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  • Share Market Today, बाजार की दिशा तय करेंगे वैश्विक संकेत और कंपनियों के नतीजे, निवेशकों के लिए अहम रहेगा आज का कारोबार

    Share Market Today, बाजार की दिशा तय करेंगे वैश्विक संकेत और कंपनियों के नतीजे, निवेशकों के लिए अहम रहेगा आज का कारोबार


    नई दिल्ली । शेयर बाजार में मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव का माहौल बना रहा। पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी रिकवरी के बाद निवेशकों को बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद थी लेकिन वैश्विक संकेतों कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव दिखाई दिया। निवेशकों की नजर इस बात पर बनी रही कि घरेलू खरीदारी बाजार को कितनी मजबूती दे पाती है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां आगे कारोबार की दिशा को किस तरह प्रभावित करती हैं।

    सोमवार 26 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद खरीदारी लौटी थी। सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73 हजार 606.75 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 153.20 अंक यानी 0.68 प्रतिशत चढ़कर 22 हजार 753.20 के स्तर पर पहुंच गया था। इस तेजी से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली लेकिन मंगलवार के कारोबार में बाजार की स्थिरता को लेकर सतर्कता बनी रही। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि बाजार में आई रिकवरी आगे भी जारी रहती है या फिर वैश्विक दबाव एक बार फिर गिरावट का कारण बनता है।

    बाजार की चिंता बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं। ब्रेंट क्रूड के करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई परिवहन खर्च और कई कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। यदि कंपनियों की लागत बढ़ती है तो उनके मुनाफे पर भी दबाव आने की आशंका रहती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ाया है।

    मंगलवार को आईटी शेयरों में कमजोरी भी बाजार पर दबाव बनाने वाला प्रमुख कारक रही। इंफोसिस के वित्त वर्ष 2027 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती की खबर से कंपनी के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इसके अलावा टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि दूसरी ओर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में मजबूती दिखाई दी। कंपनी के तिमाही प्रदर्शन से जुड़े बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में कंपनियों के वित्तीय नतीजों के आधार पर अलग अलग क्षेत्रों में खरीदारी और बिकवाली देखने को मिल रही है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी के आसपास कारोबार में उतार चढ़ाव बढ़ने की संभावना भी रहती है। ऐसे में बाजार की अगली चाल को लेकर निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल बना हुआ है।

    इस माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की हर तेजी या गिरावट के आधार पर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनियों की वित्तीय स्थिति उनके नतीजों और जोखिमों का आकलन करना महत्वपूर्ण है। अल्पकालीन कारोबार करने वालों को बाजार में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए जबकि लंबी अवधि के निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार की दिशा आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक घटनाक्रम अमेरिकी फेड के फैसले और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

  • शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री

    शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26 अक्टूबर को कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दबाव में नजर आए। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ खरीदारी लौटी और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रही। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही।

    दोपहर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 73 हजार 179 अंक के आसपास पहुंच गया जबकि एनएसई निफ्टी 22 हजार 610 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी आने से निवेशकों को कुछ राहत मिली लेकिन बाजार में पूरी तरह मजबूती लौटने के संकेत नहीं मिले। कारोबार के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर शेयरों की चाल पर दिखाई दिया।

    बाजार की चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था की विकास गति पर भी पड़ सकता है।

    शेयरों की बात करें तो सोमवार को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहने के बाद शेयर में तेजी दर्ज की गई। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बढ़त रही। इसके विपरीत इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना रहा। कंपनी की ओर से सालाना राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। उत्तर अमेरिकी बाजार में कमजोरी भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

    श्रीराम फाइनेंस का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी की ओर से कर्ज वृद्धि के अनुमान में कमी और संभावित क्रेडिट लागत को लेकर संकेत दिए जाने के बाद शेयर में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल वैश्विक घटनाक्रम ही नहीं बल्कि कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अनुमान भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। तिमाही नतीजों के इस दौर में अलग अलग कंपनियों के शेयरों में अलग रुख देखने को मिल सकता है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला न लें और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति तथा अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें।

  • शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड

    शेयर बाजार में जियो का ऐतिहासिक धमाका! 1 करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार कर दुनिया में बनाया नया रिकॉर्ड


    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ ने निवेशकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। कंपनी के आईपीओ को 1.2 करोड़ से अधिक आवेदन मिलने का दावा किया गया है। यह आंकड़ा भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में किसी आईपीओ के लिए सबसे अधिक बताया जा रहा है। इसके साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स का इश्यू दुनिया का पहला ऐसा आईपीओ बन गया है जिसे एक करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले हैं। इस उपलब्धि के साथ कंपनी ने वारी एनर्जीज के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। वारी एनर्जीज के आईपीओ को लगभग 97 लाख आवेदन मिले थे। जियो के आईपीओ को मिले इस शानदार रिस्पॉन्स ने शेयर बाजार में कंपनी को लेकर निवेशकों के उत्साह को साफ तौर पर जाहिर किया है।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की शुरुआत से ही निवेशकों की दिलचस्पी देखने को मिली। 21 अक्टूबर को खुला यह इश्यू महज दो घंटे के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। पहले दिन कंपनी के आईपीओ के लिए लगभग 30.5 लाख आवेदन आए। इसके बाद दूसरे दिन के अंत तक आवेदनों की संख्या बढ़कर 75 लाख के पार पहुंच गई। तीसरे दिन निवेशकों की भागीदारी ने एक करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। आईपीओ के अंतिम दिन तक आवेदन 1.2 करोड़ से अधिक हो गए। सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के मुताबिक इश्यू को कुल मिलाकर 22 गुना से ज्यादा बोलियां मिलीं। कंपनी के 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 438 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां लगाई गईं। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में भी भारी मांग रही और यह हिस्सा लगभग 70 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    जियो प्लेटफॉर्म्स के इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1065 रुपये से 1119 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया था। निवेशकों के लिए एक लॉट में 12 शेयर रखे गए थे। कंपनी ने इश्यू के अपर प्राइस बैंड पर लगभग 30213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई थी। इसके आधार पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर आंका गया। आईपीओ की एक खास बात यह भी है कि इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज या अन्य मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार इश्यू में नए शेयर जारी किए गए हैं।

    आईपीओ खुलने से पहले ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने जियो प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा जताया था। कंपनी ने 19 अक्टूबर को 212 एंकर निवेशकों से लगभग 8110 करोड़ रुपये जुटाए थे। इन निवेशकों को 1119 रुपये प्रति शेयर की दर से शेयर आवंटित किए गए। एंकर निवेशकों की श्रेणी में 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बोलियां मिलने की बात कही गई। इसमें ब्लैकरॉक फिडेलिटी इन्वेस्टमेंट्स जीआईसी और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी जैसे बड़े वैश्विक निवेशक शामिल थे।

    आईपीओ से जुटाई जाने वाली राशि का इस्तेमाल कंपनी अपनी कारोबारी योजनाओं को आगे बढ़ाने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए करेगी। जियो प्लेटफॉर्म्स की योजना 27500 करोड़ रुपये तक अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में लगाने की है। शेष राशि का उपयोग पूंजीगत खर्च और कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। कुल मिलाकर जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को मिला यह ऐतिहासिक रिस्पॉन्स भारतीय शेयर बाजार में बड़े सार्वजनिक निर्गमों के प्रति निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है। हालांकि आईपीओ में भारी मांग मिलने का मतलब यह नहीं है कि लिस्टिंग के बाद शेयर से मुनाफा होना तय है।

  • भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर

    भारत में AI कंपनियों के IPO से निवेशकों को मिलेगी नई उम्मीद, 55 अरब डॉलर की वैल्यू वाली कंपनियों पर नजर


    नई दिल्ली। भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम आने वाले दो से तीन वर्षों में शेयर बाजार के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। गोल्डमैन सैक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में एआई स्टार्टअप्स की संभावित लिस्टिंग से सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मूल्यांकन में 50 अरब डॉलर से लेकर 100 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में मध्यम से लेकर अंतिम विकास चरण तक पहुंच चुकी करीब 70 निजी एआई कंपनियों में से 25 से 50 प्रतिशत कंपनियां आने वाले समय में अपना आईपीओ ला सकती हैं। इन कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग उनके मौजूदा अनुमानित मूल्यांकन से औसतन करीब चार गुना अधिक वैल्यूएशन पर हो सकती है। इससे भारतीय शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों की संख्या बढ़ने के साथ निवेशकों को इस क्षेत्र में निवेश के नए अवसर मिल सकते हैं।

    एआई स्टार्टअप्स की फंडिंग में तेजी

    भारत में एआई कंपनियों के प्रति निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के बाद से भारतीय एआई स्टार्टअप्स के लिए निजी इक्विटी फंडिंग तीन गुना हो गई है। वहीं देश में कुल निजी इक्विटी निवेश में एआई की हिस्सेदारी चार गुना बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि निवेशक अब एआई को केवल उभरती हुई तकनीक के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में बड़े कारोबार और कमाई की संभावना वाले क्षेत्र के तौर पर देख रहे हैं। भारत निजी एआई फंडिंग के मामले में दुनिया के शीर्ष छह देशों में शामिल है। वहीं नई फंडिंग हासिल करने वाली एआई कंपनियों की संख्या के आधार पर देश दुनिया के शीर्ष चार देशों में जगह रखता है। इस स्थिति से भारतीय एआई उद्योग को वैश्विक निवेश बाजार में मजबूती मिलने की संभावना है।

    84 निजी एआई कंपनियों की कुल वैल्यू 55 अरब डॉलर

    गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट में भारत की 84 निजी कंपनियों को प्राइवेट एआई कंटेंडर्स के रूप में पहचाना गया है। इन कंपनियों का कुल अनुमानित मूल्यांकन करीब 55 अरब डॉलर है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 के बाद से भारत में एआई से जुड़ी कुल निजी फंडिंग का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं कंपनियों को मिला है। ये कंपनियां एआई तकनीक से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। इनमें एआई सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं के साथ ऐसे व्यवसाय भी शामिल हैं जो एआई सिस्टम के संचालन के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन कंपनियों के संभावित आईपीओ से शेयर बाजार में एआई से जुड़ी कारोबारी गतिविधियों का दायरा बढ़ सकता है।

    अपस्ट्रीम एआई क्षेत्र में सबसे बड़ा अवसर

    रिपोर्ट में एआई वैल्यू चेन के शुरुआती और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्र को सबसे बड़े अवसर के रूप में बताया गया है। इसे अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स कहा जाता है और इसका अनुमानित मूल्यांकन करीब 35 अरब डॉलर है। इस क्षेत्र में बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से लेकर सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन चिप डिजाइन क्वांटम कंप्यूटिंग डेटा सेंटर क्लाउड सेवाओं और डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियां आती हैं। एआई तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित करने और चलाने के लिए इन क्षेत्रों की अहम भूमिका होती है। इसी वजह से इनके कारोबार में वृद्धि की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    आईपीओ में दो-तिहाई हिस्सेदारी की संभावना

    गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि भविष्य में एआई कंपनियों की संभावित लिस्टिंग के कुल मूल्य में से लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा अपस्ट्रीम एआई इनेबलर्स का हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय शेयर बाजार में एआई वैल्यू चेन के उन हिस्सों को भी प्रतिनिधित्व मिल सकता है जो फिलहाल बाजार में कम दिखाई देते हैं। गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के सह-प्रमुख और एशिया-प्रशांत इक्विटी रणनीतिकार टिमोथी मो के मुताबिक एआई कंपनियों की लिस्टिंग से भारतीय बाजार में इस क्षेत्र से जुड़ी सूचीबद्ध कंपनियों का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि संभावित मूल्यांकन और आईपीओ की संख्या अनुमान पर आधारित हैं। वास्तविक नतीजे बाजार की स्थिति कंपनियों के प्रदर्शन और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेंगे।

  • शेयर बाजार में गिरावट के बाद अब क्या होगा, 13 अक्टूबर को इन बड़े संकेतों से तय होगी सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा

    शेयर बाजार में गिरावट के बाद अब क्या होगा, 13 अक्टूबर को इन बड़े संकेतों से तय होगी सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा

    नई दिल्ली । निवेशकों के लिए अहम रहेगा मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 13 अक्टूबर 2026 को निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में शुरुआती मजबूती के बावजूद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इससे निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। अब बाजार की दिशा घरेलू आर्थिक संकेतों के साथ वैश्विक बाजारों के रुख पर भी निर्भर करेगी।

    ऐसे में कारोबारियों को मंगलवार के सत्र में जल्दबाजी के बजाय सोच समझकर फैसले लेने की जरूरत होगी। सोमवार को भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 0.76 प्रतिशत गिरकर 71 हजार 924 अंक के आसपास बंद हुआ जबकि निफ्टी 50 में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 22 हजार 400 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी अनिश्चितता प्रमुख कारण रहे। निवेशक महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर भी सतर्क हैं।

    मंगलवार को बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल रहेंगी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। इसके उलट कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए राहत का संकेत बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से कुछ सहारा मिल रहा है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो तेजी टिकने में मुश्किल हो सकती है। इसके विपरीत खरीदारी बढ़ने पर बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    इस सप्ताह निवेशकों की निगाह महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी रहेगी। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन को समझने में मदद मिलेगी। मजबूत नतीजे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं जबकि कमजोर प्रदर्शन वाले शेयरों पर दबाव आ सकता है। अमेरिकी बाजारों की दिशा डॉलर और रुपये की चाल तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।

    निवेशकों के लिए मंगलवार को सबसे जरूरी बात बाजार के शुरुआती रुख को देखकर तुरंत फैसला नहीं करना है। शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली या गिरावट के बाद खरीदारी दोनों स्थितियों में बाजार की मजबूती की पुष्टि देखना जरूरी होगा। केवल अफवाह या सोशल मीडिया पर चल रही किसी खबर के आधार पर शेयर खरीदने से बचना चाहिए। किसी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के नतीजे कारोबार की स्थिति और जोखिम का आकलन करना बेहतर होगा।

    कुल मिलाकर 13 अक्टूबर को शेयर बाजार में सतर्क कारोबार रहने की संभावना है। कच्चे तेल में राहत विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और महंगाई से जुड़े संकेत बाजार को दिशा दे सकते हैं। हालांकि बाजार की वास्तविक चाल कारोबारी सत्र के दौरान सामने आने वाले आंकड़ों और खबरों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि बाजार का अनुमान निश्चित परिणाम नहीं होता इसलिए अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार ही फैसला लें।

  • Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें

    Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करके लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की चाह रखने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस शेयर में पैसा लगाया जाए और कौन सी कंपनी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। बाजार में रोजाना शेयरों की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में कई निवेशक तेजी से मुनाफा कमाने की उम्मीद में बिना पूरी जानकारी के शेयर खरीद लेते हैं। हालांकि शेयर बाजार में कमाई की कोई गारंटी नहीं होती और गलत फैसले से पूंजी का नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार को समझना बेहद जरूरी है।

    अगर आप शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता तय करें। कम समय में जरूरत पड़ने वाली रकम को शेयर बाजार में लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि बाजार गिरने पर नुकसान में शेयर बेचने की नौबत आ सकती है। लंबी अवधि के निवेश के लिए ऐसी कंपनियों का अध्ययन किया जा सकता है जिनका कारोबार मजबूत हो और जिनकी कमाई बढ़ने की संभावनाएं हों। केवल किसी परिचित की सलाह या इंटरनेट पर मिलने वाले बड़े मुनाफे के दावों के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

    निवेश के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कंपनियों पर भी नजर रखी जा सकती है। रोजमर्रा की जरूरतों के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां और बिजली तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी निवेशकों के अध्ययन में शामिल हो सकती हैं। लेकिन किसी सेक्टर का तेजी से बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा हर शेयर अच्छा रिटर्न देगा। कंपनी की मौजूदा कीमत और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।

    किसी शेयर को खरीदने से पहले पांच महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। पहला संकेत कंपनी की बिक्री और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी है। दूसरा संकेत कंपनी पर कर्ज की स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता है। तीसरा संकेत कंपनी का प्रबंधन और कारोबार चलाने का तरीका है। चौथा संकेत कंपनी के पास भविष्य में विकास के अवसर होना है। पांचवां संकेत शेयर की मौजूदा कीमत का कंपनी की कमाई और वित्तीय स्थिति के मुकाबले उचित होना है। इन पहलुओं का अध्ययन करने से निवेशक को कंपनी की मजबूती और संभावित जोखिम समझने में मदद मिल सकती है।

    जो लोग खुद कंपनियों का विश्लेषण नहीं कर पाते वे म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड के विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स देश की 50 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। इससे जुड़े इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं। इससे किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम हो सकती है लेकिन बाजार में गिरावट आने पर ऐसे निवेश का मूल्य भी घट सकता है।

    निवेश करते समय पूरी रकम एक ही शेयर में लगाने से बचना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निवेश करें और आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग बचत रखें। बिना पर्याप्त जानकारी के इंट्राडे ट्रेडिंग और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम वाले कारोबार में पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर मिलने वाली शेयर खरीदने की सलाह और निश्चित मुनाफे के दावों की जांच किए बिना उन पर भरोसा न करें।

    शेयर बाजार में बेहतर निवेश का रास्ता जल्दबाजी के बजाय जानकारी और अनुशासन से होकर गुजरता है। किसी भी शेयर को खरीदने से पहले कंपनी के कारोबार और उसकी कीमत का आकलन करें तथा अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखें। कोई भी शेयर निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देता। बड़ी रकम निवेश करने से पहले जरूरत के अनुसार सेबी में पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लेना समझदारी हो सकती है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल

    शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी, सेंसेक्स-निफ्टी लुढ़के, अब 8 अक्टूबर के बाद किस ओर जाएगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 8 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार के कारोबार पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है। इससे पहले 7 अक्टूबर का कारोबारी सत्र बाजार के लिए काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। RBI की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद बाजार में दबाव बढ़ा और सेंसेक्स 429 अंक की गिरावट के साथ 72638.70 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी भी 173 अंक फिसलकर 22603.05 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और अब 8 अक्टूबर के कारोबार में बाजार किस दिशा में जाता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

    दरअसल भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया। करीब चार साल में यह पहली बड़ी दर बढ़ोतरी है। इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति का रुख न्यूट्रल से बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया। बाजार के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उधारी लागत प्रभावित हो सकती है और ब्याज दर पर निर्भर सेक्टरों में दबाव बढ़ सकता है।

    7 अक्टूबर को बाजार में ज्यादातर प्रमुख सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली। मेटल शेयरों पर खास दबाव रहा और निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 2.3 फीसदी नीचे रहा। रियल एस्टेट और ऑटो जैसे ब्याज दर से प्रभावित होने वाले सेक्टर भी दबाव में रहे। दूसरी तरफ बैंकिंग शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली। RBI के फैसले के बाद बैंक निफ्टी ने दिन के निचले स्तर से करीब 600 अंक की रिकवरी भी दिखाई। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में पूरी तरह से बिकवाली का माहौल नहीं है बल्कि अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की रणनीति अलग रह सकती है।

    शेयरों की बात करें तो टाइटन में करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में रहा। अदाणी एंटरप्राइजेज और हिंदाल्को इंडस्ट्रीज में भी दबाव दिखाई दिया। इसके उलट कोटक महिंद्रा बैंक में करीब 1.9 फीसदी की तेजी रही। ऐसे में 8 अक्टूबर को निवेशकों की नजर उन शेयरों पर रह सकती है जिनमें मजबूत कारोबार और बेहतर तिमाही प्रदर्शन की उम्मीद है।

    बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमत भी बड़ा संकेत बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे तेल का असर भारत के आयात बिल के साथ महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। इसके अलावा रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है। 7 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 2961 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 5088 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

    कुल मिलाकर 8 अक्टूबर का कारोबार बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। RBI की सख्त नीति कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें कमजोर रुपया और वैश्विक बाजारों के संकेत मिलकर बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकते हैं। वहीं मजबूत आर्थिक विकास का अनुमान बाजार के लिए सकारात्मक पक्ष है। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 फीसदी किया है। ऐसे में निवेशकों को बाजार की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय जोखिम और कंपनी के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

  • शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली। आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू बाजार की दिशा पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है ऐसे में आज भी सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक शेयर बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल और आर्थिक आंकड़ों की भूमिका अहम रह सकती है। निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे केवल बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार की मौजूदा स्थिति को समझकर फैसला लें।

    आज के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टर चर्चा में रह सकते हैं। इन सेक्टरों में होने वाली खरीदारी या बिकवाली का सीधा असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दे सकता है। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। अगर घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों से समर्थन मिलता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है। दूसरी ओर कमजोर वैश्विक संकेत और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।

    निवेशकों की नजर आज विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी रहेगी। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है जबकि भारी बिकवाली से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी आईटी और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और कुछ प्रमुख कंपनियों पर पड़ सकता है इसलिए कमोडिटी बाजार के संकेत भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

    बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए आज सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर भी अहम रहेंगे। अगर निफ्टी अपने महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो खरीदारी का भरोसा बढ़ सकता है जबकि अहम सपोर्ट स्तर टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। सेंसेक्स में भी इसी तरह ऊपरी और निचले स्तरों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाली तेजी या गिरावट के आधार पर भावनात्मक फैसला लेने से बचना चाहिए।

    शेयर बाजार में हमेशा जोखिम बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी इस बात की गारंटी नहीं होती कि आगे भी उसमें वैसा ही प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इसलिए निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स कमाई कारोबार की स्थिति कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश का निर्णय लेना चाहिए। आज के कारोबार में बाजार की शुरुआत भले ही सकारात्मक या नकारात्मक संकेतों के साथ हो लेकिन पूरे दिन वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों के कारण तस्वीर बदल सकती है। ऐसे में सतर्क रणनीति अपनाना और जोखिम के अनुसार निवेश करना ही बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

  • Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

    Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर


    नई दिल्ली। 6 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए राहत की सांस ली। 5 अक्टूबर को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72 382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22 555.75 पर पहुंच गया। बाजार में इस सुधार को कई अहम संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।

    5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

    निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।

    5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।

    ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।