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  • भारतीय रेलवे में तकनीकी सुधारों से सुरक्षा और दक्षता के नए मानक स्थापित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    भारतीय रेलवे में तकनीकी सुधारों से सुरक्षा और दक्षता के नए मानक स्थापित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय रेलवे लगातार सुधार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपने संचालन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर सुरक्षा, संचालन और यात्री सुविधा पर दिखाई दे रहा है।

    प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में रेलवे क्षेत्र में हुए सुधारों और नीतिगत बदलावों पर प्रकाश डाला, जिनके तहत तकनीक आधारित प्रणालियों को अपनाया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना और यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को बेहतर करना रहा है।

    सरकारी स्तर पर बताया गया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों यात्रियों के लिए जीवनरेखा की तरह है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रेल यात्रा करते हैं, जिनमें छात्र, नौकरीपेशा लोग, प्रवासी मजदूर और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। ऐसे में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    पिछले वर्षों में रेलवे सुरक्षा को लेकर ‘सेफ्टी फर्स्ट’ की नीति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत तकनीकी निगरानी, बेहतर रखरखाव व्यवस्था और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली को बढ़ावा दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और दुर्घटनाओं की संभावना को घटाना रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पहले की तुलना में अब दुर्घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है। इसी अवधि में दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि में भी कमी आई है।

    इसके अलावा प्रति किलोमीटर दुर्घटना दर में भी सुधार देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि रेलवे का समग्र संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हुआ है। यह सुधार तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब रेल संचालन और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

    केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से भी इस बात पर जोर दिया गया कि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसमें लगातार निवेश और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह प्रणाली भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और अधिक सक्षम बन सके।

    इस पूरे परिवर्तन को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में और अधिक सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर संकेत करता है।

  • रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि

    रेल नेटवर्क का विस्तार: 741 करोड़ यात्रियों का आंकड़ा पार, इलेक्ट्रिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि


    नई दिल्ली। देश की लाइफलाइन मानी जाने वाली Indian Railways ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उपलब्धियां हासिल की हैं। इस दौरान करीब 741 करोड़ यात्रियों ने ट्रेन से सफर किया, जो रेलवे की बढ़ती पहुंच और भरोसे को दर्शाता है। वहीं, ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.6% हिस्सा अब विद्युतीकृत हो चुका है, जिससे परिचालन और भी तेज, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल बन गया है।

     आय और माल ढुलाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे की कुल आय बढ़कर लगभग ₹80,000 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं माल ढुलाई भी बढ़कर 1,670 मिलियन टन (MT) हो गई है, जो देश की अर्थव्यवस्था में रेलवे की अहम भूमिका को मजबूत करता है।

    विद्युतीकरण में ऐतिहासिक छलांग

    2014 तक जहां सिर्फ 20% रेलवे नेटवर्क ही विद्युतीकृत था, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 69,873 रूट किलोमीटर (RKM) हो गया है। यह कुल नेटवर्क का 99.6% हिस्सा है। इस उपलब्धि ने भारत को विद्युतीकरण के मामले में United Kingdom (39%), Russia (52%) और China (82%) जैसे देशों से भी आगे पहुंचा दिया है।

     डीजल की बचत, पर्यावरण को राहत

    रेलवे विद्युतीकरण के चलते 2024-25 में करीब 180 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई, जिससे लगभग ₹6,000 करोड़ की लागत बची। साथ ही कच्चे तेल के आयात में कमी आई, जो देश के लिए बड़ी आर्थिक राहत है।

    सुरक्षा में तकनीकी मजबूती

    रेलवे ने सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए हैं। ‘कवच’ ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम 3,100 किमी से ज्यादा ट्रैक पर लागू हो चुका है और 24,400 किमी पर काम जारी है। इसके अलावा, 1,874 स्टेशनों पर वीडियो सर्विलांस सिस्टम (VSS) लगाया गया है, जिसमें AI आधारित एनालिसिस और फेस रिकग्निशन तकनीक का उपयोग हो रहा है।

     यात्रियों को बेहतर सुविधा

    1,405 स्टेशनों पर इंटीग्रेटेड पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (IPIS) लागू किया गया है, जो National Train Enquiry System से जुड़ा है। इससे यात्रियों को समय पर जानकारी और बेहतर कम्युनिकेशन मिल रहा है।

     वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार

    नई पीढ़ी की Vande Bharat Express ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 3.98 करोड़ यात्रियों ने इसमें सफर किया। अब तक यह सेवा 1 लाख ट्रिप में 9.1 करोड़ यात्रियों को ले जा चुकी है। वहीं, किफायती यात्रा के लिए Amrit Bharat Express भी शुरू की गई है, जिसकी 60 सेवाएं नेटवर्क पर चल रही हैं।

     ट्रैक और स्पीड में भी सुधार

    पिछले दशक में 54,600 किमी ट्रैक का नवीनीकरण किया गया है। 110 किमी/घंटा से ज्यादा स्पीड झेलने वाले ट्रैक की लंबाई 31,445 किमी से बढ़कर 85,000 किमी से अधिक हो गई है, जिससे ट्रेनें अब ज्यादा तेज और सुरक्षित हो गई हैं।

  • वंदे भारत की सर्विस पर सवाल प्लेट में कीड़े देख भड़के पैसेंजर्स वायरल वीडियो ने उठाए सवाल

    वंदे भारत की सर्विस पर सवाल प्लेट में कीड़े देख भड़के पैसेंजर्स वायरल वीडियो ने उठाए सवाल


    नई दिल्ली:  देश की हाई-टेक और प्रीमियम ट्रेन Vande Bharat Express एक बार फिर चर्चा में है लेकिन इस बार वजह उसकी स्पीड नहीं बल्कि खाने की गुणवत्ता है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें यात्रियों के खाने की थाली में कीड़े रेंगते हुए नजर आ रहे हैं।

    वीडियो में दिखाया गया है कि यात्रियों को परोसे गए भोजन में मटर पनीर और दही के बीच छोटे कीड़े पाए गए। इस घटना को देखकर यात्री बेहद नाराज हो गए और उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत स्टाफ से की। हालांकि यात्रियों के मुताबिक स्टाफ की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

    वीडियो में एक यात्री गुस्से में कहते हुए दिखाई देता है कि “हम पैसे देकर जहर खा रहे हैं”। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और लोग इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई यूजर्स इसे यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं।

    लोगों का कहना है कि जिस ट्रेन को देश की शान और आधुनिकता का प्रतीक माना जाता है, उसमें इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है। यात्रियों ने आरोप लगाया कि न केवल खाना खराब था बल्कि यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरा भी बन सकता है।

    इस घटना के सामने आने के बाद रेलवे और संबंधित एजेंसियों पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर खाने की गुणवत्ता की जांच कैसे की जा रही है। यात्रियों का कहना है कि जब तक इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भरोसा कायम रखना मुश्किल होगा।

    फिलहाल यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग रेलवे से सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    🔖 English Tags

    Vande Bharat, Train Food Quality, Indian Railways, Viral Video, Passenger Complaint

  • सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी

    सस्ती यात्रा सुरक्षित सफर रेलवे का बड़ा बदलाव बढ़े नॉन एसी कोच और रिकॉर्ड सब्सिडी


    नई दिल्ली। Indian Railways ने आम यात्रियों को किफायती यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए नॉन एसी कोचों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की है। सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश के करोड़ों लोग कम खर्च में आरामदायक और सुलभ यात्रा कर सकें। इसी दिशा में जनरल और स्लीपर श्रेणी के कोचों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इसका लाभ मिल सके।

    रेल मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में कुल कोचों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा जनरल और स्लीपर क्लास का है जो इस बात को दर्शाता है कि रेलवे आम जनता की जरूरतों को केंद्र में रखकर काम कर रहा है। वर्ष 2024 25 में करीब 1250 नए जनरल कोच जोड़े गए हैं और 2025 26 में लगभग 860 और कोच जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों की भीड़ को कम करने और यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

    सरकार यात्रियों को राहत देने के लिए किराए पर औसतन लगभग 45 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हर साल करीब 60000 करोड़ रुपये की सब्सिडी देकर रेलवे यह सुनिश्चित कर रहा है कि आम आदमी की यात्रा सस्ती बनी रहे। वहीं मुंबई जैसे उपनगरीय क्षेत्रों में अतिरिक्त 3000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा रही है जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलता है।

    रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि रेलवे केवल यात्री सेवाओं में ही नहीं बल्कि माल ढुलाई में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। फ्रेट परिवहन 2013 14 के 1055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1650 मिलियन टन तक पहुंच गया है जिससे भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फ्रेट कैरियर बन चुका है।

    रेलवे के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। अब तक लगभग 47000 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण हो चुका है जो कुल नेटवर्क का 99 प्रतिशत से अधिक है। इसके साथ ही ट्रैक निर्माण में भी बड़ी वृद्धि हुई है और यह 15000 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 35000 किलोमीटर तक पहुंच गया है।

    सुरक्षा के क्षेत्र में भी रेलवे ने उल्लेखनीय प्रगति की है। रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज की संख्या 4000 से बढ़कर 14000 हो गई है जबकि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग 1500 किलोमीटर से बढ़कर 4000 किलोमीटर से अधिक हो गई है। इसके अलावा एलएचबी कोचों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है जो यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना में तेजी आई है और अब तक लगभग 2800 किलोमीटर कॉरिडोर तैयार हो चुका है जहां प्रतिदिन सैकड़ों मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। सरकार नीति आयोग और वित्त मंत्रालय के सहयोग से परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता को भी मजबूत कर रही है इस तरह भारतीय रेलवे सस्ती सुरक्षित और आधुनिक यात्रा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।
  • बड़ा रेल हादसा टला: मक्सी के पास मालगाड़ी के 2 टुकड़े, पटरी टूटने से हुआ एक्सीडेंट

    बड़ा रेल हादसा टला: मक्सी के पास मालगाड़ी के 2 टुकड़े, पटरी टूटने से हुआ एक्सीडेंट


    इंदौर। मध्यप्रदेश के शाजापुर जिले में शनिवार को एक बड़ा रेल हादसा होते-होते रह गया। उज्जैन से गुना की ओर जा रही एक मालगाड़ी मक्सी रेलवे स्टेशन के पास अचानक पटरी से उतर गई। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि ट्रेन झटके के साथ दो हिस्सों में बंट गई। गनीमत यह रही कि यह एक मालगाड़ी थी जिसके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। अगर यही स्थिति किसी यात्री ट्रेन के साथ होती तो परिणाम भयावह हो सकते थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दुर्घटना का मुख्य कारण रेलवे पटरी का टूटना माना जा रहा है। कड़ाके की ठंड के कारण अक्सर पटरियों में दरार आने की घटनाएं बढ़ जाती हैं अंदेशा है कि यहाँ भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा।

    घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति

    लोकेशन मक्सी रेलवे स्टेशन के पास, शाजापुर जिला। रूट उज्जैन-गुना रेल खंड। प्रभाव मालगाड़ी के पटरी से उतरते ही वैगनों के बीच का कपलिंग टूट गया और ट्रेन दो अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो गई। इससे इस रूट पर रेल यातायात आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।

    रेलवे की कार्रवाई

    हादसे की सूचना मिलते ही रतलाम और भोपाल मंडल के वरिष्ठ रेलवे अधिकारी अपनी तकनीकी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए हैं। तकनीकी जांच रेलवे की टीम ट्रैक और वैगनों की बारीकी से जांच कर रही है। पटरी टूटने के दावों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक नमूने लिए जा रहे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन क्रेन और हाइड्रोलिक मशीनों की मदद से पटरी से उतरे वैगनों को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। यातायात बहाली अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता ट्रैक को जल्द से जल्द क्लियर कर यातायात सामान्य करने की है। अधिकारियों का बयान: “हादसे के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह पटरी टूटने के कारण हुआ या किसी तकनीकी खराबी की वजह से। फिलहाल कोई हताहत नहीं है।

  • Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग

    Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई सुविधा भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

    रेलवे की शिकायतों की सूची लंबी है। ट्रेनों में सफाई व्यवस्था कमजोर है पैंट्री कार का खाना क्वालिटी में अधूरा है बोतलबंद पानी और अन्य सामान की कीमत अधिक वसूली जाती है। गंदे टॉयलेट पानी की कमी स्टेशन और ट्रेन में चोरी और कभी-कभार दुर्घटनाएं यात्रियों की चिंता बढ़ाती हैं। बजट से उम्मीद है कि इन बुनियादी समस्याओं के सुधार के लिए पर्याप्त फंड आवंटित होगा।रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई और तेज रफ्तार ट्रेनों से पहले ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। कई रूट्स पर ट्रैक की हालत ऐसी है कि ट्रेनें घोषित स्पीड पर नहीं चल पातीं। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेडेशन सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर खर्च बढ़ने की संभावना है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को रेलवे के लिए रिफॉर्म ईयर बताया है। उनका दावा है कि साल के 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम सुधांशु मणि का कहना है कि पहले बजट आम आदमी की जेब और जरूरतों पर केंद्रित होता थानई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई, सुविधा, भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

  • राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट

    राजनांदगांव-कलमना सेक्शन पर 14 ट्रेनें रद्द, निर्माण कार्य के चलते यात्रियों को अलर्ट


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने राजनांदगांव-कलमना रेल सेक्शन में तीसरी लाइन जोड़ने के निर्माण कार्य के कारण 24 जनवरी से 31 जनवरी तक कुल 14 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला किया है। यह कदम भविष्य में ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने, भीड़ कम करने और ट्रैफिक सिस्टम बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

    रेलवे ने यात्रियों से आग्रह किया है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक करें। कुछ डेमू और मेमू ट्रेनें अपने तय स्टेशन तक नहीं पहुंचेंगी और रास्ते में ही समाप्त हो जाएंगी। यह सलाह आखिरी मिनट की परेशानी और समय की बर्बादी से बचाने के लिए दी गई है।

    कौन सी ट्रेनें प्रभावित हैं:
    58817 तुमसर रोड–पैसेंजर
    58816 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    58815 इतवारी–तिरोडी पैसेंजर
    58818 तिरोडी–तुमसर रोड पैसेंजर
    68715 बालाघाट–इतवारी–तिरोडी मेमू
    68714 इतवारी–बालाघाट मेमू
    68741 दुर्ग–गोंदिया मेमू
    68742 गोंदिया–दुर्ग मेमू
    68743 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68744 इतवारी–गोंदिया मेमू
    68711 डोंगरगढ़–गोंदिया मेमू
    68712 गोंदिया–डोंगरगढ़ मेमू
    68713 गोंदिया–इतवारी मेमू
    68716 इतवारी–गोंदिया मेमू

    रेलवे ने स्पष्ट किया कि निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है ताकि भविष्य में ट्रैफिक सुचारू रहे और यात्रा का समय कम हो। विशेष रूप से छोटे कस्बों के यात्रियों, दफ्तर जाने वाले लोगों और छात्रों को अपने सफर की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी गई है।

  • वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगी पहली स्लीपर वंदे भारतकिराया क्या होगा

    वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगी पहली स्लीपर वंदे भारतकिराया क्या होगा


    नई दिल्ली । भारत की रेलवे यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने के अंत में भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। यह ट्रेन कोलकाता से गुवाहाटी तक चलेगीजिससे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी मजबूत होगी। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन एक आधुनिक और सुविधाजनक ट्रेन हैजिसे लंबी दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को और भी आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    उन्नत सुरक्षा और सुविधाएं

    इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें कवच ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टमऑटोमैटिक दरवाजेऔर उन्नत अग्नि सुरक्षा व्यवस्था जैसी विशेषताएं हैं। साथ हीसभी कोचों में सीसीटीवी निगरानी होगीजिससे सुरक्षा का स्तर बढ़ जाएगा। ट्रेन की सफाई भी एक महत्वपूर्ण पहलू हैऔर इसके लिए नियमित रूप से डिसइंफेक्टेंट स्प्रेयर का उपयोग किया जाएगाताकि उच्च स्वच्छता मानक बनाए जा सकें।

    यात्रियों के लिए बेहतर अनुभव

    यह ट्रेन 16 डिब्बों वाली होगीजिसमें कुल 823 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसकी डिजाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा हैहालांकि यह फिलहाल 120 से 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। यह ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम के कई प्रमुख जिलों को कवर करेगीजिससे इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

    किराया

    वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के किराए की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई हैलेकिन अनुमान है कि यह सामान्य स्लीपर ट्रेन से कुछ ज्यादा हो सकता है। स्लीपर कोच के आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं को देखते हुएयात्रियों को ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है। हालांकियह ट्रेन लंबी दूरी की यात्रा के लिए काफी सुविधाजनक होगी और यात्रियों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी।

    शुरुआत की तारीख

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 या 19 जनवरी को इस ट्रेन को हरी झंडी दिखा सकते हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर इस ट्रेन का निरीक्षण किया था और इसे भारतीय रेलवे के लिए एक “नए युग की शुरुआत” बताया था। यह ट्रेन एक तरह से भारतीय रेलवे के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती हैजो यात्रियों को न केवल आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगीबल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के मामले में भी एक नई मिसाल कायम करेगी।

  • नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद

    नया रेलवे फीस स्ट्रक्चर आज से लागू स्थिरता और अफोर्डेबिलिटी में बैलेंस बनाए रखने में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । नया रेलवे पैसेंजर फीस स्ट्रक्चर शुक्रवार को लागू हो गया है। इसमें स्लीपर और फर्स्ट क्लास साधारण क्लास में उपनगरीय क्षेत्रों से बाहर की यात्राओं के लिए किराए में एक पैसा प्रति किलोमीटर का इजाफा किया गया है। रेलवे मंत्रालय के मुताबिक इस कदम का उद्देश्य स्थिरता के साथ अफोर्डेबिलिटी को संतुलित करना है।

    रेलवे ने साधारण नॉन-एसी गैर-उपनगरीय सेवाओं के लिए सेकंड क्लास ऑर्डिनरी स्लीपर क्लास ऑर्डिनरी और फर्स्ट क्लास ऑर्डिनरी में किराए को श्रेणीबद्ध तरीके से बढ़ाया है। सेकंड क्लास ऑर्डिनरी का किराया 215 किलोमीटर तक की यात्राओं के लिए अपरिवर्तित रहेगा जिससे कम दूरी और दैनिक यात्रियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    216 किलोमीटर से 750 किलोमीटर की दूरी के लिए किराए में 5 रुपए की वृद्धि की गई है। 751 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 10 रुपए की वृद्धि की गई है। 1251 किलोमीटर से 1750 किलोमीटर की दूरी के लिए 15 रुपए की वृद्धि की गई है और 1751 किमी से 2250 किमी की दूरी के लिए 20 रुपए की वृद्धि की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि उपनगरीय सेवाओं और सीजन टिकटों पर जिसमें उपनगरीय और गैर-उपनगरीय रूट शामिल हैं कोई असर नहीं पड़ेगा। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में नॉन-एसी और एसी क्लास जिसमें स्लीपर फर्स्ट क्लास एसी चेयर कार एसी 3-टियर एसी 2-टियर और एसी फर्स्ट क्लास शामिल हैं सभी में प्रति किलोमीटर 2 पैसे की मामूली बढ़ोतरी की गई है।

    बयान में कहा गया है कि लंबी यात्राओं के लिए जैसे कि 500 ​​किलोमीटर की नॉन-एसी मेल या एक्सप्रेस यात्रा पर लगभग 10 रुपए अधिक लगेंगे।
    तेजस राजधानी राजधानी शताब्दी दुरंतो वंदे भारत हमसफर अमृत भारत तेजस महामना गतिमान अंत्योदय गरीब रथ जन शताब्दी युवा एक्सप्रेस नमो भारत रैपिड रेल और सामान्य नॉन-सबअर्बन सेवाओं जहां लागू हो एस मेमू को छोड़कर सहित प्रमुख ट्रेन सेवाओं के मौजूदा बेसिक किराए को अप्रूव्ड क्लास-वाइज बेसिक किराए में बढ़ोतरी के हिसाब से रिवाइज किया गया है।

    रिजर्वेशन फीस सुपरफास्ट सरचार्ज और अन्य चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है जबकि जीएसटी की वैघता पर कोई असर नहीं पड़ेगा और किराए को मौजूदा नियमों के अनुसार राउंड ऑफ किया जाता रहेगा। संशोधित किराए सिर्फ 26 दिसंबर 2025 को या उसके बाद बुक किए गए टिकटों पर लागू होंगे और पहले से बुक किए गए टिकटों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि नए रेट दिखाने के लिए स्टेशन किराए की लिस्ट को अपडेट किया जाएगा।

  • उज्जैन स्टेशन पर यात्री को आया हार्ट अटैक, टीटीई ने दिया CPR; स्ट्रेचर न मिलने पर ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल

    उज्जैन स्टेशन पर यात्री को आया हार्ट अटैक, टीटीई ने दिया CPR; स्ट्रेचर न मिलने पर ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रविवार शाम एक दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई जिसने रेलवे स्टेशनों पर आपात चिकित्सा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी। ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। मौके पर मौजूद टिकट निरीक्षक ने तत्काल CPR देकर जान बचाने का प्रयास किया लेकिन समय पर चिकित्सा सुविधा और जरूरी संसाधन उपलब्ध न होने के कारण यात्री की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई।यह घटना 21 दिसंबर की शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। उज्जैन रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 पर नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 18233 खड़ी थी। इसी दौरान संजू रजवाड़े नामक यात्री कोच A1 के पास से जनरल डिब्बे की ओर दौड़ते हुए ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जैसे ही वह ट्रेन में चढ़ने के करीब पहुंचा अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह प्लेटफॉर्म पर गिर पड़ा।

    प्लेटफॉर्म पर मची अफरा-तफरी
    यात्री के गिरते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद अन्य यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई। इसी बीच मौके पर मौजूद इंदौर में पदस्थ मुख्य टिकट निरीक्षक कृपाशंकर पटेल ने बिना समय गंवाए यात्री की मदद शुरू की। उन्होंने तुरंत CPR देना शुरू किया जिससे कुछ देर बाद यात्री की पल्स में हल्का सुधार देखा गया। यात्रियों का कहना है कि अगर यह त्वरित प्रतिक्रिया नहीं होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

    डॉक्टर और स्ट्रेचर नहीं मिले समय पर

    CPR के बाद यात्री को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की आवश्यकता थी। रेलवे अधिकारियों ने सीएमआई कंट्रोल रतलाम को सूचना देकर स्टेशन पर डॉक्टर भेजने का अनुरोध किया। हालांकि डॉक्टर समय पर स्टेशन नहीं पहुंच सका। इसी बीच एक और बड़ी समस्या सामने आई-प्लेटफॉर्म पर मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था।स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने काफी देर तक स्ट्रेचर का इंतजार किया लेकिन जब कोई व्यवस्था नहीं हो सकी तो उन्होंने खुद निर्णय लिया कि मरीज को और देर तक प्लेटफॉर्म पर रखना खतरे से खाली नहीं है।

    ट्रॉली से पहुंचाया गया अस्पताल

    मजबूरी में यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों ने स्टेशन पर सामान ढोने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की ट्रॉली का सहारा लिया। उसी ट्रॉली पर संजू रजवाड़े को लिटाकर स्टेशन परिसर से बाहर ले जाया गया और वहां से एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया लेकिन अत्यधिक समय बीत जाने और दिल का दौरा गंभीर होने के कारण यात्री की जान नहीं बचाई जा सकी।

    वीडियो वायरल उठे सवाल

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की आपात व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यात्रियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि उज्जैन जैसे बड़े और व्यस्त रेलवे स्टेशन पर अगर समय पर डॉक्टर और स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हैं तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
    लोगों का यह भी कहना है कि यदि मौके पर मौजूद टिकट निरीक्षक और अन्य कर्मचारियों ने तत्परता नहीं दिखाई होती तो स्थिति और भी भयावह हो सकती थी।

    प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि यह घटना सार्वजनिक स्थानों खासकर रेलवे स्टेशनों पर त्वरित चिकित्सा सहायता प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है।यह हादसा बताता है कि आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए रेलवे को अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करना होगा।