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  • इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने से तेज हुईं चर्चाएं, प्रिंस नरूला और युविका चौधरी के रिश्ते पर उठे सवाल, आधिकारिक बयान का इंतजार

    नई दिल्ली । टेलीविजन जगत के चर्चित दंपति प्रिंस नरूला और युविका चौधरी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार चर्चा उनके किसी नए प्रोजेक्ट या सार्वजनिक बयान को लेकर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर हुई एक गतिविधि को लेकर शुरू हुई है। दोनों के इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो करने की जानकारी सामने आने के बाद उनके रिश्ते को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अब तक इस विषय पर दोनों कलाकारों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर सक्रिय प्रशंसकों ने सबसे पहले यह बदलाव नोटिस किया कि दोनों अब एक-दूसरे की प्रोफाइल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। इसके बाद कई प्लेटफॉर्म पर उनके वैवाहिक संबंधों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे रिश्ते में दूरी का संकेत बताया, जबकि कई अन्य लोगों ने बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दी।

    दिलचस्प बात यह है कि इंस्टाग्राम पर अनफॉलो किए जाने के बावजूद कुछ संकेत ऐसे भी हैं जो अलग तस्वीर पेश करते हैं। प्रिंस नरूला की प्रोफाइल पर अब भी उनके नाम के साथ युविका का नाम जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा दोनों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक-दूसरे के साथ साझा की गई पुरानी तस्वीरें या यादगार पोस्ट हटाई नहीं हैं। यही वजह है कि कई प्रशंसकों का मानना है कि यह केवल सोशल मीडिया से जुड़ा बदलाव भी हो सकता है।

    प्रिंस नरूला और युविका चौधरी की प्रेम कहानी टेलीविजन के लोकप्रिय रियलिटी शो के दौरान शुरू हुई थी। शो में हुई दोस्ती समय के साथ गहरे रिश्ते में बदली और दोनों ने कई वर्षों तक एक-दूसरे को डेट करने के बाद वर्ष 2018 में विवाह किया। शादी के बाद यह जोड़ी मनोरंजन जगत की चर्चित जोड़ियों में शामिल रही और सोशल मीडिया पर भी दोनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही।

    वर्ष 2024 में दोनों ने अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करते हुए बेटी का स्वागत किया। शुरुआत में उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन बाद में एक विशेष अवसर पर अपनी बेटी की पहली झलक प्रशंसकों के साथ साझा की थी। इसके बाद से परिवार से जुड़ी उनकी तस्वीरों और वीडियो को भी दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा।

    यह पहला अवसर नहीं है जब इस दंपति के रिश्ते को लेकर चर्चाएं सामने आई हों। इससे पहले भी युविका की गर्भावस्था के दौरान उनके अलग रहने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। बाद में युविका ने स्पष्ट किया था कि वह स्वास्थ्य संबंधी सुविधा और घर में चल रहे काम के कारण कुछ समय अपनी मां के घर रह रही थीं। उस स्पष्टीकरण के बाद उन अफवाहों पर विराम लग गया था।

    फिलहाल इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो किए जाने के आधार पर उनके रिश्ते को लेकर किसी भी प्रकार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी माना जा रहा है। जब तक प्रिंस नरूला या युविका चौधरी स्वयं इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं करते, तब तक सामने आ रही चर्चाओं को केवल अटकलों के रूप में ही देखा जा सकता है। प्रशंसकों की नजर अब दोनों की संभावित प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    इंस्टाग्राम पर नाबालिग छात्राओं को जाल में फंसाने का आरोप, अश्लील चैट और वीडियो भेजकर बनाता था दबाव, POCSO के तहत मामला दर्ज

    मध्य प्रदेश: के इंदौर में सोशल मीडिया के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम के माध्यम से दो नाबालिग छात्राओं से कथित रूप से दोस्ती कर उन्हें अश्लील संदेश और वीडियो भेजने तथा मिलने के लिए दबाव बनाने के आरोप में एक 25 वर्षीय युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध POCSO एक्ट सहित विभिन्न प्रासंगिक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए दोनों छात्राओं से संपर्क स्थापित किया। पहले सामान्य बातचीत के माध्यम से विश्वास जीतने का प्रयास किया गया और बाद में कथित रूप से आपत्तिजनक चैट, अश्लील वीडियो और अनुचित संदेश भेजे जाने लगे। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने छात्राओं पर व्यक्तिगत रूप से मिलने और शारीरिक संबंध बनाने का दबाव भी बनाया।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्राओं के परिजनों ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट की चैट देखी। बातचीत की सामग्री संदिग्ध लगने पर परिजनों ने तत्काल पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया और आरोपी के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर में रह रहा था और पढ़ाई के सिलसिले में अलग-अलग स्थानों पर किराये के मकानों में रह चुका है। जांच के दौरान उसके मोबाइल फोन की प्राथमिक पड़ताल में अन्य युवतियों से जुड़ी वीडियो चैट और तस्वीरें भी मिलने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं इसी तरह की गतिविधियों का दायरा अन्य लोगों तक भी तो नहीं फैला हुआ था।

    जांच एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल संचार के अन्य माध्यमों की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी ने कितने लोगों से संपर्क किया था और क्या उसने किसी अन्य नाबालिग को भी इसी प्रकार निशाना बनाने की कोशिश की थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। नाबालिगों को डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना और अभिभावकों द्वारा उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर संतुलित निगरानी रखना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गई है।

    साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच पुलिस भी लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रही है। किसी भी संदिग्ध प्रोफाइल, आपत्तिजनक संदेश, ब्लैकमेल या दबाव बनाने जैसी स्थिति सामने आने पर तत्काल पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज को भी मिलकर बच्चों को ऑनलाइन जोखिमों के प्रति जागरूक करना होगा। तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग और समय पर सतर्कता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों को रोकने में सबसे प्रभावी उपाय साबित हो सकती है।

  • 'न नाम बदला, न धर्म अपनाया'… Urfi Javed ने वायरल दावों की खोली पोल, फेक खबर फैलाने वालों को सुनाई खरी-खरी

    'न नाम बदला, न धर्म अपनाया'… Urfi Javed ने वायरल दावों की खोली पोल, फेक खबर फैलाने वालों को सुनाई खरी-खरी

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अभिनेत्री उर्फी जावेद के नाम और धर्म परिवर्तन को लेकर वायरल हो रहे दावों पर अब खुद अभिनेत्री ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। एक महिला द्वारा साझा किए गए वीडियो में दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना नाम बदलकर ‘रीता भारद्वाज’ रख लिया है और उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया है। यह वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर फैलने लगा, जिसके बाद अभिनेत्री ने पूरे मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया।

    उर्फी जावेद ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से वायरल वीडियो का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने न तो अपना नाम बदला है और न ही किसी धर्म को अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सोशल मीडिया पर उनके बारे में फैलाई जा रही जानकारी पूरी तरह झूठी है और लोगों को बिना तथ्यों की पुष्टि किए ऐसी बातें साझा नहीं करनी चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि उनके बारे में गलत सूचनाएं फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

    अभिनेत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी दोहराया कि वह पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि वह किसी विशेष धर्म में विश्वास नहीं रखती हैं। उनके अनुसार उनकी निजी सोच और जीवनशैली को लेकर पहले भी कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन इस बार नाम और धर्म परिवर्तन जैसा दावा पूरी तरह मनगढ़ंत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की झूठी खबरें न केवल किसी व्यक्ति की छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में भ्रम भी पैदा करती हैं।

    उर्फी जावेद ने वीडियो बनाने वाली महिला की पत्रकारिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की जानकारी सार्वजनिक करने से पहले तथ्यों की जांच करना आवश्यक होता है। बिना पुष्टि के किसी व्यक्ति के बारे में गलत जानकारी प्रसारित करना जिम्मेदार पत्रकारिता नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आलोचना करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन झूठी बातें फैलाना उचित नहीं है।

    अभिनेत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि इंटरनेट पर उनके बारे में पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध है और कोई भी व्यक्ति आसानी से यह पता लगा सकता है कि उनके नाम या पहचान में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर जानकारी को सच मानने के बजाय उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

    उर्फी जावेद अपने अलग फैशन सेंस और बेबाक बयानों के कारण अक्सर चर्चा में रहती हैं। यही वजह है कि उनके नाम से जुड़ी छोटी-बड़ी खबरें भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाती हैं। हालांकि, इस बार अभिनेत्री ने खुद सामने आकर यह साफ कर दिया कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी सभी बातें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं।

    वर्क फ्रंट की बात करें तो उर्फी जावेद हाल के समय में रियलिटी शो और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार सक्रिय रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक लोकप्रिय रियलिटी शो में विशेष भूमिका निभाई थी और कई मनोरंजन कार्यक्रमों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत उपस्थिति के कारण वह अक्सर ट्रेंडिंग विषयों का हिस्सा बनी रहती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने साफ कर दिया कि उनकी पहचान और निजी जीवन को लेकर फैलाए जा रहे दावे वास्तविकता से बिल्कुल अलग हैं।

  • इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स

    इंस्टाग्राम पर स्टार पावर: जानिए किन भारतीय एक्टर्स के हैं सबसे ज्यादा फॉलोअर्स


    नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सेलेब्स और फैंस के बीच दूरी लगभग खत्म हो चुकी है। फिल्मों के अलावा इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने स्टार्स को सीधे अपने दर्शकों से जोड़ दिया है। पहले जहां फैंस अपने पसंदीदा सितारों से पत्रों और मैगजीन इंटरव्यू के जरिए जुड़ते थे, वहीं अब एक क्लिक पर उनकी जिंदगी की हर अपडेट सामने आ जाती है।

    इंस्टाग्राम पर भारत के सेलेब्स की लोकप्रियता का अंदाजा उनकी फॉलोइंग से लगाया जाता है। हाल ही में सामने आई लिस्ट के अनुसार बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर इस रेस में सबसे आगे निकल गई हैं। 93 मिलियन फॉलोअर्स के साथ श्रद्धा कपूर नंबर 1 पोजिशन पर बनी हुई हैं, जबकि वे इंस्टाग्राम पर केवल 790 अकाउंट्स को फॉलो करती हैं।

    दूसरे स्थान पर ग्लोबल आइकन बन चुकीं प्रियंका चोपड़ा हैं, जिनके करीब 92.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं। प्रियंका न सिर्फ बॉलीवुड बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी मजबूत पहचान बना चुकी हैं। वे इंस्टाग्राम पर 639 लोगों को फॉलो करती हैं।

    तीसरे स्थान पर आलिया भट्ट हैं, जिनकी फैन फॉलोइंग 85.5 मिलियन तक पहुंच चुकी है। आलिया इन दिनों अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स और नए प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में हैं।

    चौथे नंबर पर दीपिका पादुकोण हैं जिनके 78.8 मिलियन फॉलोअर्स हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी दूसरी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया है और वे शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘किंग’ में नजर आने वाली हैं।

    पांचवें स्थान पर कैटरीना कैफ हैं जिनके 78.6 मिलियन फॉलोअर्स हैं। इसके बाद छठे नंबर पर सलमान खान हैं जिनकी फैन फॉलोइंग 71.7 मिलियन है।

    सातवें स्थान पर उर्वशी रौतेला हैं जिनके 68.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं, जबकि आठवें नंबर पर जैकलीन फर्नांडीस हैं जिनके 68.7 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    नौवें स्थान पर अनुष्का शर्मा हैं, जो लंबे समय से फिल्मों से दूर होने के बावजूद 67.5 मिलियन फॉलोअर्स के साथ मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

    दसवें स्थान पर खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार हैं जिनके 65.3 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

    यह लिस्ट साफ दिखाती है कि सोशल मीडिया पर स्टार पावर अब भी उतनी ही मजबूत है और फैंस अपने पसंदीदा सितारों से डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार जुड़े रहना पसंद करते हैं। 

  • मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर

    मेटा का हाईकोर्ट में बयान: इंस्टाग्राम डेटा केवल सरकार के साथ साझा, यूजर्स की निजता पर जोर


    नई दिल्ली। Meta Platforms ने अदालत को बताया कि इंस्टाग्राम की एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा जारी रहेगी। कंपनी ने स्पष्ट किया कि पॉलिसी में बदलाव केवल इतना है कि यदि किसी आपराधिक जांच या कानूनी प्रक्रिया के तहत सरकार जानकारी मांगेगी, तभी डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि किसी भी तीसरे पक्ष को यूजर्स का डेटा नहीं दिया जाएगा, जिससे निजता का संरक्षण सुनिश्चित रहेगा।

    इंस्टाग्राम की नई नीति पर विवाद
    Instagram की ओर से 8 मई से एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवा में बदलाव की सूचना दी गई थी, जिसके बाद इसे लेकर याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह बदलाव यूजर्स की प्राइवेसी के अधिकार का उल्लंघन कर सकता है।

    कपिल सिब्बल ने दी नीति की कानूनी व्याख्या
    वरिष्ठ अधिवक्ता Kapil Sibal ने अदालत में कहा कि कंपनी पूरी तरह कानून के दायरे में काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम या आपराधिक मामलों की जांच के तहत ही सरकार को डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह की निजी जानकारी सार्वजनिक या तीसरे पक्ष को साझा नहीं की जाएगी।

    डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड पर उठे सवाल
    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम के तहत बनाए गए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया में अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इसी वजह से शिकायत सीधे अदालत में दायर करनी पड़ी।

    कोर्ट का रुख और आगे की प्रक्रिया
    अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta Platforms से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई में कंपनी की नीति और स्पष्ट हो सकती है।

  • लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़

    लोगों को खूब भा रहा PM मोदी का झालमुड़ी वीडियो….इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ और फेसबुक पर 9 करोड़ व्यूज़


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में चार जनसभाओं के बीच झालमुड़ी (Jhalmuri) की एक दुकान पर जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर धूम मचा रहा है। इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर इसे 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि “झालमुड़ी” के लिए गूगल सर्च पिछले 22 वर्षों में सबसे अधिक है। पीएम मोदी रविवार को पश्चिम बंगाल में अपने चुनाव प्रचार दौरे के दौरान अचानक रुके और झाड़ग्राम में लोकप्रिय बंगाली स्ट्रीट फूड झालमुड़ी का स्वाद लिया। झालमुड़ी मुरमुरे, हरी मिर्च और अन्य मसालों से बनाया जाती है।

    एक सूत्र ने बताया, ”प्रधानमंत्री मोदी के पश्चिम बंगाल में झालमुड़ी की एक दुकान पर जाने के वीडियो को इंस्टाग्राम पर 24 घंटे के भीतर 10 करोड़ बार और फेसबुक पर लगभग नौ करोड़ बार देखा गया।” मोदी ने झालमुड़ी का स्वाद लिया और बाद में उसकी तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर तीन पोस्ट किये जिसमें उन्होंने अपने दौरे का एक वीडियो भी पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ”एक व्यस्त रविवार को पश्चिम बंगाल में चार सार्वजनिक सभाओं के बीच, मैंने झाड़ग्राम में स्वादिष्ट मसालेदार मुरमुरे (झालमुड़ी) का आनंद लिया।”


    ममता बोलीं- ये नौटंकी था

    दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि झाड़ग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अचानक “झालमुरी” खरीदने के लिए रुकना सिर्फ एक “नौटंकी” था। बीरभूम जिले के मुरारई विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, “चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक झालमुरी खरीदने के लिए रुके थे, तो उस समय वहां कैमरे कैसे मौजूद थे?” उन्होंने कहा कि ये पूरा घटनाक्रम पहले से तय था।


    पीएम ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था

    प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह झाड़ग्राम की एक साधारण-सी दुकान से ‘झालमुरी’ खरीदते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी भी साथ थे। वीडियो में देखा जा सकता है कि मोदी ‘झालमुरी’ के लिए दुकानदार को भुगतान करते हैं और जब ​​दुकानदार रुपये लेने से इनकार करता है, तो वह जोर देकर कहते हैं कि उसे रुपये स्वीकार करने चाहिए। पूरे घटनाक्रम की सहजता पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, “वहां कैमरे पहले से ही लगा दिए गए थे। एसपीजी (प्रधानमंत्री को निकट सुरक्षा प्रदान करने वाला बल) ने पूरी व्यवस्था की थी।”


    जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था

    उन्होंने दावा किया, “प्रधानमंत्री को अपनी जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था। क्या यह विश्वास करने लायक है? यह सब नौटंकी है।” ममता ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर “विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय से निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में कुछ गद्दारों की गुप्त रूप से मदद करने” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मेरे इलाके भाबानीपुर में भी ऐसा ही हुआ है। वे मुर्शिदाबाद और मालदा से आए हैं।” ममता ने कहा, “उन्होंने (भाजपा नेताओं) धर्म का व्यवसायीकरण कर दिया है। मैं मानवता का सम्मान करती हूं। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती हूं। मैं हर धर्म, जाति, पंथ और भाषा का सम्मान करती हूं। लेकिन जिन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है, हमारी पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें जनता अस्वीकार कर देगी।”

  • कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह

    कनाडा में पंजाबी यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की बेरहमी से हत्या, मां ने खालिस्तानियों पर लगाया आरोप, विवादित टिप्पणियां बनीं वजह



    नई दिल्ली। कनाडा में पंजाबी मूल की यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल (45) की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना मंगलवार रात साढ़े 9 बजे विंडसर इलाके में हुई, जब हमलावर उसके घर में घुसे और उसे घर के भीतर ही कई बार चाकू मारे। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नैन्सी का जन्म हरियाणा में हुआ था और बाद में उनका परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया। उनकी मां जालंधर में रहती हैं।

    नैन्सी ग्रेवाल अपने यूट्यूब वीडियो के लिए विवादित रही हैं। वह खुलकर खालिस्तानियों, अकाल तख्त जत्थेदार और डेरा ब्यास मुखी की आलोचना करती थीं। हत्या से पहले नैन्सी ने इंस्टाग्राम पर अकाल तख्त जत्थेदार और डेरे के मुखी पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने धार्मिक नेताओं की गतिविधियों पर सवाल उठाए थे।

    कनाडा पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद रात में टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अस्पताल में नैन्सी ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने नैन्सी के घर और आसपास का क्षेत्र सील कर सबूत जुटाए। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और किसी के पास जानकारी होने पर डिटेक्टिव सार्जेंट जेमी नेस्टर से संपर्क करने को कहा है।

    नैन्सी की मां छिंदरपाल कौर ने कहा कि बेटी पहले भी कई बार धमकी और हमले का शिकार हो चुकी थी। पिछले हमले में घर में आग लगाई गई थी, जिससे नैन्सी बच गई थी। इस बार हमलावरों ने उसकी रेकी कर बेरहमी से कत्ल किया। मां ने आरोप लगाया कि इसमें 3-4 लोग शामिल थे और उन्होंने उनके नाम नोट कर लिए हैं। छिंदरपाल ने कनाडा पुलिस से अपील की है कि आरोपी को गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाए।

    नैन्सी पेशे से नर्स थीं और दो कंपनियों में काम करती थीं। वह गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करती थीं। उनके परिवार ने बताया कि बेटी ने हमेशा सच के रास्ते पर चलने की सीख दी।

    पुलिस के अनुसार हत्या की घटना की गंभीर जांच की जा रही है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के लिए सीसीटीवी फुटेज और आसपास के सबूत जुटाए जा रहे हैं। नैन्सी ग्रेवाल के परिवार ने न्याय की उम्मीद जताई है और बताया कि उनका यह कट्टर विरोध और निर्भीक व्यक्तित्व कई लोगों को परेशान करता था।

    नैन्सी की हत्या ने कनाडा और पंजाब की समाज में सनसनी मचा दी है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक और भारतीय समुदाय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और जिम्मेदारों को कानून के तहत सजा दिलाने की मांग की है।

  • 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..

    16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन, आंध्र प्रदेश में प्रस्ताव पर चर्चा..


    नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य के आईटी मंत्री नारा लोकेश ने स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान बताया कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा एक निश्चित उम्र से कम के बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स पर नहीं होना चाहिए। वे यह नहीं समझ पाते कि किस तरह का कंटेंट उनके संपर्क में आ रहा है। ऐसे में मजबूत कानूनी ढांचे की जरूरत है।

    सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया के अंडर-16 सोशल मीडिया कानून से प्रेरित है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले महीने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए TikTok X (ट्विटर) फेसबुक इंस्टाग्राम यूट्यूब और स्नैपचैट जैसी प्रमुख सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध लगाया था। इस कानून के तहत न तो बच्चे नए अकाउंट बना सकते हैं और न ही पुराने अकाउंट चालू रख सकते हैं। आंध्र प्रदेश सरकार इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है। यदि यह लागू होता है तो यह भारत का पहला राज्य होगा जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर कानूनी पाबंदी लगाएगा।

    तेलुगु देशम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक रेड्डी ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पिछली सरकार के दौरान सोशल मीडिया का दुरुपयोग हुआ था और विशेषकर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक हमले किए गए। उन्होंने कहा कम उम्र के बच्चे भावनात्मक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे ऑनलाइन नकारात्मक और नुकसानदायक कंटेंट को समझ सकें। इसलिए सरकार दुनिया के बेहतरीन उदाहरणों का अध्ययन कर रही है।दीपक रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कदम को सेंसरशिप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य केवल बच्चों को जहरीले कंटेंट ऑनलाइन नफरत और मानसिक नुकसान से बचाना है।

    आंध्र प्रदेश सरकार फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार और अध्ययन के चरण में है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम ऐतिहासिक साबित हो सकता है। अगर इसे लागू किया गया तो राज्य के छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह नियंत्रित होगा और उन्हें मानसिक एवं भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखा जा सकेगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरे से बचाने और उनके स्वस्थ मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बच्चों की सुरक्षा के लिए डिजिटल युग में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है।

  • लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    लड़की बनकर लड़के से इंस्टाग्राम पर चैट, रोमांस के नाम पर अपहरण

    मुंबई। महाराष्ट्र के ठाणे में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए 15 वर्षीय लड़के के अपहरण का मामला सामने आया है।
    आरोपियों ने सबसे पहले लड़की बनकर लड़के के साथ भावनात्मक संबंधों को मजबूत किया फिर उसे रोमेंटिक संबंध बनाने के लिए एक जगह पर बुलाया, जहां पर उसका अपहरण करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस मामले की जानकारी जल्दी ही पुलिस के पास पहुंच गई, जिससे पुलिस ने लड़के को बचा लिया और चार आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक पीड़ित एक निजी स्कूल में कक्षा दसवीं का छात्र है। आरोपियों ने लड़की के नाम से एक फर्जी आईडी बनाकर उससे दोस्ती बढ़ाई, फिर धीरे-धीरे उसके साथ रोमेंटिक बातें करने लगे। कुछ समय के बाद जब आरोपियों ने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और उसे रोमांटिक संबंध के लिए ठाणे के कल्याण पूर्व स्थित नंदीवली में मिलने बुला लिया।

    भरोसे में आने पर लड़का कैब के जरिए वहां पहुंच गया।

    लड़के के वहां पहुंचते ही चारों आरोपियों ने उसका अपहरण कर लिया और उसे एक रिहायशी इमारत के कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसके परिजनों से संपर्क करके 20 लाख रुपए की मांग की और दवाब बनाने के लिए कई मैसेज भी भेजे।

    इसके बाद लड़के के माता-पिता की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू की और सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर पहले कार और फिर उस जगह का पता लगाया, जहां पर लड़के को छोड़ा गया था। इसके बाद पुलिस ने नंदीवली के कमरे में छापा मारा औऱ लड़के को छुड़ा लिया, इसके बाद पुलिस ने 24 घंटे के अंदर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस के मुताबिक आरोपियों की पहचान प्रदीप कुमार जायसवाल (24), विशाल पासी(19), चंदन मौर्य (19) और सत्यम यादव के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि उन पर भारतीय न्याय संहिता के तहत अपहरण और जबरन वसूली के आरोप लगाकर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।