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  • इंदौर में पानी की बर्बादी अब नहीं चलेगी, दो-तीन बार चेतावनी के बाद कटेगा चालान, जानें निगम की नई तैयारी

    इंदौर में पानी की बर्बादी अब नहीं चलेगी, दो-तीन बार चेतावनी के बाद कटेगा चालान, जानें निगम की नई तैयारी


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम ने जागरूकता के साथ सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब घरों में जरूरत से ज्यादा पानी बहाने और पीने योग्य पानी का अनावश्यक इस्तेमाल करने वालों को सावधान रहना होगा। नगर निगम की ओर से ऐसे लोगों को पहले दो से तीन बार समझाइश दी जाएगी। इसके बावजूद यदि पानी की बर्बादी जारी रहती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वीडियो बनाकर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाएगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सोमवार को शहर की अलग-अलग कॉलोनियों में पहुंचकर लोगों से पानी बचाने की अपील की और जरूरत के मुताबिक पानी इस्तेमाल करने की सलाह दी।

    महापौर पार्श्वनाथ विनय नगर जैन कॉलोनी और लोकमान्य नगर सहित कई इलाकों में पहुंचे। यहां उन्होंने रहवासियों से बातचीत कर पानी के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में पानी की जरूरत बढ़ जाती है और ऐसे समय में पानी की बर्बादी पूरे शहर के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। पानी की कमी का असर आखिरकार शहर के लोगों पर ही पड़ता है। इसलिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए पानी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी बड़ी मात्रा में पानी बचाया जा सकता है।

    पहले समझाइश फिर होगी चालानी कार्रवाई

    नगर निगम की योजना के मुताबिक पानी की बर्बादी करते पाए जाने वाले लोगों को शुरुआत में दो से तीन बार समझाया जाएगा। इसके लिए अभियान से जुड़ी एनजीओ की टीम को भी निर्देश दिए गए हैं। यदि बार-बार समझाने के बाद भी कोई व्यक्ति पानी व्यर्थ बहाता है तो उसकी गतिविधि का वीडियो बनाया जाएगा और नियमों के अनुसार चालान काटने की कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं बल्कि लोगों को पानी बचाने के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है। निगम चाहता है कि लोग कार्रवाई के डर से ही नहीं बल्कि पानी की अहमियत समझकर भी इसकी बर्बादी रोकें।

    आरओ के बचे हुए पानी को फेंकने से बचें

    महापौर ने घरों में इस्तेमाल होने वाले आरओ से निकलने वाले अतिरिक्त पानी को भी उपयोगी बनाने की सलाह दी। आमतौर पर कई घरों में आरओ से निकलने वाला पानी बिना इस्तेमाल किए नाली में बहा दिया जाता है। जबकि इस पानी का उपयोग कई दूसरे कामों में किया जा सकता है। इसे पौधों में डालने गाड़ी धोने और कपड़े धोने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि पानी की गुणवत्ता के अनुसार ही उसका उपयोग करना चाहिए। इस तरह पीने योग्य पानी को गैरजरूरी कामों में खर्च होने से बचाया जा सकता है।

    दीपावली तक होगी निगरानी

    नगर निगम ने इस अभियान को दीपावली तक नियमित रूप से चलाने की तैयारी की है। महापौर ने एनजीओ की टीम को अभियान का कार्यक्रम तैयार कर लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिन स्थानों पर हरी घास दिखाई दे रही है वहां भी दो-दो दिन की समय-सीमा तय कर घास की कटाई कराने को कहा गया है। अभियान के दौरान जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू पार्षद योगेश गेदर और निगम के जोनल अधिकारी भी मौजूद रहे।

    इंदौर में पानी की बर्बादी रोकने की यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब भविष्य में जल संकट से बचने के लिए पानी का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है। यदि नागरिक घरों में नल खुला छोड़ने से बचें आरओ के अतिरिक्त पानी का दोबारा उपयोग करें और जरूरत के अनुसार ही पानी खर्च करें तो काफी हद तक बर्बादी रोकी जा सकती है। अब देखना होगा कि जागरूकता और निगरानी का यह अभियान शहर में पानी बचाने की आदत को कितना मजबूत बना पाता है।

  • इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी

    इंदौर में आने वाली गर्मी से पहले पानी का संकट गहराया, छोटी बिलावली और लिंबोदी सूखे; जलापूर्ति के लिए निगम की नई तैयारी


    इंदौर । इंदौर में अक्टूबर का महीना खत्म होने से पहले ही जलसंकट की चिंता बढ़ने लगी है। शहर के कई प्रमुख तालाबों में पानी का स्तर तेजी से घटा है और कुछ तालाब लगभग सूख चुके हैं। इसका असर अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवारों को निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ रहा है या फिर महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। कुछ लोग पानी के लिए हर महीने करीब 1500 रुपए खर्च कर रहे हैं जबकि एक टैंकर के लिए 2000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों की परेशानी इतनी बढ़ गई है कि उन्हें दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    शहर के वार्ड 35 के तलावली चांदा गांव बजरंग नगर रविदास नगर और निरंजनपुर झाडू बस्ती सहित कई इलाकों में लंबे समय से नियमित जलापूर्ति की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में चार साल से पानी की समस्या बनी हुई है। शिकायतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। संगीता केरोल के मुताबिक वे छह महीने से पानी की समस्या झेल रही हैं। वहीं गोलू केरोद का कहना है कि उनके क्षेत्र में चार साल से पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा और निजी बोरिंग से पानी खरीदना पड़ता है। टैंकर बुलाने पर करीब 2000 रुपए खर्च करने होते हैं।

    सुभाषचंद्र मेरु की परेशानी भी गंभीर है। वह रिक्शे में बर्तन रखकर करीब तीन से चार किलोमीटर दूर अरंडिया गांव से पानी लाते हैं। उनका कहना है कि टैंकर भी उनकी गली तक नहीं पहुंचते। मनोरमा जैन ने भी करीब एक साल से जलसंकट झेलने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें महंगे टैंकर से पानी मंगवाना पड़ता है। इन हालात ने शहर में जलापूर्ति की व्यवस्था और प्रभावित इलाकों तक पानी पहुंचाने की चुनौती को उजागर किया है।

    क्षेत्र में पानी की टंकी होने के बावजूद आपूर्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया है। कांग्रेस नेता सुभाष सोलंकी के मुताबिक इलाके में 2015 से 2018 के बीच टंकी बनाई गई थी और वर्ष 2020 से उसमें पानी आने लगा। उनका दावा है कि टंकी में करीब 35 लाख लीटर पानी पहुंच रहा है लेकिन स्थानीय रहवासियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने पानी के वितरण की जांच कराने की मांग की है। हालांकि टंकी में उपलब्ध पानी और उसकी आपूर्ति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत स्थिति सामने आना बाकी है।

    शहर के तालाबों की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यशवंत सागर में 19 फीट की क्षमता के मुकाबले 16.4 फीट पानी है। पिपल्यापाला में 22 फीट की क्षमता के मुकाबले जलस्तर 7.2 फीट रह गया है। बड़ी बिलावली में 34 फीट की क्षमता के मुकाबले 11.9 फीट पानी दर्ज किया गया है। छोटी बिलावली में पानी नहीं बचा है जबकि लिंबोदी तालाब भी लगभग सूख चुका है। बड़ा सिरपुर में 10.9 फीट और छोटा सिरपुर में करीब 13 फीट पानी बताया गया है। तालाबों में पानी घटने से भूजल स्तर और आने वाले महीनों में बोरिंग की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।

    सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के मुताबिक बीते 60 साल में इंदौर में दूसरी बार इस तरह का जलसंकट सामने आया है। उनका कहना है कि वर्ष 1965 में सामान्य से 15.8 इंच कम बारिश हुई थी जबकि इस साल बारिश में करीब 14 इंच की कमी रही। उन्होंने बिलावली और लिंबोदी तालाबों के कैचमेंट क्षेत्र में जरूरी काम नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।

    दूसरी ओर नगर निगम जलसंकट से निपटने के लिए तैयारियां कर रहा है। जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के मुताबिक यशवंत सागर से करीब 30 एमएलडी पानी की आपूर्ति होती है जिससे 20 हजार से अधिक लोगों को लाभ मिलता है। निगम मालवा-गंभीर लाइन के जरिए पानी लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा 85 वार्डों में हाइड्रेंट लगाने 100 नए टैंकर खरीदने करीब छह हजार सरकारी बोरिंग की सर्विसिंग कराने और चार नई पानी की टंकियां शुरू करने की योजना है। हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सूख रहे तालाबों तक नर्मदा का पानी पहुंचाने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में निर्देश लेने को कहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इन योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने और प्रभावित इलाकों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।

  • इंदौर में आने वाले समय में गहरा सकता है जलसंकट, कैलाश विजयवर्गीय ने दी चेतावनी; बोले- नर्मदा का जलस्तर बनाए रखना जरूरी

    इंदौर में आने वाले समय में गहरा सकता है जलसंकट, कैलाश विजयवर्गीय ने दी चेतावनी; बोले- नर्मदा का जलस्तर बनाए रखना जरूरी


    इंदौर । इंदौर में आने वाले समय में जलसंकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। इसे देखते हुए प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने लोगों को अभी से पानी की कमी के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शहर में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि भविष्य में पानी की संभावित कमी से निपटने के लिए समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। विजयवर्गीय ने नर्मदा नदी के घटते जलस्तर पर भी चिंता जताई और कहा कि नदी का निर्धारित स्तर बनाए रखना बेहद जरूरी है क्योंकि जलस्तर नीचे जाने पर पंपिंग प्रभावित हो सकती है। इससे इंदौर में पानी की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय शुक्रवार को इंदौर के कुशवाह नगर चौराहे पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। यहां कुशवाह नगर मेन रोड के निर्माण कार्य और अमृत 2.0 योजना के तहत नर्मदा लाइन बिछाने के काम का शुभारंभ किया गया। इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने शहर में भविष्य में पैदा होने वाली पानी की समस्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आने वाला समय सभी के लिए जलसंकट की चुनौती लेकर आ सकता है। ऐसे में केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे बल्कि जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को भी पानी बचाने की जिम्मेदारी समझनी होगी।

    विजयवर्गीय ने कहा कि वह अपने स्तर पर पानी बचाने के लिए प्रयास कर रहे हैं और सभी जनप्रतिनिधियों से भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील करेंगे। उन्होंने नर्मदा नदी के जलस्तर को लेकर कहा कि यदि पानी निर्धारित स्तर से नीचे चला जाता है तो पंपिंग की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए नर्मदा परियोजना और हाइड्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के साथ भोपाल में बैठक करने की योजना है। बैठक में नदी का जरूरी जलस्तर बनाए रखने और पंपिंग व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने के उपायों पर चर्चा की जाएगी।

    कुशवाह नगर में सड़क निर्माण को लेकर भी मंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को नुकसान से बचाने के लिए सड़क की चौड़ाई 60 फीट रखने की अनुमति दी गई है। सड़क निर्माण से पहले संबंधित लाइन बिछाने का काम पूरा किया जाएगा और दीपावली के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके। इसके अलावा कालानी नगर में लगातार बने रहने वाले यातायात दबाव को देखते हुए वहां ब्रिज बनाने की जरूरत भी बताई। विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इसके लिए योजना तैयार करने को कहा है।

    इस दौरान मंत्री ने विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद देश में इतना गैरजिम्मेदार विपक्ष देखने को नहीं मिला। उन्होंने एक नेता के उस ट्वीट का जिक्र किया जिसमें अल्बेरिया में छात्रों के आंदोलन को लेकर टिप्पणी की गई थी। विजयवर्गीय ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे बयान देश में भी अशांति फैलाने की कोशिशों को बढ़ावा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के साथ विपक्ष की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने से लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हो सकती है। उनके मुताबिक सरकार किसी भी दल की हो लेकिन देश में लोकतंत्र का मजबूत बने रहना जरूरी है।

    विभाग में भ्रष्टाचार से जुड़े सवाल पर विजयवर्गीय ने बताया कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। कुछ लोगों को निलंबित किया गया है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया है। मंत्री के बयान के बाद इंदौर में जल संरक्षण और नर्मदा के जलस्तर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले समय में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रशासनिक तैयारियों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी अहम मानी जा रही है।

  • गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित

    गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित


    इंदौर । इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इस बार सामान्य से कम बारिश होने और कई ट्यूबवेल बंद होने के कारण आने वाले महीनों में जलापूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल 6040 ट्यूबवेल हैं जिनमें से 361 फिलहाल बंद पड़े हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या सामने आई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने नए जलस्रोत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
    शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसके साथ ही बंद पड़े ट्यूबवेल को दोबारा चालू करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की योजना के तहत पंपों की मरम्मत और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए 10 विशेष टीमें लगाने की तैयारी है। इससे उन क्षेत्रों में राहत मिल सकती है जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भरता अधिक है।
    जलसंकट की चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल कम बारिश होना है। इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश दर्ज की जाती है लेकिन इस बार लगभग 23 इंच बारिश ही हुई है। इस तरह सामान्य के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। कम बारिश का असर भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल खोदने से पहले संबंधित क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता का तकनीकी सर्वे करना जरूरी होगा। यदि किसी इलाके में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है तो वहां बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं होगी। इसलिए नए जलस्रोत विकसित करने के साथ वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान देना होगा।
    नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 टंकियों के जरिए रोजाना जलापूर्ति की जा रही है। बाकी 10 टंकियों से नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करने और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करने की आवश्यकता है। यदि इन क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो गर्मी के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए निगम ने टैंकर व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत 71 नए हाइड्रेंट स्थान चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा 12 मौजूदा समप और हाइड्रेंट स्थानों को आपातकालीन जल भराव केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। जरूरत के अनुसार नए समप विकसित करने और उन्हें ट्यूबवेल या पाइपलाइन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
    एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा के मुताबिक नगर निगम गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से बचने के लिए योजना बना रहा है। नए ट्यूबवेल खोदने और मौजूदा जलस्रोतों को दुरुस्त करने पर काम किया जाएगा ताकि लोगों को पानी की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के बीच केवल नए ट्यूबवेल खोदना ही पर्याप्त नहीं होगा। समय पर मरम्मत और जलापूर्ति की निगरानी के साथ पानी का संरक्षण भी जरूरी रहेगा। आने वाले महीनों में नगर निगम की तैयारियों और जलस्रोतों की स्थिति से तय होगा कि शहर के प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता कितनी बेहतर हो पाती है।

  • सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग

    सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण जलसंकट की आशंका अभी से गहराने लगी है। गर्मी का मौसम आने से पहले ही शहर के हजारों परिवारों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इंदौर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 85 हजार परिवारों की पानी संबंधी जरूरतें पूरी करने में परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम का यह सर्वे 14 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
    सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी अरंडिया निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में पानी की समस्या अधिक गंभीर बताई गई है। इन क्षेत्रों में करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा जल के कनेक्शन नहीं हैं। मायाखेड़ी और निपानिया में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों में गर्मी शुरू होने से पहले ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है। वार्ड नंबर 16 में भी करीब साढ़े सात हजार परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित बताए गए हैं।
    नगर निगम की रिपोर्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है जिनके क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को भी टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। सर्वे के अनुसार शहर में 33 हजार 37 परिवार इस श्रेणी में आते हैं। वार्ड नंबर 37 में करीब दो हजार परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 45 में 1800 परिवार वार्ड 51 में 1300 और वार्ड 28 में 1200 परिवारों को टैंकर से पानी देने की जरूरत बताई गई है। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जलापूर्ति की चुनौती केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां नर्मदा पाइपलाइन नहीं पहुंची है। कुछ इलाकों में नेटवर्क होने के बावजूद जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
    जलसंकट की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और टैंकरों में पानी भरने की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। महापौर ने यह भी बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को मांग भेजी गई है। इससे उन इलाकों में पानी की सप्लाई बेहतर करने की कोशिश की जा रही है जहां लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।
    इस बार इंदौर में कम बारिश को भी जलसंकट की आशंका की बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। इस स्थिति को देखते हुए महापौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।
    जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और टैंकर व्यवस्था मजबूत करने के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में बारिश की कमी और मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था के बीच इंदौर के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।

  • पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच

    पानी में सीवर की मिलावट रोकने रोबोटिक निगरानी: MP के 2.30 लाख डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स पर नजर; ₹40 प्रति मीटर में होगी पाइपलाइन की जांच


    इंदौर।
    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की निगरानी के लिए तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। अब प्रदेश के नगरीय निकायों में पानी और सीवर लाइनों की अंदरूनी स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि इस जांच के लिए सड़कों को खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पेयजल और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। विभाग ने एजेंसी के साथ एक साल का समझौता किया है और पाइपलाइन जांच की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय की गई है।

    इस फैसले की पृष्ठभूमि इंदौर का भागीरथपुरा हादसा है। दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में दूषित पेयजल के कारण यहां 36 लोगों की मौत हुई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए थे। सामने आया था कि सीवर लाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। जांच के दौरान अकेले भागीरथपुरा क्षेत्र में ऐसे 260 स्थान मिले थे जहां सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिलने की स्थिति बनी हुई थी। इसके बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में ऐसी संवेदनशील जगहों की पहचान शुरू की।

    GIS प्लेटफॉर्म गरुड़ के जरिए कराई गई मैपिंग में प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स चिन्हित किए गए जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर के करीब 30 हजार और भोपाल के 20 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स शामिल हैं। इन जगहों पर पाइपलाइन में लीकेज या दूसरी तकनीकी खराबी होने की स्थिति में सीवर का पानी पेयजल लाइन में पहुंचने का खतरा बना रहता है।

    अब इन पाइपलाइनों के अंदर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए CCTV क्रॉलर सिस्टम वाले रोबोट का इस्तेमाल किया जाएगा। रोबोट को मौजूदा मैनहोल एयर रिलीज वाल्व या दूसरे एक्सेस पॉइंट्स से पाइपलाइन के भीतर भेजा जाएगा। इसमें हाई रिजॉल्यूशन कैमरे और सेंसर लगे होंगे। करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़े इस सिस्टम की मदद से पाइपलाइन के अंदर लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और तकनीकी डेटा जुटाया जा सकेगा। लीकेज टूट-फूट अवरोध और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याओं की पहचान भी की जा सकेगी।

    इस काम के लिए विभाग ने 1.50 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाला टेंडर जारी किया था। इसमें तीन कंपनियों ने बोली लगाई। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर और पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने 40 रुपए प्रति मीटर की दर पेश की। सबसे कम बोली के आधार पर पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज को एम्पैनल किया गया है। अब नगरीय निकाय अपनी जरूरत के अनुसार एस्टीमेट तैयार कर एजेंसी को वर्क ऑर्डर जारी करेंगे। विभाग के मुताबिक ऐसी रोबोटिक पाइपलाइन जांच तकनीक देश के 15 से अधिक राज्यों में इस्तेमाल की जा रही है। मध्य प्रदेश में इसका इस्तेमाल पहली बार बड़े स्तर पर किया जाएगा।

  • पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार

    पानी की समस्या पहुंची कोर्ट, प्री-मानसून तैयारियों को लेकर नगर निगम को फटकार


    मध्य प्रदेश । इंदौर में लगातार गहराते जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। जबलपुर स्थित Madhya Pradesh High Court की अवकाशकालीन पीठ ने नगर निगम को मानसून पूर्व जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण से जुड़े जरूरी कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति Pranay Verma और Jai Kumar Pillai की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वर्षा जल के अधिकतम उपयोग और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाना आवश्यक है।

    यह जनहित याचिका Rajlakshmi Foundation की ओर से दायर की गई है। याचिका में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से गिरते भूजल स्तर, सूखते तालाबों, झीलों, कुओं और बावड़ियों की स्थिति पर चिंता जताई गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि कई पारंपरिक जल स्रोतों से जुड़े फीडर चैनल और मोहरियां अवरुद्ध हो चुकी हैं, जिससे वर्षा जल का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।

    याचिका में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, शहर में बढ़ते कंक्रीटीकरण, जलाशयों में सीवेज प्रदूषण, पाइपलाइन लीकेज, परित्यक्त बोरवेल और उपचारित अपशिष्ट जल के सीमित उपयोग जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा ग्रामीण और पेरी-अर्बन क्षेत्रों के वाटरशेड संरक्षण और पुनर्स्थापन की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    विशेष रूप से असराबाद खुर्द, मिर्जापुर, रालामंडल, लिम्बोदी, बिलावली, छोटी बिलावली और पिपल्यापाला जैसे जलाशयों के वैज्ञानिक पुनर्जीवन की मांग याचिका में की गई है। इन जल स्रोतों को इंदौर की पारंपरिक जल-श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है, जो भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इंदौर नगर निगम को निर्देश दिया कि अगले सात दिनों के भीतर सार्वजनिक सूचना जारी कर सभी सरकारी भवनों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, अपार्टमेंट्स, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और अन्य संस्थानों को अपने रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई, डी-सिल्टिंग और उन्हें पूरी तरह क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया जाए।

    अदालत ने यह भी कहा कि पहली भारी मानसूनी बारिश से पहले प्राथमिकता वाले जलाशयों से जुड़े स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स, फीडर चैनलों, झीलों के इनलेट और आउटलेट, मोहरियों तथा रिचार्ज चैनलों की आपात सफाई कराई जाए। कोर्ट का मानना है कि यदि इन मार्गों को समय रहते साफ कर दिया जाए तो बारिश का पानी बहकर नष्ट होने के बजाय भूजल रिचार्ज और जलाशयों के पुनर्भरण में उपयोग हो सकेगा।

    जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की नजरें 8 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें नगर निगम द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के समक्ष रखी जाएगी।

  • इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई

    इंदौर में पानी बचाने की मुहिम तेज: कमिश्नर ने दिए सख्त निर्देश, टोटियां न लगाने पर भी कार्रवाई


    मध्यप्रदेश। इंदौर में बढ़ते जल संकट को देखते हुए नगर निगम ने सख्त रुख अपना लिया है। नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शहर में किसी भी स्थिति में पानी की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब फालतू पानी बहाने वालों को पहले समझाइश दी जाएगी और यदि इसके बाद भी सुधार नहीं होता है तो उन पर चालानी कार्रवाई की जाएगी।

    कमिश्नर ने सभी जोन के स्वास्थ्य अधिकारियों, प्रभारी मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों और सहायक निरीक्षकों को नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर उन स्थानों पर ध्यान देने को कहा गया है जहां जल संयोजनों में टोटियां नहीं लगी हैं और पानी अनियंत्रित रूप से बहता रहता है।

    नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में पहले नागरिकों को जागरूक किया जाएगा और उन्हें पानी की बचत के लिए प्रेरित किया जाएगा। लेकिन बार-बार चेतावनी के बावजूद लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही रोजाना की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अपर आयुक्त को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    अधिकारियों के अनुसार, शहर में निरीक्षण के दौरान यह सामने आया है कि कई इलाकों में नलों में टोटियां नहीं होने के कारण पानी सप्लाई के समय बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है। इससे न केवल जल संकट और गहराता है, बल्कि कई जगह जलभराव और गंदगी की समस्या भी उत्पन्न होती है।

    नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे पीने के पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें। गाड़ियों की धुलाई, आंगन और परिसर की सफाई जैसे कार्यों में पानी की बर्बादी से बचने की सलाह दी गई है।

    कमिश्नर ने कहा है कि जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी जरूरत है और हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझे और उसे बचाने में योगदान दे।

    गौरतलब है कि इंदौर में पिछले कुछ समय से जल संकट को लेकर लोगों में असंतोष देखने को मिला है। कई इलाकों में पानी की किल्लत को लेकर प्रदर्शन और चक्काजाम जैसी स्थितियां भी बन चुकी हैं। ऐसे में नगर निगम अब आपूर्ति प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।

  • इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी

    इंदौर में पानी संकट चरम पर: चेतावनी के बावजूद लोग पी रहे हैं हैंडपंप का पानी


    मध्य प्रदेश । Indore इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है, जहां पानी की कमी ने लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा।

    शहर के पालदा चौराहे पर रविवार को वार्ड 75 और वार्ड 64 के लोगों ने मिलकर घंटों तक चक्काजाम किया। करीब 3 से 4 घंटे तक लोग तेज धूप में पानी की मांग को लेकर बैठे रहे। हाथों में तख्तियां और बोतलें लिए लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग करते रहे, लेकिन उनकी परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ती दिखीं।

    प्रदर्शन के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिससे सिटी बसों से लेकर ट्रैवल्स वाहन तक फंस गए। बाद में प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया, लेकिन लोगों की नाराजगी जस की तस बनी रही।

    सबसे चिंताजनक तस्वीर पालदा चौराहे के पास उस हैंडपंप की सामने आई, जिस पर लाल रंग से स्पष्ट लिखा है—“पानी पीने योग्य नहीं है।” इसके बावजूद स्थानीय लोग मजबूरी में उसी हैंडपंप से पानी भरते और उपयोग करते नजर आए। लोगों का कहना है कि जब आसपास कोई और विकल्प नहीं है, तो उन्हें यही पानी पीना पड़ रहा है, चाहे उसे छानकर या उबालकर ही क्यों न इस्तेमाल करना पड़े।

    स्थानीय निवासी रुपेंद्र का कहना है कि क्षेत्र में पानी की भारी कमी है और उन्हें मजबूरी में लगभग 600 मीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। उनका कहना है कि चेतावनी के बावजूद उन्हें यही पानी लेना पड़ता है क्योंकि कोई दूसरा स्रोत उपलब्ध नहीं है।

    वहीं एक छात्रा, जो बाहर से आकर Indore में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही है, उसने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। हॉस्टल और रूम में रहने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है क्योंकि न तो पर्याप्त सप्लाई है और न ही बोरिंग काम कर रही है। नर्मदा जल आपूर्ति भी नियमित नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें मजबूरी में हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है।

    इलाके के एक अन्य निवासी शैलेंद्र ने बताया कि उन्हें रोजाना करीब 1 किलोमीटर दूर पानी टंकी तक जाना पड़ता है। कई बार टैंकर भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे स्थिति और खराब हो जाती है। लोग ड्रम और केन में पानी भरकर किसी तरह दिन निकाल रहे हैं।

    जल संकट की यह स्थिति सिर्फ पानी की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की जिंदगी, पढ़ाई और कामकाज को भी प्रभावित कर रही है। कई इलाकों में लोग प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।

    हालांकि स्थानीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अगर जल्द ही स्थायी व्यवस्था नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में संकट और गंभीर हो सकता है।

  • इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम

    इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले चार दिनों से नहाने तक के लिए पानी नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी के विरोध में शुक्रवार को कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम देखने को मिला।

    पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी सड़क पर उतर आए और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन की धीमी सप्लाई को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और कई घंटों तक सिटी बसों में यात्री फंसे रहे।

    इसी तरह दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है। लोगों को अब मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

    वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां भी महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।

    इससे पहले भी कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में लोग “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

    वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई वार्डों में नर्मदा लाइन की सप्लाई अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि नगर निगम से टैंकरों की कमी के कारण पानी वितरण व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण भी रहे, लेकिन एंबुलेंस को रास्ता देकर प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय दिया और उसे तुरंत निकलने दिया गया। फिलहाल शहर में जल संकट को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर तत्काल समाधान का दबाव भी तेज हो गया है।