Tag: Indore water crisis

  • इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी

    इंदौर में पानी संकट पर लोगों का गुस्सा, नेताओं के खिलाफ नाराजगी


    मध्यप्रदेश । इंदौर, जो लगातार देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब हासिल करता रहा है, आज गंभीर जल संकट की चपेट में है। भीषण गर्मी और लगातार गिरते भूजल स्तर ने शहर की पानी व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालत यह है कि कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके हैं, और नल-जल आपूर्ति भी अनियमित हो गई है। नतीजतन, हजारों परिवार अब पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।

    शहर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है, जहां कई कॉलोनियों में दो-दो दिन बाद पानी पहुंच रहा है। लोगों को घंटों टैंकर का इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने को लेकर विवाद और झड़पें तक सामने आ रही हैं। महिलाएं खाली बर्तन लेकर दूर-दराज तक पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे भी इस संकट से परेशान हैं।

    स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। चक्काजाम, मटका फोड़ प्रदर्शन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी आम हो गई है। कई जगह लोगों ने खुले तौर पर कहा है कि “ऐसे नेताओं को वोट नहीं देंगे।” विकास नगर और वीणा नगर जैसे क्षेत्रों में लोगों ने पार्षदों के साथ सड़क जाम कर पानी की मांग की। वहीं कुछ इलाकों में गुस्साई भीड़ ने पानी सप्लाई सिस्टम तक को नुकसान पहुंचाया।

    नगर निगम का कहना है कि भूजल स्तर में भारी गिरावट और आधे से ज्यादा बोरिंग के सूखने से यह संकट पैदा हुआ है। स्थिति से निपटने के लिए नर्मदा परियोजना की टंकियों से सप्लाई के साथ-साथ सैकड़ों टैंकरों के जरिए पानी वितरण किया जा रहा है। निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि पानी के बदले पैसे मांगने या अवैध वसूली की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में कई बिना स्टीकर वाले टैंकर पकड़े गए और उन पर जुर्माना भी लगाया गया।

    इंदौर में पानी की किल्लत अब सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा भी बन चुकी है। कांग्रेस ने कई इलाकों में मटका फोड़ प्रदर्शन किया, जबकि नागरिक लगातार जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। कई वार्डों में लोगों का आरोप है कि न तो नियमित सप्लाई हो रही है और न ही टैंकर समय पर पहुंच रहे हैं।

    महिलाओं का कहना है कि उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। कई जगह लोगों ने साफ कहा है कि “पानी नहीं मिलेगा तो वोट भी नहीं देंगे।”

    वार्ड-वार स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड 20, 41, 47, 60 और 64 सहित कई क्षेत्रों में लोग टैंकरों पर निर्भर हैं। कहीं पानी गंदा आ रहा है तो कहीं प्रेशर बेहद कम है। कई इलाकों में लोग आधा किलोमीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।

    इंदौर का जल संकट अब एक बड़े शहरी संकट का रूप ले चुका है, जहां स्वच्छता की पहचान रखने वाला शहर आज बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।

  • पानी की किल्लत से नाराज लोग सड़क पर उतरे, इंदौर में महापौर और निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन

    पानी की किल्लत से नाराज लोग सड़क पर उतरे, इंदौर में महापौर और निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली । इंदौर में गर्मी बढ़ते ही पानी का संकट गहराता जा रहा है। मंगलवार को शहर के विकास नगर इलाके में पानी की गंभीर समस्या से परेशान रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। स्थानीय लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया और जोरदार प्रदर्शन करते हुए नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
    प्रदर्शन के दौरान रहवासियों ने खाली मटके सड़क पर फोड़ दिए, जिससे माहौल और अधिक आक्रोशपूर्ण हो गया। इस विरोध प्रदर्शन में स्थानीय पार्षद भी शामिल रहीं, जिन्होंने लोगों के साथ सड़क पर बैठकर प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने महापौर और नगर निगम पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की आपूर्ति ठीक नहीं हो रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों का आरोप है कि पानी की सप्लाई में अनियमितता के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
    बताया जा रहा है कि पानी की सप्लाई में इंटरकनेक्शन के जरिए बदलाव किया गया है, जिसके कारण कुछ इलाकों में पानी का प्रेशर कम हो गया है। साथ ही दूषित पानी की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।
    प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल समस्या के समाधान की मांग की है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग उठाई है। स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया, हालांकि मौके पर स्थिति को संभालने के प्रयास किए गए।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पानी जैसी बुनियादी सुविधा को लेकर इस तरह का विरोध शहर में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है
  • इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह

    इंदौर में ज़हरीला पानी: भागीरथपुरा कांड के बाद भी नहीं थमा संकट, देवगुराड़िया में हालात भयावह


    नई दिल्ली। इंदौर में भागीरथपुरा जलकांड की भयावह यादें अभी ताज़ा ही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में दूषित पानी का संकट थमने का नाम नहीं ले रहा। अब देवगुराड़िया पंचायत क्षेत्र में हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं, जहां भीषण गर्मी के बीच लोगों को न सिर्फ पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि जो पानी उपलब्ध है वह भी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र के ट्रेंचिंग ग्राउंड और सीएनजी प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में रिसकर भूजल को प्रदूषित कर रहा है। नतीजा यह है कि बोरिंग से निकलने वाला पानी बदबूदार, पीले रंग का और डीजल जैसी परत वाला हो गया है। यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही दैनिक उपयोग के लिए सुरक्षित। कई घरों में तो इस पानी से बर्तन तक पीले पड़ रहे हैं और उनमें मोटी परत जम रही है।
    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग अब त्वचा रोगों और बाल झड़ने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि उनके बाल तेजी से गिर रहे हैं, जबकि पुरुषों में भी यही समस्या देखी जा रही है। बच्चों में खुजली, चकत्ते और एलर्जी जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि पानी में टीडीएस (घुले ठोस पदार्थ) की मात्रा अत्यधिक होने के कारण यह समस्याएं हो रही हैं।
    स्थानीय निवासी अनिल चौधरी बताते हैं कि घरों में लगे आरओ फिल्टर भी दो-तीन महीने में खराब हो जा रहे हैं। वहीं, कई लोगों का कहना है कि पानी गर्म करने पर बर्तनों में मोटी परत जम जाती है और दाल तक ठीक से नहीं पकती। कुछ मामलों में तो बोरिंग के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलने की शिकायत भी सामने आई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
    पानी की इस गंभीर समस्या के बीच टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। लेकिन टैंकर भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो रहे, जिससे लोगों को 600 से 700 रुपये तक खर्च कर पानी मंगवाना पड़ रहा है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
    स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कचरा जलाने और गंदे अपशिष्ट के गलत निपटान से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। मवेशियों की मौत और पर्यावरण प्रदूषण भी चिंता का विषय बन चुके हैं। कई इलाकों देवगुराड़िया, पत्थर मुंडला, मानसरोवर और श्रीजी वैली में पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।
    हालात से नाराज़ लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे जन आंदोलन करेंगे और सड़क जाम जैसे कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं, पंचायत और प्रशासन के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी असमंजस बना हुआ है।
    विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ड वाटर में मौजूद खनिज त्वचा और बालों के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। इससे त्वचा में जलन, रूखापन, एलर्जी और बालों की कमजोरी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। फिलहाल लोगों को अस्थायी राहत के तौर पर पानी को शुद्ध करने या फिटकरी के उपयोग की सलाह दी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर नजर आ रहा है।

  • इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी

    इंदौर में पानी संकट पर पार्षद का बड़ा बयान, बोले- अब महापौर-निगम कमिश्नर से लेंगे पानी


    नई दिल्ली| इंदौर में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी की किल्लत ने एक बार फिर हालात बिगाड़ दिए हैं। शहर के कई इलाकों में जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच वार्ड 75 से एक अनोखी और गंभीर स्थिति सामने आई है, जहां पार्षद ने खुद ही महापौर और नगर निगम कमिश्नर से पानी की मांग कर दी है।
    वार्ड 75 के पार्षद कुणाल सोलंकी ने नगर निगम महापौर Pushyamitra Bhargav और निगम कमिश्नर Kshitij Singhal को पत्र लिखकर 10 पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वार्ड का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र में आता है, जहां नर्मदा जल आपूर्ति ठीक से नहीं पहुंच पा रही है।
    पार्षद के मुताबिक, स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई इलाकों में बोरिंग भी सूखने लगे हैं, जिससे लोगों के सामने पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि गर्मी के चलते पानी की खपत बढ़ गई है, लेकिन सप्लाई बेहद सीमित है।
    हालांकि, प्रशासन की ओर से समय पर टैंकर उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण पार्षद ने खुद ही कुछ अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन वह भी पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। उन्होंने साफ कहा है कि यह व्यवस्था केवल आंशिक राहत दे पा रही है, जबकि समस्या व्यापक है।
    पार्षद कुणाल सोलंकी ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे वार्ड के लोगों के साथ महापौर और नगर निगम कमिश्नर के घर जाकर पानी की मांग करेंगे। इस बयान ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल गर्मियों में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता। इस बार भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं और लोग पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं।
    अब देखना होगा कि नगर निगम इस समस्या को कितनी जल्दी हल करता है या फिर इंदौर के इस वार्ड में पानी संकट और गहराता है।

  • स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा

    स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ सैयद नासिर हुसैन ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे हैं। इससे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता मॉडल पर नई बहस शुरू हो गई है।

    राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों में यह स्पष्ट रूप से जानना चाहा गया है कि किन परिस्थितियों में शहर की सीवरेज और जल वितरण प्रणाली विफल हुई और कैसे दूषित सीवरेज का पानी पीने योग्य जल लाइनों में मिल गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केंद्र सरकार को जनवरी 2026 में भागीरथपुरा में हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी है। इन सवालों के जवाब जल शक्ति मंत्री द्वारा 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए जाएंगे।

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर दौरे के दौरान इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाने की घोषणा की थी। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी साफ कर दिया है कि 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि सरकार को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर घेरकर जवाबदेह बनाया जाए।राज्यसभा में सवाल सूचीबद्ध होते ही इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने बिंदुवार जानकारी मांगी है जिसके चलते नगर निगम को सभी रिपोर्ट और तथ्य सरकार को भेजने पड़े हैं। यह प्रश्न राज्यसभा प्रश्न संख्या एस 1137 के तहत दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जवाबों में किसी भी तरह की चूक इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह मामला पहले से ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है जहां नगर निगम और प्रशासन को कड़ी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अब संसद में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलता है।

    कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विधानसभा में यह पूछा जाएगा कि दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही की असल तस्वीर जनता के सामने लाएगा।

  • इंदौर में प्रदूषित जल आपूर्ति मामले की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति गठि

    इंदौर में प्रदूषित जल आपूर्ति मामले की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति गठि


    इंदौर। इंदौर नगर में हाल ही में सामने आए प्रदूषित जल आपूर्ति के गंभीर घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मामले की विस्तृत समीक्षा निष्कर्ष और भविष्य के लिए ठोस अनुशंसाएं तैयार करने के उद्देश्य से राज्य शासन ने एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन विभाग श्री संजय कुमार शुक्ल करेंगे। समिति में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री पी. नरहरि तथा आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोडवे को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। वहीं आयुक्त इंदौर संभाग श्री सुदाम खाड़े को समिति का सदस्य-सचिव नामित किया गया है।समिति का मुख्य कार्य इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में घटित प्रदूषित जल आपूर्ति की घटना के वास्तविक कारणों का गहन परीक्षण करना होगा। इसके अंतर्गत घटना से जुड़े सभी आवश्यक तथ्यों की जांच की जाएगी साथ ही यह भी देखा जाएगा कि प्रशासनिक तकनीकी अथवा प्रबंधन स्तर पर कहां और किस प्रकार की चूक हुई।

    समिति को यह अधिकार दिया गया है कि वह घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर सके। इसके साथ ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक सुधारात्मक सुझाव और अनुशंसाएं भी प्रस्तुत की जाएंगी। जांच के दौरान समिति ऐसे अन्य विषयों को भी शामिल कर सकेगी जो जांचाधीन मामलों में आवश्यक या अनुषांगिक माने जाएं।जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए समिति को संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख प्रतिवेदन और जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। आवश्यकता पड़ने पर समिति द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण भी किया जा सकेगा ताकि जमीनी हकीकत का प्रत्यक्ष आकलन किया जा सके।

    राज्य सरकार ने समिति को यह निर्देश दिए हैं कि वह अपनी जांच यथाशीघ्र पूरी करे और अधिकतम एक माह की अवधि के भीतर अपना विस्तृत प्रतिवेदन राज्य शासन को प्रस्तुत करे। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई जिम्मेदारी तय करने और सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है।गौरतलब है कि इंदौर जैसे बड़े नगर में जल आपूर्ति से जुड़ी किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन पर असर डालती है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा गठित यह समिति न केवल इस घटना की तह तक पहुंचने का प्रयास करेगी बल्कि भविष्य में सुरक्षित और स्वच्छ जल आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।

  • इंदौर में पानी कांड का नया मोड़: कांग्रेस की न्याय यात्रा और सड़क निर्माण में नर्मदा फटी लाइन

    इंदौर में पानी कांड का नया मोड़: कांग्रेस की न्याय यात्रा और सड़क निर्माण में नर्मदा फटी लाइन

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और प्रमुख शहरों इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर से राज्य की ताजा खबरें लगातार सामने आ रही हैं। इंदौर में दूषित पानी से कई मासूमों की असमय मौत के मामले में कांग्रेस आज ‘न्याय यात्रा’ निकालेगी। यह यात्रा दोपहर 12 बजे बड़ा गणपति चौराहे से शुरू होकर राजवाड़ा तक जाएगी और पूरी तरह मौन रहेगी। इसमें स्वागत मंच नहीं लगाए जाएंगे और आम जनता को जोड़ने के लिए इसे गैर-राजनीतिक रखा गया है। इस यात्रा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जैसे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा और राज्य कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, विवेक तन्खा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे भी शामिल होंगे। कांग्रेस विधायक, पार्षद, महिला कांग्रेस और सेवादल के पदाधिकारी भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे। वहीं, इंदौर के निपानिया इलाके में मास्टर प्लान के तहत सड़क निर्माण के दौरान नर्मदा की लाइन फूटने से लाखों लीटर पानी सड़क पर बह गया और इलाके की पानी की सप्लाई प्रभावित हो गई। नगर निगम इस लापरवाही की जांच कर रहा है।

    मुरैना में अवैध रेत पकड़, भोपाल में बीजेपी कार्यशाला और रायसेन हादसा
    राज्यभर में अन्य खबरों में मुरैना की वन विभाग टीम ने चार किलोमीटर तक पीछा कर अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली को पकड़ लिया। रेत चंबल नदी से खनन की गई थी और अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गया। ट्रॉली को मुरैना डिपो में रखा गया और नमूने लिए गए। वहीं, भोपाल में बीजेपी प्रदेश कार्यालय में 12 जनवरी को प्रदेश स्तरीय कार्यशाला आयोजित होगी, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा संबोधित करेंगे। डॉ. मोहन यादव आज सुबह 11.40 से 11.55 बजे कोकता बाईपास रोड, पटेल नगर पहुंचेंगे और कृषक कल्याण वर्ष 2026 के शुभारंभ के तहत कृषि रथ और ट्रैक्टर रैली की शुरुआत करेंगे। इसके बाद हैलीपेड प्रेस्टीज कॉलेज से जंबूरी मैदान, भेल भोपाल तक कार्यक्रम होंगे। इसी बीच रायसेन के उदयपुरा थाना क्षेत्र में ट्रक और ट्रॉले की आमने-सामने टक्कर में दोनों चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रक चालक के दोनों पैर और ट्रॉले चालक का एक पैर कट गया। फोरलेन रोड पर पैच वर्क के दौरान कोई संकेत बोर्ड न होने से यह हादसा हुआ, जिसे नेशनल हाईवे अथॉरिटी की लापरवाही माना जा रहा है।

  • दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित

    दूषित पानी पर हाईकोर्ट का कड़ा प्रहार, इंदौर की ‘स्वच्छ’ छवि पर लगे दाग से कोर्ट चिंतित


     इंदौर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और इंदौर नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर लापरवाही ने न सिर्फ आम नागरिकों की जान ली, बल्कि ‘देश के सबसे स्वच्छ शहर’ के रूप में पहचान बना चुके इंदौर की छवि को भी गहरा आघात पहुंचाया है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही अस्वीकार्य है। यदि जरूरत पड़ी तो दोषी अधिकारियों की सिविल के साथ-साथ आपराधिक जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

    हाईकोर्ट में दूषित पेयजल से संबंधित पांच याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि पीड़ित परिवारों को दिया गया मुआवजा यदि अपर्याप्त पाया गया, तो उसे बढ़ाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार और नगर निगम से विस्तृत जवाब के साथ नई और अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या कार्ययोजना है।कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि जीवन के अधिकार में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का अधिकार भी शामिल है। इस अधिकार की अनदेखी को अदालत ने गंभीर अपराध की श्रेणी में माना। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित की गई है, जिसमें राज्य के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि कोर्ट इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

    स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। मंगलवार को उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए, जिनमें से 6 मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अरबिंदो अस्पताल रेफर किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुल 110 मरीज फिलहाल विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 421 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि 15 मरीज अभी भी आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि 31 दिसंबर को ही हाईकोर्ट ने स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई जारी रही। वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती, तो यह जनहानि रोकी जा सकती थी।अदालत के सामने यह तथ्य भी रखा गया कि वर्ष 2022 में नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पास किया गया था लेकिन फंड जारी न होने के कारण काम शुरू ही नहीं हो सका। इसके अलावा 2017-18 में लिए गए 60 जल नमूनों में से 59 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए थे। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने होने के बावजूद ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, जिससे हालात लगातार बिगड़ते चले गए।

  • इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    इंदौर पानी विवाद: हाईकोर्ट ने MP सरकार को घेरा, मौतों के आंकड़ों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल से हो रही मौतों ने अब न्यायपालिका का ध्यान खींच लिया है। इस गंभीर मामले को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जहां कुल 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ विचार किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए सख्त रुख अपनाया।

    मौतों के आंकड़ों पर HC की नाराजगी
    पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई थी, जिसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौतों की जानकारी दी गई। जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। कोर्ट के संज्ञान में आया कि इस मामले में अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस विरोधाभास को लेकर हाई कोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई और रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि इतने गंभीर मामले में गलत आंकड़े पेश करना बेहद चिंताजनक है।

    पूरे प्रदेश के पानी पर उठे सवाल
    हाई कोर्ट ने सिर्फ इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पीने के पानी की गुणवत्ता पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर लोगों को मिलने वाला पानी ही दूषित है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं मानी जा सकती।

    मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने का आदेश
    मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की गई है। कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में किसी और अधिकारी की नहीं, बल्कि सीधे मुख्य सचिव की बात सुनना चाहता है।

    कोरोना की तरह मांगा मेडिकल बुलेटिन
    कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जिस तरह कोरोना महामारी के दौरान रोजाना मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाता था, उसी तरह दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों का भी नियमित अपडेट दिया जाए।

    अब तक 17 मौतें, 110 मरीज भर्ती
    स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से अब तक 421 लोग बीमार हुए, जिनमें से 311 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिलहाल 110 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 15 मरीज आईसीयू में इलाजरत हैं।

    15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी निगाहें
    अब पूरे प्रदेश की नजरें 15 जनवरी की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि सरकार इस गंभीर लापरवाही पर क्या जवाब देती है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप

    इंदौर: भागीरथपुरा में दूषित पानी से 16 लोगों की मौत सरकार ने हाई कोर्ट में मृतकों की संख्या कम बताई विपक्षी दलों का आरोप


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और 35 से अधिक लोग गंभीर हालत में अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सभी मरीजों में उल्टी दस्त और संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सभी मौतें गंदे और दूषित पानी पीने के कारण हुईं।
    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सक्रिय हो गए हैं लेकिन मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है।इस बीच सरकार ने हाई कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों में मृतकों की संख्या कम बताई जबकि हकीकत यह है कि अब तक 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान मौतों के आंकड़े छिपाए गए थे उसी तरह अब भी सरकार मृतकों के असली आंकड़े छिपा रही है ताकि जिम्मेदारी से बचा जा सके।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में सरकार की नाकामी पूरी तरह से उजागर हो चुकी है और अब समय आ गया है कि सच्चाई सामने लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए ताकि और लोगों की जान बचाई जा सके और दूषित पानी के कारण फैलने वाले संक्रमण को रोका जा सके।

    स्थानीय निवासियों की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि दूषित पानी पीने से संक्रमण फैलने की संभावना अधिक है। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पानी की जांच शुरू कर दी है और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं लेकिन जनता की परेशानी लगातार बनी हुई है।यह मामला प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है क्योंकि दूषित पानी पीने से होने वाली मौतें आम बात नहीं हैं और यह स्थिति तत्काल ध्यान देने योग्य है।