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  • समुद्र के रास्ते भारत की दोस्ती का संदेश, लिस्बन पहुंचा INS सुदर्शिनी; जानिए क्यों खास है ‘लोकायन 2026’ अभियान

    समुद्र के रास्ते भारत की दोस्ती का संदेश, लिस्बन पहुंचा INS सुदर्शिनी; जानिए क्यों खास है ‘लोकायन 2026’ अभियान


    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपनी लंबी समुद्री यात्रा लोकायन 2026 के तहत पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंच गया है। तीन मस्तूलों और पारंपरिक पालों से सुसज्जित यह पोत टैगस नदी के रास्ते लिस्बन पहुंचा और इस दौरान पारंपरिक नौकायन तथा समुद्री कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। आधुनिक दौर में जब नौसैनिक अभियानों में अत्याधुनिक तकनीक और मशीनों का दबदबा है ऐसे समय में आईएनएस सुदर्शिनी भारत की पुरानी समुद्री परंपराओं और नौकायन कौशल की झलक दुनिया के सामने पेश कर रहा है। इसकी यात्रा को केवल एक प्रशिक्षण अभियान के तौर पर नहीं देखा जा रहा बल्कि इसके जरिए भारत अलग अलग देशों के साथ दोस्ती सहयोग और आपसी समझ का संदेश भी पहुंचा रहा है।

    भारतीय नौसेना के अनुसार लिस्बन आईएनएस सुदर्शिनी की सात महीने लंबी समुद्री यात्रा का 15वां बंदरगाह पड़ाव है। इस लंबे अभियान के दौरान पोत कई देशों के बंदरगाहों तक पहुंच रहा है। हर पड़ाव पर भारतीय नौसेना के अधिकारी चालक दल और प्रशिक्षण ले रहे कैडेट स्थानीय नौसेना तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस पूरी यात्रा का उद्देश्य समुद्री प्रशिक्षण के साथ भारत की समुद्री विरासत और मित्रता की भावना को दुनिया तक पहुंचाना है। लिस्बन में पोत की मौजूदगी भारत और पुर्तगाल के बीच पुराने समुद्री संबंधों को भी नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

    आईएनएस सुदर्शिनी पर तैनात प्रशिक्षु नौसैनिकों के लिए यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। खुले समुद्र में लंबी दूरी तय करने के दौरान उन्हें समुद्र की बदलती परिस्थितियों को समझने और चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। पारंपरिक पालों के जरिए नौकायन करना उनके प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे उन्हें हवा की दिशा समुद्री परिस्थितियों और जहाज के संतुलन जैसी कई बारीकियों को करीब से समझने का मौका मिलता है। इस तरह यह पोत आधुनिक नौसैनिक प्रशिक्षण के साथ पारंपरिक समुद्री कौशल को भी जीवित रखने का काम कर रहा है।

    लिस्बन पहुंचने के बाद आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और कैडेट पुर्तगाली नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों स्थानीय प्रशासन और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर अनुभव साझा किए जाएंगे। जहाजों का पारस्परिक निरीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का मकसद दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करना है।

    लोकायन 2026 की सबसे खास बात यही है कि यह समुद्री प्रशिक्षण के साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने का माध्यम बन रहा है। आईएनएस सुदर्शिनी जब अलग अलग देशों के बंदरगाहों पर पहुंचता है तो वहां भारतीय समुद्री परंपरा की झलक दिखाई देती है और साथ ही भारत की मित्रता तथा सहयोग की भावना भी सामने आती है। लिस्बन में इसका पहुंचना इसी व्यापक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    तीन मस्तूलों वाला यह पाल पोत आज भारत की समुद्री विरासत का प्रतीक बनकर दुनिया के सामने मौजूद है। एक ओर यह नौसेना के युवा कैडेटों को समुद्र की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है तो दूसरी ओर भारत के वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को भी आगे बढ़ा रहा है। लोकायन 2026 के तहत इसकी यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे भारत की समुद्री मित्रता और सहयोग का संदेश दुनिया के नए हिस्सों तक पहुंचता रहेगा।

  • भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा, INS दूनागिरी और INS अग्रय से बढ़ी मारक क्षमता

    भारतीय नौसेना की ताकत में इजाफा, INS दूनागिरी और INS अग्रय से बढ़ी मारक क्षमता


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की ताकत को एक नई दिशा देने के लिए दो अत्याधुनिक युद्धपोतों को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया गया है। इनमें स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Dunagiri और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS Agray शामिल हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की सतह, वायु और जल के भीतर युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार स्वदेशी तकनीक पर आधारित युद्धपोतों को शामिल कर रही है। आज के दौर में छोटे और सस्ते ड्रोन भी बड़े सैन्य प्लेटफॉर्म्स को चुनौती दे सकते हैं, ऐसे में उन्नत स्टेल्थ तकनीक और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन की क्षमता बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

    INS Dunagiri प्रोजेक्ट 17ए के तहत विकसित एक अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो दुश्मन के रडार से बचकर लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम, आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकें शामिल हैं। यह युद्धपोत सतह, हवा और पानी के भीतर मौजूद सभी प्रकार के खतरों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सक्षम है।

    इस युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसका कम रडार क्रॉस-सेक्शन है, जिससे इसे दुश्मन के लिए ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है। इसके सेंसर और हथियार प्रणालियां रियल टाइम डेटा के आधार पर तेजी से निर्णय लेने में सक्षम हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय काफी कम हो जाता है।

    दूसरी ओर, INS Agray विशेष रूप से समुद्र की सतह के नीचे छिपे खतरों, यानी पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे “गांडीव” जैसे प्रतीकात्मक नाम से जोड़कर इसकी सटीक मारक क्षमता को दर्शाया गया है। यह जहाज स्वदेशी सोनार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और एडवांस डिकॉय सिस्टम से लैस है।

    यह छोटा आकार होने के बावजूद बेहद घातक प्लेटफॉर्म माना जा रहा है, जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों पर सटीक निगरानी और हमला करने में सक्षम है। इसकी गति लगभग 25 नॉट तक है और यह हजारों किलोमीटर तक ऑपरेशन कर सकता है।

    दोनों युद्धपोतों में लगभग 75 प्रतिशत तक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इन प्लेटफॉर्म्स का डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है।

    कुल मिलाकर, INS Dunagiri और INS Agray का शामिल होना भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई देता है और भारत की रणनीतिक रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत बनाता है।

  • रक्षा तंत्र में अहम फेरबदल: वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नौसेना की कमान, नए CDS की भी घोषणा

    रक्षा तंत्र में अहम फेरबदल: वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को नौसेना की कमान, नए CDS की भी घोषणा

    नई दिल्ली ।
    भारत की सैन्य संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है, जहां वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना की कमान सौंपने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में पश्चिमी नौसेना कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे स्वामीनाथन 31 मई से आधिकारिक रूप से नौसेना प्रमुख का पद ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल वर्ष 2028 तक निर्धारित किया गया है और उन्हें भारतीय नौसेना का 27वां प्रमुख नियुक्त किया गया है। यह निर्णय देश की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

    करीब चार दशक के लंबे सैन्य अनुभव के साथ कृष्णा स्वामीनाथन भारतीय नौसेना के अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1987 में नौसेना में अपनी सेवा शुरू की थी और समय के साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को संभाला। संचार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली में उनकी विशेषज्ञता ने उन्हें रणनीतिक मामलों का गहरा जानकार अधिकारी बनाया है। आधुनिक युद्ध तकनीक और समुद्री सुरक्षा रणनीतियों पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है।

    अपने करियर के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे उनकी रणनीतिक समझ और अधिक व्यापक हुई है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना तकनीकी रूप से और अधिक आधुनिक बनेगी तथा समुद्री सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

    वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी के कार्यकाल के बाद अब यह जिम्मेदारी कृष्णा स्वामीनाथन संभालेंगे। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने में भारतीय नौसेना की भूमिका लगातार बढ़ रही है, और ऐसे में नया नेतृत्व इन चुनौतियों को नई दिशा देने का काम करेगा।

    इसी के साथ केंद्र सरकार ने देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ यानी CDS की भी घोषणा कर दी है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे मौजूदा CDS जनरल अनिल चौहान के कार्यकाल के बाद पदभार संभालेंगे। CDS का पद तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। नए नेतृत्व के आने से देश की रक्षा संरचना में और अधिक एकजुटता और मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है।

    देश की सुरक्षा चुनौतियों और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह नियुक्तियां बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमता और रणनीतिक ढांचे को आधुनिक बना रहा है, और ऐसे में नए नौसेना प्रमुख और नए CDS की नियुक्ति आने वाले वर्षों में रक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देने का संकेत देती है।

  • हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’

    हॉर्मुज में जहाजों पर फायरिंग के बाद भारत सतर्क, नौसेना की एडवाइजरी, ‘हमारी बिना अनुमति के न गुजरें’


    नई दिल्ली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर फायरिंग की घटना के बाद भारत ने सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। 18 अप्रैल को भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी में संचालित भारतीय जहाजों के लिए नई एडवाइजरी जारी की जिसमें स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे केवल नेवी के आदेश मिलने पर ही इस संवेदनशील मार्ग से गुजरें।

    नेवी की निगरानी में ही होगा जहाजों का मूवमेंट

    सूत्रों के मुताबिक भारतीय नौसेना ने हॉर्मुज पार करने वाले सभी भारतीय जहाजों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। अब तक 11 जहाज इस जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं। हालांकि हाल ही में दो भारतीय जहाजों जग अर्नव और सनमार हेराल्ड पर गोलीबारी के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था।

    देश गरिमा को मिल रही नौसेना की सुरक्षा

    भारतीय टैंकर देश गरिमा 18 अप्रैल को हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। फिलहाल इसे अरब सागर में भारतीय नौसेना की सुरक्षा मिल रही है और इसके 22 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना है।

    लारक द्वीप के आसपास बढ़ाई गई सतर्कता
    एडवाइजरी में खासतौर पर जहाजों को लारक द्वीप से दूर रहने को कहा गया है। यह द्वीप हॉर्मुज के सबसे संकरे हिस्से में स्थित है और ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर का अहम केंद्र माना जाता है। इसी कारण यहां सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है और हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।

    वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग

    हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है जहां से पहले वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता रहा है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    भारतीय नौसेना की मजबूत तैनाती
    फिलहाल फारस की खाड़ी में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं जो हॉर्मुज पार करने का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय नौसेना इन सभी जहाजों के संपर्क में है और उन्हें अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। इसके अलावा क्षेत्र में भारतीय नौसेना के 7 युद्धपोत तैनात किए गए हैं जो जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे।

  • मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया

    मोम्बासा में भारतीय युद्धपोत ‘त्रिकंद’ का आगमन, सौंपे 100 राइफल और 50,000 गोलियां, रक्षा सहयोग को सशक्त किया गया


    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन गाइडेड प्रक्षेपास्त्र युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या के मोम्बासा बंदरगाह पर पहुंच चुका है। इस दौरान भारत ने केन्याई रक्षा बलों को 100 इंसास राइफल और करीब 50,000 गोलियां सौंपे। इसके अतिरिक्त, भारत ने केन्या को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    युद्धपोत ‘त्रिकंद’ दक्षिण-पश्चिम हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी ऑपरेशनल तैनाती के तहत मोम्बासा पहुंचा है। इस दौरे के दौरान भारतीय उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन केन्या में मौजूद हैं। पोत के मोम्बासा प्रवास के दौरान कई पेशेवर, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय दल केन्या रक्षा बलों को आवश्यक सामग्रियां भी सौंप रहा है।

    इस यात्रा के दौरान भारत और केन्या के बीच उच्चस्तरीय रक्षा संवाद भी हुआ। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने केन्या के रक्षा अधिकारियों से मुलाकात की और सैन्य नेतृत्व के नियमित उच्चस्तरीय दौरों, संस्थागत बैठकों और बढ़ते रक्षा सहयोग की सराहना की। इसी क्रम में केन्या रक्षा बलों को 1.5 टेस्ला क्षमता वाली एमआरआई मशीन प्रदान करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

    मोम्बासा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उप-नौसेनाध्यक्ष कृष्णा स्वामीनाथन ने केन्या नौसेना के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओटिएनो को 100 राइफल और 50,000 गोलियां सौंपकर दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भरोसे को मजबूत किया। मोम्बासा से प्रस्थान के बाद युद्धपोत ‘त्रिकंद’ केन्या नौसेना के जहाजों के साथ समुद्री अभ्यास करेगा। इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की नौसेनाएं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करेंगी और संयुक्त संचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा भारत के ‘महासागर’ विजन के अनुरूप हिन्द महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस यात्रा के माध्यम से भारत और केन्या दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, समुद्री सहयोग और मानव सुरक्षा में सहयोग को और प्रगाढ़ किया जा रहा है।

  • समुद्री शक्ति और सहयोग का प्रदर्शन आईएनएस त्रिकंड का सेशेल्स अभियान

    समुद्री शक्ति और सहयोग का प्रदर्शन आईएनएस त्रिकंड का सेशेल्स अभियान


    नई दिल्ल:
    भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री कूटनीति और सामरिक सहयोग को मजबूत करते हुए सेशेल्स के पोर्ट विक्टोरिया से सफलतापूर्वक रवाना हो गया है यह यात्रा भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

    यह पोर्ट कॉल 16 मार्च को शुरू हुआ था और इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती मिली आईएनएस त्रिकंड भारतीय नौसेना का एक आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट है जो अपनी उन्नत तकनीक और युद्ध क्षमताओं के लिए जाना जाता है सेशेल्स में अपने प्रवास के दौरान जहाज ने कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लिया और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने का कार्य किया

    जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने सेशेल्स सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा हुई साथ ही सेशेल्स को आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपी गई जो आपसी भरोसे और सहयोग का प्रतीक है

    इस यात्रा का सबसे अहम पहलू संयुक्त सैन्य अभ्यास लामितिये 2026 में भारतीय भागीदारी रही यह पहली बार था जब इस अभ्यास में भारतीय थल सेना नौसेना और वायुसेना तीनों की संयुक्त भागीदारी देखी गई इस अभ्यास को व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया और इसमें भारत तथा सेशेल्स के सैनिकों ने मिलकर अपनी संयुक्त क्षमताओं का प्रदर्शन किया

    अभ्यास के दौरान कई महत्वपूर्ण सैन्य गतिविधियां आयोजित की गईं हार्बर चरण में विजिट बोर्ड सर्च एंड सीजर प्रशिक्षण कराया गया जिसमें संयुक्त बोर्डिंग ऑपरेशनों का अभ्यास हुआ इसके बाद समुद्री चरण में आईएनएस त्रिकंड ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज ले विजिलेंट के साथ मिलकर संयुक्त अभ्यास किया

    इस दौरान भारतीय नौसेना के मरीन कमांडो और सेशेल्स के विशेष बलों ने समुद्र में सफलतापूर्वक संयुक्त बोर्डिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया जिसमें जहाज पर चढ़ाई तलाशी और नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल थे इसके अलावा घुसपैठ रोकने ड्रोन से निगरानी छापेमारी और घायल सैनिकों को निकालने जैसे अभ्यास भी किए गए

    अभ्यास का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा प्रस्लिन द्वीप पर किया गया संयुक्त लैंडिंग ऑपरेशन था जिसमें दोनों देशों की सेनाओं ने मिलकर अपनी समन्वित क्षमता का प्रदर्शन किया इस दौरान सेशेल्स के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे और उन्होंने पूरे अभ्यास का प्रत्यक्ष अवलोकन किया

    यह पूरा अभियान भारत की महासागर नीति का सशक्त उदाहरण है जो क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित है आईएनएस त्रिकंड की यह तैनाती भारत की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार और प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति के रूप में अपनी भूमिका निभाता रहेगा

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    Indian Navy, INS Trikand, Maritime Security, Defense Cooperation, Indo Pacific

  • समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा 3 अप्रैल को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी

    समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा 3 अप्रैल को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी


    नई दिल्ली: भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और इसी क्रम में स्वदेशी तकनीक से तैयार एक और अत्याधुनिक युद्धपोत को बेड़े में शामिल किया जा रहा है गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को आगामी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा इस अवसर पर राजनाथ सिंह स्वयं इस युद्धपोत को राष्ट्र को समर्पित करेंगे

    यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स का हिस्सा है जो भारतीय नौसेना को वर्ष 2047 तक पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है इससे पहले इसी श्रृंखला के तहत आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में शामिल किया गया था जबकि हिमगिरी और उदयगिरी भी नौसेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं अब तारागिरी इस श्रृंखला का चौथा फ्रिगेट बनकर तैयार है

    तारागिरी को अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों से लैस किया गया है इसमें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल लगी है जो दुश्मन के जहाजों और सतही लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है इसके अलावा इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली बराक 8 मिसाइल प्रणाली भी है जो हवाई हमलों से रक्षा प्रदान करती है

    पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं साथ ही यह आधुनिक सोनार कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है जो लंबी दूरी से आने वाले खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम बनाते हैं इस युद्धपोत में हेलिकॉप्टर हैंगर भी मौजूद है जिसमें दो हेलिकॉप्टर एक साथ संचालन कर सकते हैं

    करीब 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की गति से चल सकता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका स्टेल्थ डिजाइन है जो इसे दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करता है प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे इन युद्धपोतों में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है

    इन फ्रिगेट्स का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है जबकि इनके निर्माण में मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात युद्धपोत बनाए जा रहे हैं जिनमें से अधिकांश को 2019 से 2022 के बीच लॉन्च किया जा चुका है और शेष के समुद्री परीक्षण जारी हैं

    तारागिरी के नौसेना में शामिल होने से न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा और युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी बल्कि यह देश के स्वदेशी रक्षा निर्माण के बढ़ते सामर्थ्य का भी प्रतीक है आने वाले समय में जब सभी नीलगिरी क्लास फ्रिगेट पूरी तरह सेवा में आ जाएंगे तब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में और अधिक सशक्त और प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराएगी

  • भारत आ रहे एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा को लेकर भारत सतर्क, फारस की खाड़ी के पास नौसेना के युद्धपोत तैनात

    भारत आ रहे एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा को लेकर भारत सतर्क, फारस की खाड़ी के पास नौसेना के युद्धपोत तैनात


    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम तेज कर दिए हैं। भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी के आसपास अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारत की ओर आने वाले व्यापारिक जहाजों को सहायता और सुरक्षा दी जा सके।

    सूत्रों के मुताबिक इन युद्धपोतों की तैनाती का उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि क्षेत्र में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।

    दो भारतीय एलपीजी जहाजों को मिली अनुमति

    इस बीच शनिवार को ईरान ने भारत की ओर जा रहे दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी। इनमें एक जहाज शिवालिक है, जो जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार फिलहाल ओमान के पास देखा गया है और इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की संभावना है।

    भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर

    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी की समुद्री स्थिति और भारतीय जहाजों व नाविकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं।

    24 घंटे निगरानी कर रही सरकार

    मंत्रालय ने बताया कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी जहाजों और चालक दल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 24 घंटे के नियंत्रण कक्ष के सक्रिय होने के बाद से अब तक 2,425 से अधिक कॉल और 4,441 ईमेल प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही 223 से ज्यादा फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है।

    ईरान ने सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिया

    भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद ईरान भारत की ओर जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। उन्होंने भारत और ईरान को पुराने मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद पर ईरान का बयान

    वहीं भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता था। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं को युद्ध रोकने के लिए उन पर दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

  • मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बाद भारत की मदद: राहत सामग्री, चावल और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी

    मोजाम्बिक में भीषण बाढ़ के बाद भारत की मदद: राहत सामग्री, चावल और दवाइयों की बड़ी खेप भेजी


    नई दिल्ली । पूर्वी अफ्रीका के देश मोज़ाम्बिक के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। हजारों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है। इस कठिन समय में भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री और दवाइयों की खेप भेजी है।

    भारत के विदेश मंत्रालय भारत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी दी कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान के तहत मोजाम्बिक को आवश्यक राहत सामग्री भेजी गई है। इस सहायता में 500 मीट्रिक टन चावल, अस्थायी आश्रय के लिए टेंट, हाइजीन किट और पुनर्वास कार्यों में उपयोग होने वाली कई जरूरी वस्तुएं शामिल हैं।

    इसके अलावा बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करीब 10 मीट्रिक टन अतिरिक्त राहत सामग्री भी भेजी गई है। राहत अभियान के हिस्से के रूप में Indian Navy के एक जहाज के जरिए लगभग 3 मीट्रिक टन आवश्यक दवाइयां भी मोजाम्बिक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों से निपटने में स्थानीय प्रशासन को मदद मिल सके।

    भारत इससे पहले भी समुद्री मार्ग के जरिए लगभग 86 मीट्रिक टन जीवन रक्षक दवाइयां मोजाम्बिक भेज चुका है। इन दवाइयों का उद्देश्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पीड़ित लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं शामिल होती हैं। ऐसे में भारत द्वारा भेजी गई खाद्य सामग्री, स्वच्छता किट और दवाइयां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    भारत ने अतीत में भी प्राकृतिक आपदाओं के समय कई मित्र देशों की मदद की है। हिंद महासागर क्षेत्र और अफ्रीकी देशों के साथ भारत के मजबूत कूटनीतिक और मानवीय संबंध रहे हैं। आपदा के समय दी जाने वाली यह सहायता इन संबंधों को और मजबूत करने का काम करती है।

    भारत ने स्पष्ट किया है कि वह मानवीय, चिकित्सीय और लॉजिस्टिक सहायता देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस पहल के माध्यम से भारत न केवल संकट के समय सहायता पहुंचा रहा है, बल्कि हिंद महासागर और अफ्रीका क्षेत्र में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।

  • आईएनएस तरंगिनी ने श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर किया स्वागत

    आईएनएस तरंगिनी ने श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर किया स्वागत


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना का प्रतिष्ठित प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी 27 फरवरी 2026 को श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर पहुंचा। श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसेना क्षेत्र के अधिकारियों ने पोत का स्वागत करते हुए इस दौरे को दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों और सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। यह दौरा विशेष रूप से उस समय आया जब आईएनएस तरंगिनी ने हाल ही में विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 में भाग लेकर अपनी दक्षता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का प्रदर्शन किया था।

    पत्तन पर रुकने के दौरान तरंगिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के पूर्वी क्षेत्र के डिप्टी कमांडर कमोडोर हरिथा जयदेवथे से भेंट की। दोनों पक्षों ने नौकायन प्रशिक्षण और पेशेवर कौशल आदान-प्रदान के क्षेत्र में संभावित सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। इस अवसर पर पोत ने श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों को पोत पर परिचयात्मक दौरे के लिए आमंत्रित किया ताकि वे पोत के संचालन प्रशिक्षण गतिविधियों और तकनीकी क्षमताओं से परिचित हो सकें।

    आईएनएस तरंगिनी का पत्तन पर ठहराव केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों की योजना बनाई गई और विभिन्न प्रशिक्षण आदान-प्रदान कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये पहल द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को और गहरा करने और भविष्य में साझा नौकायन प्रशिक्षण के अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई।

    विशेष रूप से श्रीलंका नौसेना और श्रीलंका समुद्री अकादमी से चयनित प्रशिक्षु अधिकारी इस दौरे के दौरान तरंगिनी पोत से कोलंबो की यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान उन्हें नौकायन प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा। प्रशिक्षु अधिकारी पोत पर रहने के दौरान समुद्री सुरक्षा नाव संचालन टीम वर्क और अन्य पेशेवर कौशल सीखेंगे जो उनके करियर विकास और द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    आईएनएस तरंगिनी का यह दौरा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समन्वित समुद्री संबंधों और सहयोग को उजागर करता है। दोनों नौसेनाओं के बीच नियमित प्रशिक्षण तकनीकी सहयोग और सामुदायिक सहभागिता की पहल न केवल पेशेवर क्षमताओं को बढ़ाती है बल्कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और आपसी समझ को भी मजबूत करती है।

    इस प्रकार तरंगिनी का त्रिंकोमाली दौरा द्विपक्षीय मित्रता नौकायन प्रशिक्षण और सामुदायिक सहभागिता का एक प्रतीक बनकर उभरा है जो भारतीय और श्रीलंकाई नौसेना के साझा भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखता है।