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  • ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं

    ड्रोन तकनीक का कमाल चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने वालों की बढ़ी गिरफ्तारी आरपीएफ की सख्ती से घटी घटनाएं


    नई दिल्ली । दिल्ली एनसीआर में चलती ट्रेनों पर पत्थर फेंकने की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने जिस नई रणनीति को अपनाया है उसके सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई देने लगे हैं। रेलवे पटरियों के किनारे ड्रोन से निगरानी शुरू होने के बाद न केवल ऐसी घटनाओं में कमी दर्ज की गई है बल्कि पत्थरबाजी करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। आधुनिक तकनीक और सतर्क निगरानी के इस संयोजन ने रेल यात्रियों की सुरक्षा को पहले से कहीं अधिक मजबूत बना दिया है।

    आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में मई तक चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की 176 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें 144 मामले रेलवे अधिनियम के तहत दर्ज हुए थे और 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2026 की इसी अवधि में घटनाओं की संख्या घटकर 144 रह गई जबकि 138 मामलों में कार्रवाई करते हुए 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार गिरफ्तारियों में लगभग 146 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई जो आरपीएफ की नई रणनीति की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

    आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में संवेदनशील रेलवे मार्गों पर दो ड्रोन लगातार निगरानी कर रहे हैं। आदर्श नगर नरेला पानीपत रेलखंड को सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जैसे ही कोई ट्रेन इस मार्ग से गुजरती है ड्रोन हवा में सक्रिय हो जाते हैं और आसपास की गतिविधियों पर रियल टाइम नजर रखते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही निकट मौजूद सुरक्षा दल को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है जिससे आरोपी मौके पर ही पकड़ लिए जाते हैं।

    हालांकि आरपीएफ का मानना है कि पत्थरबाजी की हर घटना के पीछे संगठित अपराध नहीं होता। कई मामलों में रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले बच्चे भी शरारत में पत्थर फेंक देते हैं। वर्ष 2025 में 37 बच्चों की संलिप्तता वाली 32 घटनाओं में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था जबकि इस वर्ष 11 बच्चों से जुड़ी छह घटनाएं सामने आईं। इन मामलों में भी कानूनी कार्रवाई के बजाय समझाइश और परामर्श को प्राथमिकता दी गई।

    अधिकारियों का कहना है कि रेलवे लाइन के आसपास रहने वाले कई बच्चे स्कूल नहीं जाते और अपना अधिकांश समय पटरियों के पास खेलते हुए बिताते हैं। खेल खेल में वे गुजरती ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं जिससे यात्रियों की जान जोखिम में पड़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए आरपीएफ गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चला रही है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है और अभिभावकों के साथ बैठक कर उन्हें रेलवे ट्रैक के पास बच्चों को न खेलने देने की सलाह दी जा रही है।

    आरपीएफ की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रेलवे पटरियों के किनारे बनी अनधिकृत बस्तियां असामाजिक तत्वों की गतिविधियों का केंद्र बनी हुई हैं। कई बार शराब के नशे में लोग ट्रेनों पर पत्थर फेंक देते हैं। इसके अलावा अवैध रेलवे क्रॉसिंग का इस्तेमाल करने वाले कुछ लोग ट्रेन गुजरने के दौरान इंतजार से नाराज होकर भी इस तरह की घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    ड्रोन निगरानी के साथ साथ रेलवे पटरियों के किनारे सोलर ऊर्जा से संचालित सीसीटीवी कैमरे भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 76 कैमरे लगाए जा चुके हैं और अब 50 नए कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक मजबूत निगरानी और जनजागरूकता के संयुक्त प्रयासों से आरपीएफ को उम्मीद है कि आने वाले समय में चलती ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं में और अधिक कमी आएगी तथा रेल यात्रियों की सुरक्षा पहले से कहीं अधिक सुनिश्चित हो सकेगी।

  • जबलपुर रेलवे स्टेशन पर विजिलेंस का एक्शन, 3 टीटीई सस्पेंड; जांच में मिले 46 हजार रुपए अतिरिक्त

    जबलपुर रेलवे स्टेशन पर विजिलेंस का एक्शन, 3 टीटीई सस्पेंड; जांच में मिले 46 हजार रुपए अतिरिक्त


    मध्यप्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन पर पश्चिम मध्य रेलवे के विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोंडवाना एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात तीन टीटीई को संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पकड़ लिया है। जांच के दौरान तीनों टीटीई के पास निर्धारित सीमा से करीब 46 हजार रुपए अधिक नकदी पाई गई, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है।

    मामला सोमवार का है, जब दिल्ली से जबलपुर पहुंची गोंडवाना एक्सप्रेस ट्रेन में विजिलेंस टीम ने अचानक जांच अभियान चलाया। ट्रेन के एसी और स्लीपर कोच में ड्यूटी पर तैनात टीटीई मनोज कुशवाहा, कुंदन कुमार और अनिकेश कुमार की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी। यह कार्रवाई यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई।

    जानकारी के अनुसार, यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को शिकायत दी थी कि टीटीई उनसे जुर्माना और अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी जा रही। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने जबलपुर स्टेशन पर पहले से ही निगरानी बढ़ा दी थी और ट्रेन के पहुंचते ही जांच शुरू कर दी।

    जांच के दौरान टीम ने तीनों टीटीई के पास मौजूद नकदी का मिलान किया, जिसमें भारी गड़बड़ी सामने आई। कुंदन कुमार के पास 32 हजार रुपए अतिरिक्त पाए गए, जबकि अनिकेश कुमार के पास 14 हजार रुपए और मनोज कुशवाहा के पास 300 रुपए अतिरिक्त नकदी मिली। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 46 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि पाई गई।

    सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि एक टीटीई ने अपनी अतिरिक्त नकदी दूसरे टीटीई को सौंप दी थी, जिससे प्रारंभिक जांच में रकम का असंतुलन दिखाई दिया। हालांकि रेलवे विजिलेंस टीम इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि यह राशि किस उद्देश्य से एक-दूसरे को दी गई थी और इसका स्रोत क्या था।

    मामले के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों टीटीई को तत्काल निलंबित कर दिया है। सीनियर डीसीएम डॉ. मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों की शिकायतों और जांच में सामने आई अनियमितताओं को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि रेलवे में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला न केवल अनुशासनहीनता से जुड़ा है, बल्कि यात्रियों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस तरह की शिकायतों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अतिरिक्त राशि किस आधार पर वसूली गई थी, क्या इसमें अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।

  • रेलवे का बड़ा फैसला, सांची स्टेशन पर बनी रहेगी 4 ट्रेनों की रोक; आसान होगी यात्रा

    रेलवे का बड़ा फैसला, सांची स्टेशन पर बनी रहेगी 4 ट्रेनों की रोक; आसान होगी यात्रा


    मध्य प्रदेश । पश्चिम मध्य रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और बढ़ती मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया है कि सांची और विदिशा स्टेशनों पर चार प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव अब अगले आदेश तक जारी रहेगा। पहले यह ठहराव प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया था, लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसे आगे बढ़ा दिया गया है।

    कौन-कौन सी ट्रेनें रुकेंगी
    इन प्रमुख ट्रेनों का ठहराव जारी रहेगा:
    कर्नाटक संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12629 / 12630)  -विदिशा में ठहराव
    श्री माता वैष्णो देवी कटरा–चेन्नई एक्सप्रेस (16031 / 16032) -सांची में ठहराव

    धार्मिक और लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा
    इस निर्णय से सांची और विदिशा के यात्रियों को देश के कई हिस्सों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। खासकर वैष्णो देवी, चेन्नई, कर्नाटक और दिल्ली जैसे बड़े रूटों पर यात्रा करने वालों को सीधा लाभ मिलेगा।

     रेलवे अधिकारियों का बयान
    रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी सौरभ कटारिया ने बताया कि यात्रियों की सकारात्मक प्रतिक्रिया और जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर यह ठहराव जारी रखने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में धार्मिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

     स्थानीय लोगों को फायदा
    इस फैसले से आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब बड़े स्टेशनों तक जाने की जरूरत कम पड़ेगी और समय व खर्च दोनों की बचत होगी।

  • रेल यात्रियों को बड़ी राहत: बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर और अजमेर-बांद्रा टर्मिनस ट्रेनें अब नियमित होंगी

    रेल यात्रियों को बड़ी राहत: बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर और अजमेर-बांद्रा टर्मिनस ट्रेनें अब नियमित होंगी


    रतलाम। यात्रियों की बढ़ती मांग और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पश्चिम रेलवे ने बड़ा निर्णय लिया है। अब स्पेशल ट्रेन के रूप में चल रही दो प्रमुख ट्रेनों को नियमित सेवा में शामिल कर दिया गया है। इनमें ट्रेन संख्या 20163/20164 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस और 19625/19626 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस शामिल हैं। इस फैसले से मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को स्थायी और सुगम रेल सेवा उपलब्ध होगी।

    बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस का नया शेड्यूल
    ट्रेन संख्या 20163 बांद्रा टर्मिनस-जबलपुर एक्सप्रेस 30 मई से हर शनिवार को बांद्रा टर्मिनस से शाम 4:30 बजे रवाना होगी। यह ट्रेन रतलाम (02:45/02:50 रविवार) और उज्जैन (05:10/05:15) होते हुए अगले दिन दोपहर 3:10 बजे जबलपुर पहुंचेगी। वहीं, वापसी में ट्रेन संख्या 20164 जबलपुर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस 29 मई से हर शुक्रवार को जबलपुर से शाम 5:00 बजे चलेगी और रतलाम (03:50/03:55 शनिवार) तथा उज्जैन (02:10/02:12) होते हुए अगले दिन दोपहर 2:15 बजे बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी। इस ट्रेन में एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और सामान्य श्रेणी के कोच उपलब्ध रहेंगे।

    इन प्रमुख स्टेशनों पर होगा ठहराव
    दोनों दिशाओं में इस ट्रेन का ठहराव बोरीवली, वापी, सूरत, वडोदरा, रतलाम, उज्जैन, संत हिरदाराम नगर, भोपाल, नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया और नरसिंहपुर जैसे प्रमुख स्टेशनों पर होगा।

    अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस का संचालन भी नियमित
    रेलवे ने ट्रेन संख्या 19625 अजमेर-बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस को भी नियमित किया है, जो रविवार को अजमेर से सुबह 6:35 बजे रवाना होकर रतलाम (17:30/17:40) होते हुए सोमवार को बांद्रा टर्मिनस पहुंचेगी।

    वापसी में ट्रेन संख्या 19626 बांद्रा टर्मिनस-अजमेर एक्सप्रेस सोमवार को बांद्रा टर्मिनस से सुबह 8:35 बजे चलेगी और रतलाम (21:05/21:15) होते हुए मंगलवार सुबह 9:10 बजे अजमेर पहुंचेगी।

    यात्रियों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
    इन दोनों ट्रेनों के नियमित होने से मुंबई, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब यात्रियों को स्पेशल ट्रेन की अनिश्चितता से नहीं गुजरना पड़ेगा और नियमित शेड्यूल के साथ यात्रा आसान हो जाएगी। रेलवे के इस फैसले को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और यात्री सुविधा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।

  • पटियाला से युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत बांटे गए 188 नियुक्ति पत्र

    पटियाला से युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के तहत बांटे गए 188 नियुक्ति पत्र

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार की देशव्यापी रोजगार मुहिम के तहत पंजाब के पटियाला में आयोजित रोजगार मेले ने सैकड़ों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दी। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में आयोजित 19वें रोजगार मेले के दौरान 188 युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर पूरे कार्यक्रम का माहौल उत्साह, उम्मीद और खुशी से भरा दिखाई दिया। नौकरी पाने वाले युवाओं और उनके परिवारों के चेहरों पर संतोष और गर्व साफ झलक रहा था।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वर्चुअल माध्यम से देशभर के नवनियुक्त उम्मीदवारों को संबोधित किया। उन्होंने युवाओं को देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी एवं समर्पण के साथ काम करने का संदेश दिया। रोजगार मेले में मौजूद उम्मीदवारों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को प्रेरणादायक बताया और इसे अपने करियर की नई शुरुआत के रूप में देखा।

    पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर सुशील कुमार श्रीवास्तव ने नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें से 126 उम्मीदवारों को पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स के विभिन्न विभागों और ट्रेडों में नियुक्त किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और सरकारी भर्ती प्रक्रिया को अधिक तेज एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बताया। कई उम्मीदवारों ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार की सिफारिश या आर्थिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ा और केवल योग्यता के आधार पर उनका चयन हुआ। युवाओं का कहना था कि इस प्रक्रिया ने सरकारी नौकरियों के प्रति उनका विश्वास और मजबूत किया है।

    रोजगार मेले में चयनित पश्चिम बंगाल की रितिका दत्ता ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2024 में आवेदन किया था और अब उनका चयन पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स में हुआ है। उन्होंने इस अवसर के लिए सरकार और प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। वहीं उत्तर प्रदेश की शांति चतुर्वेदी ने बताया कि उनका चयन डिपो मटेरियल सुपरिटेंडेंट के पद पर हुआ है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही और योग्य उम्मीदवारों को ही मौका मिला।

    उत्तर प्रदेश के ही विजय दुबे ने बताया कि उनका चयन जेई मैकेनिकल पद पर हुआ है और यह उनके लंबे इंतजार और मेहनत का परिणाम है। हिमाचल प्रदेश के योगेश ने भी चयन पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकारी नौकरी मिलने से उनके परिवार में उत्साह का माहौल है।

    रोजगार मेले के आयोजन को युवाओं के लिए सकारात्मक पहल माना जा रहा है। लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रोजगार की चुनौतियों के बीच ऐसे कार्यक्रम युवाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। पटियाला में आयोजित यह रोजगार मेला न केवल नियुक्ति पत्र वितरण तक सीमित रहा, बल्कि यह युवाओं के सपनों और उम्मीदों को नई दिशा देने वाला आयोजन भी बन गया।

  • स्टेशन के नाम के साथ क्यों दर्ज होती है ऊंचाई की जानकारी, रेलवे सिस्टम में इसकी अहम भूमिका जानकर रह जाएंगे हैरान

    स्टेशन के नाम के साथ क्यों दर्ज होती है ऊंचाई की जानकारी, रेलवे सिस्टम में इसकी अहम भूमिका जानकर रह जाएंगे हैरान


    नई दिल्ली। अगर आपने कभी रेलवे स्टेशन पर लगे नाम के बोर्ड को ध्यान से देखा होगा तो उसमें स्टेशन के नाम के साथ एक और महत्वपूर्ण जानकारी लिखी होती है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। यह जानकारी होती है उस स्थान की समुद्र तल से ऊंचाई, जिसे तकनीकी भाषा में मीन सी लेवल (MSL) कहा जाता है। देखने में यह साधारण सा आंकड़ा लगता है, लेकिन रेलवे के पूरे संचालन तंत्र में इसकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    समुद्र तल से ऊंचाई का अर्थ है किसी भी स्थान की वह वास्तविक ऊंचाई, जो समुद्र की औसत सतह से मापी जाती है। यह एक वैश्विक मानक है, जिसका उपयोग दुनिया भर में किसी भी भूभाग की ऊंचाई तय करने के लिए किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी स्टेशन की ऊंचाई 200 मीटर लिखी है, तो इसका मतलब है कि वह स्थान समुद्र की औसत सतह से 200 मीटर ऊपर स्थित है। तटीय क्षेत्रों और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच यह अंतर बहुत अधिक हो सकता है, और यही फर्क रेलवे के डिजाइन और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    रेलवे इंजीनियरिंग में यह जानकारी बेहद जरूरी होती है क्योंकि ट्रेनों का संचालन केवल पटरियों पर चलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह ढलान, ऊंचाई और दबाव के संतुलन पर निर्भर करता है। जब ट्रेन किसी ऊंचे स्थान की ओर जाती है तो उसे अधिक ऊर्जा और शक्ति की आवश्यकता होती है, जबकि नीचे की ओर आने पर ब्रेकिंग सिस्टम पर अधिक नियंत्रण की जरूरत होती है। ऐसे में हर स्टेशन की ऊंचाई का सटीक ज्ञान ट्रेन संचालन को सुरक्षित और सुचारू बनाने में मदद करता है।

    नई दिल्ली। ऊंचाई का यह आंकड़ा सिर्फ ट्रेनों की गति और ऊर्जा खपत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह रेलवे के बुनियादी ढांचे की योजना में भी अहम भूमिका निभाता है। रेलवे ट्रैक, पुल, सुरंग और जल निकासी प्रणाली जैसी संरचनाओं का निर्माण करते समय इंजीनियर इस डेटा का उपयोग करते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि भारी बारिश या पानी भराव जैसी परिस्थितियों में रेलवे सिस्टम सुरक्षित बना रहे और किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    इसके अलावा मालगाड़ियों के संचालन में भी यह जानकारी बेहद उपयोगी होती है। भारी सामान ढोने वाली ट्रेनों के लिए इंजन की क्षमता और ईंधन या बिजली की खपत का अनुमान लगाने में ऊंचाई एक महत्वपूर्ण कारक होती है। यदि ऊंचाई का सही आकलन न किया जाए तो संचालन लागत और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है।

    रेलवे में इस परंपरा की शुरुआत बहुत पुरानी है, जब ट्रैक निर्माण के दौरान जमीन की सटीक माप के आधार पर पूरे नेटवर्क की योजना बनाई जाती थी। उस समय से ही ऊंचाई का रिकॉर्ड रखना जरूरी माना गया और यह जानकारी स्टेशन बोर्ड का हिस्सा बन गई। आधुनिक समय में भले ही डिजिटल तकनीक ने रेलवे संचालन को और अधिक सटीक बना दिया हो, लेकिन स्टेशन बोर्ड पर यह जानकारी आज भी उसी परंपरा और उपयोगिता के साथ बनी हुई है।

    इस प्रकार, रेलवे स्टेशन पर लिखी समुद्र तल से ऊंचाई केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे रेलवे तंत्र की सुरक्षा, इंजीनियरिंग और दक्षता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आधार है, जो ट्रेनों की सुचारू और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने में मदद करता है।

  • 15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

    15,000 करोड़ का बोझ बढ़ा! सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को माना सामान्य बिजली उपभोक्ता, क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज अनिवार्य

    नई दिल्ली । भारतीय ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है, जिसमें देश की सर्वोच्च अदालत ने Indian Railways को बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इस निर्णय के बाद रेलवे को अब सामान्य उपभोक्ता की तरह बिजली खरीद पर सभी लागू सरचार्ज चुकाने होंगे, जिससे उस पर करीब 15,000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से कानूनी विवाद में था, जिसमें रेलवे यह दावा करता रहा था कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है और उसे बिजली वितरण से जुड़े अतिरिक्त शुल्क से छूट मिलनी चाहिए। रेलवे की दलील थी कि उसके पास अपना मजबूत बिजली ढांचा और नेटवर्क मौजूद है, जिसके आधार पर वह ग्रिड से सीधे बिजली खरीदता है और उसका उपयोग अपने संचालन में करता है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी वही माना जा सकता है, जो बिजली को आगे किसी तीसरे पक्ष को आपूर्ति करता हो।

    अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि रेलवे का पूरा बिजली ढांचा उसके आंतरिक उपयोग के लिए है, जिसमें ट्रेनों, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों का संचालन शामिल है। इसे किसी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर रेलवे को सामान्य औद्योगिक उपभोक्ता माना गया है, जिसके कारण अब उसे क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज और अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    इस फैसले का सीधा असर रेलवे की वित्तीय योजनाओं पर पड़ सकता है। पिछले कई वर्षों से रेलवे ओपन एक्सेस के जरिए सस्ती बिजली खरीदकर बड़े पैमाने पर बचत करने की कोशिश कर रहा था। इस रणनीति के तहत हजारों करोड़ रुपये की बचत का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब नए आदेश के बाद यह पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। अनुमान है कि राज्यों के हिसाब से यह सरचार्ज प्रति यूनिट काफी अधिक होगा, जिससे कुल मिलाकर भारी देनदारी बन सकती है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से राज्य बिजली वितरण कंपनियों को राहत मिलेगी, क्योंकि अब बड़े उपभोक्ताओं से मिलने वाला सरचार्ज उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करेगा। वहीं रेलवे के लिए यह एक नई चुनौती है, क्योंकि वह पहले ही इलेक्ट्रिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश कर चुका है।

    यह भी माना जा रहा है कि आने वाले समय में रेलवे को अपनी बिजली खरीद रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। डीजल से इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की ओर बढ़ने के साथ जिस बचत की उम्मीद की जा रही थी, वह अब इस अतिरिक्त लागत के कारण कम हो सकती है। इससे रेलवे के परिचालन खर्च और बजट प्रबंधन पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।

    कुल मिलाकर यह फैसला ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र के बीच वित्तीय संतुलन को नए तरीके से परिभाषित करता है। एक ओर जहां राज्यों की बिजली कंपनियों को राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर देश के सबसे बड़े उपभोक्ता के लिए यह निर्णय एक बड़ा आर्थिक झटका साबित हो सकता है।

  • ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक

    ट्रेन में चाहिए कंफर्म लोअर बर्थ? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सफर हो जाएगा आरामदायक


    नई दिल्ली। ट्रेन में सफर करने वाले ज्यादातर यात्री लोअर बर्थ को सबसे आरामदायक मानते हैं। खासतौर पर बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और लंबी दूरी के यात्री लोअर सीट को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन टिकट कन्फर्म होने के बाद भी कई बार अपर या मिडिल बर्थ मिल जाती है। अगर आप भी हर बार लोअर बर्थ चाहते हैं, तो IRCTC की टिकट बुकिंग के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

    1. Reservation Choice में जरूर चुनें Lower Berth
    टिकट बुक करते समय “Reservation Choice” सेक्शन में “Lower Berth” का विकल्प जरूर चुनें। इससे रेलवे का कंप्यूटराइज्ड सिस्टम आपकी प्राथमिकता को रिकॉर्ड करता है और सीट अलॉटमेंट के दौरान उसे ध्यान में रखता है। हालांकि यह 100% गारंटी नहीं देता, लेकिन संभावना काफी बढ़ जाती है।

    2. जितनी जल्दी बुकिंग, उतने ज्यादा चांस
    लोअर बर्थ पाने का सबसे बड़ा नियम है  जल्दी टिकट बुक करना। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, लोअर बर्थ उपलब्धता कम होती जाती है। Tatkal या आखिरी समय की बुकिंग में अक्सर मिडिल और अपर बर्थ ही बचती हैं।

    3. सीनियर सिटीजन कोटे का लें फायदा
    भारतीय रेलवे बुजुर्ग यात्रियों और 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ कोटा देता है। अगर बुकिंग के दौरान सही उम्र और विवरण भरे जाएं तो सिस्टम प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ अलॉट कर सकता है।

    4. ज्यादा लोगों की बजाय छोटे ग्रुप में करें बुकिंग
    अगर आप एक साथ बहुत ज्यादा लोगों की टिकट बुक करते हैं, तो सिस्टम सभी को साथ सीट देने की कोशिश करता है। ऐसे में लोअर बर्थ मिलने की संभावना कम हो सकती है। कम यात्रियों के साथ अलग-अलग बुकिंग करने पर लोअर सीट मिलने के चांस बढ़ सकते हैं।

    5. चार्ट बनने के बाद TTE से जरूर बात करें
    कई बार अंतिम समय में यात्रियों के टिकट कैंसिल हो जाते हैं या सीटें खाली रह जाती हैं। ऐसे में चार्ट बनने के बाद TTE से विनम्रता से बात करने पर लोअर बर्थ मिल सकती है। विशेष परिस्थितियों में TTE सीट एडजस्ट करने में मदद कर सकते हैं।

    ध्यान रखें ये जरूरी बात
    रेलवे का सीट अलॉटमेंट पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से होता है, इसलिए हर बार लोअर बर्थ मिलना तय नहीं होता। लेकिन सही विकल्प, समय पर बुकिंग और रेलवे नियमों की जानकारी आपकी यात्रा को ज्यादा आरामदायक बना सकती है।

  • रीवा–दुर्ग रेल सेवा की मांग तेज: पार्थिव देह परिवहन के लिए विशेष सुविधा की मांग भी सामने आई

    रीवा–दुर्ग रेल सेवा की मांग तेज: पार्थिव देह परिवहन के लिए विशेष सुविधा की मांग भी सामने आई


    नई दिल्ली । रीवा-दुर्ग के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने की मांग रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव तक पहुंची। भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री गौरव तिवारी ने विंध्य क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा और पार्थिव देह परिवहन के लिए विशेष व्यवस्था की मांग रखी, जिस पर मंत्री ने विचार का आश्वासन दिया।

    नई दिल्ली में मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र से जुड़ी एक अहम रेल मांग सामने आई है। भाजपा युवा मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री गौरव तिवारी ने केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw से मुलाकात कर रीवा और दुर्ग के बीच सीधी ट्रेन सेवा शुरू करने का आग्रह किया है।

    उन्होंने प्रस्ताव दिया कि यदि Rewa–Durg Express शुरू की जाती है, तो रीवा संभाग और छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहरों जैसे दुर्ग, भिलाई और रायपुर के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
    सीधी ट्रेन न होने से यात्रियों को हो रही परेशानी
    गौरव तिवारी ने रेल मंत्री को बताया कि विंध्य क्षेत्र के हजारों लोग रोजगार, शिक्षा और व्यापार के लिए छत्तीसगढ़ जाते हैं, लेकिन सीधी रेल सेवा न होने के कारण उन्हें कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं और यात्रियों को भारी असुविधा होती है।
    नई ट्रेन से मिलेगा बड़ा लाभ
    भाजपा नेता का कहना है कि रीवा-दुर्ग एक्सप्रेस शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह ट्रेन विंध्य और छत्तीसगढ़ के बीच एक मजबूत परिवहन कड़ी साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, रेल मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाया है और इसे विभागीय स्तर पर विचार के लिए आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है।

    पार्थिव देह के सम्मानजनक परिवहन की भी उठी मांग
    मुलाकात के दौरान एक और संवेदनशील मुद्दा भी उठाया गया। गौरव तिवारी ने कहा कि कई बार लोगों को महानगरों से अपने परिजनों की पार्थिव देह को छोटे शहरों तक लाने में भारी आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    उन्होंने रेलवे से आग्रह किया कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे पार्थिव देह को यात्री ट्रेनों के माध्यम से सम्मानजनक और कम खर्च में उनके घर तक पहुंचाया जा सके। इससे शोकग्रस्त परिवारों को मुश्किल समय में बड़ी राहत मिलेगी।

    क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर बढ़ी उम्मीदें
    इस मुलाकात के बाद रीवा और विंध्य क्षेत्र में नई रेल सेवा को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो यह क्षेत्रीय विकास और यात्रा सुविधा दोनों के लिए बड़ा कदम होगा।

  • अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें

    अगस्त से बदलेगी रेलवे की टिकट बुकिंग व्यवस्था, नई आरक्षण प्रणाली में शिफ्ट होंगी ट्रेनें


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे जल्द ही यात्रियों को टिकट बुकिंग और यात्रा से जुड़ी सुविधाओं में बड़ा बदलाव देने जा रहा है। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि अगस्त 2026 से ट्रेनों को नई उन्नत यात्री आरक्षण प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह बदलाव पूरी तरह सुचारु तरीके से किया जाए और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
    रेल भवन में आयोजित एक समीक्षा बैठक के दौरान रेलवे की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था और नई तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म की तैयारियों का जायजा लिया गया। मौजूदा यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत वर्ष 1986 में हुई थी। पिछले चार दशकों में इसमें कई छोटे बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे इसे पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस करने जा रहा है।
    रेल मंत्रालय के मुताबिक नई प्रणाली की क्षमता को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए काफी बढ़ाया गया है, ताकि भविष्य में बढ़ती यात्री संख्या और टिकट बुकिंग के दबाव को आसानी से संभाला जा सके। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय रेलवे लगातार डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में काम कर रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम है।
    वर्तमान में करीब 88 प्रतिशत रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं। इसमें RailOne मोबाइल एप की अहम भूमिका रही है, जिसे पिछले साल जुलाई में लॉन्च किया गया था। यह ऐप अब तक 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। इस प्लेटफॉर्म पर टिकट बुकिंग, कैंसिलेशन, रिफंड और लाइव ट्रेन स्टेटस जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हैं।
    नई आरक्षण प्रणाली की सबसे खास बात इसमें शामिल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित प्रेडिक्शन सिस्टम है। यह फीचर वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की संभावना का अनुमान लगाता है। रेलवे के अनुसार, इस सुविधा की सटीकता पहले 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल रही है।
    इसके अलावा RailOne ऐप के जरिए यात्रियों को लाइव ट्रेन ट्रैकिंग, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी, रेल मदद शिकायत निवारण सेवा और सीट तक भोजन पहुंचाने जैसी सुविधाएं भी मिल रही हैं। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म के जरिए रोजाना करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं, जिनमें आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट शामिल हैं।
    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों की जीवनरेखा बनी हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री सब्सिडी पर 60,239 करोड़ रुपये खर्च किए, जिससे यात्रियों को औसतन 43 प्रतिशत तक किराए में राहत मिली। नई तकनीक आधारित आरक्षण प्रणाली से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में रेलवे यात्रा पहले से ज्यादा स्मार्ट, आसान और तेज हो जाएगी।