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  • स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट

    स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट


    नई दिल्ली ।साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास होने जा रही है। नए साल के पहले तीन महीनों में नेवी में दो नई स्वदेशी वॉरशिप शामिल होने वाली हैं। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने और 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    इस क्रम में 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ नेवी का हिस्सा बनेगा। यह शिप एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है और 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अंजदीप की एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की क्षमता इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।

    इसी के साथ 14 मार्च को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होगा। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वारफेयर में सक्षम है। इसके अलावा एयर डिफेंस के लिए लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं। एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं।

    आईएनएस तारागिरि लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें दो हेलिकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा भी मौजूद है। 6,700 टन वजनी इस फ्रिगेट की रफ्तार 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे है।

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से अब तक चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा चुके हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी, हिमगिरि और उदयगिरि को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं। इनकी नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और अत्याधुनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

    नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है और इनके नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं जैसे शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

    चीन और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता से निपटने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे भारतीय नौसेना को तेज रफ्तार, मजबूती और रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साल 2026 के पहले तीन महीनों में इन दो वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की तैयारी और शक्ति में और मजबूती आएगी।
  • इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम

    इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम


    विशाखापत्तनम। भारत अपनी समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का जोरदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) और एक्सरसाइज मिलन (MILAN 2026) में विदेशी नौसैनिक जहाजों का आगमन शुरू हो गया है। सोमवार को भारतीय नौसेना ने इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश के युद्धपोतों का स्वागत किया।

    विदेशी जहाजों का आगमन
    इंडोनेशियाई नौसेना का फ्रिगेट KRI Bung Tomo-357 पहले ही विशाखापत्तनम पहुंच चुका है। पूर्वी नौसेना कमान ने इसे “सेलामल दातंग” कहकर अभिनंदन किया। संयुक्त अरब अमीरात का नौसैनिक कोर्वेट Al-Emarat भी अभ्यास में शामिल हुआ, जो भारत और UAE के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। वहीं, पड़ोसी बांग्लादेश का फ्रिगेट BNS Somudra Avijan भी बेड़े में शामिल हो गया।

    इससे पहले थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के जहाज भी पोर्ट में पहुँच चुके हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक भव्य और विविधता पूर्ण बन गया है।

    IFR 2026: राष्ट्रपति करेंगी समीक्षा
    18 फरवरी को समुद्र में होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। यह स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नौसैनिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस वर्ष कुल 71 जहाज इस आयोजन में हिस्सा लेंगे, जिनमें भारतीय नौसेना के 45 जहाज, 19 विदेशी युद्धपोत और शेष कोस्ट गार्ड, मर्चेंट नेवी और अनुसंधान जहाज शामिल हैं।

    मुख्य आकर्षण के रूप में भारतीय विमानवाहक पोत INS विक्रांत पहले ही विशाखापत्तनम में पहुंच चुका है। यह जहाज समारोह का केंद्रबिंदु होगा और दर्शकों का ध्यान सबसे अधिक खींचेगा। सभी जहाजों को छह पंक्तियों में व्यवस्थित किया जाएगा।

    मिलन अभ्यास: समुद्री सहयोग का बड़ा मंच
    1995 में महज चार देशों के साथ शुरू हुआ मिलन अभ्यास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशाल मंच बन गया है। इस साल 65 देशों की नौसेनाएं इसमें भाग ले रही हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना और मित्र देशों के बीच पेशेवर बातचीत को मजबूत करना है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए ‘मिलन विलेज’ का उद्घाटन किया गया है, जो 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के लिए एक सांस्कृतिक और मैत्री केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

    इंटरनेशनल सिटी परेड
    उत्सव के रूप में 19 फरवरी की शाम को विशाखापत्तनम में रोड पर भव्य इंटरनेशनल सिटी परेड आयोजित की जाएगी। इसमें 45 सैन्य दल हिस्सा लेंगे। मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए 7 से 8 विदेशी बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे यह न केवल सैन्य ताकत बल्कि दोस्ताना संबंधों का उत्सव भी साबित होगा।

  • 2040 तक भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर नेवी शक्ति ब्रिटेन को छोड़ेगा पीछे; जानिए कितने देशों को पछाड़ देगा भारत

    2040 तक भारत बनेगा दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर नेवी शक्ति ब्रिटेन को छोड़ेगा पीछे; जानिए कितने देशों को पछाड़ देगा भारत


    नई दिल्ली । भारतीय नौसेना आने वाले डेढ़ दशक में समुद्री ताकत के मामले में इतिहास रचने जा रही है। मौजूदा रुझानों और स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रमों की रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि भारत साल 2040 तक दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर परमाणु पनडुब्बी शक्ति बन जाएगा। इस दौरान भारत न सिर्फ फ्रांस बल्कि ब्रिटेन जैसे परंपरागत समुद्री शक्ति वाले देश को भी पीछे छोड़ देगा और अमेरिका रूस व चीन के बाद शीर्ष चार नौसैनिक शक्तियों में शामिल हो जाएगा।

    फिलहाल परमाणु पनडुब्बियों की संख्या के मामले में अमेरिका दुनिया में सबसे आगे है। उसके पास 60 से 70 के बीच परमाणु पनडुब्बियां हैं जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल और अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। इसके बाद रूस और चीन का स्थान आता है। अभी चौथे नंबर पर ब्रिटेन और पांचवें पर फ्रांस है जबकि भारत इस सूची में तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। इस समय भारतीय नौसेना के पास दो सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं। एक तीसरी परमाणु पनडुब्बी के इस साल के अंत तक और चौथी के अगले साल सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। यह संख्या भले ही अभी कम लगती हो लेकिन यह भारत के अब तक के सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम की शुरुआती अवस्था है।

    भारत की यह बढ़त पूरी तरह स्वदेशी कार्यक्रमों पर आधारित है। इसमें INS अरिहंत से शुरू हुई अरिहंत क्लास पनडुब्बियां भविष्य की S5 क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां और प्रोजेक्ट-77 के तहत विकसित की जा रही परमाणु अटैक पनडुब्बियां शामिल हैं। भारतीय नौसेना दो S5 क्लास पनडुब्बियों का निर्माण शुरू कर चुकी है और भविष्य में चार और S5 क्लास पनडुब्बियां बनाने की योजना है। यानी कुल छह S5 क्लास पनडुब्बियां भारत की समुद्री परमाणु ताकत की रीढ़ बनेंगी। इसके साथ ही प्रोजेक्ट-77 के तहत परमाणु अटैक पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। शुरुआत में दो पनडुब्बियां बनाई जाएंगी लेकिन आगे चलकर इनकी संख्या छह तक पहुंच सकती है। ये पनडुब्बियां विमानवाहक पोतों की सुरक्षा दुश्मन पनडुब्बियों की निगरानी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करेंगी।

    अनुमान है कि 2035 तक भारत के पास कुल आठ परमाणु पनडुब्बियां होंगी जिनमें चार अरिहंत क्लास दो S5 क्लास और दो प्रोजेक्ट-77 की पनडुब्बियां शामिल होंगी। इस स्तर पर भारत फ्रांस को पीछे छोड़ देगा जिसकी परमाणु पनडुब्बियों की संख्या फिलहाल नौ के आसपास है और आगे इसमें ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। 2040 तक भारत कम से कम 10 परमाणु पनडुब्बियों का बेड़ा खड़ा कर लेगा जबकि ब्रिटेन की संख्या लगभग नौ पर स्थिर रहने की उम्मीद है। इस तरह भारत 15 साल बाद फ्रांस और ब्रिटेनदोनों देशों को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की चौथी सबसे बड़ी परमाणु पनडुब्बी शक्ति बन जाएगा। INS अरिहंत से शुरू हुई यह यात्रा भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति संतुलन में निर्णायक स्थान दिलाने की ओर बढ़ा रही है।

  • Sunny Deol ने Karwar Naval Base पर भारतीय नौसेना का किया सम्मान, शेयर की सेल्फी

    Sunny Deol ने Karwar Naval Base पर भारतीय नौसेना का किया सम्मान, शेयर की सेल्फी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के एक्शन स्टार सनी देओल अपनी अपकमिंग फिल्म बॉर्डर 2 के प्रमोशन में पूरी तरह व्यस्त हैं। हाल ही में उन्होंने और उनकी टीम गोवा के कारवार नौसैनिक अड्डे का दौरा किया। इस मौके पर टीम ने भारतीय नौसेना के जवानों का सम्मान किया और INS विक्रांत के पास आयोजित विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

    कार्यक्रम के दौरान सनी देओल ने नौसेना के अधिकारियों के साथ सेल्फी शेयर की, जिसमें वे हरे रंग की कमीज़, गहरे हरे पैंट और काली पगड़ी में नजर आए। फोटो के बैकग्राउंड में समुद्र का खूबसूरत नजारा दिखाई दे रहा है। इस फोटो को इंस्टाग्राम पर साझा करते हुए सनी देओल ने लिखा, हिंदुस्तान मेरी जान… मेरी आन… मेरी शान… हिंदुस्तान। गर्व, सम्मान और वीरता।बॉर्डर 2 में सनी देओल के साथ वरुण धवन अहान शेट्टी और दिलजीत दोसांझ भी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म साल 1997 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बॉर्डर’ का सिक्वल है। फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह ने किया है, जबकि इसे गुलशन कुमार और टी-सीरीज ने जेपी दत्ता की जेपी फिल्म्स के साथ मिलकर प्रोड्यूस किया है।

    फिल्म की रिलीज़ डेट भी फिक्स हो चुकी है। बॉर्डर 2 23 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। प्रमोशन के दौरान सनी देओल की यह नौसैनिक यात्रा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फैंस को फिल्म के लिए उत्साहित कर रही है।सनी देओल का यह कदम न केवल फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा है, बल्कि भारतीय नौसेना और जवानों के प्रति उनके सम्मान और गर्व को भी दर्शाता है। फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पोस्ट पर जमकर प्रतिक्रियाएँ दी हैं, जहां कई लोग सनी के जोश और देशभक्ति के भाव की तारीफ कर रहे हैं।

  • भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में

    भारत-जर्मनी 8 अरब डॉलर की मेगा डील: 6 साइलेंट किलर AIP पनडुब्बियों का निर्माण होगा भारत में


    नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने भारतीय नौसेना की ताकत और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 8 अरब डॉलर की मेगा डील पर सहमति जताई है। इस डील के तहत भारत में 6 अत्याधुनिक स्टील्थ पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना प्रोजेक्ट 75I के अंतर्गत मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड MDL और जर्मनी की थिसेन क्रुप मरीन सिस्टम्स TKMS के बीच सहयोग से पूरी होगी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील को भारत-जर्मनी के करीबी सहयोग का प्रतीक बताया और कहा कि देश में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं जो दोनों देशों के मजबूत आर्थिक और तकनीकी रिश्तों को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि इस समझौते से मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को भी बड़ा बल मिलेगा।

    इन 6 पनडुब्बियों की सबसे बड़ी खासियत उनकी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन AIP तकनीक होगी। यह तकनीक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की सबसे बड़ी कमी को दूर करती है। सामान्य पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सतह पर आना पड़ता है या स्नॉर्कल का उपयोग करना पड़ता है जिससे उनका लोकेशन दुश्मनों के लिए पता चल सकता है। AIP तकनीक से लैस पनडुब्बियां हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं कम शोर करती हैं और दुश्मन की नजर से लंबी अवधि तक छिपी रह सकती हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार इन पनडुब्बियों के शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री निगरानी सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन और मजबूत होगा। AIP पनडुब्बियां टॉरपीडो एंटी-शिप मिसाइल क्रूज़ मिसाइल और समुद्री माइन जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस होंगी जो उन्हें बेहद खतरनाक और प्रभावी बनाती हैं।प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की हालिया बैठक में दोनों नेताओं ने कहा कि भारत-जर्मनी हर क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं और यह परियोजना इसके नए अध्याय की शुरुआत है। यह समझौता भारतीय नौसेना की क्षमता को नए स्तर पर ले जाएगा और भारतीय रक्षा उद्योग को तकनीकी रूप से मजबूत बनाएगा।

    मझगांव डॉकयार्ड में इन पनडुब्बियों का निर्माण न केवल भारत की नौसेना की ताकत बढ़ाएगा बल्कि देश के रक्षा क्षेत्र में स्थानीय उत्पादन रोजगार और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा देगा। यह परियोजना देश के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।इस डील को भारतीय नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी पनडुब्बी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। रणनीतिक दृष्टि से देखें तो AIP तकनीक वाली पनडुब्बियों की मौजूदा वैश्विक नौसैनिक युद्ध में अहम भूमिका है। इससे भारत की समुद्री ताकत और क्षेत्रीय प्रभुत्व दोनों मजबूत होंगे।