कैद किया। इसी दौरान हेलिकॉप्टरों से मां गंगा के ऊपर फूलों की बारिश की गई। इस दृश्य ने धार्मिक आस्था और देशभक्ति का अनूठा संगम पेश किया। घाट पर मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और वायुसेना के प्रदर्शन का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

    एयर शो का सबसे रोमांचक हिस्सा लड़ाकू विमानों का प्रदर्शन रहा। राफेल और सुखोई ने आसमान में तेज गति से उड़ान भरते हुए शानदार करतब दिखाए। इन विमानों की गर्जना से गंगा का किनारा गूंज उठा। वहीं जगुआर मिराज 2000 तेजस और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों ने तीर की नोक जैसी आकृति में उड़ान भरकर अपनी सटीकता और तालमेल का प्रदर्शन किया। भारतीय वायुसेना के एडवांस्ड जेट ट्रेनर विमान बीएई हॉक एमके 132 ने भी नमो घाट के ऊपर से उड़ान भरी। विमानों की गति और उनके करतब देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे।

    इस आयोजन में भारी परिवहन क्षमता वाले चिनूक हेलिकॉप्टर ने भी खास आकर्षण पैदा किया। चिनूक ने गंगा के पानी को छुआ और फिर तेजी से आसमान की ओर उड़ गया। इस दृश्य को देखकर घाट पर मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं। एयर शो में लड़ाकू विमानों के अलावा 15 परिवहन विमान 32 हेलिकॉप्टर और विंटेज विमान भी शामिल रहे। ये विमान देशभर के 12 एयरपोर्ट से उड़ान भरकर वाराणसी पहुंचे। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए नमो घाट को वीवीआईपी मेहमानों के लिए आरक्षित रखा गया।

    भारतीय वायुसेना ने इस तीन दिवसीय आयोजन को विंग्स ओवर गंगा नाम दिया है। एयर शो 22 23 और 25 अक्टूबर को आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है और अनुमान लगाया गया है कि करीब 20 लाख लोग इस ऐतिहासिक नजारे के साक्षी बन सकते हैं। 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी एयर शो में शामिल होने की संभावना है। काशी में हो रहा यह आयोजन भारतीय वायुसेना की ताकत तकनीकी क्षमता और कुशल पायलटों के शानदार तालमेल को प्रदर्शित करने के साथ ही लोगों के भीतर देशभक्ति और गर्व की भावना को भी मजबूत कर रहा है।

  • फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड

    फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना को नया प्रमुख मिल गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में कमान संभाल ली है। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट से लेकर वायु सेना के शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। उनके करियर में युद्ध अभियानों से लेकर फाइटर विमानों के परीक्षण और रणनीतिक योजना तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने के महत्वपूर्ण मिशन से लेकर कारगिल युद्ध के दौरान निभाई गई जिम्मेदारी तक उनका सैन्य सफर कई उपलब्धियों से भरा रहा है।

    आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी की 69वीं कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बांग्लादेश से स्टाफ कोर्स किया और नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज से 57वें एनडीसी कोर्स के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया। सैन्य शिक्षा के साथ उनके पास विमान उड़ाने का भी लंबा अनुभव है।

    आशुतोष दीक्षित एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने मिराज 2000 सहित कई फाइटर विमान ट्रेनर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं। उनके नाम 3300 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है। लंबे फ्लाइंग करियर ने उन्हें भारतीय वायु सेना के ऑपरेशनल और तकनीकी दोनों पहलुओं की गहरी समझ दी।

    उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय जिम्मेदारियों में फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने का मिशन भी शामिल है। विंग कमांडर के तौर पर उन्हें फ्रांस से 10 मिराज विमानों को सुरक्षित भारत लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने दो बैच में इस मिशन को पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी सीमा पर मिराज 2000 की 9वीं स्क्वाड्रन की कमान संभाली और उसे कम समय में कॉम्बैट रेडी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर और सीमा पर चले ऑपरेशन रक्षक में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में ग्रुप कैप्टन के रूप में उन्होंने छह बड़ी विदेशी कंपनियों के फाइटर जेट्स के फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया। इससे उनकी तकनीकी समझ और रणनीतिक क्षमता का पता चलता है।

    आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सैन्य सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें 26 जनवरी 2006 को वायु सेना मेडल दिया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2011 को विशिष्ट सेवा मेडल और 26 जनवरी 2023 को अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और सेवाओं को दर्शाते हैं।

    अपने 38 साल से अधिक लंबे करियर में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर और कमान स्तर पर कई अहम पद संभाले। वह एएसटीई बेंगलुरु की फाइटर टेस्ट स्क्वाड्रन और ग्वालियर की 9वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में प्रोजेक्ट्स और प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर रहने के बाद अब उन्होंने भारतीय वायु सेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।

  • भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं

    भारत के हमले का असर अब भी दिख रहा सरगोधा एयरबेस का रनवे महीनों बाद भी पूरी तरह तैयार नहीं


    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का असर लंबे समय बाद भी दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। ताजा हाई रिजॉल्यूशन सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर पाकिस्तान के सरगोधा स्थित मुसहफ एयरबेस के रनवे पर अब भी मरम्मत और निर्माण का काम जारी बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक हमले के करीब 16 महीने बाद भी रनवे और टैक्सी ट्रैक के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर दोबारा काम किया जा रहा है। तस्वीरों में रनवे के जंक्शन पर खुदाई और नई सतह तैयार करने की गतिविधियां नजर आने की बात कही गई है।

    सरगोधा का मुसहफ एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना के प्रमुख ठिकानों में शामिल माना जाता है। यह लाहौर से लगभग 172 किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में और भारत पाकिस्तान सीमा के पास अमृतसर से करीब 200 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इसकी भौगोलिक स्थिति और सैन्य महत्व के कारण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह भारत के निशाने पर रहे प्रमुख एयरबेस में शामिल था।

    रिपोर्ट के अनुसार 12 सितंबर 2026 की सैटेलाइट तस्वीरों में रनवे और टैक्सी ट्रैक के मिलन वाले हिस्से में अलग रंग का क्षेत्र दिखाई देता है। यह हिस्सा आसपास की डामर वाली सतह से अलग नजर आ रहा है। तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यहां दोबारा खुदाई और रीसरफेसिंग का काम किए जाने की संभावना जताई गई है। एयरबेस के उत्तरी हिस्से में पहले हुए हमले से बने गड्ढे के क्षेत्र में भी जमीन की ऊपरी परत हटाकर नीचे के स्तर तक काम किए जाने की बात सामने आई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार किसी रनवे की मरम्मत केवल ऊपर से नई परत बिछाने तक सीमित नहीं होती। यदि हमले के बाद की गई अस्थायी मरम्मत के नीचे की जमीन कमजोर हो गई हो या सतह में असमानता अथवा धंसने जैसी समस्या सामने आई हो तो पूरे प्रभावित हिस्से को दोबारा तैयार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि सैटेलाइट तस्वीरों में अलग अलग हिस्सों में अलग स्तर का निर्माण कार्य दिखाई देने की बात कही गई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मुसहफ एयरबेस पर हुए हमले की पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों में मुख्य रनवे पर नुकसान के निशान दिखाई देने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 3200 मीटर लंबे रनवे पर दो स्थानों को निशाना बनाया गया था। इनमें एक जगह लगभग 8 से 9 मीटर चौड़ा और 4 से 5 मीटर गहरा गड्ढा बनने की बात सामने आई थी। दूसरा निशाना पहले स्थान से करीब 660 मीटर की दूरी पर था।

    10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और वायु रक्षा से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। भारतीय पक्ष ने ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के एयरबेस और अन्य सैन्य ढांचे को निशाना बनाने की बात कही थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर बातचीत हुई और युद्धविराम की स्थिति बनी।

    अब करीब 16 महीने बाद सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों में सरगोधा एयरबेस के प्रभावित हिस्सों में निर्माण गतिविधियां दिखाई देने का दावा इस बात की ओर संकेत करता है कि हमले से प्रभावित बुनियादी ढांचे की बहाली में लंबा समय लग रहा है। हालांकि सैटेलाइट तस्वीरों से किसी सैन्य ठिकाने की पूरी परिचालन स्थिति का आकलन करना संभव नहीं होता। इसलिए यह कहना अलग विषय है कि एयरबेस पूरी तरह परिचालन में है या नहीं। इतना जरूर है कि रनवे के कुछ हिस्सों में निर्माण और सतह सुधार का काम अभी भी जारी दिखाई दे रहा है।

  • मेरठ के आसमान में 19-20 सितंबर को वायुसेना के नौ हॉक विमान दिखाएंगे हैरतअंगेज करतब

    मेरठ के आसमान में 19-20 सितंबर को वायुसेना के नौ हॉक विमान दिखाएंगे हैरतअंगेज करतब

    मेरठ। मेरठ के लिए 19 और 20 सितंबर 2026 ऐतिहासिक होने जा रहे हैं। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (SKAT) पहली बार शहर में हवाई प्रदर्शन करेगी। नौ लाल-सफेद हॉक एमके-132 विमान एक साथ आसमान में उतरेंगे और सटीक फॉर्मेशन के साथ लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और चर्चित ‘डीएनए’ फॉर्मेशन जैसे एरोबैटिक करतब दिखाएंगे। शहरवासियों को दो दिन आसमान में भारतीय वायुसेना की ताकत, अनुशासन और रोमांच का अनोखा नजारा देखने को मिलेगा।

    पांच मीटर से भी कम दूरी पर उड़ेंगे विमान
    सूर्यकिरण टीम के प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत विमानों के बीच सटीक तालमेल है। नौ हॉक एमके-132 विमान बेहद कम दूरी पर एक साथ उड़ान भरते हुए फॉर्मेशन बनाएंगे। कई करतबों के दौरान विमानों के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम रहती है। इतनी कम दूरी पर उड़ान के लिए पायलटों के बीच जबरदस्त समन्वय, अनुशासन और भरोसे की जरूरत होती है।

    इन हॉक विमानों का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने भारत में लाइसेंस के तहत किया है।

    तिरंगे के रंगों से रंगेगा आसमान

    मेरठ एयर शो का एक खास आकर्षण रंगीन धुएं से बनने वाली तिरंगे की छटा होगी। हॉक एमके-132 विमानों में भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में विकसित किए गए स्मोक पॉड्स लगाए गए हैं। इनके जरिए विमान आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धुएं की लकीरें छोड़ते हुए फॉर्मेशन बनाएंगे।

    1996 में हुआ था सूर्यकिरण का गठन

    सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम का गठन 1996 में हुआ था। टीम अब तक देशभर में 800 से ज्यादा हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। इसके अलावा चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, यूएई और दुबई के एयर शो में भी टीम भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी है।

    सूर्यकिरण को भारतीय वायुसेना का ‘एंबेसडर’ भी कहा जाता है। इसके प्रदर्शन का उद्देश्य सिर्फ लोगों को रोमांचित करना नहीं, बल्कि युवाओं को वायुसेना और अन्य रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

    ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी संभालेंगे कमान

    सूर्यकिरण टीम की कमान Su-30 MKI पायलट ग्रुप कैप्टन अजय दशरथी संभाल रहे हैं। टीम के हर प्रदर्शन में उड़ान की सटीकता, अनुशासन, टीमवर्क और उत्कृष्टता को प्राथमिकता दी जाती है।

    अपने ही शहर के ऊपर उड़ेंगे मेरठ के पायलट

    मेरठ में होने वाला प्रदर्शन टीम के कुछ पायलटों के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद खास होगा। मेरठ के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल और स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह अपने ही शहर के आसमान में सूर्यकिरण फॉर्मेशन का हिस्सा बनकर उड़ान भरेंगे।

    टीम के सदस्य स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल भी इस प्रदर्शन में उनके साथ मौजूद रहेंगे। अपने शहर के ऊपर सूर्यकिरण के फॉर्मेशन में उड़ान भरना इन पायलटों के लिए गौरव का क्षण होगा।

    युवाओं को मिलेगा वायुसेना को करीब से समझने का मौका

    सूर्यकिरण का प्रदर्शन केवल हवाई करतबों तक सीमित नहीं रहेगा। सशस्त्र बलों में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भारतीय वायुसेना की कार्यशैली, अनुशासन और पेशेवर मानकों को करीब से समझने का अवसर भी होगा।

    दो दिन याद रखेगा मेरठ

    19 और 20 सितंबर को नौ हॉक विमान एक साथ आसमान में सटीक फॉर्मेशन बनाएंगे और तिरंगे के रंगों से आसमान को सजाएंगे। मेरठ में पहली बार होने वाला सूर्यकिरण का यह प्रदर्शन शहरवासियों के लिए यादगार अनुभव बनने की उम्मीद है।

    यह आयोजन मेरठ के लिए सिर्फ एक एयर शो नहीं होगा, बल्कि भारतीय वायुसेना के साहस और उत्कृष्टता के साथ शहर से जुड़े पायलटों की उपलब्धि का भी जश्न होगा।

  • 60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े

    60 घंटे पाकिस्तान की कैद में रहे अभिनंदन का नया सफर IAF के बाद प्राइवेट एयरलाइंस से जुड़े


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। 2019 में पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने के बाद देशभर में चर्चा में आए अभिनंदन ने कथित तौर पर भारतीय वायुसेना की सेवा से विदाई ले ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब वह निजी विमानन कंपनी Fly91 के साथ जुड़ गए हैं। हालांकि इस बदलाव को लेकर भारतीय वायुसेना या अभिनंदन वर्धमान की तरफ से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गई है।

    हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया है कि अभिनंदन ने 31 मार्च को भारतीय वायुसेना से विदाई ली थी। इसके बाद उन्होंने निजी एयरलाइंस Fly91 के साथ काम शुरू किया है। एयरलाइन की ओर से भी अभिनंदन की नियुक्ति या उनकी भूमिका को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। कंपनी ने कर्मचारियों से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी को निजी मामला बताया है।

    गोवा स्थित Fly91 ने मार्च 2024 में अपना परिचालन शुरू किया था। कंपनी क्षेत्रीय हवाई संपर्क पर ध्यान देती है और उसके बेड़े में ATR 72-600 विमान शामिल हैं। फिलहाल कंपनी के परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं। अभिनंदन जैसे अनुभवी लड़ाकू पायलट का निजी विमानन क्षेत्र में जाना उनके करियर का एक नया अध्याय माना जा रहा है।

    अभिनंदन वर्धमान का नाम देश को 2019 में हुए भारत और पाकिस्तान के बीच हवाई टकराव के दौरान खास तौर पर याद है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण ठिकाने को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन भारत और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के बीच हवाई मुठभेड़ हुई थी।

    उस समय विंग कमांडर रहे अभिनंदन वर्धमान ने MiG-21 Bison से पाकिस्तान के F-16 विमान को निशाना बनाया था। हालांकि इसी कार्रवाई के दौरान उनका विमान भी दुश्मन के निशाने पर आ गया और वह पाकिस्तान की सीमा में जा गिरे। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था। करीब 60 घंटे बाद उन्हें भारत को सौंप दिया गया था। उनकी वापसी के बाद देशभर में उनके साहस और जज्बे की चर्चा हुई थी।

    अभिनंदन को उनकी बहादुरी के लिए वर्ष 2021 में वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। सम्मान के दौरान हवाई मुठभेड़ में उनके असाधारण साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण को विशेष रूप से रेखांकित किया गया था।

    अब वायुसेना की वर्दी छोड़कर निजी विमानन क्षेत्र में कदम रखने की खबर ने एक बार फिर अभिनंदन को चर्चा में ला दिया है। हालांकि उनकी नई भूमिका को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। यदि रिपोर्ट्स की पुष्टि होती है तो यह भारतीय वायुसेना के एक चर्चित फाइटर पायलट के सैन्य सेवा से नागरिक विमानन क्षेत्र की ओर बढ़ने का अहम बदलाव होगा।

  • IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना

    IAF को मिली बड़ी रणनीतिक बढ़त 40 सुखोई लड़ाकू विमान अब ब्रह्मोस से लैस दुश्मन के ठिकाने होंगे आसान निशाना


    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। वायुसेना के करीब 40 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान अब एयर लॉन्च ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों से लैस हो चुके हैं। इस नई क्षमता के साथ भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की ताकत और अधिक मजबूत हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र सहित पूरे इलाके में भारत की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सह निदेशक अलेक्जेंडर मैक्सिचेव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रक्षा प्रदर्शनी फ्लीट 2026 के दौरान जानकारी दी कि सुखोई विमानों को ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस करने का कार्यक्रम अभी जारी है और अब तक लगभग 40 विमान इस क्षमता से सुसज्जित किए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सुखोई और ब्रह्मोस के संयोजन ने अपनी प्रभावी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

    भारतीय वायुसेना के बेड़े में फिलहाल करीब 270 सुखोई 30MKI लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनमें से कई विमानों को चरणबद्ध तरीके से ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लैस किया जा रहा है। एयर लॉन्च ब्रह्मोस का वजन लगभग ढाई टन है जो जमीन से दागे जाने वाले तीन टन के संस्करण से हल्का है। इस हल्के संस्करण को सुखोई विमान के अनुरूप बनाने के लिए विमान में कई तकनीकी बदलाव और व्यापक परीक्षण किए गए हैं।

    इस मिसाइल प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन और समुद्र दोनों प्रकार के लक्ष्यों पर बेहद सटीक और तेज हमला करने में सक्षम है। भविष्य में इसकी मारक क्षमता को और बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। प्रस्तावित अपग्रेड के बाद एयर लॉन्च ब्रह्मोस की रेंज लगभग 800 किलोमीटर तक पहुंच सकती है। यदि यह योजना सफल रहती है तो भारतीय लड़ाकू विमान अपनी हवाई सीमा के भीतर रहते हुए भी दुश्मन के अंदरूनी सैन्य ठिकानों पर प्रभावी हमला कर सकेंगे।

    भारतीय वायुसेना लगभग 70 पुराने सुखोई 30MKI विमानों को सुपर सुखोई अपग्रेड कार्यक्रम से अलग रखकर उन्हें भारी मिसाइल वाहक के रूप में इस्तेमाल करने की योजना पर भी काम कर रही है। इन विमानों का उपयोग भविष्य में ब्रह्मोस और अन्य स्वदेशी लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों के संचालन के लिए किया जा सकता है।

    इसी बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और ब्रह्मोस एयरोस्पेस अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस एनजी मिसाइल भी विकसित कर रहे हैं। यह मौजूदा मिसाइल से हल्की होगी और इसका वजन लगभग डेढ़ टन रहने की संभावना है। इसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर होगी तथा इसके 2028 से 2029 के बीच सेवा में आने की उम्मीद है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस से लैस सुखोई विमानों की बढ़ती संख्या भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएगी। इससे भारत किसी भी संभावित चुनौती का अधिक प्रभावी और तेज जवाब देने में सक्षम होगा तथा क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

  • Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर

    Su-57D स्टील्थ जेट: रूस का नया दो-सीट फाइटर, भविष्य के युद्धों में बन सकता है फ्लाइंग कमांड सेंटर




    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने नए Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। यह विमान 19 मई को अपनी पहली उड़ान भर चुका है और इसे भविष्य के युद्धों में एक मल्टी-रोल एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के बीच इस विमान को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है, खासकर भारत की संभावित जरूरतों के संदर्भ में।

    दूसरा पायलट बनेगा “कमांड पोस्ट”
    पायलट सर्गेई बोगदान के अनुसार Su-57D का सबसे महत्वपूर्ण फीचर इसका ट्विन-सीट कॉन्फिगरेशन है। इसमें दूसरा पायलट केवल सह-उड़ान नहीं करेगा, बल्कि हवा में रहते हुए पूरे मिशन का कमांड और कंट्रोल संभाल सकता है। यह स्थिति खासकर बड़े सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण होगी, जहां ग्राउंड कम्युनिकेशन बाधित होने की संभावना रहती है।

    उन्होंने बताया कि यदि रेडियो या नेटवर्क कम्युनिकेशन में बाधा आती है, तो अनुभवी पायलट हवा में ही निर्णय लेकर ऑपरेशन को आगे बढ़ा सकता है, जिससे मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

    ड्रोन और AI नेटवर्क से लैस क्षमता
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। इसमें एडवांस एआई और ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन सिस्टम को कंट्रोल करने की क्षमता विकसित की जा रही है। यह जेट दुश्मन के रडार को जाम करने और स्टील्थ ड्रोन स्क्वाड्रन को गाइड करने में सक्षम बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में युद्ध के स्वरूप को बदल सकती है, जहां एक ही विमान कई ड्रोन और यूनिट्स को नियंत्रित करेगा।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक अहमियत
    रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि Su-57D भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, खासकर लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में। यहां चीन द्वारा तैनात एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती देने के लिए ऐसे एयरबोर्न कमांड प्लेटफॉर्म की आवश्यकता मानी जाती है।

    यह विमान भारतीय स्वदेशी CATS (Combat Air Teaming System) और ‘वारियर’ ड्रोन प्रोजेक्ट के साथ इंटीग्रेट होकर एक मजबूत नेटवर्क वॉरफेयर क्षमता दे सकता है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट और ड्रोन-आधारित नेटवर्क वॉरफेयर पर तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि किसी भी संभावित खतरे का प्रभावी जवाब दिया जा सके।

    FGFA प्रोजेक्ट और आगे की चर्चा
    भारत और रूस ने पहले FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर मिलकर काम शुरू किया था, जिसमें ट्विन-सीट स्टील्थ जेट की मांग भी शामिल थी। हालांकि 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था। अब Su-57D के परीक्षण के बाद एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

  • Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर

    Su-57D फाइटर जेट: रूस का नया दो-सीट स्टील्थ विमान, भारत के लिए क्यों माना जा रहा है संभावित गेमचेंजर


    नई दिल्ली। रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो के मुख्य टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने Su-57D दो-सीट स्टील्थ फाइटर जेट को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इस विमान ने 19 मई को अपनी पहली उड़ान भरी है और इसे भविष्य के युद्धों में कमांड और कंट्रोल क्षमता वाला एक एडवांस प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है।

    पायलट के अनुसार, Su-57D में दूसरा कॉकपिट केवल सह-पायलट के लिए नहीं बल्कि एक ऐसे कमांडर के लिए है जो हवा में रहते हुए पूरे ऑपरेशन को नियंत्रित कर सकता है। यह विमान युद्ध के दौरान कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी मिशन को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने में सक्षम माना जा रहा है।

    एयरबोर्न कमांड सेंटर की तरह काम करेगा विमान
    Su-57D को केवल फाइटर जेट नहीं बल्कि एक फ्लाइंग कमांड सेंटर के रूप में देखा जा रहा है, जो ड्रोन और अन्य युद्ध प्रणालियों को नियंत्रित करने की क्षमता रखता है। इसे ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन नेटवर्क के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।

    रूसी विशेषज्ञों का दावा है कि यह जेट भविष्य में जटिल मिशनों में तेजी से निर्णय लेने और दुश्मन की रक्षा प्रणालियों को बाधित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    भारत के संदर्भ में रणनीतिक महत्व
    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह विमान भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ता है तो लद्दाख और तवांग जैसे संवेदनशील इलाकों में चीनी एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ गहरे हमलों में मदद मिल सकती है। यह भारतीय स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट CATS के साथ भी इंटीग्रेट होकर नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता को मजबूत कर सकता है।हालांकि भारत पहले ही रूस के FGFA प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, लेकिन दो-सीट Su-57D के आने के बाद रक्षा हलकों में एक बार फिर इस प्लेटफॉर्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    चीन की रणनीति और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा
    चीन पहले से ही दो-सीट 5th जनरेशन फाइटर और ड्रोन-नेटवर्क आधारित एयर वॉरफेयर सिस्टम पर काम कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को भी इसी तरह की क्षमता विकसित करनी होगी ताकि तिब्बत क्षेत्र में किसी भी रणनीतिक चुनौती का जवाब दिया जा सके।

  • स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?

    स्टील्थ जेट, S-400 और किल चेन: भारत-पाक एयर वॉर में कौन किस पर भारी?




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    पाकिस्तान की ओर से चीन से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट J-35A खरीदने की खबरों ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरणों को फिर से चर्चा में ला दिया है। सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह सौदा पूरा होता है तो पाकिस्तान की वायुसेना एक नए “स्टैंड-ऑफ और किल चेन” आधारित युद्ध मॉडल की ओर बढ़ सकती है, जिसमें लंबी दूरी से लक्ष्य पर हमला करने की क्षमता प्रमुख होगी।

    जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अपनी सीमित भौगोलिक गहराई के कारण पारंपरिक रक्षा रणनीति से हटकर अब “दूर से वार और अंदर ही अंदर सुरक्षा” की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत J-35A स्टील्थ जेट और चीन की PL-17 जैसी लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को गेम-चेंजर माना जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, J-35A को इस तरह इस्तेमाल किया जाएगा कि वह पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के भीतर रहते हुए ही भारतीय विमानों को ट्रैक और टारगेट कर सके। इसमें स्टील्थ तकनीक के कारण रडार पर कम दिखाई देने की क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है। वहीं PL-17 मिसाइल की मारक क्षमता 300 से 400 किलोमीटर तक बताई जा रही है, जिससे यह सीमा से काफी दूर स्थित लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है।

    इसके साथ ही चीन का सैटेलाइट आधारित नेटवर्क पाकिस्तान को एक “किल चेन सिस्टम” बनाने में मदद कर सकता है, जिसमें रडार, सैटेलाइट और डेटा लिंक के जरिए लक्ष्य की पहचान कर तुरंत हमला किया जा सकेगा। इस मॉडल में अपने मुख्य रडार बंद रखकर भी दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है, जिससे जवाबी कार्रवाई से बचने की कोशिश की जाती है।

    भारत की ओर देखें तो विशेषज्ञ मानते हैं कि भारतीय वायुसेना पहले से ही मल्टी-लेयर एयर डिफेंस सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें S-400 Triumf, स्वदेशी AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस शामिल हैं। S-400 को लंबी दूरी से आने वाले हवाई खतरों को ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम माना जाता है, लेकिन स्टील्थ विमानों को पहचानना अब भी एक बड़ी चुनौती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का फोकस अब “काउंटर-स्टील्थ रडार नेटवर्क” विकसित करने पर है, जो कम फ्रीक्वेंसी और एडवांस सेंसर तकनीक के जरिए स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सके। साथ ही इसे मिसाइल सिस्टम और एयर डिफेंस ग्रिड से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है।

    रूसी Su-57 और मानव रहित ड्रोन सिस्टम को लेकर भी चर्चा है कि भविष्य में भारत “मैन-ड्रोन टीमिंग” मॉडल अपना सकता है, जिसमें फाइटर जेट के साथ AI-संचालित ड्रोन दुश्मन के रडार और डिफेंस सिस्टम को पहले ही जाम या नष्ट कर दें।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य का युद्ध अब पारंपरिक डॉगफाइट नहीं बल्कि “डेटा-ड्रिवन नेटवर्क वॉर” होगा, जिसमें सेंसर, सैटेलाइट, AI और मिसाइल सिस्टम एक साथ काम करेंगे।

    कुल मिलाकर पाकिस्तान की रणनीति भारत को उसकी सीमाओं से दूर रोकने और पहले ही हमले की क्षमता विकसित करने की है, जबकि भारत का जवाब एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस और ऑफेंसिव नेटवर्क बनाने पर केंद्रित है, जो किसी भी “किल चेन” को तोड़ने में सक्षम हो सके।

  • Rafale F4: भारत के लिए फ्रांस का बड़ा डिफेंस अपग्रेड, वायुसेना को मिल सकती है नई ताकत

    Rafale F4: भारत के लिए फ्रांस का बड़ा डिफेंस अपग्रेड, वायुसेना को मिल सकती है नई ताकत




    नई दिल्ली। भारत और फ्रांस के बीच लड़ाकू विमान Dassault Rafale के नए F4/F4+ वेरिएंट को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह अपग्रेड केवल तकनीकी अपडेट नहीं होगा, बल्कि इसे भारत की विशिष्ट सामरिक जरूरतों के हिसाब से गहराई से कस्टमाइज करने की दिशा में काम हो रहा है।

    इस डील का सबसे अहम पहलू “सोर्स कोड और सिस्टम कंट्रोल” को लेकर भारत की लंबे समय से चली आ रही चिंता से जुड़ा है। नए F4+ कॉन्फ़िगरेशन में भारत को अधिक स्वतंत्रता देने की संभावना जताई जा रही है, जिससे भारतीय सिस्टम्स को विमान के नेटवर्क और हथियार इकोसिस्टम में गहराई से जोड़ा जा सके।

    भारत-केंद्रित “F4+ वेरिएंट” की संभावित खासियतें
    रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित F4+ संस्करण को केवल NATO-आधारित इंटरऑपरेबिलिटी के बजाय दक्षिण एशिया के हाई-इंटेंसिटी वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें शामिल हो सकते हैं:

    भारतीय हथियार प्रणालियों का बेहतर एकीकरण

    उपग्रह आधारित संचार और स्वदेशी डेटा लिंक

    भारतीय वायुसेना की IACCS (Integrated Air Command and Control System) से सीधा कनेक्शन

    इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सेंसर सिस्टम में कस्टमाइजेशन

    स्टील्थ टारगेट्स पर फोकस
    इस अपग्रेड का एक बड़ा फोकस भविष्य के स्टील्थ खतरों से निपटना बताया जा रहा है, जैसे कि चीन का Chengdu J-20। F4+ में रडार और सेंसर प्रोसेसिंग को इस तरह अपग्रेड करने की बात कही जा रही है कि कम विजिबिलिटी वाले लक्ष्यों को भी ट्रैक और एंगेज किया जा सके।

     इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में बढ़त
    Rafale के साथ आने वाला SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम पहले से ही एक एडवांस सूट माना जाता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत भारत को अपनी “थ्रेट लाइब्रेरी” जोड़ने की अधिक क्षमता मिल सकती है, जिससे भारतीय रडार और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस डेटा सीधे सिस्टम में फीड किया जा सकेगा।इसका मतलब होगा कि भारत अपने क्षेत्रीय खतरों (जैसे पाकिस्तान और चीन के रडार सिग्नेचर) को ज्यादा बेहतर तरीके से पहचान और ट्रैक कर सकेगा।