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  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा


    नई दिल्ली। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने एयरपोर्ट से आठ नए शहरों के लिए उड़ानें शुरू कर अपने नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया है। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने भी 2 जुलाई से मुंबई के लिए अपनी नियमित फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इससे नोएडा एयरपोर्ट से यात्रियों के लिए हवाई सफर के विकल्प और बढ़ गए हैं।

    इंडिगो ने 8 नए शहरों को जोड़ा
    15 जून 2026 को शुरू हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडिगो ने शुरुआत में बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ, जम्मू और अमृतसर के लिए उड़ानें संचालित की थीं।

    अब 1 जुलाई से एयरलाइन ने जयपुर, जोधपुर, चंडीगढ़, देहरादून, धर्मशाला, भोपाल, बरेली और पंतनगर के लिए भी फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इसके अलावा 2 जुलाई से किशनगढ़ को भी नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही नोएडा एयरपोर्ट से इंडिगो के गंतव्यों (डेस्टिनेशन) की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।

    मुंबई के लिए अकासा एयर की नई उड़ान
    अकासा एयर ने 2 जुलाई से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाली नई उड़ान सेवा शुरू कर दी है।

    एयरलाइन के बुकिंग पोर्टल के अनुसार, मुंबई रूट पर प्रतिदिन दो नई उड़ानें संचालित की जाएंगी। इससे पहले अकासा एयर देश की पहली एयरलाइन बनी थी, जिसने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को आपस में जोड़ने की शुरुआत की थी।

    जुलाई में रोजाना 40 से अधिक उड़ानों का लक्ष्य
    इंडिगो और अकासा एयर ने 16 जून से नोएडा एयरपोर्ट पर अपना परिचालन शुरू किया था। उस समय दोनों एयरलाइंस मिलकर प्रतिदिन 12 उड़ानें संचालित कर रही थीं, जिनमें आठ इंडिगो और चार अकासा एयर की थीं।

    इंडिगो द्वारा शुरू किए गए नए रूटों में बरेली, जोधपुर और किशनगढ़ के लिए उड़ानें एक दिन छोड़कर संचालित होंगी, जबकि अन्य सभी शहरों के लिए दैनिक उड़ानें उपलब्ध रहेंगी।

    इसके अलावा इंडिगो 13 जुलाई से चंडीगढ़ रूट पर दो अतिरिक्त दैनिक उड़ानें भी शुरू करने जा रही है। इन नई सेवाओं के साथ जुलाई के दौरान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रतिदिन 40 से 42 उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शुरू हुई वाणिज्यिक उड़ानें, इंडिगो की पहली सेवा के साथ दिल्ली-एनसीआर को मिला नया एविएशन हब

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शुरू हुई वाणिज्यिक उड़ानें, इंडिगो की पहली सेवा के साथ दिल्ली-एनसीआर को मिला नया एविएशन हब

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने सोमवार को भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के परिचालन में आने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक नया हवाई प्रवेश द्वार मिल गया है। एयरपोर्ट से पहली नियमित उड़ान सेवा शुरू करने का गौरव इंडिगो एयरलाइन को मिला, जिसने यहां से अपने वाणिज्यिक संचालन का औपचारिक शुभारंभ किया।

    एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हवाई संपर्क को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची, जबकि इसके बाद यहां से पहली प्रस्थान उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। यह शुरुआत केवल एक नई सेवा का आरंभ नहीं बल्कि देश के तेजी से विकसित हो रहे विमानन बुनियादी ढांचे का भी प्रतीक मानी जा रही है।

    इंडिगो ने घोषणा की है कि वह इस नए एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक प्रमुख गंतव्यों से सीधे जोड़ेगी। इसके अतिरिक्त कई शहरों के बीच वन-स्टॉप कनेक्टिविटी की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे यात्रियों को अधिक विकल्प और बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को मिलेगा, जिन्हें अब बड़े महानगरों तक पहुंचने के लिए कम समय और कम जटिल यात्रा करनी पड़ेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा हवाई यातायात दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। राजधानी क्षेत्र में बढ़ती यात्री संख्या और विमान सेवाओं की मांग को देखते हुए यह एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण पूरक भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने में भी सहायक साबित हो सकता है।

    यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित यह एयरपोर्ट रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक क्षेत्रों के निकट होने के कारण इसे भविष्य में एक प्रमुख एविएशन तथा लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे व्यापार, निवेश, पर्यटन और माल परिवहन गतिविधियों को भी नई दिशा मिलने की संभावना है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े एयरपोर्ट का प्रभाव केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहता। इसके आसपास रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, होटल, परिवहन और सेवा क्षेत्र का विस्तार होता है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ भी इसी प्रकार के व्यापक आर्थिक प्रभावों की उम्मीद की जा रही है।

    एयरपोर्ट प्रबंधन ने कहा है कि यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रथम चरण में विकसित इस परियोजना की वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ रखी गई है। वर्तमान परिचालन ढांचे में एक रनवे, एकीकृत टर्मिनल भवन और अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर शामिल हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट के विस्तार के साथ इसकी क्षमता और कनेक्टिविटी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल एक महत्वाकांक्षी परियोजना नहीं रहा, बल्कि उत्तर भारत के विमानन मानचित्र पर एक सक्रिय और महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर चुका है। इससे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना और मजबूत हुई है।

  • फ्लाइट के बाथरूम में रची गई सोना तस्करी की हाईटेक साजिश नाकाम, स्पीकर बॉक्स से निकला 2.8 किलो विदेशी सोना

    फ्लाइट के बाथरूम में रची गई सोना तस्करी की हाईटेक साजिश नाकाम, स्पीकर बॉक्स से निकला 2.8 किलो विदेशी सोना

    नई दिल्ली । देश में सोना तस्करी के नए-नए तरीकों के बीच अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। कस्टम विभाग ने दुबई से अहमदाबाद पहुंची एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान के टॉयलेट में छिपाकर रखा गया बड़ी मात्रा में विदेशी सोना बरामद किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि तस्करों ने विमान के बाथरूम में लगे साउंड सिस्टम का इस्तेमाल सोने को छिपाने के लिए किया था।

    कस्टम अधिकारियों को विमान में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद विस्तृत तलाशी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान विमान के केबिन और विभिन्न तकनीकी हिस्सों की बारीकी से पड़ताल की गई। जब टीम विमान के टॉयलेट तक पहुंची तो वहां एक असामान्य स्थिति दिखाई दी। अधिकारियों ने तकनीकी विशेषज्ञों और विमान इंजीनियरों की सहायता से टॉयलेट में लगे जनरल अनाउंसमेंट सिस्टम के स्पीकर बॉक्स की जांच की।

    स्पीकर यूनिट को खोलने पर उसके भीतर दो विशेष पैकेट मिले, जिन्हें काले रंग की इलेक्ट्रिकल टेप से मजबूती से लपेटा गया था। पैकेटों को बाहर निकालकर खोला गया तो उनके अंदर 24 विदेशी सोने के बिस्किट बरामद हुए। बरामद सोने का कुल वजन लगभग 2.8 किलोग्राम बताया गया है, जबकि इसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 4.26 करोड़ रुपये आंकी गई है।

    जांच एजेंसियों का मानना है कि तस्करों ने सोने को विमान के टॉयलेट में छिपाकर रखने की सुनियोजित रणनीति अपनाई थी। आशंका है कि विमान के अहमदाबाद पहुंचने के बाद कोई स्थानीय संपर्क, ग्राउंड स्टाफ का सदस्य अथवा कोई अन्य व्यक्ति इसे निकालकर आगे पहुंचाने वाला था। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण यह पूरी योजना सफल नहीं हो सकी और सोना बरामद कर लिया गया।

    अधिकारियों के अनुसार तलाशी के दौरान विमान में मौजूद किसी भी यात्री या कर्मचारी ने बरामद सोने पर अपना दावा नहीं किया। इससे यह संकेत मिलता है कि तस्करी में शामिल व्यक्ति ने पकड़े जाने के डर से सोने को वहीं छोड़ दिया होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    कस्टम विभाग अब उड़ान से जुड़े दस्तावेजों, यात्री विवरण, क्रू रिकॉर्ड और विमान की गतिविधियों की जांच कर रहा है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोना विमान के भीतर किसने रखा और इसके पीछे कौन-सा तस्करी नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसियां संभावित सहयोगियों और संपर्क सूत्रों की भी पहचान करने में जुटी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी गिरोह लगातार नए और तकनीकी रूप से जटिल तरीके अपनाने की कोशिश कर रहे हैं। विमान के टॉयलेट में लगे स्पीकर सिस्टम का उपयोग कर सोना छिपाने की यह घटना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी मानी जा रही है। फिलहाल बरामद सोने को कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त कर लिया गया है और संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत आगे की कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं।

  • इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद

    इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद


    नई दिल्ली।
    विमान कंपनी इंडिगो (Airline company Indigo) ने जुलाई महीने से छह डेस्टिनेशंस (Six Destinations) के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है. विमानन कंपनी ने ये कदम कमजोर मांग और लगातार बढ़ रही ऑपरेटिंग कॉस्ट (Increasing Operating Costs) को देखते हुए उठाया है।

    इंडिगो का ये फैसला गर्मियों की छुट्टियों मौजूदा सीजन में आया है. इंडिगो के मुताबिक, मलेशिया के लांगकावी, थाईलैंड के क्राबी और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी के लिए उड़ानें 1 जुलाई से सस्पेंड यानी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा, हांगकांग और चीन के शंघाई, कंबोडिया के सिएम रीप के लिए उड़ानों को 3 जुलाई से रोक दिया जाएगा।

    इन सभी छह रूटों पर उड़ानों का सस्पेंशन 30 सितंबर तक लागू रहेगा. ये सभी रूट भारतीय यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर हैं. ये रूट दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराते हैं।


    अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी बुकिंग

    इंडिगो ने बताया है कि इन सभी छह रूटों के लिए टिकटों की बुकिंग 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, अगर मार्किट में मांग में सुधार होता है, तो इन सेवाओं को तय समय से पहले भी बहाल किया जा सकता है. एयरलाइंस ने इस कदम को इंटरनेशनल नेटवर्क में एक सीमित और छोटा सा बदलाव बताया है।

    कंपनी के मुताबिक, साल की ये तिमाही आमतौर पर यात्रा के लिहाज से कमजोर होती है. इसके साथ ही मौजूदा समय में लागत का माहौल भी काफी चुनौतियों से भरा है. अस्थायी कटौती के बावजूद एयरलाइंस ने कहा है कि वो हर हफ्ते 1,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखेगी. कंपनी अपने विदेशी नेटवर्क के बड़े हिस्से को पहले की तरह ही बरकरार रख रही है।

    इंडिगो ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर कोई भी अगला फैसला लेने से पहले मार्किट की कंडीशन, बढ़ती परिचालन लागत और एयरस्पेस के प्रतिबंधों पर नजर रखेगी। इस फैसले से प्रभावित होने वाले यात्रियों को पहले से सूचित किया जाएगा. यात्रियों को रिफंड या दूसरे उपलब्ध विकल्प भी दिए जाएंगे.


    ईरान युद्ध के चलते मैनचेस्टर उड़ान पर भी लगा ब्रेक

    दो दिन पहले ही इंडिगो ने 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए अपनी उड़ानें बंद करने की बात कही थी. एयरलाइंस ने इसके पीछे ईरान युद्ध के चलते इंटरनेशनल एयरस्पेस में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला दिया था.

    कंपनी का कहना है कि इन वजहों से ये रूट कमर्शियल रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा था. इंडिगो के मुताबिक, कुछ एयर कॉरिडोर्स के लगातार बंद रहने की वजह से उड़ानों के समय और खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो गया है.

    इंडिगो फिलहाल दिल्ली और मुंबई से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ानों का संचालन करती है. इस रूट की शुरुआत पिछले साल जुलाई में एयरलाइंस की लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना के तहत की गई थी।

  • इंडिगो को ₹2,536 करोड़ का तिमाही घाटा: महंगे ईंधन और रुपये की कमजोरी से बढ़ा दबाव, किराया बढ़ने के संकेत

    इंडिगो को ₹2,536 करोड़ का तिमाही घाटा: महंगे ईंधन और रुपये की कमजोरी से बढ़ा दबाव, किराया बढ़ने के संकेत

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के वित्तीय नतीजों ने एविएशन सेक्टर में दबाव की तस्वीर को एक बार फिर सामने ला दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी को 2,536 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी ने 3,068 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। एक साल के भीतर मुनाफे से घाटे में पहुंचना इस बात का संकेत है कि एयरलाइन उद्योग इस समय बढ़ती लागत, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और परिचालन चुनौतियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

    इंटरग्लोब एविएशन के तहत संचालित इंडिगो का कुल कारोबार हालांकि इस अवधि में थोड़ा बढ़ा है, लेकिन मुनाफे पर भारी दबाव देखने को मिला है। कंपनी का परिचालन राजस्व 22,438 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाता है। इसके बावजूद खर्चों में तेज बढ़ोतरी ने लाभ को घाटे में बदल दिया। कंपनी के अनुसार इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ की बढ़ती कीमतें और भारतीय रुपये की कमजोरी रही है। डॉलर में होने वाले लीज, मेंटेनेंस और अन्य भुगतान के कारण मुद्रा विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर लागत पर पड़ता है।

    इसके अलावा इस तिमाही में कंपनी पर लगभग 250 करोड़ रुपये का एकमुश्त खर्च भी आया, जिसने वित्तीय परिणामों को और प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मध्य पूर्व में तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिसका असर वैश्विक विमानन उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है। इंडिगो ने संकेत दिए हैं कि यदि लागत में यह बढ़ोतरी जारी रहती है तो आने वाले समय में हवाई किरायों में वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कंपनी अब फ्यूल हेजिंग जैसी रणनीतियों पर भी विचार कर रही है, ताकि भविष्य में ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। यह रणनीति दुनिया की कई बड़ी एयरलाइंस पहले से अपनाती रही हैं। इसके साथ ही इंडिगो ने लगभग 450 मिलियन डॉलर के प्रीपेमेंट को भी मंजूरी दी है, जिसका उपयोग विमान और इंजन जैसे एविएशन एसेट्स की खरीद में किया जाएगा। यह कदम कंपनी को लंबी अवधि में लीज निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।

    प्रबंधन का कहना है कि वित्तीय दबाव के बावजूद कंपनी की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। कंपनी की क्षमता में वृद्धि हुई है और कुल आय में भी सुधार दर्ज किया गया है। हालांकि यात्रियों की संख्या में हल्की गिरावट देखने को मिली है, जो इस तिमाही में 1.1 प्रतिशत घटकर 31.6 मिलियन रह गई। प्रति किलोमीटर आय और सीट भराव दर में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है, हालांकि उद्योग मानकों के अनुसार यह स्थिति अब भी स्थिर मानी जा रही है।

    शेयर बाजार में भी नतीजों का असर देखने को मिला और कंपनी के शेयर में दबाव रहा। हालांकि इंडिगो का बाजार पूंजीकरण अब भी मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो इसकी बाजार स्थिति को दर्शाता है। कुल मिलाकर यह तिमाही एयरलाइन उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण रही है, जहां बढ़ती लागत ने मजबूत मांग के बावजूद मुनाफे को प्रभावित किया है। आने वाले महीनों में किराया निर्धारण और ईंधन कीमतों की दिशा कंपनी के प्रदर्शन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

  • कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू

    कोलकाता एयरपोर्ट पर इंडिगो विमान से टकराया कैटरिंग ट्रक, उड़ान से पहले हादसा; जांच शुरू


    कोलकाता। इंडिगो के एक पार्क किए गए विमान को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को हादसे का सामना करना पड़ा, जब एक कैटरिंग ट्रक विमान के इंजन से टकरा गया। टक्कर से विमान को मामूली नुकसान पहुंचा, हालांकि घटना के समय विमान खाली खड़ा था।

    बे नंबर 51 पर हुआ हादसा

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एयरपोर्ट के बे नंबर 51 पर खड़ा विमान उस समय ऑपरेशन में नहीं था। इसी दौरान कैटरिंग वाहन स्टार्ट करते वक्त अचानक आगे बढ़ गया और सीधे इंजन से जा टकराया। घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों ने तुरंत स्थिति संभाल ली।

    कोई हताहत नहीं

    हादसे में किसी यात्री या स्टाफ के घायल होने की सूचना नहीं है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों ने मौके का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो ने कहा कि 7 अप्रैल को एप्रन पर चल रहा थर्ड-पार्टी मानव रहित वाहन खड़े विमान से टकरा गया। विमान को फिलहाल ग्राउंड कर दिया गया है और विस्तृत जांच व मरम्मत के बाद ही दोबारा उड़ान की अनुमति दी जाएगी।

    यह विमान कोलकाता से गुवाहाटी जाने वाली फ्लाइट 6E 6663 के रूप में संचालित होने वाला था। एयरलाइन ने यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक विमान की व्यवस्था कर दी है।

  • विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज

    विमान ईंधन के दाम बढ़ने के बाद हवाई यात्रा भी हुई महंगी… इंडिगो ₹10,000 तक लगाएगा फ्यूल चार्ज


    नई दिल्ली।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो (Country’s Largest Airline Indigo) ने बुधवार को कहा कि वह विमान ईंधन की कीमतों में वृद्धि (Jet Fuel Prices Rise) के बाद 2 अप्रैल से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 275 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का संशोधित ईंधन शुल्क लगाना शुरू करेगी। ईंधन शुल्क में इस बढ़ोतरी से विभिन्न घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के हवाई किराए बढ़ने तय हैं। एयरलाइन की यह घोषणा उस दिन आई है, जब विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में संशोधन किया गया और सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए कीमतों में 25 प्रतिशत की आंशिक बढ़ोतरी का फैसला किया।

    पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में आए उछाल के मद्देनजर एयरलाइन 14 मार्च से ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों पर 425 रुपये से 2,300 रुपये तक का ईंधन शुल्क वसूल रही है। घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर संशोधित ईंधन शुल्क 275 रुपये से 950 रुपये के बीच होगा।


    कितनी बढ़ोतरी होगी?

    इंडिगो ने एक बयान में कहा कि इंडिगो ने अलग-अलग यात्रा दूरियों के हिसाब से अपने घरेलू ईंधन शुल्क को फिर से निर्धारित किया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मामले में दूरी के आधार पर ईंधन शुल्क 900 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक होगा।


    कब से होगी बढ़ोतरी?

    बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के लिए पिछले महीने में एटीएफ की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं, जिसके चलते इन मार्गों पर एयरलाइन की ऑपरेशनल कॉस्ट पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। ये संशोधित शुल्क 2 अप्रैल को रात 00:01 बजे से लागू होंगे।

    एयरलाइन कंपनियों ने बुधवार को कहा कि विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत में आंशिक वृद्धि से घरेलू हवाई यात्रा की लागत को संतुलित रखने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच यह वृद्धि की गई है।

    स्पाइसजेट के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि सरकार की जेट ईंधन की कीमतों में केवल आंशिक वृद्धि की अनुमति देने का निर्णय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने बयान में यह भी कहा कि समय पर किये गये इस हस्तक्षेप से हाल के समय के सबसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक संकट में से एक से निपटने में एयरलाइंस को काफी मदद मिलेगी।

    नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने नागर विमानन मंत्रालय के परामर्श से घरेलू विमानन कंपनियों के लिए केवल 25 प्रतिशत यानी 15 रुपये प्रति लीटर की आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि लागू करने का निर्णय लिया है।

    संघर्ष के बीच पश्चिम एशिया क्षेत्र में हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयरलाइंस पहले से ही हाई ऑपरेशनल कॉस्ट वहन कर रही हैं। इस स्थिति के कारण एयरलाइंस को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत बढ़ रही है।

  • इंडिगो और अदाणी एयरपोर्ट्स की साझेदारी, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग पर मिलेंगे ब्लूचिप्स रिवॉर्ड

    इंडिगो और अदाणी एयरपोर्ट्स की साझेदारी, ड्यूटी-फ्री शॉपिंग पर मिलेंगे ब्लूचिप्स रिवॉर्ड


    नई दिल्ली : IndiGo और Adani Airport Holdings Limited ने सोमवार को एक नई साझेदारी की घोषणा की है। इस समझौते के तहत एएएचएल द्वारा प्रबंधित हवाई अड्डों पर ड्यूटी-फ्री शॉपिंग करने वाले यात्रियों को अब इंडिगो ब्लूचिप्स रिवॉर्ड प्वाइंट्स मिलेंगे।

    दोनों कंपनियों की ओर से जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, इस साझेदारी के तहत इंडिगो ब्लूचिप्स सदस्य अदाणी प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहले से बुक किए गए ड्यूटी-फ्री उत्पादों पर खर्च किए गए प्रत्येक 100 रुपये पर पांच ब्लूचिप्स प्वाइंट्स अर्जित कर सकेंगे।

    यात्री अपनी यात्रा से पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों को ब्राउज कर सकते हैं, उन्हें रिजर्व कर सकते हैं और भुगतान भी कर सकते हैं। इसके बाद वे एयरपोर्ट पहुंचकर आसानी से अपनी खरीदी गई वस्तुएं प्राप्त कर सकते हैं।

    इंडिगो के मुख्य डिजिटल एवं सूचना अधिकारी Neetan Chopra ने कहा कि कंपनी अपने लॉयल्टी प्रोग्राम के मूल्य को लगातार बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अदाणी ड्यूटी-फ्री के साथ यह साझेदारी उड़ानों से आगे बढ़कर यात्रियों को अतिरिक्त रिवॉर्ड देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    वहीं Suchit Bansal ने कहा कि अदाणी प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल डिस्कवरी, प्री-ऑर्डर और आसान कलेक्शन जैसी सुविधाओं को एकीकृत कर एयरपोर्ट पर शॉपिंग के अनुभव को नया रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इंडिगो के साथ यह साझेदारी भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन और देश के प्रमुख निजी हवाई अड्डा संचालक को एक साथ लाती है, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और लाभदायक अनुभव मिलेगा।

    ग्राहक एक समर्पित पोर्टल पर लॉग इन कर अपनी इंडिगो ब्लूचिप सदस्यता आईडी लिंक कर सकते हैं। खरीदारी पूरी होने के 24 से 48 घंटे के भीतर खर्च के आधार पर रिवॉर्ड प्वाइंट्स उनके खाते में जोड़ दिए जाएंगे।

    यह पहल डिजिटल सुविधा, लॉयल्टी लाभ और एयरपोर्ट रिटेल को एक साथ जोड़कर यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

    फिलहाल यह ड्यूटी-फ्री सुविधा मुंबई, अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, मंगलुरु और लखनऊ हवाई अड्डों पर उपलब्ध है। आने वाले समय में इसे Lokpriya Gopinath Bordoloi International Airport और Navi Mumbai International Airport तक भी विस्तारित करने की योजना है।

    एएएचएल देशभर में आठ हवाई अड्डों का संचालन करता है, जिनमें मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंतपुरम शामिल हैं। वहीं नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, जो भारत के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में से एक है, ने 25 दिसंबर 2025 से वाणिज्यिक संचालन शुरू किया था।

  • US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार

    US-Iran युद्ध की आग में सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के, शेयर बाजार में हाहाकार


    नई दिल्‍ली । भारतीय शेयर बाजार पर सोमवार को अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष का असर देखने को मिला। सेंसेक्स 2,366 अंक टूटकर 76,552 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 717 अंकों की गिरावट के साथ 23,732 पर आ गया। सभी प्रमुख स्टॉक्स लाल निशान में रहे। इंडिगो 7% से अधिक लुढ़ककर शीर्ष नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील 5.59%, मारुति 5.40% और इटरनल 5.19% टूटकर बंद हुए।

    शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट

    सुबह के कारोबार में भी बाजार में दबाव साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,862 अंक की गिरावट के साथ 77,056 पर खुला, जबकि निफ्टी 582 अंक नीचे 23,868 पर आया। NSE पर केवल 249 शेयर ही हरे निशान में थे, जबकि 403 स्टॉक्स 52 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गए। निफ्टी फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से करीब 722 अंकों की गिरावट के साथ 23,824 के आसपास ट्रेड कर रहे थे।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भारी बिकवाली हुई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिससे वैश्विक निवेशक भी सतर्क हो गए।

    एशियाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाहाकार

    सोमवार को एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखा गया। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे चला गया, जबकि टॉपिक्स 5.27% टूट गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले सप्ताह 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से अधिक लुढ़का, जिसमें सैमसंग और SK हाइनिक्स जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित रहीं। गिरावट के चलते सर्किट ब्रेकर चालू किए गए और ट्रेडिंग 20 मिनट के लिए रोक दी गई। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी तेज गिरावट के साथ खुला। वॉल स्ट्रीट में भी दबाव रहा। डॉउ जोन्स फ्यूचर्स में 950 अंक तक की गिरावट आई, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंक से अधिक लुढ़के और नैस्डैक फ्यूचर्स में 400 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

    कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

    अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच हुर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे और खाड़ी के तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के कारण कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड ऑयल 18.03% बढ़कर 109.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड फ्यूचर्स 20.23% उछलकर 109.29 डॉलर पर पहुंच गए। यह दोनों स्तर रूस के 2022 में यूक्रेन पर हमले के शुरुआती महीनों के बाद नहीं देखे गए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध के कारण खाड़ी देशों का उत्पादन बाधित हुआ, तो कच्चे तेल की कीमत $150 तक पहुंच सकती है।

  • इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस

    इंडिगो की बड़ी उपलब्धि, बनी एक हजार से अधिक महिला पायलट वाली देश की पहली एयरलाइंस


    नई दिल्ली। भारत के विमानन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। इसी कड़ी में देश की प्रमुख एयरलाइंस में से एक इंडिगो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी के बेड़े में अब 1000 से अधिक महिला पायलट कार्यरत हैं। यह उपलब्धि न केवल इंडिगो के लिए बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इंडिगो में कुल पायलटों में 17.5 प्रतिशत महिलाएं हैं जो वैश्विक औसत से लगभग तीन गुना अधिक है।

    महिलाओं को अवसर देने पर फोकस

    2015 के बाद से इंडिगो ने पायलट भर्ती और प्रशिक्षण में महिलाओं को विशेष अवसर देने की दिशा में कदम उठाए। कंपनी ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू कीं जिससे महिला उम्मीदवारों को पायलट बनने का मौका मिला। इसी रणनीति के चलते इंडिगो अब उन एयरलाइंस में शामिल हो गई है जहां महिला पायलटों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

    भारत में इस समय लगभग 15 हजार कमर्शियल पायलट हैं जिनमें लगभग 12–15 प्रतिशत महिलाएं हैं। यह अनुपात कई विकसित देशों से बेहतर माना जाता है। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस ने महिला पायलटों को अवसर देकर इस आंकड़े को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

    वैश्विक स्तर पर विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर

    वैश्विक स्तर पर अभी भी विमानन क्षेत्र में लैंगिक अंतर बड़ा है। दुनिया भर में पायलटों में महिलाओं की हिस्सेदारी औसतन केवल 5–6 प्रतिशत है। ऐसे में भारत उन देशों में शामिल हो गया है जहां महिला पायलटों की भागीदारी अपेक्षाकृत अधिक है।

    पायलट बनने के लिए सबसे पहले 12वीं में भौतिकी और गणित होना आवश्यक है। इसके बाद उम्मीदवार को डीजीसीए से मान्यता प्राप्त उड़ान स्कूल से प्रशिक्षण लेना होता है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस पाने के लिए लगभग 200 घंटे की उड़ान प्रशिक्षण पूरी करनी पड़ती है। उसके बाद एयरलाइंस में नौकरी के लिए आवेदन किया जा सकता है।

    महिला पायलटों की संख्या में हो रही वृद्धि

    पिछले एक दशक में भारत में महिला पायलटों की संख्या में तेज वृद्धि हुई है। कई एयरलाइंस अब महिला उम्मीदवारों के लिए विशेष प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति कार्यक्रम चला रही हैं। इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में अब बड़ी संख्या में महिलाएं कॉकपिट की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

    भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल थीं। उन्होंने 1936 में केवल 21 वर्ष की आयु में पायलट लाइसेंस हासिल किया था और उस दौर में महिलाओं के लिए विमानन क्षेत्र में कदम रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। आज भारतीय विमानन क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिगो में 1000 महिला पायलटों का आंकड़ा इसी बदलाव का प्रतीक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में एयरलाइंस में महिला पायलटों की संख्या और बढ़ेगी और यह क्षेत्र लैंगिक समानता की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बन सकता है।