Tag: Indian Politics

  • इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना

    इंदौर कांग्रेस का अनोखा विरोध, मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस से दिल्ली रवाना


    इंदौर। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाले कांग्रेस के आंदोलन को लेकर इंदौर में पार्टी नेताओं ने विरोध का एक अलग तरीका अपनाया है। यहां कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला रेलवे पार्सल के जरिए दिल्ली भेजने के लिए बुक कराया है। इसके लिए मालवा एक्सप्रेस का इस्तेमाल किया गया है। नेताओं ने पोस्टर-पुतले को बाकायदा रेलवे के पार्सल गोदाम में जमा कराया और इसकी बुकिंग की रसीद भी प्राप्त की। इस तरह दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी चर्चा में आ गई है।

    जानकारी के मुताबिक कांग्रेस नेता विवेक खंडेलवाल गिरीश जोशी और देवेंद्र सिंह यादव रेलवे के कॉमर्शियल विभाग के पार्सल गोदाम पहुंचे थे। यहां पोस्टर-पुतले को एक बॉक्स में पैक कराया गया। इसके बाद रेलवे की निर्धारित प्रक्रिया के तहत पार्सल की बुकिंग कराई गई। नेताओं ने इसकी रसीद भी ली। पार्सल पर पोस्टर चिपकाने और जावक क्रमांक दर्ज कराने जैसी औपचारिकताएं भी पूरी की गईं। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया को रेलवे के माध्यम से दस्तावेजी रूप देते हुए पोस्टर-पुतले को दिल्ली भेजने की व्यवस्था की।

    पोस्टर पर चलो दिल्ली और वोट चोर गद्दी छोड़ जैसे नारे लिखे गए हैं। इसके साथ ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर भी लगाई गई है। कांग्रेस नेताओं का उद्देश्य इस पोस्टर-पुतले को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले आंदोलन तक पहुंचाना है। पार्टी की ओर से 1 नवंबर को आयोजित किए जा रहे इस प्रदर्शन में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाया जाना है।

    इस विरोध प्रदर्शन के लिए रेलवे पार्सल का इस्तेमाल करना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए पोस्टर बैनर और अन्य प्रचार सामग्री सड़क मार्ग या निजी वाहनों से भेजी जाती है। लेकिन इंदौर के कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर-पुतले को रेलवे पार्सल के जरिए भेजने का विकल्प चुना। इसके लिए उन्होंने केवल सामग्री भेजने की व्यवस्था ही नहीं की बल्कि बुकिंग की रसीद लेकर पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप भी दिया।

    दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाला आंदोलन कांग्रेस की ओर से चुनाव और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर आयोजित किया जा रहा है। इंदौर से भेजे जा रहे पोस्टर-पुतले के जरिए स्थानीय कांग्रेस नेता भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज कराना चाहते हैं। पोस्टर पर लिखे नारे पार्टी के विरोध का संदेश दे रहे हैं। हालांकि पोस्टर-पुतले के दिल्ली पहुंचने और प्रदर्शन में इसके इस्तेमाल को लेकर आगे की स्थिति संबंधित आयोजन पर निर्भर करेगी।

    फिलहाल इंदौर कांग्रेस की यह तैयारी इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला मालवा एक्सप्रेस के जरिए रेलवे पार्सल से भेजने के लिए बुक कराया गया है। 1 नवंबर को दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले इस कदम ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

  • जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज

    जनादेश के आगे साबुन के बुलबुले की तरह फूटे सत्ता परिवर्तन के सपने, शिवराज ने विपक्ष को घेरा, कल खोलेंगे राज


    भोपाल । केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता परिवर्तन यानी रिजीम चेंज की बहस के बीच कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने रिजीम चेंज गैंग का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता परिवर्तन के सपने देख रहे हैं और इसके लिए तरह-तरह के नैरेटिव गढ़ रहे हैं। शिवराज ने कहा कि जनता के जनादेश के सामने ऐसे सपने साबुन के बुलबुले की तरह फूट जाते हैं। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर भारत में उनकी दाल क्यों नहीं गल रही। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अगर विपक्ष को अपनी स्थिति समझ नहीं आती तो वे अगले दिन इसका जवाब देंगे।
    शिवराज सिंह चौहान की यह टिप्पणी ऐसे समय सामने आई है जब देश की राजनीति में रिजीम चेंज को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा चुनाव के जरिए सरकार बदलने की बात कह चुके हैं। वहीं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सत्ता परिवर्तन की लड़ाई का उल्लेख किया था। इन बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर बहस जारी है। शिवराज ने अपनी पोस्ट में किसी नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया लेकिन रिजीम चेंज गैंग कहकर विपक्षी खेमे पर निशाना साधा।
    केंद्रीय मंत्री ने अपने तंज में चुनावी नतीजों और छात्र संगठनों की जीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी की जीत का जिक्र किया। इसके साथ ही ओडिशा के 13 विश्वविद्यालयों में एबीवीपी को मिली सफलता को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। शिवराज का कहना था कि इन नतीजों को जनता के रुख के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने गुजरात के निकाय चुनावों और असम पश्चिम बंगाल तथा पुडुचेरी के उपचुनावों का भी उल्लेख किया।
    शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पोस्ट में कहा कि गांव हो या शहर युवा हों या आम नागरिक जनता का मूड कुछ और है जबकि रिजीम चेंज गैंग की स्क्रिप्ट कुछ और चल रही है। उनके बयान का संकेत इस ओर था कि राजनीतिक विरोधियों की रणनीति और जनता के वास्तविक रुझान के बीच अंतर है। उन्होंने सवाल उठाया कि लगातार चुनावी हार के बाद भी विपक्ष अपनी रणनीति पर आत्ममंथन क्यों नहीं कर रहा है।
    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को सलाह देते हुए कहा कि उसे अपनी स्थिति का आकलन करना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि जनता उसके संदेश को किस तरह स्वीकार कर रही है। उनके मुताबिक केवल सत्ता परिवर्तन की बात करने या राजनीतिक नैरेटिव तैयार करने से जनसमर्थन हासिल नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे अहम होता है और चुनावी नतीजे उसी का संकेत देते हैं।
    अपनी पोस्ट के अंत में शिवराज ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि रिजीम चेंज गैंग आत्ममंथन के बाद भी बात नहीं समझ पाता तो वे अगले दिन बताएंगे कि उसकी दाल क्यों नहीं गल रही। उनके इस बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि शिवराज सिंह चौहान अगले दिन अपने वादे के मुताबिक क्या नया तर्क रखते हैं और विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी पर कैसी प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल उनका बयान सत्ता परिवर्तन की बहस के बीच भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक जुबानी जंग का नया हिस्सा बन गया है।

  • MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप

    MP में 27% OBC आरक्षण लागू करने की मांग फिर तेज, राहुल गांधी बोले- छात्रों की आवाज दबाई जा रही, संस्थाओं पर कब्जे का आरोप


    भोपाल । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक ऑडियो संदेश जारी कर बीते एक महीने के अपने कार्यक्रमों और लोगों से मुलाकातों का ब्योरा साझा किया है। इस संदेश में उन्होंने मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह लागू करने की मांग के साथ आदिवासी परिवारों की परेशानियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राहुल गांधी ने इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए शिक्षा व्यवस्था और छात्रावासों की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया कि देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
    राहुल गांधी ने छात्रों के बीच अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में छात्रों की समस्याओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में एक समूह देश की संस्थाओं पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि सिस्टम को अंधभक्त चाहिए छात्र नहीं। राहुल ने इंदौर में छात्रों के साथ शिक्षा बजट में कटौती और छात्रावासों की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की बात भी कही।
    उनके मुताबिक छात्रों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। उन्होंने सत्य निकेतन की त्रासदी का भी उल्लेख किया और कहा कि शिक्षा से जुड़े सवालों को गंभीरता से समझने की जरूरत है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के नासिक में भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छात्रावासों के नियमों और परिस्थितियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा गया था। राहुल के अनुसार इसके बाद हॉस्टल में रहने की आयु सीमा वापस ले ली गई। उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को समर्थन देने की बात भी कही।
    मध्य प्रदेश के संदर्भ में राहुल गांधी ने इंदौर के कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पूरी तरह लागू करने की मांग किए जाने की जानकारी दी। यह मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बना हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि पिछड़े वर्गों को उनका अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि आरक्षण के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं और सरकारी फैसलों पर निर्भर करती है।
    राहुल गांधी ने बालाघाट में उन आदिवासी परिवारों से मुलाकात का भी उल्लेख किया जिन्होंने कुपोषण और बीमारी के कारण अपने बच्चों को खोया था। उन्होंने इस मुलाकात को बेहद भावुक बताते हुए कहा कि कुछ दुख ऐसे होते हैं जिनके सामने शब्द भी कम पड़ जाते हैं। उनके अनुसार उस दौरान उनका उद्देश्य परिवारों का दर्द सुनना और उनकी परिस्थितियों को समझना था। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया।
    अपने ऑडियो संदेश में राहुल गांधी ने दिल्ली की बेला एस्टेट झुग्गी बस्ती का दौरा करने का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद वहां 729 में से 728 लोगों ने मतदान का अधिकार खो दिया। यह राहुल गांधी का दावा है। उन्होंने निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की बातों का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी से जुड़े आरोप भी सामने रखे।
    राहुल गांधी ने वोट चोरी के आरोपों को संस्थाओं और संविधान से जोड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। इसके अलावा उन्होंने 30 सितंबर को नई दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ हुई बैठक का जिक्र किया। उनके अनुसार बैठक में मतदान के अधिकार की रक्षा के तरीकों पर चर्चा हुई। राहुल ने रायबरेली में विकास कार्यों की समीक्षा के लिए हुई दिशा बैठक और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात का भी उल्लेख किया। महात्मा गांधी की जयंती पर राजघाट जाकर श्रद्धांजलि देने की बात के साथ उन्होंने संदेश समाप्त किया। उनके इस बयान के बाद मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण और छात्रों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

  • भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग

    भारत में वोट चोरी के आरोपों से लेकर लंदन की संसद तक गरमाई सियासत, ध्रुव राठी के खिलाफ भी जुटे लोग, दोनों गुटों को पुलिस ने किया अलग


    नई दिल्ली। लंदन में यूट्यूबर ध्रुव राठी के प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया। शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में ध्रुव राठी के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग जुटे तो दूसरी ओर उनके विरोध में भी लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों समूहों के बीच तनाव बढ़ने लगा। हालात को संभालने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने दोनों गुटों को अलग रखा ताकि स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके। इस प्रदर्शन के केंद्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे।
    ध्रुव राठी ने संसद चौक पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह वही देश है जिसने कभी भारत पर शासन किया था और आज भारतीय नागरिक उसी देश की संसद के सामने खड़े होकर अपनी बात रख रहे हैं। राठी ने इसे लोकतंत्र की ताकत बताते हुए कहा कि अपने देश में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं मिलती लेकिन लंदन में लोग खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी और हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया था। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के साथ मारपीट हुई और उन्हें उनके घर से जबरन ले जाया गया। हालांकि ये आरोप राठी के बयान का हिस्सा हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से जरूरी है।
    राठी ने कहा कि उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों की सहमति हो। उनके मुताबिक यह मांग इसलिए उठाई जा रही है ताकि आगामी चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें और प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिले। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपने परिवार और परिचितों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा करने की अपील की।
    इस प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की युवा शाखा ने किया था। इसे ब्रिटेन में सक्रिय कुछ भारतीय छात्र संगठनों और प्रवासी भारतीय समूहों का समर्थन भी मिला। प्रदर्शन के दौरान इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम के नारे लगाए गए। इसके साथ ही भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़कर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देने की कोशिश की गई। आयोजकों ने कहा कि मतदाता सूची और चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना जरूरी है।
    दूसरी ओर ध्रुव राठी के विरोध में भी एक जवाबी प्रदर्शन आयोजित किया गया। इंडिया डायस्पोरा यूके ने भारत समर्थक लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की थी। संगठन के संस्थापक हृदेश गुप्ता ने कहा कि ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी समुदाय मजबूत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के समर्थन में खड़ा है। इस तरह एक ही स्थान पर अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समूह आमने-सामने आ गए।
    दोनों पक्षों की ओर से लगातार नारेबाजी के कारण माहौल तनावपूर्ण होता गया। हर समूह दूसरे की आवाज को दबाने के लिए तेज नारे लगाने लगा। इसके बाद पुलिस ने दोनों समूहों के बीच दूरी बनाए रखी। लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि भारत की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी चर्चा और बहस का विषय बने हुए हैं।

  • वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील

    वोटर लिस्ट और धार्मिक स्थलों के मुद्दे पर प्रदर्शन 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचने की महबूबा की अपील


    नई दिल्ली । पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी यानी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से प्रदर्शन में पहुंचने को कहा है। यह प्रदर्शन मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स की ओर से आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रदर्शन का समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक बताया गया है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने वीडियो संदेश में देश में धार्मिक स्थलों और मतदाता सूचियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में मस्जिदों दरगाहों और चर्चों को गिराया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि तैयार की जा रही मतदाता सूचियों में विपक्षी समर्थकों धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों और खास तौर पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इन आरोपों को महबूबा मुफ्ती ने प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों से जोड़ते हुए लोगों से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की है।

    PDP प्रमुख ने कहा कि मॉनिटरिंग कमिटी फॉर इंडियन मुस्लिम्स ने इन मुद्दों को लेकर 29 सितंबर को प्रदर्शन करने का फैसला किया है। उन्होंने धर्मनिरपेक्ष सोच रखने वाले लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। अपने संदेश में उन्होंने लोकतंत्र भाईचारे और देश की समावेशी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े मूल्यों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक ऐसे मुद्दों पर लोगों को अपनी आवाज उठानी चाहिए।

    महबूबा मुफ्ती की यह अपील ऐसे समय आई है जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। चुनाव आयोग ने अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR की प्रक्रिया और समयसीमा तय की है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेज में दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लिए SIR से जुड़ी प्रक्रिया का कार्यक्रम दर्ज है। हालांकि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना या जोड़े जाना संबंधित चुनावी प्रक्रिया और दावे-आपत्तियों के निपटारे के तहत तय होता है।

    महबूबा मुफ्ती ने अपने संदेश में लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो भारतीय देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को महत्व देते हैं उन्हें 29 सितंबर को जंतर-मंतर पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के जरिए देश के लोकतंत्र भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब से जुड़े मूल्यों के लिए आवाज उठाई जाएगी।

    इस प्रदर्शन में किन संगठनों और कितने लोगों की भागीदारी होगी इसकी अंतिम तस्वीर 29 सितंबर को ही स्पष्ट होगी। फिलहाल महबूबा मुफ्ती की अपील के बाद यह कार्यक्रम दिल्ली में मतदाता सूची धार्मिक स्थलों और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा का एक और केंद्र बन गया है। प्रदर्शन के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों और आयोजकों की मांगों पर आगे की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

  • BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात

    BJP से अलग होने के बाद खुलकर बोले शहजाद पूनावाला: मोदी से राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा देने के बाद शहजाद पूनावाला एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक पॉडकास्ट में उन्होंने भाजपा छोड़ने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी तक कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा से अलग होने के बाद अब पार्टी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह भाजपा को दूसरी पार्टियों की तुलना में बेहतर मानते हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त के साथ इनसाइड आउट पॉडकास्ट में शहजाद पूनावाला ने अपने राजनीतिक सफर और भाजपा छोड़ने के फैसले को लेकर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अब जब वह भाजपा में नहीं हैं तो अपनी बात खुलकर रख सकते हैं। इसी दौरान उन्होंने पार्टी के काम करने के तरीके और कुछ राजनीतिक मुद्दों पर अपनी असहमति भी सामने रखी।

    शहजाद पूनावाला ने कहा कि भाजपा छोड़ने के बाद पार्टी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकती। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब उन्हें भाजपा की ओर से कोई पैसा नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पार्टी को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि भाजपा में अभी भी कुछ जवाबदेही दिखाई देती है। उन्होंने अपने तर्क के तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उल्लेख किया।

    पूनावाला ने पेपर लीक के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कर्नाटक पंजाब और झारखंड में पेपर लीक से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां संबंधित शिक्षा मंत्रियों से इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया। उनका कहना था कि अलग अलग राज्यों में सामने आए ऐसे मामलों पर राजनीतिक जवाबदेही का सवाल उठना स्वाभाविक है।

    पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कड़ी टिप्पणी की। पूनावाला ने मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग से जुड़ी बात कही। उन्होंने प्रधानमंत्री की तुलना देश के अलग अलग दौर के नेताओं के संदर्भ में करते हुए अपनी राजनीतिक राय रखी। यह टिप्पणी उनके निजी राजनीतिक आकलन के तौर पर सामने आई है।

    राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शहजाद पूनावाला ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच राहुल गांधी में बदलाव आया है और उन्होंने खुद में कुछ सुधार किए हैं। हालांकि उनके मुताबिक अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक शैली में निरंतरता की कमी होने की बात भी कही।

    पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी को कई मुद्दों पर लगता है कि उन्हें सब कुछ पता है। उन्होंने अपने और राहुल गांधी के बीच एक समानता का भी उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने कुछ आंदोलनों और उनके कथित फंडिंग से जुड़े दावों का जिक्र किया।

    शहजाद पूनावाला का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा से उनके अलग होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चा जारी है। जुलाई में भाजपा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक कारणों का उल्लेख किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी के प्रवक्ताओं को वेतन नहीं मिलता है। अब पॉडकास्ट में दिए गए उनके बयान से साफ है कि भाजपा से अलग होने के बावजूद वह राष्ट्रीय राजनीति और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रख रहे हैं।

  • विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह

    विकसित भारत सिर्फ ऊंची इमारतों का नाम नहीं, हर घर पानी और युवाओं को अवसर मिलना जरूरी: राजनाथ सिंह


    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है और आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज को पूरी दुनिया गंभीरता से सुनती है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत और मजबूत होते कद का स्पष्ट प्रमाण है। लखनऊ छावनी परिषद में करीब 101 करोड़ रुपये की लागत वाली 12 विकास परियोजनाओं के भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इन परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि ये लखनऊ छावनी के बेहतर भविष्य के लिए सरकार के 12 संकल्प हैं।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल बड़े प्रोजेक्ट बनाने और आधुनिक इमारतें खड़ी करने से पूरा नहीं होगा। वास्तविक विकास तब माना जाएगा जब प्रत्येक परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले युवाओं को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलें और समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मानजनक सुविधाएं हासिल हों। उन्होंने कहा कि विकास की रोशनी केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि हर मोहल्ले हर बस्ती और हर परिवार तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए।

    भारत की वैश्विक स्थिति में आए बदलाव का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि करीब 10 से 12 वर्ष पहले अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भारत अपनी बात रखता था तो उसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था जितनी भारत की क्षमता और भूमिका को मिलनी चाहिए थी। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अब जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखता है तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है कि भारत क्या कह रहा है। उन्होंने इसे देश की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रभाव का परिणाम बताया।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब यह भी है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें। खेलकूद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की सुविधाएं हों और दिव्यांग बच्चों को भी समाज की मुख्यधारा में बराबरी का स्थान मिले। राजनाथ सिंह ने कहा कि समय के साथ शहरों की जरूरतें बदलती हैं इसलिए विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए नियमों में भी बदलाव आवश्यक है।

    इसी दिशा में लखनऊ छावनी क्षेत्र में नए बिल्डिंग बायलॉज लागू किए गए हैं। पहले यहां जी प्लस-2 तक निर्माण की अनुमति थी जिसे बढ़ाकर जी प्लस-3 किया गया है। पार्किंग को शामिल करने पर अब पांच मंजिल तक निर्माण की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य लखनऊ छावनी को उसकी ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना है ताकि क्षेत्र का विकास तेज गति से हो सके।

    रक्षा मंत्री ने छावनी क्षेत्र में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नामों में बदलाव केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि इसके पीछे नई पीढ़ी को देश के इतिहास और महान विभूतियों से जोड़ने की भावना है। रॉयल आर्टिलरी बाजार का नाम एकता बाजार ब्रिटिश कैवलरी बाजार का नाम वीरांगना ऊदा देवी बाजार और ब्रिटिश इन्फैंट्री बाजार का नाम माता दीन वाल्मीकि बाजार किया गया है। एक अन्य बाजार का नाम मंगल पांडे बाजार जबकि कैनेडी मार्केट का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी मार्केट रखा गया है।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि इन बदलावों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम राष्ट्रसेवा और सामाजिक चेतना से जुड़े महान व्यक्तित्वों की स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने लखनऊ और उत्तर प्रदेश में हो रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर जलापूर्ति शिक्षा खेलकूद बाढ़ नियंत्रण और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की भी प्रशंसा की और कहा कि लखनऊ छावनी में सैन्यकर्मियों पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा

    पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा


    नई दिल्ली । लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि सदन में सबसे ज्यादा चर्चा बिल से अधिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर रही। करीब पचास मिनट के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए जिससे सदन का माहौल बेहद गर्म हो गया।

    राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

    उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

  • NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग

    NEET विवाद पर राहुल गांधी का प्रहार छात्रों के समर्थन में सरकार को घेरा पीएम से माफी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की रखी मांग


    नई दिल्ली । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने NEET परीक्षा विवाद पेपर लीक और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन के जरिए अपने आरोपों और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है लेकिन सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। राहुल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ धक्का मुक्की की और उन्हें घसीटा गया जिससे उनके मुंह से खून निकल आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनके कान में सरकार बदलने की बात कही।

    राहुल गांधी ने कहा कि NEET पेपर लीक का असर केवल परीक्षा देने वाले छात्रों तक सीमित नहीं है बल्कि लगभग साढ़े सात करोड़ छात्र और उनके परिवार इससे प्रभावित हुए हैं। उनका आरोप था कि पिछले दस वर्षों में देशभर में 152 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं लेकिन किसी भी बड़े मामले में दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के साथ अन्याय हो रहा है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े वीडियो भी दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने भविष्य को लेकर आवाज उठा रहे थे तब उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है न कि उन्हें दबाना।

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय परिवार NEET परीक्षा की तैयारी पर लगभग उतनी ही राशि खर्च करते हैं जितना केंद्र सरकार पूरे शिक्षा बजट पर खर्च करती है। उनके अनुसार लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए वर्षों तक आर्थिक और मानसिक संघर्ष करते हैं लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकार ने उसे कमजोर किया है।

    इस दौरान राहुल गांधी ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं। पहली मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही। दूसरी मांग छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। तीसरी मांग प्रधानमंत्री से छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो उसे जवाबदेही तय करनी होगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि विपक्ष छात्रों की हर लोकतांत्रिक मांग के साथ खड़ा है और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और यदि परीक्षा प्रणाली पर भरोसा खत्म हो गया तो देश की प्रतिभा और विकास दोनों प्रभावित होंगे। इसी कारण विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार से जवाब मांगता रहेगा।

    Tags (English)

    Rahul Gandhi, NEET Paper Leak, Dharmendra Pradhan, Student Protest, Indian Politics

  • छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

    छात्रों के मुद्दे पर सियासी संग्राम राहुल गांधी की रिहाई के बाद सरकार पर बड़ा हमला शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज


    नई दिल्ली । देश की राजधानी दिल्ली में छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर मंगलवार को राजनीतिक माहौल बेहद गरम रहा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी सहित कई सांसदों और नेताओं को हिरासत में लिया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और संसद में इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराने की मांग दोहराई।

    रिहाई के बाद राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सुबह लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर छात्रों के साथ हुई घटना पर संसद में चर्चा कराने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए सरकार की सहमति आवश्यक होगी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर बहस कराने में रुचि नहीं रखती इसलिए विपक्ष ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

    राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा संसद मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई तथा छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि पूरा विपक्ष चाहता है कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो ताकि छात्रों की चिंताओं का समाधान निकल सके।

    दूसरी ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने रिहाई के बाद कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए संसद में कानून लाने की आवश्यकता बताई।

    वहीं केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी छात्रों का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं और छात्रों के हित में लगातार काम कर रही है और केवल राजनीतिक बयानबाजी से समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन को अनुचित बताते हुए राहुल गांधी के आचरण की आलोचना की और कहा कि विरोध प्रदर्शन की भी एक मर्यादा होती है। भाजपा का कहना है कि संसद के भीतर सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए सरकार तैयार है लेकिन अराजकता फैलाने की राजनीति उचित नहीं है।

    दिनभर चले इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी प्रियंका गांधी और अन्य हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा कर दिया। इसके बावजूद छात्रों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक टकराव फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। विपक्ष लगातार संसद में चर्चा और सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है जबकि सरकार अपने रुख पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।