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  • विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    विवाद के बाद अधिवक्ता से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, पुलिस ने दो नामजद समेत सात अज्ञात पर केस दर्ज किया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के महोबा में एक अधिवक्ता के साथ कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब दो मिनट से अधिक समय के इस वीडियो में कुछ युवतियां और महिलाएं एक अधिवक्ता को घेरती और पकड़ती दिखाई दे रही हैं। वीडियो में उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    मामले में अधिवक्ता की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर दो नामजद युवतियों और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपितों की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, यह मामला किसी पुराने विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।

    कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर कुल नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इनमें दो लोगों को नामजद किया गया है, जबकि सात अन्य की पहचान अभी की जानी है। पुलिस मामले की जांच के साथ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास कर रही है।

    पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला शांत हो गया था। आरोप है कि बाद में उसी पुराने विवाद को लेकर दोबारा कहासुनी हुई। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और अधिवक्ता के साथ कथित तौर पर मारपीट की घटना हुई।

    घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। वीडियो में कई महिलाएं और युवतियां अधिवक्ता के आसपास दिखाई देती हैं। कुछ लोग उन्हें पकड़ते हुए नजर आते हैं और उनके साथ जूते-चप्पलों से मारपीट किए जाने का दृश्य भी दिखाई देता है। वीडियो की अवधि करीब दो मिनट 12 सेकेंड बताई गई है। पुलिस अब वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान और घटना की वास्तविक परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    सोशल मीडिया पर किसी घटना का वीडियो तेजी से प्रसारित होने के बाद पुलिस के सामने उसकी सत्यता और घटनाक्रम की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी वजह से पुलिस वायरल वीडियो के साथ शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    मामले में पुलिस ने अभी घटना के पीछे के पूरे विवाद और मारपीट की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक स्तर पर पुराने विवाद के बाद दोबारा कहासुनी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों से संबंधित तथ्यों को जांच में शामिल कर रही है।

    वहीं, महोबा के अलावा जालौन में भी दो परिवारों के बीच मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। कोतवाली जालौन क्षेत्र के मोहल्ला पहलवान बड़ा में दो परिवारों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर कथित तौर पर लाठी-डंडों और रॉड से मारपीट हुई। पीड़ित सुलखान यादव ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसके साथ और बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भतीजे के साथ भी मारपीट की गई।

    शिकायत के अनुसार घटना रात करीब 10 बजे हुई। आरोप है कि गाली-गलौज के बाद विवाद बढ़ा और दोनों पर हमला किया गया। पीड़ित ने गंभीर चोट लगने और जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

  • आरजी कर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल, डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर भी बोलीं

    आरजी कर केस में पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ ने सीबीआई जांच पर उठाए सवाल, डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर भी बोलीं


    नई दिल्ली ।
    कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में पीड़िता की मां और बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने जांच की प्रगति पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि बेटी की मौत के बाद परिवार को न्याय की उम्मीद थी, लेकिन अब भी उन्हें लगता है कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर्याप्त गति से आगे नहीं बढ़ रही है।

    बैरकपुर में बुधवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रत्ना देबनाथ ने कहा कि वह मूल रूप से राजनीति में आने की इच्छुक नहीं थीं। उनका परिवार सामान्य जीवन जी रहा था और उनके पति का कारोबार था। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी ने भी उन्हें राजनीति में आने से दूर रहने की सलाह दी थी।

    रत्ना देबनाथ के अनुसार, बेटी की दर्दनाक मौत के बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। उस समय परिवार को यह भरोसा दिलाया गया था कि सरकार बदलने के बाद राज्य में हालात बेहतर होंगे और मामले में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार बदल गई है तो क्या वास्तव में जमीन पर स्थिति में भी बदलाव आया है।

    बीजेपी विधायक ने सीबीआई की जांच को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि वह जांच की वर्तमान प्रगति से संतुष्ट नहीं हैं। अदालत की ओर से मामले में नई विशेष जांच टीम गठित किए जाने के बाद भी उन्होंने जांच की दिशा और गति को लेकर सवाल उठाए।

    उन्होंने मामले में डॉक्टरों की भूमिका से जुड़े मुद्दे पर भी सवाल खड़ा किया। रत्ना देबनाथ के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि आरोपी डॉक्टर हैं और उन्हें इस तरह गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत में इस तरह की बात सामने आई थी कि डॉक्टरों को सीधे गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

    इस पर रत्ना देबनाथ ने सवाल किया कि यदि कोई डॉक्टर अपराध में शामिल है और उनकी बेटी की हत्या से उसका संबंध सामने आता है तो केवल डॉक्टर होने के आधार पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी भी डॉक्टर थी और परिवार के लिए यह समझना कठिन है कि किसी पेशे से जुड़े व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया में अलग मानक क्यों अपनाया जाए।

    रत्ना देबनाथ ने यह भी कहा कि उनका परिवार शुरुआत में राजनीति में शामिल नहीं होना चाहता था। उनकी प्राथमिकता अपनी बेटी के लिए न्याय हासिल करना थी। उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बताई गई थीं और इन्हीं परिस्थितियों के बीच वह सार्वजनिक जीवन में आईं।

    आरजी कर मामला अगस्त 2024 में सामने आया था, जब अस्पताल के सेमिनार हॉल में एक महिला डॉक्टर का शव मिला था। घटना के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे और अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा तथा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।

    मामले की जांच को लेकर लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई चलती रही है। अब पीड़िता की मां के ताजा बयान ने जांच की गति और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बहस फिर तेज कर दी है। रत्ना देबनाथ ने स्पष्ट किया कि सरकार बदलने के बावजूद उनके परिवार की न्याय की प्रतीक्षा समाप्त नहीं हुई है। उनके बयान से यह भी सामने आया कि परिवार अब भी मामले में व्यापक और प्रभावी कानूनी कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है।

  • श्रीनगर एयरपोर्ट पर IndiGo विमान VDGS पोल से टकराया, ब्रेक सिस्टम खराबी के दावे के बीच जांच में जुटे अधिकारी

    श्रीनगर एयरपोर्ट पर IndiGo विमान VDGS पोल से टकराया, ब्रेक सिस्टम खराबी के दावे के बीच जांच में जुटे अधिकारी


    नई दिल्ली । 
    श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह IndiGo की एक फ्लाइट पार्किंग के दौरान विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम के पोल से टकरा गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार विमान को पार्क करते समय ब्रेक सिस्टम में खराबी सामने आई, जिसके बाद विमान का अगला हिस्सा पोल के संपर्क में आ गया। हादसे में विमान के नोज सेक्शन को नुकसान पहुंचा है।

    घटना के समय विमान में मौजूद सभी यात्री और क्रू सदस्य सुरक्षित रहे। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। विमान के रुकने के बाद यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

    यह विमान IndiGo की फ्लाइट संख्या 6E 225 थी, जिसने सुबह नवी मुंबई से उड़ान भरी थी। विमान शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचा। लैंडिंग के बाद विमान को बे नंबर छह पर पार्क किया जा रहा था। इसी दौरान यह घटना हुई।

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विमान का पंजीकरण नंबर VT-NOG है। पार्किंग की प्रक्रिया के दौरान विमान VDGS यानी विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम के पोल से टकराया। टक्कर के कारण विमान के अगले हिस्से को नुकसान हुआ। हालांकि नुकसान के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकाल लिया गया।

    एयरलाइन की ओर से घटना को पार्किंग के दौरान हुई मामूली घटना बताया गया है। हालांकि शुरुआती तौर पर ब्रेक सिस्टम में खराबी की बात सामने आई है, लेकिन हादसे की पूरी वजह अभी स्पष्ट नहीं है। विमान के पोल से संपर्क में आने की परिस्थितियों और तकनीकी कारणों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

    हवाई अड्डे पर विमान की सुरक्षित पार्किंग के लिए विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह व्यवस्था पायलट को विमान को निर्धारित पार्किंग स्थान तक सही तरीके से पहुंचाने में सहायता करती है। इस घटना में इसी प्रणाली के पोल से विमान का संपर्क हुआ, जिससे उसके अगले हिस्से को नुकसान पहुंचा।

    घटना के बाद एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर तत्काल स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों के शुरुआती बयान के अनुसार विमान में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। एयरपोर्ट के सामान्य संचालन पर भी घटना का कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    श्रीनगर एयरपोर्ट के निदेशक जावेद अंजुम ने बताया कि हवाई अड्डे का संचालन सामान्य रूप से जारी है। विमानों की आवाजाही निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चल रही है और यात्रियों तथा अन्य संबंधित लोगों के लिए सुरक्षित संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    घटना की सही वजह सामने आने के लिए तकनीकी और परिचालन पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी। इसमें विमान के ब्रेक सिस्टम की स्थिति, पार्किंग के दौरान हुई गतिविधियां और VDGS पोल से विमान के संपर्क की परिस्थितियों का आकलन किया जा सकता है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टक्कर के पीछे वास्तविक तकनीकी या अन्य कारण क्या था।

    फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि घटना में किसी यात्री या क्रू सदस्य को चोट नहीं आई। विमान के अगले हिस्से को हुए नुकसान का आकलन संबंधित तकनीकी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। इसके बाद विमान की आगे की परिचालन स्थिति के बारे में फैसला लिया जाएगा।

    इस घटना ने विमान की पार्किंग प्रक्रिया और तकनीकी प्रणालियों की भूमिका को लेकर ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही ब्रेक सिस्टम में खराबी और पोल से हुई टक्कर के बीच वास्तविक संबंध स्पष्ट हो सकेगा।

  • रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    रूस के अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में भीषण विस्फोट से 7 लोगों की मौत, छह चीनी नागरिक शामिल, नौ अब भी लापता

    नई दिल्ली । रूस के सुदूर पूर्वी अमूर क्षेत्र में मंगलवार को एक बड़े गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स में हुए भीषण विस्फोट और आग ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह चीनी नागरिकों समेत सात लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है, जबकि नौ अन्य चीनी कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद परिसर में राहत और बचाव अभियान चलाया गया तथा हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।

    यह हादसा अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स की पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। जानकारी के अनुसार जिस समय विस्फोट हुआ, उस दौरान संयंत्र में उपकरणों की अंतिम टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम चल रहा था। अचानक हुए धमाके के बाद परिसर में आग फैल गई, जिससे वहां मौजूद कर्मचारियों में अफरा तफरी मच गई।

    प्लांट की प्रेस सर्विस के अनुसार घटना के बाद लगी आग पर काबू पा लिया गया है। कंपनी की ओर से यह भी बताया गया कि संयंत्र के मुख्य उपकरणों को नुकसान नहीं पहुंचा है। हालांकि हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और लापता कर्मचारियों को लेकर स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। नौ चीनी कर्मचारियों के बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।

    अमूर गैस केमिकल कॉम्प्लेक्स रूस और चीन के बीच औद्योगिक सहयोग से जुड़ी एक बड़ी परियोजना है। यह परिसर रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है और इसके निर्माण तथा विकास में रूस की सिबुर और चीन की सिनोपेक जैसी कंपनियों की भागीदारी है। ऐसे में हादसे में चीनी नागरिकों के प्रभावित होने से दोनों देशों के स्तर पर भी घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विस्फोट मुख्य पाइरोलिसिस यूनिट के एक सहायक तकनीकी हिस्से में हुआ। उस समय वहां अंतिम परीक्षण और कमीशनिंग से जुड़ा काम चल रहा था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि विस्फोट की वास्तविक वजह क्या थी। तकनीकी खराबी, उपकरणों से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    रूसी जांच अधिकारियों की कार्रवाई के बाद हादसे के कारणों को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आने की उम्मीद है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि घटना के समय संयंत्र में किस तरह का तकनीकी काम चल रहा था और सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। साथ ही विस्फोट के बाद आग फैलने की परिस्थितियों और कर्मचारियों की मौजूदगी से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।

    हादसे ने एक बार फिर बड़े औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षण के दौरान अपनाए जाने वाले मानकों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से ऐसे परिसर में जहां गैस और रासायनिक प्रक्रियाओं से जुड़े संवेदनशील उपकरण मौजूद हों, वहां छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी गंभीर दुर्घटना का रूप ले सकती है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का मुख्य ध्यान लापता कर्मचारियों की तलाश, प्रभावित लोगों की पहचान और दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने लाने पर है।

  • हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    हैदराबाद विजयवाड़ा हाईवे पर भीषण बस हादसा, कंटेनर की लोहे की छड़ों ने मचाई तबाही, प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

    नई दिल्ली ।तेलंगाना के सूर्यपेट जिले में बुधवार को हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यात्रियों से भरी बस की कंटेनर ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद ट्रक में लदी लोहे की लंबी छड़ें बस के अगले हिस्से को चीरती हुई अंदर तक घुस गईं। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 यात्री घायल हुए हैं।

    बताया गया कि बस में कुल 42 यात्री सवार थे। हादसा इतना गंभीर था कि बस के आगे के हिस्से में बैठे यात्रियों को संभलने या बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका। लोहे की छड़ें सीधे बस के अगले हिस्से में घुसने के कारण वहां बैठे यात्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी का माहौल बन गया। पुलिस के साथ स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। घायल यात्रियों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

    पुलिस ने हादसे में छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं 20 अन्य यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है। हादसे में जान गंवाने वाले और घायल हुए यात्रियों की विस्तृत पहचान तथा अन्य संबंधित जानकारी अधिकारियों की प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    घटना की जानकारी सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने हादसे को बेहद दुखद बताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।

    पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू करते हुए दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में बस की तेज रफ्तार और चालक को स्टीयरिंग पर झपकी आने की संभावना की चर्चा है। हालांकि पुलिस की जांच पूरी होने से पहले हादसे की वास्तविक वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

    दुर्घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है। बस और कंटेनर की स्थिति, सड़क पर वाहनों की गति तथा हादसे से पहले दोनों वाहनों की गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। इसके अलावा चालक की स्थिति और अन्य परिस्थितियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।

    हैदराबाद विजयवाड़ा नेशनल हाईवे पर वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे मार्गों पर भारी वाहनों और यात्री वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी तथा सावधानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। इस हादसे में कंटेनर में लदी लोहे की छड़ों के बस में घुसने से दुर्घटना की गंभीरता और बढ़ गई।

    फिलहाल पुलिस हादसे की सटीक वजह पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर तेज रफ्तार, चालक की थकान और भारी वाहनों में लदे सामान की सुरक्षित व्यवस्था से जुड़े सवालों को सामने ला दिया है।

  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    अमृतसर के संवेदनशील सैन्य इलाकों को लेकर खुफिया अलर्ट, पाकिस्तानी नेटवर्क की गतिविधियों पर एजेंसियों की पैनी नजर

    नई दिल्ली ।पंजाब में संभावित आतंकी साजिश को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट में आशंका जताई गई है कि पाकिस्तान से जुड़े कुछ ऑपरेटिव्स राज्य में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं। इनपुट के सामने आने के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

    बताया जा रहा है कि अमृतसर जिले में सैन्य ठिकानों से जुड़े दो स्थानों की कथित तौर पर रेकी की गई है। खुफिया जानकारी में इन ऑपरेटिव्स की पहचान राणा भाई और मलिक के नाम से किए जाने की बात सामने आई है। जिन स्थानों का उल्लेख किया गया है, उनमें खासा छावनी और उसके आसपास का बूढ़ा ठेह इलाका शामिल है।

    खासा छावनी का नाम सामने आने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। कुछ समय पहले छावनी की बाहरी दीवार के पास विस्फोट की घटना हुई थी। उस घटना में बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन अब नए खुफिया इनपुट के बाद पुराने घटनाक्रम की भी नए सिरे से समीक्षा किए जाने की संभावना है।

    हालांकि, मौजूदा खुफिया इनपुट और पहले हुए विस्फोट के बीच किसी सीधी कड़ी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दोनों घटनाओं का कोई आपसी संबंध है या नहीं। सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के सामने फिलहाल प्राथमिकता संभावित खतरे का आकलन करने और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

    इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान में सक्रिय बताए जा रहे गैंगस्टर शहजाद भट्टी का नेटवर्क भी जांच के दायरे में है। भारतीय एजेंसियां पहले से उसके कथित नेटवर्क से जुड़े मामलों की जांच कर रही हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल भारत में हिंसक गतिविधियों और युवाओं की भर्ती के लिए किया जा रहा था।

    शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ अलग-अलग मामलों में कार्रवाई भी की गई है। जांच में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से कथित संपर्क और सीमा पार से संचालित गतिविधियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। ऐसे मामलों में सुरक्षा एजेंसियां आतंकी नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और स्थानीय संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करती हैं।

    पंजाब में अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई जारी है। हाल में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से अत्याधुनिक पिस्तौल, मैगजीन और कारतूस बरामद किए जाने की जानकारी दी थी। प्रारंभिक जांच में उनके विदेशी संपर्कों और सीमा क्षेत्र के जरिए हथियारों की खेप हासिल करने की आशंका जताई गई।

    जांच में ड्रोन के जरिए सीमा पार से हथियार पहुंचाने की आशंका भी सामने आई है। इससे पंजाब में सीमा से जुड़े क्षेत्रों की सुरक्षा चुनौती और गंभीर हो जाती है। एजेंसियां अब हथियारों की आपूर्ति, विदेशी संचालकों और स्थानीय नेटवर्क के बीच संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं।

    पंजाब पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सैन्य प्रतिष्ठानों के अलावा सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, सामने आए इनपुट को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

  • आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित आतंकी संगठन की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने का मामला सामने आया है। इन पत्रों में कई कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके पते का उल्लेख किए जाने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रों के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की जांच शुरू कर दी है।

    बताया गया है कि धमकी भरे पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। पत्र में लोगों के नाम के साथ उनके घर और गली से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होने की बात सामने आई है। इस तरह की निजी जानकारी का इस्तेमाल किए जाने से प्रभावित लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, पत्र में कश्मीर से बाहर चले गए कश्मीरी पंडितों को लेकर आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि पत्र वास्तव में किस संगठन या व्यक्ति की ओर से भेजे गए हैं और इनमें किए गए दावों की वास्तविकता क्या है।

    मामले में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक मोर्चा बताया जा रहा है। हालांकि, पत्र की वास्तविकता, इसे जारी करने वाले व्यक्ति या संगठन और इसके पीछे की मंशा की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी सामने आई थी। पिछले मामले में कुछ सरकारी कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी पत्र में शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई थी।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों की सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। कुछ समय पहले कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों पर हमला कर उनकी हत्या किए जाने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हाल में घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को गंभीरता से लेने की बात कही थी। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।

    प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता धमकी की विश्वसनीयता का आकलन करने के साथ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सुरक्षा एजेंसियां पत्रों की जांच, उनके प्रसार के स्रोत और संभावित जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर की जाएगी।

    कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा और विश्वास से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और समय रहते आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि धमकी के कारण लोगों में भय का माहौल न बने और किसी संभावित घटना को रोका जा सके।

  • मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    मां से विवाद के बाद घर से निकली थी नाबालिग, बारामती में शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज की

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शरदचंद्र पवार गुट के विधायक रोहित पवार के पर्सनल असिस्टेंट की 12 वर्षीय बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। नाबालिग का शव रविवार सुबह साईनगर इलाके में उसके घर के पास नाले के किनारे मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया।

    पुलिस के अनुसार, शनिवार को बच्ची का अपनी मां से किसी बात को लेकर मामूली विवाद हुआ था। इसके बाद वह नाराज होकर घर से बाहर चली गई थी। काफी समय बीतने के बाद जब बच्ची वापस घर नहीं लौटी तो परिवार ने पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी थी।

    रविवार सुबह बच्ची का शव घर के पास मिलने की जानकारी पुलिस को मिली। इसके बाद पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए बारामती सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले की सूचना मिलने के बाद विधायक रोहित पवार भी बारामती मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने बच्ची के परिवार से मुलाकात की। उनके अनुसार अस्पताल में परिवार के सदस्यों के अलावा बच्ची के दोस्त और परिचित भी मौजूद थे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भी बातचीत की और पुलिस अधिकारियों के साथ करीब आधे घंटे तक मामले को लेकर चर्चा की।

    पुलिस इस मामले को फिलहाल संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के तौर पर देख रही है। जांच में आत्महत्या की संभावना समेत अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर चैतन्य कदम के अनुसार, बच्ची के लापता होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की थी। उसके मोबाइल फोन की जांच के दौरान पुलिस को घर से निकलने से पहले मां के साथ विवाद की जानकारी मिली। हालांकि, इस विवाद और बच्ची की मौत के बीच क्या संबंध था, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    पुलिस घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल और दूसरे साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जबकि कॉल डिटेल की भी जांच की जा रही है। इसके अलावा पुलिस एक लड़के के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है। इन सभी जानकारियों के आधार पर पुलिस घटना से पहले बच्ची की गतिविधियों और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    फिलहाल पुलिस ने मौत के कारण को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल से मिलने वाली जानकारी को भी जांच के दौरान जोड़ा जाएगा।

    नाबालिग की संदिग्ध मौत के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है। पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    इंदौर सट्टा मामले में जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी के मोबाइल से मिले डिजिटल सबूतों ने जांच का दायरा बढ़ाया

    मध्य प्रदेश : के इंदौर में सामने आए सट्टा मटका मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम जांच में सामने आने के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ाया है। पुलिस के अनुसार नाना पटवारी के मोबाइल फोन से मिले डेटा और ऑनलाइन सट्टे से जुड़े सुरागों ने मामले में कई नए कनेक्शन सामने लाए हैं।

    जांच के दौरान पुलिस को नाना पटवारी के मोबाइल फोन से दो ऑनलाइन सट्टा एप से संबंधित जानकारी मिली। आरोप है कि क्रिकेट बेटिंग के लिए उन्हें एक व्यक्ति के माध्यम से आईडी उपलब्ध कराई गई थी। पुलिस का कहना है कि संबंधित आईडी बाद में डिलीट कर दी गई, लेकिन तकनीकी जांच के दौरान उससे जुड़े कुछ डिजिटल सुराग सामने आए। इन्हीं सुरागों के आधार पर जांच एजेंसियां नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

    पुलिस के मुताबिक इस मामले में सौम्य प्रीत शिंदे समेत तीन नए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में राजेंद्र नगर निवासी राहुल निंबोला और रावजी बाजार क्षेत्र का धर्मेंद्र खींची शामिल हैं। जांच में सौम्य प्रीत शिंदे की भूमिका ऑनलाइन सट्टा एप और आईडी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के तौर पर सामने आने की बात कही गई है।

    जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल उपकरणों की पड़ताल के जरिए सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस मनीष पमनानी, पिंकेश माहेश्वरी और बंटी असरानी जैसे नामों से जुड़े संभावित कनेक्शनों की भी जांच कर रही है। इसके अलावा धर्मेंद्र खींची और राहुल निंबोला के विदेशी सट्टेबाजों से कथित संपर्क तथा जूनी इंदौर क्षेत्र के एक अन्य संदिग्ध से संबंधों की भी पड़ताल जारी है।

    पुलिस जांच में इस सट्टा नेटवर्क के विदेशों से जुड़े होने के संकेत मिलने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार गिरोह से जुड़े कुछ लोग दुबई और अन्य देशों में मौजूद सट्टेबाजों या बुकियों के संपर्क में हो सकते हैं। विदेशी नेटवर्क के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा एप और वेबसाइट के लिंक भारत में सक्रिय लोगों तक पहुंचाए जाने की आशंका की जांच की जा रही है।

    मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सामान्य जुआ संबंधी प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं। संगठित तरीके से सट्टा संचालन की आशंका को देखते हुए पुलिस डिजिटल लेनदेन, मोबाइल डेटा और आरोपियों के आपसी संपर्कों की भी जांच कर रही है।

    नाना पटवारी की भूमिका को लेकर पुलिस ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों के अनुसार उनका नाम जांच में सामने आने के बाद उनकी भूमिका और कथित संपर्कों की विस्तृत जांच की जा रही है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का जोर इस बात का पता लगाने पर है कि स्थानीय स्तर पर संचालित नेटवर्क का विदेशी सट्टेबाजों से किस तरह संपर्क था और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इसका संचालन कैसे किया जा रहा था।

    जांच के आगे बढ़ने के साथ पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा संभावित आर्थिक लेनदेन के जरिए पूरे नेटवर्क की संरचना समझने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।