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  • जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू

    जम्मू-कश्मीर में सीमा पर हाई अलर्ट, LoC पार करते पकड़ा गया PoK निवासी; जांच शुरू


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर सुरक्षाबलों ने एक संदिग्ध घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के एक नागरिक को हिरासत में लिया है। सुरक्षा एजेंसियां पकड़े गए व्यक्ति से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि उसके भारत में प्रवेश के उद्देश्य और संभावित संपर्कों का पता लगाया जा सके। घटना ऐसे समय सामने आई है जब अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को लेकर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही हाई अलर्ट पर है।

    अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए व्यक्ति की पहचान मोहम्मद सज्जाद के रूप में हुई है जो रफीक का पुत्र और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के पोलास क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। नियमित गश्त और निगरानी के दौरान सुरक्षाबलों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियां देखीं जिसके बाद उसे रोककर हिरासत में ले लिया गया। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वह गलती से सीमा पार आया या किसी विशेष उद्देश्य से भारतीय सीमा में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था।

    इस बीच जम्मू-कश्मीर में आगामी श्री अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। उधमपुर रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा ने कटड़ा में उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पुलिस सेना सीआरपीएफ इंटेलिजेंस ब्यूरो सीआईडी रेलवे ट्रैफिक पुलिस और श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

    बैठक में कटड़ा शहर यात्रा मार्ग और भवन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। सीसीटीवी निगरानी प्रणाली जवानों की तैनाती आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा बलों की रणनीतिक तैनाती के निर्देश दिए।

    कटड़ा से भवन तक पूरे यात्रा मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था का भी बारीकी से आकलन किया गया ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और निर्बाध यात्रा का अनुभव मिल सके। इसके अलावा होटल लॉज गेस्ट हाउस होमस्टे और अन्य ठहरने की जगहों के नियमित सत्यापन और निरीक्षण के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

    सुरक्षा अधिकारियों ने कहा कि तीर्थयात्रा के दौरान किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को पूरी तरह सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और जम्मू-कश्मीर में धार्मिक यात्राओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है।

  • 1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान

    1971 के नायक के साथ हुआ था बड़ा अन्याय वर्षों तक मिली आधी पेंशन फिर राष्ट्रपति कलाम ने दिलाया पूरा सम्मान


    नई दिल्ली। भारतीय सेना के इतिहास में फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का नाम अदम्य साहस दूरदर्शी नेतृत्व और ऐतिहासिक सैन्य रणनीति के लिए हमेशा याद किया जाएगा। वर्ष 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने केवल 13 दिनों में ऐसी निर्णायक जीत हासिल की जिसने दक्षिण एशिया का भूगोल ही बदल दिया और बांग्लादेश के रूप में एक नए राष्ट्र का जन्म हुआ। लेकिन देश को इतनी बड़ी जीत दिलाने वाले इस महान सैन्य अधिकारी को अपने जीवन के अंतिम वर्षों में लंबे समय तक पूरा वित्तीय अधिकार नहीं मिल पाया।

    3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में एक पारसी परिवार में जन्मे सैम होर्मूसजी फ्रैमजी जमशेदजी मानेकशॉ के पिता चाहते थे कि वे डॉक्टर बनें लेकिन उन्होंने सैन्य जीवन को चुना और 1932 में भारतीय सैन्य अकादमी के पहले बैच में शामिल हो गए। आगे चलकर उन्होंने अपने नेतृत्व और साहस के दम पर भारतीय सेना में सर्वोच्च सम्मान हासिल किया। गोरखा सैनिकों ने उन्हें सम्मानपूर्वक सैम बहादुर नाम दिया जो आज भी उनकी पहचान बना हुआ है।

    1971 के युद्ध से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्वी पाकिस्तान की स्थिति को देखते हुए तत्काल सैन्य कार्रवाई का सुझाव दिया था लेकिन सैम मानेकशॉ ने मौसम और सैन्य तैयारियों का हवाला देते हुए कुछ महीनों का समय मांगा। उन्होंने भरोसा दिया कि पूरी तैयारी के बाद सफलता निश्चित होगी। उनकी रणनीति पूरी तरह सफल साबित हुई और 3 दिसंबर 1971 को युद्ध शुरू होने के बाद भारतीय सेना ने तेजी से अभियान चलाकर ढाका को चारों ओर से घेर लिया। आखिरकार पाकिस्तान के लगभग 90 हजार सैनिकों ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया और बांग्लादेश का गठन हुआ।

    सैन्य सेवा से 15 जनवरी 1973 को सेवानिवृत्त होने के बाद भी फील्ड मार्शल का पद आजीवन माना जाता है। इस पद पर आसीन अधिकारी को पूर्ण वेतन और सभी सुविधाएं मिलने का अधिकार होता है। हालांकि प्रशासनिक और नौकरशाही कारणों से सैम मानेकशॉ को लंबे समय तक केवल आधी पेंशन ही मिलती रही। यह स्थिति कई वर्षों तक बनी रही और उनका बकाया भुगतान लंबित रहा।

    बाद में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। उनके प्रयासों के बाद अप्रैल 2007 में तत्कालीन रक्षा सचिव शेखर दत्त अस्पताल पहुंचे और सैम मानेकशॉ को 1.16 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान सौंपा। यह केवल एक आर्थिक भुगतान नहीं बल्कि देश की ओर से अपने महान सैनिक को दिया गया सम्मान भी था।

    27 जून 2008 को तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित सैन्य अस्पताल में फेफड़ों के संक्रमण के कारण 94 वर्ष की आयु में सैम मानेकशॉ का निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि नेतृत्व केवल युद्ध जीतने का नाम नहीं बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने का साहस भी होता है। आज भी भारतीय सेना में उनकी रणनीति नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं।

  • भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत वेनेजुएला भेजे डॉक्टर, भीष्म क्यूब और राहत सामग्री

    भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, 'ऑपरेशन अमिस्ताद' के तहत वेनेजुएला भेजे डॉक्टर, भीष्म क्यूब और राहत सामग्री


    नई दिल्ली । उत्तरी वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने एक बार फिर वैश्विक मानवीय जिम्मेदारी निभाते हुए राहत और चिकित्सा सहायता के लिए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ शुरू किया है। इस विशेष अभियान के तहत भारतीय सेना की मेडिकल टीम, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और बड़ी मात्रा में राहत सामग्री वेनेजुएला भेजी गई है, ताकि आपदा प्रभावित लोगों को तत्काल इलाज और जरूरी सहायता मिल सके।

    भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल से 41 सदस्यीय विशेषज्ञ दल भारतीय वायुसेना के दो सी-17 परिवहन विमानों के जरिए वेनेजुएला रवाना हुआ है। इस टीम में नौ अनुभवी सैन्य चिकित्सक भी शामिल हैं, जो प्रभावित इलाकों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, ट्रॉमा केयर, गंभीर घायलों का इलाज, सर्जरी और गहन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।

    भारतीय सेना के अनुसार राहत दल अपने साथ लगभग छह टन चिकित्सा सामग्री और मानवीय सहायता लेकर गया है। इसके अलावा मिशन में 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां और चिकित्सा उपकरण भी भेजे गए हैं। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ‘भीष्म क्यूब’ है, जिसे भारत की आरोग्य मैत्री परियोजना के तहत विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक मॉड्यूलर फील्ड हॉस्पिटल बेहद कम समय में स्थापित किया जा सकता है और लगभग 200 मरीजों को एक साथ जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा देने में सक्षम है।

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि ऑपरेशन अमिस्ताद के तहत भारतीय वायुसेना के दो सी-17 विमान राहत सामग्री और चिकित्सा दल के साथ वेनेजुएला रवाना हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला की सरकार और वहां के नागरिकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है तथा हरसंभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    भीष्म क्यूब को विशेष रूप से प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट वाले क्षेत्रों में तेजी से चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह उन्नत ट्रॉमा केयर, आपातकालीन सर्जरी और गहन चिकित्सा सुविधाओं से लैस है, जिससे बड़ी संख्या में घायलों का तत्काल उपचार संभव हो पाता है।

    भारत का यह मिशन केवल राहत सामग्री भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मित्र देशों के साथ संकट की घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की उसकी विदेश नीति और मानवीय दृष्टिकोण का भी मजबूत संदेश देता है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पर आधारित यह अभियान वैश्विक सहयोग, करुणा और मानवता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर से रेखांकित करता है।

    वेनेजुएला में चलाया जा रहा ऑपरेशन अमिस्ताद हजारों प्रभावित लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो सकता है। साथ ही यह अभियान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और मानवीय शक्ति की छवि को भी और मजबूत करेगा।

  • रोबोटिक डॉग्स से लेकर देसी रामपुर हाउंड तक, सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में दिखी युद्ध की नई तस्वीर

    रोबोटिक डॉग्स से लेकर देसी रामपुर हाउंड तक, सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में दिखी युद्ध की नई तस्वीर


    नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तकनीक और विशेष सैन्य प्रणालियां भी इसमें तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी बदलते सैन्य परिदृश्य की झलक मेघालय के उमरोई में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में देखने को मिली। इस बार अभ्यास में सिर्फ सैनिकों की रणनीति और सैन्य कौशल ही चर्चा में नहीं रहे, बल्कि भारतीय सेना के प्रशिक्षित K9 योद्धा और रोबोटिक डॉग्स भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने।

    अभ्यास के दौरान सैन्य डॉग स्क्वॉड ने अपनी विशेष क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए मौजूद अधिकारियों और विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। इन प्रशिक्षित डॉग्स ने विस्फोटक खोजने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, लक्ष्य का पीछा करने और हमले जैसी कई सैन्य गतिविधियों को प्रदर्शित किया। सेना का मानना है कि आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में ऐसी टीमें सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायक शक्ति बनती जा रही हैं। कठिन परिस्थितियों में उनकी भूमिका कई बार अत्यंत निर्णायक साबित होती है।

    इस अभ्यास में शामिल सैन्य डॉग्स की विशेष भूमिकाएं भी ध्यान आकर्षित करने वाली रहीं। इनमें एक हमला करने वाला प्रशिक्षित डॉग, एक ट्रैकिंग विशेषज्ञ और एक विस्फोटक खोजने वाला डॉग शामिल था। अलग-अलग परिस्थितियों में इनकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार युद्ध और सुरक्षा अभियानों में ऐसे प्रशिक्षित डॉग्स की मदद से जोखिम कम करने और अभियान को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

    इस पूरे अभ्यास में सबसे अधिक चर्चा भारत की देसी नस्ल रामपुर हाउंड की रही। ‘विक्टर’ नाम का यह ट्रैकर डॉग अपनी फुर्ती और सूंघने की तेज क्षमता के कारण आकर्षण का केंद्र बना। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि भारतीय नस्लों में स्थानीय मौसम और कठिन परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता अधिक होती है। यही कारण है कि सेना अब स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारतीय सेना के K9 योद्धाओं की विशेषता यह है कि वे केवल सामान्य इलाकों तक सीमित नहीं रहते। इनका उपयोग रेगिस्तानी क्षेत्रों, घने जंगलों और बर्फीले इलाकों तक में किया जाता है। आतंकवाद विरोधी अभियान, विस्फोटक पदार्थों की खोज और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। सेना के अनुसार इनकी सबसे बड़ी ताकत तेज सूंघने की क्षमता, अनुशासन और अपने मिशन के प्रति विश्वसनीयता है।

    अभ्यास में रोबोटिक डॉग्स की मौजूदगी ने भी भविष्य की युद्ध प्रणाली की एक नई तस्वीर पेश की। इनके प्रदर्शन के जरिए यह संकेत दिया गया कि आने वाले समय में तकनीक और पारंपरिक सैन्य कौशल एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। सेना का मानना है कि भविष्य में रोबोटिक सिस्टम और K9 टीमें मिलकर सैन्य अभियानों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक बना सकती हैं। प्रगति 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध की नई दुनिया में तकनीक और प्रशिक्षण का यह मेल भविष्य की रणनीति तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

  • तपती धूप में शहीद को नमन: सियाचिन के वीर कैप्टन प्रताप सिंह की याद में मेरठ में सेना ने बांटा शरबत

    तपती धूप में शहीद को नमन: सियाचिन के वीर कैप्टन प्रताप सिंह की याद में मेरठ में सेना ने बांटा शरबत



    मेरठ। मेरठ में 43 डिग्री की भीषण गर्मी के बीच सेना के जवानों ने सियाचिन के वीर शहीद कैप्टन प्रताप सिंह को अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। बसंतर रेजीमेंट के जवानों ने सड़क पर राहगीरों को शरबत पिलाकर न सिर्फ लोगों की प्यास बुझाई, बल्कि शहीद के बलिदान को भी याद किया। इस दौरान लोगों ने सेना के इस मानवीय और प्रेरणादायक प्रयास की जमकर सराहना की।

    26 मई 1988 को सियाचिन ग्लेशियर के बाना पोस्ट पर तैनात कैप्टन प्रताप सिंह ने दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऑपरेशन के दौरान हुए माइंस ब्लास्ट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक साहस दिखाते हुए दुश्मन की मदद के लिए लगाई गई रस्सी की सीढ़ी को काट दिया, जिससे घुसपैठ पूरी तरह विफल हो गई। उनकी इसी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

    सेना के जवानों ने कहा कि शहीद सिर्फ इतिहास नहीं होते, बल्कि वे हर जवान और हर नागरिक के लिए प्रेरणा होते हैं। इसी भावना के तहत जवानों ने आम लोगों के बीच जाकर सेवा का संदेश दिया और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान सड़क से गुजर रहे लोग भी रुके और जवानों के साथ शहीद को नमन किया।

  • भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह

    भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान में एक बार फिर भारत की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद से वहां के सुरक्षा विशेषज्ञ और रणनीतिक विश्लेषक भारत से संभावित भविष्य के सैन्य अभियानों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

    पाकिस्तान के रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बदलती सैन्य रणनीति और तकनीकी बढ़त को देखते हुए देश को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध तकनीक और नई रणनीतियां क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।

    भारत की सैन्य रणनीति पर पाकिस्तान की नजर
    कायदे-आज़म विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के सैन्य सिद्धांतों में बदलाव आ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और अन्य सीमित सैन्य कार्रवाइयों की रणनीति ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया है।

    आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर
    पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों ने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक मिसाइलें और उन्नत निगरानी प्रणाली अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाने की जरूरत है।

    एयर कमोडोर (सेवानिवृत्त) खालिद बनूरी के अनुसार, युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और निर्णय लेने की गति अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    निष्कर्ष
    कुल मिलाकर, पाकिस्तान में सुरक्षा विशेषज्ञ भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं और सरकार को रक्षा सुधारों की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीति जरूरी है।

    टैग्स
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  • CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर देश के राजनीतिक और डिजिटल माहौल में एक खास तरह की हलचल देखने को मिली। इस दिन को याद करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल तस्वीरों और कवर इमेज में बदलाव किया। यह बदलाव केवल एक औपचारिक अपडेट नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारतीय सेना के साहस और उस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को याद करने का संदेश भी जुड़ा था, जिसे देश की सुरक्षा के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में विशेष बदलाव किया। उनकी प्रोफाइल तस्वीर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी प्रतीकात्मक झलक दिखाई दी, जबकि कवर इमेज में ब्रह्मोस मिसाइल को प्रमुखता से दर्शाया गया। यह बदलाव सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों के बीच इसे लेकर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    ऑपरेशन सिंदूर को उस सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जाता है जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कदम उठाया था। इस कार्रवाई को देश की सुरक्षा नीति में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जाता है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    इस वर्षगांठ पर कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए देश के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और भारतीय सेना के साहस को सलाम किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए गए ये बदलाव एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में सामने आए, जिसमें देश की रक्षा नीति और सैन्य ताकत को प्रमुखता से दर्शाया गया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल को कवर इमेज में शामिल करना भी विशेष रूप से चर्चा में रहा। ब्रह्मोस को भारत की आधुनिक और तेज सुपरसोनिक मिसाइलों में गिना जाता है, जिसे देश की रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह तस्वीर भारत की बढ़ती सैन्य तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था का भी संकेत देती है।

    उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन इकाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है, जो राज्य को रक्षा क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई यूजर्स ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीरें और संदेश साझा किए, जिससे यह विषय केवल एक औपचारिक वर्षगांठ न रहकर एक व्यापक चर्चा का हिस्सा बन गया। यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति और सुरक्षा संदेश के एक नए रूप में सामने आया।

  • ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत

    ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत


    नई दिल्ली। एक साल पहले शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर आज भी देश के साहस, जवाबी कार्रवाई और मजबूत इरादों की याद दिलाता है। इस ऑपरेशन ने जहां दुश्मन को कड़ा संदेश दिया, वहीं सीमा पर बसे लोगों के जीवन को गहरे जख्म भी दिए। अब एक साल बाद तस्वीर बदलती जरूर दिख रही है घाव अभी भरे नहीं हैं, लेकिन उम्मीद की नई सुबह जरूर दिखाई दे रही है।

    एलओसी से सटे उड़ी सेक्टर के गांवों में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। चुरुंडा, सिलिकोट, सलामाबाद, गिंगल और लगामा जैसे गांव, जो कभी गोलाबारी से थम गए थे, आज फिर खेतों की हरियाली और बच्चों की स्कूल वापसी से जिंदा नजर आने लगे हैं। छोटे कारोबार फिर शुरू हो चुके हैं, लेकिन हर चेहरे पर सतर्कता अब भी साफ झलकती है।

    बीते संघर्ष के निशान अभी मिटे नहीं हैं। कई गांवों में घरों की दीवारों पर गोलियों और मोर्टार के निशान आज भी उस भयावह दौर की कहानी कहते हैं। चुरुंडा और सिलिकोट में दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि कई परिवारों ने अपने अपनों को खोया। लोगों की आंखों में आज भी वो खौफ जिंदा है, जब हर पल जान बचाने की जद्दोजहद थी।

    स्थानीय लोग बताते हैं कि हालात अब शांत जरूर हैं, लेकिन यह शांति स्थायी नहीं बल्कि उम्मीद और डर के बीच सांस ले रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग आज भी सुरक्षा से जुड़ी है—कई गांवों में अब तक पर्याप्त बंकर नहीं हैं, जबकि सीमावर्ती इलाकों में खतरा कब बढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

    पुंछ और आसपास के इलाकों में भी हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। गोलाबारी में तबाह हुए सैकड़ों घर अब फिर से खड़े हो गए हैं। सरकार की मदद और लोगों की मेहनत से दीवारें तो दोबारा बन गईं, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उतना ही गहरा है। कई परिवार ऐसे हैं, जो उस दर्दनाक घटना के बाद आज तक अपने घर लौट नहीं पाए।

    सीमावर्ती इलाकों में अब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि बंकरों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक तकनीक से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

    हालांकि, इस पूरे दौर में भारतीय सेना की भूमिका को लोग सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेना की चौकसी ही उनका आत्मविश्वास बनाए रखती है। खेतों में काम करते किसान और आंगन में खेलते बच्चे इस बात के गवाह हैं कि जिंदगी आगे बढ़ रही है—डर के साथ, लेकिन हौसले के दम पर।

    एक साल बाद तस्वीर साफ है ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मन को करारा जवाब दिया और सीमा पर बड़ी घटनाओं पर रोक लगी। पाकिस्तान की ओर से बड़े हमलों में कमी आई है, जिससे लोगों में भरोसा बढ़ा है।

    फिर भी, सीमावर्ती गांवों की असली कहानी यही है जख्म अभी भी ताजा हैं, यादें अब भी दर्द देती हैं, लेकिन इन सबके बीच उम्मीद जिंदा है। लोग कहते हैं “डटे थे, डटे हैं और डटे रहेंगे।” यही जज्बा इन इलाकों को आगे बढ़ा रहा है और यही विश्वास है कि आने वाले समय में यह शांति स्थायी रूप लेगी।

  • तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया।

    इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है।

    नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

  • मई जून में बदलेगा देश का सैन्य नेतृत्व, CDS समेत कई शीर्ष पदों पर होंगी नई नियुक्तियां

    मई जून में बदलेगा देश का सैन्य नेतृत्व, CDS समेत कई शीर्ष पदों पर होंगी नई नियुक्तियां


    नई दिल्ली। देश के शीर्ष सैन्य ढांचे में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव होने वाले हैं। इसकी शुरुआत नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति से होगी। वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है जिसके बाद सरकार अप्रैल में नए सीडीएस के नाम पर फैसला ले सकती है। इसके साथ ही सेना प्रमुख नौसेना प्रमुख और डीआरडीओ अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव तय माने जा रहे हैं।

    जनरल अनिल चौहान जो देश के दूसरे सीडीएस हैं लगभग चार वर्षों से इस पद पर कार्यरत हैं और उनका विस्तारित कार्यकाल मई के अंत में खत्म होगा। वहीं नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मई के अंत तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून को 62 वर्ष की अधिकतम आयु पूरी कर पद छोड़ेंगे।

    इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर कामत भी 31 मई को रिटायर होने जा रहे हैं। हालांकि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल अभी जारी रहेगा जो इस वर्ष अक्टूबर में समाप्त होगा।

    रक्षा मंत्रालय के संशोधित नियमों के अनुसार नए सीडीएस के चयन के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। तीनों सेनाओं के वे सभी थ्री स्टार अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एयर मार्शल और वाइस एडमिरल जो वर्तमान में सेवारत हैं या पिछले दो वर्षों में रिटायर हुए हैं इस पद के लिए योग्य माने जाएंगे। हालांकि चयन के समय उनकी आयु 62 वर्ष से कम होना अनिवार्य है।

    सरकार के पास करीब 150 से अधिक अधिकारियों का विकल्प मौजूद है जिनमें से नए सीडीएस का चयन किया जाएगा। संभावना है कि अप्रैल के अंत तक कैबिनेट की नियुक्ति समिति इस पर अंतिम निर्णय ले लेगी।