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  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • 24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर

    24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी लिहाज से महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है। इस दिन बाजार में सामान्य कारोबार के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों की लिस्टिंग भी होने जा रही है। NSE का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा और अब इसकी लिस्टिंग पर बाजार की नजर बनी हुई है। आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था जबकि योग्य संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। इसके अलावा NSE के शेयर Metropolitan Stock Exchange of India पर भी कारोबार के लिए उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। NSE की लिस्टिंग ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के सत्रों में उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है।

    बुधवार 23 सितंबर के कारोबार के दौरान भी बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रही। इससे एक दिन पहले 22 सितंबर को Sensex करीब 0.44 प्रतिशत गिरकर 74529.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस दौरान Reliance Industries समेत कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    वहीं 21 सितंबर को भारतीय बाजार में हाल की लगातार गिरावट के बाद खरीदारी देखने को मिली थी। उस दिन Nifty 50 करीब 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23414.30 पर जबकि Sensex 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74858.99 पर बंद हुआ था। बाजार में इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी रही।

    24 सितंबर के कारोबार में NSE की लिस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है। NSE के आईपीओ का इश्यू साइज करीब 22568.94 करोड़ रुपए था और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS था। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बिक्री के लिए पेश किए थे।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों को लेकर प्रीमियम की चर्चा भी रही है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत आधिकारिक लिस्टिंग कीमत या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते। इसलिए निवेशकों के लिए वास्तविक बाजार भाव और कारोबार शुरू होने के बाद सामने आने वाली स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

    इसके अलावा भारतीय बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बॉन्ड यील्ड और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी या बिकवाली जैसे कारक भी अहम रहेंगे। हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बने हुए हैं।

    ऐसे में 24 सितंबर का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ Sensex और Nifty के रुख पर नजर होगी तो दूसरी तरफ NSE के शेयर बाजार में अपनी पहली कीमत पर कारोबार शुरू करेंगे। निवेशकों को किसी भी शेयर में निर्णय लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में तेजी या गिरावट की कोई भी संभावना निश्चित नहीं मानी जा सकती।

  • 23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल

    23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 23 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। मंगलवार 22 सितंबर को घरेलू बाजार में दबाव देखने को मिला और कारोबार के अंत में निफ्टी 50 करीब 0.36 प्रतिशत गिरकर 23329 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74529.08 पर रहा। आईटी शेयरों में दबाव बाजार की कमजोरी की प्रमुख वजहों में शामिल रहा। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    अब 23 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी। हाल के सत्रों में क्रूड की कीमतों में उतार चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर महंगाई और कंपनियों की लागत से लेकर निवेशकों की धारणा तक दिखाई दे सकता है। मंगलवार को भी बाजार पर क्रूड और भू राजनीतिक घटनाक्रम का असर नजर आया।

    निफ्टी के स्तरों की बात करें तो 23 सितंबर को कारोबार के दौरान 23300 के आसपास का स्तर बाजार की नजर में रह सकता है। इसके ऊपर टिकाव बाजार में स्थिरता का संकेत दे सकता है जबकि कमजोरी बढ़ने पर निवेशकों की नजर अगले सपोर्ट स्तरों पर जा सकती है। इससे पहले 21 सितंबर को निफ्टी 23414.30 पर बंद हुआ था और बाजार में खरीदारी का रुख देखने को मिला था। उस सत्र में सेंसेक्स 564 अंक चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ था।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी पूंजी का प्रवाह बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकता है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी कई बार गिरावट के दौरान सहारा देने का काम करती है। ऐसे में 23 सितंबर को निवेशकों की नजर एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी।

    सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों की गतिविधि खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। मंगलवार को आईटी इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई थी। इसके अलावा बैंकिंग ऑटो फार्मा मेटल और एनर्जी शेयरों में भी स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। बाजार में किसी एक सेक्टर की चाल पूरे इंडेक्स की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

    इस समय निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिकी बाजारों की स्थिति एशियाई बाजारों का रुख डॉलर की चाल बॉन्ड यील्ड कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सभी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती हैं। सोमवार को वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी लेकिन मंगलवार को बाजार फिर दबाव में आ गया। इससे साफ है कि मौजूदा दौर में बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    23 सितंबर को निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की शुरुआती चाल के साथ प्रमुख स्तरों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। शेयर बाजार में किसी भी दिशा की गारंटी नहीं होती इसलिए निवेश का फैसला अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार करना जरूरी है। आने वाले कारोबार में वैश्विक संकेत और घरेलू घटनाक्रम मिलकर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

  • Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

    Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

    निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

    इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

  • हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी

    हफ्ते के आखिरी दिन बाजार में मिला-जुला रुख निफ्टी चढ़ा IT शेयर फिसले जानिए किन सेक्टरों में रही तेजी


    नई दिल्ली। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान कभी बाजार में तेजी दिखाई दी तो कभी बिकवाली का दबाव बढ़ा। अंत में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लगभग सपाट बंद हुआ जबकि निफ्टी बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहा। व्यापक बाजार में हालांकि खरीदारी का रुझान मजबूत रहा और मिडकैप तथा स्मॉलकैप इंडेक्स में भी तेजी दर्ज की गई।

    कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 19.63 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 75.80 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 23346.40 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों में अलग अलग रुख देखने को मिला।

    व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.24 प्रतिशत की तेजी रही जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 1.74 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि शुक्रवार के कारोबार में बड़ी कंपनियों के अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही।

    सेक्टर के स्तर पर भी बाजार में अलग अलग रुझान दिखाई दिए। निफ्टी मेटल निफ्टी रियल्टी निफ्टी ऑयल एंड गैस निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल में मजबूती रही। दूसरी ओर निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में कमजोरी की एक वजह प्रॉफिट बुकिंग को माना गया। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च पर संभावित असर को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है।

    निफ्टी 50 में अदाणी पोर्ट्स अदाणी एंटरप्राइजेज भारती एयरटेल एचडीएफसी बैंक पावरग्रिड अल्ट्राटेक सीमेंट और अपोलो हॉस्पिटल जैसे शेयर बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। वहीं टीसीएस टीएमपीवी एसबीआई लाइफ कोल इंडिया मारुति सुजुकी एनटीपीसी टाटा कंज्यूमर और सन फार्मा में गिरावट देखने को मिली।

    बाजार के एक विशेषज्ञ के अनुसार लगातार बनी भू राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल यील्ड में नरमी ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को कुछ समर्थन दिया। इसके चलते भारतीय इक्विटी बाजार में रिकवरी का रुझान जारी रहा। बड़े केंद्रीय बैंकों की ओर से उम्मीद के मुताबिक नीतिगत फैसलों के बाद मिले सकारात्मक वैश्विक संकेतों से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ने की बात कही गई।

    विशेषज्ञ के अनुसार बाजार की रिकवरी कई सेक्टर में दिखाई दी लेकिन आईटी शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव रहा। आगे बाजार की दिशा को लेकर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रहेंगी। कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक यील्ड में नरमी से फिलहाल राहत मिली है लेकिन यह रिकवरी कितनी टिकाऊ रहती है यह ग्लोबल मैक्रो जोखिमों में कमी और विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश पर निर्भर कर सकता है।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबार भारतीय शेयर बाजार के लिए मिश्रित रहा। सेंसेक्स लगभग सपाट रहा जबकि निफ्टी और व्यापक बाजार सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली। अगले कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों विदेशी निवेश और विभिन्न सेक्टरों में खरीदारी की दिशा पर रहेगी।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • 11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव

    11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 11 सितंबर का कारोबारी सत्र काफी अहम रहने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। 10 सितंबर को कारोबार के दौरान बाजार में काफी हलचल रही और दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74902.59 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी में करीब 0.2 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। हालांकि बाजार की यह मामूली रिकवरी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं करती है।

    बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश के आयात बिल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शुक्रवार के कारोबार में तेल की कीमतों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

    विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक इस कमजोरी के बीच बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है।

    ग्लोबल मार्केट के संकेत भी शुक्रवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अमेरिकी बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर है। अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

    घरेलू बाजार में निवेशकों को खासतौर पर बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की तेजी से तेल आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है जबकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ शेयरों को इसका अलग असर मिल सकता है। दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण ब्याज दरों और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों पर भी बाजार की नजर रह सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी शुक्रवार का कारोबार महत्वपूर्ण होगा। हाल के सत्रों में निफ्टी में कमजोरी देखी गई है और बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

    कुल मिलाकर 11 सितंबर को शेयर बाजार की चाल कई बड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें मध्य पूर्व का तनाव विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अमेरिकी बाजार और रुपये की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार को बाजार में तेज उतार चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को किसी भी शेयर में फैसला लेने से पहले कंपनी की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। यह खबर निवेश की सलाह नहीं है।

  • शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल

    शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

    बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

    9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

    10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

    निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

    फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।

  • Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा

    Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा


    नई दिल्ली। 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है। बुधवार 2 सितंबर को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 करीब 0.59 फीसदी गिरकर 23914.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.49 फीसदी टूटकर 76570.35 पर पहुंच गया। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ऐसे में गुरुवार 3 सितंबर को निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती दबाव के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

    मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक बन गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश पर आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है और इससे महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है। बुधवार को वैश्विक बाजारों में भी इसी वजह से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर दिखाई दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

    3 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम स्तरों पर भी रहेगी। बाजार में हालिया कमजोरी को देखते हुए 24000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है। बाजार में अभी स्पष्ट तेजी के बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। सितंबर की शुरुआत में वैश्विक जोखिम बढ़ने से विदेशी पूंजी के रुख पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े भी निवेशकों के लिए सकारात्मक पहलू हैं। हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है जो बाजार की घरेलू बुनियाद को मजबूती देती है।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय बाजार की शुरुआती दिशा और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना अहम होगा। खासकर क्रूड ऑयल अमेरिकी बाजारों बॉन्ड यील्ड रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार को अगले संकेत मिल सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर माना जा सकता है। यह बाजार विश्लेषण है निवेश का व्यक्तिगत सुझाव नहीं।

  • शेयर बाजार में आज बड़ा फैसला लेने से पहले रहें सतर्क! ग्लोबल मार्केट और आर्थिक संकेत तय करेंगे सेंसेक्स निफ्टी का रुख

    शेयर बाजार में आज बड़ा फैसला लेने से पहले रहें सतर्क! ग्लोबल मार्केट और आर्थिक संकेत तय करेंगे सेंसेक्स निफ्टी का रुख


    नई दिल्ली । 2 सितम्बर को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहने वाली है। पिछले कारोबारी सत्रों की गतिविधियों के बाद आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करने में अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कच्चे तेल की कीमतें रुपये की स्थिति और प्रमुख कंपनियों से जुड़ी खबरें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए आज का दिन सतर्कता के साथ फैसले लेने का हो सकता है क्योंकि छोटी सी सकारात्मक या नकारात्मक खबर भी बाजार के मूड को तेजी से बदल सकती है।

    भारतीय शेयर बाजार लगातार घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों के प्रदर्शन से प्रभावित होता है लेकिन मौजूदा दौर में वैश्विक परिस्थितियां भी निवेशकों की रणनीति पर बड़ा असर डाल रही हैं। अमेरिका और यूरोप के बाजारों की चाल एशियाई बाजारों की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेत भारतीय बाजार में भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में निवेशकों की नजर सुबह से ही ग्लोबल मार्केट के रुझानों पर रहेगी।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की भूमिका भी अहम रहने वाली है। यदि विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में खरीदारी बढ़ाते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ सकता है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार को सहारा देने या दबाव बढ़ाने का काम कर सकती हैं। यही वजह है कि 2 सितम्बर के कारोबार में निवेशकों की नजर खरीद और बिक्री के आंकड़ों पर भी बनी रहेगी।

    कच्चे तेल की कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात खर्च पर असर पड़ सकता है जबकि कीमतों में नरमी अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। इसका प्रभाव तेल और गैस कंपनियों के साथ ही एयरलाइन ट्रांसपोर्ट और अन्य सेक्टरों के शेयरों पर भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा मेटल एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टरों के शेयरों पर आज खास नजर रहने की संभावना है। अलग अलग सेक्टरों में निवेशकों की खरीदारी और मुनाफावसूली बाजार की व्यापक तस्वीर को बदल सकती है। बैंकिंग शेयरों की मजबूती सेंसेक्स और निफ्टी को सहारा दे सकती है जबकि आईटी शेयरों की चाल वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर के संकेतों पर निर्भर रह सकती है। छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रह सकती है लेकिन यहां उतार चढ़ाव अधिक देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में निवेश करते समय केवल एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर फैसले लेना सही रणनीति नहीं है। निवेशकों को कंपनियों की बुनियादी स्थिति सेक्टर की संभावनाओं और लंबे समय के निवेश लक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए बाजार की तकनीकी स्थिति और महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर रखना जरूरी हो सकता है।

    कुल मिलाकर 2 सितम्बर का कारोबारी दिन शेयर बाजार के लिए कई संकेतों से भरा रहने वाला है। घरेलू आर्थिक मजबूती और सकारात्मक कॉरपोरेट गतिविधियां बाजार को समर्थन दे सकती हैं जबकि वैश्विक अनिश्चितता अचानक दबाव भी बना सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना और बाजार की बदलती परिस्थितियों को समझकर रणनीति बनाना सबसे बेहतर कदम हो सकता है। आज सेंसेक्स और निफ्टी की चाल केवल खरीदारी और बिकवाली से नहीं बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के पूरे मिश्रण से तय होगी।