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  • भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत, इस हफ्ते मिलेगा S-400 का चौथा स्क्वॉड्रन, सीमा सुरक्षा पर बढ़ेगी नजर

    भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत, इस हफ्ते मिलेगा S-400 का चौथा स्क्वॉड्रन, सीमा सुरक्षा पर बढ़ेगी नजर


    नई दिल्ली । भारत की वायु रक्षा क्षमता को इस सप्ताह एक और बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है, जब रूस से S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का चौथा स्क्वॉड्रन देश में पहुंचने की संभावना है। इस नई खेप के शामिल होने के साथ ही भारत की हवाई सुरक्षा ढांचा और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है, खासकर पश्चिमी सीमा पर जहां संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर लगातार सतर्कता बनी रहती है।

    सूत्रों के अनुसार इस नए स्क्वॉड्रन को राजस्थान और उसके आसपास के रणनीतिक इलाकों में तैनात किया जा सकता है, ताकि किसी भी संभावित हवाई खतरे को समय रहते रोका जा सके। यह तैनाती भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली को और प्रभावी बनाएगी और सीमा सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त परत जोड़ेगी।

    भारत और रूस के बीच यह डील वर्ष 2018 में हुई थी, जिसके तहत कुल पांच S-400 स्क्वॉड्रन की आपूर्ति होनी है। हालांकि रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के चलते इस परियोजना में देरी देखी गई, लेकिन अब धीरे-धीरे इसकी डिलीवरी आगे बढ़ रही है। चौथे स्क्वॉड्रन के बाद अंतिम यूनिट भी आने वाले महीनों में मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    S-400 प्रणाली को दुनिया की सबसे उन्नत लंबी दूरी की एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन जैसे कई प्रकार के हवाई खतरों को एक साथ ट्रैक और नष्ट कर सके। इसकी उन्नत रडार प्रणाली और मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग क्षमता इसे आधुनिक युद्ध परिदृश्य में बेहद प्रभावी बनाती है।

    यह एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे आवश्यकता के अनुसार तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है। इसकी खासियत यह भी है कि यह इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी स्थितियों में भी काम करने में सक्षम माना जाता है, जिससे युद्ध के दौरान इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

    भारत पहले ही इस प्रणाली के तीन स्क्वॉड्रन को अपनी रक्षा व्यवस्था में शामिल कर चुका है, जो वर्तमान में सक्रिय रूप से सेवा में हैं। इन यूनिट्स के जुड़ने से भारतीय वायुसेना की निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार चौथे स्क्वॉड्रन के शामिल होने से पश्चिमी सीमा पर हवाई निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी, जिससे किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देना संभव होगा। इस कदम को भारत की रणनीतिक रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

  • सुपर सुखोई से दुश्मनों में खौफ, भारत के Su-30MKI बनेंगे 4.7 जेनरेशन के घातक फाइटर जेट

    सुपर सुखोई से दुश्मनों में खौफ, भारत के Su-30MKI बनेंगे 4.7 जेनरेशन के घातक फाइटर जेट




    नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना अपने सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” में बदलने जा रही है। नए रडार, AI सिस्टम और ताकतवर इंजन से लैस ये विमान पाकिस्तान के F-16 और JF-17 के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे।

    भारतीय वायुसेना अब अपनी ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गई है। देश के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शामिल Sukhoi Su-30MKI को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” बनाया जाएगाभारतीय वायुसेना अब अपनी ताकत को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गई है। देश के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में शामिल Sukhoi Su-30MKI को बड़े अपग्रेड के जरिए “सुपर सुखोई” बनाया जाएगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के बाद भारतीय फाइटर जेट्स पहले से ज्यादा आधुनिक, घातक और हाईटेक बन जाएंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अपग्रेड के बाद ये विमान पाकिस्तान के F-16 Fighting Falcon और JF-17 Thunder लड़ाकू विमानों पर भारी पड़ेंगे।

    भारतीय वायुसेना के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में रूस के साथ फ्रांस और इजरायल की तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा। अपग्रेडेशन के तहत सुखोई विमानों के रडार, एवियोनिक्स, हथियार प्रणाली और इंजन को पूरी तरह आधुनिक बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे विमान की ऑपरेशनल लाइफ करीब 30 साल तक बढ़ जाएगी।

    रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस अपग्रेड के बाद सुखोई Su-30MKI को 4.7 जेनरेशन क्षमता वाला फाइटर जेट माना जाएगा। इसकी सबसे बड़ी ताकत भारत में विकसित “विरूपाक्ष” AESA रडार होगा, जिसे DRDO ने तैयार किया है। यह रडार 200 किलोमीटर से ज्यादा दूरी से दुश्मन के स्टील्थ विमानों का पता लगाने में सक्षम बताया जा रहा है।

    सुपर सुखोई में AI आधारित नया एवियोनिक्स सिस्टम भी लगाया जाएगा, जिससे युद्ध के दौरान पायलट को रियल टाइम डेटा और बेहतर टारगेटिंग सपोर्ट मिलेगा। पुराने डिजिटल सिस्टम की जगह अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इससे विमान की सर्वाइवल क्षमता और मारक ताकत दोनों बढ़ेंगी।

    सिर्फ रडार ही नहीं, बल्कि सुखोई का इंजन भी बदला जा सकता है। मौजूदा AL-31FP इंजन की जगह ज्यादा ताकतवर AL-41F-1S इंजन लगाने पर चर्चा चल रही है। यही इंजन रूस के आधुनिक Su-35 फाइटर जेट में इस्तेमाल होता है। नए इंजन से विमान को ज्यादा स्पीड, बेहतर कंट्रोल और भारी हथियार ले जाने की क्षमता मिलेगी।

    इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी HAL को दी गई है। पहले चरण में 84 सुखोई विमानों को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि बाद में करीब 200 और विमानों को आधुनिक बनाया जाएगा। उम्मीद है कि 2030 तक सुपर सुखोई पूरी तरह भारतीय वायुसेना का हिस्सा बन जाएंगे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान लगातार अपने एयर फोर्स बेड़े को आधुनिक बना रहे हैं। ऐसे में भारत का सुपर सुखोई प्रोजेक्ट सिर्फ अपग्रेड नहीं, बल्कि भविष्य की एयर वॉरफेयर रणनीति का बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • तेजस प्रोजेक्ट में नई हलचल: टली समीक्षा बैठक, अब जून में तय हो सकती है डिलीवरी टाइमलाइन

    तेजस प्रोजेक्ट में नई हलचल: टली समीक्षा बैठक, अब जून में तय हो सकती है डिलीवरी टाइमलाइन


    नई दिल्ली । भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे तेजस मार्क 1ए फाइटर जेट प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर समयसीमा में बदलाव की स्थिति बन गई है। भारतीय वायुसेना और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के बीच लंबे समय से चल रहे इस प्रोजेक्ट की डिलीवरी को लेकर अब निगाहें आगामी जून में होने वाली रिव्यू मीटिंग पर टिक गई हैं। यह बैठक पहले मई में प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी कारणों से इसे आगे बढ़ा दिया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि इसी बैठक में विमान की डिलीवरी की संभावित तारीख पर अंतिम दिशा मिल सकती है।

    तेजस मार्क 1ए के लिए भारतीय वायुसेना ने कुल 180 विमानों का बड़ा ऑर्डर दिया है, जिसका उद्देश्य लड़ाकू स्क्वॉड्रन की कमी को पूरा करना है। मौजूदा समय में वायुसेना के पास आवश्यक संख्या से कम स्क्वॉड्रन हैं, जिसके चलते यह प्रोजेक्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि अब तक एक भी विमान की औपचारिक डिलीवरी नहीं हो पाई है, जिससे प्रक्रिया की गति पर सवाल उठते रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार, रडार प्रदर्शन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और कुछ अन्य तकनीकी पहलुओं में सुधार की आवश्यकता के कारण पिछले मूल्यांकन चरणों में देरी हुई। इन बिंदुओं पर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड लगातार काम कर रहा है और कई तकनीकी परीक्षण भी पूरे किए जा चुके हैं। बताया जा रहा है कि कुछ विमान पहले से तैयार हैं और उनका परीक्षण भी विभिन्न चरणों में किया गया है, लेकिन वायुसेना की सख्त परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार अंतिम मंजूरी अभी बाकी है।

    रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विस्तृत तकनीकी परीक्षण और ऑपरेशनल क्वालिटी जांच भी शामिल है। वायुसेना किसी भी तरह की समझौता आधारित डिलीवरी के पक्ष में नहीं है और सभी आवश्यक मानकों को पूरा करने के बाद ही विमान को बेड़े में शामिल किया जाएगा। इसी वजह से समीक्षा बैठक का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि इसमें सभी लंबित तकनीकी मुद्दों पर अंतिम चर्चा होने की संभावना है।

    इस परियोजना में देरी का एक बड़ा कारण इंजन सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी रही हैं। अब धीरे-धीरे इंजन उपलब्ध हो रहे हैं, जिससे उत्पादन प्रक्रिया में गति आने की उम्मीद है। इसके अलावा प्रोजेक्ट के अन्य वेरिएंट्स जैसे उन्नत संस्करण और ट्रेनर एयरक्राफ्ट पर भी काम जारी है, जो भविष्य में वायुसेना की ताकत को और मजबूत करेंगे।

    वायुसेना की दीर्घकालिक योजना के तहत लड़ाकू स्क्वॉड्रन की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी सुरक्षा चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। तेजस मार्क 1ए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन इसकी डिलीवरी में लगातार हो रही देरी ने रणनीतिक योजना को कुछ हद तक प्रभावित किया है।

    अब सभी की निगाहें जून में होने वाली रिव्यू मीटिंग पर हैं, जहां यह तय किया जा सकता है कि तकनीकी मानकों की स्थिति क्या है और पहली डिलीवरी कब संभव होगी। यदि सभी आवश्यक शर्तें पूरी हो जाती हैं तो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है, अन्यथा इसमें और समय लगने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • वायुसेना से राजनीति तक का सफर: चंद्रनाथ रथ की हत्या से बंगाल में मचा राजनीतिक हड़कंप

    वायुसेना से राजनीति तक का सफर: चंद्रनाथ रथ की हत्या से बंगाल में मचा राजनीतिक हड़कंप

    नई दिल्ली। रात का समय था और सड़क पर हल्की हलचल जारी थी, जब एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके को दहशत और सन्नाटे में बदल दिया। पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम क्षेत्र में पूर्व भारतीय वायु सेना अधिकारी और राजनीतिक रूप से सक्रिय चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हमला अचानक हुआ और इतनी तेजी से अंजाम दिया गया कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में सामान्य सा लगने वाला रास्ता एक दर्दनाक वारदात का गवाह बन गया।

    चंद्रनाथ रथ अपने वाहन से यात्रा कर रहे थे, तभी बाइक पर सवार कुछ अज्ञात हमलावर उनके करीब पहुंचे। बिना किसी चेतावनी के उन पर गोलियां चला दी गईं। हमला इतना सटीक और तेज था कि वाहन के भीतर मौजूद लोग भी कुछ समझ नहीं पाए। गंभीर रूप से घायल रथ को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनके शरीर पर लगी चोटें बहुत गहरी थीं और उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    रथ का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका एक लंबा सैन्य इतिहास भी रहा है। उन्होंने भारतीय वायु सेना में लगभग बीस साल तक सेवा दी थी और अनुशासन तथा समर्पण के लिए जाने जाते थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कुछ समय कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी काम किया, लेकिन धीरे-धीरे वे राजनीति और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ते चले गए। वे एक प्रमुख राजनीतिक नेता के करीबी सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे थे और संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी।

    उनकी पहचान हमेशा एक शांत और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में रही, जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करते थे। राजनीतिक गतिविधियों में उनकी भूमिका रणनीतिक और प्रबंधन से जुड़ी होती थी, जहां वे चुनावी तैयारियों से लेकर संगठनात्मक समन्वय तक कई महत्वपूर्ण कार्य संभालते थे। उनकी कार्यशैली में सादगी और गंभीरता साफ झलकती थी।

    इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल फैल गया है। स्थानीय लोगों में डर और असुरक्षा की भावना गहरी हो गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान के लिए आसपास के इलाकों में छानबीन तेज कर दी गई है। शुरुआती संकेतों में यह बात सामने आई है कि हमलावर पहले से ही लक्ष्य पर नजर रखे हुए थे और पूरी योजना के साथ वारदात को अंजाम दिया गया।

    घटना ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी प्रभावित किया है। चुनाव के बाद पहले से ही तनावपूर्ण माहौल में इस हत्या ने नई चिंता पैदा कर दी है। विभिन्न स्तरों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि उस बढ़ते राजनीतिक तनाव का संकेत भी मानी जा रही है, जो पिछले कुछ समय से क्षेत्र में महसूस किया जा रहा था।

    चंद्रनाथ रथ की अचानक और हिंसक मृत्यु ने उनके परिचितों, समर्थकों और पूरे राजनीतिक वातावरण को झकझोर कर रख दिया है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसने जीवन का बड़ा हिस्सा अनुशासन और सेवा में बिताया, आज एक हिंसक घटना का शिकार होकर चर्चा में है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल यह मामला पूरे राज्य में चिंता और सवालों का केंद्र बना हुआ है।

  • युद्ध और आपदा में बनेंगे फाइटर जेट लैंडिंग के अहम केंद्र..

    युद्ध और आपदा में बनेंगे फाइटर जेट लैंडिंग के अहम केंद्र..


    नई दिल्ली। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश तक देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा तैयारियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस-वे अब केवल यातायात के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि उन्हें रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण वैकल्पिक एयरबेस के रूप में भी विकसित किया गया है। इन एक्सप्रेस-वे पर भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स की दिन और रात दोनों समय सुरक्षित लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे देश की रक्षा क्षमता को एक नया आयाम मिला है।

    लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे इस दिशा में सबसे पहला और महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। इस एक्सप्रेस-वे पर उन्नाव जिले के पास लगभग 3.3 किलोमीटर लंबी विशेष हवाई पट्टी बनाई गई है। यह रनवे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहां सुखोई, मिराज और भारी परिवहन विमान भी आसानी से लैंड कर सकते हैं। इस सुविधा ने यह साबित किया कि आपातकालीन स्थिति में सड़क को भी एयरबेस के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

    इसके बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को भी इसी रणनीतिक सोच के साथ तैयार किया गया। यह एक्सप्रेस-वे पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है और भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुल्तानपुर जिले के कूरेभार के पास लगभग 3.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी विकसित की गई है। यहां पहले भी वायुसेना द्वारा सफल अभ्यास किए जा चुके हैं, जिसमें फाइटर जेट्स ने रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग और टेक ऑफ का प्रदर्शन किया था।

    गंगा एक्सप्रेस-वे इस श्रृंखला का सबसे लंबा और अत्याधुनिक एक्सप्रेस-वे माना जा रहा है, जो मेरठ से प्रयागराज तक फैला हुआ है। इस पर शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद क्षेत्र में विशेष रनवे तैयार किया गया है। इस रनवे को आधुनिक तकनीक से इस तरह विकसित किया जा रहा है कि यहां रात के समय भी फाइटर जेट्स की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सके। यह परियोजना भविष्य में देश की रक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    इन एक्सप्रेस-वे पर विकसित की गई हवाई पट्टियां केवल सामान्य ढांचे का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इन्हें रणनीतिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। युद्ध या आपातकालीन स्थिति में यदि मुख्य एयरबेस किसी कारणवश प्रभावित होते हैं, तो ये वैकल्पिक रनवे तुरंत सक्रिय होकर वायुसेना के संचालन को जारी रखने में मदद कर सकते हैं।

    इसके अलावा इन रनवे की भौगोलिक स्थिति भी इन्हें और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि ये राज्य के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं। इससे वायुसेना को देश के किसी भी क्षेत्र में तेजी से पहुंचने और संचालन करने में मदद मिलती है। आधुनिक लड़ाकू विमानों जैसे राफेल, सुखोई और जगुआर की लैंडिंग क्षमता को ध्यान में रखते हुए इन हवाई पट्टियों को विशेष रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाया गया है।

    यह पूरी पहल इस बात का संकेत है कि देश का बुनियादी ढांचा अब बहुआयामी उपयोग के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसमें नागरिक सुविधाओं के साथ-साथ रक्षा जरूरतों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उत्तर प्रदेश के ये एक्सप्रेस-वे आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जैसलमेर एयरबेस पर स्वदेशी ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टर में भरी उड़ान, 25 मिनट का मिशन पूरा

    जैसलमेर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर वायुसेना स्टेशन पर स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर HAL Prachand प्रचंड में उड़ान भरकर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं का अनुभव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराने वाली रही। राष्ट्रपति इससे पहले वर्ष 2023 में सुखोई Su-30MKI और 2025 में डसॉल्ट राफेल में भी उड़ान भर चुकी हैं।

    यह मिशन दो एलसीएच लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर के फॉर्मेशन में संचालित किया गया। राष्ट्रपति ने पहले विमान में ग्रुप कैप्टन नयन शांतिलाल बहुआ के साथ उड़ान भरी जबकि दूसरे विमान में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और ग्रुप कैप्टन ए. महेंद्र सवार थे। लगभग 25 मिनट तक चले इस मिशन में राष्ट्रपति ने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी। अभ्यास के दौरान एक टैंक लक्ष्य पर आक्रमण का प्रदर्शन भी किया गया।

    उड़ान के बाद राष्ट्रपति ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर प्रचंड में उड़ान भरना मेरे लिए एक समृद्ध अनुभव रहा है। इस उड़ान ने मुझे राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं पर नए सिरे से गर्व का अनुभव कराया है। मैं भारतीय वायु सेना और वायु सेना स्टेशन जैसलमेर की पूरी टीम को इस उड़ान के सफल आयोजन के लिए बधाई देती हूं।

    राष्ट्रपति शाम को जैसलमेर में आयोजित भारतीय वायु सेना के वायु शक्ति अभ्यास का भी अवलोकन करेंगी। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्वदेशी रक्षा उपकरणों के साथ राष्ट्रपति की यह उड़ान आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रतीक है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर वायुसेना के शौर्य को किया नमन


    भोपाल । मोहन यादव ने बालाकोट एयर स्ट्राइक की 7वीं वर्षगांठ पर भारतीय वायुसेना के अद्वितीय साहस, शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए हमारे वीर जवानों ने जिस बहादुरी और संकल्प का परिचय दिया, वह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारत के शूरवीर सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए मातृभूमि की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना का पराक्रम केवल सैन्य शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्र की एकजुटता, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान का भी प्रतीक है।

    उन्होंने आगे कहा कि देश के जवानों का साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे देश को अपने वीर सपूतों पर सदैव गर्व रहेगा।

    डॉ. यादव ने इस अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका बलिदान देशवासियों के लिए अमिट स्मृति है और राष्ट्र उनकी वीरता को सदैव याद रखेगा।

  • हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    इस्‍लामाबाद । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बीते मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को करारा सबक सिखाया। भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारत ने ना सिर्फ उनके ठिकानों को समतल कर दिया, बल्कि सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। आतंकी इस ऑपरेशन की मार से अब तक उबर नहीं पाए हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप लीडर और हाफिज सईद के करीबी ने माना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को कितना गहरा जख्म दिया।

    पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले दर्द को खुद कबूला है। तिलमिलाए कसूरी ने इस दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है। कसूरी ने कहा है कि भारत ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाकर गलती की है। वहीं उसने ऐलान किया है कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैफुल्लाह कसूरी ने हजारों लोगों की भीड़ के सामने एक सार्वजनिक सभा में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर बहुत बड़ी गलती की।” उसने आगे कहा, “…जो पाबंदियां लगाते हैं, जो रुकावट पैदा करते हैं, वो सुनो, जो हमें आतंकवादी कहते हैं, सुनो। पूरी दुनिया को पलटा जा सकता है, सिस्टम बदला जा सकता है। हम अपने कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेंगे।”

    गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों को बेरहमी से मार दिया था। इस दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां बरसाई थीं। इसके बाद भारत ने पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई के दौरान करीब 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।