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  • पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर

    पुलिस हिरासत और मीडिया की अफवाहों पर छलका राज कुंद्रा का दर्द, शिल्पा शेट्टी से जुड़े कई राज किए उजागर


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और व्यवसायी राज कुंद्रा ने साल 2021 में हुई अपनी गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए कठिन समय से जुड़े कई नए पहलुओं को उजागर किया है। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार कानूनी कानूनी समस्याओं के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत जीवन में भी कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। जब वे सलाखों के पीछे थे, तब उनके पास कई तरह की भ्रामक खबरें पहुंच रही थीं, जिसने उन्हें मानसिक रूप से बेहद तोड़ दिया था।

    राज कुंद्रा ने खुलासा किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी की जानकारी भी काफी नाटकीय ढंग से मिली थी। वे पुलिस स्टेशन केवल पूछताछ में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया है। इस बारे में जब उन्होंने उपस्थित अधिकारियों से सवाल किया, तो उन्हें बताया गया कि उच्च अधिकारियों के आदेश के तहत यह कार्रवाई की गई है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी उनके परिवार और पत्नी शिल्पा शेट्टी को भी मीडिया माध्यमों के जरिए ही मिल सकी थी।

    जेल में बिताए दिनों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि व्यावसायिक स्तर पर भी उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके भारतीय व्यवसाय में हजारों लोग कार्यरत थे, और उनके अचानक हिरासत में जाने से पूरा काम ठप हो गया। इस दौरान उनकी पत्नी शिल्पा शेट्टी ने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत बंद करने का कठिन फैसला लिया, क्योंकि अनिश्चितता के माहौल में प्रबंधन संभालना लगभग असंभव हो गया था। एक ही झटके में सब कुछ बदल जाने से वे गहरा सदमा महसूस कर रहे थे।

    सबसे अधिक निराशाजनक स्थिति तब पैदा हुई जब जेल के भीतर उन तक यह खबर पहुंची कि उनकी पत्नी उनसे अलग हो रही हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। राज कुंद्रा के अनुसार, इस एक अफवाह ने उन्हें अंदर से पूरी तरह झकझोर दिया था। उस समय उन्हें लगा कि जीवन का कोई अर्थ नहीं बचा है, क्योंकि उनके लिए उनका परिवार ही सबसे पहली प्राथमिकता था। मानसिक तनाव इस कदर बढ़ गया था कि वे रातों को सो नहीं पाते थे और उनके मन में बेहद नकारात्मक विचार आने लगे थे।

    हालांकि, बाद में सच्चाई सामने आने और परिवार के स्पष्ट रुख से उन्हें संबल मिला। शिल्पा शेट्टी ने हर परिस्थिति में अपने पति का समर्थन करने का फैसला किया, जिससे उन्हें इस कठिन दौर से बाहर निकलने में मदद मिली। रिहाई के बाद राज कुंद्रा ने अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास शुरू किया और एक नई शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और यदि किसी भी अदालत में वे दोषी पाए जाते हैं, तो वे हर प्रकार की सजा भुगतने के लिए तैयार हैं।

    इस मामले के तार देश के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े हुए थे, जहां जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में फैली डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल की थी। कानूनी जानकारों और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों के विश्लेषकों का मानना है कि हाई-प्रोफाइल मामलों में मीडिया रिपोर्ट्स का व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिलहाल राज कुंद्रा अपने व्यापारिक उपक्रमों को फिर से स्थापित करने और अपनी छवि को सुधारने में जुटे हुए हैं।

  • कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    कालकाजी में बुजुर्ग संगीतकार की मौत के बाद बेटों ने आने से किया इनकार, पुलिस के समझाने पर पहुंचे अस्पताल

    नई दिल्ली ।मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाली एक दुखद घटना राजधानी के कालकाजी थाना क्षेत्र में सामने आई है। यहां गोविंदपुरी एक्सटेंशन स्थित एक किराए के मकान में रहने वाले 64 वर्षीय संगीतकार रवि डे का शव उनके घर में लगभग पांच दिनों तक संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा रहा। हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक के दो बेटे महज साढ़े पांच किलोमीटर की दूरी पर लाजपत नगर में रहते हैं, लेकिन पिता की मृत्यु की सूचना मिलने के बाद भी उन्होंने शुरुआत में आने से साफ इनकार कर दिया।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों को बंद मकान से असहनीय बदबू आने लगी। स्थानीय निवासियों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही कालकाजी थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मकान का मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़कर खोला। अंदर का दृश्य अत्यंत भयावह था, जहां बुजुर्ग का शव बाथरूम के पास गंभीर रूप से क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा हुआ था।

    पुलिस ने तत्काल परिजनों की जानकारी जुटाई और लाजपत नगर में रह रहे उनके दोनों बेटों से संपर्क साधकर घटना की जानकारी दी। हालांकि, बेटों ने मौके पर आने में कोई रुचि नहीं दिखाई और आने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शवगृह में सुरक्षित रखवा दिया।

    पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार समझाने-बुझाने और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देने के बाद आखिरकार परिजन 16 अगस्त को अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया और अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर परिजनों को सौंप दिया गया।

    यह घटना समाज में बुजुर्गों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और टूटते पारिवारिक ताने-बाने पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी समय-समय पर बुजुर्गों के एकाकीपन और अपनों से दूरी की ऐसी दुखद खबरें सामने आती रही हैं। कालकाजी थाना पुलिस ने इस पूरे मामले में केस दर्ज कर आसपास के लोगों और परिजनों के बयान दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने शासन को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अग्रिम कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को भेजी गई

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी ने शासन को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अग्रिम कार्रवाई के लिए ट्रस्ट को भेजी गई

    नई दिल्ली ।अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े बहुचर्चित मामले में विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। गृह विभाग द्वारा इस रिपोर्ट का गहन परीक्षण किए जाने के बाद इसे आवश्यक अग्रिम कार्रवाई के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को उपलब्ध करा दिया गया है। इस कदम के साथ ही मामले की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर गई है।

    उल्लेखनीय है कि मंदिर ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर शासन द्वारा 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया गया था। इस उच्चस्तरीय जांच समिति की अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे, जबकि आईजी रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को इसमें सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। समिति को मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का जिम्मा सौंपा गया था।

    जांच टीम ने काफी कम समय में गहन पड़ताल करते हुए 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन के समक्ष प्रस्तुत की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तत्वों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की स्पष्ट संस्तुति की गई थी। शासन द्वारा इस रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए तत्काल वैधानिक कदम उठाने के निर्देश जारी किए गए थे।

    प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया था। ट्रस्ट के प्रतिनिधि की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में कई लोगों को नामजद करते हुए अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की सुसंगत धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया था।

    मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी समेत अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की थीं। जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का बारीक अध्ययन किया गया था, जिसके बाद अब अंतिम रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी गई है।

    मध्य प्रदेश सहित देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र राम मंदिर में व्यवस्थाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट अब इस अंतिम रिपोर्ट के सुझावों के आधार पर आगामी कदम उठाएगा। शासन से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ट्रस्ट स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक सुधारों और कानूनी कदमों को लागू करने की तैयारी की जा रही है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI और ED जांच पर लगाई अंतरिम रोक

    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। साथ ही अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है, जिसके तहत दोनों जांच एजेंसियों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायतकर्ता के साथ-साथ CBI और ED को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की आगे की प्रक्रिया पर विचार करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही को फिलहाल टालने का निर्देश दिया।

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने पहले आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से संबंधित मामले में CBI और ED से जांच कराने का आदेश दिया था। इसी आदेश के खिलाफ राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। याचिका में हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए जांच एजेंसियों को दिए गए निर्देशों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह इस मामले के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करना चाहता है। अदालत ने विशेष रूप से इस बात पर विचार करने की जरूरत बताई कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई के लिए किस प्रक्रिया के तहत निर्देश दिए गए। अदालत ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांतों का पालन महत्वपूर्ण है।

    पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से 20 अगस्त को प्रस्तावित सुनवाई को फिलहाल टालने को कहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राहुल गांधी की याचिका की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराई जाए, ताकि संबंधित पक्ष मामले में अपना पक्ष रख सकें। इस निर्देश के बाद हाई कोर्ट में होने वाली अगली कार्यवाही पर भी फिलहाल विराम लग गया है।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से मिली यह राहत फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आय से अधिक संपत्ति से जुड़े आरोपों पर अंतिम निर्णय हो गया है। अदालत ने अभी केवल जांच और संबंधित न्यायिक कार्यवाही को लेकर अंतरिम स्तर पर हस्तक्षेप किया है तथा मामले में आगे की सुनवाई के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

    मामले में CBI और ED को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब दोनों जांच एजेंसियों के साथ शिकायतकर्ता का पक्ष भी अदालत के सामने आएगा। सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि हाई कोर्ट द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने की प्रक्रिया कानूनी और न्यायिक मानकों के अनुरूप थी या नहीं।

    राहुल गांधी के लिए यह आदेश फिलहाल महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है, क्योंकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। हालांकि मामले की अंतिम दिशा सर्वोच्च अदालत में होने वाली आगामी सुनवाई और उसके बाद दिए जाने वाले आदेश पर निर्भर करेगी।

  • नैनीताल पुलिस पर पर्यटकों से 18 हजार रुपये वसूली के आरोप, यूपीआई लेनदेन से जियोलिकोट चौकी की भूमिका पर सवाल

    नैनीताल पुलिस पर पर्यटकों से 18 हजार रुपये वसूली के आरोप, यूपीआई लेनदेन से जियोलिकोट चौकी की भूमिका पर सवाल

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के नैनीताल में जियोलिकोट पुलिस चौकी से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें चार पर्यटकों ने तीन कांस्टेबलों पर मारपीट, चालान और इसके बाद करीब 18 हजार रुपये मांगने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों के मुताबिक कथित रकम यूपीआई के माध्यम से अलग-अलग खातों में भेजी गई। भुगतान विवरण सामने आने के बाद मामले में पुलिस की भूमिका के साथ संबंधित बैंक खातों की जांच की मांग भी उठ रही है।

    जानकारी के अनुसार सुनील कुमार, मनीष सिंह, श्रियांश साहू और सुशील राजपूत स्कॉर्पियो से नीम करौली की ओर से लौट रहे थे। जियोलिकोट के पास बच्चों की तिरंगा यात्रा निकल रही थी। पीड़ितों के मुताबिक, वाहन में सवार दो युवकों ने यात्रा में शामिल बच्चों को तिरंगे दिए थे। इसी दौरान 112 पर वाहन सवार युवकों द्वारा स्कूल की बच्चियों के साथ छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत की गई।

    इसके बाद पुलिस ने आगे जाकर स्कॉर्पियो को रोका और चारों युवकों को जियोलिकोट चौकी लाया गया। पीड़ितों का आरोप है कि चौकी में उनके साथ मारपीट की गई और बाद में ढाई-ढाई सौ रुपये के चालान काटे गए। हालांकि, उनका दावा है कि कार्रवाई यहीं खत्म नहीं हुई और उनसे उनकी आर्थिक स्थिति तथा पेशे के बारे में जानकारी ली गई।

    पीड़ित पक्ष के अनुसार, एक युवक के पार्लर संचालक होने की जानकारी मिलने पर उससे पांच हजार रुपये मांगे गए। वहीं स्कॉर्पियो मालिक के ठेकेदार होने की बात सामने आने पर कथित तौर पर उससे दस हजार रुपये देने को कहा गया। अन्य युवकों से भी अलग-अलग रकम मांगने का आरोप लगाया गया है।

    मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित यूपीआई भुगतान से जुड़ा है। पीड़ितों के मुताबिक, कुल करीब 18 हजार रुपये डिजिटल माध्यम से लिए गए। उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार, रकम का एक हिस्सा नैनी फिलिंग स्टेशन के खाते में और कुछ राशि वहां कार्यरत एक कर्मचारी के बैंक खाते में भेजी गई।

    इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि यदि भुगतान पुलिस कार्रवाई से संबंधित था तो रकम सीधे आरोपित पुलिसकर्मियों के खातों में जाने के बजाय अन्य खातों में क्यों भेजी गई। इसी वजह से संबंधित बैंक खातों के लेनदेन की विस्तृत जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    पीड़ितों ने जियोलिकोट चौकी में तैनात चंदन आर्या, नीरज कुमार और धर्मेंद्र कुमार पर मारपीट तथा रकम मांगने और लेने के आरोप लगाए हैं। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन भुगतान के स्क्रीनशॉट और यूपीआई विवरण होने का दावा मामले को गंभीर बनाता है।

    यह भी जांच का विषय है कि नैनी फिलिंग स्टेशन और संबंधित कर्मचारी के खाते में इससे पहले पुलिसकर्मियों या पुलिस से जुड़े लोगों की ओर से कोई संदिग्ध भुगतान हुआ था या नहीं। बैंक रिकॉर्ड के जरिए तारीख, रकम, भेजने वाले और भुगतान के उद्देश्य की पड़ताल की जा सकती है।

    बताया गया है कि बाद में पीड़ितों को रकम वापस किए जाने की बात सामने आई। हालांकि, रकम लौटाए जाने के बावजूद कथित भुगतान की परिस्थितियों और उसमें शामिल लोगों की भूमिका से जुड़े सवाल बने हुए हैं।

    नैनीताल देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां पुलिस की कार्यशैली सीधे पर्यटकों के अनुभव तथा क्षेत्र की छवि से जुड़ती है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यूपीआई लेनदेन किन परिस्थितियों में हुआ। जांच से ही यह भी सामने आएगा कि मामला एक घटना तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक पैटर्न मौजूद था।

  • लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    लखीसराय मंदिर हादसे में आठ महिलाओं की मौत, दो ट्रेनों के आने और बिजली पोल गिरने के बाद बढ़ी अफरा-तफरी

    नई दिल्ली । बिहार के लखीसराय जिले में सावन के तीसरे सोमवार को इंद्र दमनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम में बड़ा हादसा हो गया। सोमवार सुबह मंदिर परिसर के आसपास अचानक अफरा-तफरी मचने के बाद भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना में आठ महिला श्रद्धालुओं की मौत होने की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई है, जबकि नौ लोग गंभीर रूप से घायल बताए गए हैं।

    घटना के बाद शुरुआती स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालु प्रभावित हुए हैं। हालांकि, बाद में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि मौतों की मुख्य वजह करंट लगना नहीं, बल्कि भगदड़ थी। प्रशासन के अनुसार बिजली का पोल गिरने और उसके बाद करंट फैलने की अफवाह ने भीड़ में अचानक डर पैदा कर दिया।

    बताया गया कि हादसे के समय अशोक धाम मंदिर में सावन सोमवार के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान अशोक धाम हाल्ट के आसपास एक ही समय में दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों के आने के कारण वहां लोगों की आवाजाही और भीड़ का दबाव अचानक बढ़ गया। इसी बीच कुछ युवकों के भागने से अफरा-तफरी और तेज हो गई।

    इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बिजली का तार गिर गया है और वहां करंट फैल गया है। प्रशासन के अनुसार उस समय बिजली आपूर्ति बंद थी और संबंधित तार कवर किया हुआ था। इसके बावजूद अफवाह तेजी से भीड़ में फैल गई और श्रद्धालुओं ने सुरक्षित स्थान की ओर भागना शुरू कर दिया।

    अचानक मची भगदड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। सबसे ज्यादा प्रभावित महिलाओं की कतार रही। भीड़ के दबाव में दबने से आठ महिला श्रद्धालुओं की जान चली गई। नौ अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। घटना के बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

    सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों की सहायता से राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने मृतकों और घायलों की पहचान तथा उनके परिजनों तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया भी शुरू की।

    जिलाधिकारी ने बताया कि घटना की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जांच की जा रही है। जांच में भीड़ बढ़ने, ट्रेनों के एक साथ आने, बिजली के पोल गिरने और अफवाह फैलने सहित सभी पहलुओं को देखा जाएगा। प्रशासन यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि भीड़ नियंत्रण और प्रवेश व्यवस्था के दौरान किन परिस्थितियों में दबाव अचानक बढ़ा।

    अशोक धाम मंदिर सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने वाला प्रमुख धार्मिक स्थल है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक भीड़ जुटती है। ऐसे में हादसे ने धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, सुरक्षित आवाजाही और अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।

    प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल घायलों का उपचार और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है। साथ ही घटना की उच्चस्तरीय जांच के जरिए यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की स्थिति किस क्रम में बनी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है।

  • बीरभूम के तारापीठ में होटल अग्निकांड से मचा हड़कंप, सात की मौत और कई घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    बीरभूम के तारापीठ में होटल अग्निकांड से मचा हड़कंप, सात की मौत और कई घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के तारापीठ में सोमवार को एक होटल में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा कर दिया। आग की चपेट में आने से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत तथा बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती जांच में आग लगने की संभावित वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    बताया गया कि आग लगने के समय होटल के अंदर कई लोग मौजूद थे। आग और धुएं के कारण उन्हें बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा। घटनास्थल पर पहुंची पुलिस और दमकल कर्मियों ने काफी सावधानी के साथ बचाव अभियान चलाया। इस दौरान होटल में फंसे 22 लोगों को सीढ़ी की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    बचाव अभियान के बाद 11 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। अधिकारियों के अनुसार इनमें से दो लोगों की हालत सुस्त बताई गई, जबकि एक व्यक्ति को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। मृतकों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य विवरणों की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर शुरुआती स्थिति ऐसी थी कि होटल के बाहर से धुआं या आग की लपटें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही थीं। इसके बावजूद अंदर आग फैलने के बाद स्थिति गंभीर हो गई। दमकल कर्मियों और पुलिस की संयुक्त टीम ने होटल के अलग-अलग हिस्सों की जांच कर फंसे लोगों को बाहर निकाला।

    आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आग वास्तव में किस वजह से लगी तथा होटल में अग्नि सुरक्षा से जुड़े पर्याप्त इंतजाम मौजूद थे या नहीं। जांच के दौरान बिजली व्यवस्था, आग बुझाने के उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था जैसे पहलुओं को भी देखा जा सकता है।

    हादसे के बाद होटल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर तारापीठ रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी की कार्यप्रणाली और बड़े भवनों में अग्निशमन सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हुई है। विधायक ध्रुबा साहा ने व्यवस्था में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी इमारत तैयार की गई, लेकिन आग पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं दिखाई दिए।

    पुलिस ने होटल संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे हिरासत में लिया है। उससे होटल में मौजूद सुरक्षा इंतजामों, आग लगने की परिस्थितियों और घटना के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।

    तारापीठ पश्चिम बंगाल का प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यहां होटल और अन्य ठहरने वाले स्थानों में अग्नि सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस घटना के बाद होटल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की समीक्षा की जरूरत भी सामने आई है। फिलहाल पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    नई दिल्ली । वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से अफरा तफरी मच गई। घटना में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से जुड़े दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोली चलने की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, एक यात्री अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। यात्री के पास बंदूक थी और उसने विमान यात्रा के दौरान हथियार ले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी।

    बताया गया है कि हथियार की जांच के दौरान अचानक बंदूक से एक राउंड फायर हो गया। गोली चलने के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना में सुरक्षा जांच का काम कर रहे दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए।

    घटना के तुरंत बाद दोनों घायल कर्मचारियों को न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर आगे जानकारी दी जा सकती है।

    जिस यात्री के हथियार से गोली चली, वह मुंबई जाने वाली IX-1810 फ्लाइट से यात्रा करने वाला था। वह अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचा था। हथियार साथ होने की जानकारी पहले से दिए जाने के बावजूद जांच के दौरान अचानक फायरिंग हो गई। इस कारण अब सुरक्षा प्रक्रिया और घटना की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके से जुड़े घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंदूक से गोली किस परिस्थिति में चली और हथियार की जांच के समय सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया जा रहा था।

    पुलिस और संबंधित अधिकारी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग के समय हथियार की स्थिति क्या थी और जांच के दौरान किन परिस्थितियों में अचानक एक राउंड फायर हुआ। मामले में उपलब्ध जानकारी और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में हथियार की जांच के दौरान गोली चलने की घटना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान घायलों के उपचार और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

    पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस वजह से हुई और इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है और आगे की जानकारी जांच के आधार पर सामने आने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में 150 पशु चिकित्सा अधिकारियों ने ट्रांसफर नीति पर उठाए सवाल, जांच के बाद निर्णय का आश्वासन

    मध्य प्रदेश में करीब 150 पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ और सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारियों के तबादलों को लेकर विवाद सामने आया है। पशु चिकित्सकों ने ट्रांसफर नीति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव को अभ्यावेदन सौंपा है। अधिकारियों की ओर से उन्हें अभ्यावेदनों की जांच के बाद उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।

    पशु चिकित्सकों का कहना है कि तबादलों के बाद कई अधिकारियों ने अभी नई पदस्थापना पर ज्वाइनिंग नहीं की है। इसका असर कई जिलों में पशु चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था पर पड़ रहा है। कुछ स्थानों पर चिकित्सकों की संख्या कम होने से पशुओं के इलाज और विभागीय कामकाज में परेशानी आने की बात कही गई है।

    तबादलों को लेकर सबसे बड़ा आरोप सार्थक ऐप में दर्ज जानकारी और उसके आधार पर तैयार सूची को लेकर है। चिकित्सकों का दावा है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ छुट्टियों को अनुपस्थिति के तौर पर दर्ज किया गया, जिससे सेवा संबंधी जानकारी प्रभावित हुई। उनका आरोप है कि इसी तरह की विसंगतियों के आधार पर कुछ अधिकारियों की पदस्थापना तय की गई।

    पशु चिकित्सकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और मानवीय आधारों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। उनका कहना है कि कुछ अधिकारियों को 700 से 1300 किलोमीटर तक दूर भेज दिया गया, जबकि कुछ लोगों को कथित तौर पर तबादला सूची से बाहर रखा गया। इस कारण विभाग के भीतर समान अवसर और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।

    महिला और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े मामलों को लेकर भी चिकित्सकों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सीहोर में पदस्थ रहीं पशु चिकित्सक रश्मि देवी चंद्राकर ने बताया कि उन्होंने अनूपपुर के आदिवासी क्षेत्र में करीब 11 वर्ष सेवाएं दी हैं। उनका दावा है कि नीति में तलाकशुदा महिलाओं के लिए यथासंभव अनुकूल स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान होने के बावजूद उनका तबादला सिंगरौली किया जा रहा है।

    इसी तरह कुछ अन्य पशु चिकित्सकों ने बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए तबादलों से होने वाली कठिनाइयों की जानकारी दी है। डॉ. राखी सिंह और डॉ. कमल सिंह का कहना है कि उनके बच्चों की पढ़ाई भोपाल में चल रही है और स्कूल तथा कोचिंग के बीच अचानक दूसरे स्थान पर जाना परिवार के लिए मुश्किल होगा।

    पशु चिकित्सक उदय सिंह माहेश्वरी ने भी अपने तबादले को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि वे सीहोर जिला पशु चिकित्सक संघ के अध्यक्ष हैं और उनके बच्चों की शिक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी उन पर हैं। करीब 700 किलोमीटर दूर तबादला होने से उनके सामने व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा हो गई हैं।

    चिकित्सकों ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ तबादले प्रक्रिया के अंतिम समय में किए गए और नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इतनी कम अवधि में दूरस्थ जिलों में पहुंचना कई अधिकारियों के लिए मुश्किल है। कुछ मामलों में ऑनलाइन उपस्थिति और सेवा रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी के भौतिक सत्यापन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

    तबादलों के कारण कई जिलों में पद खाली होने की स्थिति बनने का दावा भी किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ स्थानों पर पहले से सीमित संख्या में अधिकारी तैनात थे और स्थानांतरण के बाद वहां पशु चिकित्सा सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विभागीय स्तर पर प्राप्त अभ्यावेदनों की जांच की जा रही है। जांच में स्थानांतरण प्रक्रिया, उपलब्ध रिकॉर्ड और चिकित्सकों की आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद नियमों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाना है। फिलहाल पशु चिकित्सकों की नजर जांच के परिणाम और संभावित संशोधन पर बनी हुई है।

  • मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।

    मध्य प्रदेश के भिंड में नौ वर्षीय मासूम से गंभीर अपराध, पुलिस ने दर्ज किया केस और आरोपी की तलाश जारी।


    मध्य प्रदेश के भिंड जिले के अंतर्गत आने वाले मैहगांव थाना क्षेत्र में एक नौ वर्षीय बालिका के साथ गंभीर अपराध की घटना सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और कठोर धाराओं के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत कर लिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बालिका अपने 11 वर्षीय भाई के साथ वापस लौट रही थी। इसी दौरान 24 वर्षीय आरोपी अरविंद वाल्मीकि ने मदद का झांसा देकर दोनों बच्चों को अपनी दोपहिया वाहन पर बिठा लिया। आरोपी बच्चों को गांव के बाहरी इलाके में सुनसान झाड़ियों की ओर ले गया। वहां आरोपी ने मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया।

    घटना के दौरान जब बालिका के भाई ने विरोध करने और अपनी बहन की रक्षा करने का प्रयास किया, तो आरोपी ने उसके साथ मारपीट की। वारदात को अंजाम देने के पश्चात आरोपी दोनों बच्चों को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। डरा हुआ बालक किसी प्रकार अपने घर पहुंचा और परिजनों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

    घटना की सूचना मिलते ही परिजन तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल बालिका को इलाज के लिए पास के अस्पताल ले गए। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया है, जो विभिन्न ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।

    इसी जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र से जुड़े एक अन्य पुराने मामले में भी कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। सुरपुरा में एक बालिका के साथ हुए अपराध के सह-आरोपी की जमानत याचिका को स्थानीय अदालत ने खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के साथ संभावित छेड़छाड़ की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

    मध्य प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस और न्यायपालिका द्वारा सख्त रुख अपनाया जा रहा है। भिंड पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मैहगांव मामले के आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।