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  • गुड़ खिलाना पड़ा भारी इंदौर में हाथी ने ऑटो ड्राइवर को बेरहमी से कुचला सीसीटीवी में कैद हुई दिल दहला देने वाली घटना

    गुड़ खिलाना पड़ा भारी इंदौर में हाथी ने ऑटो ड्राइवर को बेरहमी से कुचला सीसीटीवी में कैद हुई दिल दहला देने वाली घटना


    इंदौर । इंदौर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक बेकाबू हाथी ने ऑटो चालक पर अचानक हमला कर उसे सूंड से उठाकर जमीन पर पटक दिया और फिर पैरों से कुचल दिया। गंभीर रूप से घायल चालक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामले में महावत को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है जबकि हाथी को लेकर भी संबंधित विभाग को सूचना भेजी गई है।

    यह घटना शनिवार शाम करीब चार बजकर अठारह मिनट पर राजनगर पुलिस चौकी के पास हुई। मृतक की पहचान 49 वर्षीय विजय उर्फ लक्ष्मण राव होलकर के रूप में हुई है जो पेशे से ऑटो रिक्शा चालक थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विजय हाथी को गुड़ खिलाने के लिए उसके पास पहुंचे थे। इसी दौरान हाथी अचानक उग्र हो गया और उसने हमला कर दिया।

    पुलिस के मुताबिक हाथी को उज्जैन से जैन समाज के एक मांगलिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर लाया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महावत हाथी को लेकर इलाके में घूम रहा था और भिक्षावृत्ति कर रहा था। इसी दौरान विजय ने हाथी को रोककर उसे गुड़ खिलाना शुरू किया। कुछ ही क्षणों में हाथी ने आक्रामक रूप अपनाया और विजय को सूंड से उठाकर सड़क पर पटक दिया। इसके बाद उसने अपने पैरों से उन्हें बुरी तरह कुचल दिया जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह हाथी को नियंत्रित किया और घायल विजय को वहां से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। पहले उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए वर्मा यूनियन अस्पताल रेफर किया गया लेकिन रात करीब साढ़े सात बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विजय अपने पीछे पत्नी एक बेटा और अन्य परिजनों को छोड़ गए हैं।

    घटना के बाद चंदन नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की। थाना प्रभारी तिलक करोले ने बताया कि महावत को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही इंदौर चिड़ियाघर के अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है ताकि हाथी की स्थिति और उसके व्यवहार का परीक्षण किया जा सके।

    पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी में यह बात भी सामने आई है कि घटना के समय मृतक शराब के नशे में हो सकता था। हालांकि इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है।

    गौरतलब है कि इंदौर में हाथी के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शहर के सीतलामाता बाजार और पाटनीपुरा क्षेत्र में हाथियों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ताजा हादसे के बाद सार्वजनिक स्थानों पर हाथियों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोग ऐसे आयोजनों और हाथियों की आवाजाही के दौरान सख्त सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

  • आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं

    आधी रात RRCAT में मची अफरा तफरी बैरियर तोड़कर परिसर में घुसी कार चालक हिरासत में परिवार ने बताया मानसिक स्थिति ठीक नहीं


    इंदौर । इंदौर के राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित राजा रामन्ना सेंटर फॉर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी यानी आरआरकैट परिसर में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब एक कार चालक मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को तोड़ते हुए जबरन अंदर घुस गया। घटना के चलते शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चालक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और उसका इलाज चल रहा है।

    राजेंद्र नगर पुलिस के अनुसार आरआरकैट निवासी वसंत कुमार कुमरे की शिकायत पर कार क्रमांक एमपी 09 सीएस 8622 के चालक सारिम जफर मंसूरी निवासी ग्रीन पार्क कॉलोनी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुटी हुई है।

    जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब साढ़े बारह बजे कैट चौराहे पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सारिम अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। पुलिस जांच से बचने के प्रयास में उसने कार की रफ्तार बढ़ा दी और सीधे आरआरकैट के मुख्य प्रवेश द्वार की ओर निकल गया। वहां लगे इलेक्ट्रॉनिक बूम बैरियर को टक्कर मारते हुए वह परिसर के अंदर प्रवेश कर गया। टक्कर इतनी तेज थी कि बैरियर क्षतिग्रस्त हो गया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

    घटना के तुरंत बाद आरआरकैट के सुरक्षा गार्ड सक्रिय हो गए और कार का पीछा किया। कुछ दूरी पर चालक ने वाहन रोक दिया जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर राजेंद्र नगर थाने पहुंचाया। पूछताछ के दौरान आरोपी पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया जिससे पुलिस को उसकी मानसिक स्थिति पर संदेह हुआ।

    इसके बाद पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन से उसके परिजनों से संपर्क किया। परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि सारिम पिछले कुछ समय से मानसिक बीमारी का उपचार करा रहा है और इसी कारण उसे किसी प्रकार की जिम्मेदारी या काम भी नहीं दिया जाता। परिजनों ने इलाज से जुड़े दस्तावेज भी पुलिस को उपलब्ध कराए जिनकी जांच की जा रही है।

    मामले को गंभीरता से लेते हुए राजेंद्र नगर थाना प्रभारी यशवंत बड़ोले ने परिजनों को भी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है तो उसे देर रात वाहन चलाने के लिए अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इससे न केवल उसकी बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है। समय रहते घटना पर नियंत्रण पा लिया गया वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

    फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ शासकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय चालक की मानसिक स्थिति क्या थी और क्या किसी अन्य कारण से उसने सुरक्षा व्यवस्था तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप

    इंदौर में छात्र आंदोलन पर सियासी तकरार NEET विरोधी छात्र नेताओं ने पुलिस पर लगाए अपशब्द मानसिक प्रताड़ना और परिवार से दूर रखने के आरोप


    इंदौर । नीट पेपर लीक के विरोध में इंदौर में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्र नेताओं का आरोप है कि उन्हें प्रशासन ने डीसीपी से चर्चा कराने का भरोसा देकर बुलाया लेकिन बातचीत कराने के बजाय सीधे थाने ले जाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्रों का कहना है कि पूरी कार्रवाई के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्य राधे जाट ने बताया कि 23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा के संबंध में पुलिस प्रशासन से पहले ही संपर्क किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यात्रा की पूरी जानकारी एक दिन पहले पुलिस कमिश्नर कार्यालय में दी गई थी और अनुमति भी मांगी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें यह कहकर बुलाया कि डीसीपी से चर्चा कराई जाएगी। छात्रों ने पुलिस पर भरोसा किया और उनके साथ चले गए लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल फोन बंद करवा दिए गए। इसके बाद उन्हें पहले जिला अस्पताल चौकी और फिर चंदन नगर थाने ले जाया गया।

    छात्र नेताओं का कहना है कि अगले दिन मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें एसीपी के सामने पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी स्तर पर उनकी बात सुनने की कोशिश नहीं की गई। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन प्रशासन ने आंदोलन शुरू होने से पहले ही उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

    रिहा हुए छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और मानसिक रूप से परेशान किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सुरेंद्र यादव के साथ भी कथित रूप से अपशब्द कहे गए। इस मामले में विजय चौधरी चंद्रशेखर गुर्जर गौरव परिहार और हरिप्रपन्न गोस्वामी को भी गिरफ्तार किया गया था। सभी का कहना है कि उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया जबकि उनका उद्देश्य केवल छात्रों की आवाज उठाना था।

    छात्र नेताओं का यह भी आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें कहां रखा गया है। इससे परिजन लगातार परेशान रहे और उन्हें अपने बच्चों की कोई जानकारी नहीं मिल सकी। रिहाई के समय उनसे बॉन्ड ओवर भी भरवाया गया। छात्रों का कहना है कि इससे पहले उन्होंने एमपीपीएससी पटवारी भर्ती घोटाले और अन्य छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया था लेकिन कभी इस तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ा।

    रिहाई के बाद छात्र नेताओं ने इंदौर में लागू कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी नाराजगी जताई कि गिरफ्तारी के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के नेता ने उनकी सुध नहीं ली। अब यह मामला छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच नए विवाद का कारण बनता दिखाई दे रहा है जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल लगातार उठ रहे हैं।

  • इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब

    इंदौर के छात्र आंदोलन में टी शर्ट बनी चर्चा का केंद्र ना मर्दों के प्रदेश वाले बयान का युवाओं ने दिया करारा जवाब


    मध्य प्रदेश। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज अब मध्य प्रदेश में भी साफ सुनाई दे रही है। इंदौर का भंवरकुआं चौराहा इन दिनों प्रदेश के छात्र आंदोलन का बड़ा केंद्र बन चुका है जहां लगातार कई दिनों से युवा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मामलों के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। इसी आंदोलन के दौरान एक टी शर्ट ने अचानक पूरे प्रदेश में चर्चा छेड़ दी। टी शर्ट पर लिखा संदेश ना मर्दों के प्रदेश मप्र से भी आए हैं मर्द सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    इस टी शर्ट को आंदोलन की शुरुआत करने वाले पवन अहिरवार और उनके साथियों ने पहनकर प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान इसी संदेश के साथ नारे भी लगाए गए। युवाओं का कहना था कि यह केवल एक टी शर्ट नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं के आत्मसम्मान और उनकी आवाज का प्रतीक है। उनका दावा है कि प्रदेश के युवाओं को कमजोर समझने वालों को यह संदेश देना जरूरी था कि यहां के छात्र भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना जानते हैं।

    दरअसल कुछ दिन पहले दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक युवक प्रशांत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में उसने खुद को मध्य प्रदेश का बताते हुए कहा था कि यह ना मर्दों का प्रदेश है जहां कोई आवाज नहीं उठाता। उसने यह भी कहा था कि प्रदेश में कई बड़े मुद्दे सामने आते हैं लेकिन लोग खुलकर विरोध नहीं करते। यही बयान इंदौर के आंदोलनकारियों को नागवार गुजरा और उन्होंने इसका जवाब अपने तरीके से देने का फैसला किया।

    पवन अहिरवार का कहना है कि मध्य प्रदेश के युवाओं को किसी भी तरह से कमजोर नहीं समझा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कई गंभीर मुद्दों पर लोगों ने आवाज उठाई है लेकिन कई मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। चाहे भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद हों स्वास्थ्य व्यवस्था के मामले हों या अन्य जनहित के मुद्दे युवाओं ने हमेशा सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह टी शर्ट उसी सोच के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जवाब है जिसने पूरे प्रदेश को गलत नजरिए से पेश करने की कोशिश की।

    भंवरकुआं चौराहे पर जारी धरने में शामिल छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और जब तक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं होती तब तक उनका धरना जारी रहेगा। लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र आंदोलन में डटे हुए हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य और भरोसे से जुड़ा सवाल है।

    आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी मिल रहा है। मनावर विधायक डॉ हीरालाल अलावा भी छात्रों के बीच पहुंचे और उन्होंने निष्पक्ष जांच तथा जवाबदेही तय करने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि इंदौर का छात्र आंदोलन अब केवल धरना प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह युवाओं की भावनाओं और आत्मसम्मान का भी प्रतीक बन गया है। वायरल टी शर्ट ने एक नया संदेश दिया है कि मध्य प्रदेश के युवा अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करने में पीछे नहीं हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन किस दिशा में जाएगा यह भले समय बताए लेकिन फिलहाल यह टी शर्ट पूरे आंदोलन की सबसे चर्चित पहचान बन चुकी है।

  • नाना पटवारी से पूछताछ के बीच कांग्रेस में हलचल, जीतू पटवारी के निवास पर नेताओं का जमावड़ा, वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

    नाना पटवारी से पूछताछ के बीच कांग्रेस में हलचल, जीतू पटवारी के निवास पर नेताओं का जमावड़ा, वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। इस खबर के बाद इंदौर स्थित जीतू पटवारी के निवास पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का लगातार पहुंचना शुरू हो गया। देखते ही देखते उनके घर के बाहर समर्थकों और वरिष्ठ नेताओं की भीड़ लग गई और पूरे घटनाक्रम पर प्रदेश की राजनीतिक निगाहें टिक गईं।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने भी नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की। हालांकि पुलिस की ओर से अब तक हिरासत की वजह और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि एक पहले से चल रही जांच के सिलसिले में नाना पटवारी से पूछताछ की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पुलिस आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर रही है।

    इस बीच जीतू पटवारी के घर से सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। इन वीडियो में कई कांग्रेस नेता आपस में बातचीत करते और हल्के माहौल में नजर आ रहे हैं। इन्हीं तस्वीरों और वीडियो को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और लोग अलग अलग नजरिए से पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी कर रहे हैं।

    घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और समर्थकों की आवाजाही लगातार बनी रही। पार्टी के कई स्थानीय और वरिष्ठ नेता जीतू पटवारी के घर पहुंचकर स्थिति की जानकारी लेते रहे। वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूरे मामले में कानून अपना काम कर रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

    दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पूछताछ के बाद नाना पटवारी के खिलाफ आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच प्रक्रिया जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। आधिकारिक बयान आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

    फिलहाल इंदौर में जीतू पटवारी के निवास पर राजनीतिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। कांग्रेस संगठन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की जा रही है। आने वाले समय में पुलिस की आधिकारिक जानकारी और जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस

    इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस


    इंदौर । इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब रीवा से इंदौर आ रही जय अंबे ट्रेवल्स की यात्री बस में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 11 बजे शिप्रा थाने के सामने हुई। बस में सवार यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक की सूझबूझ और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस इंदौर की ओर बढ़ रही थी, तभी उसका एक टायर अचानक फट गया। टायर फटने के बाद चालक ने बस पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। इसी दौरान टायर और सड़क के बीच हुए तेज घर्षण के कारण बस के अगले हिस्से से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें दिखाई देने लगीं।

    चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बस रोक दी और यात्रियों को तेजी से नीचे उतरने के निर्देश दिए। यात्रियों ने भी बिना घबराहट के बस खाली कर दी, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह खाली करा ली गई और संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही शिप्रा थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इससे आग बस के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें दूसरी बस की व्यवस्था कर इंदौर के लिए रवाना किया। घटना के कारण कुछ समय तक क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

    पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में टायर फटने के बाद हुए घर्षण को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जाएगी। बस की यांत्रिक स्थिति और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    समय रहते चालक की सतर्कता, यात्रियों के सहयोग और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है।

  • इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज

    इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज


    इंदौर । इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर देवास पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने, मारपीट करने और कार में बंधक बनाने के आरोप में बाणगंगा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था और मना करने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर मानसिक रूप से परेशान करता रहा।

    पुलिस के अनुसार महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब एक वर्ष पहले देवास में पदस्थापना के दौरान उसकी पहचान राहुल शर्मा से हुई थी। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी ने लगातार फोन करना शुरू कर दिया। महिला के बार बार मना करने के बावजूद वह बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा और निजी संबंध बनाने की कोशिश करता रहा।

    पीड़िता का कहना है कि राहुल की हरकतों से परेशान होकर उसने अपना तबादला देवास से इंदौर करा लिया ताकि उससे दूरी बनाई जा सके। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। महिला ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया, लेकिन वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता रहा और लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। आरोप है कि कई बार उसने महिला का पीछा भी किया और उसे मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देकर महिला पर बात करने और शादी के लिए सहमत होने का दबाव बनाता था। एक बार वह उस समय भी सरकारी अस्पताल पहुंच गया जब महिला एक मामले में पीड़ित का मेडिकल कराने गई थी। वहां भी उसने बातचीत करने की कोशिश की और विवाद खड़ा कर दिया।

    महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन राहुल शर्मा ने जबरन उसे अपनी कार में बैठा लिया। बाणगंगा क्षेत्र में उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और शादी के लिए दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसे बाहर निकलने नहीं दिया।

    इसी दौरान महिला की मां का फोन आया। महिला ने किसी तरह उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे कार में बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही महिला के पिता और भाई मौके पर पहुंच गए। उन्हें आता देख आरोपी कार लेकर वहां से फरार हो गया।

    घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल ने थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत की जांच के बाद बाणगंगा पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

  • महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर

    महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर


    इंदौर । लगातार हो रही बारिश के बीच इंदौर नगर निगम की एक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के परदेशीपुरा क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंची निगम की टीम को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन कार्रवाई के दौरान जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी को भावुक कर दिया। परिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नगर निगम के रिमूवल प्रभारी ने एक महिला के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर मकान खाली करने की अपील की। आखिरकार समझाइश सफल रही और परिवार के बाहर आने के बाद जर्जर मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

    नगर निगम की टीम वर्मा नर्सिंग होम के पास स्थित रतिराम खटके के पुराने और जर्जर मकान को हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार इस भवन को वर्ष 2021 से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। हाल ही में हुए निरीक्षण में भवन की नींव कमजोर और पूरी संरचना अत्यंत खतरनाक पाई गई थी। लगातार बारिश के कारण मकान कभी भी गिर सकता था जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी।

    कार्रवाई के दौरान मकान में रहने वाली महिला ने घर खाली करने से इनकार करते हुए अपने घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उसने कहा कि सामान रखने की व्यवस्था होने के बाद ही वह मकान खाली करेगी। इसके बाद रिमूवल प्रभारी बबलू कल्याणे स्वयं मकान के अंदर गए और पूरा सामान देखा। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनका सामान पास की सुरक्षित जगह पर रखवा दिया जाएगा और किसी भी वस्तु को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

    काफी देर तक समझाने के बावजूद जब महिला तैयार नहीं हुई तो स्थिति भावुक हो गई। परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बबलू कल्याणे ने महिला के पैर पकड़ लिए और आग्रह किया कि वह अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए मकान खाली कर दे। अधिकारी का यह मानवीय व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। अंततः महिला और उसके परिवार ने अधिकारियों की बात मान ली और सुरक्षित बाहर आ गए।

    परिवार के बाहर निकलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम ने करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने जर्जर मकान को बुलडोजर की मदद से गिरा दिया। इस भवन में अलग अलग परिवार रह रहे थे जिन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सख्ती दिखाने के लिए नहीं बल्कि संभावित जनहानि को रोकने के उद्देश्य से की गई।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के सभी चिन्हित जर्जर भवनों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों से लोगों की जान को खतरा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे से पहले ऐसे भवनों को हटाना जरूरी है।

    इंदौर की यह घटना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण भी बन गई है। एक अधिकारी ने नियमों के साथ इंसानियत को भी प्राथमिकता दी और समय रहते एक संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।

  • इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए

    इंदौर में वॉट्सएप हैक कर महिला से एक लाख की ठगी इंग्लैंड में रहने वाले परिचित बनकर मांगे मेडिकल इमरजेंसी के नाम पर रुपए


    इंदौर । इंदौर में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है जहां ठगों ने वॉट्सएप अकाउंट हैक कर मेडिकल इमरजेंसी का झांसा देकर एक महिला से एक लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपी ने इंग्लैंड में रहने वाले महिला के परिचित की पहचान का दुरुपयोग करते हुए मदद के नाम पर पैसे मांगे और महिला ने भरोसा कर दो किश्तों में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में फोन पर सच्चाई सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस और साइबर हेल्पलाइन से शिकायत की।

    यह मामला संयोगितागंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार उषागंज छावनी निवासी राबिया खान पत्नी नासिर खान ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 20 जून को उनके परिचित याकूब खान के मोबाइल नंबर से वॉट्सएप पर संदेश प्राप्त हुआ। याकूब खान वर्तमान में इंग्लैंड में रहते हैं इसलिए उन्हें संदेश पर किसी तरह का संदेह नहीं हुआ।

    मैसेज में लिखा गया था कि मेडिकल इमरजेंसी की वजह से तत्काल पैसों की जरूरत है। इसके साथ एक पंजाब नेशनल बैंक का खाता नंबर भेजकर जल्द से जल्द आर्थिक मदद करने का अनुरोध किया गया। परिचित की परेशानी समझकर राबिया खान ने बिना किसी पुष्टि के ऑनलाइन माध्यम से दो अलग अलग ट्रांजेक्शन में 50 50 हजार रुपये भेज दिए।

    रकम भेजने के कुछ समय बाद जब उन्होंने याकूब खान से फोन पर बात की तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। याकूब खान ने बताया कि उनका वॉट्सएप अकाउंट हैक हो गया है और उन्होंने किसी से भी पैसे नहीं मांगे हैं। यह सुनते ही महिला को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पीड़िता ने तुरंत अपने बैंक के कस्टमर केयर से संपर्क किया और ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई ताकि रकम को रोका जा सके और आरोपी तक पहुंचा जा सके।

    संयोगितागंज थाना पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस संबंधित बैंक खाते की जानकारी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई वह किसके नाम पर संचालित है और उसके जरिए पहले भी इस तरह की वारदातें हुई हैं या नहीं।

    पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिचित के नाम से वॉट्सएप या सोशल मीडिया पर पैसे मांगने का संदेश मिलने पर तुरंत फोन करके उसकी पुष्टि जरूर करें। केवल मैसेज के आधार पर किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सकता है।