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  • युद्ध और आपदा में बनेंगे फाइटर जेट लैंडिंग के अहम केंद्र..

    युद्ध और आपदा में बनेंगे फाइटर जेट लैंडिंग के अहम केंद्र..


    नई दिल्ली। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस-वे अब केवल यातायात के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि उन्हें रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वैकल्पिक एयरबेस के रूप में भी विकसित किया गया है। इन एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स की दिन और रात दोनों समय सुरक्षित लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को एक नया आयाम मिला है।

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे इस दिशा में सबसे पहला और महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। इस एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव जिले के पास लगभग 3.3 किलोमीटर लंबी विशेष हवाई पट्टी बनाई गई है। यह रनवे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां सुखोई, मिराज और भारी परिवहन विमान भी आसानी से लैंड कर सकते हैं। इस सुविधा ने यह साबित किया कि आपातकालीन स्थिति में सड़क को भी एयरबेस के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

    इसके बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को भी इसी रणनीतिक सोच के साथ तैयार किया गया। यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है और भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुल्तानपुर जिले के कूरेभार के पास लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी विकसित की गई है। यहां पहले भी वायुसेना द्वारा सफल अभ्यास किए जा चुके हैं, जिसमें फाइटर जेट्स ने रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग और टेक ऑफ का प्रदर्शन किया था।

    गंगा एक्सप्रेस-वे इस श्रृंखला का सबसे लंबा और अत्याधुनिक एक्सप्रेस-वे माना जा रहा है, जो मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है। इस पर शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद क्षेत्र में विशेष रनवे तैयार किया गया है। इस रनवे को आधुनिक तकनीक से इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यहां रात के समय भी फाइटर जेट्स की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके। यह परियोजना भविष्य में देश की रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    इन एक्सप्रेस-वे पर विकसित की गई हवाई पट्टियां केवल सामान्य ढांचे का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इन्हें रणनीतिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। युद्ध या आपातकालीन स्थिति में यदि मुख्य एयरबेस किसी कारणवश प्रभावित होते हैं, तो ये वैकल्पिक रनवे तुरंत सक्रिय होकर वायुसेना के संचालन को जारी रखने में मदद कर सकते हैं।

    इसके अलावा इन रनवे की भौगोलिक स्थिति भी इन्हें और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि ये राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं। इससे वायुसेना को देश के किसी भी क्षेत्र में तेजी से पहुंचने और संचालन करने में मदद मिलती है। आधुनिक लड़ाकू विमानों जैसे राफेल, सुखोई और जगुआर की लैंडिंग क्षमता को ध्यान में रखते हुए इन हवाई पट्टियों को विशेष रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाया गया है।

    यह पूरी पहल इस बात का संकेत है कि देश का बुनियादी ढांचा अब बहुआयामी उपयोग के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसमें नागरिक सुविधाओं के साथ-साथ रक्षा जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उत्तर प्रदेश के ये एक्सप्रेस-वे आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    जैसलमेर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर HAL Prachand प्रचंड में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराने वाली रही। राष्ट्रपति इससे पहले वर्ष 2023 में सुखोई Su-30MKI और 2025 में डसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं।

    यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया।

    उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।

    राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन


    भोपाल । मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमारे वीर जवानों ने जिस बहादुरी और संकल्प का परिचय दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत के शूरवीर सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मातृभूमि की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का पराक्रम केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुटता, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।

    उन्होंने आगे कहा कि देश के जवानों का साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश को अपने वीर सपूतों पर सदैव गर्व रहेगा।

    डॉ. यादव ने इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए अमिट स्मृति है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव याद रखेगा।

  • हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    इस्‍लामाबाद । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बीते मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को करारा सबक सिखाया। भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारत ने ना सिर्फ उनके ठिकानों को समतल कर दिया, बल्कि सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। आतंकी इस ऑपरेशन की मार से अब तक उबर नहीं पाए हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप लीडर और हाफिज सईद के करीबी ने माना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को कितना गहरा जख्म दिया।

    पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले दर्द को खुद कबूला है। तिलमिलाए कसूरी ने इस दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है। कसूरी ने कहा है कि भारत ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाकर गलती की है। वहीं उसने ऐलान किया है कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैफुल्लाह कसूरी ने हजारों लोगों की भीड़ के सामने एक सार्वजनिक सभा में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर बहुत बड़ी गलती की।” उसने आगे कहा, “…जो पाबंदियां लगाते हैं, जो रुकावट पैदा करते हैं, वो सुनो, जो हमें आतंकवादी कहते हैं, सुनो। पूरी दुनिया को पलटा जा सकता है, सिस्टम बदला जा सकता है। हम अपने कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेंगे।”

    गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों को बेरहमी से मार दिया था। इस दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां बरसाई थीं। इसके बाद भारत ने पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई के दौरान करीब 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।