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  • रेल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने की पहल, भोपाल में विशेष उपकरण से बदली गई बोगी की तकनीक

    रेल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने की पहल, भोपाल में विशेष उपकरण से बदली गई बोगी की तकनीक


    भोपाल । भोपाल स्थित सवारी डिब्बा पुनर्वास कारखाने यानी सीआरडब्ल्यूएस ने रेलवे के तकनीकी कामकाज में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कारखाने में पहली बार कॉइल स्प्रिंग बोगी को एयर सस्पेंशन बोगी में बदलने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य रेल यात्रा के दौरान कोच में महसूस होने वाले झटकों और कंपन के प्रभाव को कम करना है। इससे यात्रियों को अपेक्षाकृत आरामदायक सफर का अनुभव मिल सकता है। खासकर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह तकनीकी सुधार उपयोगी साबित हो सकता है।

    पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले इस कारखाने में बोगी के निचले ढांचे में एयर सस्पेंशन प्रणाली लगाने के लिए विशेष उपकरण तैयार किया गया। इस काम की खास बात यह रही कि कारखाने में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए तकनीकी जरूरत के अनुसार उपकरण बनाया गया। इसकी सहायता से बोगी में चारों कंसोल को निर्धारित स्थान पर सटीकता के साथ लगाने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस तरह के तकनीकी बदलाव में सटीक माप और सही फिटिंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि बोगी के विभिन्न हिस्सों की स्थिति और उनकी कार्यप्रणाली का असर कोच के संचालन पर पड़ता है।

    इस प्रक्रिया के दौरान पुराने कंसोल को हटाकर उनकी जगह नए कंसोल और ब्रैकेट लगाए गए। यह काम तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मौजूदा ढांचे में बदलाव करते हुए नए सस्पेंशन सिस्टम के अनुरूप व्यवस्था तैयार करनी थी। कारखाने के कर्मचारियों ने विशेष उपकरण की मदद से इस काम को पूरा किया। इससे यह भी सामने आया कि जरूरत के अनुसार स्थानीय स्तर पर उपकरण विकसित करके तकनीकी कार्यों को अधिक सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सकता है।

    कॉइल स्प्रिंग और एयर सस्पेंशन प्रणाली में मुख्य अंतर उनके काम करने के तरीके का है। कॉइल स्प्रिंग में धातु की स्प्रिंग के माध्यम से झटकों को संभालने में मदद मिलती है जबकि एयर सस्पेंशन में हवा के दबाव पर काम करने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। एयर सस्पेंशन प्रणाली का उद्देश्य कोच को मिलने वाले झटकों और कंपन के असर को कम करना है। हालांकि वास्तविक आराम और प्रदर्शन का आकलन संबंधित तकनीकी परीक्षणों और परिचालन परिणामों के आधार पर ही किया जा सकता है।

    रेलवे में यात्रियों की सुविधा के साथ कोचों की गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। भोपाल के सीआरडब्ल्यूएस में किया गया यह काम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। विशेष उपकरण तैयार करने और मौजूदा बोगी के ढांचे में जरूरी बदलाव करने का अनुभव भविष्य में इस तरह के अन्य तकनीकी कार्यों में भी मददगार हो सकता है।

    इस उपलब्धि से कारखाने के कर्मचारियों की तकनीकी क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की भूमिका भी सामने आई है। एयर सस्पेंशन प्रणाली से लैस बोगी का वास्तविक लाभ उसके परीक्षण और संचालन के बाद स्पष्ट होगा। फिर भी इस तरह के प्रयोग रेलवे को कोचों की तकनीक में सुधार करने और यात्रियों के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में नए विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं।

  • MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन

    MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बीना रेलवे स्टेशन पर चल रहे यार्ड रीमॉडलिंग के काम का असर रेल संचालन पर पड़ रहा है। रविवार 25 अक्टूबर को बीना और रूठियाई के बीच चलने वाली चार मेमू ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इसके अलावा भोपाल कटनी कोटा नागदा दमोह और ललितपुर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों के शुरुआती या अंतिम स्टेशन में बदलाव किया गया है। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक रूट से चलाने की व्यवस्था की गई है। इन बदलावों के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    रेलवे के अनुसार बीना स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक और प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के साथ परिचालन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी बदलाव किए गए हैं। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और बदले हुए स्टॉपेज की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। इसके लिए रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक पूछताछ माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

    रविवार को बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61611 और रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61612 के साथ बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61625 तथा रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61626 निरस्त रहेंगी। इन ट्रेनों के बंद रहने से इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

    भोपाल और बीना के बीच चलने वाली ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया गया है। भोपाल-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61631 और 11605 बीना के बजाय मंडी बामोरा स्टेशन पर अपनी यात्रा समाप्त करेंगी। वहीं बीना-भोपाल मेमू ट्रेन नंबर 11606 और 61632 मंडी बामोरा से रवाना होंगी। यह बदलाव 25 अक्टूबर तक निर्धारित है। ऐसे में भोपाल और बीना के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मंडी बामोरा से आगे जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    दमोह और ग्वालियर रूट पर भी ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। बीना-दमोह पैसेंजर ट्रेन नंबर 51885 मालखेड़ी स्टेशन से शाम 6 बजकर 10 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। वहीं दमोह-बीना पैसेंजर ट्रेन नंबर 51886 की यात्रा मालखेड़ी में समाप्त होने का समय सुबह 11 बजकर 45 मिनट तय किया गया था। बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन नंबर 51883 भी 24 अक्टूबर तक मालखेड़ी से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को तारीख के अनुसार परिचालन की पुष्टि करनी चाहिए।

    नागदा रूट पर नागदा-बीना एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19341 गुना स्टेशन पर यात्रा समाप्त करेगी जबकि बीना-नागदा एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19342 25 अक्टूबर तक गुना से रवाना होने के लिए निर्धारित है। ललितपुर रूट पर ललितपुर-बीना मेमू ट्रेन नंबर 64618 आगासोद स्टेशन पर समाप्त होगी और बीना-ललितपुर मेमू ट्रेन नंबर 64617 आगासोद से शुरू होगी।

    कटनी रूट पर कटनी-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11602 खुरई स्टेशन पर समाप्त होगी जबकि बीना-कटनी मेमू ट्रेन नंबर 11601 26 अक्टूबर तक खुरई से रवाना होगी। कोटा रूट पर कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11603 महादेवखेड़ी में समाप्त होगी और बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 61634 वहीं से शुरू होगी। कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61633 मुंगावली में समाप्त होगी जबकि बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 11604 26 अक्टूबर तक मुंगावली से रवाना होने के लिए निर्धारित है।

    बीना-कटनी मुड़वारा मेमू ट्रेन नंबर 61619 भी 26 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी से फ्लाईओवर मार्ग के जरिए सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर चलने के लिए निर्धारित है। वहीं कटनी मुड़वारा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61620 को 25 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी तक विस्तारित किया गया है। इसका निर्धारित आगमन समय रात 12 बजकर 50 मिनट है।

    रेलवे की सूचना के अनुसार कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी अलग-अलग तारीखों में वैकल्पिक मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई थी। इनमें बांद्रा टर्मिनस-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस अहमदाबाद-बनारस सिटी एक्सप्रेस और बनारस सिटी-अहमदाबाद एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के लिए बताई गई कई तारीखें 20 से 24 अक्टूबर के बीच की हैं। इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ताजा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के चलते हुए इन अस्थायी बदलावों के बीच सही जानकारी लेकर स्टेशन पहुंचना यात्रियों के लिए जरूरी है।

  • दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू

    दीपावली और छठ पर घर जाना होगा आसान, ग्वालियर-गांधीनगर समेत 4 ट्रेनों में स्लीपर कोच बढ़ाए, नई व्यवस्था लागू


    ग्वालियर । दीपावली और छठ पूजा के दौरान ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने राहत देने वाला फैसला लिया है। त्योहारों के समय बढ़ती भीड़ और स्लीपर क्लास में सीटों की मांग को देखते हुए चार ट्रेनों के कोच कंपोजिशन में बदलाव किया गया है। इन ट्रेनों में थर्ड एसी इकोनॉमी कोच की संख्या घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाए गए हैं। रेलवे के इस फैसले से उन यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है जो त्योहारों पर अपने घर जाने या दूसरे शहरों की यात्रा करने के लिए स्लीपर क्लास में टिकट बुक कराते हैं।

    रेलवे के अनुसार कोच व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य यात्रियों की जरूरत के हिसाब से सीटों की उपलब्धता बढ़ाना है। दीपावली और छठ पूजा के आसपास ग्वालियर और झांसी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग गुजरात और महाराष्ट्र की ओर यात्रा करते हैं। त्योहारों के दौरान ट्रेनों में भीड़ बढ़ने से टिकटों की मांग भी काफी बढ़ जाती है। ऐसे में यात्रियों को कई बार वेटिंग टिकट लेकर सफर की योजना बनानी पड़ती है। स्लीपर कोच बढ़ने से इस श्रेणी में अतिरिक्त बर्थ उपलब्ध हो सकेंगी।

    रेलवे ने जिन ट्रेनों की व्यवस्था में बदलाव किया है उनमें ग्वालियर-गांधीनगर एक्सप्रेस और झांसी-बांद्रा स्पेशल शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन दोनों ट्रेनों में नई कोच व्यवस्था 21 और 22 अक्टूबर से लागू की गई है। बाकी दो ट्रेनों के नाम और उनमें बदलाव लागू होने की तारीख की जानकारी संबंधित रेलवे सूचना से स्पष्ट होने पर ही बताई जा सकती है।

    त्योहारों के समय लंबी दूरी की ट्रेनों में स्लीपर क्लास की मांग अधिक रहती है। बड़ी संख्या में यात्री परिवार के साथ सफर करते हैं और किफायती किराए के कारण स्लीपर श्रेणी को प्राथमिकता देते हैं। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर इसी श्रेणी में सीटों की कमी और वेटिंग की समस्या सामने आती है। ऐसे में एसी इकोनॉमी कोच घटाकर स्लीपर कोच बढ़ाने का फैसला यात्रियों की मांग के अनुरूप माना जा रहा है।

    हालांकि कोचों की संख्या में बदलाव का मतलब यह नहीं है कि हर ट्रेन में हर तारीख पर सीट मिलना सुनिश्चित हो गया है। यात्रियों को यात्रा से पहले संबंधित ट्रेन में उपलब्ध सीटों और टिकट की स्थिति की जांच कर लेनी चाहिए। साथ ही ट्रेन के कोच कंपोजिशन और यात्रा संबंधी ताजा जानकारी के लिए रेलवे के आधिकारिक आरक्षण माध्यमों पर भरोसा करना चाहिए।

    रेलवे का यह कदम त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए उठाया गया है। स्लीपर कोच में बर्थ बढ़ने से अधिक यात्रियों को आरक्षण मिलने की संभावना बनेगी और उन्हें यात्रा की योजना बनाने में कुछ राहत मिल सकती है।

  • बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे

    बिना टिकट पकड़े जाने पर विवाद हुआ तो कैमरा खोलेगा राज, भोपाल मंडल के TTE को मिलेंगे बॉडी वियरिंग कैमरे


    भोपाल । ट्रेनों में टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने नई पहल की है। अब टिकट चेकिंग स्टाफ की वर्दी पर बॉडी वियरिंग कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए रेलवे ने 56 कैमरों का ऑर्डर दिया है। इन कैमरों की मदद से टिकट चेकिंग के दौरान यात्री और कर्मचारी के बीच होने वाली बातचीत तथा घटनाक्रम को रिकॉर्ड किया जा सकेगा। रेलवे को उम्मीद है कि इससे शिकायतों की जांच आसान होगी और टिकट चेकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया के मुताबिक पिछले दो साल से टिकट चेकिंग स्टाफ के लिए बॉडी वियरिंग कैमरों की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब इन्हें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेलवे की तैयारी अगले दो से तीन महीने में कैमरों का इस्तेमाल शुरू करने की है। शुरुआती चरण में इनका उपयोग प्रमुख ट्रेनों में किया जाएगा। इसके बाद जरूरत और उपलब्धता के अनुसार दूसरे चरण में अधिक कर्मचारियों को भी कैमरों से लैस किया जा सकता है।

    दरअसल टिकट चेकिंग स्टाफ यात्रियों के सीधे संपर्क में रहता है। ट्रेन में बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कई बार बहस या विवाद की स्थिति बन जाती है। कुछ मामलों में यात्री कर्मचारियों पर दुर्व्यवहार करने या उनकी बात नहीं सुनने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराते हैं। दूसरी ओर कर्मचारियों को भी ड्यूटी के दौरान विवादों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में शिकायत मिलने के बाद रेलवे को यह पता लगाने के लिए जांच करनी पड़ती है कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था। इसमें समय लग सकता है।

    बॉडी वियरिंग कैमरों से रिकॉर्ड होने वाली बातचीत और घटनाक्रम शिकायतों की जांच में मददगार साबित हो सकते हैं। रेलवे के अनुसार रेल मदद पर मिलने वाली शिकायतों का मंडल स्तर पर विश्लेषण किया जाता है। यदि किसी घटना की रिकॉर्डिंग उपलब्ध होगी तो संबंधित अधिकारियों के लिए दोनों पक्षों की भूमिका समझना और शिकायत का उचित निराकरण करना आसान हो सकता है। इससे बिना टिकट यात्रा पर कार्रवाई या टिकट चेकिंग के दौरान हुए विवादों की जांच में भी मदद मिलेगी।

    रेलवे पहले चरण में शान-ए-भोपाल और वंदे भारत जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में कैमरों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा भोपाल मंडल से शुरू होने वाली या यहां से गुजरने वाली अन्य प्रमुख ट्रेनों में भी इन्हें लगाया जा सकता है। शुरुआत में 56 कैमरे उपलब्ध कराए जाएंगे। आगे चलकर इस व्यवस्था का विस्तार करने की योजना है।

    भोपाल मंडल में टिकट चेकिंग स्टाफ की संख्या करीब 300 से 320 बताई गई है। ऐसे में शुरुआती कैमरों के बाद बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा से जोड़ने की तैयारी की जा सकती है। रेलवे बुकिंग और रिजर्वेशन काउंटरों पर तैनात कर्मचारियों के लिए भी बॉडी वियरिंग कैमरों की संभावनाओं पर विचार करेगा।
    रेलवे का उद्देश्य केवल शिकायतों की जांच करना नहीं बल्कि टिकट चेकिंग प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना भी है।

    रिकॉर्डिंग से यात्रियों और कर्मचारियों दोनों को अपना पक्ष रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि इस व्यवस्था का वास्तविक असर कैमरों के नियमित इस्तेमाल और रिकॉर्डिंग के उचित प्रबंधन पर निर्भर करेगा। फिलहाल कैमरों की खरीद की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले दो से तीन महीनों में इन्हें इस्तेमाल में लाने की तैयारी है।

  • नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट

    नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट


    भोपाल । शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विंध्याचल स्टेशन पर 12 एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया गया है। यह सुविधा 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। निर्धारित ट्रेनों को स्टेशन पर दो-दो मिनट का ठहराव दिया जाएगा। इससे मेले के दौरान विंध्याचल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिल सकती है। रेलवे ने मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति भी 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है।
    पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के अनुसार नवरात्र मेले में यात्रियों की अतिरिक्त आवाजाही को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव पाने वाली ट्रेनों में मुंबई से पाटलिपुत्र डिब्रूगढ़ गुवाहाटी भागलपुर दानापुर और बनारस सहित विभिन्न शहरों के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले श्रद्धालु निर्धारित समय पर विंध्याचल स्टेशन पर उतरकर आगे की यात्रा की योजना बना सकेंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का समय जरूर जांच लें।
    रेलवे की सूची के अनुसार लोकमान्य तिलक टर्मिनस से पाटलिपुत्र जाने वाली ट्रेन संख्या 12141 रात 10:30 बजे से 10:32 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर रुकेगी। पाटलिपुत्र से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12142 शाम 4:05 बजे से 4:07 बजे तक ठहरेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन संख्या 15945 और गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन संख्या 15647 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक स्टेशन पर रुकेंगी। वहीं डिब्रूगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15946 और गुवाहाटी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15648 शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक ठहरेंगी।
    भागलपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12335 भी शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक रुकेगी। इसके विपरीत दिशा में चलने वाली ट्रेन संख्या 12336 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव लेगी। सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से दानापुर जाने वाली ट्रेन संख्या 12295 रात 1:40 बजे से 1:42 बजे तक और दानापुर से बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन संख्या 12296 रात 12:35 बजे से 12:37 बजे तक स्टेशन पर रुकेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बनारस जाने वाली ट्रेन संख्या 12167 रात 10:15 बजे से 10:17 बजे तक जबकि बनारस से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12168 दोपहर 12:10 बजे से 12:12 बजे तक ठहराव लेगी।
    दूसरी ओर मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। रेलवे ने नवरात्र मेले के दौरान सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। गति सीमा लागू होने से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।
    नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में अस्थायी ठहराव और गति सीमा जैसी व्यवस्थाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यात्रा पर निकलने से पहले रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से ट्रेन का समय ठहराव और संभावित बदलाव की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा।

  • मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत का बेंगलुरु तक विस्तार, हासन, उडुपी और कारवार होते हुए चलेगी नई सेवा

    मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत का बेंगलुरु तक विस्तार, हासन, उडुपी और कारवार होते हुए चलेगी नई सेवा


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का विस्तार बेंगलुरु तक कर दिया है। अब यह ट्रेन हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु और मडगांव के बीच चलेगी। बदली हुई व्यवस्था के तहत ट्रेन नई समय-सारणी के साथ ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में संचालित होगी। इस विस्तार की जानकारी केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी की ओर से दी गई। नई व्यवस्था से इस रेल मार्ग पर यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ेंगे और बेंगलुरु, तटीय कर्नाटक तथा गोवा के बीच रेल संपर्क को विस्तार मिलेगा।

    कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने बताया कि मौजूदा मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस को अब बेंगलुरु तक बढ़ाया गया है। ट्रेन हासन, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। कुमारस्वामी कर्नाटक की मांड्या लोकसभा सीट से सांसद हैं और वर्तमान में केंद्र सरकार में भारी उद्योग और इस्पात मंत्री हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते यात्री यातायात के साथ पर्यटन, धार्मिक यात्रा, शिक्षा और व्यापार के लिए इस मार्ग के महत्व को ध्यान में रखते हुए उन्होंने हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार होते हुए बेंगलुरु तथा मडगांव को जोड़ने वाली वंदे भारत सेवा शुरू करने का अनुरोध किया था।

    कुमारस्वामी ने अपने बयान में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुरोध पर रेल मंत्री की ओर से तुरंत और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई। इसके बाद मौजूदा मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस का विस्तार बेंगलुरु तक किया गया है। अब यह ट्रेन बदली हुई समय-सारणी के साथ ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के रूप में चलेगी। नई व्यवस्था में हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार के रास्ते बेंगलुरु और मडगांव को जोड़ा गया है।

    कुमारस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और बेंगलुरु, तटीय कर्नाटक तथा गोवा को एक-दूसरे के करीब लाने की दिशा में यह एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क से यात्रियों को सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही पर्यटन, क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों और राज्यों के बीच आपसी संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा। मडगांव-मंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस के बेंगलुरु तक विस्तार के साथ इस रेल मार्ग से जुड़े यात्रियों को अब नई सेवा के जरिए यात्रा का विकल्प मिलेगा।

    रेल सेवा के इस विस्तार में बेंगलुरु से मडगांव के बीच हासन, मंगलुरु, उडुपी और कारवार को जोड़ा गया है। मौजूदा ट्रेन सेवा को विस्तार देने के साथ इसका नाम और ट्रेन नंबर भी बदला गया है। नई व्यवस्था में ट्रेन नंबर 26655/26656 यशवंतपुर-मंगलुरु-मडगांव वंदे भारत एक्सप्रेस के तौर पर सेवा संचालित होगी। इसके लिए बेहतर समय-सारणी तय की गई है। इस विस्तार को यात्रियों की बढ़ती जरूरतों, पर्यटन, धार्मिक यात्रा, शिक्षा और व्यापार के लिए इस मार्ग के महत्व से जोड़कर देखा गया है। बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए यात्रियों की सुविधा के साथ क्षेत्रीय गतिविधियों और राज्यों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

  • भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से ज्यादा वसूली का आरोप ₹2 का टॉयलेट ₹10 में और दो लोगों से ₹40 लेने का दावा

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से ज्यादा वसूली का आरोप ₹2 का टॉयलेट ₹10 में और दो लोगों से ₹40 लेने का दावा


    भोपाल । भोपाल रेलवे स्टेशन पर गुरुवार सुबह स्वच्छता कार्यक्रम के दौरान पे एंड यूज टॉयलेट को लेकर यात्रियों की शिकायतों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। खास बात यह रही कि जिस समय स्टेशन परिसर में स्वच्छता कार्यक्रम चल रहा था उसी दौरान भोपाल रेल मंडल के DRM पंकज त्यागी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी वहां मौजूद थे। इसी दौरान कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि फ्री यूरिनल के लिए भी पैसे मांगे जा रहे हैं जबकि तय शुल्क से ज्यादा रकम लेकर टॉयलेट इस्तेमाल करने दिया जा रहा है। यात्रियों की ओर से मौके के वीडियो भी बनाए गए हैं जिनमें काउंटर पर शुल्क को लेकर बातचीत होती दिखाई दे रही है।

    रेलवे की निर्धारित दरों के अनुसार भोपाल स्टेशन पर यूरिनल की सुविधा नि:शुल्क बताई गई है। वहीं टॉयलेट के लिए 2 रुपए और टॉयलेट के साथ स्नान की सुविधा के लिए 5 रुपए शुल्क निर्धारित है। सामने आए वीडियो में एक यात्री काउंटर पर मौजूद कर्मचारी से शुल्क के बारे में पूछता नजर आता है। यात्री बोर्ड पर फ्री लिखा होने की बात कहता है और इसके बावजूद पैसे मांगे जाने पर सवाल करता है। वीडियो में कर्मचारी की ओर से रकम लेने की स्थिति दिखाई देती है।

    यात्री संतोष यादव ने आरोप लगाया कि वह स्टेशन के टॉयलेट का इस्तेमाल करने गए थे। वहां निर्धारित शुल्क 2 रुपए लिखा होने के बावजूद उनसे 10 रुपए मांगे गए और उन्होंने 10 रुपए दिए। इसी तरह यात्री गगन गौर ने दावा किया कि दो लोग टॉयलेट और स्नान के लिए गए थे और उनसे कुल 40 रुपए लिए गए। हालांकि इन यात्रियों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि स्टेशन प्रबंधन के रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसी के जवाब से होना बाकी है।

    मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि आरोप उस समय सामने आए जब स्टेशन परिसर में रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इससे पे एंड यूज सुविधा की निगरानी और निर्धारित दरों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि अगर शुल्क तय है तो काउंटर पर उसी के अनुसार राशि ली जानी चाहिए और फ्री सुविधा के लिए किसी यात्री से पैसे नहीं मांगे जाने चाहिए।

    इस मामले में DRM पंकज त्यागी से भी पक्ष जानने की कोशिश की गई। उनसे फ्री यूरिनल के लिए पैसे मांगे जाने और निर्धारित शुल्क से अधिक रकम लेने की शिकायतों को लेकर सवाल किया गया लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब सामने नहीं आया था। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे प्रशासन वीडियो और यात्रियों की शिकायतों के आधार पर क्या कार्रवाई करता है।

    मामला सिर्फ भोपाल रेलवे स्टेशन तक सीमित नहीं है। सामने आई जानकारी के अनुसार रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर भी यात्रियों को यूरिनल के लिए शुल्क देना पड़ रहा है। वहां पे एंड यूज व्यवस्था के तहत यूरिनल के लिए 5 रुपए टॉयलेट के लिए 10 रुपए और स्नान के लिए 15 रुपए लिए जाने की बात सामने आई है। यह व्यवस्था भोपाल स्टेशन पर बताई गई निर्धारित दरों से अलग है।

    भोपाल रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री पहुंचते हैं और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में शुल्क को लेकर स्पष्ट जानकारी और निर्धारित दरों का पालन यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल भोपाल स्टेशन पर सामने आए वीडियो और यात्रियों के आरोपों के बाद निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। अब रेलवे प्रशासन की जांच और आधिकारिक जवाब से ही स्पष्ट होगा कि वास्तव में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली हुई थी या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

  • रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी

    रेलवे स्टेशनों पर अब पानी की शुद्धता पर कड़ी नजर 893 सैंपल की जांच किसी में नहीं मिली खामी


    जबलपुर । ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने पेयजल व्यवस्था को लेकर विशेष अभियान शुरू किया है। जबलपुर भोपाल और कोटा मंडल के स्टेशनों पर यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। रेलवे की विशेष टीमें पानी के स्रोत से लेकर यात्रियों तक पहुंचने वाले नलों और वाटर बूथों की जांच कर रही हैं।

    पश्चिम मध्य रेलवे के मुताबिक पिछले एक महीने के दौरान 284 स्टेशनों पर पेयजल व्यवस्था की सघन निगरानी की गई। इस दौरान 9850 नलों और वाटर बूथों की सफाई कराई गई। इसके अलावा 893 पानी के नमूने जांच के लिए लिए गए। रेलवे के अनुसार जांच किए गए सभी नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए और कोई भी नमूना अनुपयुक्त नहीं मिला।

    पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने के लिए रेलवे केवल नलों की सफाई तक सीमित नहीं है। कई स्थानों पर पुरानी या खराब पाइपलाइन की मरम्मत और बदलाव भी कराया गया है। अब तक 130 स्थानों पर पाइपलाइन से जुड़ा काम पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही 1086 पानी की टंकियों की सफाई कराई गई है। रेलवे स्टेशनों के अलावा रेलवे की आवासीय कॉलोनियों और चिकित्सालयों में भी पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है।

    रेलवे की ओर से पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए अलग अलग स्तर पर व्यवस्था की गई है। सबसे पहले पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की रोजाना जांच की जाती है। कीटाणुशोधन के बाद पानी में क्लोरीन की निर्धारित मात्रा मौजूद है या नहीं इसकी जांच जल स्रोत से लेकर सप्लाई के अंतिम छोर तक की जाती है। अगर किसी स्थान पर पानी निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं मिलता है तो संबंधित विभाग को सूचना देकर आवश्यक क्लोरीनीकरण की प्रक्रिया कराई जाती है।

    इसके बाद पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच होती है। इसमें ई कोलाई और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी का परीक्षण किया जाता है। बड़े स्टेशनों के साथ रेलवे कॉलोनियों और चिकित्सालयों में यह जांच महीने में एक बार की जाती है। वहीं छोटे स्टेशनों और कॉलोनियों में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच महीने में दो बार किए जाने का प्रावधान है।

    पानी की रासायनिक गुणवत्ता की जांच भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मौजूदा जल स्रोतों से हर छह महीने में नमूने लेकर रासायनिक परीक्षण किया जाता है। नए जल स्रोत को उपयोग में लेने से पहले भी पानी का नमूना लिया जाता है और आवश्यक रासायनिक जांच पूरी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को मिलने वाला पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप रहे।

    पश्चिम मध्य रेलवे के अधिकारियों के अनुसार जल स्रोत से लेकर पाइपलाइन टंकियों और वाटर बूथ तक नियमित सफाई और निगरानी की जा रही है। जहां भी पानी की गुणवत्ता में कमी सामने आती है वहां संबंधित विभाग को जानकारी देकर सुधारात्मक कार्रवाई कराई जाती है।

    मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों को दूषित पानी पीने की स्थिति का सामना न करना पड़े इसके लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। इसमें पानी की आपूर्ति करने वाले प्लांट से लेकर पाइपलाइन और नलों के जरिए यात्रियों तक पहुंचने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। रेलवे का उद्देश्य पूरे सप्लाई सिस्टम पर नजर रखते हुए यात्रियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।

  • पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा

    पितृपक्ष में ट्रेनों की भीड़ से मिलेगी राहत: गया के लिए 12 स्पेशल सेवाएं, AC-स्लीपर-जनरल कोच की सुविधा


    जबलपुर । पितृपक्ष के दौरान गया जाकर पिंडदान और तर्पण करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ और नियमित ट्रेनों में दबाव को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने गया के लिए 12 स्पेशल ट्रेन सेवाएं चलाने का फैसला लिया है। इनमें रानी कमलापति से गया और जबलपुर से गया के बीच स्पेशल ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रियों की सुविधा के लिए AC स्लीपर और जनरल श्रेणी के कोच लगाए जाएंगे।

    रानी कमलापति से गया के बीच चलने वाली गाड़ी संख्या 01661 रानी कमलापति-गया स्पेशल 27 सितंबर 2 अक्टूबर और 7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी। यह ट्रेन अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01662 गया-रानी कमलापति स्पेशल 30 सितंबर 5 अक्टूबर और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से रवाना होगी और अगले दिन शाम 4 बजकर 15 मिनट पर रानी कमलापति पहुंचेगी।

    रानी कमलापति से गया जाने वाली ट्रेन को कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया गया है। इसमें नर्मदापुरम इटारसी पिपरिया नरसिंहपुर जबलपुर सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड शामिल हैं। इससे रास्ते में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी गया जाने के लिए अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

    इसी तरह जबलपुर से गया के बीच भी स्पेशल ट्रेन सेवा उपलब्ध रहेगी। गाड़ी संख्या 01701 जबलपुर-गया स्पेशल 29 सितंबर 4 अक्टूबर और 9 अक्टूबर को रात 9 बजकर 25 मिनट पर जबलपुर से रवाना होगी और अगले दिन दोपहर 2 बजकर 30 मिनट पर गया पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी संख्या 01702 गया-जबलपुर स्पेशल 28 सितंबर 3 अक्टूबर और 8 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर गया से चलेगी और अगले दिन सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर जबलपुर पहुंचेगी।

    जबलपुर-गया स्पेशल ट्रेन का ठहराव सिहोरा रोड कटनी मैहर सतना मानिकपुर प्रयागराज छिवकी मिर्जापुर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन भभुआ रोड सासाराम डेहरी-ऑन-सोन और अनुग्रह नारायण रोड पर रहेगा।

    रेलवे के मुताबिक पितृपक्ष में हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया पहुंचते हैं। पिंडदान और तर्पण के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले यात्रियों के कारण इस दौरान ट्रेनों में काफी भीड़ रहती है। इसी को देखते हुए पश्चिम मध्य रेल ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाने का फैसला किया है ताकि यात्रियों को सफर के दौरान परेशानी कम हो और नियमित ट्रेनों पर भी दबाव घटाया जा सके।

    पश्चिम मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी मधुर वर्मा ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान यात्रियों की सुविधा और भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। रेलवे ने श्रद्धालुओं और यात्रियों से अपील की है कि वे इन अतिरिक्त ट्रेनों की सुविधा का लाभ उठाएं। ऐसे में गया जाने वाले यात्रियों के लिए यह स्पेशल ट्रेनें काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।

  • ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित

    ट्रेन हादसों पर और मजबूत होगी सुरक्षा की ढाल: रेलवे ने कवच 4.0 के लिए 170 करोड़ मंजूर किए, 712 किमी ट्रैक होगा सुरक्षित


    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच 4.0 की तैनाती के लिए 170 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से उत्तरी रेलवे के मुरादाबाद डिवीजन के 712 रूट किलोमीटर बचे हुए ट्रैक पर कवच सिस्टम लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक यह परियोजना रेलवे के सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के साथ ट्रेन हादसों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कवच भारत में विकसित एक आधुनिक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है जिसे रेलवे संचालन के दौरान होने वाले संभावित खतरों को समय रहते पहचानने और दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह तकनीक खासतौर पर सिग्नल पासिंग एट डेंजर यानी एसपीएडी जैसी स्थितियों को रोकने में मदद करती है। यदि किसी कारणवश ट्रेन चालक खतरे वाले सिग्नल को पार करने की स्थिति में पहुंचता है तो सिस्टम आवश्यक परिस्थितियों में स्वतः हस्तक्षेप कर सकता है।

    कवच 4.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ट्रेन संचालन के दौरान सुरक्षा की एक अतिरिक्त और उन्नत परत प्रदान करता है। असुरक्षित स्थिति बनने पर यह सिस्टम जरूरत के अनुसार अपने आप ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। खराब दृश्यता या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ट्रेन की गति को नियंत्रित करने में भी इसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके जरिए आमने सामने या पीछे से होने वाली संभावित टक्कर के खतरे को काफी हद तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

    रेल मंत्रालय का कहना है कि यह मंजूरी भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कवच सिस्टम के विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है। रेलवे लगातार अपनी सिग्नलिंग व्यवस्था और ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम को आधुनिक तकनीक से मजबूत कर रही है। मुरादाबाद डिवीजन के शेष 712 रूट किलोमीटर हिस्से में कवच 4.0 की तैनाती से इस महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क पर यात्रियों और ट्रेन संचालन की सुरक्षा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार रेलवे सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2014-15 में जहां ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या 135 थी वहीं 2025-26 में यह घटकर 16 रह गई। चालू वित्तीय वर्ष में जून तक केवल दो दुर्घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी गई है। प्रति मिलियन ट्रेन किलोमीटर होने वाली दुर्घटनाओं का कॉन्सिक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स भी 2014-15 के 0.11 से घटकर 2025-26 में 0.01 तक पहुंच गया है।

    रेलवे ने सुरक्षा पर खर्च भी लगातार बढ़ाया है। 2013-14 में सुरक्षा संबंधी कार्यों पर करीब 39 हजार 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे जबकि 2026-27 में यह राशि बढ़कर 1 लाख 20 हजार 389 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा हजारों स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम तथा ट्रैक सर्किटिंग जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं।

    कुल मिलाकर 170 करोड़ रुपए की नई मंजूरी केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं बल्कि भारतीय रेलवे की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें भविष्य की रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कवच 4.0 के विस्तार के साथ रेलवे का लक्ष्य है कि तकनीक के जरिए मानवीय भूल और परिचालन संबंधी जोखिमों को कम किया जाए ताकि करोड़ों यात्रियों का सफर पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके।