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  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आने के बाद मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती 18 दिनों के भीतर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की सतह बैठने, दरारें आने और पैचवर्क की आवश्यकता पड़ने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा प्रभावित होने की जानकारी मिली है। कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क किनारे बने शोल्डर के धंसने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और सुधार कार्य में लगी हुई हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी को गैर-प्रदर्शन श्रेणी में रखते हुए उसके कुछ अधिकारियों को परियोजना से हटाने का निर्णय लिया है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी।

    सड़क निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर इतने कम समय में बार-बार सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आती है तो निर्माण प्रक्रिया, मिट्टी की तैयारी, जल निकासी व्यवस्था और आधार परत की गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि यदि मूल संरचना में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी और प्रभावित हिस्सों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।

    यह एक्सप्रेसवे राज्य की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह प्रदेश की सबसे महंगी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस मार्ग के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कंपनी को लेकर पहले भी विभिन्न मामलों में चर्चा होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में जांच का मुख्य केंद्र सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण संबंधी कमी, मौसम, जल निकासी व्यवस्था या अन्य कोई तकनीकी कारण जिम्मेदार है।

    फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य जारी है और कुछ स्थानों पर यातायात को डायवर्जन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिल सके।

  • भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    भारत में डेटा सेंटर का बढ़ता जाल, 2030 तक लाखों नौकरियों और रियल एस्टेट में आएगा बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच डेटा सेंटर परियोजनाएं आने वाले वर्षों में रोजगार, बुनियादी ढांचे और रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास का बड़ा आधार बन सकती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार देश में प्रस्तावित लगभग 9,030 मेगावाट क्षमता वाली डेटा सेंटर परियोजनाएं वर्ष 2030 तक करीब 4.33 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं के आसपास आवासीय क्षेत्र में भी बड़ी मांग उत्पन्न होने का अनुमान लगाया गया है।

    डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इनमें इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े पैमाने पर डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा तैयार किया जाता है। भारत में डिजिटल गतिविधियों के बढ़ने के साथ डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश को गति मिल रही है।

    रिपोर्ट के मुताबिक भारत वर्तमान में दुनिया के कुल डिजिटल डेटा का लगभग 20 प्रतिशत तैयार करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में देश की हिस्सेदारी करीब 4 प्रतिशत ही है। यह अंतर बताता है कि भारत में डेटा सेंटर अवसंरचना के विस्तार की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने के साथ इस क्षेत्र में बड़े निवेश की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनके निर्माण और संचालन से आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य गतिविधियां भी विकसित होती हैं। बिजली आपूर्ति व्यवस्था, फाइबर नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा सेवाएं और अन्य व्यावसायिक सुविधाओं का विस्तार होता है, जिससे नए आर्थिक केंद्रों का विकास शुरू हो जाता है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा सेंटर परियोजनाओं का असर लंबे समय तक रहने वाला है। इन परियोजनाओं के आसपास रोजगार बढ़ने के साथ आवासीय मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। अनुमान के अनुसार डेटा सेंटर परिसरों के आसपास 5 से 15 किलोमीटर का क्षेत्र सबसे अधिक लाभान्वित हो सकता है। इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और संचार सुविधाओं के विकास के साथ आवासीय टाउनशिप, खुदरा बाजार और अन्य नागरिक सुविधाओं का विस्तार होने की संभावना है।

    डेटा सेंटर आधारित विकास को रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए भी एक नए अवसर के रूप में देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2030 तक इन परियोजनाओं के कारण देश में लगभग 19.5 करोड़ वर्गफुट अतिरिक्त आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इससे नए विकास क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    राज्यों के स्तर पर महाराष्ट्र को इसका सबसे अधिक फायदा मिलने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में डेटा सेंटर निवेश के कारण करीब 5.4 करोड़ वर्गफुट से अधिक आवासीय मांग पैदा हो सकती है। इसके बाद कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी बड़े अवसर बनने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पहले राजमार्ग, औद्योगिक गलियारे, हवाई अड्डे और आईटी पार्क आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र रहे हैं। अब डेटा सेंटर इस विकास यात्रा का नया आधार बन सकते हैं। इनके लिए जरूरी बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में निवेश बढ़ने से उद्योगों और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल कारोबार के विस्तार के साथ डेटा सेंटर क्षेत्र आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रोजगार सृजन के साथ-साथ यह क्षेत्र नए शहरी विकास क्षेत्रों को भी आकार देने वाला प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर केंद्र बन सकता है।

  • अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    अदाणी एंटरप्राइजेज ने पहली तिमाही में बनाया नया रिकॉर्ड, एबिटडा 49 प्रतिशत बढ़कर 5,642 करोड़ रुपये पहुंचा

    नई दिल्ली ।अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज करते हुए अब तक का सबसे अधिक तिमाही एबिटडा हासिल किया है। कंपनी के अनुसार, जून तिमाही में एबिटडा 5,642 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 49 प्रतिशत अधिक है। मजबूत परिचालन प्रदर्शन और विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में बढ़ती गतिविधियों ने कंपनी के परिणामों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कंपनी की कुल आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही के दौरान कुल आय सालाना आधार पर 50 प्रतिशत बढ़कर 33,546 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि कंपनी के विविध कारोबारी पोर्टफोलियो और अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार विस्तार का संकेत मानी जा रही है। कंपनी का कहना है कि स्थापित व्यवसायों के साथ उभरते क्षेत्रों में निवेश का लाभ अब वित्तीय परिणामों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    तिमाही के दौरान कर से पहले मुनाफा 1,295 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी ने स्पष्ट किया कि इस आंकड़े में एक विशेष सेटलमेंट से जुड़े प्रभाव को शामिल नहीं किया गया है। इस अवधि में अदाणी एयरपोर्ट्स का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां एबिटडा 49 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 1,633 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। विमानन क्षेत्र में बढ़ती परिचालन क्षमता और यात्री गतिविधियों ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।

    कंपनी का कहना है कि उसके इंफ्रास्ट्रक्चर और इनक्यूबेशन प्लेटफॉर्म लगातार मजबूत हो रहे हैं। इसी कारण कारोबार का विस्तार केवल राजस्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिचालन दक्षता और लाभप्रदता में भी लगातार सुधार देखने को मिला है। विविध क्षेत्रों में मौजूदगी के कारण कंपनी को स्थिर विकास का आधार भी मिला है।

    पहली तिमाही के दौरान कई प्रमुख परियोजनाओं में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय परिचालन की शुरुआत कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर रही। इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना पर टोल संग्रह शुरू होने से भी परिचालन गतिविधियों में नई गति आई। ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी ने सोलर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता का विस्तार किया, जबकि डेटा सेंटर कारोबार में बड़े हाइपरस्केल ऑर्डर मिलने से भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।

    कॉपर कारोबार ने भी तिमाही के प्रदर्शन में अहम योगदान दिया। क्षमता विस्तार के बाद इस कारोबार से 749 करोड़ रुपये का एबिटडा प्राप्त हुआ। वहीं अदाणी न्यू इंडस्ट्रीज ने 1.7 गीगावॉट क्षमता वाली नई मॉड्यूल उत्पादन लाइन शुरू की, जिससे स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है।

    कंपनी ने हाल ही में 15,000 करोड़ रुपये का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रबंधन का मानना है कि इससे संस्थागत निवेशकों का कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति और विकास योजनाओं पर भरोसा मजबूत हुआ है। कंपनी का कहना है कि भारत में तेजी से बढ़ती बुनियादी ढांचा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वह वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी कारोबार विकसित करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

    कंपनी का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए अनुशासित निवेश अब बेहतर परिचालन क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन में बदलने लगे हैं। आने वाले समय में परिसंपत्तियों का अधिक प्रभावी उपयोग, नई परियोजनाओं का विस्तार और परिचालन दक्षता कंपनी की विकास यात्रा को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी सफर की रफ्तार, 1386 किमी की दूरी 12 घंटे में, छह राज्यों को मिलेगा हाईस्पीड नेटवर्क

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बदलेगी सफर की रफ्तार, 1386 किमी की दूरी 12 घंटे में, छह राज्यों को मिलेगा हाईस्पीड नेटवर्क


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। 1,386 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे पूरा होने के बाद दिल्ली और मुंबई के बीच यात्रा समय को लगभग आधा कर देगा। वर्तमान में करीब 24 घंटे में तय होने वाला सफर घटकर लगभग 12 घंटे का रह जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल तेज यातायात उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि देश के प्रमुख औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्रों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ना भी है।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे छह राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र—से होकर गुजरेगा। राजधानी से शुरू होने वाला यह मार्ग हरियाणा के सोहना और नूंह, राजस्थान के दौसा, सवाई माधोपुर और कोटा, मध्य प्रदेश के झाबुआ और रतलाम, गुजरात के वडोदरा, भरूच और सूरत होते हुए महाराष्ट्र के ठाणे के रास्ते मुंबई तक पहुंचेगा। इस मार्ग से लगभग 20 प्रमुख शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को हाईस्पीड सड़क संपर्क मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    एक्सप्रेसवे को फिलहाल आठ लेन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि भविष्य में इसे 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना है। इस मार्ग पर वाहनों के लिए अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति निर्धारित की गई है। इससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगी। साथ ही माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आने की संभावना है, जिससे उद्योग और व्यापार जगत को सीधा लाभ मिलेगा।

    यह परियोजना आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। एक्सप्रेसवे पर स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, हाई-टेक सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा रही है। ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए कई स्थानों पर सौर ऊर्जा आधारित सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नियमित अंतराल पर ट्रॉमा सेंटर, आपातकालीन सहायता सेवाएं और हेलीकॉप्टर लैंडिंग की सुविधा वाले हेलीपैड भी बनाए जा रहे हैं।

    वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस एक्सप्रेसवे की विशेष डिजाइन भी चर्चा का विषय है। रणथंभौर और मुकुंदरा हिल्स क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्सों में वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए विशेष एनिमल ओवरपास और अंडरपास तैयार किए गए हैं। साथ ही ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए साउंड बैरियर लगाए जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक आवास और वन्यजीवों पर सड़क यातायात का प्रभाव न्यूनतम रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नई दिशा देगा। तेज परिवहन व्यवस्था से ईंधन की बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार होगा। राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर बाजार संपर्क मिलेगा, जबकि पर्यटन, निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। परियोजना पूरी होने के बाद यह एक्सप्रेसवे देश की आर्थिक गतिविधियों को गति देने वाली सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल होगा।

  • गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    गोरखपुर में सीएम योगी की रवि किशन पर हल्की चुटकी, अतिक्रमण हटाने की सलाह के साथ विकास कार्यों पर दिया जोर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर दौरे के दौरान 429 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शहर के पहले सिक्सलेन फ्लाईओवर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 995 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फ्लाईओवर का निरीक्षण किया और अधिकारियों के साथ परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विकास कार्यों के साथ स्वच्छता, अतिक्रमण हटाने और जनभागीदारी पर विशेष जोर दिया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के सांसद रवि किशन का उल्लेख करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हाल ही में बारिश के दौरान रवि किशन को पानी में उतरकर नाली साफ करते देखा गया था। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि नाली साफ करने से बेहतर है कि नालों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, क्योंकि इससे पानी का निकास स्वतः बेहतर हो जाएगा। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने भी मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी।

    मुख्यमंत्री ने इसी दौरान सांसद रवि किशन की ओर से आयोजित भोज का भी जिक्र किया। उन्होंने उपस्थित लोगों से पूछा कि भोजन कार्यक्रम में कितने लोग शामिल हुए थे। जब सीमित संख्या में लोगों ने हाथ उठाया तो मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में कहा कि लगता है केवल चार-पांच लोगों को ही भोजन मिला। इस पर रवि किशन ने जवाब देते हुए कहा कि पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस सहज बातचीत ने कार्यक्रम का माहौल हल्का बना दिया।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की विकास योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगातार सड़क, पुल, फ्लाईओवर और अन्य आधारभूत ढांचे का विस्तार किया जा रहा है ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उनका कहना था कि मजबूत बुनियादी ढांचा किसी भी क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है और सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण थी, जबकि अब राज्य में अपराध और अराजकता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने बीते वर्षों में युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं तथा विकास को बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ाया जा रहा है।

    योगी आदित्यनाथ ने लोगों से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील भी की। उन्होंने कहा कि नालों और जल निकासी मार्गों पर अतिक्रमण नहीं होना चाहिए तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग से बचना आवश्यक है। उन्होंने जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि विकास कार्य तभी लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे जब जनता भी उनकी देखभाल और संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाएगी।

    गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री का संबोधन विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना, स्वच्छता अभियान और जनभागीदारी जैसे विषयों पर केंद्रित रहा। वहीं सांसद रवि किशन के साथ उनका हल्का-फुल्का संवाद भी कार्यक्रम की प्रमुख चर्चा बना रहा, जिसे उपस्थित लोगों ने सहज और सकारात्मक माहौल का हिस्सा माना।

  • दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..

    दुनिया में एयर एंबुलेंस के दौर में पाकिस्तान की पुरानी योजना पर छिड़ी नई बहस..


    नई दिल्ली।
    सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इन दिनों पाकिस्तान के कराची शहर से जुड़ा एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो में बुनियादी मेडिकल किट से लैस साइकिल एंबुलेंस व्यवस्था को दिखाया गया है, जिसे लेकर इंटरनेट पर विविध प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आधुनिक दौर में जहां विश्व स्तर पर एयर एंबुलेंस और ड्रोन आधारित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो रहा है, वहीं इस तरह की पहल को लेकर कई यूजर्स पाकिस्तान की वर्तमान स्वास्थ्य प्रणाली और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, इस वायरल वीडियो के पीछे का वास्तविक संदर्भ और उद्देश्य काफी अलग है।

    यह वायरल सामग्री कोई नई नीति या हालिया लॉन्च नहीं है, बल्कि मई 2025 में पाकिस्तान की आपातकालीन सेवा ‘रेस्क्यू 1122’ द्वारा शुरू की गई एक पुरानी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है। कराची जैसे घने और अत्यधिक आबादी वाले महानगर में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां अत्यंत संकरी गलियां हैं और अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे इलाकों में आपात स्थिति के दौरान पारंपरिक बड़े एंबुलेंस वाहनों का समय पर पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसी भौगोलिक और यातायात संबंधी बाधा को दूर करने के लिए इस वैकल्पिक त्वरित प्रतिक्रिया मॉडल को तैयार किया गया था।

    तकनीकी रूप से यह साइकिल केवल एक सामान्य सवारी साधन नहीं है, बल्कि इसे आपातकालीन प्राथमिक उपचार के अनुकूल विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसमें ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइजर, ब्लड शुगर जांचने के उपकरण, प्राथमिक चिकित्सा किट और अन्य जरूरी जीवनरक्षक दवाएं रखी जाती हैं। प्रशिक्षित स्वयंसेवक, जिनमें विशेष रूप से प्रशिक्षित महिला कार्यकर्ता भी शामिल हैं, भीड़भाड़ वाले मार्गों से आसानी से निकलकर मरीज तक त्वरित पहुंच बनाते हैं। इनका मुख्य कार्य मुख्य एंबुलेंस के आगमन तक मरीज को शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान कर स्थिति को स्थिर बनाए रखना है।

    वैश्विक स्तर पर भी देखें तो कई विकसित और विकासशील देशों के पुराने शहरों तथा सघन शहरी क्षेत्रों में साइकिल या मोटरसाइकिल आधारित प्रथम प्रतिक्रिया टीमों का उपयोग एक स्थापित मानक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है। कराची की यह व्यवस्था सामान्य एंबुलेंस सेवा का विकल्प न होकर, केवल एक सहायक आपातकालीन प्रणाली है। सोशल मीडिया पर बिना पूरे संदर्भ के शुरू हुई इस बहस के बाद अब कई विश्लेषकों का मानना है कि शहरी यातायात की जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय स्तर पर जान बचाने के लिए उठाए गए व्यावहारिक कदमों को केवल व्यंग्य के दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं है।

  • कुवैत का बड़ा दावा, ईरान ने डिसैलिनेशन प्लांट पर किया हमला, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर मंडराया संकट

    कुवैत का बड़ा दावा, ईरान ने डिसैलिनेशन प्लांट पर किया हमला, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर मंडराया संकट

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कुवैत ने ईरान पर अपने महत्वपूर्ण डिसैलिनेशन और बिजली संयंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया है। कुवैती प्रशासन का कहना है कि इस हमले से संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ हिस्सों में आग भी लग गई थी। घटना के बाद राहत और मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कर दिया गया है, जबकि सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं।

    कुवैत के बिजली, पानी और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार हमले के कारण बिजली उत्पादन से जुड़ी कई इकाइयों को क्षति पहुंची है। अधिकारियों ने बताया कि आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़े स्तर पर नुकसान को रोका जा सका। फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञ प्रभावित इकाइयों का निरीक्षण कर रहे हैं और संयंत्र को दोबारा पूरी क्षमता से संचालित करने की दिशा में कार्य जारी है।

    कुवैत के लिए डिसैलिनेशन संयंत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह देश प्राकृतिक मीठे जल स्रोतों की कमी के कारण अपनी अधिकांश पेयजल जरूरतों के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने की प्रक्रिया पर निर्भर है। ऐसे में यदि इस तरह के संयंत्र लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं तो जल आपूर्ति के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। सरकार ने कहा है कि आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।

    कुवैती प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम नागरिकों के दैनिक जीवन और आवश्यक सेवाओं पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसी कारण संबंधित एजेंसियों को नुकसान का त्वरित आकलन करने और संयंत्र को जल्द से जल्द सामान्य संचालन में लाने के निर्देश दिए गए हैं।

    इस घटना के बीच पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां भी तेज बनी हुई हैं। क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई रणनीतिक ठिकानों और बुनियादी ढांचों को लेकर सुरक्षा चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में दोनों पक्षों के बीच बढ़ी सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है, जिसका असर पड़ोसी देशों पर भी दिखाई देने लगा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा और जल आपूर्ति से जुड़े प्रतिष्ठानों पर किसी भी प्रकार का हमला केवल संबंधित देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कुवैत द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियों पर भी नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इस घटना के संबंध में आधिकारिक स्तर पर आगे की जांच और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि कुवैत सरकार ने आवश्यक सेवाओं को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

  • भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

    भोपाल का निशातपुरा रेलवे स्टेशन तीन साल से संचालन का इंतजार कर रहा, करोड़ों की परियोजना अब भी बनी अधूरी तस्वीर

     मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित निशातपुरा रेलवे स्टेशन निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक नियमित संचालन शुरू नहीं हो सका है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह स्टेशन पिछले लगभग तीन वर्षों से ट्रेनों के ठहराव का इंतजार कर रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना का उपयोग शुरू न होने के कारण रेलवे की योजना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

    करीब छह करोड़ रुपये की लागत से जून 2023 में तैयार किए गए इस रेलवे स्टेशन को यात्रियों की सुविधा और भोपाल जंक्शन पर बढ़ते परिचालन दबाव को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। स्टेशन पर प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, प्रतीक्षालय, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं। इसके बावजूद यहां न तो किसी यात्री ट्रेन का नियमित ठहराव शुरू हुआ है और न ही स्टेशन पर सामान्य रेल गतिविधियां दिखाई देती हैं।

    दिनभर स्टेशन परिसर लगभग सुनसान रहता है। विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाली ट्रेनें स्टेशन के सामने से गुजरती जरूर हैं, लेकिन उनका यहां ठहराव नहीं होता। परिणामस्वरूप स्टेशन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और तैयार बुनियादी ढांचा निष्क्रिय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्टेशन का संचालन शुरू हो जाए तो आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को भी बड़ी सुविधा मिल सकती है।

    रेलवे की मूल योजना के अनुसार निशातपुरा स्टेशन को विकसित कर भोपाल जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम करना था। इसके साथ ही लंबी दूरी की ट्रेनों के परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने, प्लेटफॉर्म उपलब्धता में सुधार करने और इंजन बदलने अथवा परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को कम करने का लक्ष्य रखा गया था। इससे ट्रेनों की समयबद्धता में भी सुधार की संभावना जताई गई थी।

    वर्तमान में पश्चिमी दिशा से आने वाली कई ट्रेनों को भोपाल जंक्शन पर प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने का इंतजार करना पड़ता है। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निशातपुरा स्टेशन पूरी तरह चालू हो जाए तो कुछ परिचालन गतिविधियों को वहां स्थानांतरित किया जा सकता है। इससे मुख्य स्टेशन पर दबाव कम होगा और रेल संचालन अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।

    हालांकि रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन का निर्माण पूरा होने के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण औपचारिकताएं शेष हैं। इनमें सुरक्षा संबंधी स्वीकृतियां, अंतिम निरीक्षण, आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती और परिचालन से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल हैं। इसके अलावा स्टेशन परिसर से जुड़े ड्रेनेज सिस्टम और पहुंच मार्ग के कुछ कार्य भी अभी पूरे किए जाने बाकी हैं।

    अधिकारियों के अनुसार इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद स्टेशन से ट्रेनों का संचालन शुरू किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है ताकि यात्रियों को इस नए स्टेशन का लाभ मिल सके। हालांकि संचालन शुरू होने की कोई निश्चित तिथि अभी घोषित नहीं की गई है।

    फिलहाल निशातपुरा रेलवे स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होने के बावजूद यात्रियों की आवाजाही से दूर है। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों की उम्मीद है कि लंबित औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और यह स्टेशन अपने निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप रेल नेटवर्क का सक्रिय हिस्सा बनकर भोपाल जंक्शन का भार कम करने के साथ क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगा।

  • सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    सेमिकॉन 2.0 से लेकर वाराणसी एलिवेटेड कॉरिडोर तक, केंद्रीय कैबिनेट ने विकास की रफ्तार बढ़ाने वाले छह बड़े फैसलों को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, रेल नेटवर्क, उर्वरक उत्पादन और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। इन निर्णयों का उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना और भारत को रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी लाना है। कैबिनेट के फैसलों में वाराणसी के लिए नई आधारभूत परियोजनाएं, सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा चरण, मोबाइल निर्माण प्रोत्साहन योजना, रेलवे विस्तार और यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने जैसी प्रमुख घोषणाएं शामिल हैं।

    मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और आने वाले वर्षों में देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से बड़े निवेश और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।

    मोबाइल विनिर्माण को गति देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण क्षमता का विस्तार करना, निर्यात बढ़ाना, घरेलू ब्रांडों को प्रोत्साहित करना और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    वाराणसी में बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों और रिंग रोड को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात दबाव कम करना, आवागमन को तेज बनाना और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।

    उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।

    रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा भीड़भाड़ कम होने के साथ समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन सभी फैसलों से औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, परिवहन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।

  • जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

    बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

    मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है।

    सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।