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  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

    सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

  • लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद

    लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद


    इंदौर । इंदौर की जिला अदालत ने 12 वर्ष पुराने चर्चित हत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पिता और पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में रिश्तों की अहमियत पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ा भाई पिता के समान होता है लेकिन इस मामले में आरोपियों ने जमीन के लालच में अपने ही सगे भाई की हत्या कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि जिस व्यक्ति की जान ली जा रही है वह उनका अपना भाई है। इस अपराध ने रिश्तों की सभी मर्यादाओं को तार तार कर दिया।

    अदालत ने आरोपी प्रदीप राठौड़ और उसके पिता ओमप्रकाश राठौड़ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर प्रत्येक अपराध के लिए 500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले का तीसरा आरोपी रविशंकर अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    यह मामला 27 जून 2014 का है जब लसूड़िया क्षेत्र में जमीन विवाद के चलते बड़े भाई अतुल राठौड़ की हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश परिवार के भीतर ही रची गई थी और जमीन के विवाद ने रिश्तों को इस हद तक तोड़ दिया कि पिता और छोटे भाई ने मिलकर बड़े भाई की जान ले ली।

    फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और आरोपी के पक्ष में मौजूद परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दंड हमेशा अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता इसलिए इसमें मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पहले किसी भी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और घटना के बाद भी उनके खिलाफ किसी अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधि का उल्लेख नहीं मिला। इन परिस्थितियों के साथ उनकी सामाजिक आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आजीवन कारावास को उपयुक्त सजा माना।

    सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित थी और इसका मुख्य कारण जमीन का विवाद था।

    यह फैसला केवल एक हत्या के मामले में सजा का आदेश नहीं बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि संपत्ति और लालच के कारण यदि कोई व्यक्ति अपने ही रिश्तों का खून करता है तो कानून उसे किसी भी कीमत पर बख्शता नहीं है। परिवार विश्वास और भाईचारे जैसे रिश्ते समाज की सबसे मजबूत नींव माने जाते हैं और जब इन्हीं रिश्तों को लालच की भेंट चढ़ा दिया जाता है तो उसका परिणाम कठोर कानूनी दंड के रूप में सामने आता है। अदालत की टिप्पणी भी यही याद दिलाती है कि रिश्तों का मूल्य किसी भी संपत्ति से कहीं अधिक बड़ा होता है।

  • स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल

    स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल


    इंदौर । इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह शहर केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। ब्रेन डेड डोनर गौरव दवे के परिवार ने कठिन समय में ऐसा निर्णय लिया जिसने कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया जहां जरूरतमंद मरीज को नया जीवन देने के लिए उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हृदय दूसरे शहर भेजा गया है।

    अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख असहनीय होता है लेकिन उसी कठिन घड़ी में लिया गया अंगदान का निर्णय कई अन्य परिवारों की खुशियां वापस लौटा सकता है। यही कारण है कि अंगदान को महादान कहा जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय लिवर किडनी कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

    इंदौर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंगदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर लोगों में संकोच और भ्रम रहता था वहीं अब जागरूकता लगातार बढ़ रही है। परिवार स्वयं आगे आकर अंगदान के लिए सहमति दे रहे हैं जिससे कई गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

    अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसे ही अंगदान की स्वीकृति मिलती है प्रशासन पुलिस और चिकित्सा संस्थानों की टीम समय के खिलाफ दौड़ शुरू कर देती है। विशेष यातायात व्यवस्था बनाकर अंगों को कम से कम समय में दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके। हर बार सायरन की आवाज और खाली सड़कों के बीच दौड़ता एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं बल्कि किसी की नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आगे बढ़ता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं बल्कि दो परिवारों की भावनाओं से जुड़ी कहानी होती है। एक ओर जहां एक परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है वहीं दूसरी ओर वही धड़कन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में जीवन की नई शुरुआत बन जाती है। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है जो मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश देती है।

    अंगदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ने वर्ष 2015 से अब तक 26 सफल हार्ट डोनेशन किए हैं। इन सभी मामलों में पुरुष और महिला दोनों प्रकार के डोनर शामिल रहे हैं। हर सफल अंगदान यह संदेश देता है कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग मानवता के इस सबसे बड़े कार्य को समझने लगे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आज भी ऐसे हजारों मरीज हैं जो केवल अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होंगे तो अनेक परिवारों को नई जिंदगी मिल सकेगी। इंदौर ने लगातार सफल अंगदान के माध्यम से पूरे देश को यह संदेश दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं बल्कि वह जीवन है जो वह अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे को दे सकता है। यही भावना इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ संवेदनाओं और मानवता की राजधानी भी बना रही है।

  • इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज

    इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज


    इंदौर । इंदौर में हाथी के हमले में एक ऑटो चालक की दर्दनाक मौत के बाद लोगों के बीच दहशत का माहौल है। इस घटना ने न केवल सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने की जरूरत भी सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी सामान्य परिस्थितियों में शांत स्वभाव का होता है लेकिन कुछ विशेष अवस्थाओं में वह बेहद आक्रामक और खतरनाक हो सकता है।

    घटना रविवार को राजनगर क्षेत्र में हुई जहां एक हाथी ने अचानक ऑटो चालक विजय होलकर पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने पहले अपनी सूंड से उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया और इसके बाद कई बार पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल विजय को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने महावत के खिलाफ मामला दर्ज किया हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया। पूरे मामले की जांच जारी है।

    इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव के अनुसार हाथी के अचानक आक्रामक होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका मस्त काल हो सकता है। यह एक प्राकृतिक अवस्था होती है जिसमें विशेष रूप से नर हाथियों के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से होते हैं। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य से बिल्कुल अलग हो जाता है और वे बिना किसी स्पष्ट उकसावे के भी हमला कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि मस्त काल के दौरान हाथी की कनपटी के पास स्थित ग्रंथियों से लगातार स्राव निकलता है और बार बार पेशाब आना भी इस अवस्था का प्रमुख संकेत होता है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो महावत को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और हाथी को भीड़भाड़ वाले इलाके से हटाकर सुरक्षित और एकांत स्थान पर रखना चाहिए। इस दौरान हाथी अपने महावत तक पर हमला कर सकता है इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अत्यंत संवेदनशील और बुद्धिमान जीव है। तेज आवाज भीड़ पटाखों का शोर अपरिचित वातावरण या लगातार तनाव भी उसे असहज बना सकता है। यदि ऐसे हालात में वह पहले से मस्त काल में हो तो उसके हिंसक होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए धार्मिक आयोजनों जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हाथियों को शामिल करते समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।

    इंदौर में पहले भी हाथियों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच उनके व्यवहार की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन पर्याप्त रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महावतों को हाथियों के व्यवहार और मस्त काल की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि समय रहते संभावित खतरे को टाला जा सके।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। हाथी भले ही शांत और समझदार जीव माना जाता हो लेकिन उसकी प्राकृतिक प्रवृत्तियों को नजरअंदाज करना इंसानों और स्वयं पशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन और वैज्ञानिक समझ के साथ वन्यजीवों का प्रबंधन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज

    संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज


    बड़वानी  मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मां आज भी खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं जबकि पिता की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई का सफर आसान नहीं था लेकिन अरुण ने सिर्फ अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचा बल्कि हजारों विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रह रहे हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे ड्राइवरी का काम भी करते हैं। परिवार में तीन बहनों की जिम्मेदारी और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा को लेकर विवाद और छात्रों का आंदोलन तेज हुआ तब अरुण ने भी इंदौर में छात्रों की आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया।

    उन्होंने 30 जून से आंदोलन की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उनके साथ केवल चार साथी थे। पहले दस से बारह दिनों तक धरना स्थल पर गिने चुने छात्र ही मौजूद रहते थे। कई बार ऐसा भी लगा कि आंदोलन आगे नहीं बढ़ पाएगा लेकिन अरुण और उनके साथियों ने हार नहीं मानी। लगातार डटे रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का असर यह हुआ कि धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के लोगों का समर्थन मिलने लगा। देखते ही देखते यह आंदोलन प्रदेश के सबसे लंबे छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया और पूरे 26 दिनों तक लगातार चलता रहा।

    अरुण का कहना है कि अगर वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है। यही सोच उन्हें लगातार संघर्ष करने की ताकत देती रही। आर्थिक परेशानियां और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं।

    आंदोलन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बारिश हो या कम होती भीड़ उन्होंने धरना स्थल नहीं छोड़ा। धीरे धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होने लगे। इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी उनका समर्थन किया जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

    आंदोलन समाप्त होने के बाद भी अरुण का कहना है कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और विद्यार्थियों के अधिकारों का सवाल है। यदि भविष्य में भी छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय होता है तो वे फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन कभी बड़े सपनों और मजबूत इरादों के सामने बाधा नहीं बनते। कठिन परिस्थितियों में भी यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और हौसला मजबूत हो तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन सकता है।

  • गुड़ खिलाना पड़ा भारी इंदौर में हाथी ने ऑटो ड्राइवर को बेरहमी से कुचला सीसीटीवी में कैद हुई दिल दहला देने वाली घटना

    गुड़ खिलाना पड़ा भारी इंदौर में हाथी ने ऑटो ड्राइवर को बेरहमी से कुचला सीसीटीवी में कैद हुई दिल दहला देने वाली घटना


    इंदौर । इंदौर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक बेकाबू हाथी ने ऑटो चालक पर अचानक हमला कर उसे सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल चालक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामले में महावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है जबकि हाथी को लेकर भी संबंधित विभाग को सूचना भेजी गई है।

    यह घटना शनिवार शाम करीब चार बजकर अठारह मिनट पर राजनगर पुलिस चौकी के पास हुई। मृतक की पहचान 49 वर्षीय विजय उर्फ लक्ष्मण राव होलकर के रूप में हुई है जो पेशे से ऑटो रिक्शा चालक थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विजय हाथी को गुड़ खिलाने के लिए उसके पास पहुंचे थे। इसी दौरान हाथी अचानक उग्र हो गया और उसने हमला कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक हाथी को उज्जैन से जैन समाज के एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर लाया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महावत हाथी को लेकर इलाके में घूम रहा था और भिक्षावृत्ति कर रहा था। इसी दौरान विजय ने हाथी को रोककर उसे गुड़ खिलाना शुरू किया। कुछ ही क्षणों में हाथी ने आक्रामक रूप अपनाया और विजय को सूंड से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद उसने अपने पैरों से उन्हें बुरी तरह कुचल दिया जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह हाथी को नियंत्रित किया और घायल विजय को वहां से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। पहले उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए वर्मा यूनियन अस्पताल रेफर किया गया लेकिन रात करीब साढ़े सात बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विजय अपने पीछे पत्नी एक बेटा और अन्य परिजनों को छोड़ गए हैं।

    घटना के बाद चंदन नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। थाना प्रभारी तिलक करोले ने बताया कि महावत को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही इंदौर चिड़ियाघर के अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है ताकि हाथी की स्थिति और उसके व्यवहार का परीक्षण किया जा सके।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी में यह बात भी सामने आई है कि घटना के समय मृतक शराब के नशे में हो सकता था। हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    गौरतलब है कि इंदौर में हाथी के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर के सीतलामाता बाजार और पाटनीपुरा क्षेत्र में हाथियों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा हादसे के बाद सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोग ऐसे आयोजनों और हाथियों की आवाजाही के दौरान सख्त सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

  • आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं

    आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं


    इंदौर । इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी यानी आरआरकैट परिसर में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब एक कार चालक मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को तोड़ते हुए जबरन अंदर घुस गया। घटना के चलते शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चालक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और उसका इलाज चल रहा है।

    राजेंद्र नगर पुलिस के अनुसार आरआरकैट निवासी वसंत कुमार कुमरे की शिकायत पर कार क्रमांक एमपी 09 सीएस 8622 के चालक सारिम जफर मंसूरी निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब साढ़े बारह बजे कैट चौराहे पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सारिम अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। पुलिस जांच से बचने के प्रयास में उसने कार की रफ्तार बढ़ा दी और सीधे आरआरकैट के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर निकल गया। वहां लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को टक्कर मारते हुए वह परिसर के अंदर प्रवेश कर गया। टक्कर इतनी तेज थी कि बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

    घटना के तुरंत बाद आरआरकैट के सुरक्षा गार्ड सक्रिय हो गए और कार का पीछा किया। कुछ दूरी पर चालक ने वाहन रोक दिया जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर राजेंद्र नगर थाने पहुंचाया। पूछताछ के दौरान आरोपी पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया जिससे पुलिस को उसकी मानसिक स्थिति पर संदेह हुआ।

    इसके बाद पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन से उसके परिजनों से संपर्क किया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि सारिम पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी का उपचार करा रहा है और इसी कारण उसे किसी प्रकार की जिम्मेदारी या काम भी नहीं दिया जाता। परिजनों ने इलाज से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए जिनकी जांच की जा रही है।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए राजेंद्र नगर थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले ने परिजनों को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो उसे देर रात वाहन चलाने के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इससे न केवल उसकी बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। समय रहते घटना पर नियंत्रण पा लिया गया वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय चालक की मानसिक स्थिति क्या थी और क्या किसी अन्य कारण से उसने सुरक्षा व्यवस्था तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप

    इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप


    इंदौर । नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने डीसीपी से चर्चा कराने का भरोसा देकर बुलाया लेकिन बातचीत कराने के बजाय सीधे थाने ले जाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा के संबंध में पुलिस प्रशासन से पहले ही संपर्क किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की पूरी जानकारी एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी और अनुमति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि डीसीपी से चर्चा कराई जाएगी। छात्रों ने पुलिस पर भरोसा किया और उनके साथ चले गए लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया।

    छात्र नेताओं का कहना है कि अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीपी के सामने पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

    रिहा हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और मानसिक रूप से परेशान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सुरेंद्र यादव के साथ भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए। इस मामले में विजय चौधरी चंद्रशेखर गुर्जर गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी का कहना है कि उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया जबकि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज उठाना था।

    छात्र नेताओं का यह भी आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है। इससे परिजन लगातार परेशान रहे और उन्हें अपने बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। छात्रों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने एमपीपीएससी पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया था लेकिन कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।

    रिहाई के बाद छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। अब यह मामला छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नए विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब

    इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब


    मध्य प्रदेशदिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज अब मध्य प्रदेश में भी साफ सुनाई दे रही है। इंदौर का भंवरकुआं चौराहा इन दिनों प्रदेश के छात्र आंदोलन का बड़ा केंद्र बन चुका है जहां लगातार कई दिनों से युवा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। इसी आंदोलन के दौरान एक टी शर्ट ने अचानक पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी। टी शर्ट पर लिखा संदेश ना मर्दों के प्रदेश मप्र से भी आए हैं मर्द सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    इस टी शर्ट को आंदोलन की शुरुआत करने वाले पवन अहिरवार और उनके साथियों ने पहनकर प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान इसी संदेश के साथ नारे भी लगाए गए। युवाओं का कहना था कि यह केवल एक टी शर्ट नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं के आत्मसम्मान और उनकी आवाज का प्रतीक है। उनका दावा है कि प्रदेश के युवाओं को कमजोर समझने वालों को यह संदेश देना जरूरी था कि यहां के छात्र भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानते हैं।

    दरअसल कुछ दिन पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक प्रशांत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में उसने खुद को मध्य प्रदेश का बताते हुए कहा था कि यह ना मर्दों का प्रदेश है जहां कोई आवाज नहीं उठाता। उसने यह भी कहा था कि प्रदेश में कई बड़े मुद्दे सामने आते हैं लेकिन लोग खुलकर विरोध नहीं करते। यही बयान इंदौर के आंदोलनकारियों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसका जवाब अपने तरीके से देने का फैसला किया।

    पवन अहिरवार का कहना है कि मध्य प्रदेश के युवाओं को किसी भी तरह से कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई गंभीर मुद्दों पर लोगों ने आवाज उठाई है लेकिन कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। चाहे भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद हों स्वास्थ्य व्यवस्था के मामले हों या अन्य जनहित के मुद्दे युवाओं ने हमेशा सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह टी शर्ट उसी सोच के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जवाब है जिसने पूरे प्रदेश को गलत नजरिए से पेश करने की कोशिश की।

    भंवरकुआं चौराहे पर जारी धरने में शामिल छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती तब तक उनका धरना जारी रहेगा। लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में डटे हुए हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और भरोसे से जुड़ा सवाल है।

    आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिल रहा है। मनावर विधायक डॉ हीरालाल अलावा भी छात्रों के बीच पहुंचे और उन्होंने निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि इंदौर का छात्र आंदोलन अब केवल धरना प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह युवाओं की भावनाओं और आत्मसम्मान का भी प्रतीक बन गया है। वायरल टी शर्ट ने एक नया संदेश दिया है कि मध्य प्रदेश के युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने में पीछे नहीं हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाएगा यह भले समय बताए लेकिन फिलहाल यह टी शर्ट पूरे आंदोलन की सबसे चर्चित पहचान बन चुकी है।