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  • 2027 वर्ल्ड कप पर रोहित शर्मा का बड़ा इशारा, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर को लेकर दिया दिलचस्प जवाब

    2027 वर्ल्ड कप पर रोहित शर्मा का बड़ा इशारा, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर को लेकर दिया दिलचस्प जवाब


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज रोहित शर्मा एक बार फिर अपने मजेदार अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनके बयान की वजह साल 2027 में होने वाला वनडे वर्ल्ड कप है। रोहित शर्मा ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह 2027 वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं इसलिए उन्हें भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल को खुश रखना होगा। उनके इस बयान ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींच लिया है। रोहित ने यह टिप्पणी उस समय की जब उनसे शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर में से किसी एक को चुनने के लिए कहा गया। अपने चुटीले जवाब से उन्होंने वहां मौजूद लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया।

    दरअसल फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा कार्यक्रम के दौरान पूर्व भारतीय कप्तान से एक दिलचस्प सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि अगर उन्हें किसी आपात स्थिति में मदद के लिए फोन करना हो तो वह श्रेयस अय्यर और शुभमन गिल में से किसे कॉल करेंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए रोहित ने कहा कि दोनों ही भारतीय टीम के कप्तान हैं। शुभमन गिल फिलहाल उनके कप्तान हैं और वह 2027 वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं इसलिए उन्हें गिल को खुश रखना होगा। इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर 2027 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करनी पड़ी तो उन्हें श्रेयस अय्यर को भी खुश रखना होगा। रोहित ने कहा कि उन्हें दोनों की जरूरत है।

    रोहित शर्मा का यह जवाब भले ही मजाकिया अंदाज में दिया गया हो लेकिन इससे उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि उनके इस बयान को टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। रोहित ने 2024 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद इस प्रारूप से संन्यास लेने का फैसला किया था। इसके बाद उन्होंने अपना ध्यान वनडे और टेस्ट क्रिकेट पर केंद्रित किया। अब 2027 वनडे वर्ल्ड कप को लेकर उनकी दिलचस्पी ने प्रशंसकों के बीच नई उम्मीदें जगा दी हैं।

    रोहित शर्मा की हालिया फॉर्म भी भारतीय क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में उन्होंने 225 रन बनाए और भारतीय बल्लेबाजों में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे। उनके प्रदर्शन ने दिखाया कि वह अब भी बड़े मुकाबलों में अपनी बल्लेबाजी से टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि प्रशंसक उन्हें अगले वनडे वर्ल्ड कप में खेलते हुए देखने की उम्मीद कर रहे हैं।

    भारतीय टीम का न्यूजीलैंड दौरा भी रोहित शर्मा के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। पांच मैचों की टी20 सीरीज के बाद दोनों देशों के बीच पांच मैचों की वनडे सीरीज खेली जानी है। वनडे मुकाबलों में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खास नजर रहेगी। दोनों दिग्गज बल्लेबाजों का अनुभव भारतीय टीम के लिए काफी अहम हो सकता है।

    फिलहाल रोहित शर्मा के सामने अपनी फिटनेस और शानदार फॉर्म को बनाए रखने की चुनौती है। 2027 वर्ल्ड कप तक उनकी निरंतरता और प्रदर्शन ही उनके चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके हालिया बयान ने यह जरूर साफ किया है कि वह अपने मजाकिया अंदाज में भविष्य की संभावनाओं को लेकर बात करने से पीछे नहीं हटते। अब देखना होगा कि आने वाले समय में रोहित का बल्ला किस तरह प्रदर्शन करता है और क्या वह 2027 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की जर्सी में नजर आते हैं।

  • वेस्टइंडीज के खिलाफ प्रिंस यादव की तूफानी बल्लेबाजी से प्रभावित हुए अभिषेक, बोले- बड़े शॉट लगाने का हुनर आने वाले समय में और निखरेगा

    वेस्टइंडीज के खिलाफ प्रिंस यादव की तूफानी बल्लेबाजी से प्रभावित हुए अभिषेक, बोले- बड़े शॉट लगाने का हुनर आने वाले समय में और निखरेगा


    नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले गए तीसरे टी20 इंटरनेशनल मुकाबले में भारतीय टीम ने 14 रन से जीत दर्ज की। इस मैच में जहां भारतीय बल्लेबाजों ने बड़े स्कोर की नींव रखी वहीं आखिरी ओवरों में प्रिंस यादव की छोटी लेकिन उपयोगी पारी भी चर्चा में रही। प्रिंस ने महज छह गेंदों पर नाबाद 13 रन बनाकर टीम के स्कोर को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया। उनकी इस बल्लेबाजी से अभिषेक शर्मा भी प्रभावित नजर आए। अभिषेक ने प्रिंस की तारीफ करते हुए कहा कि वह उनकी बल्लेबाजी पहले देख चुके हैं और दिल्ली के क्रिकेट सर्कल में उनके नाम की चर्चा होती है।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की ओर से साझा किए गए वीडियो में प्रिंस यादव ने बताया कि तीसरे टी20 मुकाबले में बल्लेबाजी के लिए अभिषेक शर्मा ने उन्हें अपना बल्ला दिया था। प्रिंस के मुताबिक टीम के लिए किसी भी तरह से योगदान देना उनके लिए खुशी की बात है। चाहे बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी अथवा फील्डिंग हर खिलाड़ी की कोशिश रहती है कि वह टीम की सफलता में अपना हिस्सा दे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि अभिषेक ने बल्ला देते समय उनसे कहा था कि उसकी बेइज्जती नहीं होनी चाहिए। प्रिंस ने कहा कि उन्होंने बल्ले की इज्जत रखते हुए कुछ अच्छे शॉट लगा दिए।
    वीडियो में प्रिंस के साथ मौजूद अभिषेक शर्मा ने उनकी बल्लेबाजी की क्षमता पर भरोसा जताया। अभिषेक ने कहा कि यदि किसी ने प्रिंस को बल्लेबाजी करते हुए नहीं देखा है तो उन्होंने उन्हें खेलते देखा है। दिल्ली में होने वाले सिंगल विकेट क्रिकेट में खिलाड़ियों को आमने-सामने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों का हुनर दिखाना पड़ता है। अभिषेक के अनुसार प्रिंस में बड़े शॉट लगाने की क्षमता है और इसकी झलक वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में भी देखने को मिली। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में प्रिंस का यह हुनर और निखरेगा। अभिषेक ने यह भी कहा कि बल्ला उनका था लेकिन गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने में प्रिंस की ताकत और प्रतिभा का योगदान था।
    प्रिंस ने बातचीत के दौरान यह भी बताया कि इंग्लैंड में भी उन्होंने अभिषेक के बल्ले से बल्लेबाजी की थी और छक्का लगाया था। इसी वजह से अब वह जब भी बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे तो अभिषेक से ही बल्ला लेने की कोशिश करेंगे। मैदान पर इस हल्की-फुल्की बातचीत ने दोनों खिलाड़ियों के बीच अच्छे तालमेल की झलक भी दिखाई।
    मैच में प्रिंस यादव ने भारत की ओर से नंबर 10 या 11 पर बल्लेबाजी करते हुए टी20 इंटरनेशनल में तीन या उससे अधिक बाउंड्री लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों की सूची में जगह बनाई। उन्होंने अपनी नाबाद 13 रन की पारी में तीन चौके लगाए। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 223 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। जवाब में वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट गंवाकर 209 रन ही बना सकी और भारत ने मुकाबला 14 रन से अपने नाम कर लिया।
    इस जीत में भारतीय टीम के सामूहिक प्रदर्शन की अहम भूमिका रही। हालांकि प्रिंस यादव की छोटी पारी ने यह भी दिखाया कि निचले क्रम के बल्लेबाजों का योगदान टी20 क्रिकेट में कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। अभिषेक शर्मा की तारीफ से प्रिंस का आत्मविश्वास बढ़ने की उम्मीद है और अब नजरें उनके आगे के प्रदर्शन पर रहेंगी।
  • टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं

    टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार को लंबे इंतजार के बाद टी20 टीम में जगह मिली है तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अब भी भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से खेलने जा रहे शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन साल से उनके साथ यही स्थिति बनी हुई है और लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में मौका नहीं मिल रहा है।
    रेवस्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान जब शमी से भुवनेश्वर कुमार की वापसी और खुद के लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि भुवनेश्वर को भारत के लिए खेलने का मौका मिला है और यह उनके लिए अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर के चयन से उनका कोई लेना देना नहीं है। शमी ने कहा कि उन्हें जहां भी खेलने का अवसर मिलेगा वह अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों पर है।
    शमी ने अपने बयान में चयन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। वह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और बंगाल के लिए खेलते हुए अपनी फिटनेस भी साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें दोबारा भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता है तो यह उनका नुकसान नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों के चयन और टीम इंडिया में वापसी के अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।
    36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। फिटनेस से जुड़ी समस्याओं और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को उनके टीम से बाहर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि शमी घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं। रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का हिस्सा होने के कारण उनके पास एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर है।
    दूसरी ओर भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी की है। उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की योजनाओं के मद्देनजर भी परखा जा सकता है। भुवनेश्वर की वापसी ने अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
    वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सपाट पिचों पर गेंदबाजों को मिल रही चुनौती के बीच क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ अनुभवी खिलाड़ियों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शमी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि टीम में चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करता है। शमी के लिए फिलहाल रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना और अपनी गेंदबाजी की लय बनाए रखना अहम होगा। उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन आने वाले समय में टीम इंडिया में वापसी की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
  • भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा

    भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा


    नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।
    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।
    भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।
    जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।
    भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।
    भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा।
  • कुलदीप यादव के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका, T20 में 100 विकेट से बस 3 शिकार दूर, अर्शदीप-बुमराह जैसे दिग्गजों की सूची में मिलेगी जगह

    कुलदीप यादव के पास बड़ा रिकॉर्ड बनाने का मौका, T20 में 100 विकेट से बस 3 शिकार दूर, अर्शदीप-बुमराह जैसे दिग्गजों की सूची में मिलेगी जगह


    नई दिल्ली। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का दूसरा मुकाबला शुक्रवार को रांची के जेएससीए अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम परिसर में खेला जाना है। इस मुकाबले में भारतीय स्पिनर कुलदीप यादव के पास अपने अंतरराष्ट्रीय T20 करियर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका है। कुलदीप अब तक 97 विकेट ले चुके हैं और विकेटों का शतक पूरा करने के लिए उन्हें सिर्फ तीन विकेट की जरूरत है। अगर वह दूसरे T20 में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं तो अंतरराष्ट्रीय T20 क्रिकेट में 100 विकेट पूरे करने वाले भारत के पांचवें गेंदबाज बन जाएंगे। ऐसे में रांची मुकाबले के दौरान उनकी गेंदबाजी पर खास नजर रहने वाली है।

    कुलदीप यादव ने लखनऊ में खेले गए पहले T20 मुकाबले में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। उन्होंने चार ओवर में 33 रन देकर दो विकेट हासिल किए थे। इस प्रदर्शन के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय T20 विकेटों की संख्या 97 पहुंच गई। आंकड़ों के मुताबिक कुलदीप ने 55 मैचों की 53 पारियों में ये विकेट लिए हैं। वह अब तक दो बार एक पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा भी कर चुके हैं। अपनी विविधतापूर्ण स्पिन गेंदबाजी और बल्लेबाजों को चकमा देने की क्षमता के कारण कुलदीप भारतीय टीम के अहम गेंदबाजों में गिने जाते हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ दूसरे मुकाबले में तीन विकेट लेकर वह अपने करियर में नया मील का पत्थर हासिल कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय T20 क्रिकेट में भारत की ओर से 100 या उससे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अर्शदीप सिंह जसप्रीत बुमराह हार्दिक पांड्या और अक्षर पटेल शामिल हैं। इस सूची में अर्शदीप सिंह सबसे आगे हैं। उन्होंने 95 मैचों की 92 पारियों में 141 विकेट हासिल किए हैं। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप ने अपनी स्विंग और डेथ ओवरों में सटीक गेंदबाजी से टीम इंडिया के लिए लगातार अहम भूमिका निभाई है।

    इस सूची में दूसरे स्थान पर जसप्रीत बुमराह हैं जिन्होंने 100 मैचों में 126 विकेट लिए हैं। बुमराह की यॉर्कर और अलग-अलग गति से गेंदबाजी करने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। तीसरे स्थान पर हार्दिक पांड्या हैं। उन्होंने 138 मैचों में 114 विकेट हासिल किए हैं। हार्दिक अपनी तेज गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में भी योगदान देते हैं और टीम के लिए उपयोगी ऑलराउंडर हैं। चौथे स्थान पर अक्षर पटेल हैं जिन्होंने 108 मैचों में 111 विकेट लिए हैं। अक्षर की किफायती गेंदबाजी और दबाव में विकेट निकालने की क्षमता भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण रही है।

    कुलदीप यादव इस सूची में फिलहाल पांचवें स्थान पर बताए गए हैं। उनके बाद युजवेंद्र चहल का नाम आता है जिन्होंने 80 मैचों में 96 विकेट लिए हैं। वहीं भुवनेश्वर कुमार 87 मैचों में 90 विकेट लेकर भारत के सफल T20 गेंदबाजों में शामिल हैं। भुवनेश्वर की चार साल बाद न्यूजीलैंड सीरीज के लिए भारतीय टीम में वापसी भी चर्चा का विषय रही है। उनके पास भी भविष्य में विकेटों का शतक पूरा करने का अवसर हो सकता है।

    रांची में होने वाला दूसरा T20 कुलदीप यादव के लिए व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने के साथ भारतीय टीम की सीरीज में स्थिति मजबूत करने का भी मौका है। हालांकि रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए उन्हें मैदान पर तीन विकेट लेने होंगे। अब देखना होगा कि वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों के खिलाफ कुलदीप अपनी स्पिन का कितना असर दिखा पाते हैं और क्या वह इस मुकाबले में विकेटों का शतक पूरा कर इतिहास रचते हैं।

  • 35 की उम्र के बाद भी नहीं थमी विराट कोहली की रनों की भूख, 27 पारियों में 7 शतक, रिकॉर्ड बना रहा है दबदबा

    35 की उम्र के बाद भी नहीं थमी विराट कोहली की रनों की भूख, 27 पारियों में 7 शतक, रिकॉर्ड बना रहा है दबदबा


    नई दिल्ली। विराट कोहली का नाम वनडे क्रिकेट के उन बल्लेबाजों में शामिल है जिन्होंने लंबे समय तक अपने बल्ले से दुनिया भर के गेंदबाजों पर दबदबा बनाए रखा है। उम्र बढ़ने के साथ जहां आमतौर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिलती है वहीं विराट कोहली के आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। 37 साल की उम्र में भी विराट की रनों की भूख कम होती नजर नहीं आ रही है। बल्कि 35 साल की उम्र के बाद वनडे क्रिकेट में उनके आंकड़े बताते हैं कि इस दौर में भी वह लगातार बड़ी पारियां खेलने में सफल रहे हैं।

    35 साल की उम्र के बाद विराट कोहली ने वनडे में 27 पारियां खेली हैं और इस दौरान उन्होंने 1555 रन बनाए हैं। इन रनों को उन्होंने 70.68 की शानदार औसत और 100.51 के स्ट्राइक रेट से बनाया है। इस दौरान विराट के बल्ले से सात शतक और नौ अर्धशतक भी निकले हैं। यानी 27 पारियों के छोटे से आंकड़े में ही उन्होंने 16 बार 50 या उससे ज्यादा रन बनाने का कारनामा किया है। यह आंकड़ा बताता है कि वनडे क्रिकेट में विराट की निरंतरता अब भी बरकरार है।

    विराट कोहली ने 27 सितंबर को वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में अपने वनडे करियर का 55वां शतक लगाया। इस पारी के दौरान उन्होंने वनडे क्रिकेट में 15000 रन भी पूरे किए और इस उपलब्धि तक पहुंचने के मामले में सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़ दिया। विराट ने 15000 वनडे रन तक पहुंचने के लिए 287 पारियां लीं जबकि सचिन तेंदुलकर को इस मुकाम तक पहुंचने में 361 पारियां लगी थीं। इस तरह विराट ने 74 पारियां कम खेलकर यह आंकड़ा हासिल किया।

    विराट के नाम अब वनडे क्रिकेट में 55 शतक हैं और यह संख्या अपने आप में उनकी बल्लेबाजी की निरंतरता को दिखाती है। हालांकि सचिन तेंदुलकर के वनडे करियर में 18426 रन दर्ज हैं और इस मामले में विराट अभी काफी पीछे हैं। वनडे क्रिकेट में मैचों की संख्या और कार्यक्रम पहले की तुलना में कम होने के कारण दोनों खिलाड़ियों के करियर आंकड़ों की सीधी तुलना करना आसान नहीं है।

    विराट और सचिन की तुलना क्रिकेट में अक्सर होती रही है लेकिन केवल आंकड़ों के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि दोनों में कौन बेहतर है। दोनों बल्लेबाज अलग-अलग दौर में खेले और उनके सामने क्रिकेट की परिस्थितियां भी अलग रहीं। सचिन ने अपने लंबे करियर में कई पीढ़ियों के गेंदबाजों का सामना किया जबकि विराट ने आधुनिक दौर के क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है।

    फिलहाल विराट कोहली का ध्यान आगे भी रन बनाने और भारतीय क्रिकेट के लिए बड़े मुकाबलों में योगदान देने पर है। 35 साल की उम्र के बाद सात वनडे शतक और 1555 रन यह जरूर दिखाते हैं कि अनुभव के साथ उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता बनी हुई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले मुकाबलों में विराट अपने आंकड़ों में और कितना इजाफा करते हैं।

  • एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन

    एशियन गेम्स में भारत का रोमांचक दिन बैडमिंटन टीम बाहर लक्ष्य सेन की वापसी से जगी उम्मीद क्रिकेट में 216 रन


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में मंगलवार का दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए उतार चढ़ाव भरा रहा। भारत की नजरें अलग अलग खेलों में पदक की दावेदारी मजबूत करने पर थीं लेकिन कई मुकाबलों में टीम को निराशा भी हाथ लगी। महिला बैडमिंटन टीम को जापान के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में 1-3 से हार का सामना करना पड़ा और इसके साथ ही उसका पदक अभियान समाप्त हो गया। वहीं पुरुष टेबल टेनिस टीम भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ प्री क्वार्टर फाइनल में 0-3 से हारकर प्रतियोगिता से बाहर हो गई। दूसरी ओर पुरुष बैडमिंटन में लक्ष्य सेन ने शुरुआती झटके के बाद शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को निर्णायक गेम तक पहुंचा दिया।

    महिला बैडमिंटन क्वार्टर फाइनल में भारत और जापान के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पीवी सिंधू ने अकाने यामागुची के खिलाफ पहला गेम 23-21 से जीतकर भारत को अच्छी शुरुआत दिलाई लेकिन जापानी खिलाड़ी ने अगले दोनों गेम 21-18 और 21-11 से जीतकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इसके बाद उन्नति हुड्डा को भी तोमोका मियाजाकी के खिलाफ 16-21 और 18-21 से हार मिली। त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने युकी फुकुशिमा और मायु मात्सुमोतो की जोड़ी को 21-17 और 21-16 से हराकर भारत की उम्मीदें बनाए रखीं लेकिन अगले मुकाबले में तन्वी शर्मा को नोजोमी ओकुहारा के खिलाफ 21-12 और 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। इस नतीजे के साथ जापान ने 3-1 से जीत दर्ज कर भारतीय टीम को बाहर कर दिया।

    पुरुष बैडमिंटन में भारत और जापान के बीच क्वार्टर फाइनल मुकाबले में लक्ष्य सेन के सामने कोडाई नाराओका की चुनौती थी। पहले गेम में लक्ष्य को 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। शुरुआत में जापानी खिलाड़ी ने फ्रंट कोर्ट पर लगातार प्रभावी शॉट खेले और लक्ष्य को दबाव में रखा। हालांकि दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने जोरदार वापसी की और नाराओका को केवल पांच अंक लेने दिए। लक्ष्य ने दूसरा गेम 21-5 से जीतकर मुकाबला निर्णायक गेम में पहुंचा दिया।

    टेबल टेनिस में भी भारतीय टीम को मुश्किल का सामना करना पड़ा। पुरुष टीम दक्षिण कोरिया के खिलाफ 0-3 से हार गई। हरमीत देसाई को जंग वूजिन ने 3-1 से हराया जबकि मानुष शाह को ओ जुनसुंग के खिलाफ पांच गेम तक चले मुकाबले में 2-3 से हार मिली। तीसरे मुकाबले में मानव ठक्कर को आन जेह्युन ने 3-1 से मात दी। इस हार के साथ भारतीय टीम का अभियान समाप्त हो गया।

    फेंसिंग में भी भारत को मिश्रित परिणाम मिले। पुरुष फॉयल के व्यक्तिगत मुकाबले में सचिन और सांसम हेमाश सिंह का सफर आगे नहीं बढ़ सका। दोनों को कजाकिस्तान के खिलाड़ियों के खिलाफ हार मिली। वहीं महिला एपी में तनिक्षा खत्री ने थाईलैंड की संग्गियो नत्पापत को 15-10 से हराकर राउंड ऑफ 16 में जगह बनाई। इससे इस स्पर्धा में भारत की उम्मीदें बनी हुई हैं।

    महिला क्रिकेट में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ स्वर्ण पदक मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में तीन विकेट पर 216 रन बनाए। स्मृति मंधाना ने 79 रन की पारी खेलकर मजबूत आधार तैयार किया जबकि शेफाली वर्मा ने 48 रन बनाए। इसके बाद ऋचा घोष ने सिर्फ 22 गेंदों में 49 रन बनाकर भारतीय स्कोर को 216 तक पहुंचा दिया। श्रीलंका के सामने स्वर्ण पदक जीतने के लिए 217 रन का लक्ष्य रखा गया है।

    एशियन गेम्स में भारत का अभियान अभी जारी है और कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक की दावेदारी मजबूत करने का मौका है। मंगलवार के मुकाबलों में जहां कुछ टीमों का सफर समाप्त हुआ वहीं क्रिकेट और फेंसिंग जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने उम्मीदें कायम रखी हैं।

  • अफगानिस्तान का 3-0 से सफाया अब अगली चुनौती तैयार, टीम इंडिया के सामने 3 महीने में 28 मैच और कई बड़े क्रिकेट मिशन

    अफगानिस्तान का 3-0 से सफाया अब अगली चुनौती तैयार, टीम इंडिया के सामने 3 महीने में 28 मैच और कई बड़े क्रिकेट मिशन


    नई दिल्ली। अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन के बाद टीम इंडिया के 2026 के क्रिकेट अभियान पर विराम नहीं लगने वाला है। साल के बचे हुए करीब तीन महीने भारतीय टीम के लिए बेहद व्यस्त रहने वाले हैं। इस दौरान टीम इंडिया को जापान से लेकर एशियन गेम्स और फिर वेस्टइंडीज न्यूजीलैंड तथा श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं। हालिया कार्यक्रम के मुताबिक भारतीय टीम के सामने अलग अलग फॉर्मेट में कई बड़ी सीरीज हैं। जापान के खिलाफ 22 सितंबर को होने वाला मुकाबला भी खास है क्योंकि यह दोनों टीमों के बीच पुरुषों के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहली भिड़ंत होगी।

    अफगानिस्तान के खिलाफ भारत ने तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप किया है। इसके बाद भारतीय टीम का अगला पड़ाव जापान होगा। 22 सितंबर को सानो इंटरनेशनल क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाला मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों का ध्यान एशियन गेम्स पर रहेगा जहां पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत को सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला है। भारत का पहला मुकाबला 28 सितंबर को खेला जाना है।

    एशियन गेम्स के बीच भारतीय टीम का घरेलू क्रिकेट कार्यक्रम भी जारी रहेगा। वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे मैचों की सीरीज 27 सितंबर से शुरू होगी। पहला मुकाबला तिरुवनंतपुरम में खेला जाएगा। इसके बाद 30 सितंबर को गुवाहाटी और 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में वनडे मुकाबला होगा। इसके बाद दोनों टीमों के बीच पांच टी20 मैच खेले जाएंगे। टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में होगा जबकि आखिरी मैच 17 अक्टूबर को बेंगलुरु में खेला जाना है। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा को भी टीम में शामिल किया है जबकि शुभमन गिल को कप्तानी सौंपी गई है।

    वेस्टइंडीज सीरीज के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड दौरे पर जाएगी। वहां पांच टी20 मैचों के बाद पांच वनडे मुकाबले और फिर दो टेस्ट मैच प्रस्तावित हैं। टी20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होकर 1 नवंबर तक चलेगी। इसके बाद नवंबर में वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। दो टेस्ट मैचों की सीरीज नवंबर के दूसरे हिस्से से दिसंबर की शुरुआत तक चलेगी। टेस्ट क्रिकेट का यह चरण भारत के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा।

    साल के अंतिम चरण में श्रीलंका के खिलाफ भी भारत का कार्यक्रम है। दिसंबर में तीन वनडे और तीन टी20 मैच खेले जाने हैं। इस तरह अफगानिस्तान सीरीज के बाद भारतीय टीम के सामने लगातार क्रिकेट का लंबा दौर रहेगा। जापान के खिलाफ मुकाबले से शुरू होने वाला यह सफर एशियन गेम्स वेस्टइंडीज न्यूजीलैंड और श्रीलंका तक पहुंचेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार इन मुकाबलों को जोड़ें तो भारत के सामने करीब 28 अंतरराष्ट्रीय मैचों का लंबा कार्यक्रम है। ऐसे में 2026 का आखिरी हिस्सा भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए लगातार बड़े मुकाबलों से भरा रहने वाला है।

  • श्रेयस अय्यर की टीम के मैचों की टाइमिंग में बड़ा बदलाव अब इस वक्त होगा भारत का क्वार्टर फाइनल मुकाबला

    श्रेयस अय्यर की टीम के मैचों की टाइमिंग में बड़ा बदलाव अब इस वक्त होगा भारत का क्वार्टर फाइनल मुकाबला


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय क्रिकेट टीम के मुकाबलों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता के कुछ अहम नॉकआउट मुकाबलों की टाइमिंग में बदलाव किया गया है। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक दोपहर में खेले जाने वाले मुकाबले अब जापान के स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 2 बजे की जगह 1 बजकर 30 मिनट पर शुरू होंगे। इसका सीधा असर भारतीय टीम के क्वार्टर फाइनल मुकाबले पर भी पड़ेगा। हालांकि महिला क्रिकेट के मुकाबलों की टाइमिंग में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।

    भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल में प्रवेश मिला है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबला 28 सितंबर को खेलेगी। यह मैच जापान के स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगा। जापान भारत से 3 घंटे 30 मिनट आगे है इसलिए भारतीय दर्शक इस मुकाबले को सुबह 10 बजे से देख सकेंगे। वहीं सुबह के स्लॉट में होने वाले मुकाबले पहले की तरह जापान में सुबह 9 बजे शुरू होंगे जिसका मतलब भारत में इनका प्रसारण सुबह 5 बजकर 30 मिनट से होगा।

    टाइमिंग में यह बदलाव केवल क्वार्टर फाइनल तक सीमित नहीं है। 1 अक्टूबर को होने वाला दूसरा सेमीफाइनल भी जापान के समय के अनुसार दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से शुरू होगा। भारतीय टीम के इस चरण तक पहुंचने की पूरी संभावना मानी जा रही है। इसके बाद 3 अक्टूबर को होने वाला गोल्ड मेडल मुकाबला भी दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर शुरू किया जाएगा। ऐसे में अगर श्रेयस अय्यर की टीम फाइनल तक पहुंचती है तो भारत में क्रिकेट फैंस को गोल्ड मेडल के लिए मुकाबला सुबह 10 बजे से देखने को मिलेगा। वहीं पहला क्वार्टर फाइनल जिसमें पाकिस्तान शामिल है पहला सेमीफाइनल और ब्रॉन्ज मेडल मुकाबला सुबह 9 बजे के जापानी समय से ही खेले जाएंगे।

    मैचों की टाइमिंग में बदलाव की वजह भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस स्थान पर एशियन गेम्स के क्रिकेट मुकाबले आयोजित किए जाएंगे वहां फ्लडलाइट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जापान में शाम जल्दी होने के कारण आयोजकों को लंबे चलने वाले पुरुष मुकाबलों को समय से पहले समाप्त कराने की जरूरत महसूस हुई। इसी वजह से दोपहर वाले मैचों को आधा घंटा पहले शुरू करने का फैसला लिया गया है। हालांकि इस बदलाव की जानकारी सभी संबंधित पक्षों तक पूरी तरह नहीं पहुंची थी। भारतीय ओलंपिक संघ के अधिकारियों ने भी इस संबंध में अनभिज्ञता जताई थी जबकि आधिकारिक कार्यक्रम में संशोधित समय अपडेट कर दिया गया है।

    एशियन गेम्स में भारत की टीम को बेहद मजबूत माना जा रहा है। पिछली बार ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में भारतीय पुरुष टीम ने गोल्ड मेडल जीता था। इस बार टीम की कमान श्रेयस अय्यर के हाथों में है और टीम में अभिषेक शर्मा संजू सैमसन ईशान किशन शिवम दुबे तिलक वर्मा नीतीश कुमार रेड्डी अक्षर पटेल वॉशिंगटन सुंदर वरुण चक्रवर्ती रवि बिश्नोई जसप्रीत बुमराह अर्शदीप सिंह वैभव सूर्यवंशी और यश ठाकुर जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

    एशियन गेम्स 2026 का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची और नागोया में होना है। भारत और जापान के बीच 22 सितंबर को होने वाला टी20 मुकाबला एशियन गेम्स क्रिकेट प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं है। यह मुकाबला अलग कार्यक्रम के तहत सानो इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय टीम की मजबूत स्क्वॉड को देखते हुए इस बार भी गोल्ड मेडल की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

  • भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में लगातार तीसरा बड़ा बदलाव कमलेश जैन ने छोड़ा पद अब यह सीरीज हो सकती है आखिरी जिम्मेदारी

    भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में लगातार तीसरा बड़ा बदलाव कमलेश जैन ने छोड़ा पद अब यह सीरीज हो सकती है आखिरी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के सपोर्ट स्टाफ में एक और बड़ा बदलाव होने जा रहा है। टीम इंडिया के फिजियो कमलेश जैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI को अपना इस्तीफा सौंप दिया है हालांकि बोर्ड की ओर से अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। कमलेश जैन फिलहाल तीन महीने के नोटिस पीरियड पर हैं और भारतीय टीम के साथ जुड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले समय में उनकी टीम इंडिया से आधिकारिक विदाई हो सकती है।

    कमलेश जैन इस समय नई दिल्ली में भारतीय टीम के साथ मौजूद हैं। टीम यहां अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज की तैयारी कर रही है। भारतीय टीम का कार्यक्रम आने वाले महीनों में काफी व्यस्त रहने वाला है। अफगानिस्तान के बाद टीम जापान के खिलाफ टी20 मुकाबला खेलेगी और इसके बाद एशियन गेम्स में भी भारतीय खिलाड़ियों का एक्शन देखने को मिलेगा। इसी दौरान वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज भी खेली जानी है।

    मौजूदा स्थिति को देखते हुए न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज कमलेश जैन का भारतीय टीम के साथ आखिरी असाइनमेंट हो सकती है। यह सीरीज दिसंबर की शुरुआत में समाप्त होगी। हालांकि BCCI चाहे तो उन्हें इससे पहले भी नोटिस पीरियड पूरा होने से पहले कार्यमुक्त कर सकता है। फिलहाल इस संबंध में बोर्ड की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।

    कमलेश जैन के इस्तीफे की सबसे बड़ी वजह लगातार होने वाली यात्राओं को बताया जा रहा है। भारतीय टीम के साथ करीब साढ़े चार साल बिताने के बाद अब वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते हैं। टीम और BCCI से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक कमलेश जैन ने भारतीय टीम के साथ अपने कार्यकाल का पूरा आनंद लिया लेकिन लगातार यात्रा और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अब वह अपने परिवार को ज्यादा वक्त देना चाहते हैं। यही वजह उनके इस्तीफे के पीछे प्रमुख मानी जा रही है।

    चेन्नई के रहने वाले कमलेश जैन जून 2022 में भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ का हिस्सा बने थे। उन्होंने नितिन पटेल की जगह ली थी। नितिन पटेल उस समय बेंगलुरु स्थित BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़ गए थे। भारतीय टीम में आने से पहले कमलेश जैन कोलकाता नाइट राइडर्स यानी KKR के साथ काम कर चुके थे। राहुल द्रविड़ के कार्यकाल में BCCI ने उन्हें भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में शामिल किया था।

    कमलेश जैन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हालिया इंग्लैंड दौरे के बाद फील्डिंग कोच टी दिलीप ने भी टीम इंडिया का साथ छोड़ दिया था। इसके अलावा असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट भी भारतीय टीम से अलग हो चुके हैं। डोशेट अब KKR से जुड़ गए हैं।

    ऐसे में कमलेश जैन का इस्तीफा भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव की कड़ी को आगे बढ़ाता है। अब देखना होगा कि BCCI उनके इस्तीफे को कब स्वीकार करता है और उनकी जगह टीम इंडिया के फिजियो की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है।