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  • अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक- उप मुख्यमंत्री शुक्ल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि अधोसंरचना विकास के साथ शिक्षा में गुणात्मक विकास आवश्यक है। रीवा में शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार को बेहतर बनाने के सभी प्रयास जारी हैं। हमारा प्रयास है कि गुणात्मक शिक्षा व बेहतर इलाज की सभी व्यवस्थायें रहें ताकि यहां के लोगों को उच्च शिक्षा व इलाज के लिये बाहर न जाना पड़े।

    उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रविवार को यह विचार ीवा में लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा भवन के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने संभाग को आदर्श संभाग बनायें। महाविद्यालय के प्राचार्यों का दायित्व है कि वह अपने महाविद्यालय में नवीन पाठ¬क्रम संचालन के लिये प्रयासरत रहें तथा प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ जीवंत संबंध बनायें रखें।

    उन्होंने कहा कि अच्छा प्रशासक वही है जो जमीनी फीड बैक लेकर कार्य करे। यह भवन उच्च स्तरीय सुविधाओं से युक्त है। जब कार्यालय अच्छा होता है तो कार्य करने की इच्छा भी बढ़ जाती है। इस कार्यालय भवन के द्वारा संभाग के सभी महाविद्यालयों के विकास व उच्च शिक्षा के गुणात्मक सुधार के सभी प्रयास तत्परता से होंगे।

    अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ. आर.पी. सिंह ने बताया कि लगभग 3 करोड़ रूपये से निर्मित भवन में सभी सुविधाएँ हैं। यहां से शासकीय, अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों पर नियंत्रण होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विधि विधान से पूजन अर्चन कर भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर आयुक्त रीवा संभाग बीएस जामोद, अध्यक्ष नगर निगम व्यंकटेश पाण्डेय सहित महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित रहे।

  • श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश

    श्रद्धालुओं को नहीं होगी कोई परेशानी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घाट निर्माण कार्यों की समीक्षा कर दिए अहम निर्देश


    भोपाल । मध्यप्रदेश में आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों को लेकर सरकार ने अब जमीनी स्तर पर काम तेज कर दिया है इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उज्जैन पहुंचकर क्षिप्रा नदी पर निर्माणाधीन घाटों का निरीक्षण किया और स्पष्ट रूप से कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी उनका यह दौरा न केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए था बल्कि अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने का संदेश भी था

    मुख्यमंत्री ने श्री अंगारेश्वर और श्री सिद्धवट के मध्य बन रहे नए घाटों का अवलोकन करते हुए वहां की व्यवस्थाओं को विस्तार से परखा उन्होंने निर्देश दिए कि घाटों के लगभग 200 मीटर क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने की समुचित व्यवस्था की जाए साथ ही सुविधाजनक स्थानों पर स्वच्छ और पर्याप्त संख्या में टॉयलेट भी बनाए जाएं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रमुख घाटों पर हर 200 मीटर की दूरी पर सुविधा घर विकसित करने के निर्देश दिए जिससे स्नान करने आए श्रद्धालुओं को आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें उन्होंने यह भी कहा कि घाटों तक पहुंचने के रास्ते सुगम और सुरक्षित होने चाहिए इसके लिए लगभग 500 मीटर की दूरी पर सीढ़ियों या अन्य पहुंच मार्गों का निर्माण सुनिश्चित किया जाए ताकि श्रद्धालु आसानी से मुख्य घाटों तक पहुंच सकें

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री सिद्धवट और श्री अंगारेश्वर मंदिर के बीच निर्माणाधीन पुल का भी जायजा लिया अधिकारियों ने उन्हें जानकारी दी कि इस पुल के बन जाने से दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच आवागमन और अधिक सुगम हो जाएगा और श्रद्धालुओं को एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध होगा इससे भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी और आवागमन व्यवस्थित रहेगा

    घाटों के निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि स्नान के लिए लगभग 5 मीटर चौड़े घाट तैयार किए जाएं जिससे श्रद्धालुओं के आने जाने के साथ बैठने की भी पर्याप्त सुविधा मिल सके उन्होंने घाटों पर बैठने की व्यवस्था छायादार स्थान और अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित करने के भी निर्देश दिए

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का यह निरीक्षण यह दर्शाता है कि सरकार सिंहस्थ 2028 को लेकर पूरी तरह गंभीर है और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं यह पहल न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने वाली साबित होगी

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर

    जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर


    नई दिल्ली:देश में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सरकार केवल पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अब फोकस पानी की निरंतर सप्लाई और उसके बेहतर रखरखाव पर किया जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से ऑपरेशन और मेंटेनेंस यानी ओएंडएम सेक्टर में करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं

    रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही मिशन को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेवाएं भी देनी होंगी

    इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर भुगतान व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अभी कई राज्यों में कंपनियों को भुगतान मिलने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन सरकार ने इसे सुधारते हुए सितंबर 2026 तक भुगतान अवधि को घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इससे सेक्टर में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी

    सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन देने की समयसीमा को भी 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय गुणवत्ता और स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाए

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन से पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली संगठित कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ऊर्जा दक्ष समाधान हैं, वे इस बदलाव का ज्यादा फायदा उठा पाएंगी

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। इसी कारण अब सरकार टिकाऊ और प्रभावी सेवा देने वाले मॉडल पर जोर दे रही है

    गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना था। अब तक इस योजना के तहत नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है

    फिर भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और नियमित सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस योजना को अपग्रेड कर सेवा आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया है

    जल जीवन मिशन 2.0 के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म के जरिए पानी की सप्लाई और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल आपूर्ति को एक स्थायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके

    यह बदलाव न केवल देश के जल प्रबंधन सिस्टम को मजबूत करेगा, बल्कि उद्योगों और कंपनियों के लिए भी एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में सामने आ रहा है
  • राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र

    राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।

    सीतारमण का पलटवार: कांग्रेस ने भारत को बेचा
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत को बेचने का असली जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने याद दिलाया कि बाली में जाकर कांग्रेस ने सौदा किया था और किसानों के हक से समझौता किया। मोदी सरकार ने 2014 में विश्व व्यापार संगठन में जाकर इसे सुधारा।

    सीतारमण ने बजट पर सवाल उठाने वाले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के GST आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि बंगाल में पेट्रोल दिल्ली से 10रुपए ज्यादा महंगा है, जिसे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों में आर्थिक विकास सबसे नीचे है और वहां उद्योग नहीं टिकते।

    राहुल के अडाणी और अमेरिका केस वाले आरोप
    राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया और कहा कि यह मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल से सबूत पेश करने को कहा और संसद में विशेषाधिकार नोटिस देने की बात कही।

    सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और MSME के लिए सहायक नीतियों पर है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाया गया है।

    ओवैसी ने तेल और विदेश नीति पर सवाल उठाया
    एआईएमआईएमके असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी “गोरी चमड़ी वाले” को यह तय करने का अधिकार नहीं कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने ऑपरेशन इंसाफ, हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी को भारत लाने की मांग भी की।

  • स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिया प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश

    स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने दिया प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन का निर्देश


    भोपाल : उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    बैठक में अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक और चिकित्सकीय मैनपावर की नियुक्ति, स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन से जुड़े प्रस्तावों की गहन समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने और रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने हेतु अतिरिक्त इंसेंटिव प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन के लिए शीघ्र भेजने के निर्देश दिए उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में योग्य शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर औपचारिकताओं की पूर्ति प्राथमिकता से करने का निर्देश भी दिया गया ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में विलंब न हो।

    सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरण और आवश्यक मैनपावर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रस्तावों को प्राथमिकता से अग्रेषित करने के निर्देश भी उप मुख्यमंत्री ने दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के उपचार हेतु टर्शरी केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के हर क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।

    उप मुख्यमंत्री ने दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और आगामी शैक्षणिक सत्र में संचालन शुरू करने के लिए प्राथमिकता से सभी औपचारिकताओं को पूरा करने का निर्देश भी दिया। बैठक में केंद्रीय बजट प्रावधानों और उपलब्ध संसाधनों के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग पर भी चर्चा हुई।बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराज एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल श्री मयंक अग्रवाल, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • डबल इंजन सरकार से तेज हुआ विकास का पहिया पीएमजी और प्रगति से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    डबल इंजन सरकार से तेज हुआ विकास का पहिया पीएमजी और प्रगति से अटकी परियोजनाओं को मिली रफ्तार -मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व तथा केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार के प्रभावी समन्वय के कारण आज देश में बुनियादी ढांचा विकास को अभूतपूर्व गति मिली है। प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन यानी प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत से वर्षों से अटकी हुई निवेश और विकास परियोजनाएं फिर से सक्रिय हुई हैं। इन संस्थागत व्यवस्थाओं ने केंद्र और राज्य के सभी हितग्राहियों को एक मंच पर लाकर निर्णय प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और डबल इंजन सरकार के समन्वय से पीएमजी की उपलब्धियों को मीडिया प्रतिनिधियों के साथ साझा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने प्रगति प्लेटफॉर्म पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के माध्यम से कुल 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली है। इनमें से 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ रुपये के निवेश वाली 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 101 परियोजनाएं वर्तमान में क्रियान्वयन के चरण में हैं। केंद्रीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने 97 प्रतिशत की उल्लेखनीय सफलता हासिल की है, जो प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता और समन्वय का प्रमाण है।इन परियोजनाओं में रेल मंत्रालय की 14, सड़क परिवहन मंत्रालय की 13, विद्युत मंत्रालय की 5 तथा नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्वास इसका उदाहरण है। वहीं धार में विकसित हो रहा पीएम मित्र पार्क कपास उत्पादक किसानों के लिए नए अवसर लेकर आएगा।

    डॉ. यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच परस्पर समन्वय ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है। जब विभाग आपसी सहयोग से काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शासन व्यवस्था को केवल प्रक्रियात्मक न रखकर परिणाम आधारित और जवाबदेह बनाया है, जहां हर परियोजना की प्रगति, बाधा और समाधान की सीधी निगरानी सुनिश्चित होती है। पहले बड़ी योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती थीं, लेकिन पीएमजी और प्रगति पोर्टल ने पुरानी प्रणाली को जड़ से बदल दिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब देश में विकास के साथ आवश्यकताओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। पीएम प्रगति और प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के माध्यम से मध्यप्रदेश में ऐसा ईको-सिस्टम विकसित हुआ है, जहां आधुनिक तकनीक के सहारे अधोसंरचना परियोजनाएं समय पर पूरी हो रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने समय, लागत और विश्वास – तीनों स्तरों पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।उन्होंने कहा कि भले ही राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन राष्ट्र के विकास के लिए सभी राज्यों का समान महत्व है। प्रगति पोर्टल के माध्यम से भू-गर्भ संपदा का दोहन अब देशहित में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर पूर्व में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था, लेकिन अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में तीन नदी परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है।

    रेलवे क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 285 किलोमीटर लंबी जबलपुर–गोंदिया गेज परिवर्तन परियोजना से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सीधा और उच्च क्षमता वाला रेल संपर्क स्थापित हुआ है। इससे जबलपुर, बालाघाट, मंडला और सिवनी जिलों की कनेक्टिविटी नागपुर, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों से बढ़ी है। इसके अलावा 18.5 हजार करोड़ रुपये लागत की इंदौर–मनमाड़ रेल लाइन परियोजना से उज्जैन सहित पूरे मालवा क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा।मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने बताया कि प्रगति प्लेटफॉर्म की शुरुआत 25 मार्च 2015 को हुई थी। इसकी 50वीं बैठक 31 दिसंबर 2025 को सम्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि पीएमजी और प्रगति पोर्टल की अभिनव पहल से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नागरिक शिकायतों का तेजी से समाधान संभव हुआ है। डिजिटल और जवाबदेही आधारित इस मंच ने “नीति नहीं निष्पादन, घोषणा नहीं डिलीवरी और समीक्षा नहीं समाधान” की भावना को साकार किया है।

    उन्होंने बताया कि पीएमजी पोर्टल पर निगरानी में चल रही 209 परियोजनाओं से जुड़े 322 मुद्दों में से 312 का समाधान राज्य सरकार ने किया है, जबकि प्रगति पोर्टल पर सामने आए 124 मुद्दों में से 120 का निराकरण किया गया है। भूमि अधिग्रहण के मामलों में भी मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नए मानक स्थापित किए हैं।मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क, रेलवे और विद्युत परियोजनाओं के कारण मध्यप्रदेश ऊर्जा और परिवहन केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश में 77 सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं पर कार्य जारी है, जो देश की समग्र प्रगति को गति दे रही हैं।

  • उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा

    उज्जैन सिंहस्थ 2028: मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 20 हजार करोड़ का विशेष पैकेज मांगा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए अधोसंरचना का विकास होगा


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने आगामी 2028 के सिंहस्थ महाकुंभ के लिए केंद्र सरकार से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मांगा है। इस मांग को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ शनिवार को नई दिल्ली में हुई एक बैठक में उठाया गया। बैठक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों की प्री-बजट मीटिंग का हिस्सा थी, जिसमें मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मुद्दे को केंद्र के सामने रखा।सिंहस्थ महाकुंभ, जो हर 12 साल में उज्जैन में आयोजित होता है, में लगभग 50 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
    ऐसे में श्रद्धालुओं के सुचारु दर्शन और अन्य सुविधाओं के लिए राज्य सरकार ने कई अहम योजनाओं पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें प्रमुख रूप से सड़कें, पुल-पुलिया, क्षिप्रा नदी पर पक्के घाट, ठहरने के स्थल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि केंद्र से 20 हजार करोड़ रुपये का विशेष पैकेज मिलने से इन कार्यों को तेज़ी से और बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि सिंहस्थ महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    4500 करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेने की संभावना

    मध्यप्रदेश सरकार ने यह भी जानकारी दी कि 15वें वित्त आयोग द्वारा राज्य का जीएसडीपी 16.94 लाख करोड़ रुपये के रूप में आंका गया है, जबकि केंद्र सरकार इसे 15.44 लाख करोड़ रुपये मानती है। यदि राज्य सरकार के आंकड़ों को माना जाता है, तो मध्य प्रदेश को अतिरिक्त 4500 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने का अवसर मिल सकता है, जिसका उपयोग राज्य के विकास कार्यों में किया जाएगा।

    अधोसंरचना के विकास के लिए केंद्र से मिलने वाली सहायता से न केवल सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन में मदद मिलेगी, बल्कि प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे का विकास संभव होगा। उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर सरकार की योजना काफी विस्तृत है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि इस ऐतिहासिक आयोजन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिलें।

  • Russia-Ukraine War: दोनों देशों ने खोए हजारों सैनिक और नागरिक, अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट

    Russia-Ukraine War: दोनों देशों ने खोए हजारों सैनिक और नागरिक, अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट


    मास्को।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग (Russia Ukraine War) के कुछ ही हफ्तों में 4 साल पूरे हो जाएंगे। इन सालों में दोनों देशों ने अपने हजारों सैनिकों और नागरिकों को खो दिया है। वहीं अरबों डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट (Billions dollars worth Infrastructure destroyed) हो चुके हैं। अब इस युद्ध को लेकर विशेषज्ञों ने रूस को आगाह किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक रूस को यूक्रेन पर हमले की भारी आर्थिक कीमत चुकानी होगी। यह भी कहा गया है कि भले ही युद्ध आज ही खत्म क्यों न हो जाए, रूस को इससे उबरने में कई साल लग जाएंगे।

    विश्लेषकों ने कहा है कि बढ़ते सैन्य खर्च और घटती आमदनी की वजह से पुतिन की सरकार की कर्ज पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। बुधवार को रूसी सरकार ने करीब बॉन्ड बेचकर करीब 108.9 अरब रूबल का कर्ज लिया। इसके साथ ही 2025 में अब तक कुल कर्ज जारी करने का आंकड़ा 7.9 ट्रिलियन रूबल पहुंच गया है।


    रूस के पास नहीं बचे विकल्प

    वहीं कर्ज लेने के रूस के पास बॉन्ड बेचने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। देश का रेनिडे रिजर्व यानी आपातकालीन बचत का आधे से ज्यादा हिस्सा खत्म हो चुका है। वहीं बजट घाटा भी बढ़ गया है। इसकी बड़ी वजह सैन्य खर्च में 30 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी है। वहीं अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तेल और गैस जैसी कमोडिटी से होने वाली कमाई में भी गिरावट आई है।

    आने वाले सालों में रूस के सामने कई मुसीबतें हैं। तेल की कीमतें बढ़ने, रूबल के मजबूत होने, आर्थिक ग्रोथ अनुमान से कम रहने और सैन्य खर्च बढ़ने की वजह से रूस की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। अगर ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं और तेल-गैस से कमाई घटी, तो रूस के सामने तीन ही रास्ते होंगे। या तो टैक्स बढ़ाए जाएं, या दूसरे जरूरी खर्चों में कटौती हो, या फिर और ज्यादा कर्ज लिया जाए।