Tag: Indian Cinema

  • 97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां

    97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जो सिर्फ अपनी अभिनय प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अपनी सोच, व्यक्तित्व और जीवन जीने के अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। दिग्गज अभिनेत्री और नृत्यांगना जोहरा सहगल ऐसा ही एक नाम हैं। करीब आठ दशकों तक कला जगत में सक्रिय रहीं जोहरा सहगल ने अपने शानदार अभिनय, ऊर्जा और बेबाक बयानों से करोड़ों लोगों का दिल जीता।

    जोहरा सहगल का जन्म वर्ष 1912 में हुआ था और उन्होंने भारतीय रंगमंच, सिनेमा तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक भी जोहरा सहगल की ऊर्जा और सकारात्मक सोच लोगों को प्रेरित करती रही। 97 वर्ष की आयु में दिए गए एक चर्चित इंटरव्यू में उनसे उनकी जिंदादिली और खुशमिजाज व्यक्तित्व का राज पूछा गया था। इस दौरान उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जीवन में हास्य और प्यार की भावना व्यक्ति को हमेशा युवा बनाए रखती है। उनके इस बेबाक जवाब ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और सोशल मीडिया से लेकर समाचार जगत तक चर्चा का विषय बन गया था।

    जोहरा सहगल सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने लगभग 14 वर्षों तक थिएटर की दुनिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अभिनय का सफर कई यादगार फिल्मों और टीवी धारावाहिकों से होकर गुजरा। उन्होंने ‘नीचा नगर’, ‘अफसर’, ‘दिल से’, ‘चीनी कम’ और ‘सांवरिया’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। इसके अलावा कई लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति दर्शकों को खूब पसंद आई।

    सम्मानों की बात करें तो जोहरा सहगल को भारतीय कला और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री, कालिदास सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।

    उनकी निजी जिंदगी भी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं थी। कला के प्रति लगाव ने उन्हें प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक उदय शंकर के दल तक पहुंचाया, जहां उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई। उम्र के अंतर और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों ने प्रेम विवाह किया और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया।

    आज भले ही जोहरा सहगल हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी मुस्कान और जिंदगी को खुलकर जीने का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

  • Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की ग्लैमरस और टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार वाणी कपूर ने अपनी खूबसूरती, स्टाइल और आत्मविश्वास से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है। उनकी आकर्षक पर्सनैलिटी और फैशन सेंस उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं।

    वाणी कपूर ने अपने करियर की शुरुआत यशराज फिल्म्स की फिल्म “Shuddh Desi Romance” से की थी, जहां उनकी सहज अभिनय शैली को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने “Befikre”, “War”, “Bell Bottom”, “Chandigarh Kare Aashiqui” और “Khel Khel Mein” जैसी फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी खुद को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकती हैं।

    फैशन इंडस्ट्री में भी मजबूत पकड़
    वाणी कपूर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फैशन इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। कई बड़े फैशन ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक करने के साथ-साथ वह ग्लोबल फैशन इवेंट्स और मैगजीन कवर पर भी नजर आ चुकी हैं। उनका एलिगेंट लुक, सादगी और कॉन्फिडेंस उन्हें एक स्टाइल आइकन बनाता है। फैशन विशेषज्ञ उन्हें उन चुनिंदा भारतीय अभिनेत्रियों में शामिल करते हैं जो ग्लोबल ट्रेंड्स को बेहद सहजता से अपनाती हैं और उन्हें अपने अंदाज में पेश करती हैं।

    स्टाइल और पर्सनैलिटी बनी पहचान
    वाणी कपूर का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट उनका मॉडर्न और एलिगेंट फैशन सेंस है। उनका स्टाइल कम्फर्ट और ग्लैमर का संतुलन पेश करता है, जो आज की युवा पीढ़ी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वे अक्सर हल्के रंगों, मिनिमल ज्वेलरी और नैचुरल मेकअप लुक में नजर आती हैं, जो उनकी सादगी और आत्मविश्वास को और भी निखारता है। उनका यह स्टाइल उन्हें बॉलीवुड की सबसे फैशनेबल अभिनेत्रियों में शामिल करता है।

    कैरियर का अगला पड़ाव
    वर्तमान में वाणी कपूर कई नए फिल्म और डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उनके करियर का यह चरण और भी रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि वे लगातार अपनी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस को निखार रही हैं। फिटनेस के प्रति उनका समर्पण और लगातार बदलता फैशन स्टेटमेंट उन्हें नई पीढ़ी की प्रभावशाली अभिनेत्रियों में मजबूत स्थान दिलाता है।

    समर फैशन में वाणी कपूर का असर
    इस समर सीजन में वाणी कपूर के स्टाइल से प्रेरित फैशन ट्रेंड्स में पेस्टल को-ऑर्ड सेट्स, फ्लोई मैक्सी ड्रेसेज़, लिनेन आउटफिट्स, मिनिमल ज्वेलरी और न्यूड मेकअप शामिल हैं। उनका सॉफ्ट और एफ़र्टलेस लुक आधुनिक महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। उनका यह फैशन एप्रोच 2026 के समर ट्रेंड्स में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है, जो सादगी के साथ ग्लैमर को जोड़ता है।

    वाणी कपूर ने अपने अभिनय, स्टाइल और आत्मविश्वास के दम पर बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री दोनों में एक मजबूत पहचान बनाई है। उनका बढ़ता स्टारडम उन्हें आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

  • पद्म पुरस्कार 2026 में सितारों की चमकेगी शान: धर्मेंद्र, अलका याज्ञनिक, ममूटी और आर माधवन समेत कई नामों को मिलेगा बड़ा सम्मान

    पद्म पुरस्कार 2026 में सितारों की चमकेगी शान: धर्मेंद्र, अलका याज्ञनिक, ममूटी और आर माधवन समेत कई नामों को मिलेगा बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिने जाने वाले पद्म पुरस्कार 2026 को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल बना हुआ है। इस वर्ष आयोजित होने वाले सम्मान समारोह में भारतीय सिनेमा, संगीत और रंगमंच जगत से जुड़ी कई चर्चित और प्रभावशाली हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा। लंबे समय से कला और मनोरंजन की दुनिया में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलाकारों को इस मंच पर सम्मान मिलने जा रहा है, जिसे भारतीय कला जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

    इस वर्ष घोषित पुरस्कारों में कई ऐसे नाम शामिल हैं जिन्होंने दशकों तक अपने अभिनय, संगीत और रचनात्मक कार्यों के जरिए दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। देशभर के कला प्रेमियों के बीच इस बार के पद्म सम्मान को लेकर विशेष उत्सुकता देखने को मिल रही है। सिनेमा और मनोरंजन जगत की लोकप्रिय हस्तियों को इस सूची में शामिल किए जाने से यह आयोजन और अधिक चर्चित हो गया है।

    दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को इस बार मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की घोषणा ने सिनेमा प्रेमियों को भावुक कर दिया है। हिंदी सिनेमा में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने कई यादगार किरदार निभाए और अपनी दमदार अभिनय शैली से दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्मों और स्क्रीन प्रेजेंस ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल किया। यह सम्मान उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान को समर्पित माना जा रहा है।

    दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता ममूटी को भी इस वर्ष बड़े सम्मान के लिए चुना गया है। उन्होंने वर्षों तक अपनी अभिनय क्षमता से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। वहीं अभिनेता आर माधवन का नाम भी इस सूची में शामिल होने से उनके प्रशंसकों में खुशी का माहौल है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में कई अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए खुद को एक बहुमुखी कलाकार के रूप में स्थापित किया है।

    संगीत जगत से जुड़ी प्रसिद्ध गायिका अलका याज्ञनिक को भी इस बार सम्मान मिलने जा रहा है। उनकी आवाज ने कई दशकों तक संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया है। रोमांटिक गीतों से लेकर भावनात्मक प्रस्तुतियों तक उन्होंने अपने गायन से एक अलग पहचान बनाई। वहीं दिवंगत अभिनेता और कॉमेडियन सतीश शाह को मरणोपरांत सम्मान दिए जाने की खबर ने भी लोगों को भावुक कर दिया है। उनकी हास्य शैली और शानदार अभिनय ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बनाया था।

    इसके अलावा थिएटर और टेलीविजन जगत से जुड़े कई अनुभवी कलाकारों को भी इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है। कला जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह पुरस्कार केवल उपलब्धियों का सम्मान नहीं बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तित्वों को दिया गया एक विशेष सम्मान भी है। पद्म पुरस्कार 2026 का यह आयोजन एक बार फिर भारतीय कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई पहचान देने का काम करता नजर आएगा।

  • फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी

    फिल्मी दुनिया में भाषा नहीं, प्रतिभा मायने रखती है: नॉर्थ-साउथ बहस पर बोले बोमन ईरानी


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय से चल रही उत्तर और दक्षिण सिनेमा की बहस पर अभिनेता Boman Irani ने अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा है कि यह चर्चा अब पुरानी और थकाने वाली हो चुकी है। उनके अनुसार, फिल्म इंडस्ट्री में भाषा या क्षेत्रीय पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण कहानी और काम की गुणवत्ता है।

    बोमन ईरानी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन में व्यस्त हैं, जिसमें वह अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसी दौरान एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर देखना सही नहीं है, क्योंकि अंततः यह एक ही देश की रचनात्मक दुनिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब भारतीय हैं” और किसी भी कलाकार की पहचान उसकी प्रतिभा और काम से होनी चाहिए, न कि उसकी भाषा या क्षेत्र से।

    उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भाषाई विविधता बहुत गहरी है और हर कुछ किलोमीटर पर बोली बदल जाती है, लेकिन इससे लोगों के बीच दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार, एक व्यक्ति अलग भाषा बोल सकता है, लेकिन भावनाएं और सिनेमा की आत्मा समान रहती है। यही कारण है कि आज भारतीय फिल्में क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर पूरे देश और दुनिया में सराही जा रही हैं।

    अपनी आने वाली फिल्म का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब ऐसे समय में जब हैदराबाद जैसे शहरों में बनी फिल्में पूरे देश में प्रमोट हो रही हैं और मुंबई जैसे बड़े फिल्म हब में उनका स्वागत हो रहा है, तो यह साफ संकेत है कि इंडस्ट्री धीरे-धीरे एक साझा मंच की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव भारतीय सिनेमा की एकता और विस्तार को दर्शाता है।

    बोमन ईरानी ने अभिनय की गहराई पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि एक अच्छे अभिनेता के लिए भाषा से ज्यादा जरूरी है संवाद के भीतर छिपे भाव और अर्थ को समझना। उनके अनुसार, अभिनय केवल शब्द बोलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उसमें भावनाओं और सोच की गहराई को सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना सबसे अहम है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को पहले अपने विचारों को समझकर अपनी भाषा में तैयार करना चाहिए और फिर उसे पर्दे पर व्यक्त करना चाहिए, ताकि दर्शक उससे जुड़ सकें। उनका मानना है कि अगर भावनाएं सही तरीके से प्रस्तुत की जाएं तो भाषा कभी बाधा नहीं बनती।

    बोमन ईरानी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है और अपनी अलग पहचान बनाई है। कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के किरदारों में उनकी अभिनय क्षमता को दर्शकों ने हमेशा सराहा है। ‘पेड्डी’ में भी उनकी भूमिका को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, जिसमें राम चरण, जान्हवी कपूर और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार भी नजर आएंगे।

  • अकेले फिल्म देखने पर मिलते थे 10 हजार रुपये, फिर भी कोई नहीं जुटा पाया हिम्मत

    अकेले फिल्म देखने पर मिलते थे 10 हजार रुपये, फिर भी कोई नहीं जुटा पाया हिम्मत

    नई दिल्ली ।  बॉलीवुड में जब भी हॉरर फिल्मों की बात होती है, रामसे ब्रदर्स का नाम जरूर लिया जाता है। दो भाइयों की जोड़ी ने बॉलीवुड की बहुत सारी हॉरर फिल्में दीं। रामसे ब्रदर्स की पहली फिल्म हॉरर फिल्म थी दो गज जमीन के नीचे। पर आज हम आपको इस फिल्म के बारे में नहीं बता रहे हैं। हम आपको रामसे ब्रदर्स की उस फिल्म के बारे में बता रहे हैं जो इतनी डरावनी थी कि थिएटर्स के बाहर एंबुलेंस खड़ी रहती थी।
    सिनेमाहॉल के बाहर रहती थी एंबुलेंस
    तुलसी रामसे के बेटे दीपक रामसे ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में बताया कि ये बात सच है कि जब फिल्म रिलीज हुई थी तो सिनेमाहॉल के बाहर एंबुलेंस रहती थी कि अगर कोई बहुत ज्यादा डर जाए फिल्म देखकर तो उसे अस्पताल ले जाया जा सके।

    अकेले देखने वाले को मिलते 10 हजार रुपये

    हिंदी रश से खास बातचीत में दीपक से सवाल हुआ कि क्या ये बात सच है कि रामसे ब्रदर्स की एक ऐसी फिल्म थी जिसके लिए कहा गया था कि अकेले देखने वाले को 10 हजार रुपये मिलेंगे? इसपर दीपक ने हां में जवाब दिया। फिल्म के बारे में बात करते हुए दीपक ने बताया कि जो फिल्म के ट्रायल शोज हुए थे, उसमें फिल्म देखकर बहुत से लोग घबरा गए थे।
    फिल्म की पब्लिसिटी के लिए तुलसी रामसे ने निकाला था ये तोड़
    दीपक ने बताया फिल्म की पब्लिसिटी के लिए तुलसी रामसे का आइडिया था कि एक चैलेंज रखा जाएगा कि जो भी दीवार को सिनेमाघर में अकेले बैठकर देखेगा, उसे 10 हजार रुपये मिलेंगे। दीपक ने बताया कि उन लोगों ने एक एंबुलेस भी हॉल के बाहर रखी थी कि अगर आप देख रहे हैं फिल्म और आप घबरा जाते हैं, और आपको कुछ हो जाता है तो सुरक्षा के लिए एंबुलेंस बाहर रहे। हालांकि, दीपक ने बताया किसी ने भी दरवाजा को अकेले देखने का प्रयास नहीं किया।
    फिल्म में नजर आए थे ये कलाकार
    दरवाजा आज से 48 साल पहले रिलीज हुई थी। इस फिल्म में अनिल धवन, श्यामली, इम्तियाज खान, अंजू महेंद्रू, शक्ति कपूर, त्रिलोक कपूर और कृष्ण धवन जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म को श्याम रामसे और तुलसी रामसे ने डायरेक्ट किया था।दरवाजा अपने समय की सबसे डरावनी फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म का बहुत तगड़ा बज बन गया था और फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई थी। दरवाजा एक क्रिएचर हॉरर फिल्म थी।
  • 50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट

    50 गुना फीस की डिमांड और फिर पलटी बाजी: जब ‘मुगल-ए-आज़म’ के गाने में आया ट्विस्ट


    नई दिल्ली।  भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और ऐतिहासिक फिल्मों में गिनी जाने वाली Mughal-e-Azam सिर्फ अपनी कहानी और भव्य सेट्स के लिए ही नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानियों के लिए भी मशहूर है। इस फिल्म के एक खास गाने को लेकर जो घटनाक्रम हुआ, वह आज भी फिल्म इतिहास में एक प्रेरणादायक किस्सा माना जाता है।

    कहा जाता है कि जब फिल्म में तानसेन की तरह एक शास्त्रीय संगीत आधारित गीत को सलीम और अनारकली पर फिल्माया जाना था, तब सवाल उठा कि इस गाने को आखिर गाएगा कौन। संगीत निर्देशक नौशाद और निर्देशक के. आसिफ ने तय किया कि अगर अतीत में तानसेन ने यह परंपरा निभाई थी, तो आज के दौर में उनकी आत्मा को जीवंत करने के लिए सबसे उपयुक्त आवाज उस्ताद Ustad Bade Ghulam Ali Khan की होगी।

    लेकिन जब टीम उस्ताद साहब के पास पहुंची, तो उन्होंने गाने से साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने पहले कभी फिल्मी गाना नहीं गाया और न ही आगे गाने का इरादा है। उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

    इसके बाद भी के. आसिफ हार नहीं माने। उन्होंने लगातार उस्ताद साहब को मनाने की कोशिश की। इस बीच उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने एक तरह से मजाक या परीक्षा लेते हुए ऐसी फीस मांगी, जो उस समय के हिसाब से सामान्य गायक की फीस से लगभग 50 गुना ज्यादा थी—यानी करीब 25 हजार रुपये, जबकि उस दौर में गायक 400-500 रुपये लेते थे।

    उम्मीद के विपरीत, के. आसिफ ने इस मांग को तुरंत स्वीकार कर लिया और कहा कि “आप अनमोल हैं, कीमत की बात ही नहीं है।” यह सुनकर उस्ताद साहब भी हैरान रह गए और धीरे-धीरे सहमत हो गए।

    हालांकि कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जब रिकॉर्डिंग की बात आई, तो उस्ताद साहब ने शर्त रख दी कि वह गाना तभी गाएंगे जब उन्हें पूरा सीन दिखाया जाएगा, जिस पर यह गीत फिल्माया जाना है। उस समय सीन पूरी तरह तैयार भी नहीं था।

    के. आसिफ ने तुरंत व्यवस्था की और Mughal-e-Azam के सलीम और अनारकली वाले रोमांटिक दृश्य को विशेष रूप से शूट करवाया। दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच फिल्माए गए इस दृश्य को एडिट कर तुरंत उस्ताद साहब को दिखाया गया।

    सीन देखने के बाद उस्ताद साहब प्रभावित हुए और उन्होंने गाना रिकॉर्ड करने के लिए हामी भर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने इस गाने को तीन बार रिकॉर्ड किया ताकि सबसे बेहतरीन वर्जन चुना जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया ने साबित किया कि Mughal-e-Azam सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उस दौर की कलात्मक पराकाष्ठा थी, जिसमें संगीत, अभिनय और निर्देशन तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

    फिल्म के निर्माण में भी भव्यता का कोई मुकाबला नहीं था। देशभर से कारीगर, ज्वेलरी डिजाइनर, टेलर और कलाकार बुलाए गए थे। विशाल युद्ध दृश्यों के लिए हजारों घोड़े, ऊंट और सैनिकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी और भव्य परियोजनाओं में से एक बन गई।

    आज भी जब यह किस्सा दोहराया जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि जुनून, सम्मान और कला के प्रति समर्पण ही किसी रचना को अमर बनाता है।

  • 'बाहुबली 2' का साम्राज्य ध्वस्त, रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' ने रचा इतिहास, अब 'दंगल' के रिकॉर्ड पर महाप्रहार!

    'बाहुबली 2' का साम्राज्य ध्वस्त, रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' ने रचा इतिहास, अब 'दंगल' के रिकॉर्ड पर महाप्रहार!

    नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के इतिहास में आज एक ऐसा अध्याय लिखा गया है जिसने वैश्विक स्तर पर हिंदी सिनेमा की ताकत का लोहा मनवा दिया है। अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की जुगलबंदी से बनी स्पाई एक्शन थ्रिलर ‘धुरंधर द रिवेंज’ ने बॉक्स ऑफिस पर वह कारनामा कर दिखाया है जिसका इंतजार भारतीय फिल्म समीक्षक दशकों से कर रहे थे। फिल्म ने अपनी रिलीज के महज कुछ ही हफ्तों के भीतर महान निर्देशक एसएस राजामौली की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘बाहुबली 2’ के लाइफटाइम वर्ल्डवाइड कलेक्शन के जादुई आंकड़े को पार कर लिया है। इस असाधारण बढ़त के साथ ही अब यह फिल्म दुनिया भर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दूसरी भारतीय फिल्म बन गई है। इस सफलता ने न केवल बॉलीवुड को संजीवनी दी है बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों के बॉक्स ऑफिस वर्चस्व को भी कड़ी चुनौती दी है।

    मार्च के महीने में बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली ‘धुरंधर 2’ की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने अब तक कुल 1788 करोड़ रुपये से अधिक का वैश्विक कारोबार कर लिया है। यह आंकड़ा बाहुबली के कुल संग्रह से थोड़ा अधिक है, जो इसे अब तक की सबसे सफल एक्शन फिल्मों की सूची में शीर्ष पर ले जाता है। अब फिल्म की सीधी टक्कर आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ से है, जिसने चीन के बाजार में अभूतपूर्व प्रदर्शन की बदौलत 2070 करोड़ रुपये का विशाल साम्राज्य खड़ा किया था। हालांकि ‘धुरंधर 2’ अभी इस शिखर से लगभग 282 करोड़ रुपये दूर है, लेकिन जिस तरह की दीवानगी दर्शकों में सातवें हफ्ते के बाद भी देखी जा रही है, उससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि फिल्म जल्द ही इस फासले को भी कम कर देगी।

    फिल्म की इस विराट सफलता के पीछे तीन प्रमुख आधार स्तंभ रहे हैं जिनमें सबसे महत्वपूर्ण इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर का निर्माण और यथार्थवादी कहानी है। बॉलीवुड में अब तक कई जासूसी फिल्में बनी हैं, लेकिन ‘धुरंधर 2’ ने काल्पनिक वीरता के बजाय वास्तविक स्पाई ऑपरेशन और परिष्कृत एक्शन दृश्यों पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने युवाओं और शहरी दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया। फिल्म की कहानी में बुना गया देशप्रेम और गहन रहस्य दर्शकों को अंत तक अपनी सीटों से बांधे रखता है। इसके अलावा रणवीर सिंह के अभिनय ने इस फिल्म में जान फूंक दी है। उन्होंने एक गुप्त एजेंट के रूप में जो शारीरिक रूपांतरण और संजीदगी दिखाई है, उसे उनके करियर का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जा रहा है।

    बाजार के रुख की बात करें तो ‘धुरंधर 2’ ने केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि घरेलू स्तर पर भी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया है। फिल्म ने भारतीय बाजारों में कुल 1362 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है, जबकि विदेशी धरती पर भी इसकी धमक सुनाई दे रही है जहां से लगभग 426 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की गई है। मजबूत माउथ पब्लिसिटी और नकारात्मक चर्चाओं के अभाव ने इसे सिनेमाघरों में लंबे समय तक टिके रहने में मदद की। वर्तमान में यह फिल्म 1790 करोड़ के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है और फिल्म उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फिल्म इसी गति से चलती रही, तो वह दिन दूर नहीं जब यह ‘दंगल’ के सिंहासन को हिलाकर भारतीय सिनेमा की निर्विवाद नंबर एक फिल्म बन जाएगी। कुल मिलाकर यह जीत केवल एक फिल्म की नहीं बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री की है जिसने वैश्विक पटल पर नए मानक स्थापित किए हैं।

  • बेमन स्क्रीन टेस्ट से शुरू हुआ सफर, नरगिस दत्त ने रच दिया भारतीय सिनेमा का इतिहास

    बेमन स्क्रीन टेस्ट से शुरू हुआ सफर, नरगिस दत्त ने रच दिया भारतीय सिनेमा का इतिहास


    नई दिल्ली।
    भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर में कुछ ऐसी हस्तियां हुईं जिन्होंने अपने अभिनय और व्यक्तित्व से इतिहास रच दिया। नरगिस दत्त भी उन्हीं में से एक थीं, जिनकी कहानी केवल एक अभिनेत्री की नहीं बल्कि एक ऐसे सपने की है जो किस्मत के मोड़ पर पूरी तरह बदल गया। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन जीवन की परिस्थितियों और परिवार की इच्छा ने उन्हें सिनेमा की दुनिया की ओर मोड़ दिया।

    नरगिस का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो पहले से ही कला और संगीत की दुनिया से जुड़ा हुआ था। उनकी मां एक प्रतिष्ठित कलाकार थीं और चाहती थीं कि उनकी बेटी भी अभिनय की दुनिया में नाम कमाए। हालांकि नरगिस की रुचि शुरू से ही पढ़ाई और चिकित्सा के क्षेत्र में थी, लेकिन बहुत कम उम्र में ही उन्हें फिल्मों की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।

    मात्र छह साल की उम्र में उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अपने अभिनय जीवन की शुरुआत कर दी थी, लेकिन वह इस रास्ते से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थीं। आगे चलकर एक ऐसा मौका आया जब उन्हें प्रसिद्ध फिल्मकार के सामने स्क्रीन टेस्ट देने के लिए भेजा गया। यह वह क्षण था जिसने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया।

    नरगिस इस टेस्ट को सिर्फ औपचारिकता मानकर गई थीं, क्योंकि उनका मानना था कि शायद उन्हें अस्वीकार कर दिया जाएगा और वे अपने असली सपने की ओर लौट सकेंगी, लेकिन हुआ इसके बिल्कुल विपरीत। उनके अभिनय ने सभी को प्रभावित किया और उन्हें फिल्म में मुख्य भूमिका मिल गई।

    इसके बाद उनका फिल्मी सफर तेजी से आगे बढ़ा और उन्होंने कई यादगार फिल्मों में काम किया। शुरुआती दौर में उन्हें बड़ी सफलता मिली और वह उस समय की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ खूब पसंद की गई और उनकी फिल्मों के गीत आज भी लोगों की यादों में जीवित हैं।

    हालांकि करियर के बीच में उन्हें कुछ असफलताओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कुछ समय बाद उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ आया जब उन्हें एक ऐसी फिल्म में काम करने का अवसर मिला जिसने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने एक मजबूत और संघर्षशील महिला का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने न सिर्फ सराहा बल्कि इतिहास में दर्ज कर दिया।

    इस फिल्म ने न केवल उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाई दी। इसके बाद उनकी छवि एक ऐसी अभिनेत्री की बन गई जो सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि मजबूत अभिनय के लिए भी जानी जाती थी।
    नरगिस दत्त का जीवन केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने समाज सेवा और सार्वजनिक जीवन में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।

    उनके जीवन का सफर यह दर्शाता है कि कभी-कभी सपने बदल भी जाएं तो भी नई दिशा में मिली सफलता उन्हें और बड़ा बना देती है। उनकी कहानी आज भी यह संदेश देती है कि किस्मत भले रास्ता बदल दे, लेकिन मेहनत और प्रतिभा से पहचान हमेशा बनाई जा सकती है।

  • धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ पड़ा भारी! रामायण पर विवादित बयान को लेकर प्रकाश राज पर कानूनी शिकंजा।

    धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ पड़ा भारी! रामायण पर विवादित बयान को लेकर प्रकाश राज पर कानूनी शिकंजा।

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर अपने विवादित बयानों के कारण कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। हाल ही में केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान रामायण के प्रसंगों पर की गई उनकी एक टिप्पणी को लेकर देशभर में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। इस मामले में आंध्र प्रदेश के एक राजनीतिक नेता और तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड के सदस्य भानु प्रकाश ने अभिनेता के विरुद्ध आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभिनेता ने हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं और आस्था को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से मानहानिकारक और आपत्तिजनक बयान दिए हैं।

    पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता ने एक सत्र के दौरान रामायण से प्रेरित एक कहानी सुनाई जो उनके अनुसार बच्चों के थिएटर वर्कशॉप का हिस्सा थी। इस कहानी के वर्णन के दौरान उन्होंने भगवान राम और लक्ष्मण के साथ-साथ रावण के पात्रों का जिक्र करते हुए आधुनिक कर व्यवस्था यानी जीएसटी पर कटाक्ष किया। अभिनेता द्वारा इस पौराणिक कथा को आधुनिक संदर्भों में मजाकिया ढंग से पेश करने के प्रयास को कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भगवान का अपमान माना है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो प्रसारित होने के बाद लोगों ने उनकी कड़ी आलोचना की और इसे सनातन धर्म की मान्यताओं के साथ खिलवाड़ बताया है।

    कानूनी शिकायत दर्ज कराने वाले भानु प्रकाश ने अधिकारियों से मांग की है कि न केवल प्रकाश राज बल्कि उनके ऐसे बयानों का समर्थन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के बयानों का मुख्य उद्देश्य धार्मिक कथाओं को गलत तरीके से पेश करना और समाज में वैमनस्य फैलाना है। इससे पहले भी सोलह अप्रैल को एक वकील द्वारा इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है जिसमें कहा गया था कि धार्मिक मान्यताओं का अपमान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब प्रकाश राज अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं पर इस बार मामला सीधे तौर पर धार्मिक ग्रंथों से जुड़ा होने के कारण काफी गंभीर हो गया है।

    एक तरफ जहां अभिनेता अपनी आगामी बड़ी फिल्मों की तैयारियों में व्यस्त हैं वहीं दूसरी ओर इन कानूनी विवादों ने उनकी पेशेवर छवि को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में प्रकाश राज वाराणसी और स्पिरिट जैसी बहुप्रतीक्षित फिल्मों का हिस्सा हैं जिनमें वे बड़े सितारों के साथ नजर आने वाले हैं। इन विवादों के बीच फिल्म उद्योग के भीतर भी इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की टिप्पणियां करना उचित है। फिलहाल पुलिस प्रशासन शिकायतों की जांच कर रहा है और यह देखना होगा कि इस मामले में कानून क्या रुख अपनाता है।

  • पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    पहलगाम फाइल्स: आतंकी साजिश से लेकर ऑपरेशन सिंदूर की सफलता तक, कैमरे में कैद होगा घाटी का सच।

    नई दिल्ली ।  देश के इतिहास में दर्ज पहलगाम आतंकी हमले की दर्दनाक घटना को लेकर एक बार फिर सिनेमाई जगत में गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस घटना और इसके बाद हुए कथित ऑपरेशन सिंदूर को आधार बनाकर कई फिल्म और वेब सीरीज पर काम किया जा रहा है, जिनकी आधिकारिक घोषणाओं और शुरुआती झलकियों ने दर्शकों की रुचि बढ़ा दी है।
    हालांकि इन प्रोजेक्ट्स की रिलीज को लेकर अभी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है, जिसके चलते दर्शकों को फिलहाल इंतजार करना पड़ सकता है। इस विषय पर आधारित सामग्री को लेकर फिल्म उद्योग में गंभीरता और संवेदनशीलता दोनों ही स्तर पर विचार किया जा रहा है ताकि वास्तविक घटनाओं को संतुलित और जिम्मेदार तरीके से प्रस्तुत किया जा सके।
    सूत्रों के अनुसार पहल ए नेशन यूनाइट्स नामक वेब सीरीज का ऐलान स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किया गया था और इसकी पहली झलक भी जारी की जा चुकी है। यह सीरीज पहलगाम हमले के बाद की परिस्थितियों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इसमें घटनाओं की पृष्ठभूमि और उसके सामाजिक प्रभावों को विस्तार से दिखाने का प्रयास किया जाएगा। टीजर में दिखाई गई प्रस्तुति से यह संकेत मिलता है कि कहानी को एक व्यापक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में पेश किया जाएगा, जिसमें घटनाक्रम के साथ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया है।
    इसके अलावा फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री द्वारा एक फिल्म ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा भी चर्चा में रही है। यह फिल्म एक पुस्तक पर आधारित बताई जा रही है, जिसमें भारत की सीमा पार की गई कथित सैन्य कार्रवाइयों और उनसे जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया गया है। इस परियोजना को एक प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के सहयोग से विकसित किया जा रहा है और इसमें मुख्य भूमिका को लेकर चर्चाएं जारी हैं। हालांकि फिल्म के निर्माण और रिलीज को लेकर आधिकारिक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है, जिससे इसकी प्रगति पर निगाहें बनी हुई हैं।
    निर्माता एकता कपूर भी इसी विषय पर आधारित द टेरर रिपोर्ट नामक फिल्म पर काम कर रही हैं। इसका टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है, जिसमें पहलगाम क्षेत्र और उससे जुड़े घटनाक्रमों की झलक दिखाई गई थी। यह प्रोजेक्ट भी अभी प्रारंभिक या निर्माण चरण में माना जा रहा है और इसकी रिलीज को लेकर कोई निश्चित घोषणा नहीं हुई है। फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील विषयवस्तु पर आधारित परियोजनाओं को तैयार करने में समय अधिक लगता है क्योंकि इसमें ऐतिहासिक और सामाजिक तथ्यों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है।
    इसी बीच इंडिया पाकिस्तान द फाइनल रेजोल्यूशन नामक एक क्षेत्रीय फिल्म भी निर्माणाधीन है, जो पहलगाम घटना के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों और घाटी में रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को दर्शाने का प्रयास करेगी। इस फिल्म की शूटिंग विभिन्न स्थानों पर जारी है और इसके कुछ हिस्से मुंबई में पूरे किए जा चुके हैं, जबकि कश्मीर में शेष हिस्सों की शूटिंग प्रस्तावित है।इन सभी परियोजनाओं के बीच दर्शकों में उत्सुकता तो है, लेकिन साथ ही यह अपेक्षा भी बनी हुई है कि इन विषयों को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जाए, ताकि वास्तविक घटनाओं की गंभीरता और उनके प्रभावों को सही रूप में समझा जा सके।