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  • ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित

    ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित


    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच 4.0 की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर बचे हुए ट्रैक पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक यह परियोजना रेलवे के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के साथ ट्रेन हादसों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कवच भारत में विकसित एक आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जिसे रेलवे संचालन के दौरान होने वाले संभावित खतरों को समय रहते पहचानने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह तकनीक खासतौर पर सिग्नल पासिंग एट डेंजर यानी एसपीएडी जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करती है। यदि किसी कारणवश ट्रेन चालक खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति में पहुंचता है तो सिस्टम आवश्यक परिस्थितियों में स्वतः हस्तक्षेप कर सकता है।

    कवच 4.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त और उन्नत परत प्रदान करता है। असुरक्षित स्थिति बनने पर यह सिस्टम जरूरत के अनुसार अपने आप ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। खराब दृश्यता या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके जरिए आमने सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर के खतरे को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

    रेल मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कवच सिस्टम के विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है। रेलवे लगातार अपनी सिग्नलिंग व्यवस्था और ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक तकनीक से मजबूत कर रही है। मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर हिस्से में कवच 4.0 की तैनाती से इस महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर यात्रियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2014-15 में जहां ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी वहीं 2025-26 में यह घटकर 16 रह गई। चालू वित्तीय वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी गई है। प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स भी 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 तक पहुंच गया है।

    रेलवे ने सुरक्षा पर खर्च भी लगातार बढ़ाया है। 2013-14 में सुरक्षा संबंधी कार्यों पर करीब 39 हजार 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे जबकि 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1 लाख 20 हजार 389 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा हजारों स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम तथा ट्रैक सर्किटिंग जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं।

    कुल मिलाकर 170 करोड़ रुपए की नई मंजूरी केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि भारतीय रेलवे की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें भविष्य की रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कवच 4.0 के विस्तार के साथ रेलवे का लक्ष्य है कि तकनीक के जरिए मानवीय भूल और परिचालन संबंधी जोखिमों को कम किया जाए ताकि करोड़ों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।

  • बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव

    बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव


    भोपाल । मध्य प्रदेश से होकर ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। पश्चिम मध्य रेलवे के बीना स्टेशन यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण ट्रेनों के संचालन में व्यापक बदलाव किया गया है। रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार 16 ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के नंबर में बदलाव किया गया है और कई प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थाई ठहराव की व्यवस्था की गई है। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के कारण 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच रेल परिचालन में बड़े स्तर पर बदलाव प्रस्तावित है।

    बीना स्टेशन पर आगासौद और बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को बीना स्टेशन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए प्री नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग से जुड़े कार्य किए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक सुरक्षित रेल संचालन के लिए इस दौरान कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ेगा जबकि कई ट्रेनों के मार्ग बदले जाएंगे। यह काम कई चरणों में पूरा किया जा रहा है और नॉन इंटरलॉकिंग का अंतिम चरण 13 से 15 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    इस बदलाव के तहत दादर से बलिया जाने वाली ट्रेन को नए नंबर 11043 के साथ चलाया जाएगा जबकि बलिया से दादर की सेवा 11044 नंबर से संचालित होगी। इसी तरह दादर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन को 11047 और गोरखपुर से दादर जाने वाली ट्रेन को 11048 नंबर दिया गया है। यानी जिन यात्रियों ने पुराने ट्रेन नंबर देखकर टिकट या यात्रा की योजना बनाई है उन्हें यात्रा से पहले संशोधित नंबर जरूर जांचना होगा।

    गुना रूठियाई और मक्सी क्षेत्र से परिवर्तित मार्ग पर चलने वाली कई ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर अस्थाई ठहराव दिया गया है। इनमें डॉ अंबेडकर नगर रीवा ट्रेन 11704 हावड़ा इंदौर ट्रेन 22912 अहमदाबाद दरभंगा ट्रेन 15560 भुज शालीमार ट्रेन 22829 और अहमदाबाद गोरखपुर ट्रेन 19489 समेत कई सेवाएं शामिल हैं। इन ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर करीब दो मिनट रुकने की व्यवस्था की गई है। वापसी दिशा की कई ट्रेनों को भी इसी तरह का अस्थाई ठहराव मिलेगा।

    वेरावल और जबलपुर के बीच चलने वाली 11465 और 11466 ट्रेन को भी परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यात्रियों को राहत देने के लिए इन दोनों ट्रेनों का निशातपुरा के बजाय भोपाल स्टेशन पर करीब पांच मिनट का अस्थाई ठहराव रखा गया है। यह बदलाव संबंधित निर्धारित तारीखों पर लागू रहेगा।

    कटनी स्टेशन पर भी चार ट्रेनों को दो मिनट का अस्थाई ठहराव मिलेगा। इनमें लोकमान्य तिलक टर्मिनस बलिया ट्रेन 11071 और 11072 तथा रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12185 और 12186 शामिल हैं। इसके अलावा कटनी साउथ स्टेशन पर हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 और 13026 सहित भोपाल धनबाद भोपाल चोपन भोपाल सिंगरौली और सिंगरौली भोपाल जैसी सेवाओं को अस्थाई ठहराव दिया जाएगा।

    यार्ड के काम का असर मेमू ट्रेनों पर भी पड़ेगा। कोटा बीना मेमू 61633 को निर्धारित अवधि में बीना के बजाय मुंगावली में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। वहीं बीना भोपाल की कुछ मेमू सेवाओं को बीना के बजाय मंडी बामोरा से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना मेमू भी निर्धारित अवधि में मंडी बामोरा में शॉर्ट टर्मिनेट होगी।

    रीमॉडलिंग के दौरान बीना स्टेशन पर कई ट्रेनों के ठहराव समय में भी कटौती की गई है। जिन ट्रेनों का निर्धारित ठहराव 10 मिनट था उनमें इसे घटाकर दो मिनट किया गया है। पांच मिनट वाले ठहराव को भी दो मिनट किया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि सितंबर और अक्टूबर में बीना होकर यात्रा करने से पहले ट्रेन का नंबर रूट ठहराव और शुरुआती या अंतिम स्टेशन जरूर जांच लें। यार्ड रीमॉडलिंग पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

  • उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

    उर्स-ए-रजवी: बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव, यात्रियों की सुविधा के लिए छह स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी


    बरेली।
    आला हजरत के उर्स-ए-रजवी के मद्देनजर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। 6 से 8 अगस्त तक बरेली जंक्शन पर 25 ट्रेनों को अतिरिक्त ठहराव दिया जाएगा। इनमें छह ऐसी सुपरफास्ट ट्रेनें भी शामिल हैं, जिनका नियमित रूप से यहां ठहराव नहीं होता। इसके अलावा आठ अगस्त को तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा।

    सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि उर्स के दौरान 20 ट्रेनों के ठहराव की अवधि बढ़ाई गई है, ताकि यात्रियों को चढ़ने और उतरने में सुविधा मिल सके। वहीं, बरेली-सहारनपुर, इज्जतनगर-लालकुआं और बरेली सिटी-पीलीभीत रूट पर तीन जोड़ी विशेष अनारक्षित ट्रेनें चलाई जाएंगी।

    इन ट्रेनों को मिलेगा अतिरिक्त ठहराव
    अस्थायी रूप से जिन प्रमुख ट्रेनों का बरेली जंक्शन पर ठहराव रहेगा, उनमें गंगा-सतलुज एक्सप्रेस, अर्चना एक्सप्रेस, जम्मूतवी-कानपुर सेंट्रल सुपरफास्ट, जननायक एक्सप्रेस, चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस, काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस, जनसेवा एक्सप्रेस, योग नगरी ऋषिकेश-प्रयागराज संगम एक्सप्रेस, शहीद एक्सप्रेस, सरयू-यमुना एक्सप्रेस, अकाल तख्त एक्सप्रेस, कोलकाता-नांगल डैम एक्सप्रेस और जलियांवाला बाग एक्सप्रेस शामिल हैं।

    इसके अलावा जनसाधारण एक्सप्रेस, बेगमपुरा एक्सप्रेस और सप्तक्रांति एक्सप्रेस की दोनों दिशाओं की सेवाओं को भी बरेली जंक्शन पर अतिरिक्त अस्थायी ठहराव दिया गया है। रेलवे ने बताया कि 8 अगस्त को बरेली-मुरादाबाद पैसेंजर (64177) अपने निर्धारित समय दोपहर 2:40 बजे के बजाय 3:45 बजे रवाना होगी।

    दिल्ली कैंट पर चार ट्रेनों का ठहराव रहेगा निरस्त
    उधर, दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 के उन्नयन कार्य के चलते 13 अक्तूबर तक चार ट्रेनों का वहां ठहराव अस्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है। इनमें जैसलमेर-काठगोदाम एक्सप्रेस, साबरमती-वाराणसी सुपरफास्ट, उदयपुर सिटी-नई दिल्ली एक्सप्रेस और बीकानेर-हावड़ा साप्ताहिक एक्सप्रेस शामिल हैं। यात्रियों से यात्रा से पहले ट्रेन की अद्यतन स्थिति की जानकारी लेने की अपील की गई है।

  • झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी

    झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी


    झांसी। मऊरानीपुर-रोरा रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के तहत होने वाले नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य की तिथि में बदलाव किया गया है। अब रेल संरक्षा आयुक्त का निरीक्षण 28 जुलाई की बजाय 29 जुलाई को होगा। इसके चलते झांसी मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों के संचालन में संशोधन किया गया है।

    मंडल जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि झांसी-बांदा, झांसी-मानिकपुर और ग्वालियर-प्रयागराज रेलखंड पर चलने वाली छह ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में निरस्त रहेंगी। वहीं, खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस और उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को भी निर्धारित अवधि के लिए नियंत्रित किया जाएगा।

    इन ट्रेनों का संचालन रहेगा प्रभावित
    11801 ग्वालियर-प्रयागराज एक्सप्रेस – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    11802 प्रयागराज-ग्वालियर एक्सप्रेस – 29 और 30 जुलाई को रद्द।
    64613 झांसी-बांदा मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64614 बांदा-झांसी मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64611 झांसी-मानिकपुर मेमू – 29 जुलाई को रद्द।
    64612 मानिकपुर-झांसी मेमू – 30 जुलाई को रद्द।

    दो एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला जाएगा मार्ग
    19666 उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस 28 जुलाई को अपने सामान्य झांसी–महोबा–खजुराहो मार्ग की बजाय झांसी–दैलवारा–बिरारी–खजुराहो रूट से संचालित होगी। इसी तरह 19665 खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस 29 जुलाई को खजुराहो–महोबा–झांसी के स्थान पर खजुराहो–बिरारी–दैलवारा–झांसी मार्ग से चलेगी।

    हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस होगी लेट
    20975 हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को 28 जुलाई को एक फेरे के दौरान प्रयागराज मंडल में 150 मिनट और झांसी मंडल में 60 मिनट, यानी कुल 210 मिनट तक नियंत्रित किया जाएगा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति NTES, रेल कनेक्ट ऐप या रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

  • यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव

    यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव


    झांसी। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने तीन विशेष ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। ये सभी स्पेशल ट्रेनें वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन पर निर्धारित ठहराव के साथ अपने गंतव्य तक जाएंगी।

    मुंबई सेंट्रल-कटिहार स्पेशल (09189) का संचालन प्रत्येक शनिवार 29 अगस्त तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर सुबह 8:09 बजे पहुंचेगी। वापसी में कटिहार-मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09190) 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 1 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 10:40 बजे (22:40 बजे) रुकेगी। दोनों दिशाओं में यह ट्रेन कुल पांच-पांच फेरे लगाएगी।

    इसके अलावा सूरत-छपरा स्पेशल (09065) का संचालन 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 29 सितंबर तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर रात 1:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में छपरा-सूरत स्पेशल (09066) 29 जुलाई से प्रत्येक बुधवार 30 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर शाम 5:25 बजे (17:25 बजे) ठहरेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में नौ-नौ फेरे लगाएगी।

    वहीं अहमदाबाद-दरभंगा स्पेशल (09465) 31 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार 11 सितंबर तक संचालित होगी। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर दोपहर 12:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल (09466) 3 अगस्त से प्रत्येक सोमवार 14 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 12:05 बजे (00:05 बजे) ठहराव करेगी। इस स्पेशल ट्रेन के भी दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे निर्धारित किए गए हैं।

    रेलवे का कहना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी और त्योहार व अवकाश के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

  • आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम

    आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण पूरा कर लिया है। यह 10 कोच वाली आधुनिक ट्रेन अब तक 1200 किलोमीटर से अधिक की दूरी सफलतापूर्वक तय कर चुकी है और इस दौरान 3200 लीटर से अधिक डीजल की बचत हुई है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस ट्रेन से संचालन के दौरान केवल जलवाष्प निकलती है जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल परिवहन प्रणाली के रूप में सामने आई है।

    रेल मंत्रालय के अनुसार इस ट्रेन में बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा ट्रेन को चलाती है और उप उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रौद्योगिकियों में शामिल माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि भविष्य में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को भी नई गति मिलेगी।

    इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं जो कुल 2400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों का भी उपयोग किया गया है जो ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती हैं। इसके साथ लगभग 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित करने की क्षमता विकसित की गई है। हाइड्रोजन को उच्च दबाव पर सुरक्षित रखा जाता है और नियंत्रित तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है।

    सुरक्षा के लिहाज से भी इस ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। गैस रिसाव अत्यधिक तापमान आग और धुएं का तुरंत पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां इसमें लगाई गई हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक शट ऑफ सिस्टम निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक परीक्षण भी पूरे किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों और परिचालन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    रेल मंत्रालय ने बताया कि जींद और सोनीपत के बीच सफल परीक्षण के बाद अब इस ट्रेन का ट्रायल दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा। यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो भविष्य में इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य रेल मार्गों पर भी किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और रेलवे के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।

    केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी किया जा सकेगा। उनके अनुसार हाइड्रोजन आने वाले समय का प्रमुख स्वच्छ ईंधन बनने जा रहा है और भारतीय रेलवे इस दिशा में लगातार नवाचार कर रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान मिलेगी। भारत की यह उपलब्धि न केवल रेलवे के लिए बल्कि हरित ऊर्जा आधारित भविष्य की ओर बढ़ते देश के संकल्प का भी मजबूत प्रतीक बनकर उभरी है।

  • झांसी रेलवे स्टेशन के फूड प्लाजा में लगी आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका, समय रहते टला बड़ा हादसा

    झांसी रेलवे स्टेशन के फूड प्लाजा में लगी आग, शॉर्ट सर्किट की आशंका, समय रहते टला बड़ा हादसा


    झांसी। झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 स्थित फूड प्लाजा के किचन में शनिवार सुबह अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। धुआं और आग की लपटें उठती देख कर्मचारियों ने तुरंत अग्निशमन यंत्रों से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग पर काबू नहीं पाने के बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई।

    सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया। समय रहते आग बुझा दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। घटना के दौरान कुछ समय के लिए फूड प्लाजा और आसपास के क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

    हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है। अग्निशमन अधिकारी राजकिशोर राय ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रही है। वहीं, रेलवे प्रशासन भी पूरे मामले की जांच कर रहा है, ताकि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

  • आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    झांसी। आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर चित्रकूट में लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे ने 13 से 15 जुलाई तक दो मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। इसके अलावा, यात्रियों की संख्या बढ़ने पर झांसी-बांदा मेमू ट्रेन को आवश्यकता के अनुसार चित्रकूटधाम कर्वी तक बढ़ाया जाएगा।

    रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पहली मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से सुबह 10:10 बजे रवाना होगी और शाम 5:45 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन शाम 7:25 बजे कर्वी से चलेगी और रात 1:00 बजे झांसी पहुंचेगी।

    दूसरी मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से रात 8:10 बजे प्रस्थान करेगी और तड़के 3:05 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन सुबह 4:40 बजे कर्वी से रवाना होकर 11:10 बजे झांसी पहुंचेगी।

    रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही तो झांसी-बांदा मेमू ट्रेन की अप और डाउन दोनों सेवाओं का विस्तार कर उन्हें चित्रकूटधाम कर्वी तक संचालित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  • ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं

    ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं


    नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने जिस नई रणनीति को अपनाया है उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। रेलवे पटरियों के किनारे ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद न केवल ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है बल्कि पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के इस संयोजन ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।

    आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में मई तक चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज हुए थे और 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2026 की इसी अवधि में घटनाओं की संख्या घटकर 144 रह गई जबकि 138 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार गिरफ्तारियों में लगभग 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो आरपीएफ की नई रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में संवेदनशील रेलवे मार्गों पर दो ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। आदर्श नगर नरेला पानीपत रेलखंड को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जैसे ही कोई ट्रेन इस मार्ग से गुजरती है ड्रोन हवा में सक्रिय हो जाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकट मौजूद सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है जिससे आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए जाते हैं।

    हालांकि आरपीएफ का मानना है कि पत्थरबाजी की हर घटना के पीछे संगठित अपराध नहीं होता। कई मामलों में रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चे भी शरारत में पत्थर फेंक देते हैं। वर्ष 2025 में 37 बच्चों की संलिप्तता वाली 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था जबकि इस वर्ष 11 बच्चों से जुड़ी छह घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई के बजाय समझाइश और परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

    अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन के आसपास रहने वाले कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय पटरियों के पास खेलते हुए बिताते हैं। खेल खेल में वे गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आरपीएफ गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चला रही है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें रेलवे ट्रैक के पास बच्चों को न खेलने देने की सलाह दी जा रही है।

    आरपीएफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे पटरियों के किनारे बनी अनधिकृत बस्तियां असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। कई बार शराब के नशे में लोग ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा अवैध रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग ट्रेन गुजरने के दौरान इंतजार से नाराज होकर भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    ड्रोन निगरानी के साथ साथ रेलवे पटरियों के किनारे सोलर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरे भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 76 कैमरे लगाए जा चुके हैं और अब 50 नए कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक मजबूत निगरानी और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आरपीएफ को उम्मीद है कि आने वाले समय में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में और अधिक कमी आएगी तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

  • जबलपुर रेलवे स्टेशन पर विजिलेंस का एक्शन, 3 टीटीई सस्पेंड; जांच में मिले 46 हजार रुपए अतिरिक्त

    जबलपुर रेलवे स्टेशन पर विजिलेंस का एक्शन, 3 टीटीई सस्पेंड; जांच में मिले 46 हजार रुपए अतिरिक्त


    मध्यप्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन पर पश्चिम मध्य रेलवे के विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोंडवाना एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात तीन टीटीई को संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पकड़ लिया है। जांच के दौरान तीनों टीटीई के पास निर्धारित सीमा से करीब 46 हजार रुपए अधिक नकदी पाई गई, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है।

    मामला सोमवार का है, जब दिल्ली से जबलपुर पहुंची गोंडवाना एक्सप्रेस ट्रेन में विजिलेंस टीम ने अचानक जांच अभियान चलाया। ट्रेन के एसी और स्लीपर कोच में ड्यूटी पर तैनात टीटीई मनोज कुशवाहा, कुंदन कुमार और अनिकेश कुमार की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी। यह कार्रवाई यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई।

    जानकारी के अनुसार, यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को शिकायत दी थी कि टीटीई उनसे जुर्माना और अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी जा रही। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने जबलपुर स्टेशन पर पहले से ही निगरानी बढ़ा दी थी और ट्रेन के पहुंचते ही जांच शुरू कर दी।

    जांच के दौरान टीम ने तीनों टीटीई के पास मौजूद नकदी का मिलान किया, जिसमें भारी गड़बड़ी सामने आई। कुंदन कुमार के पास 32 हजार रुपए अतिरिक्त पाए गए, जबकि अनिकेश कुमार के पास 14 हजार रुपए और मनोज कुशवाहा के पास 300 रुपए अतिरिक्त नकदी मिली। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 46 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि पाई गई।

    सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि एक टीटीई ने अपनी अतिरिक्त नकदी दूसरे टीटीई को सौंप दी थी, जिससे प्रारंभिक जांच में रकम का असंतुलन दिखाई दिया। हालांकि रेलवे विजिलेंस टीम इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि यह राशि किस उद्देश्य से एक-दूसरे को दी गई थी और इसका स्रोत क्या था।

    मामले के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों टीटीई को तत्काल निलंबित कर दिया है। सीनियर डीसीएम डॉ. मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों की शिकायतों और जांच में सामने आई अनियमितताओं को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि रेलवे में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला न केवल अनुशासनहीनता से जुड़ा है, बल्कि यात्रियों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस तरह की शिकायतों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अतिरिक्त राशि किस आधार पर वसूली गई थी, क्या इसमें अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।