Tag: Indian Army

  • रोबोटिक डॉग्स से लेकर देसी रामपुर हाउंड तक, सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में दिखी युद्ध की नई तस्वीर

    रोबोटिक डॉग्स से लेकर देसी रामपुर हाउंड तक, सैन्य अभ्यास प्रगति 2026 में दिखी युद्ध की नई तस्वीर


    नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध अब केवल हथियारों और सैनिकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि तकनीक और विशेष सैन्य प्रणालियां भी इसमें तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसी बदलते सैन्य परिदृश्य की झलक मेघालय के उमरोई में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास ‘प्रगति 2026’ में देखने को मिली। इस बार अभ्यास में सिर्फ सैनिकों की रणनीति और सैन्य कौशल ही चर्चा में नहीं रहे, बल्कि भारतीय सेना के प्रशिक्षित K9 योद्धा और रोबोटिक डॉग्स भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बने।

    अभ्यास के दौरान सैन्य डॉग स्क्वॉड ने अपनी विशेष क्षमताओं का प्रदर्शन करते हुए मौजूद अधिकारियों और विदेशी प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा। इन प्रशिक्षित डॉग्स ने विस्फोटक खोजने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने, लक्ष्य का पीछा करने और हमले जैसी कई सैन्य गतिविधियों को प्रदर्शित किया। सेना का मानना है कि आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में ऐसी टीमें सैनिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायक शक्ति बनती जा रही हैं। कठिन परिस्थितियों में उनकी भूमिका कई बार अत्यंत निर्णायक साबित होती है।

    इस अभ्यास में शामिल सैन्य डॉग्स की विशेष भूमिकाएं भी ध्यान आकर्षित करने वाली रहीं। इनमें एक हमला करने वाला प्रशिक्षित डॉग, एक ट्रैकिंग विशेषज्ञ और एक विस्फोटक खोजने वाला डॉग शामिल था। अलग-अलग परिस्थितियों में इनकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। सैन्य अधिकारियों के अनुसार युद्ध और सुरक्षा अभियानों में ऐसे प्रशिक्षित डॉग्स की मदद से जोखिम कम करने और अभियान को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

    इस पूरे अभ्यास में सबसे अधिक चर्चा भारत की देसी नस्ल रामपुर हाउंड की रही। ‘विक्टर’ नाम का यह ट्रैकर डॉग अपनी फुर्ती और सूंघने की तेज क्षमता के कारण आकर्षण का केंद्र बना। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि भारतीय नस्लों में स्थानीय मौसम और कठिन परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता अधिक होती है। यही कारण है कि सेना अब स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    भारतीय सेना के K9 योद्धाओं की विशेषता यह है कि वे केवल सामान्य इलाकों तक सीमित नहीं रहते। इनका उपयोग रेगिस्तानी क्षेत्रों, घने जंगलों और बर्फीले इलाकों तक में किया जाता है। आतंकवाद विरोधी अभियान, विस्फोटक पदार्थों की खोज और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। सेना के अनुसार इनकी सबसे बड़ी ताकत तेज सूंघने की क्षमता, अनुशासन और अपने मिशन के प्रति विश्वसनीयता है।

    अभ्यास में रोबोटिक डॉग्स की मौजूदगी ने भी भविष्य की युद्ध प्रणाली की एक नई तस्वीर पेश की। इनके प्रदर्शन के जरिए यह संकेत दिया गया कि आने वाले समय में तकनीक और पारंपरिक सैन्य कौशल एक-दूसरे के पूरक बनेंगे। सेना का मानना है कि भविष्य में रोबोटिक सिस्टम और K9 टीमें मिलकर सैन्य अभियानों को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक बना सकती हैं। प्रगति 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध की नई दुनिया में तकनीक और प्रशिक्षण का यह मेल भविष्य की रणनीति तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

  • तपती धूप में शहीद को नमन: सियाचिन के वीर कैप्टन प्रताप सिंह की याद में मेरठ में सेना ने बांटा शरबत

    तपती धूप में शहीद को नमन: सियाचिन के वीर कैप्टन प्रताप सिंह की याद में मेरठ में सेना ने बांटा शरबत



    मेरठ। मेरठ में 43 डिग्री की भीषण गर्मी के बीच सेना के जवानों ने सियाचिन के वीर शहीद कैप्टन प्रताप सिंह को अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। बसंतर रेजीमेंट के जवानों ने सड़क पर राहगीरों को शरबत पिलाकर न सिर्फ लोगों की प्यास बुझाई, बल्कि शहीद के बलिदान को भी याद किया। इस दौरान लोगों ने सेना के इस मानवीय और प्रेरणादायक प्रयास की जमकर सराहना की।

    26 मई 1988 को सियाचिन ग्लेशियर के बाना पोस्ट पर तैनात कैप्टन प्रताप सिंह ने दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऑपरेशन के दौरान हुए माइंस ब्लास्ट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक साहस दिखाते हुए दुश्मन की मदद के लिए लगाई गई रस्सी की सीढ़ी को काट दिया, जिससे घुसपैठ पूरी तरह विफल हो गई। उनकी इसी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

    सेना के जवानों ने कहा कि शहीद सिर्फ इतिहास नहीं होते, बल्कि वे हर जवान और हर नागरिक के लिए प्रेरणा होते हैं। इसी भावना के तहत जवानों ने आम लोगों के बीच जाकर सेवा का संदेश दिया और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान सड़क से गुजर रहे लोग भी रुके और जवानों के साथ शहीद को नमन किया।

  • भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह

    भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह



    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान में एक बार फिर भारत की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद से वहां के सुरक्षा विशेषज्ञ और रणनीतिक विश्लेषक भारत से संभावित भविष्य के सैन्य अभियानों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।

    पाकिस्तान के रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बदलती सैन्य रणनीति और तकनीकी बढ़त को देखते हुए देश को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध तकनीक और नई रणनीतियां क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं।

    भारत की सैन्य रणनीति पर पाकिस्तान की नजर
    कायदे-आज़म विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के सैन्य सिद्धांतों में बदलाव आ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और अन्य सीमित सैन्य कार्रवाइयों की रणनीति ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया है।

    आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोर
    पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों ने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक मिसाइलें और उन्नत निगरानी प्रणाली अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाने की जरूरत है।

    एयर कमोडोर (सेवानिवृत्त) खालिद बनूरी के अनुसार, युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और निर्णय लेने की गति अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

    निष्कर्ष
    कुल मिलाकर, पाकिस्तान में सुरक्षा विशेषज्ञ भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं और सरकार को रक्षा सुधारों की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीति जरूरी है।

    टैग्स
    भारत पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान डिफेंस, भारत सेना, दक्षिण एशिया तनाव, सैन्य विशेषज्ञ, ड्रोन वारफेयर, AI युद्ध तकनीक, हाइपरसोनिक मिसाइल, इस्लामाबाद, रणनीतिक स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय संबंध

  • CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    CM योगी समेत कई नेताओं ने बदली सोशल मीडिया DP, ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस तस्वीरों से दिया खास संदेश

    नई दिल्ली।
    ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर देश के राजनीतिक और डिजिटल माहौल में एक खास तरह की हलचल देखने को मिली। इस दिन को याद करते हुए कई वरिष्ठ नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्रोफाइल तस्वीरों और कवर इमेज में बदलाव किया। यह बदलाव केवल एक औपचारिक अपडेट नहीं था, बल्कि इसके पीछे भारतीय सेना के साहस और उस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को याद करने का संदेश भी जुड़ा था, जिसे देश की सुरक्षा के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल में विशेष बदलाव किया। उनकी प्रोफाइल तस्वीर में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी प्रतीकात्मक झलक दिखाई दी, जबकि कवर इमेज में ब्रह्मोस मिसाइल को प्रमुखता से दर्शाया गया। यह बदलाव सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया और लोगों के बीच इसे लेकर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    ऑपरेशन सिंदूर को उस सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जाता है जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों ने संयुक्त रूप से आतंकवादी ठिकानों पर निर्णायक कदम उठाया था। इस कार्रवाई को देश की सुरक्षा नीति में एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जाता है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    इस वर्षगांठ पर कई नेताओं ने सोशल मीडिया के जरिए देश के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और भारतीय सेना के साहस को सलाम किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किए गए ये बदलाव एक प्रतीकात्मक संदेश के रूप में सामने आए, जिसमें देश की रक्षा नीति और सैन्य ताकत को प्रमुखता से दर्शाया गया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ब्रह्मोस मिसाइल को कवर इमेज में शामिल करना भी विशेष रूप से चर्चा में रहा। ब्रह्मोस को भारत की आधुनिक और तेज सुपरसोनिक मिसाइलों में गिना जाता है, जिसे देश की रक्षा क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह तस्वीर भारत की बढ़ती सैन्य तकनीक और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था का भी संकेत देती है।

    उत्तर प्रदेश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। लखनऊ में ब्रह्मोस से जुड़ी उत्पादन इकाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है, जो राज्य को रक्षा क्षेत्र में नई पहचान दिला रही है।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लोगों की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई यूजर्स ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीरें और संदेश साझा किए, जिससे यह विषय केवल एक औपचारिक वर्षगांठ न रहकर एक व्यापक चर्चा का हिस्सा बन गया। यह पूरा घटनाक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देशभक्ति और सुरक्षा संदेश के एक नए रूप में सामने आया।

  • ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत

    ऑपरेशन सिंदूर के 1 साल: जख्म अभी बाकी, लेकिन सीमा पर लौट रही जिंदगी; डर के बीच उम्मीद की नई शुरुआत


    नई दिल्ली। एक साल पहले शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर आज भी देश के साहस, जवाबी कार्रवाई और मजबूत इरादों की याद दिलाता है। इस ऑपरेशन ने जहां दुश्मन को कड़ा संदेश दिया, वहीं सीमा पर बसे लोगों के जीवन को गहरे जख्म भी दिए। अब एक साल बाद तस्वीर बदलती जरूर दिख रही है घाव अभी भरे नहीं हैं, लेकिन उम्मीद की नई सुबह जरूर दिखाई दे रही है।

    एलओसी से सटे उड़ी सेक्टर के गांवों में जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। चुरुंडा, सिलिकोट, सलामाबाद, गिंगल और लगामा जैसे गांव, जो कभी गोलाबारी से थम गए थे, आज फिर खेतों की हरियाली और बच्चों की स्कूल वापसी से जिंदा नजर आने लगे हैं। छोटे कारोबार फिर शुरू हो चुके हैं, लेकिन हर चेहरे पर सतर्कता अब भी साफ झलकती है।

    बीते संघर्ष के निशान अभी मिटे नहीं हैं। कई गांवों में घरों की दीवारों पर गोलियों और मोर्टार के निशान आज भी उस भयावह दौर की कहानी कहते हैं। चुरुंडा और सिलिकोट में दर्जनों घर क्षतिग्रस्त हुए थे, जबकि कई परिवारों ने अपने अपनों को खोया। लोगों की आंखों में आज भी वो खौफ जिंदा है, जब हर पल जान बचाने की जद्दोजहद थी।

    स्थानीय लोग बताते हैं कि हालात अब शांत जरूर हैं, लेकिन यह शांति स्थायी नहीं बल्कि उम्मीद और डर के बीच सांस ले रही है। ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग आज भी सुरक्षा से जुड़ी है—कई गांवों में अब तक पर्याप्त बंकर नहीं हैं, जबकि सीमावर्ती इलाकों में खतरा कब बढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

    पुंछ और आसपास के इलाकों में भी हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। गोलाबारी में तबाह हुए सैकड़ों घर अब फिर से खड़े हो गए हैं। सरकार की मदद और लोगों की मेहनत से दीवारें तो दोबारा बन गईं, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उतना ही गहरा है। कई परिवार ऐसे हैं, जो उस दर्दनाक घटना के बाद आज तक अपने घर लौट नहीं पाए।

    सीमावर्ती इलाकों में अब सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि अब वक्त आ गया है कि बंकरों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक तकनीक से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

    हालांकि, इस पूरे दौर में भारतीय सेना की भूमिका को लोग सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सेना की चौकसी ही उनका आत्मविश्वास बनाए रखती है। खेतों में काम करते किसान और आंगन में खेलते बच्चे इस बात के गवाह हैं कि जिंदगी आगे बढ़ रही है—डर के साथ, लेकिन हौसले के दम पर।

    एक साल बाद तस्वीर साफ है ऑपरेशन सिंदूर ने दुश्मन को करारा जवाब दिया और सीमा पर बड़ी घटनाओं पर रोक लगी। पाकिस्तान की ओर से बड़े हमलों में कमी आई है, जिससे लोगों में भरोसा बढ़ा है।

    फिर भी, सीमावर्ती गांवों की असली कहानी यही है जख्म अभी भी ताजा हैं, यादें अब भी दर्द देती हैं, लेकिन इन सबके बीच उम्मीद जिंदा है। लोग कहते हैं “डटे थे, डटे हैं और डटे रहेंगे।” यही जज्बा इन इलाकों को आगे बढ़ा रहा है और यही विश्वास है कि आने वाले समय में यह शांति स्थायी रूप लेगी।

  • तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    तेज, सटीक और घातक कार्रवाई: 22 मिनट में खत्म हुआ आतंकियों का नेटवर्क

    नई दिल्ली । भारतीय सेना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर साझा किए गए नए वीडियो ने न केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति का भी संदेश दिया है। महज 22 मिनट में अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन ने आतंकियों के पूरे कमांड ढांचे को हिलाकर रख दिया।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए आधिकारिक पोस्ट में सेना ने साफ शब्दों में कहा कि जब मानवता की सीमाएं पार होती हैं तो प्रतिक्रिया भी उतनी ही निर्णायक होती है। यह संदेश न केवल चेतावनी है बल्कि उन ताकतों के लिए संकेत भी है जो भारत की शांति और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश करते हैं।

    सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी गति और सटीकता रही। बेहद कम समय में कई लक्ष्यों को एक साथ निशाना बनाते हुए आतंकियों के नेटवर्क को गहरा नुकसान पहुंचाया गया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे आधुनिक तकनीक और सटीक रणनीति के साथ अलग-अलग टारगेट्स पर समन्वित तरीके से कार्रवाई की गई। इससे यह साफ होता है कि ऑपरेशन की योजना बेहद बारीकी से बनाई गई थी और उसे उसी स्तर की दक्षता के साथ लागू किया गया।

    इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आतंकियों के नेतृत्व तंत्र को खत्म करना था, जिसे सेना ने सफलतापूर्वक पूरा किया। कमांड स्ट्रक्चर पर सीधे प्रहार से आतंकियों की गतिविधियों को गंभीर झटका लगा है। इस तरह की कार्रवाई यह दिखाती है कि भारतीय सेना न केवल रक्षात्मक बल्कि आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह सक्षम है।

    नए वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में इस ऑपरेशन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ऑपरेशन भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को और मजबूत करेंगे। यह भी संकेत मिलता है कि सेना अब तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत हो चुकी है, जिससे कम समय में बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के जरिए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश के खिलाफ किसी भी साजिश का जवाब तुरंत और प्रभावी तरीके से दिया जाएगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता न केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन है बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

  • मई जून में बदलेगा देश का सैन्य नेतृत्व, CDS समेत कई शीर्ष पदों पर होंगी नई नियुक्तियां

    मई जून में बदलेगा देश का सैन्य नेतृत्व, CDS समेत कई शीर्ष पदों पर होंगी नई नियुक्तियां


    नई दिल्ली। देश के शीर्ष सैन्य ढांचे में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव होने वाले हैं। इसकी शुरुआत नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति से होगी। वर्तमान सीडीएस जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है जिसके बाद सरकार अप्रैल में नए सीडीएस के नाम पर फैसला ले सकती है। इसके साथ ही सेना प्रमुख नौसेना प्रमुख और डीआरडीओ अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव तय माने जा रहे हैं।

    जनरल अनिल चौहान जो देश के दूसरे सीडीएस हैं लगभग चार वर्षों से इस पद पर कार्यरत हैं और उनका विस्तारित कार्यकाल मई के अंत में खत्म होगा। वहीं नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी भी 62 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मई के अंत तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी 30 जून को 62 वर्ष की अधिकतम आयु पूरी कर पद छोड़ेंगे।

    इसी क्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर कामत भी 31 मई को रिटायर होने जा रहे हैं। हालांकि वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह का कार्यकाल अभी जारी रहेगा जो इस वर्ष अक्टूबर में समाप्त होगा।

    रक्षा मंत्रालय के संशोधित नियमों के अनुसार नए सीडीएस के चयन के लिए पात्रता का दायरा बढ़ाया गया है। तीनों सेनाओं के वे सभी थ्री स्टार अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल एयर मार्शल और वाइस एडमिरल जो वर्तमान में सेवारत हैं या पिछले दो वर्षों में रिटायर हुए हैं इस पद के लिए योग्य माने जाएंगे। हालांकि चयन के समय उनकी आयु 62 वर्ष से कम होना अनिवार्य है।

    सरकार के पास करीब 150 से अधिक अधिकारियों का विकल्प मौजूद है जिनमें से नए सीडीएस का चयन किया जाएगा। संभावना है कि अप्रैल के अंत तक कैबिनेट की नियुक्ति समिति इस पर अंतिम निर्णय ले लेगी।

  • देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की जयंती, गडकरी, योगी और अन्य नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की जयंती, गडकरी, योगी और अन्य नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली : भारत अपने पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत को उनकी जयंती पर याद कर रहा है। देशभर के नेता और अधिकारी इस अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

    केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, देश के प्रथम रक्षा प्रमुख पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “जनरल बिपिन रावत ने अपना पूरा जीवन देश की रक्षा को मजबूत करने और सशस्त्र बलों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और देशभक्ति पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

    केंद्रीय राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखा, देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत की जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण देश की आन-बान-शान और सेनाओं को मजबूत करने में लगाया।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,मां भारती के वीर सपूत, देश के प्रथम सीडीएस और ‘पद्म विभूषण’ जनरल बिपिन रावत की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र की सुरक्षा और सैन्य सुदृढ़ता में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उन्हें याद करते हुए कहा, “अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक जनरल बिपिन रावत की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, जनरल बिपिन रावत जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। अदम्य साहस और अद्वितीय सैन्य कौशल के प्रतीक के रूप में उन्होंने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में अतुलनीय योगदान दिया।

    दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति आपका समर्पण, साहस और अदम्य नेतृत्व सदैव हम सभी को प्रेरित करता रहेगा।

    बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी लिखा, राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और साहसिक व्यक्तित्व हर भारतवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। देश सेवा में उनके अमूल्य योगदान और बलिदान को देश सदैव गर्व के साथ याद रखेगा।

    देशभर के नेताओं की यह श्रद्धांजलि न केवल जनरल बिपिन रावत के साहस और नेतृत्व को याद करती है बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को भी सम्मानित करती है।

  • ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

    ऑपरेशन ‘सिंदूर 2.0’ पर सख्त संदेश: जमीन, समुद्र और हवा-हर मोर्चे पर जवाब को तैयार सेना

    नई दिल्ली। भारत ने सीमा पार से किसी भी उकसावे की स्थिति में पहले से अधिक कठोर प्रतिक्रिया देने के संकेत दिए हैं। भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया गया है और भविष्य की कार्रवाई बहु-आयामी हो सकती है।

    यह बयान पठानकोट में आयोजित एक ऑपरेशनल क्षमता प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना की तैयारी और रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

    2 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग राजेश पुष्कर ने कहा कि पिछले वर्ष चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल भारतीय सैन्य क्षमता का सीमित उदाहरण था। उनका कहना था कि चार दिनों के भीतर ही पाकिस्तान को संघर्षविराम की अपील करनी पड़ी थी, जबकि मौजूदा चरण में कहीं अधिक बड़े स्तर की तैयारी की गई है।

    किसी भी मोर्चे पर जवाब की तैयारी

    अधिकारियों ने संकेत दिया कि भविष्य की सैन्य प्रतिक्रिया परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई जमीन, समुद्र या हवा—तीनों क्षेत्रों में एक साथ की जा सकती है।

    सेना का उद्देश्य अब केवल जवाब देना नहीं, बल्कि प्रतिरोध क्षमता को निर्णायक स्तर तक ले जाना है।

    “न्यूक्लियर ब्लफ” पर भी सख्त रुख

    पश्चिमी कमान के प्रमुख मनोज कुमार कटियार ने पाकिस्तान की ओर से बार-बार दिए जाने वाले परमाणु संकेतों को “न्यूक्लियर ब्लफ” करार देते हुए कहा कि भारत अब ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ भारत को कड़ी कार्रवाई से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है।

    पिछले साल हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन

    जानकारी के अनुसार, मई 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक सैन्य कार्रवाई की गई थी।

    रणनीति अब और आक्रामक

    सेना के ताजा संकेतों से स्पष्ट है कि भारत ने अपनी सैन्य रणनीति, समन्वित युद्धक क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को पहले से अधिक सशक्त बनाया है। किसी भी संभावित उकसावे की स्थिति में इस बार जवाब अधिक तीव्र, व्यापक और बहु-क्षेत्रीय हो सकता है।

  • भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग

    भारतीय सेना आयोजित करेगी इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप 2026, 8 देशों की टीमें लेंगी भाग


    नई दिल्ली: भारतीय सेना पहली बार इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप IMACC2026 का आयोजन करने जा रही है। यह प्रतियोगिता 18 से 23 फरवरी तक पूर्वी हिमालय की तलहटी में आयोजित होगी। इस एक सप्ताह के आयोजन में भारत और मित्र देशों की सैन्य टीमें साहसिक और सहनशक्ति से जुड़ी कठिन प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेंगी।

    प्रतियोगिता में सात मित्र देशों-भूटान, ब्राजील, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब-की सैन्य टीमें शामिल होंगी। इनके साथ भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ITBPकी टीमें भी हिस्सा लेंगी। आयोजन में शामिल गतिविधियां सैनिकों की शारीरिक फिटनेस, मानसिक दृढ़ता, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और दबाव में निर्णय लेने की योग्यता की परीक्षा लेंगी। यह गतिविधियां कठिन पहाड़ी और फील्ड इलाके में आयोजित होंगी, जिससे वास्तविक सैन्य अभियानों जैसी परिस्थितियों का अनुभव होगा।

    अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल लंबे समय से दुनिया भर की सेनाओं के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाने का माध्यम रहे हैं। ये प्रतियोगिताएं इंटरनेशनल मिलिट्री स्पोर्ट्स काउंसिल CISMके “खेल के माध्यम से मित्रता” के सिद्धांत के तहत आयोजित होती हैं। भारत इस परंपरा में लंबे समय से सक्रिय भागीदार रहा है। वर्ष 2007 में भारत ने चौथे CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की भी मेजबानी की थी।

    IMACC इस परंपरा में एक नया और अभिनव कदम है। पारंपरिक स्टेडियम खेलों के विपरीत, यह प्रतियोगिता साहसिक गतिविधियों, सहनशक्ति और फील्ड कौशल पर केंद्रित है। यह आधुनिक सैन्य प्रशिक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और सैनिकों में उच्च स्तरीय क्षमता, रणनीतिक सोच और आपसी भरोसा विकसित करने में मदद करेगी।

    प्रतियोगिता के दौरान भाग लेने वाले सैनिक कठिन पहाड़ी मार्ग, बाधा दौड़, जलवायु-संबंधी चुनौतियों और टीम आधारित मिशन में अपनी दक्षता का प्रदर्शन करेंगे। आयोजक अधिकारी बताते हैं कि यह आयोजन सिर्फ प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं है बल्कि रक्षा सहयोग, आपसी सम्मान और सैनिकों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने का अवसर भी प्रदान करेगा।

    मुख्य समन्वयक अधिकारियों ने कहा कि IMACC 2026 भारतीय सेना के लिए मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और खेल के माध्यम से विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर है। इस आयोजन के माध्यम से भारत न केवल आधुनिक सैन्य कौशल का प्रदर्शन करेगा, बल्कि एशिया और विश्व स्तर पर सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग में अपनी भूमिका को भी और सुदृढ़ करेगा।

    इस पहले IMACC आयोजन की मेजबानी कर भारतीय सेना ने अपने सैन्य संबंधों को मजबूत करते हुए खेल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मित्रता और सामूहिक साहसिक कौशल के महत्व को उजागर किया है।