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  • KGF के रॉकी भाई अब क्यों बना रहे हैं बड़ी फिल्में साई पल्लवी के सवाल पर यश ने खोला अपना दिल और बताया खास मकसद

    KGF के रॉकी भाई अब क्यों बना रहे हैं बड़ी फिल्में साई पल्लवी के सवाल पर यश ने खोला अपना दिल और बताया खास मकसद


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार यश इन दिनों अपनी आने वाली फिल्मों को लेकर चर्चा में हैं। केजीएफ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से देशभर में पहचान बनाने वाले यश अब बड़े स्तर की फिल्मों के जरिए भारतीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। इसी बीच फिल्म रामायण में माता सीता का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री साई पल्लवी ने उनसे उनकी रोमांटिक फिल्मों में वापसी को लेकर सवाल पूछ लिया। यश ने इसका जो जवाब दिया उसने उनके प्रशंसकों का दिल जीत लिया। अभिनेता ने साफ किया कि फिलहाल उनका ध्यान ऐसी बड़ी फिल्मों पर है जो भारतीय और खासकर कन्नड़ सिनेमा की ताकत को दुनिया के सामने पेश कर सकें।

    न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक एक प्रमोशनल कार्यक्रम के दौरान साई पल्लवी ने यश से उनकी पुरानी रोमांटिक फिल्मों को लेकर सवाल किया। अभिनेत्री ने जानना चाहा कि वह छोटे बजट की रोमांटिक लव स्टोरीज में दोबारा कब नजर आएंगे। यश ने जवाब देते हुए कहा कि वह बड़ी फिल्में बनाना चाहते हैं क्योंकि उनके पास ऐसा करने का अवसर है। उनके मुताबिक यह सही समय है जब कन्नड़ सिनेमा दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग और भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से पेश किया जा सकता है। उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि वह अपने करियर को केवल एक सफल अभिनेता तक सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि भारतीय फिल्मों के दायरे को व्यापक बनाने की दिशा में भी काम करना चाहते हैं।

    यश ने अपने करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्मों से की थी और रोमांटिक भूमिकाओं में भी दर्शकों का प्यार हासिल किया। उनकी फिल्म गूगली को काफी पसंद किया गया था। शुरुआती दौर में उन्होंने रोमांस और मनोरंजन से भरपूर कहानियों में अपनी अभिनय क्षमता दिखाई लेकिन साल 2018 में आई केजीएफ चैप्टर 1 ने उनके करियर की दिशा बदल दी। फिल्म में रॉकी भाई के किरदार ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बना दिया। इसके बाद साल 2022 में रिलीज हुई केजीएफ चैप्टर 2 ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया। इन फिल्मों की सफलता के बाद यश केवल कन्नड़ सिनेमा ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के चर्चित सितारों में शामिल हो गए।

    केजीएफ के बाद प्रशंसकों को यश की अगली बड़ी फिल्म का इंतजार था। अब वह गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी फिल्म टॉक्सिक को लेकर चर्चा में रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ कियारा आडवाणी नयनतारा और हुमा कुरैशी जैसे कलाकारों के नाम जुड़े हैं। यश इस परियोजना में अभिनय के साथ निर्माण से भी जुड़े हैं। फिल्म को लेकर बड़े स्तर पर उम्मीदें जताई गईं लेकिन इसकी व्यावसायिक सफलता से जुड़ी खबरों के दावों को आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर ही परखना जरूरी है।

    अब यश नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म रामायण में रावण की भूमिका निभाने जा रहे हैं। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्सुकता है और यश के रावण वाले किरदार को लेकर भी चर्चा हो रही है।

    साई पल्लवी के सवाल पर यश का जवाब उनके करियर की प्राथमिकताओं को सामने लाता है। वह फिलहाल ऐसी फिल्मों पर ध्यान देना चाहते हैं जिनका प्रभाव भारतीय सिनेमा की सीमाओं से आगे तक पहुंचे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वह भविष्य में रोमांटिक फिल्मों में वापसी नहीं करेंगे। फिलहाल उनके प्रशंसकों की निगाहें रामायण और उनकी आगामी परियोजनाओं पर टिकी हैं।

  • रातोंरात मिली शोहरत ने रजनीकांत को पहुंचाया अस्पताल, फिर फिल्मों से बनाई दूरी, शादी कर बदली जिंदगी

    रातोंरात मिली शोहरत ने रजनीकांत को पहुंचाया अस्पताल, फिर फिल्मों से बनाई दूरी, शादी कर बदली जिंदगी


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में सुपरस्टार का दर्जा हासिल करने वाले रजनीकांत की जिंदगी जितनी शानदार दिखाई देती है उसके पीछे संघर्ष और दबाव की एक लंबी कहानी भी है। आज करोड़ों प्रशंसकों के दिलों पर राज करने वाले रजनीकांत ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1975 में फिल्म अपूर्व रागंगल से की थी। उनका फिल्मी दुनिया से कोई पारिवारिक जुड़ाव नहीं था। उन्होंने अपनी मेहनत और अभिनय के दम पर पहचान बनाई और देखते ही देखते इंडस्ट्री के बड़े सितारों में शामिल हो गए। हालांकि तेजी से मिली सफलता और स्टारडम को संभालना उनके लिए आसान नहीं रहा। एक समय ऐसा भी आया जब काम के अत्यधिक दबाव ने उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया।
    करियर के शुरुआती दौर में रजनीकांत ने सफलता हासिल करने के लिए दिन-रात मेहनत की। उस समय वह एक साल में 10 से 15 फिल्मों तक में काम कर रहे थे। लगातार शूटिंग और व्यस्त कार्यक्रम के बीच उन्हें आराम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता था। वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते थे और इसके लिए लगातार काम कर रहे थे। लेकिन इतनी कम उम्र में मिली शोहरत और बड़ी जिम्मेदारियों का दबाव धीरे-धीरे बढ़ता गया। एक ओर उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था तो दूसरी ओर उनके लिए इस नई जिंदगी के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल होता जा रहा था।
    रजनीकांत ने खुद एक इंटरव्यू में इस दौर के बारे में खुलकर बात की थी। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1988 में इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह स्टारडम का दबाव झेल नहीं पाए थे। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा था कि कुछ साल पहले तक वह बस कंडक्टर के तौर पर 320 रुपये कमाते थे और फिर अचानक एक फिल्म के लिए उन्हें पांच लाख रुपये मिलने लगे। कम समय में जिंदगी में आया यह बड़ा बदलाव उनके लिए आसान नहीं था। पैसा शोहरत और लगातार काम के दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था।
    रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 1981 में मानसिक दबाव के कारण उनकी तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यह घटना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। इस अनुभव ने उन्हें अपनी व्यस्त दिनचर्या और काम करने के तरीके पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने महसूस किया कि सफलता हासिल करने के साथ-साथ अपनी सेहत और निजी जिंदगी पर ध्यान देना भी जरूरी है।
    अस्पताल में भर्ती होने के बाद रजनीकांत ने अपने काम करने के तरीके में बदलाव करना शुरू किया। उन्होंने पहले की तुलना में कम फिल्में करनी शुरू कर दीं ताकि काम का दबाव कम हो सके। इसके साथ ही उनकी निजी जिंदगी में भी बड़ा बदलाव आया। कुछ समय बाद उन्होंने लता रंगाचारी से शादी कर घर बसाया। दोनों की पहली मुलाकात एक इंटरव्यू के दौरान हुई थी। लता अपनी कॉलेज मैगजीन के लिए रजनीकांत का इंटरव्यू लेने पहुंची थीं। यह मुलाकात आगे चलकर रिश्ते में बदल गई।
    फिल्मों की संख्या कम करने के बावजूद रजनीकांत की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1980 के आसपास वह एक फिल्म के लिए करीब 25 लाख रुपये तक फीस लेने लगे थे। यह उस समय के लिहाज से बड़ी रकम थी। उनकी कहानी बताती है कि तेजी से मिलने वाली सफलता के साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी बढ़ सकते हैं। रजनीकांत ने अपने अनुभव से काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को समझा और अपनी जिंदगी की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव किए।
  • जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा

    जावेद अख्तर ने फिल्म इंडस्ट्री को घेरने वालों को दिया जवाब, बोले समाज जैसा होगा सिनेमा भी वैसा ही बनेगा


    नई दिल्ली। जावेद अख्तर अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं और इस बार उन्होंने फिल्मों में बढ़ती बोल्डनेस और वल्गर गानों को लेकर अपनी बात रखी है। फिल्म इंडस्ट्री पर अश्लील या आपत्तिजनक गाने बनाने के आरोप लगाने वालों को जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि सिनेमा समाज से अलग नहीं है। उनके मुताबिक जिस तरह का समाज होगा उसी तरह का मनोरंजन भी देखने को मिलेगा। उन्होंने इस बहस का जिम्मेदार केवल फिल्म इंडस्ट्री को मानने के बजाय दर्शकों की पसंद पर भी सवाल उठाया।

    एक इंटरव्यू के दौरान जावेद अख्तर से सवाल किया गया कि सिनेमा अक्सर यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से क्यों बचता है कि जब समाज सुधरेगा तब अच्छा कंटेंट बनेगा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने सिनेमा की तुलना समाज की नब्ज से की। उन्होंने कहा कि अगर शरीर में बुखार है तो नब्ज में भी उसका असर दिखाई देगा। इसी तरह समाज में जिस तरह की प्रवृत्तियां मौजूद होंगी उनका असर फिल्मों और मनोरंजन की दुनिया में भी नजर आएगा।

    जावेद अख्तर ने अपनी बात समझाने के लिए पुराने दौर की फिल्मों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इसी समाज में दो बीघा जमीन बंदिनी सुजाता हीरा मोती और मदर इंडिया जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ था। इन फिल्मों को दर्शकों ने पसंद भी किया। ऐसे में उनके मुताबिक सवाल यह होना चाहिए कि उसी समाज में समय के साथ ऐसी फिल्मों की जगह कुछ अलग तरह के कंटेंट ने कैसे बना ली।

    बोल्ड गानों को लेकर उन्होंने खास तौर पर दर्शकों की भूमिका पर सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी विवादित या अश्लील गाने को बनाने में केवल एक व्यक्ति शामिल नहीं होता। उसे लिखने से लेकर संगीत तैयार करने गाने उसे फिल्माने और रिलीज करने तक कई लोग जुड़े होते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर कुछ लोग ऐसा कंटेंट तैयार करते हैं तो समस्या उतनी बड़ी नहीं है लेकिन जब करोड़ों लोग उसी कंटेंट को पसंद करके उसे सुपरहिट बना देते हैं तब सवाल समाज की पसंद पर उठता है।

    जावेद अख्तर ने चोली के पीछे क्या है जैसे चर्चित गाने का उदाहरण देते हुए पूछा कि ऐसे गानों को फिल्म इंडस्ट्री अकेले हिट नहीं करा सकती। दर्शकों की पसंद और प्रतिक्रिया ही किसी गाने को लोकप्रिय बनाती है। उनके मुताबिक अगर दर्शक ऐसे कंटेंट को स्वीकार नहीं करेंगे तो उसे बनाने वालों के लिए भी उसे बार बार पेश करने की वजह कम हो जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि दर्शकों की पसंद का असर गंभीर और अच्छे सिनेमा पर भी पड़ता है। जावेद अख्तर ने मशहूर फिल्ममेकर श्याम बेनेगल का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने शानदार और विचारोत्तेजक फिल्में बनाईं लेकिन सवाल यह है कि कितने दर्शकों ने उन्हें देखा और बड़े स्तर पर सफल बनाया।

    जावेद अख्तर की इस टिप्पणी ने एक बार फिर सिनेमा और समाज के रिश्ते को लेकर बहस शुरू कर दी है। उनका कहना है कि फिल्मों में बदलाव की चर्चा करते समय केवल कलाकारों और निर्माताओं को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। दर्शकों की पसंद भी तय करती है कि आने वाले समय में सिनेमा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • 2500 रुपये से शुरू हुआ था सफर 91 की उम्र में भी याद किए जाते हैं प्रेम चोपड़ा जानिए खलनायक बनने की दिलचस्प कहानी

    2500 रुपये से शुरू हुआ था सफर 91 की उम्र में भी याद किए जाते हैं प्रेम चोपड़ा जानिए खलनायक बनने की दिलचस्प कहानी


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिनकी पहचान उनके किरदारों से आगे बढ़कर उनकी आवाज और संवादों से भी जुड़ गई। प्रेम चोपड़ा ऐसे ही दिग्गज कलाकार हैं जिन्होंने पर्दे पर खलनायक के किरदारों को एक अलग पहचान दी। 23 सितंबर 1935 को लाहौर में जन्मे प्रेम चोपड़ा अपना 91वां जन्मदिन मना रहे हैं। फिल्मों में उन्होंने भले ही कई तरह के किरदार निभाए लेकिन नकारात्मक भूमिकाओं ने उन्हें दर्शकों के बीच ऐसी पहचान दिलाई जिसे आज भी याद किया जाता है। हालांकि बॉलीवुड तक पहुंचने की उनकी राह आसान नहीं थी। वह मुंबई हीरो बनने का सपना लेकर पहुंचे थे लेकिन शुरुआत एक अखबार की नौकरी से करनी पड़ी।

    प्रेम चोपड़ा का बचपन शिमला में बीता। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। उनके पिता चाहते थे कि बेटा डॉक्टर या आईएएस अधिकारी बने लेकिन प्रेम चोपड़ा का मन अभिनय की दुनिया में था। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं है। आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने एक अखबार के सर्कुलेशन विभाग में नौकरी शुरू कर दी। इस नौकरी के दौरान उन्हें बंगाल उड़ीसा और बिहार जैसे इलाकों में अखबार के वितरण का काम देखना पड़ता था। उनके काम में लगातार यात्राएं शामिल थीं और महीने के करीब 20 दिन उन्हें दौरे पर रहना पड़ता था।

    अभिनेता बनने का सपना हालांकि उन्होंने नौकरी के बीच भी नहीं छोड़ा। वह अपने दौरे जल्द पूरा करने की कोशिश करते थे ताकि मुंबई लौटकर फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगा सकें। इसी संघर्ष के दौरान उनकी किस्मत ने एक दिन नया मोड़ लिया। ट्रेन में सफर करते समय एक पंजाबी फिल्म निर्माता की नजर उन पर पड़ी। निर्माता को प्रेम चोपड़ा का व्यक्तित्व पसंद आया और उन्हें फिल्म चौधरी करनैल सिंह में काम करने का मौका मिल गया। यह उनकी पहली फिल्म थी और बताया जाता है कि इसके लिए उन्हें 2500 रुपये मिले थे। फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला और प्रेम चोपड़ा के अभिनय सफर की शुरुआत हो गई।

    हिंदी फिल्मों में उनका डेब्यू 1960 में मुड़ मुड़ के ना देख से हुआ। शुरुआती दौर में वह मुख्य रूप से अभिनेता के तौर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश करते रहे। इसके बाद 1964 में आई फिल्म वो कौन थी में उन्होंने नकारात्मक किरदार निभाया। फिल्म सफल रही और उनके अभिनय पर दर्शकों तथा फिल्म जगत की नजर गई। इसके बाद शहीद तीसरी मंजिल मेरा साया और उपकार जैसी फिल्मों में उनके खलनायक वाले किरदार सामने आए। उपकार के बाद प्रेम चोपड़ा को लगातार काम मिलने लगा और उन्हें महसूस हुआ कि अब वह मुंबई में अपनी जगह बना चुके हैं।

    उनके करियर का सबसे यादगार पड़ाव 1973 में आई राज कपूर की फिल्म बॉबी रही। फिल्म में उनका किरदार बहुत बड़ा नहीं था लेकिन एक छोटा सा संवाद उनकी पहचान का स्थायी हिस्सा बन गया। संवाद था प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा। फिल्म रिलीज होने के बाद यह संवाद इतना लोकप्रिय हुआ कि प्रेम चोपड़ा का नाम ही इसके साथ जुड़ गया। आगे चलकर यही संवाद उनकी आत्मकथा के शीर्षक का हिस्सा भी बना।

    प्रेम चोपड़ा ने अपने लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों में काम किया और अलग अलग तरह के किरदार निभाए। हालांकि दर्शकों की याद में उनकी खलनायक वाली छवि सबसे ज्यादा मजबूत रही। उनकी खास संवाद अदायगी और पर्दे पर प्रभावशाली मौजूदगी ने उन्हें हिंदी सिनेमा के यादगार कलाकारों में शामिल कर दिया। 91वें जन्मदिन पर उनके जीवन का यह सफर बताता है कि मुंबई में एक नौकरी करते हुए शुरू हुआ संघर्ष कैसे भारतीय सिनेमा की एक स्थायी पहचान में बदल गया।

  • 2026 के आखिरी 3 महीने होंगे धमाकेदार 13 बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट आई सामने 24 दिसंबर को किंग

    2026 के आखिरी 3 महीने होंगे धमाकेदार 13 बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट आई सामने 24 दिसंबर को किंग


    नई दिल्ली। साल 2026 अपने आखिरी पड़ाव की ओर बढ़ रहा है और इसके साथ ही सिनेमाघरों में फिल्मों की रिलीज का सिलसिला भी तेज होने वाला है। सितंबर से दिसंबर तक कई ऐसी फिल्में दर्शकों के बीच पहुंचने वाली हैं जिनका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है। अलग अलग भाषाओं और अलग अलग जॉनर की इन फिल्मों में बड़े सितारों से लेकर चर्चित निर्देशकों तक की मौजूदगी है। यही वजह है कि आने वाले महीनों को थिएटर लवर्स के लिए बेहद खास माना जा रहा है।

    सितंबर के आखिरी सप्ताह में ही फिल्मों की बड़ी लाइनअप देखने को मिलेगी। 24 सितंबर को नानी की द पैराडाइज रिलीज होने वाली है। श्रीकांत ओडेला के निर्देशन में बनी यह एक्शन पीरियड ड्रामा है जिसमें नानी के साथ मोहन बाबू और सोनाली कुलकर्णी नजर आएंगे। इसी तारीख को हॉलीवुड फिल्म हार्ट ऑफ द बीस्ट भी रिलीज होगी। डेविड आयर के निर्देशन में बनी इस सर्वाइवल थ्रिलर में ब्रैड पिट एक पूर्व नेवी सील अधिकारी की भूमिका में हैं जो अपने मिलिट्री डॉग के साथ अलास्का के जंगलों में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करता है।

    24 सितंबर को ही महाकाव्य श्री रामायण कथा श्री राम की भी सिनेमाघरों में दस्तक देगी। यह पौराणिक और भक्ति से जुड़ी फिल्म है जिसमें अंजलि अरोड़ा और देव शर्मा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इसके अगले दिन 25 सितंबर को डोरोथी और द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट रिलीज होंगी। डोरोथी को कार्तिक सुब्बाराज ने निर्देशित किया है जबकि द वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया अहम भूमिकाओं में हैं।

    अक्टूबर में भी दर्शकों के पास कई विकल्प होंगे। 2 अक्टूबर को दृश्यम द कन्क्लूजन रिलीज होने वाली है जिसमें अजय देवगन के साथ श्रिया सरन और इशिता दत्ता नजर आएंगी। इसके अलावा बेल भी इसी दिन रिलीज होगी। इसके बाद 15 अक्टूबर को जेलर 2 आने वाली है जिसमें ऋतिक रोशन विजय सेतुपति और मोहनलाल जैसे कलाकार नजर आएंगे। 16 अक्टूबर को विश्वंभरा और रणबाली की रिलीज प्रस्तावित है। विश्वंभरा में चिरंजीवी और मौनी रॉय प्रमुख भूमिकाओं में हैं जबकि रणबाली में विजय देवरकोंडा रश्मिका मंदाना और अर्नोल्ड वोस्लो दिखाई देंगे।

    नवंबर में फिल्मों का इंतजार और दिलचस्प होने वाला है। 6 नवंबर को नितेश तिवारी की रामायण रिलीज होगी। फिल्म में रणबीर कपूर श्रीराम साई पल्लवी सीता यश रावण और सनी देओल हनुमान की भूमिका में नजर आएंगे। इसी दिन सीन भी रिलीज होगी जिसमें सूर्या सिलंबरासन टीआर और नस्लेन अहम भूमिकाओं में हैं। इसके बाद 27 नवंबर को रश्मिका मंदाना की माइसा रिलीज होगी जिसमें अभिनेत्री योद्धा के किरदार में दिखाई देंगी।

    दिसंबर में भी बड़ी फिल्मों की मौजूदगी रहेगी। 3 दिसंबर को प्रभास की फौजी रिलीज होगी। हनु राघवपुडी के निर्देशन में बनी यह युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी है। 4 दिसंबर को ईथा रिलीज होगी जो मराठी तमाशा और प्रसिद्ध लावणी कलाकार विठाबाई नारायणगावकर के जीवन से जुड़ी कहानी पर आधारित है। श्रद्धा कपूर और रणदीप हुड्डा इसमें प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

    इन सभी फिल्मों के बीच साल की सबसे चर्चित रिलीज में शाहरुख खान की किंग भी शामिल है। यह फिल्म 24 दिसंबर को सिनेमाघरों में आने वाली है। इसमें शाहरुख खान के साथ सुहाना खान दीपिका पादुकोण और अभिषेक बच्चन जैसे कलाकार नजर आएंगे। सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है। इस तरह सितंबर से दिसंबर तक लगातार आने वाली फिल्मों की यह लंबी सूची साल के अंतिम महीनों को सिनेमाघरों के लिहाज से खास बना सकती है।

  • अल्लू अर्जुन और एटली की राका का बड़ा धमाका रिलीज से पहले 37 लोगों के मोशन कैप्चर का बनाया रिकॉर्ड

    अल्लू अर्जुन और एटली की राका का बड़ा धमाका रिलीज से पहले 37 लोगों के मोशन कैप्चर का बनाया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। अल्लू अर्जुन और डायरेक्टर एटली की मच अवेटेड फिल्म राका रिलीज से पहले ही बड़ी उपलब्धि हासिल कर चुकी है। फिल्म को लेकर पहले से ही दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद इसकी चर्चा और तेज हो गई है। राका ने रियल टाइम में सबसे ज्यादा लोगों के मोशन कैप्चर का रिकॉर्ड बनाया है। इस उपलब्धि के तहत एक साथ 37 परफॉर्मर्स के मोशन को कैप्चर किया गया।

    फिल्म के निर्माताओं सन पिक्चर्स ने सोशल मीडिया के जरिए इस खास उपलब्धि की जानकारी साझा की। पोस्ट में अल्लू अर्जुन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट हाथ में लिए नजर आए। मेकर्स ने इस उपलब्धि को भारतीय सिनेमा के लिए वैश्विक स्तर पर बड़ी जीत बताया। खास बात यह है कि यह रिकॉर्ड सिर्फ फिल्म की टीम के लिए ही नहीं बल्कि इसके तकनीकी स्तर और बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे प्रोजेक्ट की ओर भी इशारा करता है।

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक रियल टाइम में सबसे ज्यादा लोगों का मोशन कैप्चर करने का यह रिकॉर्ड 15 सितंबर को मुंबई में बनाया गया। इस दौरान कुल 37 लोगों को एक साथ मोशन कैप्चर तकनीक के जरिए रिकॉर्ड किया गया। यह उपलब्धि सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड और अरुणकुमार यानी एटली से जुड़ी है और इसे अल्लू अर्जुन की फिल्म राका के लिए अंजाम दिया गया। रिकॉर्ड बनने के बाद अल्लू अर्जुन और एटली को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का सर्टिफिकेट भी मिला।

    राका को लेकर दर्शकों की उत्सुकता फिल्म की पहली झलक सामने आने के बाद से ही बढ़ गई थी। इसी साल अप्रैल में फिल्म का फर्स्ट लुक सामने आया था जिसमें अल्लू अर्जुन का बिल्कुल अलग अंदाज देखने को मिला। अभिनेता के लुक में उनके चेहरे पर काजल और जानवर जैसे पंजे नजर आए थे। उनका यह रूप सामने आते ही सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया था। फिल्म के फर्स्ट लुक ने संकेत दे दिया था कि एटली इस बार दर्शकों के सामने कुछ अलग और बड़े पैमाने का सिनेमाई अनुभव पेश करने की तैयारी में हैं।

    राका एटली के लिए भी बेहद खास प्रोजेक्ट है। निर्देशक ने फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया था कि यह उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है बल्कि उनके जीवन और रचनात्मक सफर का एक हिस्सा है। उनके मुताबिक वह इस विचार को करीब 18 वर्षों से अपने साथ लेकर चल रहे हैं और उन्होंने इसे समय के साथ लगातार संजोकर रखा है। एटली ने यह भी संकेत दिया था कि राका उनके लिए केवल एक कहानी नहीं बल्कि लंबे समय से चले आ रहे एक सपने की शुरुआत है।

    अल्लू अर्जुन और एटली पहली बार साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में दोनों की जोड़ी को लेकर पहले से ही काफी उम्मीदें हैं। अब रिलीज से पहले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलने से फिल्म के प्रति उत्सुकता और बढ़ गई है। फिल्म की कहानी और किरदारों से जुड़ी कई जानकारियां अभी सामने आना बाकी हैं लेकिन तकनीकी स्तर पर यह प्रोजेक्ट लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। रिकॉर्ड बनने के बाद अब दर्शकों की नजर फिल्म की रिलीज और इसके अगले अपडेट पर टिकी है।

  • महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म

    महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म


    नई दिल्ली। मराठी सिनेमा की फिल्म गोंधल ने 2027 में होने वाले 99वें अकादमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में जगह बनाई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा गोंधल के इर्द गिर्द बुनी गई है। फिल्म के ऑस्कर तक पहुंचने के बाद अब महाराष्ट्र की इस लोक परंपरा को लेकर भी देशभर में उत्सुकता बढ़ गई है।

    गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है जिसमें भक्ति गीत संगीत नृत्य और देवी देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस रस्म को आमतौर पर गोंधली समुदाय के लोग करते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य के जरिए देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। गोंधल का आयोजन खास तौर पर रात के समय होने वाले धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। महाराष्ट्र में शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी इस परंपरा का आयोजन किया जाता है।

    गोंधल के दौरान ढोल सहित कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। तुंतुणे और धातु से बने वाद्य भी इसकी प्रस्तुति का हिस्सा होते हैं। कई आयोजनों में मशाल या दीपक की रोशनी के बीच कलाकार गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं। पूरी रस्म भक्ति और सामूहिक सहभागिता के माहौल में आगे बढ़ती है और अंत में आरती के साथ इसका समापन होता है।

    महाराष्ट्र में गोंधल का महत्व केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जाता। यह लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक जीवन का भी हिस्सा रहा है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ जुटते हैं और पूजा पाठ के साथ रातभर भक्ति संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उनके अनुसार यह ऐसा सामुदायिक आयोजन रहा है जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और उत्सव का हिस्सा बनते थे।

    निर्देशक संतोष दावखर ने अपने बचपन के अनुभवों से प्रेरणा लेकर गोंधल को फिल्म की कहानी का केंद्र बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात के समय होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है। इसमें इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। शादी के बाद सुमन एक अमीर परिवार में अपनी जिंदगी से परेशान नजर आती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।

    इसके बाद कहानी में रिश्तों के बदलते समीकरण सामने आते हैं। विश्वास और धोखे के बीच घटनाएं आगे बढ़ती हैं और मामला हत्या की साजिश तक पहुंचता है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बल्कि कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आता है।

    अब फिल्म के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की राह पर है। गोंधल फिल्म के माध्यम से इस परंपरा को केवल धार्मिक रस्म के रूप में नहीं बल्कि महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और सामुदायिक विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखने का अवसर मिलेगा।

  • 200 करोड़ कमाने वाली ‘हनुमान अंश’ ऑस्कर की रेस से बाहर डेडलाइन चूकी टीम ने खुद बताई वजह

    200 करोड़ कमाने वाली ‘हनुमान अंश’ ऑस्कर की रेस से बाहर डेडलाइन चूकी टीम ने खुद बताई वजह


    नई दिल्ली। नीम करोली बाबा की भक्ति और हनुमान जी से जुड़ी कहानी पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ इस समय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। बेहद कम बजट में बनी इस फिल्म ने दर्शकों के बीच ऐसी पकड़ बनाई है कि इसकी कमाई 200 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुकी है। करीब छह सप्ताह से सिनेमाघरों में बनी हुई फिल्म को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच फिल्म के ऑस्कर की रेस में शामिल न हो पाने को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है।

    फिल्म की प्रोड्यूसर नम्रता सिंह ने हाल ही में बातचीत के दौरान बताया कि ‘हनुमान अंश’ के पास ऑस्कर के लिए सबमिट होने का मौका था लेकिन टीम तय समय सीमा का ध्यान नहीं रख सकी। उनके मुताबिक फिल्म को ऑस्कर के लिए भेजने की आखिरी तारीख 7 सितंबर थी लेकिन उनकी टीम को इस डेडलाइन की जानकारी नहीं थी। जब फिल्म की सफलता के बीच लोगों ने उनसे सवाल किया कि आखिर इतनी चर्चा में रहने वाली फिल्म ऑस्कर के लिए क्यों नहीं भेजी गई तो उन्होंने इस चूक के बारे में खुलकर बात की।

    नम्रता सिंह ने बताया कि उनकी टीम काफी छोटी है और एक साथ कई जिम्मेदारियां संभाल रही थी। फिल्म की सफलता के बाद अब उसका तेलुगू वर्जन तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा दूसरी भाषाओं में रिलीज की तैयारी भी चल रही है। टीम फिल्म को दिव्यांग दर्शकों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। ऐसे में ऑस्कर सबमिशन की अहम डेडलाइन पर पर्याप्त ध्यान नहीं जा सका।

    फिल्म के कलाकार और निर्देशक भी अलग अलग जगहों पर प्रचार और अन्य जरूरी कामों में व्यस्त हैं। इसी वजह से प्रोडक्शन ऑफिस में भी पूरी टीम मौजूद नहीं थी। नम्रता के लिए यह अनुभव इसलिए भी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि ‘हनुमान अंश’ उनके प्रोड्यूसर के तौर पर शुरुआती बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक है। फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी भी पहली बार इस तरह की बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

    फिल्म को दुनियाभर में रिलीज करना भी टीम के लिए आसान नहीं रहा। अलग अलग देशों में फिल्म रिलीज करने के लिए कई तरह की प्रक्रियाओं और नियमों को पूरा करना पड़ा। सेंसर से जुड़े काम और विदेशी बाजार में रिलीज की तैयारियों के दौरान टीम ने कई चीजें पहली बार सीखीं। इसके बावजूद फिल्म को इंटरनेशनल स्तर पर पहुंचाने की कोशिश जारी रही।

    टीम के लिए 11 सितंबर की तारीख भी बेहद खास रही क्योंकि इसी दिन नीम करोली बाबा का महासमाधि दिवस मनाया जाता है। फिल्म के मेकर्स बाबा के भक्त हैं और इसी वजह से वे इस खास दिन फिल्म को विदेशों में भी रिलीज करना चाहते थे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए टीम ने पूरी ताकत लगा दी और फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में काम किया।

    अब ‘हनुमान अंश’ की कहानी को आगे बढ़ाने की तैयारी भी शुरू हो गई है। प्रोड्यूसर नम्रता सिंह के मुताबिक फिल्म पर आधारित एक वीडियो गेम बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इसे वही कंपनी तैयार कर रही है जिसने लोकप्रिय गेम FAU-G बनाया है। इसके अलावा फिल्म की कहानी को कॉमिक बुक के रूप में भी आगे बढ़ाने की तैयारी है और इसके लिए एक बड़े कॉमिक पब्लिशर से बातचीत चल रही है।

    फिल्म के दूसरे पार्ट ‘हनुमान अंश 2’ को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इसके साथ विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के कैमियो को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं हालांकि मेकर्स ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में ऑस्कर का मौका भले ही हाथ से निकल गया हो लेकिन ‘हनुमान अंश’ की कहानी अब फिल्म से आगे गेम कॉमिक और संभावित सीक्वल के जरिए एक बड़े संसार का रूप लेती नजर आ रही है।

  • 97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां

    97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसे नाम हैं जो सिर्फ अपनी अभिनय प्रतिभा ही नहीं, बल्कि अपनी सोच, व्यक्तित्व और जीवन जीने के अंदाज के लिए भी याद किए जाते हैं। दिग्गज अभिनेत्री और नृत्यांगना जोहरा सहगल ऐसा ही एक नाम हैं। करीब आठ दशकों तक कला जगत में सक्रिय रहीं जोहरा सहगल ने अपने शानदार अभिनय, ऊर्जा और बेबाक बयानों से करोड़ों लोगों का दिल जीता।

    जोहरा सहगल का जन्म वर्ष 1912 में हुआ था और उन्होंने भारतीय रंगमंच, सिनेमा तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल थीं जिन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    अपने जीवन के अंतिम वर्षों तक भी जोहरा सहगल की ऊर्जा और सकारात्मक सोच लोगों को प्रेरित करती रही। 97 वर्ष की आयु में दिए गए एक चर्चित इंटरव्यू में उनसे उनकी जिंदादिली और खुशमिजाज व्यक्तित्व का राज पूछा गया था। इस दौरान उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि जीवन में हास्य और प्यार की भावना व्यक्ति को हमेशा युवा बनाए रखती है। उनके इस बेबाक जवाब ने उस समय खूब सुर्खियां बटोरी थीं और सोशल मीडिया से लेकर समाचार जगत तक चर्चा का विषय बन गया था।

    जोहरा सहगल सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थीं। उन्होंने लगभग 14 वर्षों तक थिएटर की दुनिया में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अभिनय का सफर कई यादगार फिल्मों और टीवी धारावाहिकों से होकर गुजरा। उन्होंने ‘नीचा नगर’, ‘अफसर’, ‘दिल से’, ‘चीनी कम’ और ‘सांवरिया’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। इसके अलावा कई लोकप्रिय टीवी कार्यक्रमों में भी उनकी उपस्थिति दर्शकों को खूब पसंद आई।

    सम्मानों की बात करें तो जोहरा सहगल को भारतीय कला और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री, कालिदास सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया।

    उनकी निजी जिंदगी भी किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं थी। कला के प्रति लगाव ने उन्हें प्रसिद्ध नृत्य निर्देशक उदय शंकर के दल तक पहुंचाया, जहां उनकी मुलाकात कामेश्वर सहगल से हुई। उम्र के अंतर और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों ने प्रेम विवाह किया और जीवनभर एक-दूसरे का साथ निभाया।

    आज भले ही जोहरा सहगल हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी मुस्कान और जिंदगी को खुलकर जीने का उनका संदेश आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।

  • Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    Vaani Kapoor का जलवा, फिल्मों से लेकर स्टाइल तक हर जगह छाई एक्ट्रेस

    नई दिल्ली । बॉलीवुड की ग्लैमरस और टैलेंटेड अभिनेत्रियों में शुमार वाणी कपूर ने अपनी खूबसूरती, स्टाइल और आत्मविश्वास से इंडस्ट्री में खास पहचान बनाई है। उनकी आकर्षक पर्सनैलिटी और फैशन सेंस उन्हें युवा दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाते हैं।

    वाणी कपूर ने अपने करियर की शुरुआत यशराज फिल्म्स की फिल्म “Shuddh Desi Romance” से की थी, जहां उनकी सहज अभिनय शैली को काफी सराहा गया। इसके बाद उन्होंने “Befikre”, “War”, “Bell Bottom”, “Chandigarh Kare Aashiqui” और “Khel Khel Mein” जैसी फिल्मों में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई। उन्होंने साबित किया कि वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में भी खुद को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकती हैं।

    फैशन इंडस्ट्री में भी मजबूत पकड़
    वाणी कपूर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फैशन इंडस्ट्री में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। कई बड़े फैशन ब्रांड्स के लिए रैंप वॉक करने के साथ-साथ वह ग्लोबल फैशन इवेंट्स और मैगजीन कवर पर भी नजर आ चुकी हैं। उनका एलिगेंट लुक, सादगी और कॉन्फिडेंस उन्हें एक स्टाइल आइकन बनाता है। फैशन विशेषज्ञ उन्हें उन चुनिंदा भारतीय अभिनेत्रियों में शामिल करते हैं जो ग्लोबल ट्रेंड्स को बेहद सहजता से अपनाती हैं और उन्हें अपने अंदाज में पेश करती हैं।

    स्टाइल और पर्सनैलिटी बनी पहचान
    वाणी कपूर का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट उनका मॉडर्न और एलिगेंट फैशन सेंस है। उनका स्टाइल कम्फर्ट और ग्लैमर का संतुलन पेश करता है, जो आज की युवा पीढ़ी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। वे अक्सर हल्के रंगों, मिनिमल ज्वेलरी और नैचुरल मेकअप लुक में नजर आती हैं, जो उनकी सादगी और आत्मविश्वास को और भी निखारता है। उनका यह स्टाइल उन्हें बॉलीवुड की सबसे फैशनेबल अभिनेत्रियों में शामिल करता है।

    कैरियर का अगला पड़ाव
    वर्तमान में वाणी कपूर कई नए फिल्म और डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं। उनके करियर का यह चरण और भी रोमांचक माना जा रहा है क्योंकि वे लगातार अपनी अभिनय क्षमता और स्क्रीन प्रेजेंस को निखार रही हैं। फिटनेस के प्रति उनका समर्पण और लगातार बदलता फैशन स्टेटमेंट उन्हें नई पीढ़ी की प्रभावशाली अभिनेत्रियों में मजबूत स्थान दिलाता है।

    समर फैशन में वाणी कपूर का असर
    इस समर सीजन में वाणी कपूर के स्टाइल से प्रेरित फैशन ट्रेंड्स में पेस्टल को-ऑर्ड सेट्स, फ्लोई मैक्सी ड्रेसेज़, लिनेन आउटफिट्स, मिनिमल ज्वेलरी और न्यूड मेकअप शामिल हैं। उनका सॉफ्ट और एफ़र्टलेस लुक आधुनिक महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। उनका यह फैशन एप्रोच 2026 के समर ट्रेंड्स में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है, जो सादगी के साथ ग्लैमर को जोड़ता है।

    वाणी कपूर ने अपने अभिनय, स्टाइल और आत्मविश्वास के दम पर बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री दोनों में एक मजबूत पहचान बनाई है। उनका बढ़ता स्टारडम उन्हें आने वाले वर्षों में और भी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।