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  • न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से असंतुष्ट कांग्रेस अब पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सामने ला रही है। इसी क्रम में बुधवार को इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे कार्यकर्ताओं के साथ हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के घर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में सामने आई बातों की जानकारी दी। रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

    पीड़ित परिवारों ने कांग्रेस नेताओं के सामने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कई परिवारों ने अपना इकलौता कमाने वाला सदस्य खो दिया है। परिवार के जिस व्यक्ति पर घर की आर्थिक जिम्मेदारी थी उसकी मौत के बाद उनके सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया। परिजनों का कहना था कि हादसे के बाद उन्हें उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे आएंगे लेकिन उनकी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। कई परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें वह राहत नहीं मिल पाई जिसकी उनसे उम्मीद की गई थी।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि हादसे के बाद बीमार हुए लोगों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ परिवारों को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ा। यहां तक कि मृतक का शव अस्पताल से घर तक लाने में भी परिवारों को खर्च उठाना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और ज्यादा परेशानी का कारण बना।

    कांग्रेस नेताओं के सामने परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि महापौर पार्षद विधायक नगर निगम आयुक्त या किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों ने कहा कि हादसे में अपने लोगों को खोने के बाद वे अब न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि केवल जांच रिपोर्ट सामने आने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई भी जरूरी है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी भावनाओं को देखते हुए पार्टी एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित राहत दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

    चौकसे ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए राहत और मुआवजे से जुड़ी जो अनुशंसाएं की हैं उन्हें सरकार को तत्काल लागू करना चाहिए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवार लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहे हैं और अब उन्हें जल्द सहायता मिलना जरूरी है। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान उनकी समस्याओं को सुना और आगे भी उनके साथ खड़े रहने की बात कही।

    भागीरथपुरा हादसे के बाद अब न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को राहत का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस जहां रिपोर्ट को लेकर सवाल उठा रही है वहीं पीड़ित परिवार दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस के आंदोलन के साथ यह मामला एक बार फिर इंदौर की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

  • सेवा ज्योति कार्यक्रम के बाहर सफाईकर्मियों का विरोध, मंत्री-विधायक से मिलने के लिए घंटों इंतजार, सड़कों पर दिखा कचरे का ढेर

    सेवा ज्योति कार्यक्रम के बाहर सफाईकर्मियों का विरोध, मंत्री-विधायक से मिलने के लिए घंटों इंतजार, सड़कों पर दिखा कचरे का ढेर


    इंदौर । स्वच्छता के मामले में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इंदौर में बुधवार को तस्वीर कुछ बदली नजर आई। एक तरफ विजय नगर चौराहे के पास आईडीए ग्राउंड में भाजपा का सेवा ज्योति संकल्प यात्रा कार्यक्रम चल रहा था तो दूसरी तरफ कार्यक्रम स्थल के बाहर बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सफाई कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें नियमित किया जाए और वेतन समेत दूसरी समस्याओं का समाधान किया जाए। प्रदर्शन के बीच शहर के कुछ इलाकों में सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हुई और सड़कों पर गीला तथा सूखा कचरा फैला दिखाई दिया।

    सफाई कर्मचारी मुख्यमंत्री से मुलाकात करना चाहते थे। हालांकि जब उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं आ रहे हैं तो उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलने की मांग रखी। पुलिस ने कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल के अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी रस्सी और बैरिकेड के पीछे खड़े होकर करीब दो घंटे तक मंत्री का इंतजार करते रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।

    कार्यक्रम खत्म होने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधायक रमेश मेंदोला और अन्य जनप्रतिनिधि मशाल लेकर बाहर निकले तो सफाई कर्मचारियों ने उनसे मिलने की कोशिश की। कुछ महिला सफाई कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इसी दौरान एक महिला सफाईकर्मी ने विधायक रमेश मेंदोला के सामने हाथ जोड़कर अपनी मांगें पूरी कराने की गुहार लगाई। मौके पर धक्का मुक्की जैसी स्थिति भी बनी। जनप्रतिनिधियों ने सेवा ज्योति प्रज्ज्वलित करने के बाद वहां से रवाना हुए।

    इसके बाद सांसद शंकर लालवानी जब कार्यक्रम स्थल से बाहर निकले तो सफाई कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया और अपनी समस्याएं बताईं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग रखी। सांसद ने उनकी बात सुनी और कर्मचारियों से पांच लोगों का प्रतिनिधिमंडल तैयार करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रतिनिधिमंडल की बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। शहर में जगह जगह कचरा फैलने के सवाल पर सांसद ने भी कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

    सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें नई नहीं हैं। वाल्मीकि सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर संतोष कल्याणे के मुताबिक कर्मचारी करीब 23 वर्षों से नियमितीकरण समेत दूसरी मांगों को लेकर आंदोलन ज्ञापन और भूख हड़ताल जैसे तरीके अपना चुके हैं। उनका कहना है कि करीब 10 हजार रुपये के वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल है। बच्चों की पढ़ाई घर का खर्च और इलाज जैसी जरूरतें पूरी करना चुनौती बन जाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और गुरुवार से कचरा गाड़ियों को रोकने का फैसला लिया जा सकता है।

    प्रदर्शन में शामिल सफाई मित्रों ने भी अपनी परेशानियां बताईं। कृष्णा बाई डागर ने नियमित किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि कम वेतन में घर का खर्च चलाना मुश्किल है। माया पथरोड ने कहा कि सफाई कर्मचारी पूरे शहर को साफ रखने का काम करते हैं लेकिन उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। रेखा बाई ने बताया कि वे सुबह करीब पांच बजे काम के लिए निकलती हैं और दोपहर में घर लौटती हैं। उनके मुताबिक वे लड़ाई करने नहीं बल्कि अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। संगीता सोलंकी ने भी नियमितीकरण और वेतन बढ़ाने की मांग रखी।

    प्रदर्शन के दौरान एक अन्य विवाद भी सामने आया। आरोप है कि एक महिला ने सफाई मित्रों के सामने झाड़ू लगाने को लेकर टिप्पणी कर दी। इसके बाद सफाई कर्मचारियों ने महिला को घेर लिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और महिला को थाने ले गई। इस घटनाक्रम के बाद थाने के बाहर भी कुछ देर हंगामे की स्थिति बनी रही।

    इस बीच इंदौर की सड़कों पर कचरा फैले होने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आए। बुधवार सुबह इंडस्ट्री हाउस से जंजीरवाला चौराहे की ओर जाने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में गीला और सूखा कचरा बिखरा दिखाई दिया। इससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहने पर शहर की स्वच्छता व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। अब कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान निकलने पर ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

  • जिस इंदौर की सफाई की मिसाल देश देता है वहां सड़कों पर बिखरा कचरा, सफाईकर्मियों की मांगों के बीच बढ़ी निगम की चिंता

    जिस इंदौर की सफाई की मिसाल देश देता है वहां सड़कों पर बिखरा कचरा, सफाईकर्मियों की मांगों के बीच बढ़ी निगम की चिंता


    इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में मंगलवार शाम से सफाई व्यवस्था पर असर दिखाई देने लगा। नियमितीकरण समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सफाईकर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं और इसका सीधा असर शहर की सड़कों पर नजर आने लगा है। शहर के कई इलाकों में गीला और सूखा कचरा समय पर नहीं उठने के कारण सड़कों के किनारे और कई जगह सड़क पर ही जमा हो गया। एमआईजी थाने के सामने नेहरू नगर विकास नगर अमर टेकरी और रुस्तम का बगीचा समेत आसपास के क्षेत्रों में शाम होते होते कचरे के ढेर दिखाई देने लगे। देर रात तक कुछ स्थानों पर हालात ऐसे हो गए कि सड़कों पर गीला और सूखा कचरा बिखरा पड़ा था।

    कचरा सड़कों पर जमा होने से स्थानीय रहवासियों के साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़क के किनारे जमा कचरा इतना ज्यादा था कि लोगों को वाहन निकालने में दिक्कत हुई। इंदौर जैसे शहर में जहां स्वच्छता को लेकर देशभर में उदाहरण दिया जाता है वहां सड़कों पर फैली गंदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगों को लेकर प्रशासन को गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था बाधित होने से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

    सफाईकर्मी नियमितीकरण सहित दूसरी मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी निगम मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दो से चार दिन के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो वे हड़ताल का फैसला ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में शहर की सफाई व्यवस्था पर और व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

    मंगलवार शाम को कई इलाकों में कचरा नहीं उठने से आंदोलन के असर के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे। नियमित रूप से घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा समय पर नहीं उठ पाया तो कई जगह लोग कचरा सड़क किनारे रखने को मजबूर हुए। कुछ इलाकों में यह कचरा धीरे धीरे बढ़ता गया और सड़क के आसपास गंदगी फैलने लगी। यदि सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो नगर निगम के सामने शहर को साफ रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

    शहर में फैली गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगें अपनी जगह उचित हो सकती हैं लेकिन विरोध का ऐसा तरीका नहीं होना चाहिए जिससे आम लोगों को परेशानी हो। लोगों ने यह भी चिंता जताई कि खुले में कचरा पड़ा रहने से बदबू के साथ संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने सड़कों पर कचरा फैलने के पीछे इसे योजनाबद्ध तरीके से डाले जाने की आशंका भी जताई है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इंदौर की स्वच्छता पहचान के लिहाज से यह स्थिति नगर निगम के लिए बड़ी चिंता का विषय है। शहर लगातार आठ बार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है। ऐसे में सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की बड़ी बाधा शहर की इस उपलब्धि और छवि दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। अब नजर इस बात पर है कि नगर निगम और सफाईकर्मियों के बीच बातचीत से कब समाधान निकलता है और शहर की नियमित सफाई व्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।

  • इंदौर में दिखा भाजपा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन, तिरंगे के साथ जुटे हजारों लोग, मशाल लेकर अपनी विधानसभाओं के लिए निकले

    इंदौर में दिखा भाजपा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन, तिरंगे के साथ जुटे हजारों लोग, मशाल लेकर अपनी विधानसभाओं के लिए निकले


    इंदौर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा जनकल्याण और सुशासन के प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से बुधवार को इंदौर में सेवा ज्योति संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विजय नगर स्थित आईडीए ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में शहर के अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और आम लोग पहुंचे। कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा और पार्टी के झंडे लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इसके बाद सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन सुना। कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ मंत्री तुलसी सिलावट सांसद शंकर लालवानी प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। विधायक रमेश मेंदोला गोलू शुक्ला मालिनी गौड़ उषा ठाकुर महेंद्र हार्डिया और मधु वर्मा समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता आईडीए ग्राउंड पहुंचे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मौजूद जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया और सेवा ज्योति के प्रतीक के रूप में मशाल जलाई गई। विजयवर्गीय स्वयं मशाल लेकर विजय नगर थाने के सामने नवनिर्मित मशाल स्थल तक पहुंचे। यहां उन्होंने सेवा ज्योति प्रज्ज्वलित की। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए और मशाल लेकर अपनी अपनी विधानसभा के लिए सेवा ज्योति यात्रा की शुरुआत की।

    भाजपा नेताओं के मुताबिक इस यात्रा में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का रथ सबसे आगे रखा गया। उसके पीछे कार्यकर्ता मशाल लेकर आगे बढ़े। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बाइक से अपनी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की ओर रवाना हुए। यात्रा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश दिया गया। इससे पहले प्रत्येक बूथ से कार्यकर्ता लाभार्थियों को साथ लेकर आईडीए ग्राउंड पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर सभी विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के लिए अलग अलग ब्लॉक बनाए गए थे ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित की जा सके।

    सेवा ज्योति यात्रा को भाजपा नेताओं ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के कश्मीर आंदोलन से भी जोड़ा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में धारा 370 के विरोध में आंदोलन किया था। भाजपा नेताओं ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को उनके संकल्प की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया। इसी भावना के साथ आईडीए ग्राउंड से मशाल को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा स्थल तक ले जाया गया जहां विशाल सेवा ज्योति मशाल स्थापित की गई।

    कार्यक्रम के दौरान एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया। अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी आईडीए ग्राउंड पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रवेश करने का प्रयास भी किया। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां हलचल की स्थिति बनी रही।

    आईडीए ग्राउंड पर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार कार्यकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी। अलग अलग ब्लॉक में विधानसभा एक विधानसभा पांच विधानसभा तीन देपालपुर और महू के कार्यकर्ताओं के लिए स्थान निर्धारित किया गया था। दूसरी ओर विधानसभा दो राऊ विधानसभा चार और सांवेर के कार्यकर्ताओं के लिए अलग ब्लॉक बनाए गए थे। पूरे आयोजन के बाद कार्यकर्ता मशाल लेकर अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों की ओर रवाना हुए।

  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

    सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

  • लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद

    लालच ने मिटा दिया भाईचारे का रिश्ता जमीन विवाद में बड़े भाई की हत्या 12 साल बाद पिता पुत्र को मिली उम्रकैद


    इंदौर । इंदौर की जिला अदालत ने 12 वर्ष पुराने चर्चित हत्या मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पिता और पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में रिश्तों की अहमियत पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि बड़ा भाई पिता के समान होता है लेकिन इस मामले में आरोपियों ने जमीन के लालच में अपने ही सगे भाई की हत्या कर दी। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने एक पल के लिए भी यह नहीं सोचा कि जिस व्यक्ति की जान ली जा रही है वह उनका अपना भाई है। इस अपराध ने रिश्तों की सभी मर्यादाओं को तार तार कर दिया।

    अदालत ने आरोपी प्रदीप राठौड़ और उसके पिता ओमप्रकाश राठौड़ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों पर प्रत्येक अपराध के लिए 500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले का तीसरा आरोपी रविशंकर अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है।

    यह मामला 27 जून 2014 का है जब लसूड़िया क्षेत्र में जमीन विवाद के चलते बड़े भाई अतुल राठौड़ की हत्या कर दी गई थी। जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश परिवार के भीतर ही रची गई थी और जमीन के विवाद ने रिश्तों को इस हद तक तोड़ दिया कि पिता और छोटे भाई ने मिलकर बड़े भाई की जान ले ली।

    फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता और आरोपी के पक्ष में मौजूद परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दंड हमेशा अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता इसलिए इसमें मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पहले किसी भी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और घटना के बाद भी उनके खिलाफ किसी अन्य गंभीर आपराधिक गतिविधि का उल्लेख नहीं मिला। इन परिस्थितियों के साथ उनकी सामाजिक आर्थिक और पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आजीवन कारावास को उपयुक्त सजा माना।

    सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक योगेश जायसवाल ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हत्या सुनियोजित थी और इसका मुख्य कारण जमीन का विवाद था।

    यह फैसला केवल एक हत्या के मामले में सजा का आदेश नहीं बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि संपत्ति और लालच के कारण यदि कोई व्यक्ति अपने ही रिश्तों का खून करता है तो कानून उसे किसी भी कीमत पर बख्शता नहीं है। परिवार विश्वास और भाईचारे जैसे रिश्ते समाज की सबसे मजबूत नींव माने जाते हैं और जब इन्हीं रिश्तों को लालच की भेंट चढ़ा दिया जाता है तो उसका परिणाम कठोर कानूनी दंड के रूप में सामने आता है। अदालत की टिप्पणी भी यही याद दिलाती है कि रिश्तों का मूल्य किसी भी संपत्ति से कहीं अधिक बड़ा होता है।

  • स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल

    स्वच्छता के बाद अब अंगदान में भी देश का सिरमौर बना इंदौर 26वीं बार ग्रीन कॉरिडोर से पहुंचा धड़कता दिल


    इंदौर । इंदौर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यह शहर केवल स्वच्छता के लिए ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी पूरे देश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। ब्रेन डेड डोनर गौरव दवे के परिवार ने कठिन समय में ऐसा निर्णय लिया जिसने कई लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी। गौरव का हृदय ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से अहमदाबाद भेजा गया जहां जरूरतमंद मरीज को नया जीवन देने के लिए उसका प्रत्यारोपण किया जाएगा। इसके साथ ही इंदौर से 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हृदय दूसरे शहर भेजा गया है।

    अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा मानी जाती है। किसी परिवार के लिए अपने प्रियजन को खोने का दुख असहनीय होता है लेकिन उसी कठिन घड़ी में लिया गया अंगदान का निर्णय कई अन्य परिवारों की खुशियां वापस लौटा सकता है। यही कारण है कि अंगदान को महादान कहा जाता है। एक ब्रेन डेड व्यक्ति के हृदय लिवर किडनी कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।

    इंदौर में पिछले कुछ वर्षों के दौरान अंगदान को लेकर लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां ब्रेन डेथ और अंगदान को लेकर लोगों में संकोच और भ्रम रहता था वहीं अब जागरूकता लगातार बढ़ रही है। परिवार स्वयं आगे आकर अंगदान के लिए सहमति दे रहे हैं जिससे कई गंभीर मरीजों को जीवनदान मिल रहा है।

    अंगदान की इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जैसे ही अंगदान की स्वीकृति मिलती है प्रशासन पुलिस और चिकित्सा संस्थानों की टीम समय के खिलाफ दौड़ शुरू कर देती है। विशेष यातायात व्यवस्था बनाकर अंगों को कम से कम समय में दूसरे शहर के अस्पताल तक पहुंचाया जाता है ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके। हर बार सायरन की आवाज और खाली सड़कों के बीच दौड़ता एंबुलेंस केवल एक वाहन नहीं बल्कि किसी की नई जिंदगी की उम्मीद लेकर आगे बढ़ता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हर हार्ट ट्रांसप्लांट केवल एक मेडिकल ऑपरेशन नहीं बल्कि दो परिवारों की भावनाओं से जुड़ी कहानी होती है। एक ओर जहां एक परिवार अपने प्रियजन को अंतिम विदाई देता है वहीं दूसरी ओर वही धड़कन किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में जीवन की नई शुरुआत बन जाती है। यही अंगदान की सबसे बड़ी शक्ति है जो मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश देती है।

    अंगदान के क्षेत्र में कार्य कर रहे विशेषज्ञों के अनुसार इंदौर ने वर्ष 2015 से अब तक 26 सफल हार्ट डोनेशन किए हैं। इन सभी मामलों में पुरुष और महिला दोनों प्रकार के डोनर शामिल रहे हैं। हर सफल अंगदान यह संदेश देता है कि समाज में जागरूकता बढ़ रही है और लोग मानवता के इस सबसे बड़े कार्य को समझने लगे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि देश में आज भी ऐसे हजारों मरीज हैं जो केवल अंग उपलब्ध नहीं होने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यदि अधिक से अधिक लोग अंगदान के प्रति जागरूक होंगे तो अनेक परिवारों को नई जिंदगी मिल सकेगी। इंदौर ने लगातार सफल अंगदान के माध्यम से पूरे देश को यह संदेश दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं बल्कि वह जीवन है जो वह अपने जाने के बाद भी किसी दूसरे को दे सकता है। यही भावना इंदौर को स्वच्छता के साथ साथ संवेदनाओं और मानवता की राजधानी भी बना रही है।

  • इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज

    इंदौर में हाथी के हमले से गई ऑटो चालक की जान एक्सपर्ट ने बताया कब और क्यों सबसे ज्यादा आक्रामक हो जाता है गजराज


    इंदौर । इंदौर में हाथी के हमले में एक ऑटो चालक की दर्दनाक मौत के बाद लोगों के बीच दहशत का माहौल है। इस घटना ने न केवल सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को समझने की जरूरत भी सामने ला दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथी सामान्य परिस्थितियों में शांत स्वभाव का होता है लेकिन कुछ विशेष अवस्थाओं में वह बेहद आक्रामक और खतरनाक हो सकता है।

    घटना रविवार को राजनगर क्षेत्र में हुई जहां एक हाथी ने अचानक ऑटो चालक विजय होलकर पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथी ने पहले अपनी सूंड से उन्हें उठाकर जमीन पर पटक दिया और इसके बाद कई बार पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल विजय को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने महावत के खिलाफ मामला दर्ज किया हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया। पूरे मामले की जांच जारी है।

    इंदौर चिड़ियाघर के प्रभारी और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव के अनुसार हाथी के अचानक आक्रामक होने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका मस्त काल हो सकता है। यह एक प्राकृतिक अवस्था होती है जिसमें विशेष रूप से नर हाथियों के शरीर में हार्मोनल परिवर्तन तेजी से होते हैं। इस दौरान उनका व्यवहार सामान्य से बिल्कुल अलग हो जाता है और वे बिना किसी स्पष्ट उकसावे के भी हमला कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि मस्त काल के दौरान हाथी की कनपटी के पास स्थित ग्रंथियों से लगातार स्राव निकलता है और बार बार पेशाब आना भी इस अवस्था का प्रमुख संकेत होता है। यदि ऐसे लक्षण दिखाई दें तो महावत को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और हाथी को भीड़भाड़ वाले इलाके से हटाकर सुरक्षित और एकांत स्थान पर रखना चाहिए। इस दौरान हाथी अपने महावत तक पर हमला कर सकता है इसलिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।

    वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि हाथी अत्यंत संवेदनशील और बुद्धिमान जीव है। तेज आवाज भीड़ पटाखों का शोर अपरिचित वातावरण या लगातार तनाव भी उसे असहज बना सकता है। यदि ऐसे हालात में वह पहले से मस्त काल में हो तो उसके हिंसक होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए धार्मिक आयोजनों जुलूसों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हाथियों को शामिल करते समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करना आवश्यक है।

    इंदौर में पहले भी हाथियों से जुड़े हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों के बाद यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि क्या हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच उनके व्यवहार की निगरानी और सुरक्षा प्रबंधन पर्याप्त रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि महावतों को हाथियों के व्यवहार और मस्त काल की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि समय रहते संभावित खतरे को टाला जा सके।

    इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। हाथी भले ही शांत और समझदार जीव माना जाता हो लेकिन उसकी प्राकृतिक प्रवृत्तियों को नजरअंदाज करना इंसानों और स्वयं पशु दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सुरक्षा नियमों का पालन और वैज्ञानिक समझ के साथ वन्यजीवों का प्रबंधन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज

    संघर्ष से निकला छात्र बना आंदोलन का चेहरा बड़वानी के अरुण बड़ोले ने 26 दिन तक उठाई हजारों विद्यार्थियों की आवाज


    बड़वानी । मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के छोटे से गांव लिंबई के रहने वाले अरुण बड़ोले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। मां आज भी खेतों में मजदूरी करके परिवार का पेट पालती हैं जबकि पिता की आंखों की रोशनी पिछले दो वर्षों से लगातार कमजोर होती जा रही है। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई का सफर आसान नहीं था लेकिन अरुण ने सिर्फ अपने भविष्य के बारे में नहीं सोचा बल्कि हजारों विद्यार्थियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का फैसला किया।

    देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे अरुण पिछले छह वर्षों से इंदौर में किराए के कमरे में रह रहे हैं। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वे ड्राइवरी का काम भी करते हैं। परिवार में तीन बहनों की जिम्मेदारी और सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने संघर्ष को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। जब देशभर में नीट परीक्षा को लेकर विवाद और छात्रों का आंदोलन तेज हुआ तब अरुण ने भी इंदौर में छात्रों की आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया।

    उन्होंने 30 जून से आंदोलन की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उनके साथ केवल चार साथी थे। पहले दस से बारह दिनों तक धरना स्थल पर गिने चुने छात्र ही मौजूद रहते थे। कई बार ऐसा भी लगा कि आंदोलन आगे नहीं बढ़ पाएगा लेकिन अरुण और उनके साथियों ने हार नहीं मानी। लगातार डटे रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का असर यह हुआ कि धीरे धीरे छात्रों सामाजिक संगठनों और शहर के लोगों का समर्थन मिलने लगा। देखते ही देखते यह आंदोलन प्रदेश के सबसे लंबे छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया और पूरे 26 दिनों तक लगातार चलता रहा।

    अरुण का कहना है कि अगर वे अपने जैसे लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए आवाज नहीं उठाते तो खुद को कभी माफ नहीं कर पाते। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता हर छात्र का अधिकार है। यही सोच उन्हें लगातार संघर्ष करने की ताकत देती रही। आर्थिक परेशानियां और रोजमर्रा की जिम्मेदारियां भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकीं।

    आंदोलन के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बारिश हो या कम होती भीड़ उन्होंने धरना स्थल नहीं छोड़ा। धीरे धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होने लगे। इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी उनका समर्थन किया जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।

    आंदोलन समाप्त होने के बाद भी अरुण का कहना है कि उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। उनका मानना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता और विद्यार्थियों के अधिकारों का सवाल है। यदि भविष्य में भी छात्रों के साथ किसी प्रकार का अन्याय होता है तो वे फिर से आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे। उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए वे हमेशा आवाज उठाते रहेंगे।

    अरुण बड़ोले की कहानी बताती है कि सीमित संसाधन कभी बड़े सपनों और मजबूत इरादों के सामने बाधा नहीं बनते। कठिन परिस्थितियों में भी यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और हौसला मजबूत हो तो एक साधारण छात्र भी हजारों लोगों की उम्मीद और संघर्ष का प्रतीक बन सकता है।