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  • विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक

    विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक


    इंदौर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर इंदौर की डीआरपी लाइन में शस्त्र पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदौर पुलिस को होंडा कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत 50 हाईटेक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इन आधुनिक बाइकों के मिलने से शहर में पुलिस की गश्त को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों को तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इन बाइकों में पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इंदौर की डीआरपी लाइन में हर साल विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। पूजा स्थल को सजाया गया है और कार्यक्रम के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आयोजन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। शस्त्र पूजन विजयादशमी की परंपरा का हिस्सा है और पुलिस विभाग में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान पुलिस को मिलने वाली 50 बाइक की खासियत भी चर्चा में है। ये 350 सीसी क्षमता वाली बाइक होंगी जिनमें पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी इन बाइकों पर लगे सिस्टम के माध्यम से लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा बाइकों में हेलमेट रखने की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुलिस की गश्त को अधिक सुविधाजनक बनाना और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में मदद करना है।

    शहर के कई हिस्सों में ऐसी संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे स्थानों पर बाइक से गश्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नई बाइक मिलने के बाद पुलिसकर्मी संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर मौके तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। इससे पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस की गश्त व्यवस्था में दोपहिया वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े वाहनों की तुलना में बाइक से तंग रास्तों पर पहुंचना और भीड़ के बीच से निकलना आसान होता है। अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी भीड़ को दिशा-निर्देश देने या जरूरी सूचना प्रसारित करने का काम भी कर सकेंगे। हालांकि इन सुविधाओं का वास्तविक असर इनके उपयोग और तैनाती के तरीके पर निर्भर करेगा। पुलिस विभाग की ओर से इन बाइकों का इस्तेमाल शहर की जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

    विजयादशमी के अवसर पर इंदौर के विभिन्न थानों में भी शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित थानों में अधिकारी अपने स्तर पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं डीआरपी लाइन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला आयोजन खास रहेगा क्योंकि इसी अवसर पर पुलिस को 50 आधुनिक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इस पहल से इंदौर पुलिस की गश्त व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के अलग-अलग इलाकों में तेजी से पहुंचने की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।

  • इंदौर में गैरेज संचालक पर 2 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप, बॉडी बिल्डिंग और AC के नाम पर ली रकम, काम अधूरा छोड़कर भागा

    इंदौर में गैरेज संचालक पर 2 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप, बॉडी बिल्डिंग और AC के नाम पर ली रकम, काम अधूरा छोड़कर भागा


    इंदौर । इंदौर में बसों की बॉडी बिल्डिंग और इंटीरियर तैयार करने के नाम पर दो करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक गैरेज संचालक ने 18 से ज्यादा बस मालिकों से बॉडी बनाने सीट कवर लगाने एसी फिट करने और इंटीरियर कस्टमाइजेशन के लिए एडवांस रकम ली लेकिन काम पूरा किए बिना फरार हो गया। लंबे समय तक आरोपी से संपर्क नहीं होने और गैरेज व अन्य ठिकानों पर तलाश के बावजूद उसका पता नहीं चलने पर पीड़ित बस संचालकों ने पुलिस से शिकायत की। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
    पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ताओं में राजा दिव्यांशु बर्मन प्रथम गुप्ता सूरज भारद्वाज शमशेर सिंह सहित अन्य बस मालिक शामिल हैं। इन लोगों ने जनसुनवाई के दौरान डीसीपी को लिखित शिकायत देकर अपनी परेशानी बताई थी। शिकायत में मोहित उर्फ मन्नू पुत्र सत्यनारायण दीक्षित पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि आरोपी एमबी बस के नाम से बसों की बॉडी बनाने और उन्हें जरूरत के मुताबिक तैयार करने का काम करता था। इसी कारोबार के सिलसिले में बस संचालकों ने उसे अलग-अलग कामों के लिए बड़ी रकम एडवांस में दी थी।

    पीड़ितों का कहना है कि आरोपी के साथ उनका लंबे समय से व्यावसायिक लेनदेन चल रहा था। इसी वजह से उन्हें उस पर भरोसा था और उन्होंने बिना किसी आशंका के बसों के काम के लिए रकम सौंप दी। बसों की बॉडी बिल्डिंग से लेकर सीट कवर एसी और इंटीरियर तैयार कराने तक के काम के लिए भुगतान किया गया था। आरोप है कि रकम मिलने के बाद आरोपी ने कुछ काम अधूरे छोड़ दिए और कई मामलों में काम आगे नहीं बढ़ाया। इसके बाद वह कथित तौर पर अपने ठिकानों से गायब हो गया। पीड़ितों के मुताबिक इस पूरे मामले में कुल दो करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम फंसी हुई है।

    शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बसों पर काम कराने के बावजूद सप्लायरों और कारीगरों को भुगतान नहीं किया गया। इससे बस मालिकों की परेशानी और बढ़ गई। बसों का काम अधूरा रहने और भुगतान से जुड़ी समस्याओं के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है। जब आरोपी से संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हुईं तो बस मालिक कई दिनों तक उसके गैरेज और विजय नगर स्थित ठिकानों पर पहुंचते रहे। लेकिन वहां भी उसका पता नहीं चल सका। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

    पुलिस ने शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर आरोपी मोहित उर्फ मन्नू के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है और आरोपी की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश देने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों भुगतान के रिकॉर्ड और शिकायतकर्ताओं के बयानों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। फिलहाल आरोपों की विस्तृत जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले ने व्यावसायिक लेनदेन में भरोसे के आधार पर बड़ी रकम एडवांस देने और भुगतान की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • इंदौर में चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को टक्कर मारकर भागी स्कॉर्पियो, तीन किलोमीटर पीछा कर दो युवक गिरफ्तार

    इंदौर में चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मियों को टक्कर मारकर भागी स्कॉर्पियो, तीन किलोमीटर पीछा कर दो युवक गिरफ्तार


    इंदौर: के संयोगितागंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार देर रात पुलिस चेकिंग के दौरान तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने दो पुलिसकर्मियों को टक्कर मार दी और स्टॉपर तोड़कर मौके से फरार हो गई। घटना के बाद पुलिस टीम ने तुरंत कार का पीछा शुरू किया और करीब तीन किलोमीटर तक पीछा करने के बाद तिलक नगर इलाके में घेराबंदी कर स्कॉर्पियो को रोक लिया।
    पुलिस ने कार में सवार दो युवकों को हिरासत में लिया है। पकड़े गए युवकों की पहचान अनुज मीणा और शिवम के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, घटना के समय अनुज मीणा कार चला रहा था। प्राथमिक जांच में दोनों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है और उनसे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, देर रात शहर के संवेदनशील स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पीसी सेठी अस्पताल की ओर से नवलखा की तरफ जा रही काले रंग की स्कॉर्पियो को पुलिसकर्मियों ने रुकने का इशारा किया। आरोप है कि चालक ने वाहन की रफ्तार कम करने के बजाय उसे और तेज कर दिया और सीधे पुलिस स्टॉपर में टक्कर मार दी। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल लाल साहब और हेड कॉन्स्टेबल राजेश मिश्रा वाहन की चपेट में आ गए और घायल हो गए। टक्कर के बाद चालक कार को लेकर तिलक नगर मार्ग की तरफ तेजी से भाग निकला।

    घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने वायरलेस सेट के जरिए आगे तैनात पुलिस बल को जानकारी दी और स्कॉर्पियो का पीछा शुरू कर दिया। तिलक नगर क्षेत्र में पुलिस ने घेराबंदी कर कार को रोक लिया और उसमें सवार दोनों युवकों को पकड़ लिया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो को भी जब्त कर लिया है। जांच के दौरान कार के आगे वाले हिस्से पर ‘दादा’ लिखा हुआ मिला। संयोगितागंज थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने, लापरवाही से वाहन चलाने और पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने से जुड़ी विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

    हादसे के तुरंत बाद घायल दोनों पुलिसकर्मियों को उपचार के लिए पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। हेड कॉन्स्टेबल राजेश मिश्रा को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं कॉन्स्टेबल लाल साहब का उपचार अस्पताल में जारी है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर बताई गई है। पुलिस मामले में दोनों युवकों से घटना को लेकर विस्तृत पूछताछ कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

  • MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर

    MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर


    भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस में सितंबर के बड़े फेरबदल के बाद एक बार फिर नई पोस्टिंग को लेकर हलचल तेज होने की चर्चा है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक संभावित बदलाव को लेकर अलग अलग स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। 13 सितंबर को गृह विभाग ने 137 पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया था। इसमें 10 IPS और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल थे। अब एक बार फिर करीब 15 जिलों में SP स्तर पर बदलाव की संभावना की चर्चा सामने आ रही है। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में DCP स्तर की जिम्मेदारियों पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि इन सभी संभावित बदलावों की अंतिम तस्वीर गृह विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नई पोस्टिंग की चर्चा के पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। IPS अधिकारियों के प्रमोशन के बाद कुछ मौजूदा पद खाली हो सकते हैं। ऐसे में उन रिक्तियों को भरने के लिए नई पदस्थापनाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इस संभावित सूची को केवल सामान्य तबादला प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है बल्कि प्रमोशन के बाद बनने वाले नए प्रशासनिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

    जिला पुलिस अधीक्षक स्तर पर जबलपुर निवाड़ी सीधी ग्वालियर रतलाम छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों को लेकर बदलाव की चर्चा है। हालांकि अभी किसी अधिकारी का नाम या पदस्थापना तय नहीं मानी जा सकती। सरकारी आदेश जारी होने तक संभावित नाम और जिलों को लेकर सामने आ रही जानकारी को सिर्फ चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।

    संभावित फेरबदल का असर केवल जिलों तक सीमित रहने की बात नहीं है। ग्वालियर और जबलपुर रेंज की वरिष्ठ कमान में भी बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय बटालियन और रेडियो जैसे महत्वपूर्ण विभागों में तैनात अधिकारियों को लेकर भी नई जिम्मेदारियों के विकल्प सामने आ सकते हैं। यदि फील्ड और मुख्यालय स्तर पर एक साथ बदलाव होता है तो पुलिस महकमे में कई स्तरों पर नई प्रशासनिक जमावट देखने को मिल सकती है।

    भोपाल और इंदौर पर इसलिए भी विशेष नजर है क्योंकि दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है और DCP स्तर के पद फील्ड पुलिसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिक्त पदों या प्रमोशन के कारण बनने वाली नई जगहों पर किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है यह आने वाले आदेशों से साफ हो सकता है। फिलहाल इन पदों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    इस संभावित फेरबदल में कुछ अपेक्षाकृत जूनियर IPS अधिकारियों को फील्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना की चर्चा भी है। यदि ऐसा होता है तो जिलों और कमिश्नरेट में नई पीढ़ी के अधिकारियों को कमांड की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर प्रमोशन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की नई भूमिका तय होने से कई मौजूदा पदों पर बदलाव की जरूरत भी बन सकती है।

    इस बीच पुलिस महकाने में DGP पद से जुड़ा भविष्य का समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेगा। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक बताया गया है। इसलिए आने वाले महीनों में होने वाली वरिष्ठ IPS अधिकारियों की पदस्थापनाओं को केवल तत्काल जिला स्तर के बदलाव के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। शीर्ष पुलिस नेतृत्व से जुड़ी आगामी प्रक्रिया का असर भी प्रशासनिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सितंबर में 137 अधिकारियों की पोस्टिंग के कुछ ही समय बाद नई सूची की चर्चा क्यों शुरू हुई है। इसके पीछे प्रमोशन रिक्त पद और प्रशासनिक जरूरत जैसे सामान्य कारण हो सकते हैं। बार बार तबादला होना अपने आप में किसी प्रशासनिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब निगाह गृह विभाग के अगले आदेश पर है। आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बदलाव कितने जिलों तक सीमित रहता है और क्या इसका असर SP से लेकर IG और DCP स्तर तक दिखाई देता है।

  • MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…

    MP: दीपके और उनके साथियों की इंदौर पुलिस में शिकायत, नाबालिगों को बरगलाने का आरोप…


    इंदौर।
    अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) और सौरव दास (Sourav Das) समेत उनके अन्य साथियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बताने वाले एक शख्स ने इंदौर पुलिस में इनकी भूमिकाओं की जांच की मांग उठाई है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party-CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग लड़के-लड़कियों को बरगलाकर जमावड़ा कराने में इनकी कथित भूमिका साबित होती हो और पॉक्सो के तहत अपराध पाए जाएं तो FIR दर्ज किया जाना चाहिए।


    किसने दी शिकायत?

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस की अपराध निरोधक शाखा में दी गई अपनी शिकायत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP की अगुवाई में 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन में नाबालिगों की कथित मौजूदगी का दावा करते हुए अभिजीत दीपके और सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास समेत अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की है।


    अभिजीत दीपके, सौरभ दास और अन्य की भूमिकाओं की हो जांच

    मुंबई के निवासी फैजान अंसारी ने शिकायत में कहा कि जांच के जरिये इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि अभिजीत दीपके, सौरभ दास या समूह के अन्य सदस्य नाबालिगों को प्रदर्शन में लाने में कहीं शामिल तो नहीं थे। क्या ये लोग नाबालिगों को भड़काने में शामिल तो नहीं थे।


    इन सुबूतों को सुरक्षित किए जाने की भी मांग

    फैजान अंसारी ने इंदौर पुलिस क्राइम ब्रांच से विरोध प्रदर्शन के फोटो-वीडियो, मीडिया इंटरव्यू, सार्वजनिक बयान, प्रदर्शन स्थल और इसके आस-पास के सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया सामग्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित करके उनकी जांच का अनुरोध किया है।


    जांच में पॉक्सो का अपराध मिले हो तो करें FIR

    शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार का संज्ञेय अपराध सामने आता है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए।


    इंदौर पुलिस ने भी शुरू की जांच

    अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने बताया कि हमें अंसारी की शिकायत मिली है जो खुद को सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर बता रहे हैं। शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। जांच में मिले तथ्यों के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


    दिल्ली पुलिस की भी भूमिका हो जाएगी अहम

    गौरतलब है कि कथित नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ था। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की कोशिश थी तब पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुई थीं। इसमें कई आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे। ऐसे में इस शिकायत के सामने आने से पूरे प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। यदि इंदौर पुलिस उक्त शिकायत पर आगे बढ़ती है तब जांच में दिल्ली पुलिस की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाएगी।

  • इंदौर में साइबर ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, छात्रा ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से सहेली को किया परेशान, जांच में खुली पोल

    इंदौर में साइबर ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज मामला, छात्रा ने फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से सहेली को किया परेशान, जांच में खुली पोल


    इंदौर । इंदौर में सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग और साइबर उत्पीड़न का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खजराना थाना पुलिस ने फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर अपनी ही पूर्व सहेली को बदनाम करने और लगातार धमकाने के आरोप में एक छात्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साइबर पुलिस की तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि अश्लील संदेश भेजने और आवाज बदलकर धमकियां देने के पीछे पीड़िता की पूर्व क्लासमेट ही थी। पुलिस अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

    पुलिस के अनुसार पीड़िता और आरोपी छात्रा रिया लगभग तीन वर्षों तक एक ही स्कूल में साथ पढ़ चुकी थीं। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों अलग हो गईं लेकिन कुछ महीने पहले पीड़िता की सगाई होने के बाद घटनाओं का सिलसिला शुरू हुआ। पीड़िता के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक फर्जी प्रोफाइल से लगातार अश्लील और आपत्तिजनक संदेश आने लगे। शुरुआत में उसने इन संदेशों को नजरअंदाज किया और किसी अनजान व्यक्ति की हरकत समझकर प्रतिक्रिया नहीं दी।

    कुछ समय बाद मामला और गंभीर हो गया। फर्जी अकाउंट से केवल पीड़िता ही नहीं बल्कि उसकी मां और होने वाली सास के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणियां और अशोभनीय संदेश भेजे जाने लगे। लगातार मिल रहे इन संदेशों से पीड़िता मानसिक रूप से परेशान हो गई और उसे संदेह हुआ कि यह काम कोई ऐसा व्यक्ति कर रहा है जो उसकी निजी जिंदगी के बारे में अच्छी तरह जानता है।

    इसी बीच उसी फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट से पीड़िता को ऑडियो कॉल भी आने लगे। कॉल करने वाला युवक की आवाज निकालकर बात करता था और उसे डराने धमकाने की कोशिश करता था। बार बार मिल रही धमकियों और अभद्र संदेशों के कारण पीड़िता ने आखिरकार साइबर पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

    साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की और इंस्टाग्राम अकाउंट की डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की। जांच के दौरान सामने आया कि फर्जी अकाउंट बनाकर संदेश भेजने और ऑडियो कॉल करने वाली कोई अज्ञात व्यक्ति नहीं बल्कि पीड़िता की पूर्व क्लासमेट रिया थी। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान होने के बाद पूरी रिपोर्ट खजराना पुलिस को सौंपी गई।

    पुलिस के अनुसार जब पीड़िता ने आरोपी छात्रा से इस संबंध में बात की और फर्जी अकाउंट के बारे में पूछा तो उसने कथित रूप से माफी मांगने के बजाय उसे और धमकाया। आरोपी ने कहा कि वह उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। इस कथित धमकी के बाद पीड़िता ने कानूनी कार्रवाई की मांग की।

    साइबर जांच रिपोर्ट मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर खजराना पुलिस ने आरोपी छात्रा के खिलाफ ब्लैकमेलिंग आपराधिक धमकी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ करने के साथ डिजिटल उपकरणों और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी अकाउंट का इस्तेमाल कब से किया जा रहा था और कहीं अन्य लोगों को भी इसी तरह निशाना तो नहीं बनाया गया।

    यह मामला एक बार फिर यह बताता है कि सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल किसी की निजी जिंदगी और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट से धमकियां या अश्लील संदेश मिलते हैं तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखकर साइबर पुलिस से संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

  • इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम

    इंदौर में दर्दनाक हादसा, दोस्तों का इंतजार कर रही युवती को अज्ञात कार ने रौंदा, अस्पताल में तोड़ा दम


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक युवती की जिंदगी छीन ली। तेजाजी नगर थाना क्षेत्र के बायपास स्थित अंडरपास के पास दोस्तों का इंतजार कर रही 29 वर्षीय युवती को तेज रफ्तार अज्ञात कार ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल युवती को उसके दोस्त अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन कई घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर अज्ञात वाहन और चालक की तलाश शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान महालक्ष्मी नगर निवासी 29 वर्षीय साहिबा पिता मोहम्मद अफसर के रूप में हुई है। मूल रूप से भोपाल की रहने वाली साहिबा पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में रहकर इवेंट मैनेजमेंट से जुड़ा काम कर रही थीं। हादसा शनिवार रात करीब 11 बजे उस समय हुआ, जब वह अपने दोस्तों के साथ भोजन करने के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचने की कोशिश कर रही थीं।

    जानकारी के मुताबिक साहिबा को ढाबे का सही रास्ता नहीं मिल रहा था। उन्होंने अपने दोस्त अंकुर को फोन कर लोकेशन नहीं मिलने की जानकारी दी। इस पर अंकुर ने उन्हें तेजाजी नगर अंडरपास के पास रुकने के लिए कहा और बताया कि वह कुछ ही देर में उन्हें लेने पहुंच रहा है। साहिबा अपनी एक्टिवा लेकर वहीं इंतजार करने लगीं, लेकिन इससे पहले कि उनके दोस्त वहां पहुंचते, एक तेज रफ्तार अज्ञात कार ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद साहिबा गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर गईं। कुछ देर बाद जब अंकुर ने उन्हें दोबारा फोन किया तो किसी राहगीर ने कॉल रिसीव कर बताया कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। सूचना मिलते ही अंकुर और उसका साथी सहज मौके पर पहुंचे और पहले घायल युवती को गौरव अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।

    एमवाय अस्पताल में चिकित्सकों ने पूरी कोशिश की, लेकिन अत्यधिक चोटों के कारण रविवार तड़के करीब तीन बजे साहिबा ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद दोनों दोस्त अस्पताल में मौजूद रहे, लेकिन मौत की पुष्टि होने के बाद वे शव छोड़कर चले गए। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना की सूचना मृतका के परिजनों को भी दी गई। बताया जा रहा है कि साहिबा ने हादसे से पहले अपने भाई से भी संपर्क किया था। हालांकि, जानकारी मिलने के बावजूद परिजन रातभर इंदौर नहीं पहुंचे। पुलिस के अनुसार मृतका के भाई ने प्रारंभिक बातचीत में हादसे को लेकर कुछ सवाल उठाए हैं और दोस्तों पर भी संदेह जताया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से साहिबा का अपने परिवार से नियमित संपर्क नहीं था।

    तेजाजी नगर थाना पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे के जिम्मेदार वाहन और चालक की पहचान की जा सके। प्रारंभिक जांच में मामला हिट एंड रन का माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग के कारण सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड

    नशे के खिलाफ इंदौर का विश्व रिकॉर्ड: 8,534 लोगों की मानव श्रृंखला, पुलिस ने तोड़ा अपना ही रिकॉर्ड


    इंदौर । नशे के खिलाफ जनजागरण की दिशा में इंदौर ने एक बार फिर देश के सामने मिसाल पेश की है। इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के तहत सोमवार को शहर में 8,534 लोगों ने एक साथ मानव श्रृंखला बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। इस उपलब्धि के साथ इंदौर पुलिस ने अपना ही पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। इससे पहले नशे के खिलाफ 7,100 लोगों की मानव श्रृंखला का विश्व रिकॉर्ड भी इंदौर पुलिस के नाम दर्ज था। इस बार बड़ी संख्या में नागरिकों की भागीदारी ने न केवल रिकॉर्ड बनाया, बल्कि समाज को नशामुक्त बनाने का सशक्त संदेश भी दिया।

    इस ऐतिहासिक आयोजन में स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थी, खिलाड़ी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, नगर सुरक्षा समिति के सदस्य, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और शहर के हजारों नागरिक शामिल हुए। सभी ने हाथों में हाथ डालकर लंबी मानव श्रृंखला बनाई और नशे के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि युवाओं और समाज को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है। उन्होंने मौजूद सभी लोगों को नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके खिलाफ जागरूक करने की शपथ दिलाई। इस दौरान सभी प्रतिभागियों ने नशामुक्त इंदौर और नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

    इंदौर पुलिस के अनुसार इस आयोजन में केवल मानव श्रृंखला का रिकॉर्ड ही नहीं बनाया गया, बल्कि एक साथ इतने बड़े समूह को पुलिस कमिश्नर द्वारा नशामुक्ति की शपथ दिलाने के आधार पर भी दूसरे विश्व रिकॉर्ड का दावा किया गया है। यानी एक ही कार्यक्रम के माध्यम से दो अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संबंधित एजेंसी को सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण भेजे जा रहे हैं।

    ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान पिछले कुछ समय से शहरभर में लगातार चलाया जा रहा है। इसके तहत पुलिस स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, बस्तियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों तक पहुंचकर युवाओं और आम नागरिकों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रही है। अभियान के दौरान संवाद कार्यक्रम, शपथ समारोह, रैलियां और जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं ताकि समाज के हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है।

    इंदौर पहले भी स्वच्छता, जनभागीदारी और सामाजिक अभियानों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। अब नशामुक्त समाज के संकल्प के साथ शहर ने एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि यदि प्रशासन और समाज मिलकर किसी उद्देश्य के लिए काम करें तो सकारात्मक बदलाव संभव है।

    पुलिस का कहना है कि अभियान भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेगा और शहर के अधिक से अधिक युवाओं को इससे जोड़ा जाएगा। प्रशासन का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ ऐसी सामाजिक चेतना विकसित करना है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में आगे बढ़ सकें। इंदौर का यह प्रयास देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

  • पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत

    पत्नी दो महीने से मायके में थी, मानसिक तनाव में युवक ने दी जान; आखिरी कॉल से खुली घटना की परत


    मध्य प्रदेश। इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 39 वर्षीय युवक ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आत्महत्या से पहले उसने अपने एक दोस्त को फोन कर कहा कि परिवार से कह देना कि अब मैं नहीं रहा। इसके कुछ ही देर बाद उसने यह कदम उठा लिया। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान साईं सुमन नगर निवासी विशाल चौहान के रूप में हुई है। वह एक निजी कंपनी में कार्यरत था। रविवार को अवकाश होने के कारण वह घर पर ही मौजूद था। घटना के समय परिवार के अन्य सदस्य घर से बाहर थे।

    मृतक के चचेरे भाई अनिल ने बताया कि उन्हें विशाल के दोस्त का फोन आया था, लेकिन बाइक चलाने के कारण वह कॉल नहीं उठा सके। कुछ देर बाद जब उन्होंने वापस फोन किया तो दोस्त ने बताया कि विशाल ने आखिरी बार फोन कर कहा था कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहेगा और परिवार को इसकी जानकारी दे देना। यह सुनते ही अनिल ने विशाल के भाई से संपर्क किया, लेकिन वह भी घर पर मौजूद नहीं था। बाद में मां को सूचना दी गई। जब परिवार के लोग घर पहुंचे तो विशाल कमरे में फंदे से लटका मिला।

    परिजन उसे तुरंत पास के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक विशाल अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ अलग रहता था। उसकी पत्नी पिछले करीब दो महीने से एरोड्रम क्षेत्र स्थित अपने मायके में रह रही थी। परिवार का कहना है कि पत्नी के वापस नहीं आने से वह मानसिक तनाव में था। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।

    पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। परिजनों और परिचितों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक तनाव या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझ रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या तुरंत स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अथवा हेल्पलाइन से संपर्क करें। समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

  • इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा और फिर धमकियां: इंदौर में कॉलेज छात्रा की शिकायत पर केस दर्ज

    इंस्टाग्राम पर दोस्ती, शादी का झांसा और फिर धमकियां: इंदौर में कॉलेज छात्रा की शिकायत पर केस दर्ज


    मध्य प्रदेश । इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया के जरिए हुई दोस्ती के बाद एक कॉलेज छात्रा को कथित रूप से परेशान करने और धमकाने का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। युवती का आरोप है कि आरोपी ने खुद को अविवाहित बताकर उससे दोस्ती की, लेकिन बाद में उसके शादीशुदा होने की जानकारी सामने आने पर जब उसने संबंध समाप्त कर दिए तो युवक उसे लगातार परेशान करने लगा।

    पुलिस के अनुसार छात्रा की पहचान इंस्टाग्राम के माध्यम से सिद्धार्थ पचोरे नामक युवक से हुई थी। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे संपर्क बढ़ता गया। शिकायत के मुताबिक इसी दौरान आरोपी ने छात्रा के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। भरोसे में आकर छात्रा ने भी इस संबंध को गंभीरता से लिया और दोनों के बीच बातचीत जारी रही।

    कुछ समय बाद छात्रा को जानकारी मिली कि युवक पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं। इस जानकारी के सामने आने के बाद छात्रा ने आरोपी से इस बारे में सवाल किया। आरोप है कि युवक ने जवाब में पत्नी को तलाक देने की बात कही, लेकिन छात्रा ने उस पर विश्वास नहीं किया और उससे दूरी बना ली। इसके बाद उसने बातचीत पूरी तरह बंद कर दी।

    पीड़िता का आरोप है कि संपर्क खत्म होने के बाद आरोपी का व्यवहार आक्रामक हो गया। वह लगातार फोन, संदेश और अन्य माध्यमों से छात्रा पर दबाव बनाने लगा। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी आत्महत्या करने और उसमें छात्रा को फंसाने जैसी धमकियां देता था। इतना ही नहीं, उसने युवती के परिजनों को भी संदेश भेजकर मानसिक रूप से परेशान करने का प्रयास किया।

    छात्रा ने पुलिस को बताया कि आरोपी कई बार उसका पीछा भी करता था और रास्ते में रोककर बातचीत करने का दबाव बनाता था। शिकायत के अनुसार कुछ दिन पहले शाम के समय जब वह घर से बाहर निकली तो आरोपी ने रास्ते में रोककर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। घटना के बाद छात्रा ने परिवार को पूरी जानकारी दी और फिर थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि युवती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इसी बीच शहर में छेड़छाड़ का एक अन्य मामला भी सामने आया है। पुलिस ने 17 वर्षीय स्कूली छात्रा की शिकायत पर एक युवक के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार छात्रा जब सामान लेकर घर लौट रही थी, तब आरोपी ने उसे रास्ते में रोक लिया और मोबाइल नंबर मांगने लगा। आरोप है कि युवक ने जबरन उसका हाथ पकड़ने की भी कोशिश की। छात्रा किसी तरह वहां से निकलकर घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी।

    दोनों मामलों ने एक बार फिर महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।