Tag: Indore water crisis

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई

    इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई


    मध्यप्रदेश। इंदौर में बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर निगम ने सख्त रुख अपना लिया है। नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में किसी भी स्थिति में पानी की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब फालतू पानी बहाने वालों को पहले समझाइश दी जाएगी और यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होता है तो उन पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    कमिश्नर ने सभी जोन के स्वास्थ्य अधिकारियों, प्रभारी मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों और सहायक निरीक्षकों को नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर उन स्थानों पर ध्यान देने को कहा गया है जहां जल संयोजनों में टोटियां नहीं लगी हैं और पानी अनियंत्रित रूप से बहता रहता है।

    नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में पहले नागरिकों को जागरूक किया जाएगा और उन्हें पानी की बचत के लिए प्रेरित किया जाएगा। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही रोजाना की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अपर आयुक्त को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, शहर में निरीक्षण के दौरान यह सामने आया है कि कई इलाकों में नलों में टोटियां नहीं होने के कारण पानी सप्लाई के समय बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। इससे न केवल जल संकट और गहराता है, बल्कि कई जगह जलभराव और गंदगी की समस्या भी उत्पन्न होती है।

    नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीने के पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें। गाड़ियों की धुलाई, आंगन और परिसर की सफाई जैसे कार्यों में पानी की बर्बादी से बचने की सलाह दी गई है।

    कमिश्नर ने कहा है कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझे और उसे बचाने में योगदान दे।

    गौरतलब है कि इंदौर में पिछले कुछ समय से जल संकट को लेकर लोगों में असंतोष देखने को मिला है। कई इलाकों में पानी की किल्लत को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम जैसी स्थितियां भी बन चुकी हैं। ऐसे में नगर निगम अब आपूर्ति प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

  • इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी

    इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी


    मध्य प्रदेश । Indore इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जहां पानी की कमी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा।

    शहर के पालदा चौराहे पर रविवार को वार्ड 75 और वार्ड 64 के लोगों ने मिलकर घंटों तक चक्काजाम किया। करीब 3 से 4 घंटे तक लोग तेज धूप में पानी की मांग को लेकर बैठे रहे। हाथों में तख्तियां और बोतलें लिए लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते रहे, लेकिन उनकी परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ती दिखीं।

    प्रदर्शन के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे सिटी बसों से लेकर ट्रैवल्स वाहन तक फंस गए। बाद में प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया, लेकिन लोगों की नाराजगी जस की तस बनी रही।

    सबसे चिंताजनक तस्वीर पालदा चौराहे के पास उस हैंडपंप की सामने आई, जिस पर लाल रंग से स्पष्ट लिखा है—“पानी पीने योग्य नहीं है।” इसके बावजूद स्थानीय लोग मजबूरी में उसी हैंडपंप से पानी भरते और उपयोग करते नजर आए। लोगों का कहना है कि जब आसपास कोई और विकल्प नहीं है, तो उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है, चाहे उसे छानकर या उबालकर ही क्यों न इस्तेमाल करना पड़े।

    स्थानीय निवासी रुपेंद्र का कहना है कि क्षेत्र में पानी की भारी कमी है और उन्हें मजबूरी में लगभग 600 मीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। उनका कहना है कि चेतावनी के बावजूद उन्हें यही पानी लेना पड़ता है क्योंकि कोई दूसरा स्रोत उपलब्ध नहीं है।

    वहीं एक छात्रा, जो बाहर से आकर Indore में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है, उसने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हॉस्टल और रूम में रहने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि न तो पर्याप्त सप्लाई है और न ही बोरिंग काम कर रही है। नर्मदा जल आपूर्ति भी नियमित नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें मजबूरी में हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है।

    इलाके के एक अन्य निवासी शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें रोजाना करीब 1 किलोमीटर दूर पानी टंकी तक जाना पड़ता है। कई बार टैंकर भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। लोग ड्रम और केन में पानी भरकर किसी तरह दिन निकाल रहे हैं।

    जल संकट की यह स्थिति सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई और कामकाज को भी प्रभावित कर रही है। कई इलाकों में लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

    हालांकि स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर जल्द ही स्थायी व्यवस्था नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।

  • इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम

    इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले चार दिनों से नहाने तक के लिए पानी नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी के विरोध में शुक्रवार को कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम देखने को मिला।

    पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी सड़क पर उतर आए और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन की धीमी सप्लाई को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और कई घंटों तक सिटी बसों में यात्री फंसे रहे।

    इसी तरह दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है। लोगों को अब मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

    वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां भी महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।

    इससे पहले भी कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में लोग “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

    वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई वार्डों में नर्मदा लाइन की सप्लाई अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि नगर निगम से टैंकरों की कमी के कारण पानी वितरण व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण भी रहे, लेकिन एंबुलेंस को रास्ता देकर प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय दिया और उसे तुरंत निकलने दिया गया। फिलहाल शहर में जल संकट को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर तत्काल समाधान का दबाव भी तेज हो गया है।

  • इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी

    इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता रहा है, आज गंभीर जल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर ने शहर की पानी व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं, और नल-जल आपूर्ति भी अनियमित हो गई है। नतीजतन, हजारों परिवार अब पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।

    शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां कई कॉलोनियों में दो-दो दिन बाद पानी पहुंच रहा है। लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर विवाद और झड़पें तक सामने आ रही हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे भी इस संकट से परेशान हैं।

    स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चक्काजाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी आम हो गई है। कई जगह लोगों ने खुले तौर पर कहा है कि “ऐसे नेताओं को वोट नहीं देंगे।” विकास नगर और वीणा नगर जैसे क्षेत्रों में लोगों ने पार्षदों के साथ सड़क जाम कर पानी की मांग की। वहीं कुछ इलाकों में गुस्साई भीड़ ने पानी सप्लाई सिस्टम तक को नुकसान पहुंचाया।

    नगर निगम का कहना है कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और आधे से ज्यादा बोरिंग के सूखने से यह संकट पैदा हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए नर्मदा परियोजना की टंकियों से सप्लाई के साथ-साथ सैकड़ों टैंकरों के जरिए पानी वितरण किया जा रहा है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी के बदले पैसे मांगने या अवैध वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कई बिना स्टीकर वाले टैंकर पकड़े गए और उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

    इंदौर में पानी की किल्लत अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है। कांग्रेस ने कई इलाकों में मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जबकि नागरिक लगातार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि न तो नियमित सप्लाई हो रही है और न ही टैंकर समय पर पहुंच रहे हैं।

    महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई जगह लोगों ने साफ कहा है कि “पानी नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं देंगे।”

    वार्ड-वार स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड 20, 41, 47, 60 और 64 सहित कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं पानी गंदा आ रहा है तो कहीं प्रेशर बेहद कम है। कई इलाकों में लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।

    इंदौर का जल संकट अब एक बड़े शहरी संकट का रूप ले चुका है, जहां स्वच्छता की पहचान रखने वाला शहर आज बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

  • पानी की किल्लत से नाराज लोग सड़क पर उतरे, इंदौर में महापौर और निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

    पानी की किल्लत से नाराज लोग सड़क पर उतरे, इंदौर में महापौर और निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली । इंदौर में गर्मी बढ़ते ही पानी का संकट गहराता जा रहा है। मंगलवार को शहर के विकास नगर इलाके में पानी की गंभीर समस्या से परेशान रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया और जोरदार प्रदर्शन करते हुए नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
    प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने खाली मटके सड़क पर फोड़ दिए, जिससे माहौल और अधिक आक्रोशपूर्ण हो गया। इस विरोध प्रदर्शन में स्थानीय पार्षद भी शामिल रहीं, जिन्होंने लोगों के साथ सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने महापौर और नगर निगम पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की आपूर्ति ठीक नहीं हो रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि पानी की सप्लाई में अनियमितता के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
    बताया जा रहा है कि पानी की सप्लाई में इंटरकनेक्शन के जरिए बदलाव किया गया है, जिसके कारण कुछ इलाकों में पानी का प्रेशर कम हो गया है। साथ ही दूषित पानी की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।
    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल समस्या के समाधान की मांग की है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई है। स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि मौके पर स्थिति को संभालने के प्रयास किए गए।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पानी जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर इस तरह का विरोध शहर में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है
  • इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह

    इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह


    नई दिल्ली। इंदौर में भागीरथपुरा जलकांड की भयावह यादें अभी ताज़ा ही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां भीषण गर्मी के बीच लोगों को न सिर्फ पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि जो पानी उपलब्ध है वह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड और सीएनजी प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। नतीजा यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी बदबूदार, पीले रंग का और डीजल जैसी परत वाला हो गया है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित। कई घरों में तो इस पानी से बर्तन तक पीले पड़ रहे हैं और उनमें मोटी परत जम रही है।
    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब त्वचा रोगों और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके बाल तेजी से गिर रहे हैं, जबकि पुरुषों में भी यही समस्या देखी जा रही है। बच्चों में खुजली, चकत्ते और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यह समस्याएं हो रही हैं।
    स्थानीय निवासी अनिल चौधरी बताते हैं कि घरों में लगे आरओ फिल्टर भी दो-तीन महीने में खराब हो जा रहे हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में मोटी परत जम जाती है और दाल तक ठीक से नहीं पकती। कुछ मामलों में तो बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
    पानी की इस गंभीर समस्या के बीच टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन टैंकर भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाने और गंदे अपशिष्ट के गलत निपटान से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मवेशियों की मौत और पर्यावरण प्रदूषण भी चिंता का विषय बन चुके हैं। कई इलाकों देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली में पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।
    हालात से नाराज़ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे जन आंदोलन करेंगे और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं, पंचायत और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड वाटर में मौजूद खनिज त्वचा और बालों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इससे त्वचा में जलन, रूखापन, एलर्जी और बालों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। फिलहाल लोगों को अस्थायी राहत के तौर पर पानी को शुद्ध करने या फिटकरी के उपयोग की सलाह दी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर नजर आ रहा है।

  • इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी

    इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी


    नई दिल्ली| इंदौर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की किल्लत ने एक बार फिर हालात बिगाड़ दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच वार्ड 75 से एक अनोखी और गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां पार्षद ने खुद ही महापौर और नगर निगम कमिश्नर से पानी की मांग कर दी है।
    वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम महापौर Pushyamitra Bhargav और निगम कमिश्नर Kshitij Singhal को पत्र लिखकर 10 पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वार्ड का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, जहां नर्मदा जल आपूर्ति ठीक से नहीं पहुंच पा रही है।
    पार्षद के मुताबिक, स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में बोरिंग भी सूखने लगे हैं, जिससे लोगों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि गर्मी के चलते पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई बेहद सीमित है।
    हालांकि, प्रशासन की ओर से समय पर टैंकर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण पार्षद ने खुद ही कुछ अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन वह भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि यह व्यवस्था केवल आंशिक राहत दे पा रही है, जबकि समस्या व्यापक है।
    पार्षद कुणाल सोलंकी ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे वार्ड के लोगों के साथ महापौर और नगर निगम कमिश्नर के घर जाकर पानी की मांग करेंगे। इस बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस बार भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं और लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
    अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या को कितनी जल्दी हल करता है या फिर इंदौर के इस वार्ड में पानी संकट और गहराता है।

  • स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा

    स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ सैयद नासिर हुसैन ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे हैं। इससे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता मॉडल पर नई बहस शुरू हो गई है।

    राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों में यह स्पष्ट रूप से जानना चाहा गया है कि किन परिस्थितियों में शहर की सीवरेज और जल वितरण प्रणाली विफल हुई और कैसे दूषित सीवरेज का पानी पीने योग्य जल लाइनों में मिल गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केंद्र सरकार को जनवरी 2026 में भागीरथपुरा में हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी है। इन सवालों के जवाब जल शक्ति मंत्री द्वारा 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए जाएंगे।

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर दौरे के दौरान इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाने की घोषणा की थी। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी साफ कर दिया है कि 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि सरकार को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर घेरकर जवाबदेह बनाया जाए।राज्यसभा में सवाल सूचीबद्ध होते ही इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने बिंदुवार जानकारी मांगी है जिसके चलते नगर निगम को सभी रिपोर्ट और तथ्य सरकार को भेजने पड़े हैं। यह प्रश्न राज्यसभा प्रश्न संख्या एस 1137 के तहत दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जवाबों में किसी भी तरह की चूक इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह मामला पहले से ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है जहां नगर निगम और प्रशासन को कड़ी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अब संसद में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलता है।

    कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विधानसभा में यह पूछा जाएगा कि दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही की असल तस्वीर जनता के सामने लाएगा।

  • इंदौर में प्रदूषित जल आपूर्ति मामले की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति गठि

    इंदौर में प्रदूषित जल आपूर्ति मामले की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति गठि


    इंदौर। इंदौर नगर में हाल ही में सामने आए प्रदूषित जल आपूर्ति के गंभीर घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की विस्तृत समीक्षा निष्कर्ष और भविष्य के लिए ठोस अनुशंसाएं तैयार करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग श्री संजय कुमार शुक्ल करेंगे। समिति में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि तथा आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोडवे को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं आयुक्त इंदौर संभाग श्री सुदाम खाड़े को समिति का सदस्य-सचिव नामित किया गया है।समिति का मुख्य कार्य इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में घटित प्रदूषित जल आपूर्ति की घटना के वास्तविक कारणों का गहन परीक्षण करना होगा। इसके अंतर्गत घटना से जुड़े सभी आवश्यक तथ्यों की जांच की जाएगी साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रशासनिक तकनीकी अथवा प्रबंधन स्तर पर कहां और किस प्रकार की चूक हुई।

    समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वह घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर सके। इसके साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव और अनुशंसाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी। जांच के दौरान समिति ऐसे अन्य विषयों को भी शामिल कर सकेगी जो जांचाधीन मामलों में आवश्यक या अनुषांगिक माने जाएं।जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए समिति को संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख प्रतिवेदन और जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर समिति द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण भी किया जा सकेगा ताकि जमीनी हकीकत का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।

    राज्य सरकार ने समिति को यह निर्देश दिए हैं कि वह अपनी जांच यथाशीघ्र पूरी करे और अधिकतम एक माह की अवधि के भीतर अपना विस्तृत प्रतिवेदन राज्य शासन को प्रस्तुत करे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है।गौरतलब है कि इंदौर जैसे बड़े नगर में जल आपूर्ति से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालती है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा गठित यह समिति न केवल इस घटना की तह तक पहुंचने का प्रयास करेगी बल्कि भविष्य में सुरक्षित और स्वच्छ जल आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।