Tag: Indian Cinema

  • ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी

    ल्प लॉ के फाइनल ईयर में पहली फिल्म 700 रुपए फीस से शुरू हुई फारूख शेख की प्रेरक कहानी


    नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिन्होंने अपने अभिनय और सादगी से एक अलग पहचान बनाई उन्हीं में से एक थे फारूख शेख जिनका जन्म 25 मार्च 1948 को गुजरात के सूरत जिले के अमरोली में हुआ था अपने करियर की शुरुआत उन्होंने एक ऐसे समय में की जब सिनेमा में समानांतर सिनेमा की एक नई धारा आकार ले रही थी और फारूख शेख इस धारा के प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे

    फारूख शेख की शिक्षा मुंबई में हुई उन्होंने सेंट मैरी स्कूल से स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सेंट जेवियर कॉलेज में दाखिला लिया और फिर सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की डिग्री प्राप्त की यह दिलचस्प है कि वे लॉ के फाइनल ईयर में पढ़ रहे थे जब उन्हें अपनी पहली फिल्म में काम करने का मौका मिला

    उनकी पहली फिल्म गर्म हवाथी जिसे निर्देशक एमएस सथ्यू ने बनाया था इस फिल्म को भारतीय न्यू वेव सिनेमा की एक महत्वपूर्ण फिल्म माना जाता है इस्मत चुगताई की कहानी पर आधारित यह फिल्म विभाजन के बाद के दौर में एक मुस्लिम परिवार के संघर्ष और पहचान के संकट को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है इस फिल्म में उनके साथ बलराज साहनी जैसे दिग्गज कलाकार थे और इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र सात सौ पचास रुपये की फीस मिली थी

    गर्म हवाके बाद फारूख शेख ने पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने शतरंज के खिलाड़ीजैसी फिल्म में सत्यजीत रे के निर्देशन में काम किया जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई इसके बाद गमनमें उनका अभिनय बेहद प्रभावशाली रहा जिसमें उन्होंने एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई जो मुंबई में संघर्ष करता है और अंततः अपने घर वापस नहीं लौट पाता यह किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है

    फारूख शेख केवल एक अभिनेता ही नहीं बल्कि एक बेहतरीन एंकर भी थे उन्होंने रेडियो पर क्विज शो होस्ट किए और दूरदर्शन के कार्यक्रम युवा दर्शनऔर यंग वर्ल्डके माध्यम से घर घर में लोकप्रियता हासिल की उनकी मधुर आवाज और सादगी भरा अंदाज दर्शकों को बेहद पसंद आता था

    उनकी फिल्मों में नूरीचश्मे बुद्दूरकथासाथ साथकिसी से न कहनारंग बिरंगीएक पलअंजुमनफासलेऔर बाजारजैसी कई यादगार फिल्में शामिल हैं इनमें चश्मे बुद्दूरको खासतौर पर दर्शकों ने बहुत पसंद किया और यह उनकी सबसे लोकप्रिय फिल्मों में से एक बन गई

    फारूख शेख का फिल्मी करियर 1977 से 1989 तक सक्रिय रहा इसके बाद उन्होंने टेलीविजन में काम करना शुरू किया और 1988 से 2000 तक टीवी पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई बाद में 2008 में उन्होंने एक बार फिर फिल्मों में वापसी की और लाहौरये जवानी है दीवानीशंघाईऔर क्लब 60जैसी फिल्मों में काम करके अपनी प्रतिभा का परिचय दिया

    अपने पूरे करियर में फारूख शेख ने जिस तरह के किरदार निभाए वे यथार्थ के बेहद करीब थे और उन्होंने अपने अभिनय से सिनेमा को एक नई दिशा दी 28 दिसंबर 2013 को दुबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया लेकिन उनके अभिनय और सादगी की छाप आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा है

  • भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता

    भारतीय सिनेमा का गौरव: ‘बूंग’ फिल्म ने BAFTA 2026 में चिल्ड्रन्स एंड फैमिली कैटेगरी में धमाकेदार सफलता


    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल आया है, जब लक्ष्मीप्रिया देवी की फिल्म बूंग ने BAFTA फिल्म अवार्ड्स 2026 में सर्वश्रेष्ठ चिल्ड्रन्स एंड फैमिली फिल्म का पुरस्कार जीता। सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी और बूंग की पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई दी।

    बूंग की सफलता भारतीय सिनेमा की विविधता और सार्थक कहानी कहने की परंपरा को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का प्रतीक है। यह पुरस्कार न केवल फिल्म के निर्माता और कलाकारों के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि भारतीय फिल्म उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सराहना को भी दर्शाता है।

    आपको बता दें कि बूंग की यात्रा 2023 में शुरू हुई थी। फिल्म को वर्क इन प्रोग्रेस लैब और फिल्म बाजार रिकमेंड्स के तहत फिल्म बाजार में पेश किया गया था। यह पहल होनहार फिल्म निर्माताओं को आगे बढ़ाने और उन्हें वैश्विक उद्योग से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। इसके बाद फिल्म को 2024 में 55वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित किया गया, जहां इसे सर्वश्रेष्ठ डेब्यू डायरेक्टर कैटेगरी में चुना गया। इस सफलता ने फिल्म को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समालोचक प्रशंसा दिलाई और इसकी पहचान पक्की की।

    सूचना और प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन में सहयोग करने वाले विभिन्न प्लेटफॉर्म्स की भी सराहना की। फिल्म बाजार, वर्क इन प्रोग्रेस लैब और भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जैसे प्लेटफॉर्म फिल्म निर्माताओं को वैश्विक दर्शकों से जोड़ते हैं और रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देते हैं। इस प्रकार बूंग ने न केवल अपने कंटेंट के दम पर नाम कमाया बल्कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच को भी मजबूती दी।

    फिल्म के निर्माता लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा कि यह पुरस्कार उनकी पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बूंग की कहानी बच्चों और परिवारों को जोड़ने के साथ-साथ जीवन के सकारात्मक संदेश देती है। इस पुरस्कार से भारतीय सिनेमा की नई और विविध कथाओं को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बूंग जैसी फिल्मों की सफलता यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म उद्योग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक दर्शकों के लिए उच्च गुणवत्ता, भावनात्मक गहराई और सांस्कृतिक मूल्य भी पेश कर सकता है। इस उपलब्धि से फिल्म निर्माताओं में नए प्रोजेक्ट्स और नवाचार के लिए प्रेरणा मिलेगी।

  • मंथन: जब 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये जोड़कर बनाई देश की पहली 'क्राउड फंडेड' फ़िल्म, कान्स तक गूंजी थी सफलता

    मंथन: जब 5 लाख किसानों ने 2-2 रुपये जोड़कर बनाई देश की पहली 'क्राउड फंडेड' फ़िल्म, कान्स तक गूंजी थी सफलता


    मुंबई। अक्सर फ़िल्मों के बजट करोड़ों में होते हैं और उनके पीछे बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हाथ होता है, लेकिन 1976 में एक ऐसी फ़िल्म आई जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी फ़िल्म ‘मंथन’ भारतीय सिनेमा की वह क्रांतिकारी फ़िल्म है, जिसे किसी फ़ाइनेंसर ने नहीं बल्कि गुजरात के 5 लाख किसानों ने अपने दो-दो रुपये के चंदे से बनाया था। करीब 10 लाख रुपये के बजट में तैयार हुई यह फ़िल्म भारत की पहली ‘क्राउड फंडेड’ फ़िल्म कहलाई, जिसकी शुरुआत में गर्व से लिखा गया गुजरात के 5 लाख किसान इस फ़िल्म को प्रस्तुत कर रहे हैं।

    श्वेत क्रांति की वह अनकही दास्तान फ़िल्म की कहानी गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन और डॉ. वर्गीज कुरियन के ‘श्वेत क्रांति’ के संघर्ष पर आधारित थी। विजय तेंदुलकर और श्याम बेनेगल द्वारा लिखित यह कहानी एक ऐसे समाज को दिखाती है जहाँ गरीब किसान डेयरी मालिकों के शोषण और जाति प्रथा की बेड़ियों में जकड़े हुए थे। फ़िल्म में गिरीश कर्नाड ने डॉ. राव डॉ. कुरियन से प्रेरित का किरदार निभाया, जो गाँव में सहकारिता का अलख जगाने पहुँचते हैं। वहीं, दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल ने ‘बिंदु’ नामक एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी ग्रामीण महिला का किरदार निभाकर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।

    कलाकारों का दिग्गज जमावड़ा और नेशनल अवॉर्ड का सफर ‘मंथन’ केवल अपनी फंडिंग के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जबरदस्त स्टारकास्ट के लिए भी जानी जाती है। नसीरुद्दीन शाह, कुलभूषण खरबंदा और अमरीश पुरी जैसे मंझे हुए कलाकारों ने इस फ़िल्म को जीवंत बना दिया। इस फ़िल्म की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उस साल इसने दो नेशनल अवॉर्ड अपने नाम किए बेस्ट फीचर फ़िल्म और बेस्ट स्क्रीनप्ले। प्रीति सागर के गाने मेरो गाम काठा पारे ने न केवल फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड जीता, बल्कि यह आज भी अमूल के विज्ञापनों की पहचान बना हुआ है।

    48 साल बाद भी कायम है चमक मई 2024 में इस फ़िल्म ने तब एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं, जब इसकी रिलीज के 48 साल पूरे होने पर इसे प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया। यह इस बात का प्रमाण है कि किसानों के छोटे से सहयोग से शुरू हुई यह यात्रा आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक है। ‘मंथन’ आज भी हमें याद दिलाती है कि यदि नीयत साफ़ हो और उद्देश्य नेक, तो जनता का छोटा-सा चंदा भी इतिहास रचने की ताकत रखता है।

  • प्रियंका चोपड़ा–महेश बाबू की पहली फिल्म ‘वाराणसी’ की रिलीज डेट अनाउंस, एसएस राजामौली ने जारी किया भव्य पोस्टर

    प्रियंका चोपड़ा–महेश बाबू की पहली फिल्म ‘वाराणसी’ की रिलीज डेट अनाउंस, एसएस राजामौली ने जारी किया भव्य पोस्टर


    नई दिल्ली । बाहुबली और आरआरआर जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली एक बार फिर दर्शकों को भव्य सिनेमाई अनुभव देने के लिए तैयार हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म वाराणसी की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। राजामौली ने सोशल मीडिया पर फिल्म का दमदार पोस्टर शेयर करते हुए लिखा Varanasi 7 अप्रैल, 2027। इसके साथ ही फिल्म को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

    फिल्म वाराणसी को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी स्टारकास्ट को लेकर है। इस फिल्म के जरिए पहली बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा और साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। दोनों की यह फ्रेश और पैन इंडिया जोड़ी दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है। वहीं, जब किसी प्रोजेक्ट से एसएस राजामौली का नाम जुड़ता है, तो उससे उम्मीदें अपने आप ही कई गुना बढ़ जाती हैं।

    7 अप्रैल 2027 की रिलीज डेट को भी खास रणनीति के तहत चुना गया है। फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, इस तारीख को उगादी और गुड़ी पड़वा का पर्व है। इसके बाद 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती और 15 अप्रैल को राम नवमी की छुट्टी पड़ेगी। लगातार त्योहारों और छुट्टियों के चलते फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर लंबा और मजबूत ओपनिंग वीक मिलने की पूरी संभावना है, जो इसकी कमाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    वाराणसी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का एक बड़ा कारण इसका टीजर भी है, जो पहले ही रिलीज किया जा चुका है। 3 मिनट 40 सेकंड के इस टीजर ने अपनी भव्य विजुअल्स और रहस्यमयी कहानी से लोगों का ध्यान खींचा है। टीजर की शुरुआत 512 ईस्वी की वाराणसी से होती है, जहां प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक माहौल की झलक देखने को मिलती है। इसके बाद एक एस्टेरॉइड के धरती से टकराने का दृश्य कहानी को अलग ही दिशा देता है।

    टीजर में अंटार्कटिका और अफ्रीका के जंगलों के दृश्य यह संकेत देते हैं कि फिल्म की कहानी ग्लोबल स्तर पर फैली हुई है। इसके बाद कहानी लंका नगरम पहुंचती है, जहां हनुमान जी, प्रभु श्रीराम और वानर सेना का रावण से युद्ध दिखाया गया है। पौराणिक और आधुनिक तत्वों का यह संगम फिल्म को और भी खास बनाता है।

    टीजर का सबसे प्रभावशाली दृश्य वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलता है, जहां महेश बाबू बैल पर सवार होकर त्रिशूल लिए नजर आते हैं। यह सीन न सिर्फ विजुअली भव्य है, बल्कि उनके किरदार की शक्ति और गंभीरता को भी दर्शाता है। प्रियंका चोपड़ा की झलक भले ही सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।

    कुल मिलाकर, वाराणसी एक फिल्म नहीं बल्कि एक मेगा सिनेमाई इवेंट के रूप में सामने आ रही है। अब दर्शकों को 7 अप्रैल 2027 का बेसब्री से इंतजार है, जब एसएस राजामौली एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास रचने उतरेंगे।
    बाहुबली और आरआरआर जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली एक बार फिर दर्शकों को भव्य सिनेमाई अनुभव देने के लिए तैयार हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म वाराणसी की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। राजामौली ने सोशल मीडिया पर फिल्म का दमदार पोस्टर शेयर करते हुए लिखा Varanasi 7 अप्रैल, 2027। इसके साथ ही फिल्म को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

    फिल्म वाराणसी को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी स्टारकास्ट को लेकर है। इस फिल्म के जरिए पहली बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा और साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। दोनों की यह फ्रेश और पैन इंडिया जोड़ी दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है। वहीं, जब किसी प्रोजेक्ट से एसएस राजामौली का नाम जुड़ता है, तो उससे उम्मीदें अपने आप ही कई गुना बढ़ जाती हैं।

    7 अप्रैल 2027 की रिलीज डेट को भी खास रणनीति के तहत चुना गया है। फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, इस तारीख को उगादी और गुड़ी पड़वा का पर्व है। इसके बाद 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती और 15 अप्रैल को राम नवमी की छुट्टी पड़ेगी। लगातार त्योहारों और छुट्टियों के चलते फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर लंबा और मजबूत ओपनिंग वीक मिलने की पूरी संभावना है, जो इसकी कमाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    वाराणसी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का एक बड़ा कारण इसका टीजर भी है, जो पहले ही रिलीज किया जा चुका है। 3 मिनट 40 सेकंड के इस टीजर ने अपनी भव्य विजुअल्स और रहस्यमयी कहानी से लोगों का ध्यान खींचा है। टीजर की शुरुआत 512 ईस्वी की वाराणसी से होती है, जहां प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक माहौल की झलक देखने को मिलती है। इसके बाद एक एस्टेरॉइड के धरती से टकराने का दृश्य कहानी को अलग ही दिशा देता है।

    टीजर में अंटार्कटिका और अफ्रीका के जंगलों के दृश्य यह संकेत देते हैं कि फिल्म की कहानी ग्लोबल स्तर पर फैली हुई है। इसके बाद कहानी लंका नगरम पहुंचती है, जहां हनुमान जी, प्रभु श्रीराम और वानर सेना का रावण से युद्ध दिखाया गया है। पौराणिक और आधुनिक तत्वों का यह संगम फिल्म को और भी खास बनाता है।

    टीजर का सबसे प्रभावशाली दृश्य वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलता है, जहां महेश बाबू बैल पर सवार होकर त्रिशूल लिए नजर आते हैं। यह सीन न सिर्फ विजुअली भव्य है, बल्कि उनके किरदार की शक्ति और गंभीरता को भी दर्शाता है। प्रियंका चोपड़ा की झलक भले ही सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।

    कुल मिलाकर, वाराणसी एक फिल्म नहीं बल्कि एक मेगा सिनेमाई इवेंट के रूप में सामने आ रही है। अब दर्शकों को 7 अप्रैल 2027 का बेसब्री से इंतजार है, जब एसएस राजामौली एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास रचने उतरेंगे।

  • तू या मैं जैसी फिल्में सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं बल्कि एक पूरा अनुभव हैं आदर्श गौरव

    तू या मैं जैसी फिल्में सिर्फ परफॉर्मेंस नहीं बल्कि एक पूरा अनुभव हैं आदर्श गौरव


    नई दिल्ली।बाफ्टा नॉमिनेटेड अभिनेता आदर्श गौरव जल्द ही निर्देशक बिजॉय नांबियार की फिल्म तू या मैं में नजर आने वाले हैं अभिनेता ने इस फिल्म में काम करने के अनुभव को बेहद खास बताया और कहा कि ऐसी फिल्में सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि एक संपूर्ण अनुभव बन जाती हैं

    आदर्श गौरव ने कहा कि वह हमेशा ऐसी फिल्मों की ओर आकर्षित होते हैं जो नए विचार नई दुनिया और भावनाओं को एक साथ जोड़ती हैं उनके अनुसार तू या मैं जैसी फिल्में केवल एक्टिंग का माध्यम नहीं होतीं बल्कि कलाकार और दर्शक दोनों को एक अलग मानसिक और भावनात्मक यात्रा पर ले जाती हैंअभिनेता ने बताया कि उन्हें मजबूत स्क्रिप्ट और नई सोच वाली कहानियां सबसे ज्यादा प्रेरित करती हैं वह ऐसे प्रोजेक्ट चुनते हैं जो जॉनर फॉर्म और स्टोरीटेलिंग के स्तर पर प्रयोग करने का अवसर दें उनके लिए एक कलाकार के रूप में आगे बढ़ना और खुद को चुनौती देना सबसे जरूरी है

    तू या मैं फिल्म का निर्देशन बिजॉय नांबियार ने किया है और इसे आनंद एल राय ने प्रोड्यूस किया है फिल्म में आदर्श गौरव के साथ अभिनेत्री शनाया कपूर मुख्य भूमिका में नजर आएंगी यह फिल्म कलर येलो बैनर के तहत बनाई गई है और प्यार तथा सर्वाइवल की कहानी को नए नजरिए से प्रस्तुत करती है इस फिल्म के सह निर्माता हिमांशु शर्मा विनोद भानुशाली और कमलेश भानुशाली हैं फिल्म 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है

    आदर्श गौरव का मानना है कि इस तरह की फिल्में कलाकार को अलग सोचने और अभिनय को नए दृष्टिकोण से देखने का मौका देती हैं उन्होंने कहा कि क्रिएटिव ग्रोथ उनके लिए बेहद रोमांचक है और यही वजह है कि वह ऐसे प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना पसंद करते हैंआदर्श गौरव ने फिल्म के साथ साथ टेलीविजन और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है उन्होंने बचपन में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रशिक्षण भी लिया था और अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी फिल्म माई नेम इज खान में उन्होंने शाहरुख खान के बचपन का किरदार निभाया था

    उन्हें प्राइम वीडियो की चर्चित सीरीज मेड इन हेवन में बलराम मेनन के किरदार से व्यापक पहचान मिली इसके बाद फिल्म द व्हाइट टाइगर में बलराम हलवाई के मुख्य किरदार ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई इस फिल्म में उनके अभिनय की दुनियाभर में सराहना हुई द व्हाइट टाइगर में शानदार प्रदर्शन के लिए आदर्श गौरव को बाफ्टा अवॉर्ड में बेस्ट लीड एक्टर और इंडिपेंडेंट स्पिरिट अवॉर्ड में बेस्ट मेल लीड एक्टर के लिए नामांकन मिला आज वह उन चुनिंदा भारतीय कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है

  • रिपब्लिक डे रिलीज फिल्मों में भी Border 2 का शानदार प्रदर्शन

    रिपब्लिक डे रिलीज फिल्मों में भी Border 2 का शानदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली।बॉक्स ऑफिस पर Border 2 का प्रदर्शन शानदार साबित हो रहा है। फिल्म के फैंस को इसका बेसब्री से इंतजार था। Border 2 साल 1997 में आई फिल्म Border का सीक्वल है। पहले दिन फिल्म ने देशभर में 28.79 करोड़ की कमाई की और साल 2025 की सबसे बड़ी हिट फिल्म धुरंधर के ओपनिंग डे के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। धुरंधर ने पहले दिन 28 करोड़ की कमाई की थी।सिर्फ धुरंधर ही नहीं Border 2 ने पुराने बॉर्डर का भी रिकॉर्ड तोड़ा है। 1997 में रिलीज हुई Border ने पहले दिन केवल 1.10 करोड़ की कमाई की थी। Border 2 पहले ही दिन पुराने बॉर्डर के भारत में टोटल कलेक्शन के करीब पहुंच गई है। अगर फिल्म इसी रफ्तार से कमाई करती रही तो यह अपने सीक्वल से बॉर्डर के भारत में लाइफटाइम कलेक्शन को भी पार कर सकती है।

    Border 2 ने पिछले तीन सालों में रिपब्लिक डे पर रिलीज हुई बड़ी फिल्मों के ओपनिंग डे कलेक्शन को भी पीछे छोड़ दिया। 2025 में रिलीज हुई स्काई फोर्स ने 11.25 करोड़, 2024 में फाइटर ने 22.5 करोड़ और 2023 में पठान ने 57 करोड़ कमाए थे। Border 2 ने इन सभी फिल्मों को चुनौती दी और पहले दिन 28.79 करोड़ के साथ अपना धमाकेदार रिकॉर्ड बनाया।फिल्म में सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहना शेट्टी ने मुख्य भूमिका निभाई है। आलोचकों और दर्शकों के रिव्यू में वरुण धवन की परफॉर्मेंस को खास तौर पर सराहा जा रहा है। सनी देओल की जबरदस्त अदाकारी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म के प्रति अच्छा रिस्पॉन्स देखने को मिल रहा है।

    Box Office रिपोर्ट्स के मुताबिक Border 2 की शुरुआत इतनी जोरदार रही है कि यह फिल्म आने वाले दिनों में और भी रिकॉर्ड्स तोड़ सकती है। पहले दिन की कमाई ने यह साफ कर दिया कि यह फिल्म साल की बड़ी हिट बनने की दिशा में है।अगर Border 2 अगले कुछ दिनों में इसी तरह प्रदर्शन करती रही तो यह ना केवल पुराने Border के रिकॉर्ड को पार करेगी बल्कि भारतीय सिनेमा में सीक्वल फिल्मों की ताकत को भी साबित करेगी।

  • गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा की झांकी, संजय लीला भंसाली को मिली जिम्मेदारी

    गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा की झांकी, संजय लीला भंसाली को मिली जिम्मेदारी


    नई दिल्ली।गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली झांकियां हर वर्ष भारत की सांस्कृतिक विविधता इतिहास और रचनात्मक शक्ति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा को मिलने वाला सम्मान खास तौर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मशहूर फिल्म निर्देशक और निर्माता संजय लीला भंसाली द्वारा भारतीय सिनेमा पर आधारित विशेष झांकी की प्रस्तुति की जाएगी जिसे फिल्म इंडस्ट्री ने गौरव का क्षण बताया है।

    इस अवसर पर इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर आभार व्यक्त किया है। पत्र में संस्था ने कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग इस बात से गर्व महसूस कर रहा है कि संजय लीला भंसाली जैसे प्रतिष्ठित निर्देशक को गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। भंसाली कर्तव्य पथ पर सदाबहार और ऐतिहासिक फिल्मों से प्रेरित एक विशेष झांकी प्रस्तुत करेंगे।आईएफटीडीए ने संजय लीला भंसाली को भारतीय सिनेमा का शोमैन और मास्टर ऑफ क्राफ्ट बताते हुए कहा कि उनकी फिल्मों की भव्यता, दृश्य सौंदर्य, संगीत और भावनात्मक गहराई ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय मंच पर उनकी सिनेमाई यात्रा से प्रेरित झांकी का प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

    पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि यह झांकी दर्शकों के लिए यादगार अनुभव होगी। इससे न केवल परेड देखने वाले लोगों का मनोरंजन बढ़ेगा, बल्कि परेड में शामिल प्रतिभागियों के भीतर भी नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होगा। भारतीय सिनेमा की यह प्रस्तुति देश की सांस्कृतिक शक्ति और रचनात्मक विरासत को और मजबूती से सामने लाएगी।

    संस्था ने इस पहल के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन एनएफडीसी का भी आभार जताया। पत्र में कहा गया कि इन संस्थानों के सहयोग से ही भारतीय सिनेमा को राष्ट्रीय मंच पर इस तरह प्रस्तुत करने का अवसर संभव हो पाया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकार भारतीय सिनेमा को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देखती है।

    आईएफटीडीए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है। गणतंत्र दिवस जैसे ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सिनेमा को यह स्थान देना फिल्म जगत के लिए सम्मान की बात है और इसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण के रूप में देखा जाएगा।

  • IFFK विवाद पर शशि थरूर का तीखा हमला: फिल्मों पर रोक से भारत की वैश्विक छवि को खतरा

    IFFK विवाद पर शशि थरूर का तीखा हमला: फिल्मों पर रोक से भारत की वैश्विक छवि को खतरा

    तिरुवनंतपुरम।केरल में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल IFFK से जुड़ा विवाद लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा कई फिल्मों को स्क्रीनिंग की अनुमति न देने के फैसले पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को न केवल दुर्भाग्यपूर्ण बताया बल्कि यह भी कहा कि ऐसे कदम भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    मीडिया से बातचीत के दौरान शशि थरूर ने कहा कि भारत में सिनेमा और रचनात्मक स्वतंत्रता की एक समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि देश में गोवा और केरल जैसे राज्यों में वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म फेस्टिवल आयोजित होते रहे हैं जिन्हें दुनियाभर में सम्मान की नजर से देखा जाता है। ऐसे में फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगाना न केवल कलाकारों के साथ अन्याय है बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान पर भी सवाल खड़े करता है।थरूर ने कहा यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हमारे देश में सिनेमाई संस्कृति का हमेशा सम्मान किया गया है। लेकिन आज स्थिति यह है कि फिल्मों की एक सूची को सीमित कर दिया गया है और कुछ फिल्मों को बिना ठोस वजह के रोका जा रहा है। किसी भी फिल्म को इस तरह से नहीं रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जिन फिल्मों को बैन किया गया या जिन्हें मंजूरी नहीं दी गई उनके पीछे दिए गए कारण अक्सर हास्यास्पद रहे हैं।

    कांग्रेस सांसद ने नौकरशाही की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ज्यादा समझदारी और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए क्योंकि ऐसे फैसलों का असर केवल एक फेस्टिवल तक सीमित नहीं रहता। थरूर के मुताबिक जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की रचनात्मक स्वतंत्रता पर सवाल उठते हैं तो इससे देश की छवि को गंभीर नुकसान होता है।इससे पहले सोशल मीडिया पर भी शशि थरूर ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि तिरुवनंतपुरम में आयोजित केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली 19 फिल्मों को केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न दिए जाने से एक अजीब और अनावश्यक विवाद खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि यह फैसला कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ है।

    केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि केरल सरकार ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने साफ शब्दों में कहा कि IFFK में तय फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति न देना अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे रचनात्मक स्वतंत्रता पर सीधा हमला बताया और कहा कि इस तरह के कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि फिल्म फेस्टिवल में लगाई गई सेंसरशिप मौजूदा केंद्र सरकार के तानाशाही रवैये को दर्शाती है। उनके मुताबिक यह सरकार देश में विरोध की आवाजों और अलग-अलग रचनात्मक अभिव्यक्तियों को दबाने की कोशिश कर रही है। पिनाराई विजयन ने यह भी स्पष्ट किया कि जागरूक केरल ऐसे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

    राज्य सरकार ने यह ऐलान किया है कि जिन फिल्मों को केंद्र सरकार ने अनुमति नहीं दी थी उन्हें फिर भी फेस्टिवल में दिखाया जाएगा। केरल सरकार का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है बल्कि यह समाज के सवालों विचारों और सच्चाइयों को सामने लाने का एक सशक्त जरिया है। IFFK से जुड़ा यह विवाद अब केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केंद्र और राज्य के रिश्तों और भारत की सांस्कृतिक पहचान जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ गया है। शशि थरूर और केरल सरकार के बयानों के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मामला और गहराने वाला है।

  • ऑस्कर 2026 की दौड़ में भारत की मजबूत दस्तक, नीरज घेवन की ‘होमबाउंड’ ने रचा इतिहास

    ऑस्कर 2026 की दौड़ में भारत की मजबूत दस्तक, नीरज घेवन की ‘होमबाउंड’ ने रचा इतिहास


    नई दिल्ली/भारतीय सिनेमा के लिए यह पल गर्व और उत्साह से भरा हुआ है। मशहूर फिल्ममेकर नीरज घेवन की फिल्म होमबाउंड ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ऑस्कर 2026 की बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की शॉर्टलिस्ट में अपनी जगह पक्की कर ली है। 98वें अकादमी अवॉर्ड्स के लिए भेजी गई 86 देशों की आधिकारिक एंट्री में से चयनित होकर होमबाउंड अब उन 15 फिल्मों में शामिल हो गई है, जो फाइनल नॉमिनेशन की रेस में हैं। यह उपलब्धि न सिर्फ फिल्म की टीम के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बेहद खास मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में भारतीय फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और होमबाउंड इस परंपरा को और आगे बढ़ाती नजर आ रही है।

    अकादमी की आधिकारिक घोषणा

    अकादमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज AMPAS ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी की शॉर्टलिस्ट जारी की। अकादमी के अनुसार, इस साल 86 देशों और क्षेत्रों की फिल्मों को इस श्रेणी में पात्र माना गया था। शुरुआती वोटिंग प्रक्रिया के बाद 15 फिल्मों को अगले राउंड के लिए चुना गया है। अब अकादमी के सभी ब्रांच के सदस्य इन फिल्मों को देखेंगे और वोटिंग के जरिए अंतिम नॉमिनेशन तय किए जाएंगे।

    होमबाउंड की कहानी और अभिनय की ताकत

    होमबाउंड एक गहरी और भावनात्मक कहानी को पर्दे पर उतारती है। फिल्म दो बचपन के दोस्तों-शोएब और चंदन-के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनका सपना पुलिस फोर्स में भर्ती होकर अपनी जिंदगी को एक नई दिशा देना है। हालात, सामाजिक दबाव और निजी संघर्ष उनकी दोस्ती और फैसलों की परीक्षा लेते हैं।फिल्म में ईशान खट्टर और विशाल जेठवा ने दमदार अभिनय किया है, जबकि जान्हवी कपूर का किरदार कहानी में भावनात्मक संतुलन और संवेदनशीलता जोड़ता है। नीरज घेवन की निर्देशन शैली कहानी को यथार्थ और मानवीय बनाती है, जो दर्शकों को गहराई से जोड़ती है।
    अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल्स में पहले ही मिली पहचान
    होमबाउंड का प्रीमियर कान्स फिल्म फेस्टिवल 2025 के प्रतिष्ठित Un Certain Regard सेक्शन में हुआ था। वहां फिल्म को आलोचकों और दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल TIFF में भी फिल्म को खास सराहना मिली और यह इंटरनेशनल ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड में सेकेंड रनर-अप रही। इन उपलब्धियों ने फिल्म को ऑस्कर रेस में पहले से ही एक मजबूत दावेदार बना दिया था।

    प्रोडक्शन टीम की खुशी और जश्न

    फिल्म को धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रोड्यूस किया गया है।करण जौहर आदर पूनावाला और अपूर्व मेहता इसके निर्माता हैं।वहीं मार्टिन स्कॉर्सेसी और प्रवीन खैरनार जैसे दिग्गज नाम एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर केतौर पर इससे जुड़े हैं।शॉर्टलिस्ट में जगह मिलने के बाद धर्मा प्रोडक्शंस ने सोशल मीडिया के जरिए इस सफलता पर खुशी जताई और दुनिया भर से मिले प्यार के लिए आभार व्यक्त किया।
    भारतीय सिनेमा के लिए नया मील का पत्थर
    ऑस्कर 2026 की शॉर्टलिस्ट में पहुंचना अपने आप में एक बड़ी जीत है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या होमबाउंड फाइनल नॉमिनेशन में जगह बना पाएगी। अगर ऐसा होता है, तो यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ देगी।